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भारत सरकार 7.75% सेविंग्स (taxable) बांड्स, 2018: क्या आपको निवेश करना चाहिए?

by दीपेश Leave a Comment

भारत सरकार ने हाल ही में Government of India 7.75% Savings (Taxable) Bonds, 2018 की घोषणा की।

जानते हैं इन बांड्स के बारे में और देखते हैं की क्या आपको इन बांड्स में निवेश करना चाहिए|

इन बांडों के बारे में  जानने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक इन्फोग्राफिक को नीचे देखे।

भारत सरकार 7.75% बचत (कर योग्य) बांड्स,2018 Government of India 7.75% Savings (Taxable) Bonds, 2018: कुछ ख़ास बातें

  1. परिपक्वता (Maturity): यह बांड 7 वर्ष में मेच्योर होंगे|
  2. संचयी (cumulative)और गैर-संचयी (non-cumulative) दोनों विकल्प में उपलब्ध हैं। Non-cumulative विकल्प में आपको हर 6 महीने पर ब्याज मिलेगा| Cumulative विकल्प में आपको 7 वर्ष बाद ही पैसा मिलेगा| Compounding Frequency: 6 months
  3. ब्याज दर (Interest Rate): 7.75% p.a.
  4. Individual (आप कर सकते हैं) और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) in बांड में निवेश कर सकते हैं।
  5. अनिवासी भारतीय (Non-Resident Indian या NRI) इन बांड में निवेश नहीं कर सकते हैं।
  6. अधिकतम निवेश (Maximum Investment): कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
  7. आपको मिलने वाले ब्याज पर टैक्स देना होगा| टैक्स आपकी इनकम टैक्स सलब के अनुसार लगेगा| Interest income is taxable.
  8. निवेश पर कर लाभ (Tax Benefit on Investment): कोई टैक्स बेनिफिट नहीं है|
  9. आप मेच्योरिटी (7 साल) से पहले अपना पैसा नहीं निकाल सकते| यह बांड स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट नहीं होंगे| इसलिए आप इन बांड को बाज़ार में नहीं बेच सकते। तो अगर इन बांड में निवेश किया, तो समझ लिए की आपका पैसा 7 साल के लिए लॉक हो गया|
  10. आप इन बांड को गिरवी (collateral) रख कर बैंक से कोई लोन नहीं ले सकते|
  11. कोई क्रेडिट रिस्क नहीं है| मेरा मतलब आप पैसा सरकार को दे रहे हैं| तो पैसा आपका वापिस तो आएगा ही|
  12. कैसे निवेश करें: आप चुनिंदा बैंक शाखाओं के माध्यम से या प्रमुख ब्रोकर की वेबसाइटों के माध्यम से निवेश कर सकते हैं। यह बांड हमेशा उपलब्ध हैं| आप जब चाहें, तब निवेश कर सकते हैं|

भारत सरकार 7.75% बचत (कर योग्य) बांड, 2018 मिएँ निवेश करने पर आपको कितना पैसा मिलेगा?

मान लिए आप 1 लाख रुपये निवेश करते हैं इन बांड में|

जैसे की ऊपर चर्चा करी, आपके पास दो विकल्प हैं|

गैर-संचयी (non-cumulative) विकल्प के तहत, आपको 7 साल तक हर छह महीने में 3,875 रुपये ब्याज के तौर पर मिलेंगे। परिपक्वता के समय (7 वर्ष बाद) आपको आपका निवेश (1 लाख रुपये) लौटा दिए जायेंगे।

अगर आप संचयी मोड (cumulative) विकल्प में निवेश करते हैं,  तो परिपक्वता तक आपको कुछ नहीं मिलेगा। परिपक्वता के समय (7 वर्ष), आपको 1.7 लाख रुपये वापस मिलेंगे। तो आपका रिटर्न हुआ 7.9% p.a.

ध्यान दे यह रिटर्न टैक्स लगने से पहले के हैं (pre-tax return)|

क्या आपको भारत सरकार के 7.75% बचत (कर योग्य) बांड, 2018 में निवेश करना चाहिए?

मेरे अनुसार, अगर आपको नियमित आय नहीं चाहिए, तो इन Government of India 7.75% p.a. Savings (Taxable) Bonds ममें निवेश नहीं करना चाहिए|

ऐसा इसलिए क्योंकि:

  1. ब्याज कर योग्य है| अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट में आते है, तो आपका टैक्स बे बाद रिटर्न हुआ 5.5% p.a.
  2. साथ ही आपका पैसा 7 साल के लिए अटक जाता है| आप किसी इमरजेंसी में भी यह पैसा नहीं निकाल सकते|

तो अगर आप अभी रिटायर नहीं हुए है, तो ऐसे bonds में निवेश करने की कोई ज़रुरत नहीं है|

अब, हमें यह देखना होगा कि क्या यह बांड सेवानिवृत्त लोगों या वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक अच्छा निवेश हैं की नहीं| इसके लिए, हमें सेवानिवृत्ति के समय अन्य आय विकल्पों से तुलना करनी होगी।

प्रधान मंत्री व्यय वंदन योजना (PMVVY) में आपको 10 वर्षों के लिए 8% (कर योग्य) प्रदान करता है।

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (Senior Citizens Savings Scheme या SCSS) में अभी आपको 5 वर्षों के लिए 8.3% p.a. मिलता है| (16 जनवरी 2018) SCSS की लेटेस्ट ब्याज दर जानने के लिए इस पोस्ट पर जाएँ|

आप देख सकते हैं की यह बांड PMVVY या SCSS के मुकाबले कम रिटर्न देते हैं|

पर हाँ,  PMVVY और SCSS में अधिकतम निवेश की सीमा है|

आप पीएमवीवीवाई में 7.5 लाख रुपये और एससीएसएस में 15 लाख रुपये से ज्यादा निवेश नहीं कर सकते। इन सरकारी बांड्स में ऐसी कोई सीमा नहीं है| जितना चाहे उतना निवेश कर सकते हैं|

लेकिन अगर देखें तो, आप बैंक के फिक्स्ड डिपाजिट (Fixed Deposit) में भी जितना चाहें उतना निवेश कर सकते हैं| अगर आप एक वरिष्ठ नागरिक है, तो शायद आपको FD पर ब्याज दर भी ज्यादा मिले| साथ ही ज़रुरत पड़ने पर आप अपना फिक्स्ड डिपाजिट तोड़ भी सकते हैं|

अब फैसला आपको करना है|

क्या आप भारत सरकार के इन सेविंग्स bonds में निवेश करेंगे?

Filed Under: Financial Planning Tagged With: Government of India 7.75% Savings (Taxable) Bonds, भारत सरकार 7.75% बचत (कर योग्य) बांड्स, सरकारी बांड्स

गोल्ड लोन के बारे में पूरी जानकारी (Gold Loan in Hindi): कहाँ, कैसे और कितना मिल सकता है?

Last updated: अक्टूबर 29, 2018 | by दीपेश 28 Comments

अपने देश में ज़्यादातर लोग सोने में निवेश करते हैं| इसीलिए घर में अमूमन थोड़ा बहुत सोना तो होता ही है| अगर आपके जल्दी से लोन की आवश्यकता है, तो गोल्ड लोन एक अच्छा विकल्प को सकता है| गोल्ड लोन मिल भी आसानी से जाता है|

ध्यान दें पैसा आप सोने को बेच कर भी पा सकते हैं| पर अगर आपके पास पुश्तेनी आभूषण हैं, तो शायद आप उन्हे बेचना न चाहें| ऐसी स्तिथि में आप गोल्ड लोन के बारे में सोच सकते हैं|

इस पोस्ट में मैं चर्चा करूंगा की गोल्ड लोन के कई पहलूयों पर|

गोल्ड लोन कैसे मिलता है? कहाँ मिलता है?

आपके सोने पर कितना गोल्ड लोन मिलेगा? गोल्ड लोन पर इंटरेस्ट रेट क्या होता है?

ऐसी बहुत सी बातों पर चर्चा करेंगे| साथ ही इस बात पर भी चर्चा करेंगे की आपको गोल्ड लोन लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए|


गोल्ड लोन क्या है? What is a Gold Loan (in Hindi)?

