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एलआईसी जीवन तरुण (प्लान 834) की पूरी जानकारी (LIC Jeevan Tarun in Hindi)

Last updated: अक्टूबर 10, 2018 | by दीपेश 8 Comments

हर माता-पिता अपने बच्चों के लिए अच्छे से अच्छा करना चाहता है| इसीलिए बच्चों की पढाई के लिए निवेश करना सभी के लिए प्राथमिकता होती है|

एलआईसी का भी ऐसा एक प्लान है, जो की इन्ही ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है| मैं बात कर रहा हूँ एलआईसी जीवन तरुण के बारे में|

आज मैं चर्चा करूंगा LIC Jeevan Tarun (एलआईसी जीवन तरुण) प्लान के बारे में| इस पालिसी के बारे में गहराई से जानेंगे और देखेंगे की क्या आपको ऐसी पालिसी में निवेश करना चाहिए|

एलआईसी जीवन तरुण (प्लान 834) (LIC Jeevan Tarun in Hindi)

एलआईसी जीवन तरुण एक सहभागी गैर-लिंक्ड सीमित प्रीमियम भुगतान (non-linked participating limited premium plan) योजना है|

  1. न्यूनतम बीमा राशि (Minimum Sum Assured): 75,000 रुपये
  2. अधिकतम बीमा राशि (Maximum Sum Assured): कोई सीमा नहीं
  3. प्रवेश न्यूनतम आयु (Minimum Age at Entry): 90 दिन (आपके बच्चे के आयु)
  4. प्रवेश में अधिकतम आयु (Maxmium Age at Entry): 12 वर्ष
  5. पालिसी परिपक्वता के समय आयु (Age at Policy Maturity): 25 वर्ष (इसका मतलब पालिसी आपके बच्चे के 25 वर्ष के आयु पूरी करने पर होगी)
  6. पालिसी अवधि (Policy Term) : 25 वर्ष – प्रवेश आयु (इसका मतलब पालिसी खरीदते समय अगर आपके बच्चे की आयु 8 वर्ष है, तो पालिसी अवधि 17 वर्ष होगी)
  7. प्रीमियम भुगतान अवधि (Premium Payment Term) : 20 वर्ष – प्रवेश आयु (इसका मतलब पालिसी खरीदते समय अगर आपके बच्चे की आयु 8 वर्ष है, तो पालिसी अवधि 12 वर्ष होगी)
  8. पालिसी से लोन की सुविधा उपलब्ध है| यह जानने के लिए की एलआईसी पालिसी से लोन कैसे लें, आप इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं|

एक और उदहारण लें तो, अगर आपके बच्चे की आयु पालिसी लेते समय 4 वर्ष है, तो आपको 16 साल के लिए प्रीमियम का भुगतान करना होगा और योजना 21 साल बाद परिपक्व हो जाएगी (आपके बच्चे की 25 वर्ष की आयु होने के बाद)।

पालिसी के तहत आपके बच्चे को 20 से 20 वर्ष की आयु तक उसे कुछ रकम दी जायेगी| साथ ही पालिसी मेच्योरिटी के समय (25 वर्ष का होने पर) भी उस कुछ राशि दी जायेगी| इस बारे में हम गहराई से जानेंगे जब एलआईसी के परिपक्वता लाभ पर चर्चा करेंगे|
आप LIC Jeevan Tarun के बारे में अधिक जानकारी LIC की वेबसाइट पर पा सकते हैं|

एलआईसी जीवन तरुण : सरवाईवल बेनिफिट / परिपक्वता लाभ (Survival Benefit/Maturity Benefit)

अब क्योंकि एलआईसी जीवन तरुण एक मनी बैक प्लान (money back plan) है, इसलिए परिपक्वता से पहले भी आपके बच्चे को कुछ रकम दी जायेगी|

20 से 24 वर्ष के आयु तक (कुल मिला कर 5 साल के लिए) कुछ राशि दी जायेगी| इसे आप survival बेनिफिट समझ सकते हैं| यह सुविधा इसलिए प्रदान की गयी है क्योंकि आपके बच्चे की पढाई या शादी का खर्चा 25 वर्ष की आयु से पहले भी आ सकता है|

साथ ही पालिसी की परिपक्वता के समय (25 वर्ष की आयु का होने पर) उसे परिपक्वता लाभ दिया जाएगा|

आप चार विकल्पों में से एक चुन सकते हैं।

LIC Jeevan Tarun एलआईसी जीवन तरुण hindi

तो आप देख सकते हैं की चारों विकल्पों में आपको बीमा राशि का 100% प्रतिशत ही दिया जाता है| बस यह राशि कब मिलेगी, यह इन चारों विकल्पों में बदल जाता है|

विकल्प 4 में, बीमा कंपनी 5 वर्षों के लिए 20 वर्ष की आयु (20 वर्ष की उम्र होने के बाद पॉलिसी की वर्षगांठ पर) पूरा होने के बाद हर साल बीमित रकम का 15% का भुगतान करेगी। बचा हुआ 25% शेष योजना परिपक्वता पर भुगतान किया जाएगा।

जाहिर है की इन चारों विकल्पों का प्रीमियम भी अलग होगा| सबसे कम प्रीमियम पहले विकल्प का होगा और सबसे ज्यादा प्रीमियम होगा चौथे विकल्प का| आप एलआईसी जीवन तरुण प्रीमियम कैलकुलेटर यहाँ पर देख सकते हैं|

ध्यान आपका परिपक्वता लाभ इतना ही नहीं है| इसके अलावा आपको हर वर्ष सरल प्रत्यावर्ती बोनस (Simple Reversionary Bonus) और पालिसी मेच्योरिटी के समय Final Additional bonus (FAB या अंतिम अतिरिक्त बोनस) भी मिलेगा|

एक बात का ध्यान दें की सरल प्रत्यावर्ती बोनस की घोषणा तो हर वर्ष होती है परन्तु मिलता वह आपको केवल पालिसी मेच्योरिटी के समय ही है| अंतिम अतिरिक्त बोनस (FAB) की घोषणा पालिसी मेच्योरिटी के वर्ष ही होती है|

सरल प्रत्यावर्ती बोनस (Simple Reversionary Bonus) और Final Additional bonus (FAB या अंतिम अतिरिक्त बोनस) के बारे में विस्तार से चर्चा मैंने इस पोस्ट में करी है

एलआईसी जीवन तरुण: मृत्यु लाभ (LIC Jeevan Tarun: Death Benefit)

