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Mutual Funds

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बेस्ट म्यूच्यूअल फंड सिप प्लान 2018 (Best Mutual Funds 2018)

by दीपेश 4 Comments

मैंने अपनी पिछली पोस्ट में चर्चा करी थी की हर म्यूच्यूअल फण्ड सभी के लिए अच्छा नहीं हो सकता| आपको अपने लिए अच्छे म्यूच्यूअल फण्ड के चुनाव करना आना चाहिए|

परन्तु में जानता हूँ की आप कुछ अच्छे इक्विटी फंड्स के नाम भी जानना चाहते होंगे| इस पोस्ट में मैं कुछ अच्छे इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में चर्चा करूंगा|

बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड (Best Mutual Funds for 2018, बेस्ट सिप प्लान 2018)

मैं बस कुछ अच्छे म्यूच्यूअल फण्ड की सूची आपको दे रहा हूँ|

  1. ध्यान दें यह मेरे अनुसार अच्छे फण्ड हैं पर अच्छे रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है|
  2. न ही इस बात की गारंटी है की यह फण्ड सबसे अच्छे रिटर्न देंगे|
  3. इन फण्ड में निवेश करने पर आपको नुक्सान भी हो सकता है|
  4. अगर आप इक्विटी फण्ड में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो बेहतर होगा की आप सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (म्यूच्यूअल फण्ड सिप या SIP) के द्वारा निवेश करें|
  5. निवेश करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें की आपको इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना चाहिए|
  6. इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड लम्बी अवधि के निवेश (long term investment) के लिए अच्छे हैं| अगर इक्विटी फण्ड में पैसा लगा रहे हैं, तो यह मान कर चलें की आप 10 वर्ष तक उस पैसे को नहीं छुएंगे|
  7. बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने की होड़ में न रहे| हर वर्ष कोई अलग फण्ड सबसे अच्छा करेगा| आप केवल ज्यादा रिटर्न के चक्कर में अपने फण्ड न बदलते रहे| संयम रखें और जिस फण्ड में निवेश कर दिया है, उस में निवेशित रहे|
  8. मैंने कुछ अच्छे फण्ड के नाम दिए हैं| इसका मतलब यह नहीं है की और सारे फण्ड बेकार हैं| आपके फण्ड भी अच्छा हो सकता है| अपने फाइनेंसियल एडवाइजर से बात करें|
  9. आप हर वर्ग में से एक फण्ड चुन सकते हैं|
  10. मेरे अनुसार अगर आपको 100 रुपये इक्विटी फण्ड में निवेश करने हैं, तो आप अपने पैसे को इस तरह बाँट सकते हैं|

30 रुपये: बैलेंस्ड फण्ड (Balanced Fund)

30 रुपये: लार्ज कैप फण्ड (Large Cap Fund)

20 रुपये: मल्टी-कैप फण्ड (Multi cap fund)

20 रुपये: मिड कैप और स्माल कैप फण्ड (Mid cap and Small Cap Fund)

निवेश करने से पहले अपने फाइनेंसियल एडवाइजर की सलाह ज़रूर लें|

अगर आप इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के विभिन्न वर्गों के बारे में जानना चाहते हैं, तो इस पोस्ट को पढ़ें|

Best Balanced Funds (बेस्ट बैलेंस्ड फण्ड)

  1. HDFC Balanced Fund
  2. ICICI Prudential Balanced Fund
  3. SBI Magnum Balanced Fund

Best Large Cap Funds (बेस्ट लार्ज कैप कैप म्यूच्यूअल फण्ड)

  1. ICICI Prudential Nifty Next 50 Fund
  2. Aditya Birla Sun Life Frontline Equity Fund
  3. Mirae Asset India Equity Fund
  4. SBI BlueChip Fund

Best Multicap Fund (बेस्ट मल्टीकैप फण्ड)

  1. Quantum Long Term Equity Fund
  2. ICICI Prudential Value Discovery Fund
  3. Franklin India Prima Plus Fund
  4. SBI Magnum Multicap Fund

Best Midcap Fund (बेस्ट मिड कैप फण्ड)

  1. Franklin India Prima Fund
  2. Mirae Asset Emerging BlueChip Fund
  3. Birla Sun Life Pure Value Fund

Best Small Cap Fund (बेस्ट स्माल कैप फण्ड)

  1. Franklin India Smaller Companies Fund
  2. DSP BlackRock Small Cap Fund (पहले इस फण्ड का नाम DSP BlackRock Micro Cap Fund था)
  3. SBI Small & MidCap Fund

इनमें से कुछ स्कीम अभी नया निवेश नहीं ले रहीं हैं|

Best Equity Linked Savings Scheme (बेस्ट इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम)

  1. Birla Sun Life Tax Relief 96 Fund
  2. Axis Long Term Equity Fund
  3. Franklin India Tax Shield Fund

म्यूच्यूअल फण्ड का प्रदर्शन (Mutual Fund Performance)

मैं ऊपर दिए गए फण्ड के पिछले 10 वर्ष के प्रदर्शन में बताऊँगा|

ध्यान दें इस बात की कोई गारंटी नहीं है की जैसे प्रदर्शन पहले किये है,आगे भी वह जारी रहेगा|

प्रदर्शन की जानकारी मैंने ValueResearch की वेबसाइट से ली है|

best mutual fund 2018 hindi बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड सिप 2018

मैंने म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम के रेगुलर प्लान का परफॉरमेंस दिखाया है| परन्तु आपके लिए बेहतर होगा की आप डायरेक्ट प्लान में निवेश करें|

Image Credit: Pixabay

Filed Under: Mutual Funds Tagged With: Sbi सिप इन्वेस्टमेंट प्लान, बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड, बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड 2018, बेस्ट सिप प्लान्स, बेस्ट सिप प्लान्स 2018, सिप इन्वेस्टमेंट बेस्ट प्लान

अपने लिए बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड का चुनाव कैसे करें?

Last updated: अगस्त 14, 2018 | by दीपेश 4 Comments

आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना चाहते हैं, परन्तु हज़ारों म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम हैं|

कौन सी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम में निवेश करें?

कौनसा म्यूच्यूअल फण्ड है आपके लिए बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड?

