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एलआईसी कैंसर कवर प्लान (टेबल 905) के बारे में जानकारी (LIC Cancer Cover Plan in Hindi)

Last updated: मई 9, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

इस पोस्ट में चर्चा करेंगे LIC Cancer Plan (प्लान 905) के बारे में|

एलआईसी कैंसर कवर पालिसी (प्लान 905) की पूरी जानकारी (LIC Cancer Cover Plan in Hindi)

  1. प्रवेश के समय न्यूनतम आयु (Minimum Entry Age): 20 वर्ष
  2. प्रवेश के समय अधिकतम आयु (Maximum Entry Age): 65 वर्ष
  3. परिपक्वता के समय न्यूनतम आयु (Maximum Age at Maturity): 50 वर्ष
  4. परिपक्वता के समय अधिकतम आयु (Maximum Age at Maturity): 75 वर्ष
  5. न्यूनतम बीमा राशि (Minimum Basic Sum Insured): 10 लाख रुपये
  6. अधिकतम बेसिक बीमा राशि (Maximum Basic Sum Insured): 50 लाख रुपये
  7. न्यूनतम पॉलिसी अवधि (Minimum Policy Term): 10 वर्ष
  8. अधिकतम पॉलिसी अवधि (Maximum Policy Term): 30 वर्ष
  9. केवल cancer के diagnosis होने पर ही पालिसी से भुगतान होगा|
  10. इस प्लान में कोई मेच्योरिटी बेनिफिट नहीं है|
  11. इस प्लान से आप लोन नहीं ले सकते|
  12. पालिसी सरेंडर करने पर आपको कोई लाभ नहीं मिलेगा|
  13. पालिसी ऑनलाइन खरीदने पर आपको 7% discount मिलेगा|

LIC Cancer Cover Policy में बीमा राशि के क्या विकल्प हैं?

आपके पास दो विकल्प हैं|

#1 Level Sum Insured

बीमा राशि पालिसी अवधि के दौरान एक समान रहती है|

#2 Increasing Sum Insured

बीमा राशि पहले पांच वर्ष तक 10% हर वर्ष बढती है| परन्तु हाँ, अगर आपको पांच वर्ष से पहले cancer diagnosis (डायग्नोसिस) हो जाता है, तो आपकी बीमा राशि नहीं बढ़ेगी|

आप उम्मीद कर सकते हैं की Increasing Sum Insured विकल्प का प्रीमियम ज्यादा होगा|

एलआईसी कैंसर प्लान के क्या लाभ हैं? (LIC Cancer Plan: Benefits)

आपको लाभ केवल तभी मिलेगा जब आपको cancer का diagnosis होगा|

अब कैंसर दो स्टेज में diagnosis हो सकता है|

Early Stage Cancer (प्रारंभिक दौर में) या Major Stage Cancer (एडवांस्ड स्टेज में)

पालिसी से भुगतान इस बात पर निर्भर करता है की आपका diagnosis किस stage में हुआ है|

एक बात और, पालिसी के अनुसार cancer की परिभाषा है| हो सकता है की जिस तरह का cancer आपको हो, वह इस प्लान में कवर न हो| क्योंकि में कोई doctor नहीं हूँ, मेरे लिए cancer के बारे में जानकारी देना मुमकिन नहीं है|

आपको राय दूंगा की आप LIC Cancer plan की सैंपल पालिसी को अच्छे से पढ़ें आर जाने क्या Early Stage Cancer और क्या Major Stage Cancer है|

Early Stage Cancer में भुगतान (Early Stage Cancer Benefit)

  1. बीमा राशि (Sum Insured) की 25% राशि पालिसी धारक को दे दी जायेगी|
  2. अगले 3 वर्ष का प्रीमियम माफ़ कर दिया जाएगा|
  3. ध्यान दें आप Early Stage Cancer बेनिफिट पूरी पालिसी अवधि में केवल एक बार ले सकते हैं| अगली बार अगर आपको Early Stage Cancer का डायग्नोसिस होता है, तो पालिसी से कुछ भी नहीं मिलेगा|
  4. आपने जब बेनिफिट लिया, उसके बाद से आपकी बीमा राशि भुगतान राशि से कम हो जायेगी|

