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Mutual Funds

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म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कैसे करें? म्यूच्यूअल फण्ड कैसे खरीदें? How to buy Mutual Funds? (Hindi)

Last updated: अगस्त 14, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

काफी लोग म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना चाहते हैं, परन्तु यह नहीं जानते की म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कैसे करें|

म्यूच्यूअल फण्ड कैसे खरीदें?

इस पोस्ट में हम जानेंगे की कैसे आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करे सकते हैं और कैसे म्यूच्यूअल फण्ड सिप शुरू कर सकते हैं|

वैसे म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना तो बाद की बात है| अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में शुरुआत से जानना चाहते हैं (basic knowledge about mutual funds), तो इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें|

अगर आप पहली बार म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कर रहे हैं

अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड में पहली बार निवेश कर रहे हैं, तो आपको KYC (Know your customer) फॉर्म भरना होगा| अगर किसी कारण आपका KYC (केवाईसी) पहले हो चुका है (demat अकाउंट खोलने के लिए या किसी और वजह से), तो आपको दोबारा KYC फॉर्म भरने की ज़रुरत नहीं है|

अगर आपको पता नहीं है की आपका KYC हुआ है की नहीं (आप KYC-compliant हैं की नहीं), तो आप इन में से किसी भी वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं|

https://www.cvlkra.com

https://kra.ndml.in/

https://www.nsekra.com

https://camskra.com/

https://www.karvykra.com/

आपको चेक करने के लिए अपना PAN नंबर डालना होगा|

अगर आपका KYC नहीं हुआ है, तो आपको फॉर्म भरने के साथ-साथ इन दस्तावेजों के भी ज़रुरत होगी|

  1. पासपोर्ट साइज़ फोटोग्राफ (Passport sized photograph)
  2. पहचान पत्र जैसे पैन कार्ड ,आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लायसेंस की प्रतिलिपि आदि (कोई एक)
  3. पता का प्रमाण, जैसे की ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड नवीनतम टेलीफोन बिल (केवल लैंडलाइन), नवीनतम बिजली बिल, नवीनतम गैस बिल आदि (कोई एक)

आपको फोटोकॉपी के साथ-साथ असली (original) दस्तावेज भी लेकर जाना होगा|

KYC का फॉर्म आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं|

अब यह सब लेकर, कहाँ जाना होगा, इसके लिए नीचे पढ़ें|


म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कैसे करें? म्यूच्यूअल फण्ड कैसे खरीदें?

आप किसी एजेंट (म्यूच्यूअल फण्ड Distributor) की सहायता से निवेश कर सकते हैं| या फिर निकटतम CAMS या Karvy शाखायों में जा कर भी निवेश कर सकते हैं| आप म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी की शाखा में जा कर भी निवेश कर सकते हैं|

वहां पर जा कर आपको फॉर्म भरना होगा और एक चेक देना होगा|

अगर आप पहली बार निवेश कर रहे हैं, तो इन जगहों पर जा कर आप अपनी KYC की प्रक्रिया भी पूरी कर सकते हैं|

और हाँ, निवेश आप केवल अपने बैंक खाते से ही कर सकते है| तो अपनी चेक-बुक ले जाना न भूलें|


म्यूच्यूअल फण्ड में ऑनलाइन निवेश कैसे करें?

अगर आपका KYC हो चुका है, फिर तो सब बहुत आसान है|

अगर KYC नहीं हुआ है, तो आपको पहले KYC पूरा करने की ज़रुरत है| ऊपर दी गयी प्रक्रिया का पालन करें और KYC पूरा करें|

आप म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी की वेबसाइट से कर सकते हैं|

इसके अलावा बहुत सारी वेबसाइट हैं जो आपको ऑनलाइन निवेश करने की सुविधा प्रदान करती हैं|

आपको वहां जा कर एक ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा और काम खत्म| शायद आपको एक पहले से भरे फॉर्म (pre-filled form) को डाउनलोड करके कूरियर करना हो|

अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड रेगुलर प्लान (regular plan of mutual fund schemes) में निवेश करना चाहते हैं, तो आप FundsIndia या ScripBox जैसी वेबसाइट से निवेश कर सकते हैं|

अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान (direct plan of mutual fund schemes) में निवेश करना चाहते हैं, तो आप इस पोस्ट पर जा कर ऐसी सभी वेबसाइट की लिस्ट पा सकते हैं|

अगर आप अभी म्यूच्यूअल फण्ड रेगुलर प्लान और डायरेक्ट प्लान में अंतर के बारे में नहीं जानते हैं, तो  नीचे दी गयी पोस्ट को ज़रूर पढ़ें|

क्या आपको म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान में निवेश करना चाहिए?

म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान में ऑनलाइन कैसे निवेश करें?

कैसे बदलें म्यूच्यूअल फण्ड रेगुलर प्लान को डायरेक्ट प्लान में?

फण्ड खरीदने के लिए भुगतान आप नेट-बैंकिंग, नेफ्ट (NEFT) या RTGS के द्वारा कर सकते हैं| अगर आपने बैंक ECS मैंडेट रजिस्टर कराया है, तो आप सीधे एक क्लिक के साथ भुगतान कर सकते हैं|


म्यूच्यूअल फण्ड सिप (SIP) में कैसे निवेश करें?

अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड सिप के बारें में गहराई से जानना चाहते हैं. तो इस पोस्ट को पढ़ें|

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड SIP क्या है?