कोई एक फण्ड सभी के लिए अच्छा निवेश नहीं हो सकता| इसीलिए आपको अपने लिए बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड चुनना होगा|

इस पोस्ट में चर्चा करेंगे की आप कैसे अपने लिए अच्छा म्यूच्यूअल फण्ड चुन सकते हैं| अगर आप बना बनाया जवाब ढूढ़ रहे है, तो यह पोस्ट आपके लिए नहीं है| परन्तु अगर आप मेहनत करने को तैयार हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए लाभकारी हो सकती है|

#1 किस लिए निवेश कर रहे हैं और कितने समय के लिए निवेश कर रहे हैं

अगर आप छोटी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, तो डेब्ट म्यूच्यूअल फंड (Debt Mutual Fund) में निवेश करें|

अगर लम्बी अवधि (5 या 7 साल से ज्यादा) के लिए निवेश कर रहे हैं, तो इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने के बारे में सोच सकते हैं|

इसकी वजह है|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में शेयर बाज़ार के साथ काफी उतार चढ़ाव आता रहता है| अगर आपने कम अवधि के लिए इक्विटी फण्ड में निवेश किया, तो हो सकता है की जब आप अपने निवेश को बेचने जाएँ, उस समय शेयर बाज़ार गिरा हुआ हो| इस तरह आपको घाटा उठाना पड़ सकता है|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड एक लम्बी अवधि का निवेश है| आप छोटी अवधि के काम के लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड का इस्तेमाल न करें|

अगर आपको यह पैसा एक वर्ष बाद अपनी बेटी की कॉलेज के एडमिशन या घर के डाउन-पेमेंट के लिए चाहिए, तो इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड अच्चा विकल्प नहीं हैं| कम अवधि के लक्ष्य या काम के लिए डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड अच्छा विकल्प हो सकते हैं|

अगर आपको पैसा अपने नवजात शिशु की कॉलेज की पढाई के लिए चाहिए (जो की 15 से 18 वर्ष बाद होगी), इसके लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड एक अच्छा विकल्प हैं|

#2 यह तय करें की आप कितना रिस्क ले सकते हैं

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में रिटर्न अच्छे मिल सकते हैं पर साथ ही रिस्क भी रहता है| नुकसान भी हो सकता है| शेयर बाज़ार के उतार चढ़ाव के साथ आपके निवेश का मूल्य भी ऊपर नीचे होगा|

अगर आप यह उतर चढाव नहीं झेल सकते, तो इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में कम निवेश करें|

साथ ही, जैसे की ऊपर चर्चा करी है, अगर किसी काम के लिए कुछ समय बाद ही पैसे चाहिए, ऐसे पैसे के लिए आपकी रिस्क लेने की क्षमता कम हो जाती है| ऐसे काम के लिए भी इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश न करें|

#3 अपने लिए सही प्रकार का म्यूच्यूअल फण्ड चुनें

अब आपने यह फैसला कर लिया है की आपको इक्विटी या डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में से किस प्रकार के फण्ड में निवेश करना है|

परन्तु अभी आपकी परेशानी खत्म नहीं हुई|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड और डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड भी कई प्रकार के होते हैं|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड कई प्रकार के होते हैं: लार्ज कैप, मिड कैप, स्माल कैप, मल्टी-कैप, बैलेंस्ड इत्यादि

इसी तरह डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड भी कई प्रकार के होते हैं: लिक्विड, अल्ट्रा शार्ट टर्म, शोर्ट टर्म, लॉन्ग टर्म, गिल्ट फण्ड

विभिन्न प्रकार के म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में जानने के लिए आप यह पोस्ट पढ़ें|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में आप एक लार्ज कैप और एक मिड कैप फण्ड उठा सकते हैं| यदि आपको अभी थोडा डर लगता है, तो आप balanced fund भी ले सकते हैं| 2-3 अलग तरह के फण्ड लें और उनमें निवेश शुरू करें|

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में मैं लिक्विड और अल्ट्रा शोर्ट टर्म फण्ड पसंद करता हूँ|

#4 लम्बी अवधि के परफॉरमेंस पर भी नज़र डालें

अब कौन सा लार्ज कैप, मिड कैप या बैलेंस्ड फण्ड चुनें?

कई बार हम लोग फण्ड चुनते समय केवल हाल के ही परफॉरमेंस पर ध्यान देते हैं|

ऐसा न करें|

लम्बी अवधि के परफॉरमेंस पर ध्यान दें|

केवल पिछले 3 से 6 महीने के परफॉरमेंस को न देखें| पिछले 5 से 10 साल के परफॉरमेंस को देखें और फैसला करें|

ऐसे फण्ड को चुनें जिसनें पिछले 3, 5 या 10 सालों में अच्छा परफॉर्म किया हो|

आईये देखते हैं की आप कैसे इस तरीके से अपने लिए बेस्ट फण्ड चुन सकते हैं|

आप ValueResearch की वेबसाइट पर जा कर Large Cap फण्ड को पिछले 10 साल के रिटर्न के अनुसार सॉर्ट कर सकते हैं और सबसे अच्छे 20 फण्ड निकाल लें|

फिर 5 साल और 3 साल के रिटर्न के अनुसार भी सॉर्ट कर लें और टॉप 20 फण्ड निकाल लें|

जो फण्ड तीनों बार टॉप 20 में रहे, उनमें से आप किसी भी फण्ड को चुन सकते हैं|

#5 फण्ड हाउस और फण्ड मेनेजर का रिकॉर्ड भी देखें

मैं ऐसी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम में निवेश करने की कोशिश करता हूँ जिसमें वही फण्ड मेनेजर काफी समय से स्कीम को मैनेज कर रहा हो|

साथ ही मैं बड़ी म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी के साथ निवेश करना पसंद करता हूँ| यह मेरी व्यक्तिगत राय है|

#6 फण्ड के Expense Ratio (खर्चों) पर भी ध्यान दें

अब फण्ड के जो भी खर्च होता है, वह आपके पैसे से ही आता है|

तो जितना कम खर्चा फण्ड करेगा, उतने ही बेहतर आपको रिटर्न मिलेंगे|

इसके लिए आप फण्ड का expense ratio देख सकते हैं| जितना कम है, उतना अच्छा है|

मैंने जो भी ऊपर लिखा है, वह सारी जानकारी आपको आसानी से ValueResearch की वेबसाइट पर मिल जायेगी| साथ ही, म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करते समय इन गलतियों से भी बचें|

अगर आप स्वयं यह सब काम नहीं कर सकते, तो किसी फाइनेंसियल एडवाइजर से परामर्श लें|

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कैसे जानें की आपका आधार कार्ड म्यूच्यूअल फंड निवेश से लिंक हुआ है की नहीं?