गोल्ड लोन के तहत आप अपना सोना या सोने के आभूषण (जेवर) गिरवी (collateral) रख कर लोन लेते हैं|

जब आप लोन का भुगतान कर देते हैं, तो आपका सोना या आभूषण आपको लौटा दिया जाता है|

अगर आप लोन का भुगतान नहीं करते, तो बैंक या लोन कंपनी आपके सोने को बेच कर अपना लोन वसूल लेती है|

इसी वजह से ऐसा हो सकता है की आपको सिबिल स्कोर (CIBIL score) खराब होने के बावजूद गोल्ड लोन मिल जाए| खराब सिबिल स्कोर के साथ आपको पर्सनल लोन नहीं मिलेगा|

पढ़ें: खराब क्रेडिट स्कोर के बावजूद आप ले सकते हैं यह 6 प्रकार के लोन


गोल्ड लोन के फायदे क्या हैं? (Benefits of Gold Loan)

  1. गोल्ड लोन बहुत जल्दी मिल जाता है| कुछ लोन कंपनी तो कुछ मिनिटों में लोन देने का दावा करती हैं|
  2. ज्यादा दस्तावेज जमा करने की भी ज़रुरत नहीं होती|
  3. ब्याज दर (गोल्ड लोन इंटरेस्ट रेट) एक पर्सनल लोन से कम होगा|
  4. आपको खराब सिबिल स्कोर (CIBIL score) होने के बावजूद भी गोल्ड लोन मिल सकता है| 
  5. पर्सनल लोन की ही तरह आप लोन राशि को किसी भी कार्य के लिए उपयोग कर सकते हैं|
  6. ऐसे लोन किए लिए कई बार आपको इनकम proof की भी ज़रुरत नहीं होती| तो आप सैलरी पाते हैं, या सेल्फ-एम्प्लोयेड हैं हैं, आपको गोल्ड लोन लिम सकता है| बस आपके पास सोना होना चाहिए|

गोल्ड लोन में आपको कितना लोन मिल सकता है? प्रति ग्राम सोने (per gram gold) पर कितना लोन मिलता है? (गोल्ड लोन रेट पर ग्राम)

यह बैंक या गोल्ड लोन कंपनी पर निर्भर करता है| हर बैंक की अलग पालिसी हो सकती है|

साथ ही भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India) की भी पालिसी है|हर बैंक को रिज़र्व बैंक की पालिसी का पालन करना होता है|

रिज़र्व बैंक के अनुसार बैंक या गोल्ड लोन कंपनी आपके सोने के मूल्य पर अधिकतम 75% तक लोन दे सकते हैं| इसका मतलब Loan-to-Value (LTV) 75% से अधिक नहीं हो सकता|

मान लिए आपके पास 100 ग्राम सोने की आभूषण हैं| और सोने का मूल्य 28,000 रुपये प्रति तोला (2,800 रुपये प्रति ग्राम) चल रहा है| आपके सोने का कुल मूल्य हुआ 2 लाख 80 हज़ार रुपये|

इसका 75% प्रतिशत हुआ 2 लाख 10 हज़ार रुपये| इसका मतलब आपको इससे ज्यादा लोन नहीं मिल सकता|

बैंक अपनी पालिसी के अनुसार आपको कम लोन तो दे सकता है पर ज्यादा नहीं|

बैंक या लोन कंपनी आमतौर पर 60-65% तक के मूल्य पर लोन देती हैं|

इसके अलावा बैंक की न्यूनतम और अधिकतम लोन राशि की सीमा हो सकती है|

इन बातों पर भी खयान दे|

  1. केवल सोने का मूल्य माना जाता है।
  2. अगर आप सोने के आभूषण (जेवर) को गिरवी रखते हैं, तो आभूषण बनाने की कीमत को नहीं गिना जाएगा| लोन आपको केवल सोने के मूल्य पर मिलेगा|
  3. साथ ही जड़े हुए हीरे या अन्य पत्थरों की कीमत को भी लोन देने के लिए नहीं गिना जाएगा|
  4. जहां तक लोन के बात है, केवल आपके सोने के वज़न का माना जाएगा|

क्या सोने के सिक्कों  (Gold coins) पर गोल्ड लोन मिलता है?

आप सोने के सिक्कों (gold coins) का प्रयोग करके भी लोन ले सकते हैं|

परन्तु आपको केवल उन्ही सोने के सिक्कों पर लोन मिलेगा, जो की आपने बैंक से खरीदें हैं|

किसी जौहरी की दुकान से खरीदे हुए सोने की सिक्कों पर लोन नहीं मिलेगा|

साथ ही, बैंक से सिक्के खरीदने पर भी अधिकतम 50 gram सोने के सिक्कों पर लोन मिल सकता है| हर बैंक में यह सीमा अलग हो सकती है, परन्तु 50 ग्राम से ज्यादा नहीं हो सकती| ध्यान दें सोने के सिक्कों पर गोल्ड लोन की पाबंधी भारतीय रिज़र्व बैंक ने रखी हैं|


गोल्ड लोन के लिए सोने की कीमत क्या मानी जायेगी? (गोल्ड लोन रेट per ग्राम)

इस बात पर रिज़र्व बैंक के दिशा-निर्देश हैं|

सोने की कीमत के उद्देश्य के लिए, 22 कैरट सोने (22 carat gold) की समाप्ति मूल्य (closing price) के पिछले 30 दिन का औसत माना जाएगा (average closing price of 22 carat gold at Indian Bullion and Jewellers Association Limited for थे previous 30 days) | यदि सोने की शुद्धता 22 कैरट से कम है, तो सोने का मूल्य भी उसी अनुपात में कम होगा|

कुछ बैंक या लोन कंपनी की वेबसाइट पर लोन कैलकुलेटर भी उपलब्ध हैं| ऐसी सुविधा का उपयोग करके आप अपने लोन की क्षमता की अंदाजा ले सकते हैं| जैसे की आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) की वेबसाइट पर आप चेक कर सकते हैं की आपको आपके सोने या सोने के आभूषण पर कितना लोन मिलेगा|


गोल्ड लोन पर कितना ब्याज देना होता है? गोल्ड लोन इंटरेस्ट रेट क्या है?

हर बैंक और एनबीएफसी में ब्याज दर अलग-अलग होगी।

पर हाँ, गोल्ड लोन इंटरेस्ट रेट को आप पर्सनल लोन की ब्याज दर से कम होने की उम्मीद कर सकते हैं|

ऐसा इसीलिए क्योंकि गोल्ड लोन एक सुरक्षित लोन (secured loan) है|

ब्याज दर आपके लोन की अवधि, लोन राशि, एलटीवी (LTV) पर निर्भर कर सकती है|

हो सकता है की किसी बैंक या लोन कंपनी में आपको ज्यादा लोन मिले (उतने ही सोने पर), पर ऐसी स्तिथि में ब्याज दर ज्यादा होने की उम्मीद है|

आप ब्याज दर जानने के लिए बैंक की वेबसाइट या शाखा में जा सकते हैं|

SBI गोल्ड लोन की ब्याज दर (interest rate) जानने के लिए आप स्टेट बैंक की वेबसाइट पर जा सकते हैं|


गोल्ड लोन के अवधि कितनी होती है? (Gold Loan Tenure)

अब इस बात पर भी ध्यान देना ज़रूरी है|

गोल्ड लोन (सोने पर लोन) एक शोर्ट टर्म (short term) लोन होता है|

गोल्ड लोन की अवधि 6 महीने से 36 महीने तक हो सकती है| परन्तु ध्यान दें ज़्यादातर बैंक या लोन कंपनी केवल 12 महीने तक की अवधि का लोन ही देती हैं|

मणप्पुरम फाइनेंस (Mannapuram Finance) और मुथूट फाइनेंस (Muthoot Finance) की अधिकतम लोन अवधि 12 महीने है। आईसीआईसीआई बैंक और भारतीय स्टेट बैंक  की अधिकतम लोन अवधि भी 12 महीने ही  है। एक्सिस बैंक 36 महीनों तक एक अवधि के लिए गोल्ड लोन देता है।


गोल्ड लोन का भुगतान कैसे होता है? (Gold Loan Repayment)

आपके पास कई विकल्प होते हैं|

  1. आप EMI के द्वारा भुगतान कर सकते हैं| यह बिलकुल होम लोन की तरह ही होगी| हर महीने आपकी EMI का कुछ हिस्सा ब्याज के भुगतान के लिए जाएगा और कुछ हिस्सा मूल (principal repayment) के भुगतान के लिए| अगर आप जानना चाहते हैं की EMI वाले लों कैसे काम करते हैं, तो आप इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें|
  2. हर महीने ब्याज का भुगतान करें और लोन अवधि के अंत में एक बार में पूरा मूल चुका दें| (Interest every month and principal at the end of loan tenure)| भुगतान के इस तरीके को Bullet Repayment भी कहते हैं|
  3. लोन की शुरुआत में ही ब्याज चुकाना होगा (बैंक आपको ब्याज काट कर राशि देगा) और वर्ष के बैंक में मूल राशि (principal) का भुगतान कर दें|

ध्यान दें कि तीनों तरीकों के तहत आपकी ब्याज दर अलग हो सकती है| और यह भी ज़रूरी नहीं की आपका बैंक या लोन कंपनी आपको तीनों विकल्प दे|

आईये पहले और दूसरे तरीके की तुलना करते हैं|

sbi सबी गोल्ड लोन मुथूट गोल्ड लोन गोल्ड लोन इंटरेस्ट रेट मनाप्पुरम गोल्ड लोन


क्या मुझे अपने सोने के आभूषण वापस मिल जाते हैं?