अब म्यूच्यूअल फण्ड सिप में आपके बैंक खाते से अपने आप (automatically) कट कर निवेश हो जाता है| अब बैंक किसी को भी आपके बैंक खाते को डेबिट नहीं करने दे सकता|

इसीलिए आपको बैंक को बताना होता है की किस कंपनी या फण्ड को आपके बैंक अकाउंट से पैसे निकालने दे| इसके लिए आपको एक फॉर्म भरना होता है| इस फॉर्म को आप ECS या one-time mandate (NACH mandate) भी कहते हैं|

यह फॉर्म आसानी से उपलब्ध होता है| अगर आप ऑफलाइन निवेश कर कर रहे हैं, जो जहाँ से कर रहे है, वह आपको यह फॉर्म प्रदान करेगा| अगर आप ऑफलाइन निवेश कर रहे हैं, तो वह वेबसाइट यह फॉर्म प्रदान करेगी| फॉर्म भरने के निर्देश फॉर्म में ही होंगे|

फॉर्म कुछ इस प्रकार का होगा|

सबी सिप इन्वेस्टमेंट प्लान SBI mutual fund SIP in hindi म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कैसे करें

यह फॉर्म मैंने SBI म्यूच्यूअल फण्ड की वेबसाइट से डाउनलोड किया है| आप भी यह फॉर्म SBI की वेबसाइट पर देख सकते हैं| फॉर्म का फॉर्मेट सभी म्यूच्यूअल फण्ड में एक सामान होगा|

अगर आपको यह पोस्ट उपयोगी लगी हो, तो अपने परिवार और मित्रों के साथ ज़रूर शेयर करें|

Filed Under: Mutual Funds Tagged With: how to invest in mutual fund in hindi, sbi mutual fund in hindi, sbi म्यूच्यूअल फण्ड, म्यूच्यूअल फण्ड कैसे खरीदें, म्यूच्यूअल फण्ड में कैसे निवेश करें, म्यूच्यूअल फण्ड सिप कैसे शुरू करें

कहाँ करें निवेश: Tax-Saving Fixed Deposit Vs. ELSS in Hindi

Last updated: नवम्बर 11, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

वित्तीय वर्ष का आखिरी तिमाही यानी की टैक्स सेविंग सीज़न, यहाँ पर ज़्यादातर लोगों को टैक्स बचाने के लिए कहीं न कहीं निवेश करना होता है|

शायद आपको भी करना हो| ऐसे में आप कहाँ निवेश करेंगे?

पिछले कुछ लेखों  में मैंने पीपीएफ (PPF), ईएलएसएस (ELSS), एनपीएस (NPS) इत्यादि पर चर्चा करी है| साथ ही इस बात पर भी चर्चा करी की किस प्रकार के निवेशक को कौन सा निवेश ज्यादा भायेगा|

इसी सिलसिले में हम आज चर्चा करेंगे टैक्स-सेविंग फिक्स्ड डिपाजिट (Tax Saving Fixed Deposit) और ईएलएसएस पर| जानेंगे अंतर और देखेंगे की आपको क्या करना चाहिए|

पढ़ें: PPF vs. ELSS

पढ़ें: PPF vs. NPS

इस पोस्ट में, मैं कर-बचत फिक्स्ड डिपॉजिट और ELSS की तुलना करूँगा।

कर बचत फिक्स्ड डिपाजिट (Tax Saving Fixed Deposit in Hindi) क्या है?

Tax-saving fixed deposit (कर-बचत फिक्स्ड डिपाजिट) एक साधारण फिक्स्ड डिपाजिट की तरह ही होती है|फ़र्क सिर्फ इतना है की इस FD की अवधि 5 वर्ष होती है। साथ ही, निवेश करने के लिए आपको आयकर की धारा 80C के तहत कर लाभ मिलता है|

और हाँ, आपका पैसा 5 साल तक लॉक-इन (lock-in) रहता है| इसका मतलब की आप 5 साल तक अपने पैसे को वापिस नहीं ले सकते|

जो भी ब्याज आपको मिलता है, उस पर आपको अपनी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होता है| सभी फिक्स्ड डिपाजिट में ब्याज पर टैक्स देना ही होता है|

पढ़ें: ब्याज पर कितना टैक्स देना होता है

ईएलएसएस (इक्विटी लिंक्ड बचत योजना) क्या है (ELSS in Hindi)?

ELSS एक प्रकार का इक्विटी म्यूचुअल फंड है । आपका निवेश 3 साल के लिए लॉक हो जाता है ।

पढ़ें: ईएलएसएस के बारे में कुछ दिलचस्प बातें

Tax Saving Fixed Deposit vs. ELSS in Hindi

ELSS और टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट्स दोनों अलग उत्पाद हैं।

ईएलएसएस एक इक्विटी  (equity) निवेश है| FD एक डेब्ट (debt) निवेश है|

ईएलएसएस में 3 साल का लॉक-इन है| टैक्स-सेविंग फिक्स डिपाजिट में 5 साल का लॉक-इन है|

ईएलएसएस में आपको निवेश को बेचते समय कोई टैक्स नहीं देना होगा| ELSS में आपको निवेश बेचने पर होने वाले मुनाफे पर 10% टैक्स देना होगा| Long Term Capital Gains Tax at 10% on sale of ELSS units.

फिक्स्ड डिपाजिट के ब्याज कर हर साल टैक्स भरना होगा|

Tax Saver FD और ELSS में रिटर्न किसमें बेहतर हैं?

टैक्स सेविंग  एफडी निश्चित रिटर्न प्रदान करता है। जब आप निवेश करते हैं, तभी आपको पता होता है, की आपको रिटर्न कितना मिलेगा|

ईएलएसएस के साथ, अस्थिरता के लिए तैयार रहें । रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है| आपको घाटा भी हो सकता है| परन्तु टैक्स-सेविंग FD से बहुत अधिक रिटर्न भी मिल सकते हैं’|

कम लॉक-इन के चक्कर में गलती न करें (Do not fall for lower lock-in)

ELSS के कई समर्थकों का यह तर्क है कि ELSS में सबसे कम लॉक-इन अवधि (3 साल की) है। किसी भी और टैक्स बचाने वाले निवेश में इतना कम लॉक-इन नहीं है|

मेरे अनुसार यह सोचने का सही तरीका नहीं है| साथ ही यह बात कुछ हद तक ही ठीक है|

उदाहरण के लिए, भले ही ELSS की लॉक-इन अवधि 3 साल है, इसका मतलब यह नहीं है कि ईएलएसएस 3 साल के लक्ष्य के लिए उपयुक्त हैं। ईएलएसएस एक इक्विटी उत्पाद है| बशर्ते लॉक-इन केवल तीन साल हो,इसका मतलब यह नहीं है की आप तीन साल के लिए ही निवेश करें| मेरे अनुसार अगर आपको किसी भी इक्विटी उत्पाद में निवेश करना है, तो 7-10 साल का लक्ष्य होना चाहिए|

