• Skip to primary navigation
  • Skip to main content
  • Skip to primary sidebar

HindiFinance.com

आपका पर्सनल फाइनेंस ब्लॉग आसान हिंदी में




  • Life Insurance
  • Mutual Funds
  • Financial Planning
  • NPS
  • PPF
  • Tax Planning
  • Aadhaar
  • LIC
  • Loans

Mutual Funds

Follow @hindifinance

यूलिप (ULIP) और म्यूच्यूअल फण्ड (Mutual Fund) में क्या अंतर है?

by दीपेश Leave a Comment

शेयर बाज़ार में निवेश करने के लिए म्यूच्यूअल फण्ड (mutual fund) और यूलिप (ULIP) बहुत ही लोकप्रिय माध्यम हैं|

क्या आप जानते हैं की म्यूच्यूअल फण्ड और ULIP के होते हैं?

क्या आप म्यूच्यूअल फण्ड और यूलिप के अंतर जानते हैं?

आपको म्यूच्यूअल फण्ड या यूलिप में किस में निवेश करना चाहिए?

इस पोस्ट में इन सवालों के जवाब समझने की कोशिश करेंगे|

पहले संक्षिप्त में यह जानते हैं की म्यूच्यूअल फण्ड और यूलिप (ULIP or Unit Linked Insurance Plan)| उसके बाद म्यूच्यूअल फंड और यूलिप के बीच के अंतर पर चर्चा करेंगे|


म्यूच्यूअल फण्ड क्या होता है? What is a mutual fund?

जब आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करते हैं, तो आप अपने पैसे को एक अनुभवी निवेशक (फण्ड मेनेजर) को सौंपते है| वह फण्ड मेनेजर आपके पैसे को निवेश करता है| उस निवेश पर जो रिटर्न मिला, वह आपका|

म्यूच्यूअल फण्ड अनेक प्रकार के होते हैं, जैसे की इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड, डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड, hybrid म्यूच्यूअल फण्ड, गोल्ड म्यूच्यूअल फण्ड इत्यादि|

आप अपनी ज़रुरत के अनुसार म्यूच्यूअल फण्ड का चुनाव कर सकते हैं| म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में विस्तार से जानने के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|


यूलिप प्लान क्या होता हैं? What is a ULIP in Hindi?

यूलिप आपको investment और insurance दोनों का लाभ देता है|

आपके निवेश का कुछ हिस्सा आपको insurance प्रदान करने की ओर जाता है| बचा हुआ हिस्सा निवेश हो जाता है| हर यूलिप में आपके पास निवेश करने के लिए कई फण्ड के विकल्प होते हैं| आप अपनी ज़रुरत के अनुसार चुनाव कर सकते हैं|

यूलिप प्रमुख तौर पर दो प्रकार के होते हैं:

  1. Type-I यूलिप: धारक की मृत्यु की स्तिथि में बीमा राशि और निवेश के मूल्य (फण्ड वैल्यू) में हो राशि अधिक है, वह राशि मिलती है|
  2. Type-II यूलिप: धारक की मृत्यु की स्तिथि में बीमा राशि और फण्ड वैल्यू दोनों मिलती है|

अगर आप यह जानना चाहते हैं की यूलिप कैसे काम करते हैं, तो इस पोस्ट को पढ़ें|

आईये अब देखते हैं की म्यूच्यूअल फण्ड और यूलिप में क्या अंतर है|


#1 म्यूच्यूअल फण्ड vs. यूलिप: टैक्स बेनिफिट (Mutual Funds vs. ULIP: Tax Benefit)

यूलिप में निवेश करने पर आप Section 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

सभी म्यूच्यूअल फण्ड में आपको यह टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता| केवल इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS म्यूच्यूअल फण्ड) में निवेश करने पर ही Section 80C के तहत आपको टैक्स बेनिफिट मिलता है| किसी अन्य म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कर पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा|

विजेता: मेरे अनुसार यहाँ पर कोई स्पष्ट विजेता नहीं है|


#2 यूलिप vs. म्यूच्यूअल फण्ड: टैक्स ट्रीटमेंट (Mutual Funds vs. ULIP: Tax Treatment)

यूलिप से पैसे निकालने पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता| No Tax on maturity or surrender proceeds from ULIPs

म्यूच्यूअल फण्ड में टैक्स दो बातों पर निर्भर करता है

  1. आपने किस प्रकार का म्यूच्यूअल फण्ड खरीदा है (Type of mutual fund)
  2. आपका निवेश कितना पुराना है (holding period)

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड को एक वर्ष से पहले बेचने पर आपको मुनाफे पर 15% टैक्स देना होता है| एक वर्ष के बाद बेचने पर आपको मुनाफे पर 10% प्रतिशत टैक्स देना होगा|

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड को तीन वर्ष से पहले बेचने पर आपको अपनी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ता है| तीन बर्ष के बाद बेचने पर आपको मुनाफे पर इंडेक्सेशन के बाद 20 प्रतिशत टैक्स (20% after indexation) देना होगा|

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स बजट 2018 यूलिप

म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर लगने वाले टैक्स के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं|

विजेता: यूलिप (ULIP)


#3 यूलिप vs. म्यूच्यूअल फण्ड: पोर्टफोलियो rebalancing (Mutual Funds vs. ULIP: Portfolio Rebalancing)

कोई भी फाइनेंसियल advisor आपको समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो को rebalance करने का सुझाव देगा| Rebalancing का मतलब है किसी एक प्रकार के फण्ड को बेचकर दूसरे प्रकार के फण्ड में निवेश करना|

ऐसा आप अपने पोर्टफोलियो में Asset Allocation बनाए रखने के लिए कर सकते हैं|

यूलिप में ऐसा करने के लिए आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा| यूलिप के एक फण्ड से दूसरे फण्ड में पैसा शिफ्ट करने पर कोई टैक्स नहीं देना होता|

परन्तु म्यूच्यूअल फण्ड में ऐसा नहीं है| एक म्यूच्यूअल फण्ड से दुसरे म्यूच्यूअल फण्ड में स्विच करना का मतलब है, पहले फण्ड को बेचा और दूसरा म्यूच्यूअल फण्ड खरीदा| ऐसा करने पर आपको टैक्स देना पड़ेगा|

विजेता: यूलिप (ULIP)


#4 म्यूच्यूअल फण्ड vs. यूलिप: पैसा निकालने में आसानी  (Mutual Funds vs. ULIP: Liquidity)

यूलिप में आप पांच वर्ष पूरे होने से पहले अपने पैसे नहीं निकाल सकते| यहाँ तक की, अगर आप प्लान को सरेंडर भी कर देते हैं, तब भी आप अपने पैसे पांच वर्ष पूरे होने से पहले नहीं निकाल सकते|

म्यूच्यूअल फण्ड में ऐसा कोई प्रतिबन्ध नहीं है| बस टैक्स सेविंग म्यूच्यूअल फण्ड (ELSS या ईएलएसएस) में आप 3 वर्ष पूरा होने से पहले पैसे नहीं निकाल सकते|

किसी भी अन्य म्यूच्यूअल फण्ड में आप जब चाहें अपने पैसे निकाल सकते हैं| कुछ इक्विटी म्यूच्यूअल फंड में एक वर्ष से पहले पैसे निकालने पर आपको थोड़ी से पेनल्टी (exit load) देनी पड़ सकती है| परन्तु पैसा निकालने पर कोई पाबंधी नहीं है|

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में तो कुछ पेनल्टी भी नहीं देनी होती|

विजेता: म्यूच्यूअल फण्ड


#5 म्यूच्यूअल फण्ड vs. यूलिप: शुल्क (Mutual Funds vs. ULIP: Charges)

म्यूच्यूअल फण्ड में शुल्कों को एक ही संख्या में बताया जाता है, जिसे expense ratio कहते हैं| इसमें फण्ड मैनेजमेंट चार्ज, कमीशन इत्यादि| सभी कुछ इसी के अन्दर होता है|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में एक्सपेंस रेश्यो 1% से 2.5% प्रतिशत के बीच में होता है| डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में यह ratio कम होता है|

म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान में expense ratio कम होता है|

ध्यान दें, अगर सभी कुछ एक समान है, तो कम शुल्क का मतलब है बेहतर रिटर्न|

यूलिप में विभिन्न प्रकार के चार्ज होते हैं|

  1. Policy Administration Charge (पालिसी एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज)
  2. Premium Allocation Charge (प्रीमियम एलोकेशन चार्ज)
  3. Mortality Charge (मोर्टेलिटी चार्ज) (यह आपको जीवन बीमा प्रदान करने के लिए लिया जाता है
  4. Fund Management Charge (फण्ड मैनेजमेंट चार्ज) (यह आपके पैसे को निवेश करने की ज़िम्मेदारी के लिए लिया जाता है)