जी हाँ, लोन के भुगतान के बाद आपको आपके आभूषण वापिस मिल जाते हैं|

परन्तु अगर लोन का भुगतान नहीं किया, तो बैंक आपके आभूषण बेच कर अपने पैसे वसूल सकता है|


गोल्ड लोन कहाँ से और कैसे लें? किन दस्तावेजों की ज़रुरत पड़ती है? (How

गोल्ड लोन आप बैंक या गोल्ड लोन कंपनी से ले सकते हैं|

अधिक जानकारी के लिए मैं आपको कुछ प्रमुख बैंक या लोन कंपनी की वेबसाइट बता देता हूँ|

  1. SBI गोल्ड लोन
  2. आईसीआईसीआई बैंक गोल्ड लोन
  3. एक्सिस बैंक गोल्ड लोन
  4. मणप्पुरम फाइनेंस गोल्ड लोन (Mannapuram Finance)
  5. मुथूट फाइनेंस गोल्ड लोन (Muthoot Finance)

ध्यान दें मैंने यह जानकारी केवल उदहारण के लिए दी है| आप किसी और बैंक से भी लोन ले सकते हैं|

आपको लोन लेने किये अपने सोने के आभूषण के साथ-साथ कुछ दतावेज़ भी जमा करने होंगे| मैं कुछ ज़रूरी डॉक्यूमेंट की लिस्ट दे देता हूँ| पूरी लिस्ट आपको बैंक से ही मिलेगी|

  1. आवेदन पत्र (Application form)
  2. पहचान पत्र, आपके पते का प्रमाण
  3. PAN कार्ड
  4. कुछ फोटो

लोन देने से पहले आपके सोने का मूल्यांकन किया जाएगा और मूल्य के अनुसार आपको लोन दिया जाएगा|


गोल्ड लोन लेते समय किन बातों का ध्यान रखें?

  1. गोल्ड लोन आपातकाल के मामलों में जल्दी धन पाने का एक अच्छा विकल्प हो सकता है|
  2. लोन लिया है, तो चुकाना भी होगा| यह सुनिश्चित करें|
  3. अगर आपको लगता है की आप यह लोन नहीं चुका पायेंगे, तो अपने सोने पर लोन (गोल्ड लोन) लेने की बजाय उसे बेच दें| क्योंकि अगर आपने लोन का भुगतान नहीं किया, तो सोना तो बिकना ही है| लोन नहीं लेंगे, तो कम से कम ब्याज से बचेंगे|
  4. क्योंकि गोल्ड लोन की अवधि कम होती है, तो आपके ऊपर भुगतान के प्रेशर भी ज्यादा होगा| अगर आपको लगता है की एक वर्ष में कुछ सुधरने वाला नहीं है, तो गोल्ड लोन न लें| अपने सोने को बेच दें| या लोन का कोई दूसरा विकल्प चुने|
  5. गोल्ड लोन पर ब्याज ही आपका इकलौता खर्च नहीं है| आपको प्रोसेसिंग फीस (processing fee), मूल्यांकन शुल्क (valuation charges) या कुछ और चार्ज भी हो सकते है| लोन लेने से पहले केवल इंटरेस्ट रेट की ही तुलना  न करें| इन सभी शुल्कों पर भी ध्यान दें|

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भारतीय स्टेट बैंक गोल्ड लोन (SBI गोल्ड लोन) की जानकारी 

अब  मैं स्टेट बैंक के गोल्ड लोन के बारे में थोड़ी से जानकारी दूंगा|

लोन लेने के लिए आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए|

आपके पास आय का स्त्रोत होना चाहिए| अगर आप स्टेट बैंक में काम करते हैं या स्टेट बैंक खाते में पेंशन पाते हैं, तो इनकम प्रूफ देने की कोई ज़रुरत नहीं है|

न्यूनतम लोन राशि: 20,000 रुपये, अधिकतम लोन राशि: 20 लाख रुपये

तीन प्रकार के गोल्ड लोन उत्पाद हैं:

  1. गोल्ड लोन: आपको हर महीने मूल राशि और ब्याज का भुगतान करना होता है| अधिकतम लोन अवधि 36 महीने है| आपको अपने सोने के मूल्य की 75% राशि तक का लोन मिल सकता है|
  2. Liquid gold loan (लिक्विड गोल्ड लोन): यह overdraft सुविधा है| आपको निकाले हुए पैसे पर हर महीने ब्याज देना होता है| पूर्ण भुगतान आप अकाउंट बंद करते समय हर सकते हैं| यहाँ पर आप कितनी बार भी पैसा निकाल और जमा कर सकते हैं| अधिकतम लोन अवधि 36 महीने है| आपको अपने सोने के मूल्य की 75% राशि तक का लोन मिल सकता है|
  3. Bullet Repayment: ब्याज और मूल राशि का भुगतान लोन अवधि के अंत में करना होता है| अधिकतम लोन अवधि 12 महीने है| आपको अपने सोने के मूल्य की 65% राशि तक का लोन मिल सकता है|

SBI गोल्ड लोन की ब्याज दर 1-year mclr + 2% है| अभी स्टेट बैंक का MCLR 8.5% p.a. चल रहा है| इसका मतलब आपको गोल्ड लोन 10.5% p.a पर मिल जाएगा|

अधिक जानकारी के लिए SBI की वेबसाइट पर जाएँ|

Filed Under: Loans Tagged With: gold loan in hindi, Gold loan per gram, Sbi गोल्ड लोन, आईसीआईसीआई गोल्ड लोन, गोल्ड लोन पर ग्राम, मुथूत फाइनेंस गोल्ड लोन

प्रॉपर्टी लोन (Loan against Property) के बारे में पूरी जानकारी

Last updated: जनवरी 29, 2018 | by दीपेश 89 Comments

मान लिए आपको 20 लाख रुपये की ज़रुरत है| आपका परिवार या मित्र आप सहायता करने की स्तिथि में नहीं हैं| किसी कारण से आपको पर्सनल लोन लेने में भी परेशानी हो रही है|

अब आपके पास क्या विकल्प हैं?

आपके पास एक प्रॉपर्टी पड़ी है, जिसे आप बेच कर ज़रूरी राशि पा सकते हैं|

पर आप वह प्रॉपर्टी भी नहीं बेचना चाहते|

अब आप क्या करेंगे?

ऐसी स्तिथि में  आप एक प्रॉपर्टी लोन (Loan against Property) ले सकते हैं| लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी में आप अपनी प्रॉपर्टी को गिरवी (mortgage) रख कर लोना ले सकते हैं|

  1. लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी (Loan against property or LAP) क्या होता है?
  2. Loan against property और एक पर्सनल लोन में क्या अंतर है?
  3. प्रॉपर्टी लोन और होम लोन में क्या अंतर है?
  4. अपनी प्रॉपर्टी पर कितना लोन ले सकते हैं?
  5. प्रॉपर्टी लोन पर कितना ब्याज (इंटरेस्ट रेट) देना पड़ सकता है?
  6. प्रॉपर्टी पर लोन कैसे लें? किन दस्तावेजों की ज़रुरत पड़ेगी?
  7. क्या प्रॉपर्टी लोन के भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट मिलता है?
  8. प्रॉपर्टी लोन लेते समय किन बातों का ख्याल रखें?
  9. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से प्रॉपर्टी लोन लेने के बारे में जानकारी

ऐसे सभी सवालों के जवाब जानने के लिए आगे पढ़ें|

प्रॉपर्टी लोन (Loan against property or LAP) क्या होता है?