ELSS में प्रत्येक निवेश 3 साल के लॉक-इन के अधीन है। पीपीएफ (15 वर्ष) और यूएलआईपी (5 वर्ष) जैसे अन्य उत्पादों में लॉक-इन को पहली निवेश की तारीख से गिना जाता है। इसलिए, यदि आपके पास 10 साल का पीपीएफ खाता है, तो आपका नया निवेश केवल 5 वर्षों के लिए लॉक होगा।

वैसे, 3 से अधिक वर्षों के लिए ELSS में निवेश करने में कुछ भी गलत नहीं है।

आपको क्या करना चाहिए?

पहले तो अपने पोर्टफोलियो का आंकलन करें| अगर आपके पोर्टफोलियो में आपको इक्विटी की ज़रुरत है, तो ईएलएसएस में निवेश करें|

अगर किसी डेब्ट उत्पाद में निवेश करने की ज़रुरत है, तो टैक्स-सेवर फिक्स्ड डिपाजिट में निवेश कर की सोचसकते हैं|

पर हाँ, अगर किसी डेब्ट उत्पाद में ही निवेश करना है, तो एक बार पीपीएफ के बारे में भी सोचे|

पीपीएफ में ब्याज पर टैक्स नहीं देना होता| फिक्स्ड डिपाजिट में ब्याज पर टैक्स देना होता है|

बस एक परेशानी है की आपका पैसा 15 साल तक के लिए अटक जाता है| पर यह एक नए खाते के लिए है| अगर आपके पास पीपीएफ खाता है जो पहले से 10 साल का है, तो आप पीपीएफ खाते में जो निवेश करते हैं, वह केवल 5 साल के लिए लॉक होगा।  ऐसी स्थिथि में, 5 साल की टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉज़िट निवेश कीज़रुरत नहीं है|

20181111_PPF vs ELSS vs  Tax Saving Fixed deposit PPF टैक्स बचत फिक्स्ड डिपाजिट hindi

पढ़ें: इनकम टैक्स बचाने के 35 तरीके

Filed Under: Mutual Funds, Tax Planning Tagged With: Elss in hindi, section 80C, tax-saving fixed deposit, Tax-Saving Fixed Deposits  VS  ELSS, ईएलएसएस क्या है

ईएलएसएस (ELSS) के बारें में कुछ दिलचस्प बातें

Last updated: मार्च 14, 2018 | by दीपेश 2 Comments

जैसा कि हम जानते है टैक्स सेविंग सीज़न बहुत करीब है और हम टैक्स सेविंग निवेश खोजने के लिए चारों ओर खोज  शुरू करते हैं। टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड या इक्विटी लिंक्ड बचत योजना (ईएलएसएस) लोकप्रिय कर-बचत विकल्पों में से एक है।

ELSS क्या है? ईएलएसएस क्या है? What is ELSS in Hindi?

इक्विटी लिंक्ड बचत योजना (ईएलएसएस) एक साधारण इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम की तरह ही है|

बस इतना अंतर है की ELSS (ईएलएसएस) में 3 साल का लॉक-इन है। इसका मतलब की आप अपने निवेश को 3 साल से पहले नहीं निकाल सकते|

साथ ही आपको ELSS (ईएलएसएस) में निवेश के लिए प्रति वित्तीय वर्ष 1.5 लाख रुपये का टैक्स बेनिफिट मिलता है (Section 80 क के तहत)|

शायद ज़्यादातर लोग ELSS (Equity Linked Savings Scheme) के बारे मैं इतना ही जानते हैं|

कुछ पहलू ऐसे भी हैं जो हम में से कई लोगो को पता नहीं हैं ।

इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS), 2005 को वित्त मंत्रालय (और SEBI)  द्वारा नोटिफाई किया गया था। इसलिए, ELSS योजनाओं को इन नियमों के द्वारा नियंत्रित किया जाता है|

आईये जानते हैं, ELSS के कुछ कम ज्ञात पहलुयों को|

#1 निवेश 500 रुपये के मल्टिपल में होगा, न्यूनतम निवेश 500 रुपये होगा।

#2 ELSS यूनिट्स का ट्रांसफर, pledge (लोन लेने के लिए) केवल तीन साल बाद ही किया जा सकता है ।

#3 यह योजना एक वित्तीय वर्ष के दौरान न्यूनतम 3 माह के लिए खुली होगी। हालांकि यह पहलू इतना महत्वपूर्ण नहीं है । ज्यादातर ELSS योजनाएं, ओपन एंडेड स्कीम (open ended scheme) हैं। इसका मतलब आप जब चाहें तब निवेश कर सकते हैं|

#4  यदि आप SIP के माध्यम से ELSS में निवेश करते हैं, तो हर SIP किश्त एक नया निवेश है। इस विषय पर मैंने काफी निवेशकों को भ्रमित पाया है। कई निवेशकों की धारणा है कि 3 साल का लॉक इन ELSS में पहले निवेश की तारीख से होता है। ऐसा नहीं है|

SIP की हर किश्त एक नया निवेश है|

उदाहरण के लिए, यदि आप 15 दिसंबर 2016 को SBI Taxgain Scheme (SBI ELSS) में SIP की किश्त के माध्यम से जो म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट खरीदते हैं, ऐसी यूनिट 15 दिसंबर, 2019 तक लॉक हो जाएंगी।

15 जनवरी, 2017 को SIP की किश्त के माध्यम से एसबीआई ईएलएसएस में खरीदे गए यूनिट 15 जनवरी, 2020 तक लॉक किए जाएंगे।

