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प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के बारे में पूरी जानकारी

Last updated: नवम्बर 11, 2017 | by दीपेश 27 Comments

प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (Pradhan Mantri Jeevan Jyoti Bima Yojana, PMJJBY) एक जीवन बीमा योजना है| किसी भी जीवन बीमा पालिसी की तरह पालिसीधारक की मृत्यु होने पर नामांकित व्यक्ति को राशि दी जाती है| एलआईसी की वेबसाइट पर जानकारी अनुसार अभी तक 3 करोड़ से ज्यादा लोग इस योजना के तहत बीमा ले चुके हैं|

ध्यान से यह एक टर्म लाइफ इंश्योरेंस पालिसी है और इसमें कोई निवेश घटक नहीं है|

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत कितना बीमा मिलता है?

आपको 2 लाख रुपये का जीवन बीमा मिलता है| आपको जीवन बीमा 55 वर्ष की आयु तक ही मिलता है|

प्रीमियम कितना देना होता है?

आपको सालाना 330 रुपये का प्रीमियम अदा करना होता है|

कौन इस योजना के तहत बीमा ले सकता है?

PMJJBY 18 से 50 साल की आयु तक के बचत बैंक खाते धारकों (savings bank account holders) के लिए उपलब्ध है| इसका मतलब पहली बार पालिसी लेते समय आपकी आयु 50 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए|

ध्यान दें जीवन बीमा सिर्फ 55 वर्ष तक की आयु तक ही मिलता है| 55 वर्ष की आयु के बाद इस योजना के तहत बीमा नहीं मिलता| इसका मतलब 55 का होने पर पालिसी खत्म हो जाती है|

पालिसी 1 जून से 31 मई (अगले वर्ष) तक चलती है|

इस योजना में शामिल होने के लिए आपको स्वीकृति देनी होगी और इसके बाद हर साल प्रीमियम आपके बैंक खाते से अपने आप कट (auto-debit) जाएगा|

अगर आपका joint अकाउंट है, तो खाते के सभी धारक तभी इस योजना में शामिल हो सकते हैं| पर हाँ, आपको योग्यता मानदंडों को पूरा करना होगा (18 से 50 वर्ष की आयु) और प्रीमियम का भुगतान करना होगा|

ध्यान दें बीमा मिलने से पहले कोई मेडिकल टेस्ट इत्यादि नहीं होता| तो कोई भी यह बीमा ले सकता है|

आप प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत केवल एक ही पालिसी ले सकते हैं| ऐसा नहीं है की आपके पास दो बचत खाते हों और आप दोनों के साथ यह बीमा ले लें| केवल 2 लाख रुपये का बीमा ही ले सकते हैं|

अगर पालिसी के नवीनीकरण के समय आपके खाते में पर्याप्त पैसे नहीं है, तब भी आपका पालिसी कवरेज अपने आप खत्म हो जायेगी|

एक बात का और ध्यान दें| पहली बार पालिसी लेने के 45 दिन तक जीवन बीमा नहीं मिलता| इसका मतलब पहले 45 दिनों में मृत्यु होने पर कुछ नहीं मिलेगा| परन्तु यह नियम किसी एक्सीडेंट में हुई मृत्यु पर लागू नहीं होगा| एक्सीडेंट में हुई मृत्यु पहले दिन से ही कवर होगी|

यदि आप किसी वजह इस योजना से बाहर हो गए थे, तो आप वार्षिक प्रीमियम का भुगतान करके इस योजनामें फिर से शामिल हो सकते हैं।

प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के लिए कैसे आवेदन करें?

PMJJBY को एलआईसी और अन्य भारतीय निजी जीवन बीमा कंपनियों के माध्यम से प्रशासित किया जाता है। पर आपको आवेदन अपने बैंक में जा कर करना होगा|

अपनी बैंक शाखा में जा कर आप आवेदन कर सकते हैं| आवेदन पत्र आपको वहीँ पर मिल जाएगा या फिर आप इस लिंक (http://www.jansuraksha.gov.in/files/pmjjby/English/applicationform.pdf) से भी डाउनलोडकर सकते हैं|

प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत क्लेम (खाताधारक की मृत्यु के समय) कैसे करें?

  1. जिस बैंक के बचत खाते से आप इस योजना में शामिल हुए थे, उस शाखा में जा कर नामांकित व्यक्ति को क्लेम फॉर्म (claim form) और सदस्य के मौत प्रमाण पत्र (death certificate) जमा करना होगा|
  2. क्लेम फॉर्म आपको बैंक शाखा, वेबसाइट या इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट पर मिल जाएगा| आप SBI का claim फॉर्म (https://www.sbilife.co.in/pmjjby-claim-form) यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं|
  3. साथ ही आपको डिस्चार्ज रिसीप्ट (discharge receipt) भी जमा करनी होगी| क्लेम फॉर्म के साथ ही मिलेगी|
  4. इसके अलावा नॉमिनी को एक रद्द चेक (cancelled cheque) भी जमा करना होगा| यह उस खाते का होगा जहाँ पर इंश्योरेंस कंपनी आपके क्लेम का पैसा जमा करेगी|

बैंक जांच के बाद आपके फॉर्म और दस्तावेजों को इंश्योरेंस कंपनी को भेज देता है| उसके बाद इंश्योरेंस कंपनी भी आपके क्लेम के जांच करती है और सब कुछ सही होने पर 30 दिनों के अन्दर पैसा नॉमिनी के अकाउंट में भेज देती है|

आप इस योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए http://www.jansuraksha.gov.in/ पर जा सकते हैं| साथ ही आप टोल फ्री नंबर 1800 180 1111 पर कॉल भी कर सकते हैं|

Filed Under: Life Insurance Tagged With: pmjjby, pmjjby claim form, pmjjby form, pmjjby in hindi, pmjjby sbi, प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (Senior Citizens Savings Scheme) के बारे में पूरी जानकारी

Last updated: अप्रैल 16, 2018 | by दीपेश 2 Comments

इस पोस्ट में, हम वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (सीनियर सिटीजन्स सेविंग स्कीम या SCSS) की समीक्षा करेंगे|

जब हम नौकरी कर रहे होते हैं, हमें महीने के अंत में वेतन मिलता है और इसे हम अपने खर्चो को पूरा करने के लिए  इस्तेमाल करते है।

एक बार जब हम रिटायर होते हैं, तो यह प्रकिया बंद हो जाती है ।प्रत्येक महीने के अंत में कोई वेतन नहीं मिलता है। हालांकि वेतन बंद हो गया है, खर्च बंद नहीं होते है। इसलिए, आप सेवानिवृत्ति के बाद भी आपको नियमित आय की आवश्यकता होती है।

अच्छी बात है अगर आपको रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलती है| परन्तु अगर नहीं मिलती है या फिर पेंशन पर्याप्त नहीं है, तो अतिरिक्त नियमित आय की आवश्यकता हो सकती है|

अब रिटायरमेंट के दौरान नियमित आय अर्जित करने का काफी सारे तरीके हैं|

इस पोस्ट में, हम वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम या SCSS) की समीक्षा करेंगे| यह एक ऐसा बचत उत्पाद है जिसे विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाया गया है। हम पात्रता मानदंड, परिपक्वता, जमा की सीमा, ब्याज दरों और कर उपचार पर चर्चा करेंगे। हम इस बात पर भी चर्चा करेंगे कि बाज़ार में उपलब्ध अन्य आय उत्पादों के ख़िलाफ़।

पढ़ें: कैसे कर सकते हैं अपने पीपीएफ खाते का इस्तेमाल पेंशन के लिए?