पर एक परेशानी यह है की सभी यूलिप में सभी प्रकार के चार्ज नहीं होते| शुल्कों का स्तर भी हर यूलिप में अलग हो सकता है| जैसे की बजाज एलियांज Goal Assure यूलिप में पालिसी एडमिनिस्ट्रेशन या प्रीमियम एलोकेशन चार्ज नहीं है|

विजेता: कोई स्पष्ट विजेता नहीं है| मेरे अनुसार म्यूच्यूअल फण्ड बेहतर है|


#6 म्यूच्यूअल फण्ड vs. यूलिप: रिटर्न  (Mutual Funds vs. ULIP: Returns)

किसमें रिटर्न बेहतर मिलेंगे, इस बात की कोई गारंटी नहीं है|

म्यूच्यूअल फण्ड में आपको टैक्स ज्यादा देना पड़ सकता है|

परन्तु यूलिप में आपको अधिक शुल्क देने पड़ सकते हैं| क्योंकि यूलिप में जीवन बीमा भी मिलता है, इसलिए लिए भी मोर्टेलिटी charges कटते हैं| इन शुल्कों का आपके रिटर्न पर काफी प्रभाव पड़ सकता है|

एक अहम् बात: म्यूच्यूअल फण्ड में जो NAV आपको दखता है, वही आपका रिटर्न है| ऐसी इसलिए क्योंकि NAV निकालते समय सारे चार्ज एडजस्ट कर लिए जाते हैं|

परन्तु यूलिप में कुछ चार्ज आपके NAV में एडजस्ट नहीं होते| कुछ चार्ज जैसे की मोर्टेलिटी चार्ज आपकी फण्ड की यूनिट्स को cancel करके recover किया जाता है| इसका मतलब यूलिप फण्ड का NAV आपके रिटर्न का सही अंदेशा नहीं देते|

विजेता: कोई स्पष्ट विजेता नहीं है| कोई प्रमाण नहीं है की म्यूच्यूअल फण्ड के फण्ड मेनेजर ULIP फण्ड में मेनेजर से बेहतर रिटर्न दे सकते हैं| परन्तु अगर आपके यूलिप में अत्यधिक चार्ज हैं, तो आपके रिटर्न पर काफी असर पड़ सकता है| मेरे अनुसार म्यूच्यूअल फण्ड थोड़ा बेहतर है|


#7 म्यूच्यूअल फण्ड vs. यूलिप: निवेश करने में आसानी (Mutual Funds vs. ULIP: Flexibility)

अगर आपका यूलिप फण्ड बुरे रिटर्न दे रहा है, तो आप कुछ नहीं कर सकते| बहुत से बहुत, उसी यूलिप के दूसरे फण्ड में स्विच (switch) कर सकते हैं| आप अपना पैसा कहीं और नहीं ले कर जा सकते| अगर आपको किसी और यूलिप में पैसा ले कर जाना है, तब आपको अपना प्लान सरेंडर करना होगा|

म्यूच्यूअल फण्ड में ऐसा कोई प्रतिबन्ध नहीं है| अगर आपका म्यूच्यूअल फण्ड अच्छे रिटर्न नहीं दे रहा है, तब आसानी से आप अपने म्यूच्यूअल फण्ड को बेच कर दूसरे म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कर सकते हैं|

साथ ही, अगर आप ULIP में अपने प्रीमियम से  अधिक निवेश करना चाहते हैं (top–up premium), तब आपको अपनी बीमा राशि भी बढानी होगी| अधिक बीमा राशि का मतलब अधिक mortality charges| यह आपके यूलिप के रिटर्न को प्रभावित कर सकता है| म्यूच्यूअल फण्ड में ऐसी कोई पाबंधी नहीं है|

अगर आपको एइअस लगता है की आपको अब जीवन बीमा की ज़रुरत नहीं है, तो आप अपने यूलिप से बीमा को नहीं हठा सकते| अगर आपने टर्म इंश्योरेंस प्लान लिया होता, तो आप प्रीमियम देना बंद करने पर प्लान अपने आप खत्म हो जाता|

विजेता: म्यूच्यूअल फण्डयूलिप म्यूच्यूअल फण्ड के बीच अंतर

 


यूलिप में बारे में कुछ अन्य बातें (परेशानियां)

  1. यूलिप में आपको प्रीमियम और बीमा राशि लिंक होते हैं| अमूमन आपका वार्षिक प्रीमियम आपकी बीमा राशि (Sum Assured) का 10% होता है| यहाँ पर आपकी प्रीमियम चुकाने के क्षमता से आपकी जीवा बीमा राशि प्रभावित हो सकती है| मान लिए अगर आप एक वर्ष में 50,000 रुपये निवेश कर सकते हैं, तब आप यूलिप में 5 लाख रुपये से अधिक का जीवन बीमा नहीं ले पायेंगे| टर्म इंश्योरेंस प्लान में ऐसी कोई पाबंधी नहीं है|
  2. यूलिप से मिलने वाली राशि तभी कर-मुक्त है जब की आपकी बीमा राशि (Sum Assured) आपके वार्षिक प्रीमियम का कम से कम 10 गुना हो| अगर आपकी आयु ज्यादा है या फिर आप सिंगल प्रीमियम ULIP खरीद रहे हैं, तब शायद ऐसा न हो| अगर आप यूलिप लेने की सोच रहे हैं, तब इस बात का अवश्य ख़याल रखें|
  3. यूलिप आपको जीवन बीमा भी देता है| परन्तु आपके निवेश का जो हिस्सा आपको जीवन बीमा दिलाने (mortality charges) की ओर जाता है, वह एक टर्म इंश्योरेंस प्लान के प्रीमियम के मुकाबले काफी ज्यादा होता है| इसका मतलब की टर्म इंश्योरेंस प्लान में उतना ही बीमा आपको कम कीमत में मिलता है| इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ सकते हैं|

म्यूच्यूअल फण्ड या यूलिप: किसमें निवेश करें?

स्पष्ट जवाब देना बहुत मुश्किल है| हमनें देखा की कुछ मामलों में म्यूच्यूअल फण्ड बेहतर हैं और कुछ मामलों में यूलिप (ULIP) बेहतर हैं|

बहुत कुछ आप पर निर्भर करता है|

यूलिप में निवेश और जीवन बीमा दोनों के लाभ मिलता हैं| म्यूच्यूअल फण्ड में केवल निवेश का लाभ है| यहाँ पर आपको टर्म इंश्योरेंस प्लान अलग से खरीदना पड़ेगा|

कुछ निवेशकों के लिए यूलिप को समझना आसान है| प्रीमियम देने पर आपके निवेश और जीवन बीमा दोनों की चिंता खत्म| ऐसे निवेशक यूलिप में निवेश कर सकते हैं| अगर आप यूलिप में निवेश करना चाहते हैं, तो ऐसे यूलिप का चुनाव करें जिसमें शुल्क कम हों| अधिक शुल्क आपके रिटर्न को प्रभावित कर सकते हैं| आपको सोच समझ कर अपने लिए बेस्ट यूलिप प्लान का चुनाव करना होगा|

अगर आपको जीवन बीमा नहीं चाहिए, तब तो आपको यूलिप में निवेश करना ही नहीं चाहिए| क्योंकि जब आपको जीवन बीमा चाहिए ही नहीं, तब तक जीवन बीमा की लिए खर्चा क्यों उठाना चाहेंगे| इसलिए बुजुर्गों के लिए यूलिप एक बहुत ही बेकार विकल्प है|

मुझे म्यूच्यूअल फण्ड बेहतर लगते हैं| यह मेरी निजी राय है| मैं जानता हूँ की टैक्स ज्यादा है, परन्तु flexibility (लचीलापन) और liquidity (पैसा निकालने में आसानी) म्यूच्यूअल फण्ड में ज्यादा है|

अगर जीवन बीमा की ज़रुरत है, तो मैं टर्म इंशोयरेंस प्लान लेना पसंद करूंगा|

आप कहाँ निवेश करेंगे: म्यूच्यूअल फण्ड में या यूलिप में?

Filed Under: Financial Planning, Life Insurance, Mutual Funds Tagged With: best ulip plan in hindi, ulip plan in hindi, ULIP vs. mutual funds, बेस्ट यूलिप प्लान, यूलिप और म्यूच्यूअल फण्ड के बीच अंतर

नियमित आय के लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के dividend पर भरोसा न करें?