आप अपनी घर या कोई कमर्शियल प्रॉपर्टी (residential or commercial property) को गिरवी रख कर लोन ले सकते हैं|

प्लाट या खाली ज़मीन पर लोन लेने में परेशानी होगी|

क्योंकि आप अब बैंक को कुछ गिरवी दे रहे हैं, हो सकता है की बैंक आपको पर्सनल लोन देने से मना कर दे, पर प्रॉपर्टी लोन देने को तैयार हो जाए| ध्यान दे पर्सनल लोन एक असुरक्षित लोन (unsecured loan) होता है|

क्योंकि प्रॉपर्टी लोन एक secured लोन है, आपकी ब्याज दर एक पर्सनल लोन से कम हो सकती है|

आपको संपत्ति (प्रॉपर्टी) बेचने की ज़रूरत नहीं है| पर ध्यान दें लोन का भुगतान आपको करना होगा| अन्यथा बैंक आपकी प्रॉपर्टी बेच कर अपना लोन वसूल लेगा|

Loan against property और एक पर्सनल लोन में क्या अंतर है?

जैसा की ऊपर लिखा है, LAP एक सुरक्षित लोन (secured loan) है| पर्सनल लोन एक असुरक्षित लोन (unsecured loan) है|

इसीलिए प्रॉपर्टी लोन मिलना की संभावना ज्यादा हो सकती है| ब्याज दर भी पर्सनल लोन से कम होगी|

पर्सनल लोन आपको 5-10 लाख से ज्यादा का नहीं मिलेगा| पर प्रॉपर्टी पर आपको 5-10 करोड़ रुपये तक का लोन मिल सकता हैं|

पर्सनल लोन की अवधि 3-5 वर्ष से ज्यादा की नहीं होगी| इसके विपरीत एक प्रॉपर्टी लोन की अवधि 15 वर्ष तक हो सकती है|

प्रॉपर्टी लोन में आपको अपनी प्रॉपर्टी गिरवी रखनी होगी| ऐसा करने के कुछ पेपर वर्क (paper work) करना होगा| इसीलिए प्रॉपर्टी पर लोन लेने में समय ला सकता है| इसीलिए थोडा समय लग सकता है|

इसके विपरीत पर्सनल लोन आपको फटाफट मिल जाता है|

प्रॉपर्टी लोन और होम लोन में क्या अंतर है?

आप एक घर खरीदने या बनाने के लिए होम लोन लेते हैं।

प्रॉपर्टी पर लोन के मामले में, आप पहले से ही संपत्ति के मालिक हैं।

प्रॉपर्टी लोन में आप संपत्ति को गिरवी रखते हैं और लोन राशि का किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग करते हैं।

  • शिक्षा
  • चिकित्सा उपचार
  • शादी
  • व्यापार की आवश्यकताओं
  • किसी दूसरे लोन का भुगतान
  • या कोई भी अन्य उद्देश्य

बैंक आपके उपयोग करने पर प्रतिबंध नहीं लगाते हैं| बस आप इस पैसे को speculative काम की लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते और इस बात के आपको बैंक को एक घोषणापत्र (undertaking) देना होगा|

अपनी प्रॉपर्टी पर कितना लोन ले सकते हैं?

बैंक आपको 5-10 कोर्ड रुपये तक का लोन दे सकते हैं| हर बैंक की अलग पालिसी हो सकती है|

पर, लोन की राशि प्रॉपर्टी के मूल्य (market value) पर निर्भर करेगी।

लोन देने से पहले बैंक आपकी प्रॉपर्टी के मूल्य का आंकलन करता है|

आपको अपनी प्रॉपर्टी के मूल्य के 50-70% तक की राशि का लोन मिल सकता है|

साथ ही बैंक इस बात पर भी ध्यान देते हैं की आप कितने लोन का भुगतान कर सकते हैं (repayment ability)| बशर्ते आपकी प्रॉपर्टी का मूल्य 1 करोड़ रुपये हो, पर अगर आप अपनी आय पर केवल 10 लाख के लोन का भुगतान कर सकते हैं, तो बैंक आपको 10 लाख से ज्यादा का लोन नहीं देगा|

संक्षेप में, बैंक इन निम्नलिखित बातों पर विचार करेगा|

  • प्रॉपर्टी का बाजार मूल्य (market value of property)
  • आपकी प्रॉपर्टी के कागज़ सही और पूरे होने चाहिए|
  • आपकी आयु (न्यूनतम और अधिकतम आयु पर सीमा हो सकती है)
  • आप सैलरी पाते हैं और स्वरोजगार हैं (salaried or self-employed)
  • आपका वेतन या वार्षिक आय
  • आपका सिबिल (क्रेडिट) स्कोर, जितना ज्यादा है, उतना बेहतर है
  • आपके दूसरे लोन

पढ़ें: सिबिल स्कोर (CIBIL score) क्या है और कैसे आपके लोन को प्रभावित करता है?

पढ़ें: अपनी सिबिल रिपोर्ट कैसे पाएं फ्री में? (How to download free CIBIL report?

प्रॉपर्टी लोन पर कितना ब्याज (इंटरेस्ट रेट) देना पड़ सकता है?

प्रॉपर्टी लोन पर ब्याज दर स्थिर नहीं रहती| लोन लेते समय ही आपको ब्याज दर चेक करनी होगी| साथ ही यह लोन एक फ्लोटिंग रेट लोन (floating rate loan) है| आपकी लोन अवधि के दौरान भू लोन की ब्याज दर बदल सकती है|

आप विभिन्न बैंक से बात करके सबसे कम ब्याज दर वाला लोन ले सकते हैं|

SBI प्रॉपर्टी लोन (SBI loan against property) की ब्याज दर जानने के लिए आप इस लिंक पर जा सकते हैं|

प्रॉपर्टी पर मिलने वाले लोन की अवधि 15 वर्ष तक भी हो सकती है|

प्रॉपर्टी पर लोन कैसे लें? किन दस्तावेजों की ज़रुरत पड़ेगी?

आपको बैंक या NBFC जाना होगा और वहाँ जा कर आवेदन करना होगा|

हालांकि बैंकों और एनबीएफसी में दस्तावेजों की सूची अलग हो सकती है, मैं कुछ प्रमुख दस्तावेजों का यहाँ जिक्र करूंगा|

  • उधारकर्ता की पहचान और पता प्रमाण (Identity and address proof of the borrower)
  • वेतन स्लिप, फॉर्म -16 (अगर आप सैलरी पाते हैं)
  • बैंक विवरण, आयकर रिटर्न, सर्टिफाइड फाइनेंसियल स्टेटमेंट (अगर आप self-employed हैं)
  • आपकी प्रॉपर्टी के कागज़ात (property papers)

इन डाक्यूमेंट्स को तैयार रखें|

क्या प्रॉपर्टी लोन के भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट मिलता है?

नहीं, प्रॉपर्टी लोन के भुगतान पर आपको कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता| न तो आपको ब्याज के भुगतान (interest payment) पर कोई टैक्स बेनिफिट मिलता है और न ही मूल के भुगतान (principal repayment) पर कोई टैक्स बेनिफिट मिलता है|

प्रॉपर्टी लोन लेते समय किन बातों का ख्याल रखें?

अच्छी बात यह है की पआपके पास प्रॉपर्टी लोन लेने का विकल्प है परन्तु लोन लेने से पहले कुछ बातों का ख्याल रखें|

  • आपने लोन लिया है, तो चुकाना भी होगा| तो लोन लेने से पहले यह बात ज़रूर सुनिश्चित कर लें| अगर लोन नहीं चुकाया, तो बैंक प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा कर उसे बेच देगा और अपना लोना वसूल लेगा|
  • इसीलिए अगर आपकी आर्थिक स्तिथि अच्छी नहीं है, तो बेहतर होगा की आप प्रॉपर्टी पर लोन लेने की बजाय उसे बेच दें| कम से कम ब्याज तो बचेगा|
  •  लोन का ब्याज आपकी एक मात्र लागत नहीं है। प्रोसेसिंग फीस, रजिस्ट्रेशन फीस, प्रॉपर्टी वैल्यूएशन फीस (मूल्यांकन शुल्क), कानूनी शुल्क आदि जैसे कई और खर्चे भी आपको उठाना होंगे।
  • हालांकि प्रॉपर्टी लोन का ब्याज दर पर्सनल लोन से कम होने की उम्मीद है, आप पर्सनल लोन के लिए भी कोशिश करें} क्या पता आपको पर्सनल लोन ही सस्ता मिल जाए|
  • अगर बच्चों की पढाई के लिए लोन ले रहे हैं, तो शिक्षा लोन के लिए कोशिश करें| एजुकेशन लोन सस्ता भी होगा और भुगतान पर टैक्स बेनिफिट भी मिलेंगे|
  • बैंक या NBFC का फैसला करने से पहले 2-3 जगह ब्याज दर और अन्य शुल्कों का पता कर लें|