जीवन कवर आपके बच्चे की आयु पर है |

मृत्यु लाभ जोखिम के प्रारंभ की तारीख (Risk Commencement Date) पर निर्भर करता है।

जोखिम बच्चे के 8 वर्ष की आयु होने पर या पालिसी लेने के दो वर्ष के बाद (जो भी पहले हो जाए) पर शुरू होगा|

यदि पॉलिसीधारक (बच्चे) की मृत्यु जोखिम के प्रारंभ होने से पहले हो जाती है (death before risk commencement date), तो एलआईसी केवल भुगतान किये गए प्रीमियम लौटा देगा। एलआईसी बीमा राशि का भुगतान नहीं करेगा।

यदि बच्चे की मृत्यु जोखिम के प्रारंभ होने के बाद होती है(death after risk commencement date), तो आपको बीमित रकम का 125% + निहित प्रत्यावर्ती बोनस (Vested Simple Reversionary Bonus) + अंतिम अतिरिक्त बोनस (Final Additional Bonus) मिलेगा |

आप चाहें तो, एलआईसी प्रीमियम वेवर बेनिफिट राइडर (LIC Premium Waiver Benefit Rider: UIN: 512B204V01) इस प्लान में जोड़ सकते हैं|

ऐसा करने पर आपकी मृत्यु होने पर भविष्य के सारे प्रीमियम माफ़ कर दिए जायेंगे| इसका मतलब आपकी अनुपस्तिथि में आपके परिवार को इस प्लान का कोई प्रीमियम नहीं देना होगा और योजना के अनुसार आपके बच्चे को 20 से 25 वर्ष की आयु में राशि दी जायेगी|

पर हाँ, यह राइडर लेने की लिए आपको अतिरिक्त प्रीमियम देना होगा|

क्या आपको अपने बच्चे के लिए एलआईसी जीवन तरुण लेना चाहिए?

LIC Jeevan Tarun में कुछ समस्याएं हैं|

जीवन बीमा आपके बच्चे के जीवन पर है| मुझे बच्चे के लिए जावन बीमा लेने का कोई भी फायदा समझ नहीं आता| बीमा बच्चे का माता-पिता (के जीवन) को लेना चाहिए, जिससे की उनके न रहने पर आर्थिक समस्यायों की वजह से उनकी पढ़ाई पर कोई असर न पड़े|

अगर आपको कुछ हो गया तो,  इस पालिसी से कुछ नहीं मिलेगा क्योंकि बीमा तो आपके बच्चे के जीवन पर है|

आपकी अनुपस्तिथि में इस प्लान के प्रीमियम कौन भरेगा और प्रीमियम नहीं भरेंगे तो पालिसी अपने आप लैप्स हो जायेगी|
बच्चे के जीवन पर बीमा लेने से शायद थोड़े रिटर्न बेहतर होंगे, पर तब भी मेरे अनुसार ऐसे जीवन बीमा प्लान का कोई भी फायदा नहीं है|

इसीलिए मेरे अनुसार एलआईसी जीवन तरुण को लेना एक अच्छा निर्णय नहीं होगा|

अगर तब भी आप यह पलना लेना चाहते हैं, एलआईसी प्रीमियम वेवर बेनिफिट राइडर (LIC Premium Waiver Benefit Rider: UIN: 512B204V01) को अपने प्लान के साथ अवश्य जोडें| आपकी अनुपस्तिथि में कम से कम प्रीमियम की चिंता तो नहीं करनी होगी|

रिटर्न भी कम मिलेगा |
अब यह सभी पारंपरिक जीवन बीमा (Traditional Life Insurance Plan) के साथ समस्या है|

एलआईसी जीवन तरुण कोई अपवाद नहीं है|

वैसे तो रिटर्न एलआईसी द्वारा घोषित रिटर्न पर निर्भर करता है| परन्तु आपको इस प्लान में 6-7% p.a. से ज्यादा रिटर्न नहीं मिलेगा|

और यह रिटर्न भी एलआईसी प्रीमियम वेवर बेनिफिट राइडर (LIC Premium Waiver Benefit Rider: UIN: 512B204V01) लेने से पहले है| अब क्योंकि एलआईसी जीवन तरुण को इस राइडर के बिना लेना बेवकूफी है और इस राइडर की भी कुछ लागत होगी, तो आपके रिटर्न और भी कम हो जायेंगे|

अब आप ही देखिये क्या एक लम्बी अवधि के निव्वेश के लिए 5-7% p.a. रिटर्न काफी है|

मेरे अनुसार तो नहीं है|

पढ़ें: LIC Jeevan Shanti (एलआईसी जीवन शांति): LIC का नया सिंगल प्रीमियम पेंशन प्लान

आपको क्या करना चाहिए?

मेरे अनुसार आपको एलआईसी जीवन तरुण में निवेश नहीं करना चाहिए| बच्चे के जावन पर बीमा लेने का कोई फायदा नहीं है| रिटर्न भी अच्छे नहीं मिलेंगे|

बेहतर होगा की आप अपने लिए जावन बीमा लें| टर्म इंश्योरेंस प्लान लेना चाहिए| सस्ता भी पड़ेगा और आपको जीवन बीमा भी पर्याप्त मिल सकता है|

बच्चे की पढाई के निवेश के लिए आप पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि योजना या किसी और जगह निवेश कर सकते हैं| अब क्योंकि बच्चे की उच्च शिक्षा में अभी काफी समय है, तो आप कुछ निवेश इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में भी कर सकते हैं|

जी हाँ, आप अपने बच्चे के लिए पीपीएफ खाता खोल सकते हैं|

पढ़ें: क्या आपको अपने बच्चों के लिए पीपीएफ खाता खोलना चाहिए?

परन्तु अगर आपने एलआईसी जीवन तरुण को लेने का मनन बना लिया है, तो उस प्लान में एलआईसी प्रीमियम वेवर बेनिफिट राइडर (LIC Premium Waiver Benefit Rider: UIN: 512B204V01) को जोड़ना न भूलें|

सौजन्य: www.PersonalFinancePlan.in

एलआईसी के दूसरे प्लान के बारे में जानकारी

एलआईसी जीवन शांति (LIC Jeevan Shanti): LIC का नया सिंगल प्रीमियम पेंशन प्लान

एलआईसी जीवन अक्षय (LIC Jeevan Akshay): एक बार प्रीमियम, पूरे जीवन पेंशन

एलआईसी न्यू जीवन आनंद (LIC New Jeevan Anand)

एलआईसी जीवन उत्कर्ष (LIC Jeevan Utkarsh)

एलआईसी जीवन उमंग (LIC Jeevan Umang)

एलआईसी न्यू एंडोमेंट प्लान (LIC New Endowment Plan)

एलआईसी ई-टर्म प्लान (LIC e-Term plan)

अन्य उपयोगी पोस्ट या लिंक

LIC प्रीमियम कैलकुलेटर

कौन से हैं बेस्ट टर्म इंश्योरेंस प्लान (Best Term Insurance Plan)

किस प्रकार का जीवन बीमा लेना चाहिए?