Major Stage Cancer में भुगतान (Major Stage Cancer Benefit)

  1. Lump Sum Benefit: 100% बीमा राशि दी जायेगी| अगर Early Stage Cancer बेनिफिट के तौर पर राशि पहले दी गयी हैं, तो वह राशि घटा दी जायेगी|
  2. Income Benefit: 10 वर्ष तक हर महीने बीमा राशि का 1% आपको दिया जाएगा| आपकी मृत्यु होने पर भी आपके नॉमिनी को यह राशि मिलती रहेगी|
  3. Premium Waiver Benefit: इसके बाद आपको कोई प्रीमियम भी नहीं देना होगा|
  4. एक बार आपने Major Stage Cancer Benefit ले लिया, तो उसके बाद Early Stage Cancer Benefit नहीं ले सकते|
  5. आप समझ सकते हैं, की जैसे ही आपने Major Stage cancer बेनिफिट लिया, उसके बाद आपकी पालिसी खत्म हो जायेगी| बस Income Benefit मिलता रहेगा|

एक उदहारण की सहायता से समझने की कोशिश करते हैं|

मान लिए आपने 10 लाख रुपये का Level Sum Insured प्लान लिया|

दो वर्ष बाद आपको Early Stage cancer डायग्नोज़ होता है| आपको 2.5 लाख रुपये दे दिया जाएगा|

अगले तीन वर्ष तक आपको प्रीमियम नहीं देना होगा|

उसके 5 साल बाद आपको Major Stage Cancer डायग्नोज़ होता है| आपको 7.5 लाख रुपये दे दिए जायेंगे|

साथ ही अगले 10 वर्ष तक आपको हर महीने 10 लाख X 1% = 10,000 रुपये दिए जांयेंगे|

अगर आपकी मृत्यु भी हो जाती है, तब भी यह राशि आपके परिवार (नॉमिनी) को दी जायेगी|

ध्यान दें LIC Cancer प्लान से होने वाले भुगतान का आपके इक्लाज़ पर होने वाले खर्चे से कोई मतलब नहीं है|

एलआईसी कैंसर कवर प्लान (प्लान 905) का प्रीमियम कितना है?

एलआईसी कैंसर बीमा पालिसी का प्रीमियम आप LIC की वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं|

मैंने एक 40 वर्षीय व्यक्ति (पुरुष) के लिए 50 लाख के बीमा का प्रीमियम चेक किया| पालिसी अवधि 30 वर्ष|

Level Sum Insured: Rs. 23,155 (GST को मिला कर)

Increasing Sum Insured:  Rs. 33,197 (GST को मिला कर)

महिलायों के लिए प्रीमियम अधिक होगा|

टेबुलर प्रीमियम आप नीचे देख सकते हैं| यहाँ दी गयी राशि प्रति 1,000 रुपये Sum Insured के लिए है|

lic cancer plan एलआईसी कैंसर कवर प्लान 905

ध्यान दें आपका प्रीमियम केवल 5 वर्ष ही एक समान (constant) रहेगा| पांच वर्ष बाद प्रीमियम बदल सकता है|

आप यह पालिसी ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं| ऑनलाइन पालिसी खरीदने पर आपको 7% discount भी मिलेगा|

क्या LIC Cancer plan खरीदने पर कोई टैक्स बेनिफिट मिलता है?