Last updated: फ़रवरी 28, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

यदि आपने अभी तक अपने आधार नंबर को म्यूच्यूअल फण्ड निवेश से नहीं जोड़ा है, तो आप इस पोस्ट का पढ़ें और कुछ ही मिनटों में अपना आधार नंबर म्यूच्यूअल फण्ड निवेश में अपडेट कर दें।

पढ़ें: कैसे लिंक करें आधार कार्ड को म्यूच्यूअल फण्ड निवेश के साथ?

परन्तु लिंक करने के बाद भी एक समस्या है|

आपको कैसे पता चलेगा की आपकी आधार लिंकिंग सही से हुई या नहीं|

लिंकिंग तुरंत नहीं होती| आपके आधार की जानकारी ले ली जाती है| उसके बाद आपकी जानकारी आधार डेटाबेस से निकाली जाती है और उसे म्यूच्यूअल फण्ड फोलियो में जानकारी से मिलाया जाता है|

अगर नाम, जन्मतिथि, पता इत्यादि सही है (मेल खाती हैं), तो आपके आधार म्यूच्यूअल फण्ड से लिंक हो जाएगा|  आपके पास पुष्टिकरण की ई-मेल भी आएगी|

अगर लिंकिंग फ़ैल हो जाती है, तो आपके पास रिजेक्शन की ई-मेल आ जाती है|

मेरे पास CAMS से कुछ ऐसी ई-मेल आई|

अब समस्या यह है की अगर किसी तरह आपसे ई-मेल मिस हो गयी, तो आपको स्टेटस कैसे पता चलेगा|

अब यह पता करना हो की आपका आधार लिंक हुआ है या नहीं, इस बात के कई तरीके हैं|

  1. आप म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी को कॉल या ई-मेल करके चेक कर सकते हैं|
  2. यह भी मुमकिन है की जब आप म्यूच्यूअल फण्ड वेबसाइट पर लॉग इन करें, तब यह जानकारी अपने आप ही आ जाए|

परन्तु यहाँ आपको हर म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी को कॉल करके पता करना होगा| अब यह काफी लम्बा काम हो सकता है|

इससे भी एक आसान तरीका है|

CAMS की वेबसाइट पर जा कर

CAMS वेबसाइट पर जा कर आप आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूच्यूअल फण्ड, एचडीएफसी  म्यूच्यूअल फण्ड , एसबीआई म्यूच्यूअल फण्ड, आदित्य बिरला सन लाइफ म्यूच्यूअल फण्ड, डीएसपी ब्लैकरोक म्यूच्यूअल फण्ड आदि के साथ आधार linking स्टेटस चेक कर सकते हैं|

  1. निम्नलिखित लिंक पर जाएँ| https://adl.camsonline.com/InvestorServices/COL_AdhaarMain.aspx
  2. Aadhaar Linking Status-Individual पर क्लिक करेंmutual fund CAMS aadhaar card linking status 2
  3. अपना PAN नंबर डालें और सबमिट पर क्लिक करें
  4. यदि आपका आधार आपके पैन (और संबंधित म्यूच्यूअल फण्ड फोलियो) से जुड़ा हुआ है, तो आपको “Aadhaar available for given PAN” संदेश मिलेगा।
  5. यदि आधार लिंक नहीं है, तो आपको ““Aadhaar to be provided for the given PAN” का सन्देश मिलेगा|

Karvy वेबसाइट पर जा कर

यहाँ पर आप Axis म्यूच्यूअल फण्ड, रिलायंस म्यूच्यूअल फण्ड आदि के साथ आधार स्टेटस जान सकते हैं|

  1. निम्नलिखित लिंक पर जाएं| https://vas.karvymfs.com/karvysplproducts/AdhaarlinkingStatus.aspx
  2. “Individuals-Click Here” पर क्लिक करें
  3. अपना PAN नंबर डालें और सबमिट करें।
  4. आपको अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी (OTP) मिलेगा|
  5. यदि आधार लिंक हो गया है, तो आपको संदेश मिलेगा: Aadhaar Seeding Successful
  6. यदि आधार लिंक नहीं हुआ है, तो आपको संदेश मिलेगा: Aadhaar not registered

अब देर किस बात की| जल्दी ऊपर दिए गए लिंक पर जाएँ और पता करें की आपका आधार म्यूच्यूअल फण्ड निवेश से लिंक हुआ है की नहीं|

फ्रेंकलिन टेम्पलटन (Franklin Templeton) और सुंदरम (Sundaram) की वेबसाइट पर कोई भी आधार स्टेटस चेक करने का कोई लिंक नहीं मिला| यहाँ पर आप अपने आधार लिंकिंग की स्थिति (status) जानने के लिए फोन या ई-मेल कर सकते हैं।

Filed Under: Aadhaar, Mutual Funds Tagged With: आधार कार्ड म्यूच्यूअल फण्ड, म्यूच्यूअल फण्ड आधार कार्ड

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर देना होगा 10% Long Term Capital Gains Tax

by दीपेश Leave a Comment

अब आपको अपने इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट को एक बर्ष (या उससे ज्यादा) बाद बेचने पर होने वाले मुनाफे पर टैक्स देना होगा|

अगर आप सीधे शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं, तब भी आपको मुनाफे पर टैक्स देना होगा|

यह प्रस्ताव बजट 2018 में लाया गया है|

Long Term Capital Gains Tax और Short Term Capital Gains Tax क्या है?

शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के लिए देखते हैं|

अगर आप एक साल के अन्दर बेचते हैं और मुनाफे होता है, ऐसे मुनाफे को Short term capital gain (शोर्ट टर्म कैपिटल गेन) कहते हैं|

ऐसे मुनाफे पर आपको 15% टैक्स देना होता है|

(Holding period <= 1 year )   ==> Short Term Capital Gain  ==> 15% टैक्स मुनाफे पर

अगर आप एक साल के बाद बेचते हैं और मुनाफे होता है, ऐसे मुनाफे को Long term capital gain (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन या LTCG) कहते हैं|

ऐसे मुनाफे पर आपको अभी तक कोई टैक्स नहीं देना होता था| पर अप्रैल 1, 2018 से आपको 10% टैक्स देना होगा| यह प्रस्ताव बजट 2018 में लाया गया है|

(Holding period > 1 year) ==> Long Term Capital Gain (LTCG)  ==> 10% टैक्स मुनाफे पर