यह एक महत्वपूर्ण पहलू है। ELSS फण्ड के कई समर्थक (कर-बचत के लिए) का तर्क है कि ईएलएसएस में सभी धारा 80 सी निवेशों के बीच सबसे कम लॉक-इन अवधि है। परंतु इस बात को नजरअंदाज न करें कि ELSS में हर निवेश 3 साल लॉक-इन (3 year lock-in)  के अधीन है।

पीपीएफ के तहत, केवल आपके पहले निवेश को 15 साल के लिए लॉक किया जाता है। अगर आपका PPF दस साल पुराना है, तो उस साल किया गया निवेश केवल 5 बर्ष के लिए लॉक-इन रहेगा| एक खाते के लिए जो 15 साल की प्रारंभिक परिपक्वता पूरी कर ली है औरविस्तार किया  गया है तो अधिकतम लॉक-इन 5 साल है। वैसे, आप आंशिक निकासी कर सकते हैं और अपने पीपीएफ खाते से लोन भी  ले सकते हैं।

पढ़ें: पीपीएफ अकाउंट के बारे में पूरी जानकारी

पढ़ें: ELSS vs PPF: किसमें करें निवेश?

पढ़ें: ELSS vs. टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपाजिट (Tax-Saving Fixed Deposit)

पढ़ें: PPF से लोन कैसे लें?

#5 एक ELSS फण्ड को कम से कम 80% प्रतोशत राशि equity, cumulative convertible preference shares and fully convertible debentures और bonds में निवेश करनी होती है| एक बात का और ध्यान दें की कम से कम 65% निवेश equity में रहेगा|

#6 एक म्यूच्यूअल फण्ड हाउस में सिर्फ एक ही ELSS योजना हो सकती है। परन्तु आप देख सकते हैं की कुछ फण्ड हाउस के में एक से ज्यादा स्कीम हैं|

#7 निवेशक की मृत्यु की स्थिति में, नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी मृतक यूनिट के आवंटन की तिथि के एक साल बाद ही निवेश को बेच सकता हैं। इसलिए, अगर निवेशक यूनिट की खरीदने के 5 महीने बाद मृत्यु हो जाती हैं, तो नामित व्यक्ति को यूनिट्स को तभी मिल जायेंगी| परन्तु यूनिट्स को बेचने के लिए और 7 महीने का इंतज़ार करना पडेगा। ध्यान दे की नामित व्यक्ति उन्हें बहुत पहले ट्रांसफर कर सकता है लेकिन एक वर्ष तक बेच नहीं सकता है। तो देखें तो, निवेशक की मृत्यु की स्तिथि में लॉक-इन अवधि 3 वर्ष से घाट कर 1 वर्ष हो जाती है।

ईएलएसएस (ELSS) के यह नियम जानकार आप ELSS में निवेश करना तो नहीं छोड़ेंगे| और सच में देखें तो इन नियमों से बहुत ज्यादा फर्क भी नहीं पड़ता| परन्तु नियमो को जानना हमेशा अच्छा होता है|

Filed Under: Mutual Funds, Tax Planning Tagged With: Elss in hindi, elss क्या है, SBI ELSS, ईएलएसएस क्या है, एसबीआई ईएलएसएस

PPF vs ELSS: टैक्स बचाने के लिए आप पीपीएफ में निवेश करेंगे या ELSS में?

Last updated: नवम्बर 11, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

टैक्स सेविंग सीजन (Tax-saving season) आने वाला है| इस दौरान ईएलएसएस बनाम पीपीएफ (ELSS vs PPF) चर्चा का एक बहुत ही लोकप्रिय विषय है।

कुछ लोग पीपीएफ को बेहतर मानते हैं, तो कुछ ELSS को|

आप किस में निवेश करना पसंद करते हैं? पीपीएफ में या ELSS में या किसी में भी नहीं?

सच बताऊँ तो मुझे यह सवाल काफी अजीब  और कुछ स्तर पर गलत लगता है| अगर देखें तो पीपीएफ (PPF) और ईएलएसएस (ELSS) में कोई भी समानता नहीं है|

ईएलएसएस एक इक्विटी उत्पाद है जबकि पीपीएफ एक ऋण उत्पाद है। ELSS is an equity investment whereas PPF is a debt investment.

पीपीएफ के साथ रिटर्न की गारंटी होती है, ईएलएसएस (ELSS) के साथ ऐसी कोई गारंटी नहीं है|

ईएलएसएस(ELSS) निवेश में 3 साल का लॉक-इन है जबकि पीपीएफ 15 वर्षों में परिपक्व होगा |

केवल एक समानता है की दोनों में निवेश करने पर  आयकर अधिनियम की धारा 80 सी (Section 80C) के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है|

एक तरह से, लोगों को ईएलएसएस और पीपीएफ के बीच इस दुविधा का सामना करना पड़ता है क्योंकि दोनों में निवेश करने पर समान टैक्स बेनिफिट  देते हैं।

अगर दोनों उत्पादों के पास एक जैसे टैक्स बेनिफिट नहीं होते, तो शायद ऐसी दुविधा भी कभी नहीं होती|

इस पोस्ट में, मैं ईएलएसएस और पीपीएफ के बीच एक तुलना करूँगा| साथ ही इस बात पर चर्चा करूंगा की आपको इस सवाल के बारे में कैसे सोचना चाहिए|

इक्विटी लिंक्ड बचत योजना Equity Linked Savings Scheme (ELSS)

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) को आमतौर पर टैक्स-सेविंग इक्विटी म्यूचुअल फंड के रूप में जाना जाता है|