पढ़ें: प्रधान मंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) के बारे में पूरी जानकारी

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (Senior Citizens Savings Scheme) (SCSS in Hindi)

सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम: पात्रता (Eligibility)

केवल 60 या अधिक आयु वाले व्यक्ति ही इस खाते को खोल सकते है।

सेवानिवृत्त होने या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (voluntary retirement) के लिए चुनने वाले कुछ शर्तों के अधीन 60 वर्ष से कम आयु में भी खाता खोल सकते हैं।

ऐसे लोग 55 वर्ष की आयु के बाद इस योजना के तहत निवेश कर सकते हैं| परन्तु ऐसी स्तिथि आपको रिटायर होने के एक महीने के अन्दर ही ऐसा अकाउंट खोलना होगा|

सेवानिवृत्त रक्षा कर्मियों (नागरिक रक्षा कर्मचारियों को छोड़कर) उम्र सीमा के बावजूद इस योजना में निवेश कर सकते हैं।

अनिवासी भारतीय (एनआरआई) और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) SCSS नहीं खोल सकते।

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) के तहत खाता कहाँ खोले?

आप किसी भी पोस्ट ऑफिस, पब्लिक सेक्टर बैंकों और चुनिंदा निजी क्षेत्र के बैंकों में इस खाते को खोल सकते हैं।

परिपक्वता: (सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम खाता कब मेच्योर होता है?)

परिपक्वता अवधि 5 वर्ष है। 5 साल के अंत में खाते को और तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है| ध्यान दें की आप अपने अकाउंट की अवधि को केवल एक बार ही बढ़ा सकते हैं|

तो अधिकतम 8 साल तक आप अपने खाते को चला सकते हैं|

NRI अपने SCSS खाते की अवधि को नहीं बढ़ा सकते।

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) की ब्याज दर क्या है?

अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी के पहले दिन पर ब्याज का भुगतान त्रैमासिक रूप से किया जाता है। Quarterly Interest Payment

ब्याज दर निश्चित नहीं है और वित्त मंत्रालय द्वारा हर तिमाही (every quarter) को अधिसूचित किया जाता है। ब्याज की वर्तमान दर 8.3% p.a. है (नवम्बर 8, 2017 को)| ध्यान दें यह ब्याज दर हर तीन महीने पर बदल सकती है|

सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम  की नवीनतम  ब्याज दर (latest interest rate) जानने के लिए आप इस पोस्ट पर जा सकते हैं|

खाता (deposit) खोलते समय जो ब्याज की दर है, वही ब्याज दर आपको पूरे पांच साल मिलेगी| खाता खोलने के बाद अगर SCSS की ब्याज दर बदली जाती है, तो आप पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा| अगर आप कोई नया खाता खोलते हैं, तो आप पर फर्क पड़ेगा|

उदाहरण के लिए, यदि आप एससीएसएस के तहत एक deposit खोलते हैं और मौजूदा ब्याज दर 8.3% p.a. है, तो आपको पूरे पांच साल 8.3% p.a. ही मिलेगा। इस निवेश की अवधि में भले ही सरकार भविष्य में SCSS पर ब्याज दर बदल दे, तो आप फिर भी पूरे अवधि के दौरान 8.3% अर्जित करेंगे।

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम) में अधिकतम निवेश (Maximum Investment Limit)

आप इस योजना के तहत deposit खोलते हैं, बैंक फिक्स्ड डिपाजिट की तरह|

इसका मतलब यह कोई सेविंग्स बैंक खाता नहीं है, जिसमें आप जब चाहें पैसे जमा कर सकते हैं|

अब आप खाते (deposit) कितने भी खोल सकते हैं|

जैसे की पहले 2 लाख का एक SCSS deposit खोल लिया| उसके बाद एक लाख का एक और खोल लिया|

आप कितने भी खाते खोले जा सकते है लेकिन सभी खातों में कुल मिलाकर 15 लाख रुपये से अधिक जमा नहीं कर सकते।

आप individual और joint दोनों तरह के खाते खोल सकते हैं|

Joint (संयुक्त) अकाउंट केवल अपने पति या पत्नी के साथ ही खोल सकते हैं|

Joint अकाउंट में प्रथम आवेदक (first holder) की आयु को पात्रता (eligibility) के लिए माना जाता है| एक संयुक्त खाते के मामले में, दूसरे आवेदक की उम्र पर कोई प्रतिबंध नहीं है

एक बात और, निवेश सीमा के आंकलन के लिए एक संयुक्त खाते की पूरी राशि को पहले धारक का माना जाता है।

यदि आप वरिष्ठ नागरिक बचत योजना के लिए अधिकतम राशि का योगदान करना चाहते हैं, तो आप निम्न में से कोई भी कर सकते हैं:

आप और आपके पति/पत्नी प्रत्येक खाते में 15 लाख रुपये के साथ व्यक्तिगत खाते खोल सकते हैं।

आप दो संयुक्त खाते खोल सकते हैं। आप एक खाते में पहले धारक हो सकते हैं, जबकि पति/पत्नी दूसरे खाते में पहली धारक हो सकते है। प्रत्येक खाते में 15 लाख रुपये जमा करें।

इस तरह, आप परिवार के लिए एससीएसएस में 30 लाख रुपये जमा / निवेश कर सकते हैं।

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) में निवेश करने पर टैक्स बेनिफिट

इस योजना में  निवेश करने पर धारा 80 सी (Section 80C) के तहत  टैक्स बेनिफिट मिलता है|

अर्जित ब्याज कर योग्य है। Interest is taxable.

यदि वित्तीय वर्ष के लिए ब्याज 10,000 रुपए से अधिक है तो Tax deduction at source or TDS काटा जाएगा। टीडीएस की दर 10% है| अगर आपने PAN जमा नहीं किया है, तो 20% TDS काटा जाएगा|

ध्यान दें:

यदि कोई टीडीएस कटौती नहीं हुई है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको ब्याज पर कोई टैक्स देने की ज़रुरत नहीं है। आपको अपनी आयकर रिटर्न में पूरी ब्याज आय शामिल करनी होगी और यदि आवश्यक हो, तो आयकर का भुगतान करने की आवश्यकता है।

साथ ही , अगर टीडीएस काट लिया गया है, परन्तु आप उच्च टैक्स ब्रैकेट में आते हैं,  तो आपको अतिरिक्त कर का भुगतान करना पड़ सकता है|

उदाहरण के लिए, यदि आप 20,000 रुपये का ब्याज कमाते हैं, तो 2,000 रुपये का टीडीएस काट लिया जाएगा। हालांकि, यदि आप 30% ब्रैकेट में आते हैं, तो आपकी टैक्स लायबिलिटी 6,000 रुपये होगी। अपनी आयकर रिटर्न दाखिल करते समय आपको शेष 4,000 रुपये का भुगतान करना होगा।

फॉर्म 15 जी / फॉर्म 15 एच (Form 15G/15H) जमा करके आप TDS से बच सकते हैं लेकिन

स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) से बचने के लिए, आप डाकघर / बैंक के साथ फॉर्म 15 G/ 15 H जमा कर सकते हैं।

60 साल से कम आयु के निवेशक फॉर्म 15 जी (Form 15G) जमा कर सकते हैं|

60 साल से अधिक आयु के निवेश फॉर्म 15 एच (Form 15H) जमा कर सकते हैं|।

परन्तु कर कोई यह फॉर्म जमा नहीं कर सकता| कुछ नियम है|

आप फॉर्म 15G तभी जमा कर  सकते हैं यदि आपका वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित आय कर (estimated tax liability) शून्य है और आपकी कुल ब्याज आय न्यूनतम कर छूट सीमा (2.5 लाख रुपये) से कम है। कृपया ध्यान दें दोनों शर्तों पूरी होनी चाहिए|

आप फॉर्म 15H जमा करने की लिए  आपका वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित आयकर शून्य होना चाहिए| और हाँ, आयु 60 वर्ष से अधिक होनी चाहिए|

बस एक बात, फॉर्म 15G/15H जमा करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें की आप इसके पात्र (eligible) हैं| बिना पात्रता के जमा करने पर  आयकर कानून की धारा 277 के तहत जुर्माना या कारावास को दावत दे सकती है।

पढ़ें: फिक्स्ड डिपाजिट पर TDS कैसे बचाएँ?