Last updated: जून 26, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

पिछले कुछ समय में काफी निवेशकों में नियमित आय (regular) के लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के डिविडेंड विकल्प (Dividend option of Equity Mutual Fund Scheme) में निवेश करना शुरू किया है|

हर म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम में निवेश के दो विकल्प होते हैं: Growth और Dividend

Dividend विकल्प के तहत आपको समय-समय पर dividend मिलता है| Growth विकल्प में कोई dividend नहीं मिलता| इन विकल्पों के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं|

मेरे अनुसार नियमित आय के लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के dividend option में निवेश करना एक बुरा विकल्प है| आपको इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के dividend विकल्प में निवेश नहीं करना चाहिए|

इस पोस्ट में मैं कारणों पर चर्चा करूंगा|

#1 Dividend मिलने की कोई गारंटी नहीं होती

नियमों के अनुसार dividend केवल मुनाफे में ही दिया जा सकता है| तो अगर शेयर बाज़ार गिर रहा है, तो हो सकता है की फण्ड मेनेजर के पास dividend देने के लिए मुनाफा ही ना हों| इसलिए आप dividend पर भरोसा नहीं कर सकते|

#2 Dividend देना फण्ड मेनेजर की मर्ज़ी है, आपका अधिकार नहीं

वैसे तो फण्ड मेनेजर dividend देने की कोशिश करेंगे, पर अगर आपको dividend नहीं मिलता, तो आप कुछ कर नहीं सकते|

मेरा मतलब है की अगर किसी वजह से फण्ड dividend की घोषणा नहीं करता, तो आप कुछ नहीं कर सकते| यह भी हो सकता है की आपकी उम्मीद से कम dividend की घोषणा हो|

हाँ, चाहें तो, आप अपने निवेश को बेच सकते हैं|

#3 Dividend आपके पैसे से ही आता है

कुछ लोगों में धारणा है की dividend मुफ्त की कमाई है| ऐसा बिलकुल नहीं है|

जितना डिविडेंड मिलता है, उतनी ही मात्र से आपके निवेश का मूल्य कम हो जाता है||

सच में देखें तो, टैक्स की वजह से मूल्य ज्यादा कम हो जाता है|

मान लिए आपके फण्ड का NAV 50 रुपये चल रहा है और फण्ड 2 रुपये के dividend की घोषणा करता है, तो डिविडेंड मिलते ही आपके फण्ड का NAV 50 रुपये से घट कर 48 रुपये हो जाएगा|

#4 Dividend पर टैक्स भी देना पड़ता है

म्यूच्यूअल फण्ड के dividend पर टैक्स के बारे में जानने से पहले एक बात का ध्यान रखें|

Dividend पर आप टैक्स नहीं देते, परन्तु म्यूच्यूअल फण्ड आपकी तरफ से टैक्स भरता है| परन्तु  टैक्स आता आपके पैसे से ही है|

समझ लिए, म्यूच्यूअल फण्ड टैक्स काट कर आपको पैसे देता है| ऐसे टैक्स को Dividend Distribution Tax (DDT) कहते हैं| उसके बाद मिले हुए dividend पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता|

आईये देखते हैं की यह कैसे काम करता है|

म्यूच्यूअल फण्ड दो प्रकार के होते हैं| इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड (equity mutual fund) और डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड (debt mutual fund)

इस पोस्ट में मैं प्रमुख तौर पर इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में ही बात कर रहा हूँ|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड (Equity Mutual Fund)

वित्तीय वर्ष 2018 (मार्च 31 2018) तक मिलने वाले dividend पर कोई टैक्स नहीं लगेगा| परन्तु FY 2019 (1 अप्रैल 2018) से मिलने वाले dividend पर आपको 10% टैक्स देना होगा| इसके ऊपर सरचार्ज (12%) or Cess (4%) भी लेगा| तो कुल मिला कर आपका टैक्स हुआ 11.65%.

सच में देखें तो आपका टैक्स और भी ज्यादा हुआ|

फण्ड के आपके दिए गए dividend पर 10% टैक्स देना है|

आपको 100 रुपये का dividend देने के लिए फण्ड को 100/(1-10%) = 111.11 रुपये बांटने होंगे|

साथ ही जो 11.11 रुपये  का Dividend Distribution Tax देना है, उस पर 12% का सरचार्ज और 4% सेस लगेगा| कुल मिला कर आपका टैक्स हुआ, 12.94 रुपये|

तो समझ लिए की अगर आपके हाथ में 100 रुपये का dividend आया, तो आपके फण्ड का NAV 112.94 रुपये से कम हो जाएगा| 12.94 रुपये गए टैक्स में|

अगर आपने Dividend option की जगह Growth option में निवेश किया होता तो:

वित्तीय वर्ष 2019 से इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर होने वाले long term capital gain पर भी 10% टैक्स देना है|

परन्तु यहाँ पर आपको सरचार्ज नहीं देना होता|

तो कुल मिलकर आपको टैक्स देना होता है 10.4%| Dividend पर आपको 11.65% टैक्स देना पड़ रहा है|

Growth option में दो और फायदे हैं:

  1. आपको हर वित्तीय वर्ष 1 लाख रुपये तक के long term capital gain पर कोई टैक्स नहीं देना होता|
  2. साथ ही अगर आपकी कुल इनकम (LTCG हटाने के बाद) 2.5 लाख (या 3 लाख रुपये) से कम है, तो ऐसी कमी को भी आप LTCG की मात्रा में से कम कर सकते हैं|
  3. मान लिए आप 40 वर्ष के हैं और आपकी कुल आय 1 लाख रुपये है| आपको इक्विटी फण्ड बेचने पर कुल मिला कर 5 लाख रुपये का LTCG हुआ| अब क्यूंकि आप आय 2.5 लाख से 1.5 लाख रुपये कम है, तो आपको कुल मिला कर 5 लाख – 1.5 लाख – 1 लाख = 2.5 रुपये के मुनाफे पर ही 10% टैक्स देना होगा|
  4. Dividend पर तो म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी ही टैक्स काट लेती है| इसलिए वहां पर कोई रियायत नहीं है|

मेरे अनुसार dividend के लिए इंतज़ार करने से बेहतर विल्कल्प है की आप म्यूच्यूअल फण्ड के Growth option में निवेश करें| जब आपको पैसे की ज़रुरत है, तब आप अपने निवेश को बेच कर पैसे निकाल सकते हैं|

उससे भी ज़रूरी बात, अगर आपको नियमित आय चाहिए, तो इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के बजाय डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करें| इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में केवल वही पैसा निवेश होना चाहिए, जो की आप लम्बी अवधि तक नहीं निकालेंगे|

मैंने Dividend वाले म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश किया है? अब मैं क्या करूं?

यह निर्णय बहुत सी बातों पर निर्भर करता है|

आपका फाइनेंसियल एडवाइजर आपके पोर्टफोलियो के देख कर आपको सही राय दे सकता है|

पर हाँ, अब इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के dividend विकल्प में निवेश करना कोई अच्छा आईडिया नहीं है| आगे से तो निवेश न ही करें|

जो आप निवेश कर चुके हैं, उस निवेश को आप एक वर्ष पूरा होने के बाद (जब आपका exit load वाला पीरियड पूरा हो जाए), आप उस निवेश को Dividend से Growth में शिफ्ट कर सकते हैं|

ध्यान दें मैं यह नहीं कह रहा हूँ की नियमित आय की लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के Growth आप्शन में निवेश करें| वह भी गलत होगा| मैं बस यह कह रहा हूँ की Growth आप्शन Dividend विकल्प से बेहतर हैं|

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड (Debt Mutual Fund) की dividend स्कीम के बारे में मेरी राय

Dividend पर 25% टैक्स (DDT) लगता है| इसके ऊपर सरचार्ज (12%) or Cess (4%) भी लेगा| तो कुल मिला कर आपका टैक्स हुआ 29.12%|

अगर इक्विटी फण्ड के तरह ही गणना करें,  आपके हाथ में 100 रुपये का dividend आया, तो आपके फण्ड का NAV कम हो जाएगा 138.82 रुपये से|

3 वर्ष से पहले डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर आपको मुनाफे पर अपने टैक्स ब्रैकेट के अनुसार टैक्स देना होता है|

3 वर्ष के बाद बेचें पर मुनाफे पर 20% टैक्स होता है| पर यहाँ आपको indexation का बेनिफिट मिलता है|

आपको नियमित आय की ज़रुरत है और आप 10% या 20% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं, तो आपको dividend विकल्प में निवेश करने की ज़रुरत नहीं है|

अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं और आपको नियमित आय की ज़रुरत है, तो आप dividend विकल्प के बारे में सोच सकते हैं|

यहाँ भी आपका फाइनेंसियल एडवाइजर आपके पोर्टफोलियो के देख कर आपको सही राय दे पायेगा|

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स बजट 2018

Filed Under: Mutual Funds, Tax Planning Tagged With: mutual fund dividend, mutual funds, tax on mutual fund dividend, टैक्स म्यूच्यूअल फण्ड डिविडेंड