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY)

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सुकन्या समृद्धि योजना खाता कैसे खोलें?

by दीपेश 2 Comments

सुकन्या समृद्धि योजना खाता आपकी बेटी के पढाई और शादी के लिए एक अच्छा निवेश हो सकता है|

पर क्या आप जानते हैं की सुकन्या समृद्धि योजना अकाउंट कैसे और कहाँ खोलें?

आईये जानते हैं|

सुकन्या समृद्धि योजना खाता कहाँ खोल सकते हैं?

सुकन्या समृद्धि खाता आप डाकघर या बैंक शाखयों में खोल सकते हैं| आप सभी प्रमुख सरकारी और निजी बैंक के साथ सुकन्या समृद्धि खाता खोल सकते हैं| पर हाँ, सारी बैंक शाखायों में शायद आप यह खाता न खोल पाएं|

सुकन्या समृद्धि खाता किसके लिए खोल सकते हैं?

  1. आप अपनी बेटी या ऐसी बच्ची जिसके आप कानूमी अभिभावक हों, उसके लिए सुकन्या समृद्धि खाता खोल सकते हैं|
  2. आप केवल 10 वर्ष तक की आयु की बेटी  के लिए ही खाता खोल सकते हैं|
  3. आप सुकन्या समृद्धि खाता केवल अपनी दो बेटियों के लिए ही खोल सकते हैं| अगर दूसरी बेटी का जन्म के समय आपको जुड़वाँ बेटी होती हैं, तो आप तीन बेटियों के लिए यह खाता खोल सकते हैं|

सुकन्या समृद्धि योजना फॉर्म कहाँ मिलेगा और कैसे भरें?

सुकन्या समृद्धि योजना फॉर्म आपको डाकघर या बैंक शाखा में ही मिल जाएगा| फॉर्म भरना बहुत आसान है| आप सैंपल फॉर्म देखना चाहते हैं तो, आईसीआईसीआई बैंक सुकन्या समृद्धि फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं

सुकन्या समृद्धि खाते खोलने के लिए आपको क्या डाक्यूमेंट्स चाहिए?

आपको फॉर्म भरकर उसके साथ कुछ दस्तावेज भी जमा करने होंगे|

  1. बेटी का जन्म प्रमाणपत्र (Birth Certificate)
  2. आपका पहचान पत्र (पेन कार्ड, पासपोर्ट, आधार कार्ड इत्यादि)
  3. आपके पता का प्रमाण (पासपोर्ट, आधार कार्ड, बिजली का बिल इत्यादि)

इसके साथ-साथ आपको कम से कम 1,000 रुपये का पहला निवेश करना होगा| उसके बाद आप चाहें तो 100 के गणकों (multiple) में निवेश कर सकते हैं|

सुकन्या समृद्धि खाते में कितना पैसा जमा कर सकते हैं?

आपको एक वर्ष में कम से कम 1,000 रुपये सुकन्या खाते में जमा करने है| अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा कर सकते हैं|

अगर दो बेटियों के लिए खाता खोला है, तो दोनों के खाते में 1.5-1.5 लाख रूपये जमा कर सकते हैं| अतिरिक्त राशि पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा|

आपको एक पासबुक भी दी जायेगी जिसको आप नियमित तौर पर अपडेट करा सकते हैं|

आप खाते में पैसे नकद, चेक या डिमांड ड्राफ्ट से जमा कर सकते हैं| कुछ बैंक नेट बैंकिंग के ज़रिये के आपको बेटी के सुकन्या समृद्धि खाते में निवेश करने देते हैं| पर सभी बैंक यह सुविधा प्रदान नहीं करते|

SBI की वेबसाइट पर सुकन्या समृद्धि खाते के बारे में जानकारी आप इस लिंक पर पा सकते हैं|

पढ़ें: सुकन्या समृद्धि योजना अकाउंट के बारे में पूरी जानकारी

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पीपीएफ खाता ऑनलाइन कैसे खोलें? How to open PPF account online?

by दीपेश 10 Comments

पहले आपको पीपीएफ खाता ऑनलाइन खोलने के लिए बैंक की शाखा जाना पड़ता था| अब ऐसा नहीं है|

अब आप कुछ बैंक के साथ अपने लिए पीपीएफ अकाउंट घर बैठे ऑनलाइन खोल सकते हैं| आईसीआईसीआई (ICICI Bank) ने यह सुविधा शुरू कर दी है| भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में अभी यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन नहीं है| उम्मीद करता हूँ की और बैंक भी यह सुविधा जल्दी ही शुरू कर देंगे|

एक बात का ध्यान रखें: एक व्यक्ति केवल एक पीपीएफ खाता ही खोल सकता है| अगर आपके पास पहले से एक पीपीएफ खाता है, तो आप दूसरा खाता नहीं खोल सकते|

पीपीएफ खाता ऑनलाइन कैसे खोलें? How to open PPF account Online? (in Hindi)

हर बैंक के लिए प्रक्रिया अलग हो सकती है|

आज मैं आपको आईसीआईसीआई (ICICI Bank) में पीपीएफ अकाउंट खोलने की प्रक्रिया बताता हूँ|

पर हाँ, आपको खाता खोलने के लिए आपको पहले बैंक में खाता धारक होना चाहिए| और साथ ही आपका आधार नंबर आपके बैंक खाते से लिंखोना चाहिए|

  1. बैंक की इन्टरनेट बैंकिंग वेबसाइट में लॉग इन करें|
  2. वहां आपको पीपीएफ खाता ऑनलाइन खोलने के लिए विकल्प दिखेगा| उस विकल्प का चुनाव करें|
  3. बैंक आपके बैंक खाते से आपके बारे में सारी जानकारी अपने आप ही भर लेगा|
  4. उसके बाद आपको आपके आधार पंजीकृत नंबर पर एक OTP भेजा जाएगा| यह आपकी पहचान स्थापित करने के लिए किया जाएगा| OTP की सहायता से आप अपनी एप्लीकेशन को ई-साइन कर सकते हैं|
  5. वेरिफिकेशन होते ही आपका पीपीएफ खाता खोल दिया जाएगा|

पढ़ें: पीपीएफ खाते के बैर में पूरी जानकारी

SBI में पीपीएफ खाता ऑनलाइन कैसे खोलें?