कर लाभ को अधिकतम कैसे करें?

चूंकि आपको एससीएसएस में निवेश करने के लिए टैक्स बेनिफिट मिलता है, इसलिए आप अधिकतम आय कर लाभ पाने के लिए एससीएसएस में अपने निवेश को कुछ वर्षों के ऊपर बांट सकते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि आप SCSS में 7.5 लाख रुपये का निवेश करना चाहते हैं तो अधिकतम कर लाभ पाने के लिए आप हर साल 1.5 लाख रुपये निवेश कर सकते हैं।

ध्यान दे मैं ऐसा नहीं कह रहा हूँ की आपको ऐसा करना चाहिए|

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) से समयपूर्व निकासी / क्लोजर (Premature closure)

SCSS खाते को समयपूर्व बंद (पांच साल से पहले) पर पेनल्टी देनी होती है|

एक वर्ष पूरा होने से पहले आप SCSS deposit बंद नहीं कर सकते|

1 वर्ष के बाद बंद करने पर जमा राशि के 1.5% के जुर्माना देना होगा।

2 वर्षों के बाद, दंड की रकम जमा राशि का 1% हो जाती है।

आंशिक निकासी (partial withdrawal) की अनुमति नहीं है, इसलिए आपको पूरा खाता ही बंद करना होगा (अगर आपको समय से पहले पैसे निकालने हैं)|

जैसे की मैंने ऊपर चर्चा करी है, की आप कई SCSS अकाउंट खोल सकते हैं| एक अकाउंट को समयपूर्व बंद करने से दूसरे अकाउंट पर कोई फर्क नहीं पड़ता|

कृपया ध्यान दें कि एससीएसएस खाते के समय से पहले बंद होने के मामले में धारा 80 C का तहत लिए गए टैक्स बेनिफिट को उलट दिया जाएगा।

विस्तार (Extension) के मामले में, निवेशक बिना किसी दंड के एक वर्ष के बाद किसी भी समय खाते को बंद कर सकता है।

एससीएसएस नियमों के उल्लंघन में खाते का संचालन

यदि यह पाया गया कि खाता एससीएसएस खाते के नियमों के उल्लंघन में खोला गया है (जैसे खाते में 15 लाख रुपये से अधिक निवेश), तो खाता तुरंत बंद कर दिया जाएगा।

जो पहले ब्याज का भुगतान किया गया है,  उसे जमा राशि में से काट लिया जाएगा| बची हुई राशि निवेशक वापस कर दी जाएगी।

मेरे अनुसार वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक अच्छा उत्पाद है। आपको ब्याज भी अच्छा मिलता है और धारा 80 सी के तहत टैक्स बेनिफिट भी प्रदान करता है। आप धारा 80 सी के तहत अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए अपने निवेश को अलग-अलग वर्षों में डाल सकते हैं।

पर हाँ, आपको ब्याज पर टैक्स देना होगा|

हालांकि, आप केवल SCSS खाते में अधिकतम 15 लाख रुपये जमा कर सकते हैं (30 लाख रुपये अगर आपके पति/पत्नी भी अधिकतम राशि का योगदान करते है)| इसका मतलब इस स्कीम से मिलने वाली आय की सीमा है|

इसलिए, आपको रिटायरमेंट के दौरान नियमित आय बनाने के लिए, एससीएसएस के साथ अन्य आय उत्पादों का उपयोग करना पड़ सकता है।

Source:www.PersonalFinancePlan.in

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एलआईसी जीवन उमंग (प्लान 845) के बारे में पूरी जानकारी (LIC Jeevan Umang)

Last updated: अक्टूबर 10, 2018 | by दीपेश 10 Comments

एलआईसी जीवन उमंग एक नॉन-लिंक्ड लाभ सहित आजीवन बीमा योजना है| LIC Jeevan Umang is a non-linked participating whole life insurance plan.

आपको 100 वर्ष की आयु तक जीवन बीमा मिलता है| पालिसी मेच्योर भी 100 वर्ष के आयु पर ही होती है| मतलब 100 वर्ष का होने पर आपको इस पालिसी से पैसे मिलेंगे|

आइए एलआईसी जीवन उमंग के बारे में और जानते हैं और यह देखते हैं की क्या आपको ऐसे प्लान में निवेश करना चाहिए|

एलआईसी जीवन उमंग (प्लान 845) के बारे में पूरी जानकारी

पॉलिसी परिपक्वता (Policy Maturity): 100 साल की उम्र में

पॉलिसी अवधि (Policy Term): 100 वर्ष – आपके प्रवेश आयु (यदि आप प्रवेश की आयु 35 है, तो आपको अगले 65 वर्षों के लिए कवर मिलेगा)

प्रीमियम भुगतान अवधि (Premium Payment Term) : 15/20/25/30 साल (इतने वर्षों तक प्रीमियम का भुगतान करना होगा)

प्रवेश में न्यूनतम आयु (Minimum Entry Age): 90 दिन

अधिकतम प्रवेश आयु (Maximum Entry Age)

15 वर्ष प्रीमियम भुगतान अवधि के लिए 55 वर्ष

20 वर्ष प्रीमियम भुगतान अवधि के लिए 50 वर्ष

25 साल प्रीमियम भुगतान अवधि के लिए 45 साल

30 साल प्रीमियम भुगतान अवधि के लिए 40 साल

न्यूनतम बीमित रकम (Minimum Sum Assured): 2 लाख रुपये

अधिकतम बीमित राशि (Maximum Sum Assured): कोई सीमा नहीं

पालिसी से लोन: 3 वर्ष बाद

पालिसी के बारें में अधिक जानकारी के लिए एलआईसी वेबसाइट पर जा कर पढ़ सकते हैं|

पढ़ें: कैसे लें अपनी LIC पालिसी से लोन?

एलआईसी जीवन उमंग: पॉलिसी के लाभ (LIC Jeevan Umang: Benefits)

मृत्यु लाभ (Death Benefit)

जोखिम शुरू होने से पहले मृत्यु होने पर (Death before Commencement of Risk) 

दिया गया प्रीमियम लौटा दिया जाएगा|

जोखिम शुरू होने से उपरांत मृत्यु होने पर (Death after Commencement of Risk)
मृत्यु पर बीमित राशि + साधारण प्रत्यावर्ती बोनस (हर साल घोषित) + अंतिम अतिरिक्त बोनस (मृत्यु के वर्ष में लागू)

Sum Assured on death + Vested Simple Reversionary Bonus (announced every year but paid at the time of maturity)+ Final Additional Bonus

विभिन्न प्रकार के बोनस के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप यहाँ पढ़ सकते हैं|

पढ़ें: एलआईसी जीवन आनंद के बारे में पूरी जानकारी

जोखिम कब शुरू होता है?

अगर प्रवेश के समय उम्र 8 साल से कम है, तो कवर 2 साल बाद शुरू होगा या फिर 8 साल का होने पर (जो भी पहले होगा)

यदि प्रवेश के समय आयु 8 वर्ष या उससे अधिक है, तो जोखिम कवर तुरंत शुरू होगा |

परिपक्वता लाभ (Maturity/Survival Benefit) 

आपको 100 वर्ष की आयु (या मृत्यु, जो भी पहले हो) तक प्रीमियम भुगतान अवधि पूरा होने के बाद प्रति वर्ष बीमित राशि का 8% मिलेगा| Once premium payment term ends, you will get 8% of Sum Assured every year till your demise or age of 100 years, which ever is earlier.