अपने म्यूच्यूअल फण्ड निवेश की सहायता से भी लोन ले सकते हैं (Loan against Mutual Funds)

by दीपेश Leave a Comment

अगर आपको अर्जेंट लोन चाहिए, तो आपके कुछ सीमित विकल्प ही होते हैं|

आप पर्सनल लोन ले सकते हैं| गोल्ड लोन ले सकते हैं| इंश्योरेंस पालिसी से लोन ले सकते हैं या पीपीएफ खाते से भी लोन ले सकते हैं|

यह लोन जल्दी मिल तो जाते हैं परन्तु कुछ परेशानी रहती है|

पर्सनल लोन में आपके लोन के चुकाने की क्षमता को देखा जाता है| आपका क्रेडिट स्कोर भी देखा जाता है| अगर क्रेडिट स्कोर अच्छा नहीं है, तो पर्सनल लोन को भूल ही जाईये|

गोल्ड लोन में आपके पास पर्याप्त मात्र में सोने के आभूषण होने चाहिए| हर प्रकार की इंश्योरेंस पालिसी से लोन नहीं मिलता और केवल सरेंडर मूल्य की 80-90% राशि तक का लोन ही मिलता है| पीपीएफ खाते से लोन लेने की भी एक समय सीमा है, 6 वर्ष समाप्त होने के बाद आप पीपीएफ खाते से लोन नहीं ले सकते|

ध्यान दें गोल्ड लोन तो आप बहुत जल्दी मिलने की उम्मीद कर सकते हैं, लेकिन पर्सनल लोन, इंश्योरेंस पालिसी लोन या पीपीएफ लोन मिलने में समय लग सकता है|

आपको देखना होगा की आपके लिए ऊपर दिए गए लोन विकल्पों में से कुछ काम करेगा या नहीं|

इन सभी विकल्पों के अलावा अभी एक और विकल्प है| अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करते हैं, तो अपने म्यूच्यूअल फण्ड निवेश को प्लेज (pledge) करके भी लोन ले सकते हैं|

आप शेयर के साथ भी यह कर सकते हैं| परन्तु इस पोस्ट में मैं म्यूच्यूअल फण्ड से मिलने वाले लोन के बारे में चर्चा करूंगा|

म्यूच्यूअल फण्ड निवेश से लोन कैसे लें?

हालांकि अमूमन म्यूच्यूअल फण्ड से लोन लेने में भी समय लगता है| परन्तु यह समय सीमा धीरे-धीरे कम होती जा रही है|

कुछ समय पहले  HDFC Bank में एक सुविधा शुरू करी है जहाँ आप कुछ मिनिटों में अपने बैंक खाते में लोन का पैसा पा सकते हैं| इस सुविधा का नाम Digital Loan Against Mutual Funds (LAMF) है|

आज मैं इसी सुविधा पर चर्चा करूंगा| ध्यान दें दूसरे बैंक भी यह सुविधा प्रदान करते हैं पर मैं HDFC बैंक की लोन के बारे में चर्चा करूंगा|

म्यूच्यूअल फण्ड से लोन की सुविधा का लाभ ले सकता है? (Eligibility)

  1. आपका HDFC Bank के साथ बैंक अकाउंट होना चाहिए। ध्यान दें दूसरे बैंक भी आपके म्यूच्यूअल फण्ड निवेश कर लोन देते हैं| इस पोस्ट में मैं HDFC बैंक के लोन के बारे में बात कर रहा हूँ|
  2. नेट बैंकिंग के जरिए आप लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसलिए, सुनिश्चित परें की आपके पास नेट बैंकिंग का password हो|
  3. अब क्योंकि आप म्यूच्यूअल फण्ड को गिरवी रख कर लोन लेने की सोच रहे हैं, तो आपके पास म्यूचुअल फंड निवेश भी होना चाहिए ।
  4. आप केवल उन्ही म्यूच्यूअल फण्ड के खिलाफ लोन ले सकते हैं, जिनको CAMS सेवा प्रदान करता है| इस बारे में बाद में बात करेंगे|
  5. केवल व्यक्तिगत होल्डिंग (individual holding) वाले म्यूचुअल फंड निवेह्स के खिलाफ ही लोन मिलेगा| जो निवेश आपने संयुक्त मोड (joint holding mode) में किया है, उसके खिलाफ आपको लोन नहीं मिलेगा।

CAMS क्या है?

CAMS (Computer Age Management Services Private Limited) भारत में कई म्यूचुअल फंड हाउसेज (या AMCs) के लिए रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट के रूप में काम करता है ।

CAMS  म्यूच्यूअल फण्ड कंपनियों को infrastructure सर्विसेज भी प्रदान करता है।

CAMS के बारे में अधिक जानकारी आप CAMS की वेबसाइट पर पा सकते हैं|

अहम् बात यह है की CAMS जिन म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी को सेवा प्रदान करता है, उन म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी के साथ आपके निवेश की पूरी जानकारी CAMS के पास रहती है| इसीलिए CAMS इस पूरी लोन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है|

लोन एप्लीकेशन की प्रक्रिया के समय CAMS चुने गए निवेश कर pledge बनाता है और उसी के आधार पर एचडीएफसी बैंक आपको लोन देता है|

ध्यान दें यह पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन भी हो सकती है परन्तु ऐसे में लोन मिलने में थोडा समय लगेगा|

किन म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी को CAMS सेवा प्रदान करता है?

  1. Aditya Birla Sun Life Mutual Fund
  2. DSP Blackrock MF
  3. HDFC Mutual Fund
  4. HSBC Mutual Fund
  5. ICICI Prudential Mutual Fund
  6. IDFC Mutual Fund
  7. IIFL Mutual Fund
  8. Kotak Mutual Fund
  9. L&T Mutual Fund
  10. Mahindra Mutual Fund
  11. PPFAS Mutual Fund
  12. SBI Mutual Fund
  13. Shriram Mutual Fund
  14. TATA Mutual Fund
  15. Union Mutual Fund

जैसा की ऊपर बताया गया है, केवल इन्ही म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी में आपके निवेश की खिलाफ  आप Digital Loan Against Mutual Funds ले सकते हैं|

जब आप आवेदन करेंगे, तो आपको अपने आप ही दिखा दिया जाएगा की आपके कौन से निवेश लोन सुविधा के पात्र हैं|

HDFC Digital LAMF लोन के लिए एप्लाई कैसे करें?

जैसा कि उल्लेख किया गया है, आपके पास एचडीएफसी बैंक खाता होना चाहिए और खाता के लिए नेट बैंकिंग सक्षम होनी चाहिए ।

  1. पहले HDFC बैंक की वेबसाइट पर नेट बैंकिंग में लॉग इन करें|
  2. लॉग इन करने के बाद आपको अपने CAMS खाते में लॉग इन करने की आवश्यकता होगी| अगर आपने CAMS वेबसाइट पर अपना खाता नहीं बनाया है, तो आप 5 मिनिट में आसानी से बना सकते हैं|
  3. उसके बाद आप अपने पोर्टफोलियो से म्यूच्यूअल फण्ड चुन सकते हैं, जिनकी विरुद्ध आप लोन लेना चाहते हैं|
  4. लोन सुविधा को सक्रिय करने के लिए आपको एक OTP भेजा जाएगा| OTP डाल कर आप लोन सुविधा पा सकते हैं|

एचडीएफसी बैंक के अनुसार आपको 3 मिनिट के भीतर लोन मिल जाएगा|

लोन आवेदन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जान्ने के लिए आप Youtube पर इस विडियो को भी देख सकते हैं|

 

इन बातों का रखें ख्याल

  1. आप इक्विटी और डेब्ट फंड (equity and debt funds) दोनों के खिलाफ लोन ले सकते हैं|
  2. आपके क्रेडिट स्कोर से कोई भी फर्क नहीं पड़ेगा| आपका क्रेडिट स्कोर बुरा हो या फिर आपकी क्रेडिट हिस्ट्री ही न हो, तब भी आप यह लोन ले सकते हैं|
  3. यह सुविधा ओवरड्राफ्ट (overdraft facility) के रूप में दी जाती है| इसलिए आपने जितनी राशि ली है, केवल उतनी राशि पर ही ब्याज देना होगा| ओवरड्राफ्ट सुविधा में आप कितनी बार भी पैसा निकाल सकते हैं|
  4. मान लिए आपके पास 5 लाख की overdraft सुविधा है| आप एक बार 5 लाख रुपये निकालते हैं और कुछ समय बाद राशि का भुगतान कर देते हैं| भुगतान कर के बाद आप फिर 5 लाख रुपये तक निकाल सकते हैं|
  5. जब तक आप overdraft सुविधा को बंद नहीं कर देते, आप अपने म्यूच्यूअल फण्ड निवेश को बेच नहीं सकते|
  6. लोन का भुगतान न होने की स्तिथि में बैंक आपके निवेश को बेच भी सकता है|

मुझे कितना लोन मिल सकता है?