तो प्रॉपर्टी लोन लेने से पहले इन बातों का ख्याल ज़रूर रखें|

 

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से प्रॉपर्टी लोन लेने के बारे में जानकारी

आईये देखते हैं SBI से मिलने वाले प्रॉपर्टी लोन के बारे में|

मासिक आय: कम से कम 25,000 रुपये

न्यूमतम लोन राशि: 10 लाख रुपये

अधिकतम लोन राशि: 7.5 करोड़ रुपये (प्रॉपर्टी के मूल्य की 65% प्रतिशत राशि का लोन ले सकते हैं)

ब्याज दर: नवीनतम ब्याज दर जाने के लिए यहाँ क्लिक करें|

लोन की अवधि के बारें में साईट पर नहीं बताया गया है| पर यह बताया है लोन समाप्ति के समय आपकी आयु 70 वर्ष से ज्यादा नहीं हो सकती| तो अगर आपकी आयु 60 वर्ष है, तो लोन की अवधि 10 वर्ष से अधिक नहीं हो सकती|

अधिक जानकारी के लिए आप अपनी निकटतम शाखा या SBI वेबसाइट पर SBI प्रॉपर्टी लोन के पेज पर भी जा सकते हैं|आप यह जानकारी इस लिंक पर भी पा सकते हैं

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क्या आप इनकम टैक्स बचाने के इन 13 स्मार्ट तरीकों के बारे में जानते हैं?

by दीपेश 2 Comments

जब टैक्स बचाने के लिए निवेश की बात आती है, हम में से अधिकांश लोग जीवन बीमा, पेंशन योजनाओं, ईएलएसएस, पीपीएफ और ईपीएफ और होम लोन के भुगतान के बारे में  जानते हैं।

पर इनके अलावा भी बहुत सारे तरीके हैं, जिन से आप आसानी से टैक्स बचा सकते हैं|

#1 बचत बैंक खाते पर ब्याज (Interest Income on Savings Bank Account) (Section 80 TTA)

आपके सेविंग्स बैंक अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज 10,000 रुपये तक कर मुक्त है|

यह टैक्स छूठ आपको सेक्शन 80TTA के अंतर्गत मिलती है|

अगर आपने सेविंग्स अकाउंट पर एक वित्तीय वर्ष में 10,000 रुपये से अधिक ब्याज कमाया है, तो अतिरिक्त राशि पर आपको अपने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स जमा करना होगा|

ध्यान दें की यह छूठ आपके सभी बचत बैंक खातों (savings bank account) को मिला कर है| तो आप बहुत सारे सेविंग्स अकाउंट खोल कर अपना टैक्स नहीं बचा सकते|

ध्यान दें यह छूठ केवल बचत बैंक खातों पर मिलने वाले ब्याज पर है।

फिक्स्ड डिपॉजिट (fixed deposit) पर मिलने वाले ब्याज पर ऐसी कोई राहत नहीं है।

पढ़ें: सेक्शन 80C के तहत किन तरीकों से कर सकते हैं टैक्स बचत?

#2 शिक्षा ऋण पर ब्याज (धारा 80E) (Interest on Education Loan)

आप उच्च शिक्षा के लिए लोन के पूरे ब्याज का भुगतान पर धारा 80E के तहत टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

ध्यान दें केवल ब्याज के भुगतान पर टैक्स बेनिफिट मिलता है| मूल राशि (principal repayment) के भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं है|

आप अपनी, पति/पत्नी, बच्चों (या किसी भी व्यक्ति जिसके लिए आप कानूनी संरक्षक हैं) की उच्च शिक्षा के लोन के भुगतान के लिए टैक्स बेनिफिट ले सकते है|

उच्च शिक्षा का मतलब है वरिष्ठ माध्यमिक परीक्षा (Senior Secondary Examination) उत्तीर्ण करने के बाद की पढ़ाई।

यह टैक्स बेनिफिट आपको उस वर्ष से मिलता है, जब आप इस शिक्षा लोन को चुकाना शुरू करते हैं| यह टैक्स लाभ आप 8 वर्ष तक उठा सकते हैं|

शिक्षा लोन पर मिलने वाले टैक्स लाभ के बारे में अधिक जानकारी के लिए, आप इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं|

#3 घर के किराए पर Section 80GG के तहत कर लाभ

अब HRA पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट से तो कर कोई अवगत है| साथ यह टैक्स बेनिफिट आपको आपका एम्प्लायर अपने आप ही दे देता है|

पर अगर आपको HRA नहीं मिलता है या फिर आप self-employed हैं, तब भी आप कुछ टैक्स बेनिफिट पा सकते हैं|

धारा 80GG के तहत कटौती का लाभ ( 5,000 रुपये प्रति माह, कुल आय का 25%, किराया – वार्षिक आय का 10%) में से सबसे कम राशि तक सीमित है| टैक्स लाभ लेने से पहले आपको कई शर्तों को पूरा करना होगा|

HRA से मिलने वाले टैक्स बेनिफिट की गणना कैसे की जाती है और धारा 80GG के तहत टैक्स बेनिफिट लेने की क्या शर्तें हैं, इस बारे में मैंने विस्तार से दूसरी पोस्ट में चर्चा करी है|

पढ़ें: मकान के किराए पर भी आप कर सकते हैं टैक्स बचत

#4 आपके घर की स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क (धारा 80C) (Stamp Duty and Registration Fee)

होम लोन के मूल भुगतान (principal repayment) पर सेक्शन 80C के अंतर्गत टैक्स लाभ मिलता है| इस बात से सभी लोग अवगत हैं|

पर क्या आप जानते हैं की आप अपने घर लेते समय स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस पर भी धारा 80C के अंतर्गत आप लाभ ले सकते हैं|

एक बात और, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस के भुगतान के लिए टैक्स बेनिफिट लेने के लिए आपको होम लोन लेने की ज़रुरत नहीं है| होम लोन लिए बिना भी आप इस भुगतान के लिए टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं| ऐसे व्यय पर टैक्स बेनिफिट तभी ले सकते हैं, जिस साल आपने यह भुगतान किया हो|

धारा 80 सी के तहत स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क के लिए कटौती का दावा भी कर सकते हैं। आप इन खर्चों के लिए इस कटौती का लाभ ले सकते हैं भले ही आपने गृह ऋण न लिया हो।

#5 स्वास्थ्य बीमा और निवारक स्वास्थ्य जांच के लिए प्रीमियम (सेक्शन 80D) (Health Insurance and Health Check–up)

#6 अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए मेडिकल व्यय (> = 80 वर्ष) (धारा 80D)

#7 गंभीर बीमारी के लिए उपचार लागत (सेक्शन 80DDB)

#8 आश्रित विकलांग परिजन की चिकित्सा के लिए खर्चा  (धारा 80DD)

#9 विकलांग व्यक्ति के मामले में कटौती (धारा 80U)

इन सभी टैक्स बचत के तरीकों के बारे में गहराई से जानने के लिए आप इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं|

पढ़ें: हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट

#10 एनपीएस में निवेश की गई राशि (Section 80CCD)

एनपीएस में निवेश करने पर आपको Section 80CCD के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है| साथ ही अगर आपका एम्प्लायर आपके एनपीएस खाते में पैसे जमा करता है, तो आपको उसके लिए भी टैक्स बेनिफिट मिलता है|

Section 80CCD(1): 1.5 लाख रुपये तक (यह  धारा 80C के तहत मिलने वाले लाभ के अन्दर ही आता है)| आपके योगदान के लिए|

Section 80CCD(1B): 50,000 रुपये तक (यह कर लाभ अतिरिक्त है)| आपके योगदान के लिए|

Section 80CCD(2): यह आपके एम्प्लायर के आपके एनपीएस खाते में योगदान पर मिलता है|

एनपीएस में निवेश पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट के बारे में विस्तार से जानने के लिए इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें|

पढ़ें: एनपीएस में निवेश पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट

#11 अटल पेंशन योजना में निवेश (Section 80 CCD)

एनपीएस के तरह अटल पेंशन योजना में भी निवेश करने पर आपको धारा 80CCD के तहत टैक्स लाभ मिलता है|

अटल पेंशन योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें|

#12 घर की मरम्मत और रखरखाव के लिए लिए गए लोन पर ब्याज (धारा 24) (Interest on Loan taken for repair and maintenance of house)