परिपक्वता पर (100 वर्ष की आयु में) आपको क्या मिलेगा ?

आधार बीमित राशि + साधारण प्रत्यावर्ती बोनस (हर साल घोषित) + अंतिम अतिरिक्त बोनस (परिपक्वता के वर्ष में लागू)
Sum Assured + Vested Simple Reversionary Bonus (announced every year but paid at the time of maturity)+ Final Additional Bonus

साधारण  प्रत्यावर्ती बोनस के बारे में कुछ अलग है? Simple Reversionary Bonus is a bit different
प्रत्यावर्ती बोनस के बारे में, भले ही इन बोनस की घोषणा हर साल की जाती है, आप परिपक्वता के समय ही  इन बोनस को प्राप्त करते हैं।

इसलिए, अगर आपकी पॉलिसी के लिए 50,000 रुपये का बोनस घोषित किया गया है, लेकिन आपको यह 50,000 साल पालिसी मेच्योरिटी के समय ही मिलते हैं| जाहिर है, मुद्रास्फीति के कारण 50,000 रुपये का मूल्य बहुत कम होगा।

पॉलिसी के शब्दों में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है की प्रीमियम भुगतान अवधि समाप्त होने के बाद के बाद मुनाफे की भागीदारी के लिए शर्तें भिन्न रूप में और भिन्न पैमाने पर हो सकती हैं| इसका मतलब की जो बोनस आपको प्रीमियम भुगतान अवधि से पहले और बाद में मिलेगा, उसमें काफी अंतर हो सकता है|

एलआईसी जीवन उमंग एक नई योजना है| इसीलिए आपको कितना बोनस मिलेगा, इस बात पर टिप्पणी करना मुश्किल होगा|

पढ़ें: LIC Jeevan Shanti (एलआईसी जीवन शांति): LIC का नया सिंगल प्रीमियम पेंशन प्लान

 

एलआईसी जीवन उमंग: रिटर्न कैसे हैं?

एलआईसी जीवन उमांग एक लाभ सहित (participating) योजना है| इसलिए रिटर्न इस योजना के लिए कंपनी द्वारा घोषित बोनस पर निर्भर करता है और ये बोनस बीमा कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

चलिए कुछ बातों को मान कर (assumption) रिटर्न निकलने की कोशिश करते हैं|

आपसे पहले ही कह दूं की मुझे उम्मीद है (पता है) कि रिटर्न काफी कम होगा| सभी पारंपरिक जीवन बीमा योजनाओं में रिटर्न कम ही होता है।

मान लीजिए कि 30 वर्षीय व्यक्ति एलआईसी जीवन उमंग को 10 लाख रुपये के जीवन बीमा के लिए खरीदता है।

योजना के लिए वार्षिक प्रीमियम 32,030 रुपये (टैक्स से पहले) होगा। मैं करों के प्रभाव पर विचार नहीं करुगा I यह एक हद तक, प्रीमियम छूट (premium rebate) को रद्द कर देगा|

मैंने साधारण प्रत्यावर्ती बोनस और अंतिम अतिरिक्त बोनस के लिए काफी उदार मूल्यों को माना है। मैंने एलआईसी की अन्य समान योजनाओं के लिए बोनस पर विचार किया है और अन्य ऑनलाइन स्रोतों से डेटा को जमा किया है। ध्यान दें यह मेरे assumption हैं|

LIC Jeevan Umang Review hindi एलआईसी जीवन उमंग

आप देख सकते हैं की प्रीमियम भुगतान अवधि समाप्त होने के बाद आपको हर वर्ष 80,000 रुपये मिल रहे हैं| साथ ही 100 वर्ष का होने पर पूरा मेच्योरिटी बेनिफिट भी मिल रहा है|

यह सब होने के बाद भी रिटर्न 5.43% p.a. मिल रहा है|

मेरे अनुसार आप टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्लान (term life insurance plan) और पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) के  साथ बेहतर कर सकते थे।

पढ़ें: किस प्रकार का जीवन बीमा लें?

क्या हैं एलआईसी जीवन उमंग में परेशानियां?

1. एलआईसी जीवन उमंग एक पारंपरिक योजना है। इसलिए, एलआईसी जीवन उमंग में एक पारंपरिक जीवन बीमा योजना वाली सभी समस्याएं भी मौजूद हैं।
2. कम जीवन बीमा और खराब रिटर्न|
3. आपको 100 वर्ष की आयु तक जीवन कवर की आवश्यकता नहीं है। यह अनावश्यक रूप से लागत बढाता है|
4. भारत में विरासत (inheritance) पर कोई भी कर नहीं लगाया जाता है। तो इस कारण भी इस पालिसी को लेने की कोई ज़रुरत नहीं है|
5.आप स्वयं तो इस प्लान का ज्यादा फायदा नहीं उठा पायेंगे| पूरे फायदे के लिए आपका 100 साल आपको 100 साल तक जीवित रहना होगा। परिपक्वता लाभ पाने के लिए आपको 100 वर्ष की आयु तक जीवित रहने की आवश्यकता है। हम में से कितने 100 साल की उम्र तक रह पायेंगे?

मेरी राय में, आप एलआईसी जीवन उमंग से बच सकते हैं।
शायद, बहुत विशिष्ट मामलों में इसका उपयोग होता है लेकिन मुझे ऐसा कुछ समझ नहीं आ रहा|

ध्यान दें समस्या एलआईसी में नहीं है| परेशानी इस प्लान में है| ध्यान दें निजी बीमा कंपनी भी ऐसे प्लान लाती हैं| उन प्लान से भी बचना चाहिए|

अगर आपको पोस्ट उपयोगी लगी हो, तो अपने परिवार और मित्रों के साथ अवश्य शेयर करें|

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एलआईसी के दूसरे प्लान के बारे में जानकारी

एलआईसी जीवन शांति (LIC Jeevan Shanti): LIC का नया सिंगल प्रीमियम पेंशन प्लान

एलआईसी न्यू जीवन आनंद (LIC New Jeevan Anand)

एलआईसी जीवन उत्कर्ष (LIC Jeevan Utkarsh)

एलआईसी ई-टर्म प्लान (LIC e-Term plan)

अन्य उपयोगी पोस्ट या लिंक

5 मिनिट में लिंक करें अपने आधार कार्ड को अपनी एलआईसी पालिसी से

LIC प्रीमियम कैलकुलेटर

कौन से हैं बेस्ट टर्म इंश्योरेंस प्लान (Best Term Insurance Plan)

किस प्रकार का जीवन बीमा लेना चाहिए?

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY)

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY)

आपका जीवन बिमा का क्लेम (Life Insurance claim) रिजेक्ट नहीं होगा अगर आपकी पालिसी 3 साल पुरानी है

Filed Under: LIC, Life Insurance Tagged With: lic jeevan anand, lic jeevan umang hindi, LIC Jeevan Utkarsh, एलआईसी जीवन उमंग पूरी जानकारी

PPF vs ELSS: टैक्स बचाने के लिए आप पीपीएफ में निवेश करेंगे या ELSS में?

Last updated: नवम्बर 11, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

टैक्स सेविंग सीजन (Tax-saving season) आने वाला है| इस दौरान ईएलएसएस बनाम पीपीएफ (ELSS vs PPF) चर्चा का एक बहुत ही लोकप्रिय विषय है।

कुछ लोग पीपीएफ को बेहतर मानते हैं, तो कुछ ELSS को|

आप किस में निवेश करना पसंद करते हैं? पीपीएफ में या ELSS में या किसी में भी नहीं?