यह स्पष्टता से नहीं बताया गया है|

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार बैंक इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के 50% से अधिक मूल्य का लोन नहीं दे सकते| डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में कोई सीमा तय नहीं की गयी है|

तो अगर आपके इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड निवेश का मूल्य 1 लाख रुपये है, तो बैंक आपको 50,000 रुपये से अधिक का लोन नहीं दे सकता|

अगर आपके पास 1 लाख रुपये के डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड होते, तो आप अधिक लोन की अपेक्षा कर सकते थे|

ध्यान दें हर बैंक के नियम अलग हो सकते हैं|

एचडीएफसी बैंक म्यूच्यूअल फण्ड लोन (HDFC Digital LAMF) की ब्याज दर क्या है?

लोन की ब्याज दर बदलती रह सकती है|

अभी ब्याज दर 1 Year MCLR + 2.3% p.a. है|  लोन की ब्याज दर 11% के आस-पास होगी|

लोन लेने के बाद अगर मेरे निवेश का मूल्य गिर जाता है, तो क्या होगा?

ऐसी स्तिथि में आपकी overdraft से पैसा निकालने की क्षमता (drawing power) को कम कर दिया जाएगा|

मान लिए आपने 1 लाख रुपये के इक्विटी फण्ड को pledge करके 50,000 रुपये का लोन लिया था|

बाद में निवेश का मूल्य गिर कर 80,000 रुपये हो जाता है|

ऐसी स्तिथि में आपकी drawing पॉवर 50,000 रुपये से घटाकर 40,000 रुपये कर दी जायेगी| अगर आप पहले से ही 40,000 रुपये से ज्यादा पैसा निकाल चुके हैं, तो आपको अतिरिक्त राशि पर पेनल्टी देनी पड़ सकती है| या फिर आप जल्दी पैसा जमा करके अपनी बकाया राशि को 40,000 रुपये तक ला सकता हैं|

अधिक जानकारी के लिए आप एचडीएफसी बैंक की वेबसाइट पर जा सकते हैं

आपको क्या करना चाहिए?

आपके म्यूच्यूअल फण्ड निवेश पर रिटर्न के गारंटी नहीं है| परन्तु लोन पर ब्याज दर तो देनी ही होगी| आपको 11-12% p.a. का ब्याज देना होगा| अगर आपका निवेश 11-12% से अधिक रिटर्न नहीं देता, तो लोन लेना बेवकूफी होगा|

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में तो इतना रिटर्न मिलना मुश्किल है| इक्विटी फण्ड में मिल तो सकता है पर कोई गारंटी नहीं है| इक्विटी फण्ड में तो आपको नुकसान भी हो सकता है|

इसीलिए मेरे अनुसार बेहतर होगा की आप अपने म्यूच्यूअल फण्ड की खिलाफ लोन लेने की बजाय अपने म्यूच्यूअल फण्ड निवेश को बेच दें| म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर जो पैसा मिले, उसे अपनी ज़रुरत के लिए इस्तेमाल करें|

ज़रुरत पड़ने पर मैं तो अपने म्यूच्यूअल फण्ड निवेश बेच दूंगा (इनके खिलाफ लोन नहीं लूँगा)|

आप क्या करेंगे?

Filed Under: Loans, Mutual Funds Tagged With: loan against mutual funds, loan against mutual funds in hindi, अर्जेंट लोन चाहिए, म्यूच्यूअल फण्ड से लोन

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है? (Mutual Fund in Hindi)

Last updated: सितम्बर 4, 2018 | by दीपेश 2 Comments

अब आम जनता का रुझान धीरे-धीरे म्यूच्यूअल फण्ड की ओर बढ़ रहा है| काफी लोगों ने पिछले कुछ समय में म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना शुरू किया है|

क्या आप भी उन्ही लोगों में हैं? या फिर आप अभी भी म्यूच्यूअल फण्ड से दूर ही रहते हैं|

अब म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना तो आपकी मर्ज़ी है|

परन्तु म्यूच्यूअल फण्ड क्या होते हैं, कितने तरह के होते हैं और कैसे काम करते हैं, यह तो आपको पता होना ही चाहिए|

आईये इस पोस्ट में म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में विस्तार से जानते हैं|

  1. म्यूच्यूअल फण्ड क्या है?
  2. म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने ले क्या फायदे हैं?
  3. म्यूच्यूअल फण्ड कितने प्रकार के होते हैं?
  4. म्यूच्यूअल फण्ड NAV क्या होता है?
  5. आपको कैसे अपने लिए सही म्यूच्यूअल फण्ड का चुनाव करना चाहिए?
  6. म्यूच्यूअल फण्ड में Growth और Dividend विकल्प क्या होते हैं?
  7. म्यूच्यूअल फण्ड Direct और Regular plan क्या होते हैं?
  8. आपको म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर कितना टैक्स देना होता है?
  9. म्यूच्यूअल फण्ड कैसे खरीदें?
  10. म्यूच्यूअल फण्ड SIP, STP और SWP क्या हैं?

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है? What is a Mutual Fund in Hindi?

आपको शेयर बाज़ार में निवेश करना है| पर यह पता नहीं की कहाँ निवेश करें|

एक बात का खतरा और भी है|

मान लिए आपने कोई शेयर खरीदा और किसी वजह से उसका दाम काफी गिर गया, तो आपको काफी नुकसान हो सकता है|

म्यूच्यूअल फण्ड आपकी इन समस्यायों को दूर करते हैं|

पहला, जब आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करते हैं, तो आप अपने पैसे को एक अनुभवी निवेशक (फण्ड मेनेजर) को सौंपते है| वह फण्ड मेनेजर आपके पैसे को निवेश करता है|

दूसरा, साथ ही वह फण्ड मेनेजर आपका सारा पैसा एक शेयर में या एक जगह पर निवेश नहीं करता| कई शेयर पर निवेश करता है| तो अगर किसी शेयर ने अच्छा नहीं भी किया, तो आपको बहुत ज्यादा नुकसान नहीं होगा|

तीसरा, फण्ड मेनेजर करने की ज़रुरत नहीं है की कौनसा शेयर खरीदें या बेचें| यह सारा काम फण्ड मेनेजर करता है|


म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने का क्या फायदे हैं? (Benefits of investing in Mutual Funds)

#1 आपका पैसा एक अनुभवी फण्ड मेनेजर निवेश करता है|

हालांकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है की आपको अच्छे रिटर्न्स ही मिलेंगे, परन्तु फण्ड मेनेजर के अनुभव, जानकारी और कौशल (skill)का फायदा तो होना ही चाहिए|

अगर आप एक आम निवेशक हैं और आपके पास शेयर बाज़ार में निवेश करने के लिए ज़रूरी जानकारी और समय नहीं है, तो आपके लिए म्यूच्यूअल फण्ड शेयर बाज़ार में पैसा लगाने का एक अच्छा माध्यम हैं|

#2 जैसा की ऊपर लिखा है की आपका पैसा कई जगह निवेश होता है| तो इससे अगर एक-दो शेयर बुरा भी करते हैं, तो शायद आपको इतना नुकसान न हो| इस बात को diversification भी कहते हैं|

#3 म्यूच्यूअल फण्ड कई प्रकार के होते हैं| आप अपनी ज़रुरत अनुसार फण्ड का चयन कर सकते हैं| बहुत से लोग सोचते हैं की म्यूच्यूअल फण्ड केवल शेयर बाज़ार में ही निवेश करते हैं| ऐसा नहीं है|

ऐसे म्यूच्यूअल फण्ड भी होते हैं जिनकी कीमत शेयर बाज़ार के उतार चढ़ाव से कम ज्यादा नहीं होती| मैं विभिन्न प्रकार के म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में नीचे चर्चा करूंगा| 

पढ़ें: अपने लिए बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड का चुनाव कैसे करें?


म्यूच्यूअल फण्ड में कितना निवेश करना होता है? म्यूच्यूअल फण्ड का मूल्य (NAV) क्या होता है?