  1. ELSS एक प्रकार का इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड है|
  2. ELSS और अन्य इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में बस इतना अंतर है की ELSS में निवेश करने पर आपको टैक्स बेनिफिट मिलता है और ELSS में 3 वर्ष का lock-in होता है|
  3. तीन साल का लॉक-इन है | ईएलएसएस फण्ड में हर निवेश तीन साल के लॉक-इन के अधीन है, इसलिए आप 3 साल से पहले अपना पैसा नहीं निकाल सकते।
  4. ईएलएसएस में निवेश करने पर इनकम टैक्स की धारा 80 सी (Section 80C) के तहत 1.5 लाख तक का टैक्स बेनिफिट मिलता है।
  5. प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ELSS में निवेश की मात्रा पर कोई सीमा नहीं है। आप कितना भी निवेश कर सकते हैं| परन्तु टैक्स बेनिफिट .5 लाख रुपये प्रति वर्ष तक ही सीमित रहेगा।
  6. इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड 1 वर्ष से पहले बेचने पर होने वाले मुनाफे को Short Term Capital Gain माना जाता है और उस मुनाफे पर आपको 15% टैक्स देना होता है|  ELSS आप तीन साल से पहले कुछ बेच ही नहीं सकते| इसीलिए short term capital gain की तो कोई संभावना ही नहीं है|
  7. इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड 1 वर्ष के बाद  बेचने पर होने वाले मुनाफे को Long Term Capital Gain माना जाता है| FY2019 से ऐसे मुनाफे पर आपको 10% टैक्स देना होगा| ELSS पर भी यही नियम लागू होगा| जब आप ELSS यूनिट्स बेचेंगे, तब आपको मुनाफे पर 10% टैक्स देना होगा| म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर लगने वाले टैक्स की अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|
  8. इक्विटी म्यूचुअल फंड से डिविडेंड (dividend) पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता| परन्तु आपको dividend देने से पहले म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी 10% टैक्स (Dividend Distribution Tax) काट लेती है|
  9. यदि आप SIP के माध्यम से ईएलएसएस में निवेश कर रहे हैं, तो SIP की हर किश्त तीन साल को लॉक हो जाएगी।  15 जनवरी 2016 को किस्त के माध्यम से खरीदी गई यूनिट्स 16 जनवरी 2019 को या उसके बाद  बेचीं जा सकती हैं। 15 फरवरी 2016 को खरीदी गई यूनिट्स 16 फरवरी, 2019 से बेची जा सकती हैं।
  10. रिटर्न शेयर बाजार से जुड़ा हुआ है और इसकी गारंटी नहीं है।
  11.  Non-resident Indians (NRI) भी ELSS में निवेश कर सकते हैं।

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर कितना अक्स देना पड़ता है?

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ)

मैंने अपने कई पोस्ट  में पीपीएफ के बारे में बात की है। इसलिए, मैं इस पोस्ट में विस्तार से पीपीएफ को कवर नहीं करूँगा। आप नीचे दी गयी पोस्ट के माध्यम से पीपीएफ के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं|

पढ़ें: PPF खाते के बारे  में पूरी जानकारी

पढ़ें: PPF खाते से कैसे लें लोन और किन बातों का रखें ध्यान

पढ़ें: PPF खाता मेच्योर होने पर क्या हैं आपके विकल्प?

पढ़ें: क्या आपको अपने बच्चों के लिए पीपीएफ अकाउंट खोलना चाहिए?

पढ़ें: अब कर सकते हैं 5 साल बाद अपना पीपीएफ खाता बंद

पढ़ें: पीपीएफ में कैसे होती है ब्याज की गणना?

पीपीएफ के बारे में कुछ ख़ास बातें

  1. पीपीएफ खाता 15 साल बाद मेच्योर होता है।
  2. परन्तु पीपीएफ निवेश के लिए लॉक-इन अवधि हर साल कम होती जाती है। मतलब की 15 साल पहले निवेश से गिने जाते हैं| हर निवेश 15 साल के लिए लॉक नहीं होता| इसके विपरीत, ईएलएसएस में हर निवेश तीन साल के ताजा लॉक-इन के अधीन होता है|
  3. इसका मतलब पीपीएफ में पहला निवेश 15 साल को लॉक रहेगा जबकि दसवें साल में किया गया निवेश केवल 5 साल ही लॉक-in में रहेगा| ELSS में हर निवेश को एक सामान 3 वर्ष के लॉक-इन का सामना करना पड़ता है|
  4. 15 साल की प्रारंभिक परिपक्वता के बाद, आप 5 वर्षों के ब्लॉक में पीपीएफ खाते का विस्तार कर सकते हैं।
  5. तीसरे वर्ष से आपके पीपीएफ खाते से आप लोन ले सकते हैं। सातवें वर्ष से आंशिक निकासी (partial withdrawal) की अनुमति है|
  6. कुछ परिस्थितियों में आप अपने खाते को 5 साल के बाद भी बंद कर सकते हैं| परन्तु ऐसा करने पर आपको एक पेनल्टी देनी होगी|
  7. आप एक वित्तीय वर्ष में अपने पीपीएफ खाते में (और पीपीएफ खातों में जहां आप अभिभावक या guardian हैं) अधिकतम 1.5 लाख रुपये  में डाल सकते हैं। अतिरिक्त राशि पर ब्याज नहीं मिलेगा|
  8. 1.5 लाख रुपये  तक के निवेश पर  सेक्शन 80 C के तहत टैक्स लाभ मिलता है|
  9. रिटर्न तय नहीं  हैं | हर तिमाही (quarter) के लिए ब्याज दर वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अधिसूचित है|
  10. NRI पीपीएफ में निवेश नहीं कर सकते|

पीपीएफ या ईएलएसएस (PPF vs ELSS): किस में करें निवेश?