सच बताऊँ तो मुझे यह सवाल काफी अजीब  और कुछ स्तर पर गलत लगता है| अगर देखें तो पीपीएफ (PPF) और ईएलएसएस (ELSS) में कोई भी समानता नहीं है|

ईएलएसएस एक इक्विटी उत्पाद है जबकि पीपीएफ एक ऋण उत्पाद है। ELSS is an equity investment whereas PPF is a debt investment.

पीपीएफ के साथ रिटर्न की गारंटी होती है, ईएलएसएस (ELSS) के साथ ऐसी कोई गारंटी नहीं है|

ईएलएसएस(ELSS) निवेश में 3 साल का लॉक-इन है जबकि पीपीएफ 15 वर्षों में परिपक्व होगा |

केवल एक समानता है की दोनों में निवेश करने पर  आयकर अधिनियम की धारा 80 सी (Section 80C) के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है|

एक तरह से, लोगों को ईएलएसएस और पीपीएफ के बीच इस दुविधा का सामना करना पड़ता है क्योंकि दोनों में निवेश करने पर समान टैक्स बेनिफिट  देते हैं।

अगर दोनों उत्पादों के पास एक जैसे टैक्स बेनिफिट नहीं होते, तो शायद ऐसी दुविधा भी कभी नहीं होती|

इस पोस्ट में, मैं ईएलएसएस और पीपीएफ के बीच एक तुलना करूँगा| साथ ही इस बात पर चर्चा करूंगा की आपको इस सवाल के बारे में कैसे सोचना चाहिए|

इक्विटी लिंक्ड बचत योजना Equity Linked Savings Scheme (ELSS)

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) को आमतौर पर टैक्स-सेविंग इक्विटी म्यूचुअल फंड के रूप में जाना जाता है|

  1. ELSS एक प्रकार का इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड है|
  2. ELSS और अन्य इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में बस इतना अंतर है की ELSS में निवेश करने पर आपको टैक्स बेनिफिट मिलता है और ELSS में 3 वर्ष का lock-in होता है|
  3. तीन साल का लॉक-इन है | ईएलएसएस फण्ड में हर निवेश तीन साल के लॉक-इन के अधीन है, इसलिए आप 3 साल से पहले अपना पैसा नहीं निकाल सकते।
  4. ईएलएसएस में निवेश करने पर इनकम टैक्स की धारा 80 सी (Section 80C) के तहत 1.5 लाख तक का टैक्स बेनिफिट मिलता है।
  5. प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ELSS में निवेश की मात्रा पर कोई सीमा नहीं है। आप कितना भी निवेश कर सकते हैं| परन्तु टैक्स बेनिफिट .5 लाख रुपये प्रति वर्ष तक ही सीमित रहेगा।
  6. इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड 1 वर्ष से पहले बेचने पर होने वाले मुनाफे को Short Term Capital Gain माना जाता है और उस मुनाफे पर आपको 15% टैक्स देना होता है|  ELSS आप तीन साल से पहले कुछ बेच ही नहीं सकते| इसीलिए short term capital gain की तो कोई संभावना ही नहीं है|
  7. इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड 1 वर्ष के बाद  बेचने पर होने वाले मुनाफे को Long Term Capital Gain माना जाता है| FY2019 से ऐसे मुनाफे पर आपको 10% टैक्स देना होगा| ELSS पर भी यही नियम लागू होगा| जब आप ELSS यूनिट्स बेचेंगे, तब आपको मुनाफे पर 10% टैक्स देना होगा| म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर लगने वाले टैक्स की अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|
  8. इक्विटी म्यूचुअल फंड से डिविडेंड (dividend) पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता| परन्तु आपको dividend देने से पहले म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी 10% टैक्स (Dividend Distribution Tax) काट लेती है|
  9. यदि आप SIP के माध्यम से ईएलएसएस में निवेश कर रहे हैं, तो SIP की हर किश्त तीन साल को लॉक हो जाएगी।  15 जनवरी 2016 को किस्त के माध्यम से खरीदी गई यूनिट्स 16 जनवरी 2019 को या उसके बाद  बेचीं जा सकती हैं। 15 फरवरी 2016 को खरीदी गई यूनिट्स 16 फरवरी, 2019 से बेची जा सकती हैं।
  10. रिटर्न शेयर बाजार से जुड़ा हुआ है और इसकी गारंटी नहीं है।
  11.  Non-resident Indians (NRI) भी ELSS में निवेश कर सकते हैं।

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर कितना अक्स देना पड़ता है?

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ)

मैंने अपने कई पोस्ट  में पीपीएफ के बारे में बात की है। इसलिए, मैं इस पोस्ट में विस्तार से पीपीएफ को कवर नहीं करूँगा। आप नीचे दी गयी पोस्ट के माध्यम से पीपीएफ के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं|

पढ़ें: PPF खाते के बारे  में पूरी जानकारी

पढ़ें: PPF खाते से कैसे लें लोन और किन बातों का रखें ध्यान

पढ़ें: PPF खाता मेच्योर होने पर क्या हैं आपके विकल्प?

पढ़ें: क्या आपको अपने बच्चों के लिए पीपीएफ अकाउंट खोलना चाहिए?

पढ़ें: अब कर सकते हैं 5 साल बाद अपना पीपीएफ खाता बंद

पढ़ें: पीपीएफ में कैसे होती है ब्याज की गणना?

पीपीएफ के बारे में कुछ ख़ास बातें

  1. पीपीएफ खाता 15 साल बाद मेच्योर होता है।
  2. परन्तु पीपीएफ निवेश के लिए लॉक-इन अवधि हर साल कम होती जाती है। मतलब की 15 साल पहले निवेश से गिने जाते हैं| हर निवेश 15 साल के लिए लॉक नहीं होता| इसके विपरीत, ईएलएसएस में हर निवेश तीन साल के ताजा लॉक-इन के अधीन होता है|
  3. इसका मतलब पीपीएफ में पहला निवेश 15 साल को लॉक रहेगा जबकि दसवें साल में किया गया निवेश केवल 5 साल ही लॉक-in में रहेगा| ELSS में हर निवेश को एक सामान 3 वर्ष के लॉक-इन का सामना करना पड़ता है|
  4. 15 साल की प्रारंभिक परिपक्वता के बाद, आप 5 वर्षों के ब्लॉक में पीपीएफ खाते का विस्तार कर सकते हैं।
  5. तीसरे वर्ष से आपके पीपीएफ खाते से आप लोन ले सकते हैं। सातवें वर्ष से आंशिक निकासी (partial withdrawal) की अनुमति है|
  6. कुछ परिस्थितियों में आप अपने खाते को 5 साल के बाद भी बंद कर सकते हैं| परन्तु ऐसा करने पर आपको एक पेनल्टी देनी होगी|
  7. आप एक वित्तीय वर्ष में अपने पीपीएफ खाते में (और पीपीएफ खातों में जहां आप अभिभावक या guardian हैं) अधिकतम 1.5 लाख रुपये  में डाल सकते हैं। अतिरिक्त राशि पर ब्याज नहीं मिलेगा|
  8. 1.5 लाख रुपये  तक के निवेश पर  सेक्शन 80 C के तहत टैक्स लाभ मिलता है|
  9. रिटर्न तय नहीं  हैं | हर तिमाही (quarter) के लिए ब्याज दर वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अधिसूचित है|
  10. NRI पीपीएफ में निवेश नहीं कर सकते|

पीपीएफ या ईएलएसएस (PPF vs ELSS): किस में करें निवेश?