म्यूच्यूअल फण्ड में अमूमन आप 500 रुपये से निवेश करना शुरू कर सकते हैं| निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं है|

म्यूच्यूअल फण्ड में ख़रीदने की मात्र को यूनिट्स (units) और उसके मूल्य को NAV (Net Asset Value) कहते हैं|

समझ लिए की जैसे आप शेयर खरीदते हैं और उसका मूल्य देते हैं, म्यूच्यूअल फण्ड में आप यूनिट खरीदते हैं और उसका मूल्य (NAV) देते हैं|

तो मान लिए आपने 1,000 रुपये का निवेश किया और उस समय फण्ड का NAV था 50 रुपये, तो आपको 1,000/50 = 20 यूनिट्स मिलेंगे| अब मान लिए कुछ वर्षों बाद आपको फण्ड का NAV बढ़ कर 90 रुपये हो गया, तो आपके निवेश का मूल्य हो जाएगा 20 X 90 = 1,800 रुपये| आपने 1,000 रुपये निवेश किया था, जिसका मूल्य हो गया है 1,800 रुपये|

अब हर फण्ड का NAV अलग होता है|

एक बात और, यह धारणा गलत है की जिस म्यूच्यूअल फण्ड का NAV कम है, वह सस्ता है| ऐसे भ्रम में न रहे|


म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार (Types of Mutual Fund)

प्रमुख तौर पर म्यूच्यूअल फण्ड 3-4 प्रकार के हो सकते हैं|

  1. इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड (Equity Mutual Fund)
  2. डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड (Debt Mutual Fund)
  3. हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड (Hybrid Mutual Fund)
  4. गोल्ड म्यूच्यूअल फण्ड (Gold Mutual Fund)

अब इन फण्ड में भी कई प्रकार हो सकते हैं|


#1 इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार (Types of Equity Mutual Funds in Hindi)

Equity म्यूच्यूअल फण्ड के भी कई प्रकार हैं| यह निर्भर करता है की फण्ड किस प्रकार के शेयर में निवेश करता है|

  • Large Cap Fund (लार्ज कैप फण्ड): बहुत बड़ी कंपनी के शेयर में निवेश करते हैं| उदहारण: SBI BlueChip Fund, ICICI Prudential Focussed Bluechip Fund, Birla Sun Life Frontline Equity Fund
  • Multi-cap Fund (मल्टी कैप फण्ड): हर तरह की कंपनी के शेयर में निवेश करते हैं| उदहारण : ICICI Prudential Value Discovery Fund, Franklin India Equity Fund
  • Midcap Fund (मिड कैप फण्ड): बीच के आकार की कंपनी में निवेश करते हैं| उदहारण: Mirae Asset Emerging Bluechip Fund, Franklin India Prima Fund
  • Small Cap Fund (स्माल कैप फण्ड): बहुत छोटी कंपनी के शेयर में निवेश करते हैं| उदहारण: SBI Small & Midcap Fund, DSP BlackRock Smallcap Fund
  • Equity linked Savings Scheme (ईएलएसएस): ऐसे फण्ड में निवेश करने पर टैक्स बेनिफिट मिलता है| उदहारण: Axis Long Term Equity Fund, Birla Sun Life Tax Relief 96 Fund

ध्यान दें मैंने फण्ड के नाम केवल उदहारण देने के लिए दिए हैं| यह निवेश करने का सुझाव नहीं है|

ध्यान दें इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड और भी कई प्रकार के हो सकते हैं| जैसे की कुछ म्यूच्यूअल फण्ड केवल एक क्षेत्र की कंपनी में की निवेश करते हैं| जैसे की बैंकिंग फण्ड, फार्म फण्ड, टेक्नोलॉजी फण्ड इत्यादि| ऐसे फण्ड को Sector Funds कहते हैं|

मैंने बस आपको आईडिया देने के लिए उदहारण दिया है| और हाँ, जब मैं बड़ी या छोटी कंपनी की बात कर रहा हूँ, मेरा मतलब कंपनी की market capitalization से है| ईएलएसएस में निवेश करने पर आपको Section 80C के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है|

पढ़ें: जानिये ईएलएसएस  (ELSS) के बारें में कुछ दिलचस्प बातें


#2 डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार (Types of Debt Mutual Funds in Hindi)

काफी लोग जब म्यूच्यूअल फंड्स के बारे में सोचते हैं, तो उनको लगता है की म्यूच्यूअल फंड्स केवल शेयर बाज़ार में ही निवेश करते हैं| ऐसा नहीं है| ऐसे म्यूच्यूअल फण्ड भी हैं, जो शेयर बाज़ार से बहुत दूर रहते हैं| डेब्ट फण्ड में कुछ ऐसा ही होता है|

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड सरकारी या कंपनी के ऋण (bonds) में निवेश करते हैं| ज़ाहिर है की ऐसे फण्ड में निवेश करने पर आपको शेयर बाज़ार के उतार चढ़ाव का सामना नहीं करना पड़ता|

  • Liquid fund (उदहारण:आईसीआईसीआई लिक्विड फण्ड, एचडीएफसी लिक्विड फण्ड)
  • Ultra Short term debt fund (उदहारण: आईसीआईसीआई फ्लेक्सिबल इनकम प्लान, एक्सिस ट्रेज़री एडवांटेज फण्ड)
  • Short term debt fund (उदहारण: SBI Short Term Debt Fund, रिलायंस शोर्ट टर्म डेब्ट फण्ड)
  • Long term debt fund (उदहारण: आईसीआईसीआई इनकम प्लान, रिलायंस इनकम प्लान)
  • Gilt fund (उदहारण : SBI gilt fund-long term plan, ICICI Prudential Long Term Gilt Fund)

इनके अलावा भी कई प्रकार के डेब्ट म्यूच्यूअल फंड्स होते हैं|


#3 हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार (Types of Hybrid Mutual Funds in Hindi)

कुछ ऐसे म्यूच्यूअल फण्ड भी होते हैं, जो की कुछ हिस्सा शेयर बाज़ार में और कुछ हिस्सा bonds में निवेश करते हैं| ऐसे फंड्स को हाइब्रिड फण्ड कहते हैं|

  • बैलेंस्ड फण्ड (Balanced Funds): ऐसे फंड्स कम से कम 65% पैसा शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं| उदहारण: HDFC Balanced Fund, ICICI Prudential Balanced Fund, Franklin India Balanced Fund
  • डायनामिक एसेट एलोकेशन फण्ड (Dynamic Asset allocation funds): परिस्थिति के अनुसार पैसला लेते हैं की कहाँ कितना निवेश करना है| उदहारण: ICICI Prudential Balanced Advantage Fund

इसके अलावा ऐसे फण्ड भी होते हैं, जो की ज़्यादातर पैसा डेब्ट (bonds) में निवेश करते हैं और थोडा सा पैसा ही शेयर बाज़ार में लगाते हैं, जैसे की मंथली इनकम प्लान (monthly income plans या MIP)|


म्यूच्यूअल फण्ड ग्रोथ या डिविडेंड (Mutual Fund Growth or dividend in Hindi)

साथ ही हर म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम में आप पास दो विकल्प होते हैं: आप Growth option चुन सकते हैं या Dividend option.

Growth आप्शन में आपको कुछ पैसा चाहिए तो आपके अपने यूनिट्स बेचने पड़ेंगे|

परन्तु Dividend option में समय-समय पर आपको फण्ड से dividend मिलता रहता है| ध्यान दे कुछ भी मुफ्त में नहीं मिलता| जितना आपको डिविडेंड मिलता है, आपके फण्ड का NAV उतना ही कम हो जाता है| एक बात और, dividend मिलने की कोई गारंटी नहीं होती|

आप ग्रोथ आप्शन लें या डिविडेंड आप्शन, यह बहुत बातों पर निर्भर करता हैं| पर हाँ, अगर आप लम्बे समय के लिए निवेश कर रहे हैं, तो Growth विकल्प बेहतर होगा|

अगर आप कम अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं और आपको कुछ-कुछ समय पर थोड़ी आय चाहिए, तो डिविडेंड विकल बेहतर हो सकता है| पर ऐसा ज़रूरी नहीं है| Dividend option में निवेश करने से पहले इस पोस्ट को ज़रूर पढ़ें|

साथ ही आपको यह भी देखना पड़ेगा की आपको टैक्स कितना देना पड़ेगा|


म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान या रेगुलर प्लान (Mutual Fund Direct Plan or Regular Plan in Hindi)

इसके अलावा एक तरीका और है जिस पर आप म्यूच्यूअल फंड्स को विभाजित कर सकते हैं|

डायरेक्ट प्लान और रेगुलर प्लान

जब आप किसी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम के रेगुलर प्लान में निवेश करते हैं, तो बीच में एक डिस्ट्रीब्यूटर (एजेंट या intermediary) होता है| अब कोई एजेंट है, तो उसको कमीशन तो मिलेगा ही|यह कमीशन आपको पैसे से ही आता है| इससे आपका रिटर्न भी प्रभावित होता है|

म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान में कोई भी एजेंट नहीं होता| आप सीधे म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी के साथ निवेश करते हैं| अब क्योंकि कोई कमीशन नहीं होता, तो इसलिए आपको रिटर्न थोड़े बेहतर मिलते हैं|

म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान (mutual fund direct plan in hindi) के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप नीचे दी गयी पोस्ट पढ़ सकते हैं|

क्या आपको म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान में निवेश करना चाहिए?