PPF vs ELSS vs PPF hindi पीपीएफ ईएलएसएस में अंतर

पहले आप को अपने वित्तीय लक्ष्यों (financial goals) के बारे में सोचना चाहिए और उसके बाद फैसला लेना चाहिए| केवल टैक्स सेविंग के बारें में न सोचें|

पीपीएफ और ईएलएसएस के बारे में सोचने से पहले, जांच करें कि आपके पास पर्याप्त जीवन बीमा है या नहीं। यदि आपके पास पर्याप्त जीवन बीमा नहीं है, तो एक टर्म प्लान खरीदें| उसके बाद निवेश के बारे में सोचे| जीवन बीमा खरीदने पर भी टैक्स बेनिफिट मिलता है|

पीपीएफ और ELSS दोनों ही लम्बे समय के निवेश (long term investment) के लिए है| तो अगर आप कम समय के लिए निवेश कर रहे है, तो आप किसी में भी निवेश न करें|

जब आप पहली बार अपना खाता खोलते हैं तो पीपीएफ एक दीर्घकालिक निवेश है | हालांकि, जब आप परिपक्वता के करीब जाते हैं, तो इसका इस्तेमाल अल्पावधि निवेश (short term investment) के रूप में भी किया जा सकता है। परन्तु आपको देखना होगा की आपको ऐसा करने की ज़रुरत है या नहीं|

अपने asset allocation पर ध्यान दें| अगर आप इक्विटी में ज्यादा निवेश कर रहे हैं, तो आप PPF (जो की एक डेब्ट निवेश है) में निवेश कर सकते हैं| अगर आप डेब्ट में ज्यादा कर रहे हैं, तो आप ELSS पर विचार कर सकते हैं| आपको एक संतुलन बना कर चलना चाहिए|

ईएलएसएस(ELSS) भी एक दीर्घकालिक निवेश (long term investment) होता है। लॉक-इन अवधि से अपने आपको आप को ग़लत तरीके से गुमराह न होने दें। भले ही ईएलएसएस निवेश को 3 साल की लॉक-इन अवधि के बाद बेचा जा सकता है, परन्तु आपको ईएलएसएस में तभी निवेश करना चाहिए, जब की आपका निवेश क्षितिज (investment horizon) कम से कम 10 साल है।

यदि सेक्शन 80C की 1.5 लाख की लिमिट ईपीएफ (EPF) आवंटन, जीवन बीमा और होम लोन के भुगतान से पूरी हो चुकी है, तो ईएलएसएस (ELSS) में निवेश करने की कोई जरूरत नहीं है। आप किसी भी इक्विटी फण्ड में निवेश कर सकते हैं|

ध्यान दे ELSS और एक किसी सामान्य इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में केवल यही अंतर है की ELSS में निवेश करने पर आपको टैक्स बेनिफिट मिलता है| इसीलिए अगर आपके टैक्स बेनिफिट की लिमिट पूरी हो गयी है, तो ईएलएसएस में निवेश करने की कोई ज़रूरत नहीं है।

ध्यान दें पीपीएफ अभी भी एक विचार के योग्य है (भले ही 80 C निवेश की लिमिट पहले से पूरी हो गयी हो)| पीपीएफ एक ऋण उत्पाद के लिए अच्छे रिटर्न प्रदान करता है और 15 साल की प्रारंभिक परिपक्वता अवधि समाप्त हो जाने के बाद बहुत अधिक लचीलापन (flexibility) देता है। साथ ही आप एक साल में 1.5 लाख से ज्यादा जमा नहीं कर सकते| तो अगर आप अपने PPF के बैलेंस को बढ़ाना चाहते हैं, तो आप 1.5 लाख के टैक्स बेनिफिट की लिमिट पूरी होने के बाद भी PPF निवेश कर सकते हैं|

मेरे अनुसार आपको आपको अपने पूरे पोर्टफोलियो को देखना चाहिए| साथ की यह भी देखना चाहिए की आप किस लिए निवेश कर रहे है और आपकी सेक्शन 80C की लिमिट पूरा करने के लिए कितने रुपये की ज़रुरत है|

अपने asset allocation पर भी ध्यान दे| उसके बाद ही कोई निर्णय लें| आप चाहें तो दोनों में भी निवेश कर सकते हैं|  

पर हाँ, यदि आप ईएलएसएस में निवेश कर रहे हैं, तो अपने ईएलएसएस फंड में निवेश करने के लिए वित्तीय वर्ष के अंत तक इंतजार न करें। पहले से शुरू करें| एसआईपी (SIP) के माध्यम से पूरे साल नियमित रूप से निवेश करें| पीपीएफ में भी साल की शुरुआत में निवेश करने पर ज्यादा ब्याज मिलेगा|

व्यक्तिगत तौर पर में PPF में निवेश करता हूँ| ELSS में नहीं करता| इक्विटी में निवेश के लिए में सामान्य इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करता हूँ|

आप कहां निवेश करने की योजना बना रहे हैं? पीपीएफ या ईएलएसएस या दोनों में या किसी में नहीं?

पढ़ें: FY2018-2019 में इनकम टैक्स बचाने के 35 तरीके

Source: PersonalFinancePlan.in

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कैसे जोडें अपने म्यूच्यूअल फण्ड निवेश (Mutual Fund Investments) को अपने आधार कार्ड से?

Last updated: अगस्त 2, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

अब आपको अपने म्यूच्यूअल फण्ड निवेश (Mutual Fund Investments) को भी अपने आधार कार्ड से लिंक (link) करना होगा| आपको यह प्रक्रिया 31 दिसंबर, 2017 से पहले पूरी करनी है|

यह Prevention of Money Laundering Act (PMLA) नियमों में हाल ही में किये गए संशोधन ही वजह से हुआ है|

आइये देखते हैं की कैसे आप आसानी से यह काम घर बैठे हुए कर सकते हैं|

अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड निवेश में नए हैं और म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में बिलकुल शुरुआत  से जानना चाहते हैं (basic knowledge), तो इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें|

कैसे लिंक करें अपने म्यूच्यूअल फण्ड निवेश (Mutual Fund Investment) को आधार कार्ड से?

रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर (R&T) एजेंट, CAMS ने ऐसी सुविधा ऑनलाइन मुहिया कराई है| CAMS बहुत सारी म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी को सपोर्ट करता है| CAMS की website पर जा कर आप एक साथ उन सारे mutual fund को अपने आधार से लिंक कर सकते हैं, जिनको CAMS support करता है|

CAMS ICICI, HDFC, SBI, Birla Sun Life, IDFC, DSP BlackRock सहित 15 mutual fund कंपनी के साथ काम करता है| आप इन सभी कंपनी के साथ अपना आधार कार्ड CAMS की website पर एक बार में अपडेट कर सकते हैं|

कैसे करें CAMS की वेबसाइट पर अपना आधार नंबर म्यूच्यूअल फण्ड निवेश से लिंक?