आपको पता है की आपने घर खरीदने या बनाने के लिए जो होम लोन लिया है, उसके ब्याज के भुगतान पर आपको वर्ष में 2 लाख रुपये तक की छूठ मिलती है (धारा 24 के तहत)|  

पर क्या आप जानते है की आपको यह छूठ अपने मकान की मरम्मत (repair) और रखरखाव (maintenance) के लिए लिए गए लोन पर भी मिलती है| ऐसे किसी लोन पर आप एक वित्तीय वर्ष में 30,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं| यह लाभ भी धारा 24 के तहत ही है|

#13 सामजिक कार्यों के लिए प्रतिदान (धारा 80G) (Donation for Social Causes)

आपके द्वारा दी गयी कई तरह की डोनेशन धारा 80 जी के तहत कटौती के लिए पात्र हैं| आपकी दान राशि के 50% या 100% तक की राशि पर आपको टैक्स बेनिफिट मिलता है| कुछ तरह के दान पर टैक्स लाभ की सीमा (cap) है और कुछ पर नहीं है| यह इस बात पर निर्भर करता है की आप कहाँ पैसे का दान कर रहे हैं| एक बात और, अगर आप नकद में दान (डोनेशन) देते हैं, तो इस लाभ की सीमा 10,000 रुपये हैं|

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मकान के किराए पर कैसे बचा सकते है इनकम टैक्स? (HRA, Section 80GG)

Last updated: फ़रवरी 27, 2019 | by दीपेश 19 Comments

काफी लोग होम लोन पर टैक्स बेनिफिट के बारे में जानते हैं| मूल भुगतान (principal repayment) के लिए धारा 80C के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है| ब्याज के भुगतान (interest payment) के लिए 2 लाख रुपये तक का टैक्स बेनिफिट मिलता है|

अब घर लेना तो सबके बस की बात नहीं| मकानों के दाम आसमान छू रहे हैं| इसीलिए हम में से काफी लोग किराये पर भी रहते हैं|

अच्छी बात यह है की किराए पर रहने पर भी आपको कुछ टैक्स बेनिफिट मिलते हैं| इसका मतलब अगर आप किराए पर रहते हैं, टी दिए गए किराए पर कुछ टैक्स बेनिफिट पा सकते हैं|

आईये जानते हैं की क्या हैं यह टैक्स बेनेफिट्स

1. House Rent Allowance (HRA या एचआरए) मकान किराया भत्ता

यदि आप कहीं नौकरी करते हैं, तो आप इस बारे में शायद पहले से ही काफी जानते हों।

HRA आपके वेतन का एक हिस्सा होता है| आप अपनी सैलरी स्लिप पढ़ कर इस बारे में जान सकते हैं|

एचआरए पर टैक्स बेनिफिट धारा 10 (13A) और आयकर अधिनियम के नियम 2A के तहत मिलता है।

ध्यान दें पूरा HRA टैक्स-मुक्त नहीं होता है| कुछ ही हिस्से पर छूट मिलती है|

आईये देखते हैं, कैसे गणना की जाती है आपको मिलने वाली टैक्स छूठ की|

पहले इन तीन संख्यायों का पता लगायें|

  1. House Rent Allowance (HRA या मकान किराया भत्ता)
  2. Rent – 10% of Basic Salary (किराया – मूल वेतन का 10%)
  3. 40% of Basic Salary. If you are staying in a metro city, 50% of Basic Salary (मूल वेतन का 40%), यदि आप मेट्रो शहर (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता) में रह रहे हैं तो सीमा 50% मूल वेतन है)

इन तीन संख्यायों में जो सबसे कम है, उस पर आपको टैक्स बेनिफिट मिलता है|

आईये उदहारण की सहायता से समझते हैं|

अमित एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करता है।

उसकी बेसिक सैलरी 60,000 रुपये प्रति माह है|

उसे  HRA के रूप में 45,000 रुपये प्रति माह प्राप्त होता है। वह एक किराए के घर में रहता है और प्रति माह 40,000 रुपये का किराया देता है।

अगर आप किसी मेट्रो सिटी में नहीं रहते हैं

tax benefit rent HRA section 80 GG 1 टैक्स बचत टैक्स सेविंग taxes

अगर आप किसी मेट्रो सिटी में रहते हैं

आप एचआरए को देख सकते हैं, जिस शहर में आप रह रहे हैं, उस पर निर्भर करता है।

इसलिए, यदि अमित 30% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं और मुंबई में रहते हैं, तो वह आयकर की कीमत (360,000 रुपये का 30%) = 1.2 लाख (सेस को छोड़कर) बचाएंगे। यह एक महत्वपूर्ण राशि है|

पढ़ें: टैक्स बचाने के 15 आसान तरीके

इन बातों का ख्याल रखें

  1. एचआरए आपकी सैलरी (वेतन) का हिस्सा होना चाहिए| इसका मतलब आपकी सैलरी स्लिप (salary structure) में HRA दिखना चाहिए (आपके फॉर्म 16 में दिखना चाहिए)
  2. आप एचआरए के तहत टैक्स बेनिफिट तभी ले सकते हैं, जबकि आप एक किराए के घर में रह रहे हों| यदि आप अपने घर में रह रहे हैं तो आपको HRA पर कोई टैक्स लाभ नहीं मिलेगा। पूरे HRA पर टैक्स देना होगा|
  3. आपकी टैक्स छूठ के बाद जो एचआरए का अतिरिक्त हिस्सा है, उस पर आपको अपनी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा।
  4. निजी क्षेत्र में कुछ कंपनियां आपको वित्तीय वर्ष की शुरुआत में अपने वेतन का ढांचा (सैलरी structure) चुनने का विकल्प देतीं है| आप इस एचआरए के कैलकुलेशन को ध्यान में रखते हुए अपने लिए HRA चुन सकते हैं और अधिक टैक्स बचा सकते हैं।
  5. एचआरए (HRA) पर टैक्स छूठ मासिक आधार (monthly basis) पर है। इसका मतलब 12 महीनों की छूठ को मिला पूरे साल की छूठ की गणना होती है| यदि आपका वेतन और किराया वित्तीय वर्ष के दौरान स्थिर रहता है, तो यह पहलू कुछ भी प्रभावित नहीं करेगा। परन्तु, यदि वेतन या किराए में साल के बीच में परिवर्तन होता है, तो पहले हर महीने की गणना करनी होगी। उसके बाद आप पूरे साल का निकाल सकते हैं|

मैं अपने माता-पिता के घर में रहता हूँ| क्या मैं एचआरए का टैक्स बेनिफिट ले सकता हूँ?

हां, आप यह कर सकते हैं। पर माता पिता को किराया ज़रूर दें। बेहतर होगा की माता-पिता के बैंक खाते में किराया जमा करें और रसीद भी लें|

इससे पूरा रिकॉर्ड बना रहेगा और अगर आयकर विभाग इस बात पर सवाल उठाता है, तो आपके पास प्रमाण होगा|

और हाँ, आपके माता-पिता के आयकर रिटर्न में इस किराये की आय दिखनी चाहिए।

क्या मैं अपने पति या पत्नी को घर का किराया देकर टैक्स बेनिफिट ले सकता/सकती हूँ?

मतलब घर आपके पति या पत्नी के नाम पर है और आप उन्हें किराया दे रहे हैं|

ऐसा न करें, तो बेहतर हैं| फंस सकते हैं| आयकर विभाग इस बात पर सवाल उठा सकता है|

मैं और मेरी पत्नी दोनों जॉब करते हैं| किराया भी देते हैं| क्या HRA का टैक्स बेनिफिट दोनों ले सकते हैं?