म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान में कैसे निवेश करें?

कैसे बदलें म्यूच्यूअल फण्ड रेगुलर प्लान को डायरेक्ट प्लान में?

आपको ज्यादा कंफ्यूज होने की ज़रुरत नहीं है| उदहारण की सहायता से समझते हैं| बार करते हैं SBI Mutual Fund के एक large cap fund के बारे में: SBI BlueChip Fund

अब यह फण्ड 4 विकल्पों में उपलब्ध है|

SBI BlueChip Fund- Growth– Direct Plan

SBI BlueChip Fund-Growth–Regular Plan

SBI BlueChip Fund-Dividend–Direct Plan

SBI BlueChip Fund-Dividend– Regular Plan

शायद अब आपकी उलझन दूर हो गयी होगी| और हाँ इस सभी प्लान का NAV अलग होगा|

sbi mutual fund in hindi sbi mutual sip in hindi म्यूच्यूअल फण्ड क्या है

 

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है म्यूच्यूअल फण्ड की जानकारी sbi mutual fund in hindi


म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर कितना टैक्स देना पड़ता है? (Tax on mutual funds)

ध्यान दें आपको केवल मुनाफे (या रिटर्न) पर टैक्स देना होता है, अपने मूल निवेश कर नहीं| और मुनाफे पर टैक्स भी बात तभी आती है, जब आप अपने निवेश को बेचते हैं| Tax only on realized gains

टैक्स कितना लगेगा, यह दो बातों पर निर्भर करता है

  1. आपने किस प्रकार के  म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश किया है| इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड और डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड  के मुनाफे पर अलग-अलग  तरीके से टैक्स देना होता है| (Type of mutual fund)
  2. आपकी निवेश अवधि (holding period)

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स बजट 2018

इस विषय में मैंने एक दूसरी पोस्ट में विस्तार से चर्चा करी है| आप उस पोस्ट को इस लिंक पर पढ़ सकते हैं|

 


म्यूच्यूअल फण्ड कैसे खरीदें? म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कैसे करें?

आप म्यूच्यूअल फण्ड में ऑफलाइन (पेपर फॉर्म भरकर) या ऑनलाइन दोनों तरीकों से निवेश कर सकते हैं|

आप म्यूच्यूअल फण्ड किसी डिस्ट्रीब्यूटर या एजेंट की सहायता से खरीद सकते हैं| इसके अलावा बहुत सारे ऑनलाइन वेबसाइट हैं जहां पर रजिस्टर करने के बाद आप म्यूच्यूअल फंड्स ऑनलाइन खरीद सकते हैं|

इस बारे में विस्तार से जानने के लिए इस पोस्ट (अगर पहली बार कर रहे हैं निवेश, तो म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश कैसे शुरू करें?) को पढ़ें|


म्यूच्यूअल फण्ड SIP, STP और SWP क्या हैं?

SIP (Sytematic Investment Plan) म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने का तरीका है| अगर आप SIP के ज़रिये निवेश करते हैं, तो हर महीने एक तय राशि आपके बैंक अकाउंट से automatically कट कर आपके चुनिन्दा म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश हो जायेगी|

SIP द्वारा निवेश करने पर निवेश में संयम बना रहता है| SIP के नया फायदों और ग़लतफ़हमियों को समझने के लिए इस पोस्ट (म्यूच्यूअल फण्ड SIP क्या है?, SIP से निवेश करने के फायदे और नुकसान) को पढ़ें|

STP (Systematic Transfer Plan) भी SIP की तरह निवेश कर का तरीका ही है| बस अंतर इतना है की हर महीने पैसा आपके बैंक खाते की बजाय एक म्यूच्यूअल फण्ड से दूसरे म्यूच्यूअल फण्ड में जाता है| STP के ज़रिये आप धीरे-धीरे अपने धन म्यूच्यूअल फण्ड में लगा सकते हैं| STP के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|

SWP (Systematic Withdrawal Plan) म्यूच्यूअल फण्ड में पैसा निकालने का तरीका है| अगर आप SWP शुरू करते हैं, तो हर महीने आपके म्यूच्यूअल फण्ड की कुछ यूनिट्स automatically बिकेंगी और एक तय राशि आपके बैंक खाते में आ जायेगी| SWP रिटायर्ड लोगों के लिए काफी उपयोगी हो सकती है| SWP के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट के पढ़ें|

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करते समय इन गलतियों से बचें

 

Filed Under: Mutual Funds Tagged With: icici mutual fund in hindi, mutual funds in hindi, sbi mutual fund in hindi, आईसीआईसीआई म्यूच्यूअल फण्ड, म्यूच्यूअल फंड्स के बारे में हिन्दी में जानकारी, म्यूच्यूअल फण्ड के फायदे, म्यूच्यूअल फण्ड प्रकार

Mutual Fund SWP क्या है? (SWP in Hindi)

Last updated: अगस्त 2, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

SWP क्या है? (SWP in Mutual Fund in Hindi)

SWP की full form है Systematic Withdrawal Plan

अगर आपने म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश किया है और आप चाहते हैं की आपको नियमित तौर पर उस निवेश से कुछ मिलती रहे, तब आप SWP का इस्तेमाल कर सकते हैं|

जैसे की नाम से प्रतीत होता है, SWP शुरू करने पर आपके म्यूच्यूअल फण्ड निवेश से निर्धारित राशि की यूनिट्स हर महीने बिकती हैं और पैसा आपके बैंक अकाउंट में आ जाता है|

अगर आपने 5,000 रुपये की SWP चलाई, तो हर महीने 5,000 रुपये के यूनिट्स बिकेंगे और 5,000 रुपये आपके खाते में आ जायेंगे|

SWP शुरू करने के लिए आपको यह जानकारी चाहिए

  1. आप किस फण्ड से SWP चलाना चाहते हैं
  2. कितनी राशि की चलाना चाहते हैं
  3. कितने समय तक SWP चलाना कहते हैं
  4. महीने की निर्धारित तारीख

जैसे की, आप SBI डेब्ट फण्ड से हर महीने की 15 तारीख को 24 महीने तक 5,000 रुपये निकालना चाहते हैं| इसके लिए आप एक SWP चला सकते हैं|

ऐसा करने से 24 महीने तक हर महीने की 15 तारिख को 5,000 रुपये की यूनिट्स (SBI डेब्ट फण्ड से) बिकेंगी और पैसा आपके खाते मैं आ जाएगा|

एक बात का ध्यान रखें अगर आपके फण्ड में पैसा नहीं बचा है, तो SWP अपने आप खत्म हो जाएगा|

SWP (Systematic Withdrawal Plan) सिप (SIP) का बिलकुल उल्टा है

SIP में हर महीने आपके बैंक खाते से कुछ पैसे कट कर अपने आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश हो जाते हैं| जैसे की, हर मैंने 5,000 रुपये की SIP चलाई, तो हर महीने आपके खाते से 5,000 रुपये काटेंगे और म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश हो जायेंगे|

SWP में हर महीने कुछ म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट्स अपने आप बिक जाती है और आपके खाते में पैसे आ जाते हैं| अगर आपने 5,000 रुपये की SWP चलाई, तो हर महीने 5,000 रुपये के यूनिट्स बिकेंगे और 5,000 रुपये आपके बैंक खाते में आ जायेंगे|

Mutual Fund SWP शुरू करने से पहले इन बातों का ख्याल रखें

#1 SWP कभी भी इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड से न चलायें|

ऐसा इसलिए की अगर हरे बाज़ार गिरेगा, तो आपको निर्धारित आय पाने के लिए ज्यादा यूनिट्स बेचने पड़ेंगे|

उदहारण की सहायता से समझते हैं|

मान लिए आपने 5,000 रुपये के SWP चलाई है|

पहला महीना: फण्ड का NAV है 100 रुपये: आपके 50 यूनिट बिकेंगे

दूसरा महीना: फण्ड का NAV है 120 रुपये: आप 41.66 यूनिट बिकेंगे

पहला महीना: फण्ड का NAV है 80 रुपये: आप 62.5 यूनिट बिकेंगे

आप देख सकते हैं की आपको कम दाम (कम NAV) पर ज्यादा यूनिट बेचने पड़ रहे हैं| अगर ऐसा होगा, तो आपका पोर्टफोलियो काफी जल्दी खत्म (खाली( हो जाएगा)|