LIC Cancer प्लान एक प्रकार से हेल्थ इंश्योरेंस प्लान की तरह ही है|

इसीलिए आपको प्रीमियम भुगतान पर Section 80D अंतर्गत टैक्स बेनिफिट मिलता है|

अगर आपकी आयु 60 वर्ष से कम है, तो प्रति वर्ष 25,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

अगर आपकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है, तो 50,000 रुपये प्रति वर्ष का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

हेल्थ इंश्योरेंस प्लान के टैक्स बेनिफिट पर अधिक जानकारी का लिए इस पोस्ट को पढ़ें|

LIC Cancer Plan से मिलने वाली राशि पर कोई टैक्स नहीं देना होगा|

इन बातों पर भी ध्यान दें

  1. अगर आपको पालिसी अवधि की समाप्ति तक cancer नहीं होता, तो आपको कुछ भी नहीं मिलेगा|
  2. अगर पालिसी खरीदने के 180 दिन के भीतर पालिसी धारक को cancer डायग्नोज़ होता है, तो पालिसी से कुछ भी भुगतान नहीं मिलेगा|
  3. अगर cancer के diagnosis के 7 दिन के अन्दर पालिसी धारक की मृत्यु हो जाती है, तो पालिसी से कुछ भी भुगतान नहीं होगा| इस अवधि ( 7 दिन) को Survival period कहते हैं|
  4. आप LIC cancer प्लान को ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं| ऑनलाइन पालिसी खरीदने पर आपको 7% discount मिलेगा|

 ध्यान दें इस प्लान के बारे में पूरी जानकारी देना इस पोस्ट में मेरे लिए मुमकिन नहीं है|

अगर आपकी इस प्लान को खरीदने में रूचि है, तो प्लान लेने से पहले प्लान का सैंपल डॉक्यूमेंट अवश्य पढ़ें| ऐसी बहुत सी बातें और शर्ते हैं, जिनकी वजह से आपके फैसले पर असर पड़ सकता है|

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सीनियर सिटीजन को जीवन बीमा नहीं लेना चाहिए: 5 कारण

Last updated: मई 2, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

बहुत से लोग निवेश करने की लिए जीवन बीमा पालिसी का सहारा लेते हैं| केवल युवा लोग ही नहीं, वरिष्ठ नागरिक या सेवानिवृत्त लोग भी जीवन बीमा प्लान (लाइफ इंश्योरेंस प्लान) खरीदते हैं|

मेरे अनुसार वरिष्ठ नागरिकों (सीनियर सिटीजन) को जीवन बीमा उत्पाद खरीदने की कोई ज़रुरत नहीं है|

इस पोस्ट में कुछ कारणों पर चर्चा करते हैं|

# 1 आपको शायद जीवन बीमा की आवश्यकता ही नहीं हो

अगर आपने रिटायर होने से पहले आपने सही से फाइनेंसियल प्लानिंग करी है, तो आपको रिटायरमेंट के वक़्त लाइफ इंश्योरेंस (जीवन बीमा) की ज़रुरत नहीं होनी चाहिए|

देखिये, अगर रिटायरमेंट से पहले ही अपने खर्चों या अन्य कामों के लिए पैसा इकठ्ठा कर चुके हैं, तो जीवन बीमा की ज़रुरत अपने आप ही खत्म हो जाती है|

अगर आपके पास पर्याप्त धन है, तो जीवन बीमा की ज़रुरत ही नहीं है| बिना बात प्रीमियम का पैसा बेकार जाएगा|

मैं केवल पारंपरिक बीमा प्लान (ट्रेडिशनल लाइफ इंश्योरेंस प्लान) या यूलिप प्लान की बात नहीं कर रहा हूँ| आपको टर्म इंश्योरेंस प्लान की ज़रुरत भी नहीं होनी चाहिए|

# 2 आपको प्रीमियम देने में परेशानी होगी

यदि आप सेवानिवृत्ति के दौरान जीवन बीमा योजना खरीदते हैं, तो आपको योजना जारी रखने के लिए प्रीमियम का भुगतान करते रहना होगा।

यह प्रीमियम आपके बजट पर दबाव डालेगा|

जब जीवन बीमा की ज़रुरत ही नहीं है, तो ऐसा खर्चा क्यों करना|

ऐसा हो सकता है की आपको सिंगल प्रीमियम इंश्योरेंस प्लान बेचने की कोशिश की जाए| सिंगल प्रीमियम प्लान में केवल एक बार प्रीमियम देना होता है| परन्तु वहां भी परेशानी है| पोस्ट में आगे इस बारे में चर्चा करूंगा|