जैसा की मैंने ऊपर लिखा है, SBI में पीपीएफ खाता खोलने की प्रक्रिया अभी पूरी तरह से ऑनलाइन नहीं है| आपको फॉर्म भरने ऑनलाइन के बाद फॉर्म का प्रिन्ट लेकर एक बैंक ब्रांच में जमा करना होगा|

आप पूरी प्रक्रिया के बारे में जानने के लिए YouTube पर यह वीडियो देख सकते हैं|

https://youtu.be/M2yiGIQPXsY

पढ़ें: पीपीएफ खाते में ब्याज की गणना कैसे होती है?

चित्र सौजन्य: Pixabay

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एनपीएस वापसी नियम (NPS Partial Withdrawal and Exit Rules in Hindi)

by दीपेश 58 Comments

 

एनपीएस में निवेश आप अपने रिटायरमेंट के लिए करते हैं| परन्तु आप यह भी नहीं चाहेंगे की आप चाह कर भी किसी ज़रुरत के समय अपने निवेश को छू भी न पाएं|

इसीलिए कुछ विशिष्ठ अवसरों पर आपका एनपीएस से कुछ पैसा निकाल (आंशिक निकासी) की अनुमति दी गयी है|

आईये जानते है एनपीएस के वापसी नियम के बारे में|

एक बात पर ध्यान दें प्रमुख तौर पर दो तरह एक एनपीएस खाते हो सकते हैं|

  1. Government Sector NPS (सरकारी एनपीएस)
  2. All Citizens Model (आल सिटीजन्स मॉडल)

कुछ बातों पर इन दो तरह के एनपीएस में अलग नियम हो सकते हैं|

एनपीएस वापसी नियम (Partial Withdrawal Rules in NPS in Hindi)

अपने योगदान (एम्प्लायर के योगदान को छोड़कर) का 25% तक निम्न खर्चों के लिए निकाल सकते हैं| आंशिक निकासी (partial withdrawal) की अनुमति है|

  1. प्रथम घर का निर्माण / खरीद ।
  2. बच्चों के उच्च शिक्षा या विवाह के लिए ।
  3. स्वयं, पति, बच्चों और आश्रित माता-पिता के 13 विशिष्ट बीमारियों के इलाज के लिए या किसी दुर्घटनाओं के बाद इलाज के लिए।

कृपया ध्यान दें आपके योगदान का मतलब केवल मुख्य राशि है| आप अपने निवेश कर मिले हुए रिटर्न को नहीं निकाल सकते|

इन बातों पर ध्यान दें|

  1. पैसा आप केवल एनपीएस खाता खोलने के 10 साल बाद ही निकाल सकते हैं|
  2. कुल मिलाकर आप तीन बार ही पैसा निकाल सकते हैं|
  3. पैसा निकालने के बीच में कम से कम पांच साल का अंतर होना चाहिए| यह प्रतिबन्ध गम्धिर बीमारियों के इलाज़ पर लागू नहीं होता|

निर्दिष्ट बीमारियों में cancer ,pulmonary arterial hypertension, multiple sclerosis, major organ transplant, coronary artery bypass graft, aorta graft surgery, heart value surgery, stroke, myocardial infarction, coma, total blindness and paralysis  शामिल है।

एनपीएस से आंशिक निकासी (वापसी) के लिए क्या दस्तावेज़ चाहिए?

बच्चों के पढाई के लिए: एडमिशन लैटर और शुल्क अनुसूची’ (Admission letter and Fee Schedule)

बच्चों की शादी के लिए: स्वयं घोषणापत्र (Self Declaration)

पहला घर खरीदने/बनाने के लिए: स्वयं घोषणापत्र (Self Declaration), इसके अलावा प्रॉपर्टी के कागजातों के फोटोकॉपी/मंजूर प्लान या बैंक से लोन का ऑफर लैटर

गंभीर बीमारी की स्तिथि में: डॉक्टर से सर्टिफिकेट (certificate from doctor)

इन दस्तावेजों के लिए आप यह सर्कुलर भी पढ़ सकते हैं|

पढ़े: एनपीएस खाता ऑनलाइन कैसे खोलें?

अगर एनपीएस खाता बंद करना हो तो

ऊपर हमनें देखा की एनपीएस से कुछ पैसा निकालने (आंशिक निकासी) के क्या नियम हैं| अगर आपको एनपीएस खाता बंद ही करना हो, तो इसके लिए क्या नियम हैं| आयी जानते हैं|

अगर 60 वर्ष की आयु से पहले या सेवानिवृत्ति से पहले खाता बंद करते हैं (Voluntary exit before 60 or age of superannuation)

अगर आप 60 वर्ष की आयु से पहले एनपीएस खाता बंद करना चाहते हैं, तो आपको जमा राशि के कम से कम 80% प्रतिशत राशि से एक वार्षिकी (annuity plan) खरीदनी होगी| केवल 20% राशि ही एक मुश्त निकालसकते हैं|

ध्यान दे, अगर आपने अपना एनपीएन खाता आल सिटीजन्स मॉडल (All Citizens Model) हैं, तो आप खाता बंद केवल एनपीएस खाता खोलने का दस साल बाद ही कर सकते हैं| सरकारी एनपीएस में ऐसा कोई प्रतिबन्ध नहीं है|

यह प्रतिबन्ध तब लागू नहीं होगा जबकि आपकी जमा राशि 1 लाख रुपये से कम हैं| ऐसी स्तिथि में आप सारा पैसा एक मुश्त निकाल सकते हैं| वार्षिकी खरीदने की कोई ज़रुरत नहीं है|

60 वर्ष की आयु में एनपीएस खाता बंद करने पर क्या नियम हैं?

अगर आप 60 वर्ष की आयु या सेवानिवृत्त होने पर एनपीएस खाता बंद करना चाहते हैं, तो आपको जमा राशि के कम से कम 40% प्रतिशत राशि से एक वार्षिकी (annuity plan) खरीदनी होगी| केवल 60% राशि ही एकमुश्त निकाल सकते हैं|

पर हाँ, अगर आपकी जमा राशि 2 लाख रुपये से कम हैं, तो आपको वार्षिकी (annuity plan) खरीदने की कोई ज़रुरत नहीं है|

ध्यान दें जिन लोगों के एनपीएस खाते All Citizens Model के तहत खुले हैं, वह लोग चाहें तो अपने खातों की 70 वर्ष की आयु तक जारी रख सकते हैं| बस ऐसे करने के लिए निवेशक (subscriber) को एनपीएस खाते को जारी रखने की इच्छा लिखित में 60 वर्ष का होने से 15 पहले तक ज़ाहिर करनी होगी| सरकारी कर्मचारियों (Government NPS) के पास यह विकल्प नहीं है|

पढ़ें: एनपीएस से पैसा निकालने पर कितना टैक्स देना पड़ता है?