एक और परेशानी है| कई बार म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी भी अपने फण्ड बेचने के लिए निवेशकों को गलत सलाह दे सकते हैं| मैंने पहले एक पोस्ट में चर्चा करी थी की कैसे म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी भी लोगों के गुमराह कर सकती है| इस पोस्ट में आप देख्नेगे की एक म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी equity mutual fund से SWP करने की सलाह दे रही है|

#2 अगर SWP चलाना है, तो किसी debt mutual fund या liquid fund से चलायें| ऐसा इसलिए क्योंकि डेब्ट फण्ड में इतना उतार चढ़ाव नहीं आता|

#3 जब SWP के द्वारा यूनिट्स बिकेंगे, तो आपको capital gains हो सकते हैं और आपको टैक्स देना पड़ सकता है|

पढ़ें: नियमित आय के लिखे इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड (equity mutual fund) से dividend पर न करें भरोसा

म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में अन्य पोस्ट

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है? (Mutual Fund in Hindi)

म्यूच्यूअल फण्ड सिप क्या है? (SIP in Hindi)

म्यूच्यूअल फंड STP क्या है (Mutual Fund STP in Hindi)

SBI SWP Calculator

Filed Under: Financial Planning, Mutual Funds Tagged With: mutual fund swp, SBI swp calculator, SWP in hindi, swp in mutual fund in hindi

Mutual Fund STP क्या है? (STP in Hindi)

by दीपेश Leave a Comment

STP की full form है Systematic Transfer Plan या सिस्टेमेटिक ट्रान्सफर प्लान|

STP क्या है? STP का क्या ऊपयोग है? (STP in Hindi, Benefits of STP)

STP म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने का तरीका है|

मान लिए आपके पास एक बड़ी राशि पड़ी है, जिसे की आप शेयर बाज़ार में इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के माध्यम से निवेश करना चाहते हैं|

पर आपको यह डर लगता है की आपके निवेश करते ही कहीं शेयर बाज़ार गिर न जाए| इसलिए आप सारा पैसा एक साथ निवेश नहीं करना चाहते|

आप चाहते हैं की आप पैसा धीरे-धीरे निवेश हो| साथ ही आप यह चाहते हैं की यह काम अपने आप हो जाए| आपको हर महीने बार-बार निवेश न करना पड़े|

यहाँ पर STP (Systematic Transfer Plan) आपका काम आसान कर सकता है|

मान लिए आपके पास 5 लाख रुपये हैं और आप यह पैसा फण्ड A में लगाना चाहते हैं, जो की एक इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड है|

आपको फण्ड A में हर महीने 25,000 रुपये निवेश करना चाहते हैं|

  1. इसके लिए आप पूरे 5 लाख रुपये एक debt mutual fund या liquid fund में निवेश कर सकते हैं| डेब्ट या लिक्विड फण्ड में इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड की तरह बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं आता| इसीलिए आप यहाँ पर बड़ी राशि भी निवेश कर सकते हैं| मान लिए उस फण्ड का नाम फण्ड B है|
  2. इसके बाद आप Fund B से Fund A में 25,000 रुपये प्रति माह की STP चालू कर सकते हैं|

हर महीने एक निर्धारित तारीख को Fund B से 25,000 रुपये की यूनिट्स बिकेंगी और 25,000 रुपये फण्ड A में निवेश हो जायेंगे| ऐसे में अगले 20-22 महीने में सारा पैसा Fund A में निवेश हो जाएगा|

एक बार आपने STP शुरू कर दिया, तो सब अपने आप हो जाएगा|

जैसा STP के नाम से प्रतीत होता है, आपका पैसा systematically एक फण्ड से दूसरे फण्ड में ट्रान्सफर हो जाएगा|

STP और SIP में क्या अंतर है?

STP और SIP दोनों ही निवेश करने का तरीके हैं|

STP में आपका पैसा एक म्यूच्यूअल फण्ड से दूसरे म्यूच्यूअल फण्ड में जाता है|

SIP में पैसा आपके बैंक खाते से म्यूच्यूअल फण्ड में जाता है|

एक उदाहरण की सहायता से समझते हैं|

मान लिए आपको 3 लाख रुपये का इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना है| जैसे की ऊपर लिखा है की आप एक साथ सारा पैसा निवेश नहीं करना चाहते|

आप चाहते हैं की धीरे-धीरे आपका पैसा शेयर मार्केट में निवेश हो|

ऐसा आप SIP और STP दोनों के माध्यम से कर सकते हैं|

मान लिए आप हर महीने 20,000 रुपये निवेश करना चाहते हैं|

  1. आप पैसा अपने बैंक खाते में छोड़ सकते हैं और प्रति माह 20,000 रुपये की SIP शुरू कर सकते हैं|
  2. या फिर आप 3 लाख रुपये किसी debt या liquid फण्ड में निवेश कर सकते हैं और 20,000 की एक STP चालू कर सकते हैं| ऐसे में हर महीने 20,000 रुपये की debt mutual fund की यूनिट्स बिकेंगी और 20,000 रुपये के इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड की यूनिट्स खरीद ली जायेंगी|

STP शुरू करने से पहले इन बातों का रखें ख्याल

  1. पहले फण्ड से यूनिट बिकने पर पैसा आपके बैंक खाते में नहीं आता| सीधे दूसरे फण्ड में निवेश हो जाता है|
  2. पहला और दूसरा फण्ड एक ही म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी से होने चाहिए| आप SBI के फण्ड से आईसीआईसीआई के फण्ड में STP नहीं चला सकते|
  3. पहले फण्ड में यूनिट्स बेचने पर आपको टैक्स देना पड़ सकता है| हालांकि आपके खाते में पैसा नहीं आता, परन्तु म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट्स तो बिके हैं| इसलिए आपको capital gains पर टैक्स देना पड़ सकता है|
  4. STP की हर किश्त दूसरे फण्ड में नया निवेश है| मान लिए आपने हर महीने की 15 तारीख को Fund B से Fund A में STP चालू करी| ऐसे में हर महीने की 15 तारीख को Fund A में कुछ निवेश होगा| टैक्स और exit load के नज़रिए से हर किश्त को एक नया निवेश माना जाएगा|
  5. STP के द्वारा निवेश करने से अच्छे रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है| SIP के साथ भी कोई गारंटी नहीं है| बस आपको इस बात का सुकून रहता है की आपक पैसा धीरे-धीरे निवेश हो रहा है|
  6. STP एक फण्ड से दूसरे फण्ड में नियमित रूप से पैसा ट्रान्सफर करने का जरिया है| तो फण्ड का चुनाव सही से करें|
  7. आप किसी भी फण्ड से दूसरे फण्ड में STP शुरू कर सकते हैं| बस दोनों फण्ड एक की म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी से होने चाहिए|
  8. अगर आप चाहें तो एक इक्विटी फण्ड से debt फण्ड में भी STP कर सकते हैं| कोई आपको रोकेगा नहीं| आपको अपनी ज़रुरत के अनुसार निर्णय करना होगा|
  9. अगर आपको धीरे-धीरे इक्विटी फण्ड में निवेश करना है, तो आप डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड से equity म्यूच्यूल फण्ड में एसटीपी शरू कर सकते हैं|
  10. अगर आपको इक्विटी फण्ड से धीरे-धीरे पैसा निकालना है, तो आप इक्विटी फण्ड से डेब्ट फण्ड में STP शरू कर सकते हैं| अगर ऐसा करना है, तो थोडा सोच-समझ कर करें|

Filed Under: Mutual Funds Tagged With: Stp full form, STP in hindi, Stp mutual fund in hindi, Systematic transfer plan  in hindi

  • « Go to Previous Page
  • Page 1
  • Page 2
  • Page 3
  • Page 4
  • Page 5
  • Go to Next Page »

Primary Sidebar

HindiFinance

Subscribe on Youtube




Join our Newsletter
Enter your email address and click on the Get Instant Access button.
Thank you for subscribing.
Something went wrong.
I agree to have my personal information transfered to MailChimp ( more information )
We respect your privacy

For any guest posts or advertising queries, please write to us at hindifinance@gmail.com

Popular Posts

  • अटल पेंशन योजना की पूरी जानकारी (Atal Pension Yojana in Hindi) (2022)
  • सुकन्या समृद्धि योजना की पूरी जानकारी (Sukanya Samriddhi Yojana 2019)
  • नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) के बारें में पूरी जानकारी (Complete Information about NPS in Hindi)
  • PPF खाते के बारे में पूरी जानकारी (Complete Information about PPF Account in Hindi)
  • कौन से हैं 5 सबसे अच्छे टर्म इंश्योरेंस प्लान (Best Term Life Insurance Plan)?

(c) Copyright 2026 www.HindiFinance.com | Privacy Policy