इन बातों पर ध्यान दें

  1. ऊपर दिए गए नियम शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के लिए हैं|
  2. डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड के टैक्स नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है|
  3. यह नियम 1 April 2018 से लागू होगा| इसका मतलब अगर मार्च 31 2018 तक बेचने पर कोई Long Term Capital Gain होता है, तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा|
  4. जो मुनाफा आपको 31 जनवरी 2018 तक हो चुका है, उस पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा| इसके ऊपर जो मुनाफा होगा केवल उस पर टैक्स देना होगा| (GrandFathering) इस बारे में बाद में विस्तार से चर्चा करेंगे|
  5. आपको एक लाख रुपये तक के LTCG (एक वर्ष में) पर कोई टैक्स नहीं देना होगा| जब LTCG (शेयर या इक्विटी फण्ड बेचने) पर एक लाख से ज्यादा होगा, तब ही आपको अतिरिक्त लाभ पर 10% टैक्स देना होगा| तो समझ लिए की पहले एक लाख के लॉन्ग टर्म capital gain पर टैक्स की छूठ है|
  6. अगर आपको 1.5 लाख रुपये का LTCG हुआ है, तो आपको टैक्स केवल 50,000 रुपये पर ही देना होगा|
  7. आपको LTCG पर फ्लैट 10% टैक्स देना होगा| Indexation का लाभ नहीं मिलेगा|
  8. टैक्स पर cess (सेस) भी लगेगा| Cess अब 4% कर दिया गया है| तो आपको दरअसल 10.4% टैक्स देना होगा|

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स बजट 2018


शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कैसे कैलकुलेट किया जाएगा?

पहली बात, long term capital gain तभी होगा की जब आप अपने निवेश को एक वर्ष बाद बेचें|

उससे पहले बेचते हैं, तो short term capital gain माना जाएगा और आपको 15% टैक्स देना होगा|

अगर आपने जनवरी 31, 2018 के बाद शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट खरीदें हैं

और आप यह निवेश एक साल बाद बेचते हैं, तो जो भी मुनाफा है उस पर 10% टैक्स देना होगा|

यहाँ मुनाफा निकालना भी आसान है| आपने जितना निवेश किया और जितने में बेचा, उसका अंतर आपका मुनाफा होगा|

बस पहले 1 लाख रुपये के मुनाफे पर टैक्स नहीं देना होगा| बचे हुए LTCG पर 10% टैक्स देना होगा|

अगर आपने जनवरी 31, 2018 को या उससे पहले शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट खरीदें हैं

यहाँ पर भी अगर एक साल बाद बेचते हैं, तो 10% टैक्स देना होगा| पर  capital gain या मुनाफा कैलकुलेट करने का नियम थोड़ा सा अलग है|

समझ लिए capital gains कैलकुलेट करने के लिए आपके खरीद मूल्य (purchase price) और जनवरी 31, 2018 के मूल्य में जो राशि ज्यादा है, वह मानी जायेगी|

तो मान लिए की आप शेयर 100 रुपये में खरीदा था| जनवरी 31, 2018 को उसका price 130 रुपये था| जब आप बेचते हैं, तो उसका मूल्य 170 रुपये है|

Long term capital gain निकालने के लिए आपके purchase price को 130 रुपये माना जाएगा| इसी बात को GrandFathering कहते हैं|

जब आप 170 रुपये में बेचेंगे, तो मुनाफा 40 रुपये (170-130) का माना जाएगा और न की 70 रुपये का| हालांकि आपको मुनाफा 70 रुपये का हुआ है, टैक्स कैलकुलेट करने के लिए आपका मुनाफा 40 रुपये माना जाएगा|

इस चालीस रुपये पर आपको 10% टैक्स देना होगा|

देख्रें तो आपको 31 जनवरी 2018 तक हुए फायदे को टैक्स नहीं किया जाएगा|

अगर आप तकनिकी गहराई में जाना चाहते हैं, तो आपको खरीदने के price को निकालने के लिए यह करना होगा|

यह तीन राशि लें:

  1. आपके खरीदने का मूल्य (Purchase Price)
  2. जनवरी 31 2018 को highest price (शेयर के मामले में) या उस दिन का म्यूच्यूअल फण्ड NAV (Highest price on January 31 2018 in case of share or Mutual Fund NAV)
  3. आपके बेचने का मूल्य (sale price)

आपका खरीद मूल्य माना जाएगा: Higher of (1, Lower of (2,3))

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स 2

एक बात और, आपको पहले एक लाख के LTCG पर कोई टैक्स नहीं देना होगा|

तो मान लिए, आपने अगस्त 15, 2017 को 5 लाख रुपये निवेश किया| जनवरी 31 2018 को उसका मूल्य 7 लाख हो गया| आपने 15 दिसम्बर 2018 को अपने इक्विटी निवेश को बेच दिया 10 लाख रुपये में|

क्योंकि आपने 1 साल से अधिक समय तक अपने निवेश की होल्ड किया, मुनाफे को long term capital gain (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन) माना जाएगा|

तो आपका LTCG हुआ 10 लाख – 7 लाख रुपये = 3 लाख रुपये

इसमें पहले 1 लाख रुपये पर आपको टैक्स नहीं देना होगा|

बचे हुए 2 लाख रुपये के LTCG पर आपको 10% टैक्स देना होगा|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड से मिलने वाले dividend पर भी अब 10% टैक्स लगेगा

अभी तब कोई टैक्स नहीं लगता था|

पर ध्यान दें यह टैक्स आपको नहीं देना होगा| म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी आपके लिए टैक्स का भुगतान करेगी| पर टैक्स आएगा आपके पैसे से ही|

तो मान लिए म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी को 10 रुपये का dividend देना है, तो वह 1 रुपये का टैक्स जमा कर देगी और बचे हुए 9 रुपये आपको दे देगी| इसे Dividend Distribution Tax (DDT) भी कहते हैं|

एक बात औए, DDT पर सरचार्ज (surcharge) और सेस (Cess) भी लगेगा| अब इनकी वैल्यू बदलती रहती है| सरचार्ज 12% है और सेस (cess) 3% से बढ़ाकर 4% कर दिया गया है|

तो कुल मिलाकर आपके ऊपर असर 11.65% का आएगा|

और हाँ, यह टैक्स भी 31 मार्च 2018 के बाद ही लगेगा|


आपको क्या करना चाहिए?