आइये देखते हैं|

  1. CAMS website पर शीर्ष पैनल पर ‘इन्वेस्टर सर्विसेस‘ (Investor Services)पर क्लिक करें| या फिर आप सीधे Investor Services लिंक पर जा सकते हैं
  2. और फिर बाएं पैनल पर ‘अपने आधार को लिंक करें’ (Link your Aadhaar)पर क्लिक करें।

Link Aadhaar Mutual Fund Investments Aadhaar card number 2

 

  1. अपने PAN, e-mail और आधार की जानकारी डालें| ऐसा करने पर वह सारे mutual fund कंपनी के नाम आ जायेंगे जहाँ आपने निवेश किया है (और CAMS उन्हें सेवा प्रदान करता है)| आप “All Funds” पर click करें| Submit करें|Link Aadhaar Mutual Fund Investments Aadhaar card number 1
  2. Submit करने पर CAMS UIDAI से आपके आधार की जानकारी लेगा और आपको उस मोबाइल नंबर (जो की आधार के साथ जुड़ा है) पर एक One Time Password (OTP) आएगा|
  3. अगले पेज पर OTP डालें| ऐसा करते ही आपका काम पूरा|How to Link Aadhaar number to Mutual Fund Investments Aadhaar card number 3
  4. आपको एक पुष्टिकरण सन्देश (confirmation message) दिखाई देगा|
  5. साथ ही क्योंकि CAMS ने आधार के database (UIDAI) से आपके बारे में जानकारी ली है, तो UIDAI भी आपको ऐसा एक e-mail भेजेगा|

How to Link Aadhaar number to Mutual Fund Investments Aadhaar card number 4

 

तो क्या ऐसा करने से आपका काम पूरा हो जाएगा?

अगर आपने केवल ऐसे म्यूच्यूअल funds में निवेश किया है जिनको CAMS सेवा प्रदान करता है, तो आपका काम पूरा हो गया|

परन्तु अगर आपने Reliance, Franklin, Axis, UTI, Mirae आदि की schemes में निवेश किया है, तो आपको थोडा और काम करना पड़ेगा|

CAMS के अलावा Karvy भी एक R&T एजेंट है, जो की तकरीबन 16 कंपनी को सेवा प्रदान करता है|

आपको Karvy की वेबसाइट पर भी ऐसी ही प्रक्रिया से करनी होगी| आप इस लिंक पर जा कर अपना आधार अपडेट कर सकते हैं|(https://www.karvymfs.com/karvy/Aadhaarlinking.aspx)

साथ ही Franklin और Sundaram के अपने अलग R&T एजेंट हैं| इसी प्रकार Franklin और Sundaram  भी अपनी वेबसाइट से आधार नंबर अपडेट कर सकते हैं|

साथ ही हर म्यूच्यूअल फण्ड वेबसाइट पर भी यह सुविधा उपलब्ध करा दी जायेगी| अगर चाहें तो वहां से भी अपना आधार अपडेट कर सकते हैं|

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान में निवेश कर आप पा सकते हैं बेहतर रिटर्न?

पढ़ें: कैसे करें म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान में निवेश? How to invest in Mutual Fund Direct plans?

Source

Relakhs.com

BasuNivesh.com

Economic Times

Filed Under: Aadhaar, Mutual Funds Tagged With: Aadhaar, linking aadhaar, Mutual Fund, mutual fund aadhaar linking hindi, म्यूच्यूअल फण्ड आधार कार्ड, म्यूच्यूअल फण्ड को आधार कार्ड से कैसे जोडें

कैसे कर रहा है SBI Mutual Fund निवेशकों को गुमराह?

Last updated: अप्रैल 15, 2018 | by दीपेश 8 Comments

कुछ समय पहले मैंने SBI Mutual Fund का एक विज्ञापन देखा था जिसमें equity mutual fund से  Systematic Withdrawal Plan (SWP) करने का सुझाव दिया गया था|

उस विज्ञापन के अनुसार अगर आपको नियमित आय (regular income) चाहिए तो equity mutual fund से SWP करना एक Fixed Deposit (FD) की तुलना में बेहतर विकल्प है| SBI Mutual Fund ने एक उदाहरण की सहायता से यह समझाने की कोशिश करी|

इस पोस्ट में आईये देखते हैं की SBI Mutual Fund क्यों गलत है| ऐसे विज्ञापनों से निवेशक केवल गुमराह होंगे|

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड क्या है? What is Mutual Fund in Hindi?

SBI Mutual Fund का विज्ञापन किस बारे में था?

सीधे दिए गए उदाहरण पर आतें हैं|

मान लिए आप एक equity म्यूचुअल फंड और bank fixed deposit में 50 लाख रुपये का निवेश करते हैं|

Equity funds शेयर बाजार से जुड़े रिटर्न प्रदान करते हैं जबकि  Bank Fixed deposit में  एक निश्चित  7.2% प्रति वर्ष return मिलता है।

आप प्रति माह equity fund से 30,000 रुपये निकालते हैं। इसका मतलब की आप हर महीने 30,000 रुपये की units बेच देते हैं|ऐसा आप एक Systematic withdrawal plan (SWP) के द्वारा कर सकते हैं|

ध्यान दे यहाँ बात SBI Mutual Fund से SWP के बारे में हो रही है, न की SIP (Systematic Investment Plan) के बारे में| SIP में आप हर महीने एक निश्चित राशि निवेश करते हैं, जबकि SWP में आप एक निश्चित राशि निकालते हैं|

बैंक Fixed deposit के मामले में 30,000 रुपये आपको मासिक ब्याज मिलेगा|

इसलिए, दोनों निवेशों से pre-tax income 30,000 रुपये per month होगी।

Equity Fund में आपको मुनाफे पर 15% capital gains टैक्स देना होना (short term)| Fixed Deposit के ब्याज पर आपको अपने टैक्स bracket के हिसाब से टैक्स देना होगा|