PPF vs ELSS vs PPF hindi पीपीएफ ईएलएसएस में अंतर

पहले आप को अपने वित्तीय लक्ष्यों (financial goals) के बारे में सोचना चाहिए और उसके बाद फैसला लेना चाहिए| केवल टैक्स सेविंग के बारें में न सोचें|

पीपीएफ और ईएलएसएस के बारे में सोचने से पहले, जांच करें कि आपके पास पर्याप्त जीवन बीमा है या नहीं। यदि आपके पास पर्याप्त जीवन बीमा नहीं है, तो एक टर्म प्लान खरीदें| उसके बाद निवेश के बारे में सोचे| जीवन बीमा खरीदने पर भी टैक्स बेनिफिट मिलता है|

पीपीएफ और ELSS दोनों ही लम्बे समय के निवेश (long term investment) के लिए है| तो अगर आप कम समय के लिए निवेश कर रहे है, तो आप किसी में भी निवेश न करें|

जब आप पहली बार अपना खाता खोलते हैं तो पीपीएफ एक दीर्घकालिक निवेश है | हालांकि, जब आप परिपक्वता के करीब जाते हैं, तो इसका इस्तेमाल अल्पावधि निवेश (short term investment) के रूप में भी किया जा सकता है। परन्तु आपको देखना होगा की आपको ऐसा करने की ज़रुरत है या नहीं|

अपने asset allocation पर ध्यान दें| अगर आप इक्विटी में ज्यादा निवेश कर रहे हैं, तो आप PPF (जो की एक डेब्ट निवेश है) में निवेश कर सकते हैं| अगर आप डेब्ट में ज्यादा कर रहे हैं, तो आप ELSS पर विचार कर सकते हैं| आपको एक संतुलन बना कर चलना चाहिए|

ईएलएसएस(ELSS) भी एक दीर्घकालिक निवेश (long term investment) होता है। लॉक-इन अवधि से अपने आपको आप को ग़लत तरीके से गुमराह न होने दें। भले ही ईएलएसएस निवेश को 3 साल की लॉक-इन अवधि के बाद बेचा जा सकता है, परन्तु आपको ईएलएसएस में तभी निवेश करना चाहिए, जब की आपका निवेश क्षितिज (investment horizon) कम से कम 10 साल है।

यदि सेक्शन 80C की 1.5 लाख की लिमिट ईपीएफ (EPF) आवंटन, जीवन बीमा और होम लोन के भुगतान से पूरी हो चुकी है, तो ईएलएसएस (ELSS) में निवेश करने की कोई जरूरत नहीं है। आप किसी भी इक्विटी फण्ड में निवेश कर सकते हैं|

ध्यान दे ELSS और एक किसी सामान्य इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में केवल यही अंतर है की ELSS में निवेश करने पर आपको टैक्स बेनिफिट मिलता है| इसीलिए अगर आपके टैक्स बेनिफिट की लिमिट पूरी हो गयी है, तो ईएलएसएस में निवेश करने की कोई ज़रूरत नहीं है।

ध्यान दें पीपीएफ अभी भी एक विचार के योग्य है (भले ही 80 C निवेश की लिमिट पहले से पूरी हो गयी हो)| पीपीएफ एक ऋण उत्पाद के लिए अच्छे रिटर्न प्रदान करता है और 15 साल की प्रारंभिक परिपक्वता अवधि समाप्त हो जाने के बाद बहुत अधिक लचीलापन (flexibility) देता है। साथ ही आप एक साल में 1.5 लाख से ज्यादा जमा नहीं कर सकते| तो अगर आप अपने PPF के बैलेंस को बढ़ाना चाहते हैं, तो आप 1.5 लाख के टैक्स बेनिफिट की लिमिट पूरी होने के बाद भी PPF निवेश कर सकते हैं|

मेरे अनुसार आपको आपको अपने पूरे पोर्टफोलियो को देखना चाहिए| साथ की यह भी देखना चाहिए की आप किस लिए निवेश कर रहे है और आपकी सेक्शन 80C की लिमिट पूरा करने के लिए कितने रुपये की ज़रुरत है|

अपने asset allocation पर भी ध्यान दे| उसके बाद ही कोई निर्णय लें| आप चाहें तो दोनों में भी निवेश कर सकते हैं|  

पर हाँ, यदि आप ईएलएसएस में निवेश कर रहे हैं, तो अपने ईएलएसएस फंड में निवेश करने के लिए वित्तीय वर्ष के अंत तक इंतजार न करें। पहले से शुरू करें| एसआईपी (SIP) के माध्यम से पूरे साल नियमित रूप से निवेश करें| पीपीएफ में भी साल की शुरुआत में निवेश करने पर ज्यादा ब्याज मिलेगा|

व्यक्तिगत तौर पर में PPF में निवेश करता हूँ| ELSS में नहीं करता| इक्विटी में निवेश के लिए में सामान्य इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करता हूँ|

आप कहां निवेश करने की योजना बना रहे हैं? पीपीएफ या ईएलएसएस या दोनों में या किसी में नहीं?

पढ़ें: FY2018-2019 में इनकम टैक्स बचाने के 35 तरीके

Source: PersonalFinancePlan.in

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एनपीएस (NPS) के बारे में कुछ ग़लतफ़हमियाँ

Last updated: जुलाई 13, 2019 | by दीपेश 106 Comments

एनपीएस (NPS) ने कई निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि इसमें कुछ विशेष कर लाभ हैं।

एनपीएस एक  नया उत्पाद है और साथ ही इसके नियम भी आये दिन बदलते रहते हैं| इसीलिए निवेशकों (या फिर वह लोग जो निवेश करने की सोच रहे हैं) को एनपीएस के बारे मैं कुछ भ्रम (doubts) होना स्वाभाविक है|

पढ़ें: कैसे खोले एनपीएस अकाउंट ऑनलाइन आधार की सहायता से?

इस पोस्ट में मैं एनपीएस (NPS) के कुछ ऐसे पहलुयों पर चर्चा करूँगा, जहाँ पर शायद काफी लोगों को ग़लतफ़हमियाँ हैं|

#1 एनपीएस पेंशन प्रदान करता है ।

एनपीएस केवल धन जमा करने में मदद करता है । सेवानिवृत्ति के समय, आप बीमा कंपनी से वार्षिकी योजना (annuity plan या एक पेंशन योजना) खरीदने के लिए जमा धन का उपयोग करते हैं। आपका एनपीएस फंड प्रबंधक (fund manager) आपको वार्षिकी आय प्रदान करने में कोई भूमिका नहीं अदा करता है।

आपकी पेंशन बीमा कंपनी द्वारा भुगतान की जाएगी।

इसलिए, एनपीएस में निवेश होने वाला पैसा एनपीएस फंड मैनेजर को जाता है। फण्ड मैनेजर अपने विवेक के अनुसार धन को निवेश करता है। एनपीएस में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। 

आपके रिटायर होने तक आपका पैसा जमा होता है। सेवानिवृत्ति के समय, आपको बीमा कंपनी से जमा राशि के कम से कम 40% तक की एक वार्षिकी योजना खरीदनी होगी। शेष राशि को एक बार में या फिर 70 साल की आयु तक 10 वार्षिक किश्तों (up to 10) में निकाला जा सकता हैं|

पढ़ें: एनपीएस से पैसे निकालते समय कितना टैक्स देना पड़ता है

#2 एनपीएस के टीयर -2 खाते में निवेश पर टैक्स बेनिफिट मिलता है।

सभी कर लाभ, वार्षिकी प्रतिबंध, निकास और निकासी नियम एनपीएस टियर -1 खाते पर ही लागू होते हैं। एनपीएस टियर -2 खाता एक ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड की तरह है। आप किसी भी समय पैसे निकाल सकते हैं। कर लाभ केवल टीयर -1 एनपीएस खाते में निवेश के लिए है।

All the restrictions and Tax benefits only for Tier-I NPS. No restriction and tax benefit for NPSTier-2 account.