पहली बात तो आपको अपने निवेश को बेचने की कोई ज़रुरत नहीं है| ऐसा इसलिए क्योंकि 31 जनवरी तक हुए मुनाफे पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा|

पर हाँ, आपके निवेश की वैल्यू अगर 31 जनवरी और 31 मार्च 2018 के बीच में काफी बढ़ जाती है, तो आप 31 मार्च से पहले बेच सकते हैं क्योंकि आपको 31 मार्च टैक्स कोई टैक्स नहीं देना होगा|

साथ ही आप हर साल कुछ-कुछ मुनाफा बुक कर सकते हैं| ऐसा इसलिए की 1 लाख रुपये तक के LTCG मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं है| बेचने के बाद आप दोबारा से निवेश कर सकते हैं|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के dividend स्कीम में निवेश करना कभी भी अच्छा आईडिया नहीं था| अब 10% टैक्स के बाद और भी बुरा हो गया है| ध्यान दें dividend के टैक्स पर 1 लाख रुपये की छूठ नहीं है| इसलिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड की dividend स्कीम से बचें और Growth स्कीम में निवेश करें|

Credit: www.PersonalFinancePlan.in

पढ़ें: बजट 2018 की महत्वपूर्ण घोषणाएं

Filed Under: Financial Planning, Mutual Funds, Tax Planning Tagged With: budget 2018, long term capital gains tax, LTCG on equity mutual funds, बजट 2018, म्यूच्यूअल फंड्स पर टैक्स, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स

म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करते समय इन गलतियों से बचें

Last updated: अगस्त 2, 2018 | by दीपेश 2 Comments

अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो इन गलतियों या गलतफ़हमियों से बचें|

अगर आपके लिए म्यूच्यूअल फण्ड बिल्कुल भी जानकारी नहीं है, तो म्यूच्यूअल फण्ड की बुनियादी जानकारी के लिए पहले इस पोस्ट (क्या हैं म्यूच्यूअल फण्ड? What is a Mutual Fund? (in Hindi) को पढ़ें|

#1 अगर NAV कम है, तो बेहतर है

NAV म्यूच्यूअल फण्ड के एक यूनिट के दाम को कहते हैं| इसका मतलब अगर NAV 50 रुपये है, इस इसका मतलब म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट की कॉस्ट 50 रुपये है|

अगर 5,000 रुपये का निवेश करते हैं, तो आपको 100 यूनिट मिलेंगे|

किसी दूसरे फण्ड का NAV अगर 100 रुपये है, तो 5,000 हज़ार निवेश करने पर आपको 50 यूनिट मिलेंगे|

तो, कौनसा म्यूच्यूअल फण्ड बेहतर हुआ?

म्यूच्यूअल फण्ड के NAV से कुछ भी फर्क नहीं पड़ता|

किसी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम का NAV कम होने का मतलब यह नहीं की वह सस्ता है|

म्यूच्यूअल फण्ड कोई शेयर नहीं है|

मान लिए आप दोनों स्कीम में 5,000 रुपये निवेश करते हैं| दोनों ही फण्ड 20% रिटर्न देते है|

पहली स्कीम का NAV 60 हो जाएगा|

दूसरी का 100 से 120 हो जाएगा|

पहली स्कीम में आपके निवेश का मूल्य होगा: 100 X 60 = 6,000 रुपये

दूसरी स्कीम में आपके निवेश का मूल्य होगा: 50 X 120 = 6,000 रुपये

देखा, कोई अंतर नहीं पड़ा|

इसलिए म्यूच्यूअल फंड में निवेश करते समय म्यूच्यूअल फण्ड के NAV पर बिलकुल भी ध्यान न दें|

फण्ड का चयन करते समय ध्यान दे उसके परफॉरमेंस पर और इस बात पर की वह फण्ड आपके पोर्टफोलियो मके लिए लाभकारी है की नहीं|

#2 पोर्टफोलियो में बहुत सारे म्यूच्यूअल फण्ड होना

कोई भी मौका छोड़ना नहीं चाहता| तो काफी लोग बहुत सारे म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कर देते हैं| जैसे कि पांच मिड कैप फण्ड में निवेश कर दिया| कोई न कोई फण्ड तो अच्छा करेगा ही|

मेरे अनुसार यह एक अच्छा विचार नहीं है| इससे आपको अपने पोर्टफोलियो में निर्णय लेने में और उसको मैनेज करने में बहुत परेशानी होगी|

कोशिश करें की आपके पास एक तरह के एक-दो से ज्यादा फण्ड न हो|

#3 सारे म्यूच्यूअल फण्ड शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं

ऐसा भी नहीं है|

जैसा की हमनें पिछली पोस्ट में देखा था, डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड शेयर मार्केट में निवेश नहीं करते और ऐसे फण्ड में निवेश करने पर आपको शेयर केजार के उतार चढ़ाव का सामना नहीं करना पड़ेगा|

#4 हाल के परफॉरमेंस पर ज्यादा ध्यान देना

काफी लोग फण्ड चुनने के लिए पिछले कुछ महीने के या पिछले कुछ साल के रिटर्न कर ज्यादा ध्यान देते हैं| गलत नहीं है|

परन्तु मेरे अनुसार आपको लम्बी अवधि का दौरान परफॉरमेंस (long term performance) पर अधिक ध्यान देना चाहिए| इससे आपको पता पड़ेगा की फण्ड कितना consistent है और शेयर बाज़ार के उतार chadhaav के दौरान उसने कैसा परफॉर्म किया है|

#5 म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने पर नुकसान नहीं हो सकता

कम से कम कुछ लोग तो ऐसा ही सोचते हैं की म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने पर या म्यूच्यूअल फण्ड में SIP (सिप) के द्वारा निवेश करने पर कुछ नुक्सान नहीं हो सकता|

पढ़ें: क्या हैं म्यूच्यूअल फण्ड SIP?

यह गलत है| आप कैसे भी निवेश करें, नुकसान तो हो ही सकता है| ध्यान दें इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं| जब शेयर बुरा करेंगे, तो म्यूच्यूअल फण्ड में भी नुकसान हो सकता है|

काफी लोग इस धारणा से म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने आते हैं और फिर निराश हो कर निवेश करना छोड़ देते हैं|

#6 कम अवधि के लिए निवेश करना

अगर आप इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो म्यूच्यूअल फण्ड को जादू की छड़ी न समझे|

यह सोचना गलत है की कुछ महीने में ही या एक-दो साल में आपका पैसा दोगुना या तिगुना हो जाएगा| 

यह सोच कर निवेश करेंगे तो आपको निराशा ही हाथ लगेगी| लम्बी अवधि के लिए निवेश करें|

यह थी कुछ म्यूच्यूअल फण्ड निवेश से जुडी कुछ गलतियाँ और गलतफ़हमियाँ|

अगर आपको पोस्ट अच्छी लगी हो, तो अपने परिवार और मित्रों से अवश्य शेयर करें|

Filed Under: Mutual Funds Tagged With: mutual fund mistakes, म्यूच्यूअल फण्ड, म्यूच्यूअल फण्ड में गलतियों से बचें

सेक्शन 80C के तहत इनकम टैक्स बचाने के 15 आसान तरीके

Last updated: दिसम्बर 28, 2017 | by दीपेश 6 Comments

जैसे जैसे वित्तीय वर्ष का अंत निकट आता है, वैसे ही हमारी टैक्स बचत के तरीकों की खोज शुरू हो जाती है| अब टैक्स बचाने के कई तरीके हैं|

आपको क्या करना चाहिए? टैक्स कैसे बचाएँ?