हां, आप दोनों HRA का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

पर कुछ बातों का ख्याल रखें|

केवल उतना ही टैक्स बेनिफिट लें, जिसका भुगतान आप कर रहे हैं| मान लिए कुल किराया 30,000 रुपये है| आप 20,000 रुपये का भुगतान कर रहे हैं और आपकी पत्नी 10,000 रुपये का भुगतान कर रहीं हैं| आपको बराबर भुगतान करने की कोई ज़रुरत नहीं हैं|

जब HRA बेनिफिट को कैलकुलेट करें, तो आप 20,000 रुपये किराया मानें और आपकी पत्नी 10,000| आप दोनों 30,000 रुपये किराया नहीं मान सकते|

बेहतर होगा की बैंक में पैसे ट्रान्सफर करने का पूरा रिकॉर्ड हो| अगर पूरा किराया आप ही देते हैं, तो अपनी पत्नी से हर महीने 10,000 रुपये आपके खाते में ट्रान्सफर करने हो कहें|

यदि संभव हो तो, मकान मालिक से दो रसीदें लें।

मैंने होम लोन के माध्यम से एक घर खरीदा है, परन्तु किराए के घर में रहता हूँ|

ऐसी स्तिथि में आप होम लोन और HRA दोनों पर टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

पर हाँ, ऐसा न हो की आप बस टैक्स बचने के लिए ही किराए पर रह रहे हों| अगर आपका अपना घर और किराय्व वाला घर बहुत आस-पास हैं, तो आयकर विभाग इस पर सवाल उठा सकता है|

पढ़ें: हेल्थ इंश्योरेंस खरीदकर बचीयें इनकम टैक्स

2. Section80 GG (Self Employed लोगों के लिए)

अब मान लिए की:

  1. आप सेल्फ-एम्प्लोयेड (self-employed) हैं, तो आपको HRA मिलेगा ही नहीं| तो आप टैक्स बेनिफिट कैसे लेंगे?
  2. यह भी हो सकता है की आपका एम्प्लायर आपको HRA देता ही न हो| इसका मतलब HRA आपकी सैलरी का हिस्सा नहीं है| आप टैक्स बेनिफिट कैसे लेंगे?

ऐसे लोगों के लिए भी सरकार ने घर के किराए पर कुछ राहत दी है|

यह राहत Section 80GG के तहत दी गयी है।

आईये देखते हैं ली आपको कितनी राहत मिलती है|

पहले इन तीन राशियों को कैलकुलेट करिए

  1. Rs. 5,000 per month (प्रति माह 5,000 रुपये, 60,000 रुपये प्रति वर्ष)
  2. 25% of Total Income (कुल आय का 25%)
  3. Rent – 10% of Total Income (किराया – कुल आय का 10%)

अब तीनों राशियों में जो भी सबसे कम है, आपको उतना लाभ मिलेगा|

तो आप देख सकते हैं की अधिकतम लाभ 60,000 रुपये तक सीमित है|

पर हाँ, यह लाभ पाने के लिए आपको कुछ शर्तें पूरी करनी होगी|

  1. जिस शहर में आप काम कर रहे हैं, वहां आपके, आपके पति / पत्नी या नाबालिग बच्चे के नाम पर कोई मकान नहीं होना चाहिए।
  2. आपके पास किसी अन्य स्थान पर कोई मकान (self-occupied property) नहीं होनी चाहिए|
  3. आपने पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान HRA नहीं मिलना चाहिए। यदि आप वित्तीय वर्ष में 1 महीने के लिए कार्यरत थे (और एचआरए का फायदा उठाते हैं) और शेष अवधि में स्व-नियोजित (self-employed) थे, तो आप धारा 80 GG के तहत टैक्स लाभ नहीं ले सकते।

कटौती धारा 80GG का दावा करने के लिए, आपको फार्म 10 BA के तहत बताना होगा।

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नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) के बारें में पूरी जानकारी (Complete Information about NPS in Hindi)

Last updated: जून 28, 2019 | by दीपेश 128 Comments

अगर आप एनपीएस में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो आपको NPS के बारें में पूरी जानकारी होनी चाहिए|

तो देर किस बात की| आईये जानते हैं एनपीएस के बारे में गहराई से|

  1. एनपीएस क्या है? What is NPS? (in Hindi)
  2. सरकारी एनपीएस और निजी क्षेत्र एनपीएस में क्या अंतर है?
  3. आप कितने एनपीएस खाते खोल सकते हैं? PRAN (प्रान) क्या है? नौकरी बदलने पर PRAN को कैसे शिफ्ट करें?
  4. एनपीएस खाता कैसे खोलें?
  5. एनपीएस खाता में ऑनलाइन निवेश कर सकते हैं क्या?
  6. एनपीएस टियर 1 और एनपीएस टियर 2 अकाउंट क्या होते हैं?
  7. एनपीएस में रिटर्न कितना मिलता है?
  8. एनपीएस में निवेश करने पर क्या टैक्स बेनिफिट मिलता है? (Tax Benefit for Investment in NPS)
  9. एनपीएस से पैसा निकालने पर कितना टैक्स देना होता है?
  10. क्या 60 वर्ष की आयु से पहले आप एनपीएस से पैसा निकाल सकते हैं?

एनपीएस क्या है? What is NPS? (in Hindi)

एनपीएस का मतलब है नेशनल पेंशन स्कीम (National Pension Scheme).

एनपीएस एक पेंशन योजना है|

जैसा की किसी भी पेंशन योजना में होता है, आप इस योजना में अपने रिटायरमेंट के लिए निवेश करते हैं| आपके निवेश और उस पर मिलने वाले रिटर्न से आपका एनपीएस खाता धीरे-धीरे बड़ा होता जाता है|

रिटायर होने के बाद आपको पेंशन मिलती है| रिटायर होने से मेरा मतलब 60 वर्ष की आयु का होना या फिर आपके एम्प्लायर की superannuation (रिटायरमेंट आयु) हासिल करना|

रिटायर होने पर या 60 वर्ष की आयु के होने पर आप अपना खाता बंद कर सकते हैं| खाता बंद करते समय आप कुछ पैसा एक मुश्त निकाल सकते हैं| बचे हुए पैसे से आपको एक वार्षिकी उत्पाद (annuity plan) खरीदना होगा|

ध्यान दें आपको कम-से-कम 40% जमा राशि से एक वार्षिकी (annuity plan) खरीदना होगा|

एक उदहारण की सहायता से समझते हैं|

मान लिए 60 वर्ष की आयु तक आपने अपने एनपीएस खाते में 10 लाख रुपये जमा कर लिए हैं|

इन 10 लाख रुपये में से आपको 4 लाख रुपये का तो एक एन्युटी प्लान (वार्षिकी) खरीदना होगा ही| बचे हुए 6 लाख रुपये को आप एक मुश्त निकाल सकते हैं|

ध्यान दें चाहें तो पूरी राशि का एन्युटी प्लान खरीद सकते हैं|

पढ़ें: एनपीएस के बारें में कुछ ग़लतफ़हमियाँ

पोस्ट की शुरुआत में जाएँ

Annuity प्लान (वार्षिकी) क्या होती है?

एक वार्षिकी के तहत आप एक बीमा कंपनी को एक मुश्त पैसा देते हैं और इसके बदले आपको पूरी ज़िन्दगी पेंशन मिलती रहती है|

मान लिए आपके पास 10 लाख रुपये हैं| और उस समय एन्युटी का इंटरेस्ट रेट 6% चल रहा है|

तो बीमा कंपनी आपसे 10 लाख रुपये लेकर आपको आजीवन हर वर्ष 60,000 (10 लाख X 6%) रुपये देगी| अगर आप मासिक आय का विकल्प चुनते हैं, तो आपको हर महीने 5,000 रूपये मिलेंगे|

अब चाहें आप 100 वर्ष की आयु तक जियें या 150 वर्ष के आयु तक, आपको हर महीने 5,000 रुपये मिलते रहेंगे|

एक बात और, वार्षिकी या एन्युटी प्लान कई स्वरुप में आते हैं| जैसे की आप चाहें तो आपके बाद आपके पति या पत्नी को भी पेंशन जारी रह सकती है| आप अपनी ज़रुरत के अनुसार विकल्प चुन सकते हैं|

एनपीएस में चार सेक्टर होते हैं

देखिले एनपीएस खाता खोलने के कई तरीके हैं| आप किस तरीके से खाता खोलते हैं, उस बात से तय होता है, की आप कैसे एनपीएस के तहत आते हैं|

  1. Central Government (केन्द्रीय सरकार): केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिए
  2. State Government (राज्य सरकार): राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए
  3. Corporate Sector: निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए
  4. All Citizens Model: अगर आप खुद अपने लिए NPS account खोलते हैं

ध्यान दें एनपीएस खाता पूरी तरह पोर्टेबल है| इसका मतलब, बशर्ते आपने खाता केंद्रीय सरकार एनपीएस के तहत खोला हो, आप नौकरी छोड़ने या बदलने पर अपना एनपीएस दूसरे सेक्टर में बदल सकते हैं|

सच बतायूं तो ऐसा कोई अंतर नहीं है, इन सेक्टरों में| बस अगर आपको अपने एम्प्लायर से भी योगदान चाहिए, तो आपको उनके अनुसार अपना एनपीएस अकाउंट खोलना होगा या शिफ्ट करना होगा|

साथ ही सरकारी एनपीएस खातों में निवेश के नियम थोड़े अलग होते हैं|

आप कितने एनपीएस अकाउंट खोल सकते हैं? PRAN (प्रान) क्या है? नौकरी बदलने पर PRAN को कैसे शिफ्ट करें?