SBI MF SWP advertising

Equity mutual fund से SWP करने पर पूरे साल में आप केवल 3,233 रुपये  का capital gains tax देते हैं|

इसका मतलब पूरे साल में आपकी net income हुई 3.57 लाख रुपये (3.6 लाख रुपये – 3,233 रुपये)|

अगर आपने 50 लाख रुपये FD में लगाये होते, तो आपकी आमदनी होती 3.6 लाख रुपये| पर अगर आप 30% अक्स bracket में हैं, तो आपको इस पर 30% टैक्स देना होता| तो टैक्स देने के बाद आप पर बचते 2.49 लाख रुपये|

अगर तुलना करें, equity fund से SWP में 3.57 लाख और FD में 2.49 lakhs|

और यही नहीं, equity fund में साल के आखिर में आपके निवेश की value 52.35 लाख हैं| FD तो ५० लाख का ही है|

तो गर देखे तो, equity फण्ड में SWP करने से आप बेहतर cash flow  प्राप्त करते हैं, कम tax  देते हैं और आपके निवेश का मूल्य भी ज्यादा है।

आपको और क्या चाहिए?

क्या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड से SWP एक fixed deposit से अच्छा विकल्प है?

नहीं, ऐसा नहीं है। आइये देखते हैं क्यों?

पढ़ें: कैसे चुनाव करें अपने लिए बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड का?

पढ़ें: 2018 में निवेश करने के लिए बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड (Best Equity Mutual Funds for 2018)

क्या कमी है और क्या चीज़ छुपायी गयी है इस विज्ञापन में?

विज्ञापन में यह माना गया है की निवेशक (investor) 30% tax  ब्रैकेट में  आता है । यह भी हो सकता है की Investor बहुत कम टैक्स ब्रैकेट में हो।

उदाहरण के लिए, यदि आप 20% टैक्स ब्रैकेट में आते है, तो आपका कुल 74,160 रुपये (फिक्स्ड डिपॉजिट के मामले में) का टैक्स देना होंगा। इसका मतलब आपको मिलेंगे 2.86 लाख रुपये|

परन्तु इससे भी महत्वपूर्ण एक और पहलु है|

महत्वपूर्ण पहलू 

SBI MF ने उस अवधि को उठाया है जब  शेयर बाज़ार ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

AMC ने 1 मई, 2016 से 1 मई, 2017 तक की अवधि को उठाया, जब Nifty 7806 से बढ़कर 9313 हो गई, जो 19.3% की बढ़त है।

अब चलिए SWP की एक ऐसी अवधी चुनते हैं जब की शेयर मार्केट ने अच्छा न किया हो| ध्यान रखें जबाप निवेश करते हैं अब आपको पता नहीं होता की शेयर बाज़ार में कैसे रिटर्न आने वाले हैं|

आप 1 मार्च 2015 को lump sum निवेश करते हैं और अगले एक साल के लिए हर महीने 30,000 रुपयेकी units बेचते हैं (SWP के द्वारा)|

मैंने 50 लाख रुपये के निवेश के लिए SBI BlueChip Fund को चुना है।

अब देखिये|

SBI MF SWP equity fund advertising 3

आपके पास साल के आखिर में केवल 41.68 लाख रुपये बचे हैं|

FD में आपके पास 50 लाख रुपये बचे होते|

आपको SWP से बेहतर cashflow (आय) तो मिला होगा पर आपका तकरीबन 20% निवेश गायब हो गया|

ध्यान रखें इससे ज्यादा नुक्सान भी हो सकता था|

अब सोचिये यह नुकसान आपको रिटायरमेंट के दौरान होता है, तो आपको कितनी परेशानी हो सकती है। आखिर आपको अपने निवेश से नियमित आय की ज़रुरत रिटायरमेंट के दौरान ही तो पड़ेगी|

आप देख सकते हैं की SBI Mutual फण्ड ने कितनी चालाकी से वेह समय चुना जब की शेयर बाज़ार ने अच्छा किया|

ध्यान रखें

  1. शेयर बाजार इस से भी खराब रिटर्न दे सकता हैं|
  2. बाजार अगले 1 साल या अगले कुछ वर्षों कैसा प्रदर्शन करेगा, इस बात का अनुमान लगाना मुश्किल है। निवेश करते समय, आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि एक बाजार का एक खराब चरण (bad phase) आपकी आर्थिक स्तिथि को इतना कमजोर न कर दे, की आप उससे उबर ना पायें।

क्या Systematic withdrawal plan (SWP) एक बुरा विचार है?

नहीं, Systematic withdrawl plan (SWP) कोई बुरा विचार नहीं है।

पर SWP एक equity mutual fund से करना एक बुरा विचार है| और यहीं SBI Mutual Fund ने निवेशकों को गुमराह करने की कोशिश करी है|

SWP हमेशा केवल एक Debt mutual फण्ड से ही करें| Debt mutual फण्ड का चुनाव भी सही से करें|

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड सिप (Mutual Fund SIP) क्या है? क्या हैं फायदे?

क्या सीख है आपके लिए?

Equity mutual fund निवेश करने का एक अच्छा तरीका  हैं। परन्तु Equity mutual funds (इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड) में केवल लम्बी अवधि के लिए ही निवेश करना चाहिए| कम समय में नियमित आय देने के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है|

SBI Mutual Fund द्वारा लापरवाही से बनाये गए विज्ञापन से बहुर सारे निवेशक गुमराह हो सकते हैं और बादमें उन्हें निराशा का सामना भी करना पड़ सकता है|

यहाँ शायद SBI mutual fund के लिए भी सीख है|  ऐसे गैर-ज़िम्मेदार विज्ञापनों से वह केवल निवेशकों को ही नहीं बल्कि पूरी  म्यूच्यूअल फण्ड इंडस्ट्री को नुक्सान पहुँचा रहे है|

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान क्या हैं?

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान में कैसे करें निवेश?

Filed Under: Financial Planning, Mutual Funds, Tax Planning Tagged With: equity mutual funds, regular income, sbi mutual fund, sbi mutual fund in hindi, Systematic withdrawal plan

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