आप एनपीएस के वापसी नियम के बारे में PFRDA सर्कुलर यहाँ सकते हैं|

एनपीएस वापसी नियम (PFRDA द्वारा रेगुलेशन) : 1 2 3

 

Filed Under: NPS Tagged With: NPS Exit rules in hindi, NPS withdrawal rules in hindi, एनपीएस आंशिक निकासी नियम, एनपीएस खाता बंद करना है, हिंदी में एनपीएस वापसी नियम

म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करते समय इन गलतियों से बचें

Last updated: अगस्त 2, 2018 | by दीपेश 2 Comments

अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो इन गलतियों या गलतफ़हमियों से बचें|

अगर आपके लिए म्यूच्यूअल फण्ड बिल्कुल भी जानकारी नहीं है, तो म्यूच्यूअल फण्ड की बुनियादी जानकारी के लिए पहले इस पोस्ट (क्या हैं म्यूच्यूअल फण्ड? What is a Mutual Fund? (in Hindi) को पढ़ें|

#1 अगर NAV कम है, तो बेहतर है

NAV म्यूच्यूअल फण्ड के एक यूनिट के दाम को कहते हैं| इसका मतलब अगर NAV 50 रुपये है, इस इसका मतलब म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट की कॉस्ट 50 रुपये है|

अगर 5,000 रुपये का निवेश करते हैं, तो आपको 100 यूनिट मिलेंगे|

किसी दूसरे फण्ड का NAV अगर 100 रुपये है, तो 5,000 हज़ार निवेश करने पर आपको 50 यूनिट मिलेंगे|

तो, कौनसा म्यूच्यूअल फण्ड बेहतर हुआ?

म्यूच्यूअल फण्ड के NAV से कुछ भी फर्क नहीं पड़ता|

किसी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम का NAV कम होने का मतलब यह नहीं की वह सस्ता है|

म्यूच्यूअल फण्ड कोई शेयर नहीं है|

मान लिए आप दोनों स्कीम में 5,000 रुपये निवेश करते हैं| दोनों ही फण्ड 20% रिटर्न देते है|

पहली स्कीम का NAV 60 हो जाएगा|

दूसरी का 100 से 120 हो जाएगा|

पहली स्कीम में आपके निवेश का मूल्य होगा: 100 X 60 = 6,000 रुपये

दूसरी स्कीम में आपके निवेश का मूल्य होगा: 50 X 120 = 6,000 रुपये

देखा, कोई अंतर नहीं पड़ा|

इसलिए म्यूच्यूअल फंड में निवेश करते समय म्यूच्यूअल फण्ड के NAV पर बिलकुल भी ध्यान न दें|

फण्ड का चयन करते समय ध्यान दे उसके परफॉरमेंस पर और इस बात पर की वह फण्ड आपके पोर्टफोलियो मके लिए लाभकारी है की नहीं|

#2 पोर्टफोलियो में बहुत सारे म्यूच्यूअल फण्ड होना

कोई भी मौका छोड़ना नहीं चाहता| तो काफी लोग बहुत सारे म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कर देते हैं| जैसे कि पांच मिड कैप फण्ड में निवेश कर दिया| कोई न कोई फण्ड तो अच्छा करेगा ही|

मेरे अनुसार यह एक अच्छा विचार नहीं है| इससे आपको अपने पोर्टफोलियो में निर्णय लेने में और उसको मैनेज करने में बहुत परेशानी होगी|

कोशिश करें की आपके पास एक तरह के एक-दो से ज्यादा फण्ड न हो|

#3 सारे म्यूच्यूअल फण्ड शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं

ऐसा भी नहीं है|

जैसा की हमनें पिछली पोस्ट में देखा था, डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड शेयर मार्केट में निवेश नहीं करते और ऐसे फण्ड में निवेश करने पर आपको शेयर केजार के उतार चढ़ाव का सामना नहीं करना पड़ेगा|

#4 हाल के परफॉरमेंस पर ज्यादा ध्यान देना

काफी लोग फण्ड चुनने के लिए पिछले कुछ महीने के या पिछले कुछ साल के रिटर्न कर ज्यादा ध्यान देते हैं| गलत नहीं है|

परन्तु मेरे अनुसार आपको लम्बी अवधि का दौरान परफॉरमेंस (long term performance) पर अधिक ध्यान देना चाहिए| इससे आपको पता पड़ेगा की फण्ड कितना consistent है और शेयर बाज़ार के उतार chadhaav के दौरान उसने कैसा परफॉर्म किया है|

#5 म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने पर नुकसान नहीं हो सकता

कम से कम कुछ लोग तो ऐसा ही सोचते हैं की म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने पर या म्यूच्यूअल फण्ड में SIP (सिप) के द्वारा निवेश करने पर कुछ नुक्सान नहीं हो सकता|

पढ़ें: क्या हैं म्यूच्यूअल फण्ड SIP?

यह गलत है| आप कैसे भी निवेश करें, नुकसान तो हो ही सकता है| ध्यान दें इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं| जब शेयर बुरा करेंगे, तो म्यूच्यूअल फण्ड में भी नुकसान हो सकता है|

काफी लोग इस धारणा से म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने आते हैं और फिर निराश हो कर निवेश करना छोड़ देते हैं|

#6 कम अवधि के लिए निवेश करना

अगर आप इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो म्यूच्यूअल फण्ड को जादू की छड़ी न समझे|

यह सोचना गलत है की कुछ महीने में ही या एक-दो साल में आपका पैसा दोगुना या तिगुना हो जाएगा| 

यह सोच कर निवेश करेंगे तो आपको निराशा ही हाथ लगेगी| लम्बी अवधि के लिए निवेश करें|

यह थी कुछ म्यूच्यूअल फण्ड निवेश से जुडी कुछ गलतियाँ और गलतफ़हमियाँ|

अगर आपको पोस्ट अच्छी लगी हो, तो अपने परिवार और मित्रों से अवश्य शेयर करें|

Filed Under: Mutual Funds Tagged With: mutual fund mistakes, म्यूच्यूअल फण्ड, म्यूच्यूअल फण्ड में गलतियों से बचें

सेक्शन 80C के तहत इनकम टैक्स बचाने के 15 आसान तरीके

Last updated: दिसम्बर 28, 2017 | by दीपेश 6 Comments

जैसे जैसे वित्तीय वर्ष का अंत निकट आता है, वैसे ही हमारी टैक्स बचत के तरीकों की खोज शुरू हो जाती है| अब टैक्स बचाने के कई तरीके हैं|

आपको क्या करना चाहिए? टैक्स कैसे बचाएँ?