एनपीएस टियर 2 खाते में निवेश करने पर केंद्रीय सरकार के कर्मचारी (Central Government Employee) सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं| शर्त यह है की आप इस पैसे को 3 वर्ष से पहले नहीं निकाल पायेंगे (lock-in period of 3 years)| ध्यान दें  यह टैक्स बेनिफिट केवल Central Government Employees ही ले सकते हैं| किसी अन्य व्यक्ति को यह टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा|

पढ़ें: क्या आपको टियर 2 एनपीएस अकाउंट में निवेश करना चाहिए?

पढ़ें: एनपीएस के लिए संशोधित निकास और निकासी नियम NPS Withdrawal Rules (अंग्रजी)

#3 धारा 80 सीसीडी (1) के तहत एनपीएस में 1.5 लाख रुपये तक के निवेश के लिए कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं

हाँ, आप 1.5 लाख रुपये तक का कर लाभ ले सकते हैं| लेकिन यहाँ पर एक और पाबंधी है।

किसी कर्मचारी के मामले में, यह लाभ 10% वेतन (बेसिक + महंगाई भत्ता) तक सीमित है। यदि आप स्वयंरोजगार हैं (self-employed), तो यह कटौती आपके कुल आय का 10% है ।

इसलिए, यदि आपका वेतन (बेसिक + डीए) 4 लाख रुपये है, धारा 80 सीसीडी (1) के तहत अधिकतम कर लाभ 40,000 रुपये प्रति वित्तीय वर्ष तक सीमित है।

ध्यान दें, आप धारा 80 CCD(1B) के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट अभी भी ले सकते हैं। इसलिए, इस उदाहरण में एनपीएस (खुद किया गया निवेश, own contribution) में निवेश के लिए टैक्सबेनिफिट लाभ आपके मामले में 90,000 रुपये प्रति वित्तीय वर्ष तक सीमित होगा।

ध्यान दें सेक्शन 80CCD(1) के तहत जो टैक्स लाभ है, वह धारा सेक्शन 80C के तहत जो 1.5 लाख रूपये तक का टैक्स बेनिफिट मिलता है, उसी के अंतर्गत आता है| सेक्शन 80CCD (1B) के तहत पचास हज़ार रुपये (50,000) तक का टैक्स बेनिफिट इसके अतिरिक्त है|

#4 नियोक्ता(एम्प्लॉयर) द्वारा आपके एनपीएस खाते में कोई भी योगदान कर से छूट है।

यह सच नहीं है। यहाँ भी एक सीमा है|

एम्प्लॉयर द्वारा योगदान पर टैक्स बेनिफिट भी आपके 10% वेतन (बेसिक + महंगाई भत्ता) तक सीमित है| केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिए यह सीमा 14% है|

यह टैक्स बेनिफिट आपको धारा 80 सीसीडी (2) के तहत मिलता है|

ध्यान दें कि इस कर कटौती पर कोई अपर कैप (राशि के मामले में) नहीं है। यह कटौती धारा 80 सी के तहतदी गई 1.5 लाख की सीमा के अतिरिक्त है। हालांकि, यह लाभ कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है । स्व-नियोजित(self-employed) इस कटौती का लाभ नहीं उठा सकता है।

जिस उदाहरण पर हमने ऊपर चर्चा की  थी, उसी को जारी रखते हैं| आपको एम्प्लोएर द्वारा एक वित्तीय वर्ष में 40,000 रुपये तक के योगदान पर कर से छूट होगी।

इसलिए, कुल छूट अंशदान निम्नानुसार है:

1 धारा 80 सीसीडी (1) के तहत 40,000 रुपये तक । अपना योगदान। (Own Contribution)

2 धारा 80 सीसीडी (1 B) के तहत 50,000 रुपये तक की राशि । अपना योगदान । (Own Contribution)

3 धारा 80 सीसीडी (2) के तहत 40,000 रुपये तक नियोक्ता योगदान (employer contribution)

इसलिए, इस मामले में, वित्तीय वर्ष में एनपीएस निवेश के लिए कुल कर लाभ 1.3 लाख रुपये तक सीमित होगा।

ध्यान दें, इन निवेशों के बाद भी, आपको धारा 80 सी के तहत कर लाभ के लिए 1.1 लाख रुपये तक का निवेश करने का विकल्प है (पीपीएफ, ईएलएसएस आदि जैसे उत्पादों में)।

जैसा की मैंने ऊपर लिखा है, सेक्शन 80CCD(1) और सेक्शन 80C के तहत आप कुल मिला कर 1.5 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

धारा 80 सीसीडी (1 बी) और धारा 80 सीसीडी (2) के तहत टैक्स बेनिफिट, धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये के तहत बेनिफिट में शामिल नहीं होता|

तो मान मिये आप 1.5 लाख रुपये PPF में भी निवेश कर देते हैं|

परन्तु अतिरिक्त लाभ आपको केवल 1.1 लाख रुपये का ही मिलेगा| क्योंकि आप पहले की 40,000 रुपये का बेनिफिट NPS में निवेश के लिए सेक्शन 80CCD(1) के तहत ले चुके हैं|

ऐसा करके आप कुल मिला कर 2.4 लाख रुपये का टैक्स बेनिफिट ले पाएंगे|

पढ़ें: एनपीएस (NPS) में निवेश करने के टैक्स बेनिफिट

#5 आपका संपूर्ण पैसा इक्विटी (equity) में निवेश किया जाता है

यह भी सच नहीं है । सरकारी क्षेत्र के ग्राहकों के लिए इक्विटी निवेश की सीमा 15% है। अन्य ग्राहकों (सभी नागरिकों के मॉडल, All Citizens model) के लिए, इक्विटी निवेश की सीमा 50%-75% है। आप चाहें तो इक्विटी में कम भी निवेश कर सकते हैं|

#6 एनपीएस में कितना ब्याज (interest) मिलता है?

NPS में आप जो पैसा निवेश करते हैं, वह समझ लिए विभिन्न प्रकार के म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश हो जात है| अब जो रिटर्न वहां मिलेगा, वहीँ रिटर्न आपको मिलेगा| NPS में कोई रिटर्न की गारंटी नहीं है| और न ही NPS मं कुछ ब्याज मिलता है|

ये आम संदेह थे जो मेरे सामने आए हैं। यदि आपके पास एनपीएस के बारे में कोई अन्य संदेह है, तो आप अपना सवाल कमेंट सेक्शन में पूछ सकते हैं|

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एनपीएस टियर 2 अकाउंट की पूरी जानकारी और क्या आपको निवेश करना चाहिए?

Last updated: जुलाई 13, 2019 | by दीपेश 2 Comments

पिछले कुछ वर्षों में एनपीएस को  धारा 80 CCD (1B) के तहत 50,000 रुपये के विशेष कर लाभ की वजह से कई नए निवेशकों को आकर्षित किया है।

क्या आप जानते हैं कि यह टैक्स बेनिफिट केवल एनपीएस टियर 1 खाते तक ही सीमित हैं? टियर एनपीएस अकाउंट में निवेश के बारे में क्या?

हालांकि एनपीएस टियर 2 ज्यादा आकर्षित नहीं करता है क्योंकि निवेश पर कोई कर लाभ नहीं है, फिर भी यह एक निवेश विकल्प प्रस्तुत करता है।

इस पोस्ट में, एनपीएस टियर 2 के बारें में चर्चा करूँगा| एनपीएस टियर 2 में निवेश पर क्या कोई टैक्स बेनिफिट मिलता है? पैसा निकालने पर कितना टैक्स देना होगा? साथ ही, अगर एनपीएस टियर 2 अकाउंट में निवेश करने पर विचार कर रहे है, तो आपको किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

इन सभी बातों पर चर्चा करेंगे और देखेंगे की क्या आपको एनपीएस tier 2 अकाउंट में निवेश करना चाहिए|

क्या मैं एनपीएस टियर 1 खाते को खोले बिना एक टीयर 2 एनपीएस खाता खोल सकता हूँ?