सभी के लिए शायद एक ही सुझाव सही नहीं हो सकता| सब को अपनी परिस्थितियों के अनुसार निवश के विकल्प को चुनना चाहिए’|

पिछली पोस्ट में मैंने हेल्थ इंश्योरेंस ख़रीदने पर जो टैक्स बेनिफिट मिलते हैं उस पर चर्चा करी थी|

पढ़ें: हेल्थ इंश्योरेंस (स्वाश्थ्य बीमा) खरीदने पर कितना टैक्स बचा सकते हैं?

इस पोस्ट में मैं चर्चा करूंगा Section 80C के तहत मिलने वाले टैक्स बचत के बारे में| जानेंगे की धारा 80C के तहत आपके पास क्या हैं टैक्स बचत के तरीके|

धारा 80 C  के योग्य योग निवेश उत्पादों में निवेश कर आप अपनी कर योग्य आय को 1.5 लाख तक से घटा सकते हैं। 30% टैक्स स्लैब में आने वाले निवेशकों के लिए इस मतलब है 46,350 रुपये की बचत|

कृपया ध्यान दें कि आप प्रति वर्ष 80 C उत्पादों में 1.5 लाख से अधिक भी निवेश कर सकते हैं। परन्तु कर लाभ केवल 1.5 लाख तक सीमित होगा।

उदाहरण के लिए, आपने पीपीएफ में 50,000 रुपये, ईपीएफ में 60,000 रुपये और ईएलएसएस में 1 लाख रुपये का निवेश किया है। हालांकि कुल निवेश 2.1 लाख रुपये है, धारा 80 सी के तहत टैक्स बेनिफिट केवल 1.5 लाख तक सीमित होगा

आमतौर पर, सभी धारा 80 C  के सभी टैक्स बचत के तरीकों में  लॉक-इन होता है। इसका मतलब कुछ समय तक आपका पैसा अटक जाता है|

आईये कुछ लोकप्रिय निवेश उत्पादों को देखते हैं, जिनमें निवेश करने पर आपको Section 80क के तहत टैक्स बचत का लाभ मिलता है|

#1 पीपीएफ (Public Provident Fund or PPF)

आप अपने, पति/पत्नी या बच्चों के PPF खातों में निवेश करने पर टैक्स बेनिफिट मिलता है|

माता-पिता या भाई-बहनों के पीपीएफ खाते में निवेश करने पर कोई टैक्स बचत नहीं होती।

पीपीएफ खाता खोलने वाले वित्तीय वर्ष के अंत से 15 वर्षों में परिपक्व होता है| इसलिए, पहले वर्ष का निवेश 15 साल के लिए लॉक हो जाएगा, दूसरे वर्ष का निवेश 14 साल के लिए लॉक हो जाएगा।

पीपीएफ खाता परिपक्व होने पर पांच वर्षों के ब्लाक में खाते की अवधि बढ़ा सकते हैं|

पढ़ें: पीपीएफ खाते के बैर में पूरी जानकारी

पीपीएफ खाते से मिलने वाले ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होता| साथ ही परिपक्वता पर मिलने वाली राशि पर कोई टैक्स नहीं लगता|

वित्त मंत्रालय हर तिमाही ब्याज दर सूचित करता है।

अभी ब्याज दर 7.6% p.a. हो गयी है|  (January 1, 2018)

ध्यान दें यह ब्याज दर हर तीन महीने पर बदल सकती है|

नवीनतम ब्याज दर (interest rate) जानने के लिए आप इस पोस्ट पर जाएँ|

पढ़ें: PPF में interest (ब्याज) कैसे कैलकुलेट होता है?


#2 कर्मचारी भविष्य निधि / स्वैच्छिक भविष्य निधि (Employee Provident Fund / Voluntary Provident Fund)

अगर आप सैलरी पाते हैं, तो शायद इसमें आप पहले से ही निवेश कर रहे हैं| राशि स्वचालित रूप (automatically) से आपके वेतन से काट ली जाती है और ईपीएफ में निवेश की जाती है। आप अपनी सैलरी स्लिप की जांच कर सकते हैं कि आप प्रति माह कितना ईपीएफ में निवेश कर रहे है |

एक बात और, अगर आप नौकरी कर रहे हैं, तो शायद आपका EPF में पहले से ही योगदान जा रहा हो| अब क्योंकि ईपीएफ में निवेश करने पर Section 80C के तहत लाभ मिलता है, तो कुछ निवेश तो आपका पहले ही अपने आप हो चुका है| 1.5 लाख की टैक्स सीमा तक पहुचने के लिए आपको केवल बची हुई राशि ही निवेश करनी है| आप बाद में शेष निवेशों की योजना बना सकते हैं।

कृपया ध्यान दें कि केवल आपका  योगदान ही धारा 80 सी के तहत कर लाभ के योग्य है। आपके एम्प्लायरद्वारा आपके EPF में योगदान पर धरा 80C के तहत लाभ नहीं मिलता| आप अपने अनिवार्य ईपीएफ योगदान से अधिक योगदान भी कर सकते हैं। यह योगदान (वीपीएफ) धारा 80 सी के तहत टैक्स बचत के योग्य है।


#3 इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस)

ईएलएसएस एक प्रकार के इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड होते हैं और निवेश करने पर 3 वर्ष का लॉक-इन पीरियड होता है| काफी लोग ईएलएसएस को tax-saving mutual fund के नाम से जानते हैं।

ध्यान दे, प्रत्येक निवेश पर 3 साल का लॉक-इन पीरियड होता है।

भले ही आप SIP  (सिस्टममैटिक इनवेस्टमेंट प्लान) के माध्यम से निवेश कर रहे हों, लेकिन SIP  की प्रत्येक किश्त को 3 साल तक लॉक कर दिया जाएगा। यदि पहली किश्त 15 जनवरी 2018 की है, तो इस किश्त से खरीदी गयी यूनिट्स आप 15 जनवरी 2021 तक खरीदे गए यूनिट्स  को नहीं बेच सकते हैं। दूसरी किस्त (15 फरवरी, 2018) से खरीदी गयी यूनिट्स आप 15 फरवरी, 2021 तक नहीं बेच सकते|