सभी के लिए शायद एक ही सुझाव सही नहीं हो सकता| सब को अपनी परिस्थितियों के अनुसार निवश के विकल्प को चुनना चाहिए’|

पिछली पोस्ट में मैंने हेल्थ इंश्योरेंस ख़रीदने पर जो टैक्स बेनिफिट मिलते हैं उस पर चर्चा करी थी|

पढ़ें: हेल्थ इंश्योरेंस (स्वाश्थ्य बीमा) खरीदने पर कितना टैक्स बचा सकते हैं?

इस पोस्ट में मैं चर्चा करूंगा Section 80C के तहत मिलने वाले टैक्स बचत के बारे में| जानेंगे की धारा 80C के तहत आपके पास क्या हैं टैक्स बचत के तरीके|

धारा 80 C  के योग्य योग निवेश उत्पादों में निवेश कर आप अपनी कर योग्य आय को 1.5 लाख तक से घटा सकते हैं। 30% टैक्स स्लैब में आने वाले निवेशकों के लिए इस मतलब है 46,350 रुपये की बचत|

कृपया ध्यान दें कि आप प्रति वर्ष 80 C उत्पादों में 1.5 लाख से अधिक भी निवेश कर सकते हैं। परन्तु कर लाभ केवल 1.5 लाख तक सीमित होगा।

उदाहरण के लिए, आपने पीपीएफ में 50,000 रुपये, ईपीएफ में 60,000 रुपये और ईएलएसएस में 1 लाख रुपये का निवेश किया है। हालांकि कुल निवेश 2.1 लाख रुपये है, धारा 80 सी के तहत टैक्स बेनिफिट केवल 1.5 लाख तक सीमित होगा

आमतौर पर, सभी धारा 80 C  के सभी टैक्स बचत के तरीकों में  लॉक-इन होता है। इसका मतलब कुछ समय तक आपका पैसा अटक जाता है|

आईये कुछ लोकप्रिय निवेश उत्पादों को देखते हैं, जिनमें निवेश करने पर आपको Section 80क के तहत टैक्स बचत का लाभ मिलता है|

#1 पीपीएफ (Public Provident Fund or PPF)

आप अपने, पति/पत्नी या बच्चों के PPF खातों में निवेश करने पर टैक्स बेनिफिट मिलता है|

माता-पिता या भाई-बहनों के पीपीएफ खाते में निवेश करने पर कोई टैक्स बचत नहीं होती।

पीपीएफ खाता खोलने वाले वित्तीय वर्ष के अंत से 15 वर्षों में परिपक्व होता है| इसलिए, पहले वर्ष का निवेश 15 साल के लिए लॉक हो जाएगा, दूसरे वर्ष का निवेश 14 साल के लिए लॉक हो जाएगा।

पीपीएफ खाता परिपक्व होने पर पांच वर्षों के ब्लाक में खाते की अवधि बढ़ा सकते हैं|

पढ़ें: पीपीएफ खाते के बैर में पूरी जानकारी

पीपीएफ खाते से मिलने वाले ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होता| साथ ही परिपक्वता पर मिलने वाली राशि पर कोई टैक्स नहीं लगता|

वित्त मंत्रालय हर तिमाही ब्याज दर सूचित करता है।

अभी ब्याज दर 7.6% p.a. हो गयी है|  (January 1, 2018)

ध्यान दें यह ब्याज दर हर तीन महीने पर बदल सकती है|

नवीनतम ब्याज दर (interest rate) जानने के लिए आप इस पोस्ट पर जाएँ|

पढ़ें: PPF में interest (ब्याज) कैसे कैलकुलेट होता है?


#2 कर्मचारी भविष्य निधि / स्वैच्छिक भविष्य निधि (Employee Provident Fund / Voluntary Provident Fund)

अगर आप सैलरी पाते हैं, तो शायद इसमें आप पहले से ही निवेश कर रहे हैं| राशि स्वचालित रूप (automatically) से आपके वेतन से काट ली जाती है और ईपीएफ में निवेश की जाती है। आप अपनी सैलरी स्लिप की जांच कर सकते हैं कि आप प्रति माह कितना ईपीएफ में निवेश कर रहे है |

एक बात और, अगर आप नौकरी कर रहे हैं, तो शायद आपका EPF में पहले से ही योगदान जा रहा हो| अब क्योंकि ईपीएफ में निवेश करने पर Section 80C के तहत लाभ मिलता है, तो कुछ निवेश तो आपका पहले ही अपने आप हो चुका है| 1.5 लाख की टैक्स सीमा तक पहुचने के लिए आपको केवल बची हुई राशि ही निवेश करनी है| आप बाद में शेष निवेशों की योजना बना सकते हैं।

कृपया ध्यान दें कि केवल आपका  योगदान ही धारा 80 सी के तहत कर लाभ के योग्य है। आपके एम्प्लायरद्वारा आपके EPF में योगदान पर धरा 80C के तहत लाभ नहीं मिलता| आप अपने अनिवार्य ईपीएफ योगदान से अधिक योगदान भी कर सकते हैं। यह योगदान (वीपीएफ) धारा 80 सी के तहत टैक्स बचत के योग्य है।


#3 इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस)

ईएलएसएस एक प्रकार के इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड होते हैं और निवेश करने पर 3 वर्ष का लॉक-इन पीरियड होता है| काफी लोग ईएलएसएस को tax-saving mutual fund के नाम से जानते हैं।

ध्यान दे, प्रत्येक निवेश पर 3 साल का लॉक-इन पीरियड होता है।

भले ही आप SIP  (सिस्टममैटिक इनवेस्टमेंट प्लान) के माध्यम से निवेश कर रहे हों, लेकिन SIP  की प्रत्येक किश्त को 3 साल तक लॉक कर दिया जाएगा। यदि पहली किश्त 15 जनवरी 2018 की है, तो इस किश्त से खरीदी गयी यूनिट्स आप 15 जनवरी 2021 तक खरीदे गए यूनिट्स  को नहीं बेच सकते हैं। दूसरी किस्त (15 फरवरी, 2018) से खरीदी गयी यूनिट्स आप 15 फरवरी, 2021 तक नहीं बेच सकते|