Can I open NPS Tier-2 account without opening NPS Tier-I account?

आप केवल टियर-2 एनपीएस अकाउंट (NPS Tier-2 account) नहीं खोल सकते।

टियर -2 एनपीएस अकाउंट (NPS Tier-2 account) सिर्फ NPS Tier-I अकाउंट के साथ ही खोला जा सकताहै|

पढ़ें: कैसे खोले एनपीएस अकाउंट ऑनलाइन आधार की सहायता से?

एनपीएस टियर 2 खाते के नियम

एनपीएस टियर-2 के खाते से निकासी पर कोई प्रतिबंध नहीं है। जब भी आप चाहते हैं आप अपने निवेश को बेच कर अपना पैसा निकाल सकते हैं।

ध्यान दें एनपीएस Tier-I खाते में पैसे निकालने पर बहुत सारी पाबंधियाँ हैं| समझ लिए आपका पैसा 60 वर्ष की आयु तक अटक जाता है|

एनपीएस टियर 2 (NPS Tier-2 account) में ऐसा कोई  प्रतिबन्ध नहीं है|

पढ़ें: एनपीएस के लिए संशोधित निकास और निकासी नियम NPS Withdrawal Rules (अंग्रजी)

एनपीएस टियर 2 अकाउंट में निवेश पर टैक्स बेनिफिट (Tax Benefit for investing in NPS Tier-2 account)

एनपीएस के टियर–2 खाते में निवेश पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं है। No tax benefit for investing in NPS Tier-2 account.

एनपीएस टियर 2 खाते में निवेश करने पर केंद्रीय कर्मचारी (Central Government Employee) सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं| शर्त यह है की आप इस पैसे को 3 वर्ष से पहले नहीं निकाल पायेंगे (lock-in period of 3 years)| ध्यान दें  यह टैक्स बेनिफिट केवल Central Government Employees ही ले सकते हैं| किसी अन्य व्यक्ति को यह टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा|

सेक्शन 80C में PPF, ELSS, EPF, GPF, लाइफ इंश्योरेंस इत्यादि निवेश भी आते हैं| कुल मिलाकर 1.5 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

सेक्शन 80CCD के टैक्स बेनिफिट केवल tier 1 अकाउंट में निवेश करने के लिए हैं| Tax Benefit is only for investment in NPS Tier 1 account.

पढ़ें: एनपीएस (NPS) में निवेश करने के टैक्स बेनिफिट

एनपीएस टियर 2 खाता से पैसा निकालने पर कितना टैक्स देना होता है?

इस मामले पर बेहतर स्पष्टता की प्रतीक्षा करनी होगी । 3 संभावित उपचार हो सकते हैं :-

#1 टीयर-1 एनपीएस के समान टैक्स ट्रीटमेंट देना चाहिए| (मेरे अनुसार ऐसा नहीं होगा)

टीयर 1 एनपीएस से पैसा निकालने पर जमा राशि का 40% पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता|

ध्यान दें कि आप सेवानिवृत्ति के समय जमा धन का 60% तक एकमुश्त राशि वापस ले सकते हैं। हालांकि, केवल 40% टैक्स से मुक्त है।

पढ़ें: एनपीएस से पैसे निकालते समय कितना टैक्स देना पड़ता है

आप यह तर्क दे सकते हैं कि एनपीएस टियर 2 को भी सामान टैक्स बर्ताव मिलना चाहिए|

परन्तु जहाँ Income Tax Act में एनपीएस टियर 1 से पैसा निकालते समय टैक्स छूट का विवरण है, वहां पर लिखा है की यह उसी निवेश को मिलेगा जहाँ Section 80CCD के तहत निवेश पर लाभ मिला है| और यह लाभ केवल NPS टियर 1 खाते में निवेश पर मिलता है|

अब एनपीएस टियर 2 में निवेश करने पर तो कोई लाभ है नहीं|

इसीलिए मेरे अनुसार टियर 2 अकाउंट से पैसा निकालना पर NPS टियर 1 खाते जैसा टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा|

#2 कैपिटल गेन्स उपचार मिलना चाहिए (capital gains टैक्स ट्रीटमेंट)

आप कह सकते हैं की एनपीएस टियर-2 एक ओपन म्यूचुअल फंड की तरह है I इसलिए, एक समान टैक्स ट्रीटमेंट  मिलना चाहिए।

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर कितना अक्स देना पड़ता है?

एनपीएस टियर 2 की इक्विटी स्कीम (E) को इक्विटी फंड (equity mutual fund) के सामान टैक्स ट्रीटमेंट  प्राप्त होना चाहिए। सरकारी बॉन्ड (G) या कॉरपोरेट बॉन्ड स्कीम (C)  पर debt म्यूचुअल फंड की तरह कर लगाया जाना चाहिए।

या फिर पूरे निवेश को debt म्यूच्यूअल फण्ड जैसा ट्रीटमेंट मिलना चाहिए|

हालांकि, ऐसा होने के लिए, एनपीएस टियर-2 निवेश को धारा 2 के तहत capital asset माना जाना चाहिए। मुझे यकीन नहीं है कि ऐसा है।

इसीलिए मेरे अनुसार यह विकल्प भी लागू नहीं है| अगर यह विकल्प लागू होता, तो काफी अच्छा होता NPS tier 2 निवेशकों के लिए|

#3 अपनी टैक्स स्लैब (tax slab) के अनुसार आपको मुनाफे पर टैक्स देना होगा

अब जो भी आपको आपके निवेश पर मुनाफा हुआ है, उस पर अपनी टैक्स स्लैब (10%, 20%, 30%) के अनुसार टैक्स देना होगा|

समझ लिए आपने 1 लाख रुपये निवेश किया और 5 साल बाद वेह बढ़ कर 1.5 लाख रुपये हो गया, ऐसे में आपको 50,000 के मुनाफे पर अपनी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स होगा|

अगर म्यूच्यूअल फण्ड के सामान बर्ताव होता (दूसरा विकल्प), तो काफी कम टैक्स देना होता|

अब यह तीसरा विकल्प आपके लिए काफी महंगा साबित हो सकता है|

कौन सा टैक्स ट्रीटमेंट विकल्प लागू होगा?

मुझे नहीं पता। विकल्प 1 निश्चित रूप से तस्वीर से बाहर है।

विकल्प विकल्प 2 और 3 के बीच होना चाहिए।

जब तक सरकार कुछ स्पष्टता नहीं देती, मेरे अनुसार तीसरा विकल्प होना चाहिए|

क्या आपको टीयर -2 एनपीएस में निवेश करना चाहिए?

मेरे अनुसार नहीं करना चाहिए|

पहले तो आपको टियर 2 खाते मैं निवेश करने पर कोई अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट नहीं मिलते|

दूसरा, एनपीएस टियर -2 से निकासी पर टैक्स कैसे लगाया जाए, इस बारे में ज्यादा स्पष्टता नहीं है। शायद, बेहतर स्पष्टता अगले कुछ वर्षों में आ जाएगी। आप विकल्प 3 देख सकते हैं, बड़ी परेशानी का कारण हो सकता है।

साथ ही आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश तो कर की सकते हैं| वहां पर आपको यह भी पता है, टैक्स ट्रीटमेंट क्या होगा|

तो ऐसे म्यूच्यूअल फण्ड (मतलब की NPS Tier II) में निवेश क्यों करें, जहाँ कोई स्पष्टता नहीं है|

तो, ऐसी कोई ज़रुरत या फायदा नहीं दिखता, एनपीएस टियर 2 अकाउंट में निवेश करने का|

अभी के लिए टियर -2 एनपीएस से दूर रहें ।

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