क्योंकि ईएलएसएस (ELSS) यूनिट्स को आप 3 वर्ष से पहले नहीं बेच सकते, तो ऐसी यूनिट्स बेचने पर होने वाले फायदे पर आपको टैक्स नहीं देना होता| ऐसा इसलिए क्योंकि इक्विटी म्यूच्यूअल फंड्स को एक साल बाद बेचने पर कोई टैक्स नहीं देना होता|

पढ़ें: ईएलएसएस (ELSS) के बारे में कुछ दिलचस्प बातें


#4 टर्म लाइफ इंश्योरेंस (Term Life Insurance)

टर्म लाइफ इंश्योरेंस जीवन बीमा खरीदना का सबसे अच्छा तरीका है|

एक टर्म कवर के साथ आप कम लागत पर काफी अधिक कवर खरीद सकते हैं। अगर आपको कभी कुछ हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में यह राशि आपके परिवार के काफी काम आएगी|

आपके पास हमेशा पर्याप्त जीवन बीमा होना चाहिए।

स्वस्थ 30 वर्षीय पुरुष के लिए 1 करोड़ रुपये के कवर के लिए वार्षिक प्रीमियम लगभग 7,000-10,000 होगा।

ध्यान दें टैक्स बेनिफिट लेने की लिए आपको हर वर्ष नया प्लान लेने की आवश्यकता नहीं है| आपका रिन्यूअल (renewal) प्रीमियम (जो आप पालिसी चालू रखें के लिए हर वर्ष देते हैं) भी धारा 80C के तहत योग्य है|

पढ़ें: 5 बेस्ट टर्म इंश्योरेंस प्लान


#5 यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान, Unit Linked Insurance Plans (ULIPs)

यूलिप जीवन बीमा योजनाओं का एक रूप है, जिसमें निवेश का लाभ भी मिलता है। प्रीमियम का एक हिस्सा जीवन कवर प्रदान करने की ओर जाता है, जबकि बचा हुआ हिस्सा आपके इच्छा के अनुसार फण्ड में निवेश कर दिया जाता है। पूरे प्रीमियम पर धारा 80 सी के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है।

पांच साल का लॉक-इन होता है। इसका मतलब है कि आप पॉलिसी के प्रारंभ होने की तारीख से पांच साल तक अपना पैसा नहीं ले सकते। इसलिए, आपका पहला वार्षिक प्रीमियम 5 साल के लिए लॉक-इन किया जाएगा, दूसरा प्रीमियम 4 साल के लिए। छठी  किश्त से कोई लॉक-इन नहीं है ।

ध्यान से आप पांचवे वर्ष के अंत तक किसी भी तरह से पैसे नहीं निकाल सकते, भले ही आप अपनी पालिसी को बंद कर दें|

धारा 80 सी के अनुसार, यदि आप लगातार 5 वर्षों तक प्रीमियम का भुगतान नहीं करते हैं तो धारा 80 सी के तहत मिले टैक्स लाभ की वापिस ले लिए जाएगा।

पढ़ें: किस प्रकार का जीवन बीमा खरीदें?


#6 पारंपरिक जीवन बीमा योजनाएं / मनी बैक योजनाएं (Traditional Life Insurance Plan)

मेरे अनुसार ऐसे प्लान से दूर ही रहे| ऐसे प्लान में जीवन बीमा भी कम मिलता है और रिटर्न भी कम होते हैं|यदि आप दो साल के लिए प्रीमियम का भुगतान नहीं करते हैं तो कर लाभ रिवर्स (reverse) कर दिया जाएगा।

पढ़ें: एलआईसी न्यू जीवन आनंद के बारे में पूरी जानकारी

जीवन बीमा पॉलिसियों के बारे में एक बात पर ध्यान दें: यह बात यूलिप और ट्रेडिशनअल इंश्योरेंस प्लान पर भी लागू होती है। बीमित रकम (Sum Assured) के 10% से अधिक वार्षिक प्रीमियम आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत कटौती के लिए योग्य नहीं है। यह अप्रैल 1, 2012 के बाद खरीदी गई नीतियों के लिए है।

इसके अतिरिक्त, केवल स्वयं, पति या पत्नी और बच्चों के लिए जीवन बीमा प्रीमियम का भुगतान धारा 80 सी के तहत कटौती के लिए पात्र है। माता-पिता और भाई-बहनों के जीवन बीमा के लिए प्रीमियम का भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं है।


#7 5-वर्षीय बैंक की फिक्स्ड डिपॉज़िट (5-year Tax Saving Fixed Deposit)

आम तौर पर टैक्स सेवर फिक्स्ड डिपॉजिट (tax saver fixed deposit) के रूप में जाना जाता है।

इस फिक्स्ड डिपाजिट की अवधि 5 वर्ष होती है| इसका मतलब आप पांच साल से पहले इस जमा राशि को नहीं निकाल सकते। मिलने वाले ब्याज पर आपकी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होता है|

पढ़ें: टैक्स बचाने के लिए ईएलएसएस और 5-वर्षीय फिक्स्ड डिपाजिट में किसमें करें निवेश?


#8 डाकघर 5-वर्षीय डिपॉज़िट

यह 5-वर्षीय बैंक की फिक्स्ड डिपॉज़िट के समान है । यदि 5 साल के अंदर जमा (टूटी हुई) वापस ले लिया जाता है तो कर लाभ वापस कर दिया जाएगा। ऐसे डिपाजिट के लिए ब्याज दर वित्त मंत्रालय द्वारा हर तिमाही (every quarter) घोषणा की जाती है।

ध्यान दे, जो डिपाजिट खोलते समय ब्याज दर है, वही आपको पूरे 5 साल मिलती है| ब्याज दर मिएँ बदलाव का आपके पुराने डिपाजिट पर नहीं पड़ता|

अभी यह दर  7.4% p.a. हो गयी है|(January 1, 2018)

ध्यान दें यह ब्याज दर हर तीन महीने पर बदल सकती है|

नवीनतम ब्याज दर (interest rate) जानने के लिए आप इस पोस्ट पर जाएँ|


#9 राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र, National Savings Certificate (NSC)

परिपक्वता (5 वर्ष या 10 वर्ष) से पहले कोई भुगतान नहीं है । समय से पहले पैसे वापसी की अनुमति नहीं है ।