क्योंकि ईएलएसएस (ELSS) यूनिट्स को आप 3 वर्ष से पहले नहीं बेच सकते, तो ऐसी यूनिट्स बेचने पर होने वाले फायदे पर आपको टैक्स नहीं देना होता| ऐसा इसलिए क्योंकि इक्विटी म्यूच्यूअल फंड्स को एक साल बाद बेचने पर कोई टैक्स नहीं देना होता|

पढ़ें: ईएलएसएस (ELSS) के बारे में कुछ दिलचस्प बातें


#4 टर्म लाइफ इंश्योरेंस (Term Life Insurance)

टर्म लाइफ इंश्योरेंस जीवन बीमा खरीदना का सबसे अच्छा तरीका है|

एक टर्म कवर के साथ आप कम लागत पर काफी अधिक कवर खरीद सकते हैं। अगर आपको कभी कुछ हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में यह राशि आपके परिवार के काफी काम आएगी|

आपके पास हमेशा पर्याप्त जीवन बीमा होना चाहिए।

स्वस्थ 30 वर्षीय पुरुष के लिए 1 करोड़ रुपये के कवर के लिए वार्षिक प्रीमियम लगभग 7,000-10,000 होगा।

ध्यान दें टैक्स बेनिफिट लेने की लिए आपको हर वर्ष नया प्लान लेने की आवश्यकता नहीं है| आपका रिन्यूअल (renewal) प्रीमियम (जो आप पालिसी चालू रखें के लिए हर वर्ष देते हैं) भी धारा 80C के तहत योग्य है|

पढ़ें: 5 बेस्ट टर्म इंश्योरेंस प्लान


#5 यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान, Unit Linked Insurance Plans (ULIPs)

यूलिप जीवन बीमा योजनाओं का एक रूप है, जिसमें निवेश का लाभ भी मिलता है। प्रीमियम का एक हिस्सा जीवन कवर प्रदान करने की ओर जाता है, जबकि बचा हुआ हिस्सा आपके इच्छा के अनुसार फण्ड में निवेश कर दिया जाता है। पूरे प्रीमियम पर धारा 80 सी के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है।

पांच साल का लॉक-इन होता है। इसका मतलब है कि आप पॉलिसी के प्रारंभ होने की तारीख से पांच साल तक अपना पैसा नहीं ले सकते। इसलिए, आपका पहला वार्षिक प्रीमियम 5 साल के लिए लॉक-इन किया जाएगा, दूसरा प्रीमियम 4 साल के लिए। छठी  किश्त से कोई लॉक-इन नहीं है ।

ध्यान से आप पांचवे वर्ष के अंत तक किसी भी तरह से पैसे नहीं निकाल सकते, भले ही आप अपनी पालिसी को बंद कर दें|

धारा 80 सी के अनुसार, यदि आप लगातार 5 वर्षों तक प्रीमियम का भुगतान नहीं करते हैं तो धारा 80 सी के तहत मिले टैक्स लाभ की वापिस ले लिए जाएगा।

पढ़ें: किस प्रकार का जीवन बीमा खरीदें?


#6 पारंपरिक जीवन बीमा योजनाएं / मनी बैक योजनाएं (Traditional Life Insurance Plan)

मेरे अनुसार ऐसे प्लान से दूर ही रहे| ऐसे प्लान में जीवन बीमा भी कम मिलता है और रिटर्न भी कम होते हैं|यदि आप दो साल के लिए प्रीमियम का भुगतान नहीं करते हैं तो कर लाभ रिवर्स (reverse) कर दिया जाएगा।

पढ़ें: एलआईसी न्यू जीवन आनंद के बारे में पूरी जानकारी

जीवन बीमा पॉलिसियों के बारे में एक बात पर ध्यान दें: यह बात यूलिप और ट्रेडिशनअल इंश्योरेंस प्लान पर भी लागू होती है। बीमित रकम (Sum Assured) के 10% से अधिक वार्षिक प्रीमियम आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत कटौती के लिए योग्य नहीं है। यह अप्रैल 1, 2012 के बाद खरीदी गई नीतियों के लिए है।

इसके अतिरिक्त, केवल स्वयं, पति या पत्नी और बच्चों के लिए जीवन बीमा प्रीमियम का भुगतान धारा 80 सी के तहत कटौती के लिए पात्र है। माता-पिता और भाई-बहनों के जीवन बीमा के लिए प्रीमियम का भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं है।


#7 5-वर्षीय बैंक की फिक्स्ड डिपॉज़िट (5-year Tax Saving Fixed Deposit)

आम तौर पर टैक्स सेवर फिक्स्ड डिपॉजिट (tax saver fixed deposit) के रूप में जाना जाता है।

इस फिक्स्ड डिपाजिट की अवधि 5 वर्ष होती है| इसका मतलब आप पांच साल से पहले इस जमा राशि को नहीं निकाल सकते। मिलने वाले ब्याज पर आपकी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होता है|

पढ़ें: टैक्स बचाने के लिए ईएलएसएस और 5-वर्षीय फिक्स्ड डिपाजिट में किसमें करें निवेश?


#8 डाकघर 5-वर्षीय डिपॉज़िट

यह 5-वर्षीय बैंक की फिक्स्ड डिपॉज़िट के समान है । यदि 5 साल के अंदर जमा (टूटी हुई) वापस ले लिया जाता है तो कर लाभ वापस कर दिया जाएगा। ऐसे डिपाजिट के लिए ब्याज दर वित्त मंत्रालय द्वारा हर तिमाही (every quarter) घोषणा की जाती है।

ध्यान दे, जो डिपाजिट खोलते समय ब्याज दर है, वही आपको पूरे 5 साल मिलती है| ब्याज दर मिएँ बदलाव का आपके पुराने डिपाजिट पर नहीं पड़ता|

अभी यह दर  7.4% p.a. हो गयी है|(January 1, 2018)

ध्यान दें यह ब्याज दर हर तीन महीने पर बदल सकती है|

नवीनतम ब्याज दर (interest rate) जानने के लिए आप इस पोस्ट पर जाएँ|


#9 राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र, National Savings Certificate (NSC)

परिपक्वता (5 वर्ष या 10 वर्ष) से पहले कोई भुगतान नहीं है । समय से पहले पैसे वापसी की अनुमति नहीं है ।

ब्याज कर योग्य है हालांकि, अर्जित ब्याज एनएससी में निवेश को समझा जाता है और धारा 80 सी के तहत कटौती के लिए पात्र है,

इसका मतलब  प्रत्येक वर्ष के ब्याज को एनएससी में निवेश माना जाता है।

वित्त मंत्रालय द्वारा हर तिमाही ब्याज दर सूचित करता है|

अभी एनएससी की ब्याज दर (NSC Interest Rate) 7.6% p.a. हो गयी है। (January 1, 2018)