आप केवल एक ही एनपीएस खाता खोल सकते हैं|

PRAN का मतलब Permanent Retirement Account Number.

जब आप कोई एनपीएस अकाउंट खोलते हैं, तो आपको एक PRAN मिलता है|

एक व्यक्ति के पास केवल एक ही PRAN हो सकता है| इसका मतलब आप दूसरा PRAN नहीं खोल सकते|

आपका PRAN पूरी तरह पोर्टेबल है|

अगर आप आपको अपने एनपीएस अकाउंट शिफ्ट (shift) करना है, तो आपको नया अकाउंट खोलने की ज़रुरत नहीं है| आप पुराने एनपीएस अकाउंट (PRAN) को ही शिफ्ट कर सकते हैं| ऐसा करने की ज़रुरत आपको नौकरी बदलते समय पड़ सकती है|

इस विषय के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं|

पढ़ें: नौकरी बदलते समय अपने एनपीएस अकाउंट (PRAN) को कैसे शिफ्ट करें?

अगर आपने गलती से दो एनपीएस अकाउंट खोल दिए हैं, तो आप एक अकाउंट को बंद करना पड़ेगा| ऐसा करने के लिए प्रक्रिया को जान्ने के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|

पढ़ें: अगर आपके पास दो एनपीएस अकाउंट हैं, तो क्या करें?

एनपीएस अकाउंट कैसे खोलें?

एनपीएस खाता खोलने की कई तरीके हैं|

आप अपने एम्प्लायर (ससरकारी या निजी क्षेत्र) की सहायता से अपना खाता खोल सकते हैं|

आप अपने नज़दीकी बैंक शाखा में जा कर अपना एनपीएस खाता खोल सकते हैं| साथ की बहुत से ब्रोकर की वेबसाइट से आप एनपीएस खाता ऑनलाइन खोल सकते हैं|

इसके अलावा आप अपने आधार कार्ड की सहायता से भी आप अपना NPS अकाउंट खोल सकते हैं| ऐसा करने की प्रक्रिया को मैंने विस्तार से एक दूसरी पोस्ट में बताया है|

पढ़ें: एनपीएस अकाउंट कैसे खोलें आधार कार्ड की सहायता से?

 

एनपीएस खाता में ऑनलाइन निवेश कर सकते हैं क्या?

जी हाँ, आप चाहें तो एनपीएस में ऑनलाइन भी निवेश कर सकते हैं|

इस बारे में मैंने इस पोस्ट में चर्चा करी है|

पढ़ें: एनपीएस में ऑनलाइन निवेश कैसे करें?

एनपीएस में दो तरह के अकाउंट होते हैं

एनपीएस टियर 1 और एनपीएस टियर 2

इनमें से केवल एनपीएस टियर 1 ही रिटायरमेंट पेंशन अकाउंट है|

टियर 2 अकाउंट एक म्यूच्यूअल फण्ड की तरह है| आप जब चाहें उससे पैसे निकाल सकते हैं|

किसी भी तरह के गलती से बचने के लिए इन दोनों अकाउंट के बीच के अंतर को जाने|

मैंने एनपीएस टियर 1 और टियर 2 अकाउंट के बारे में विस्तार से इस पोस्ट में चर्चा करी है|

पढ़ें: एनपीएस टियर 1 और टियर 2 अकाउंट क्या हैं? क्या है अंतर?

पढ़ें: एनपीएस टियर 2 (NPS Tier 2) अकाउंट की पूरी जानकारी और क्या आपको निवेश करना चाहिए?

एनपीएस में रिटर्न कितना मिलता है?

एनपीएस में कोई रिटर्न की गारंटी नहीं है| और न ही सरकार हर वर्ष रिटर्न की घोषणा करती है|

निवेश करते समय आप यह बता सकते हैं की आपका पैसा कैसे निवेश करना है| एनपीएस खाता खोलने का बाद आप चाहें तो यह निवेश का पैटर्न बदल भी सकते हैं|

अब आपके पास निवेश के कई विकल्प हैं:

  1. आप इक्विटी फण्ड (E) में पैसा लगा सकते हैं
  2. आप सरकारी बोंड्स (G) में पैसा लगा सकते हैं
  3. आप कॉर्पोरेट बांड्स (C) में पैसा लगा सकते हैं

साथ ही आपको फण्ड मेनेजर का चुनाव भी करना पड़ता है|

आपके पास निवेश के दो तरीकें है|

  1. आप अपने आप अपने निवेशों का चयन कर सकते हैं| इसका मतलब कितना पैसा (E), (G) या (C) में डालना है| इस Active Choice कहते हैं| बस कुछ सीमाएं हैं| कॉर्पोरेट सेक्टर एनपीएस और आल सिटीजन्स मॉडल एनपीएस ग्राहकों के लिए इक्विटी फण्ड (E) में निवेश करने की सीमा अधिकतम 50% प्रतिशत है| सरकारी एनपीएस में यह सीमा 15% है|
  2. कॉर्पोरेट सेक्टर एनपीएस और आल सिटीजन्स मॉडल एनपीएस ग्राहकों के पास Auto चॉइस का विकल्प भी है| इसमें नीचे दिए गए चार्ट के अनुसार आपकी आयु के अनुसार आपके एनपीएस पोर्टफोलियो बदलता रहता है| शुरुआत में इक्विटी मिएँ ज्यादा निवेश होता है| धीरे-धीरे आयु के साथ इक्विटी (E) में निवेश कम होता जाता है| इसे Auto Choice या LifeCycle Fund कहते हैं| ध्यान दें यह विकल्प सरकारी कर्मचारियों को उपलब्ध नहीं है|

एनपीएस के बारे में पूरी जानकारी complete information about nps in hindi

सौजन्य: www.personalfinanceplan.in

एनपीएस में निवेश करने पर क्या टैक्स बेनिफिट मिलता है? (Tax Benefit for Investment in NPS)

अब एनपीएस में आकर्षित होने की एक वजह निवेश पर मिलने वाले टैक्स लाभ भी हैं|

आप इस Youtube विडियो पर NPS के टैक्स बेनिफिट के बारे में पूरी जानकारी पा सकते हैं|

एनपीएस पर मिलने वाले टैक्स बेनेफिट्स पर मैंने विस्तार से इस पोस्ट में चर्चा करी है|

पढ़ें: एनपीएस में निवेश करने पर क्या टैक्स बेनिफिट मिलते हैं?

एनपीएस से पैसा निकालने पर कितना टैक्स देना होता है?

एनपीएस के टैक्स नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं|

एनपीएस से बाहर निकलते समय आप कुछ पैसा एक-मुश्त निकाल सकते हैं| बचे हुए पैसे से आपको एन्युटी प्लान खरीदना होता है|

आप जो पैसा एक-मुश्त निकालते हैं, उस पर आपको कोई भी टैक्स नहीं देना है| ध्यान दें आप केवल जमा राशि का 60% पैसा ही एक-मुश्त निकाल सकते हैं|

जिस राशि से आप एन्युटी प्लान खरीदते हैं, उस पर भी आपको कोई टैक्स नहीं देना होता| परन्तु उस एन्युटी प्लान से जो राशि भविष्य में मिलती है, उस पर आपको अपने टैक्स ब्रैकेट के अनुसार टैक्स देना होगा|

इस विषय पर मैंने विस्तार से इस पोस्ट में चर्चा करी है|

पढ़ें: एनपीएस से पैसा निकालने पर कितना टैक्स देना होता है?

क्या 60 वर्ष की आयु से पहले आप एनपीएस से पैसा निकाल सकते हैं?

जी हाँ, कुछ विशिष्ठ परिस्थितियों में एनपीएस से कुछ पैसा निकालने की अनुमति है|

आप गंभीर बीमारियों की इलाज़ के लिए, बच्चों की उच्च शिक्षा या विवाह के लिए या घर खरीदने या बनाने के लिए अपने एनपीएस खाते से कुछ पैसे निकाल सकते हैं|

ऐसा ही नहीं, आप 60 वर्ष के आयु से पहले भी अपने एनपीएस खाता बंद कर सकते हैं| पर नियम थोड़े से पेचीदा  हैं|

मैंने सारी जानकारी विस्तार से इस पोस्ट में चर्चा करी है|

पढ़ें: एनपीएस से आंशिक निकासी और 60 वर्ष की आयु से पहले एनपीएस खाता बंद करने के नियम

 

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