ब्याज कर योग्य है हालांकि, अर्जित ब्याज एनएससी में निवेश को समझा जाता है और धारा 80 सी के तहत कटौती के लिए पात्र है,

इसका मतलब  प्रत्येक वर्ष के ब्याज को एनएससी में निवेश माना जाता है।

वित्त मंत्रालय द्वारा हर तिमाही ब्याज दर सूचित करता है|

अभी एनएससी की ब्याज दर (NSC Interest Rate) 7.6% p.a. हो गयी है। (January 1, 2018)

ध्यान दें यह ब्याज दर हर तीन महीने पर बदल सकती है|

नवीनतम ब्याज दर (interest rate) जानने के लिए आप इस पोस्ट पर जाएँ|


#10 वरिष्ठ नागरिक बचत योजना, Senior Citizen Savings Scheme (SCSS)

केवल वरिष्ठ नागरिक ही इस योजना में निवेश करने के लिए पात्र हैं। खाता 5 वर्षों में परिपक्व होता है। आंशिक वापसी (partial withdrawal) की अनुमति नहीं है । हालांकि, आप कुछ जुर्माना देकर अकाउंट को 5 वर्ष से पहले  बंद कर सकते हैं। समयपूर्व बंद होने के मामले में टैक्स बेनिफिट वापिस ले लिए जायेंगे।

हर तिमाही वित्त मंत्रालय द्वारा ब्याज दर अधिसूचित की जाती है|

अभी ब्याज दर 8.3% p.a. चल रही है| (January 1, 2018)

नवीनतम ब्याज दर (interest rate) जानने के लिए आप इस पोस्ट पर जाएँ|

सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें|

पढ़ें: सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम के बारे में पूरी जानकारी


#11 होम लोन पर प्रिंसिपल रीपेमेंट (Home Loan Principal Repayment)

अगर आपने होम लोन लिया है, तो उस लोन पर principal का भुगतान भी सेक्शन 80C के तहत लाभ के योग्य है|

ध्यान दें आप एक निर्माणाधीन प्रॉपर्टी (under-construction property) के लिए प्रिंसिपल के भुगतान पर टैक्स बेनिफिट नहीं ले सकते| घर का निर्माण पूर्ण होने के बाद ही आप कटौती का लाभ उठा सकते हैं ।

स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क धारा 80 सी के तहत कटौती के लिए भी पात्र हैं। हालांकि, इस तरह के शुल्क के भुगतान के लिए कर लाभ केवल उस वर्ष में लिया जा सकता है जब आप भुगतान करते हैं।

एक बात और, जिसवर्ष आपको घर का possession मिलता है, उस वित्तीय वर्ष के अंत से 5 साल के भीतर अगर आप घर बेचते हैं, तो आपको मिले टैक्स बेनिफिट वापिस ले लिए जायेंगे|


#12 दो बच्चों के लिए ट्यूशन फीस

आप दो बच्चों तक के लिए ट्यूशन फीस पर भी टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं। यदि आपके पास दो से अधिक बच्चे हैं, तो आप किसी भी दो के लिए दावा कर सकते हैं। भारत में स्थित विश्वविद्यालय, कॉलेज, स्कूल या अन्य शैक्षणिक संस्थान को फीस का भुगतान किया जाना चाहिए था।

बेनिफिट केवल पूर्णकालिक शिक्षा (full-time education)के लिए भी उपलब्ध है। निजी ट्यूशन, कोचिंग क्लास या किसी अंशकालिक कोर्स के लिए खर्च पात्र नहीं हैं।

अपनी शिक्षा या पति / पत्नी की शिक्षा के लिए खर्च भी टैक्स बेनिफिट के लिए पात्र नहीं है।


#13 सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana Account)

अगर आपकी बेटी की उम्र 10 साल से कम है तो आप अपनी बेटी के लिए यह खाता खोल सकते हैं। खाता 21 वर्ष बाद परिपक्व होगा| आप बेटी की शादी या पढाई के लिए भी पैसा निकाल सकते हैं|

अर्जित ब्याज कर योग्य नहीं है । परिपक्वता राशि भी कर-मुक्त है।

ब्याज दर की घोषणा हर तिमाही पर की जाती है|

अभी ब्याज दर 8.1% p.a. हो गयी है| (January 1, 2018)

नवीनतम ब्याज दर (interest rate) जानने के लिए आप इस पोस्ट पर जाएँ|

सुकन्या समृद्धि योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें|

पढ़ें: सुकन्या समृद्धि योजना के बारे में पूरी जानकारी


#14 बीमा कंपनियां से पेंशन योजनाएं (धारा 80 सीसीसी)

बीमा कंपनियों से पेंशन / वार्षिकी योजनाओं में निवेश के लिए आप प्रति वित्तीय वर्ष 1.5 लाख तक का लाभ ले सकते हैं।

यदि आप परिपक्वता से पहले पेंशन योजनाओं को सरेंडर करते हैं, तो मिलने वाली राशि को उस वर्ष की आयमाना जाएगा और आपको उस पर टैक्स देना होगा।

कृपया ध्यान दें कि धारा 80C और धारा 80 CCC के तहत कुल मिलाकर टैक्स बेनिफिट 1.5 लाख से अधिक नहीं हो सकता।


#15 राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस)/ अटल पेंशन योजना (धारा 80 CCD)

अब यहाँ दो हिस्से हैं|

पहला, 1.5 लाख तक सेक्शन 80CCD(1) के तहत| अब यह सेक्शन 80C के तहत लाभ के अन्दर ही आता है|

दूसरा, 50 हज़ार रुपये तक सेक्शन 80CCD(1B) के तहत| यह बेनिफिट सेक्शन 80C के अतिरिक्त है|

अटल पेंशन योजना में निवेश करने पर भी यही लाभ मिलेगा

पढ़ें: एनपीएस में निवेश करने पर टैक्स बेनिफिट

पढ़ें: अटल पेंशन योजना के बारे में पूरी जानकारी

यह थे कुछ उत्पाद जहां निवेश कर के आप Section 80C के तहत टैक्स लाभ ले सकते हैं| ध्यान दें यह पूरी लिस्ट नहीं है|

एक बात और, निवेश के फैसले को कभी भी सिर्फ टैक्स बेनिफिट से प्रेरित नहीं होना चाहिए। केवल टैक्स बचाने के लिए निवेश न करें| वह  निवेश करें जो आपके वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उपयुक्त है। अगर टैक्स बेनिफिट मिलता है, तो सोने पे सुहागा|

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Source/Credit: PersonalFinancePlan.in

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