ध्यान दें यह ब्याज दर हर तीन महीने पर बदल सकती है|

नवीनतम ब्याज दर (interest rate) जानने के लिए आप इस पोस्ट पर जाएँ|


#10 वरिष्ठ नागरिक बचत योजना, Senior Citizen Savings Scheme (SCSS)

केवल वरिष्ठ नागरिक ही इस योजना में निवेश करने के लिए पात्र हैं। खाता 5 वर्षों में परिपक्व होता है। आंशिक वापसी (partial withdrawal) की अनुमति नहीं है । हालांकि, आप कुछ जुर्माना देकर अकाउंट को 5 वर्ष से पहले  बंद कर सकते हैं। समयपूर्व बंद होने के मामले में टैक्स बेनिफिट वापिस ले लिए जायेंगे।

हर तिमाही वित्त मंत्रालय द्वारा ब्याज दर अधिसूचित की जाती है|

अभी ब्याज दर 8.3% p.a. चल रही है| (January 1, 2018)

नवीनतम ब्याज दर (interest rate) जानने के लिए आप इस पोस्ट पर जाएँ|

सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें|

पढ़ें: सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम के बारे में पूरी जानकारी


#11 होम लोन पर प्रिंसिपल रीपेमेंट (Home Loan Principal Repayment)

अगर आपने होम लोन लिया है, तो उस लोन पर principal का भुगतान भी सेक्शन 80C के तहत लाभ के योग्य है|

ध्यान दें आप एक निर्माणाधीन प्रॉपर्टी (under-construction property) के लिए प्रिंसिपल के भुगतान पर टैक्स बेनिफिट नहीं ले सकते| घर का निर्माण पूर्ण होने के बाद ही आप कटौती का लाभ उठा सकते हैं ।

स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क धारा 80 सी के तहत कटौती के लिए भी पात्र हैं। हालांकि, इस तरह के शुल्क के भुगतान के लिए कर लाभ केवल उस वर्ष में लिया जा सकता है जब आप भुगतान करते हैं।

एक बात और, जिसवर्ष आपको घर का possession मिलता है, उस वित्तीय वर्ष के अंत से 5 साल के भीतर अगर आप घर बेचते हैं, तो आपको मिले टैक्स बेनिफिट वापिस ले लिए जायेंगे|


#12 दो बच्चों के लिए ट्यूशन फीस

आप दो बच्चों तक के लिए ट्यूशन फीस पर भी टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं। यदि आपके पास दो से अधिक बच्चे हैं, तो आप किसी भी दो के लिए दावा कर सकते हैं। भारत में स्थित विश्वविद्यालय, कॉलेज, स्कूल या अन्य शैक्षणिक संस्थान को फीस का भुगतान किया जाना चाहिए था।

बेनिफिट केवल पूर्णकालिक शिक्षा (full-time education)के लिए भी उपलब्ध है। निजी ट्यूशन, कोचिंग क्लास या किसी अंशकालिक कोर्स के लिए खर्च पात्र नहीं हैं।

अपनी शिक्षा या पति / पत्नी की शिक्षा के लिए खर्च भी टैक्स बेनिफिट के लिए पात्र नहीं है।


#13 सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana Account)

अगर आपकी बेटी की उम्र 10 साल से कम है तो आप अपनी बेटी के लिए यह खाता खोल सकते हैं। खाता 21 वर्ष बाद परिपक्व होगा| आप बेटी की शादी या पढाई के लिए भी पैसा निकाल सकते हैं|

अर्जित ब्याज कर योग्य नहीं है । परिपक्वता राशि भी कर-मुक्त है।

ब्याज दर की घोषणा हर तिमाही पर की जाती है|

अभी ब्याज दर 8.1% p.a. हो गयी है| (January 1, 2018)

नवीनतम ब्याज दर (interest rate) जानने के लिए आप इस पोस्ट पर जाएँ|

सुकन्या समृद्धि योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें|

पढ़ें: सुकन्या समृद्धि योजना के बारे में पूरी जानकारी


#14 बीमा कंपनियां से पेंशन योजनाएं (धारा 80 सीसीसी)

बीमा कंपनियों से पेंशन / वार्षिकी योजनाओं में निवेश के लिए आप प्रति वित्तीय वर्ष 1.5 लाख तक का लाभ ले सकते हैं।

यदि आप परिपक्वता से पहले पेंशन योजनाओं को सरेंडर करते हैं, तो मिलने वाली राशि को उस वर्ष की आयमाना जाएगा और आपको उस पर टैक्स देना होगा।

कृपया ध्यान दें कि धारा 80C और धारा 80 CCC के तहत कुल मिलाकर टैक्स बेनिफिट 1.5 लाख से अधिक नहीं हो सकता।


#15 राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस)/ अटल पेंशन योजना (धारा 80 CCD)

अब यहाँ दो हिस्से हैं|

पहला, 1.5 लाख तक सेक्शन 80CCD(1) के तहत| अब यह सेक्शन 80C के तहत लाभ के अन्दर ही आता है|

दूसरा, 50 हज़ार रुपये तक सेक्शन 80CCD(1B) के तहत| यह बेनिफिट सेक्शन 80C के अतिरिक्त है|

अटल पेंशन योजना में निवेश करने पर भी यही लाभ मिलेगा

पढ़ें: एनपीएस में निवेश करने पर टैक्स बेनिफिट

पढ़ें: अटल पेंशन योजना के बारे में पूरी जानकारी

यह थे कुछ उत्पाद जहां निवेश कर के आप Section 80C के तहत टैक्स लाभ ले सकते हैं| ध्यान दें यह पूरी लिस्ट नहीं है|

एक बात और, निवेश के फैसले को कभी भी सिर्फ टैक्स बेनिफिट से प्रेरित नहीं होना चाहिए। केवल टैक्स बचाने के लिए निवेश न करें| वह  निवेश करें जो आपके वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उपयुक्त है। अगर टैक्स बेनिफिट मिलता है, तो सोने पे सुहागा|

अगर आपको यह पोस्ट उपयोगी लगी हो, तो अपने परिवार और दोस्तों से अवश्य शेयर करें|

Source/Credit: PersonalFinancePlan.in

Filed Under: Financial Planning, Life Insurance, Mutual Funds, NPS, PPF, Tax Planning Tagged With: section 80C tax benefits, इनकम टैक्स बचत, ईएलएसएस, एनपीएस, टैक्स कैसे बचाएं, टैक्स छूठ, टैक्स बचत के तरीके, पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि scheme

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