# 3 आपको खराब रिटर्न मिलेगा

यह बहुत अहम् मुद्दा है|

काफी लोग लाइफ इंश्योरेंस प्लान केवल जीवन बीमा के लिए नहीं खरीदते बल्कि रिटर्न पाने के लिए खरीदते हैं| इसके लिए वह पारंपरिक जीवन बीमा प्लान (ट्रेडिशनल प्लान) या यूलिप (Unit Linked Insurance Plan) खरीदते हैं|

मुझे पूरा विश्वास है की बहुत से सीनियर सिटीजन भी जीवन बीमा खरीदते समय रिटर्न के बारे में ही सोचते हैं|

यदि मैं आपसे कहूं की आपकी अधिक आयु की वजह से आपके रिटर्न कम होंगे, तो आप क्या करेंगे?

जी हाँ, य़ह सच हैं।

ऐसा इसीलिए होता है, क्योंकि यूलिप और ट्रेडिशनल प्लान में कुछ हिस्सा मोर्टेलिटी चार्ज की ओर जाता है|

Mortality चार्ज आपको जीवन बीमा प्रदान कर के लिए चार्ज किया जाता है| जो राशि बचती है, वह निवेश होती है|

जैसे-जैसे आपकी आयु बढती है, वैसे-वैसे मोर्टेलिटी चार्ज बढ़ते जाते हैं| अगर mortality चार्ज ज्यादा है, तो आपके निवेश या प्रीमियम का अधिक हिस्सा mortality चार्ज के भुगतान की ओर जाएगा|

इससे आपके रिटर्न कम हो जायेंगे|

आइए एक पारंपरिक योजना का उद्धरण लेते हैं।

आइए मान लें कि 30 वर्षीय व्यक्ति (अमित) और 60 वर्षीय व्यक्ति (रमेश) 10 लाख रुपये के बीमा योजना खरीदते हैं। दोनों की पालिसी अवधि सामान है|

रमेश का प्रीमियम ज्यादा होगा क्योंकि उसकी आयु ज्यादा है|

अब देखें तो, परिपक्वता के समय, दोनों को एक ही राशि मिलेगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि बीमित राशि समान है और बोनस पॉलिसी अवधि पर निर्भर करता है (जो दोनों के लिए सामान है)|

रमेश को मेच्योरिटी के समय राशि अमित के सामान ही मिलेगी परन्तु उसका प्रीमियम अमित के प्रीमियम से ज्यादा है|

आप देख सकते हैं की रमेश को कम रिटर्न मिलेंगे क्योंकि उसकी आयु ज्यादा है|

यूलिप के मामले में, आपके फंड मूल्य का एक हिस्सा मोर्टेलिटी चार्ज के भुगतान के लिए जाता हैऔर बचा हुआ पैसा निवेशित रहता है| जाहिर है, अगर आपकी उम्र ज्यादा है, तो ज्यादा पैसा मोर्टेलिटी चार्ज के लिए कटेगा।

इससे भी आपके रिटर्न प्रभावित होंगे|

कुछ ऐसे मामले भी सामने आयें है की जहाँ पर मोर्टेलिटी चार्ज वरिष्ठ नागरिकों के यूलिप में निवेश का पूरा हिस्सा ही खा गए|

एक मामले में एक सीनियर सिटीजन ने यूलिप में 50,000 रुपये निवेश किये और कुछ वर्ष में उनके निवेश का मूल्य घटकर 248 रुपये हो गया|

दूसरे मामले में एक वरिष्ठ नागरिक ने 6 साल में 3.2 लाख रुपये यूलिप में निवेश किये और 6 वर्ष बाद उनके निवेश का मूल्य घटकर 11,678 रुपये हो गया|

यदि आपको जीवन बीमा की आवश्यकता नहीं है तो आपको mortality चार्ज का भार उठाने की कोई ज़रुरत नहीं है|

#4 मेच्योरिटी के समय आपको परिपक्वता राशि पर टैक्स देना पड़ सकता है

हम में से ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि जीवन बीमा कंपनी से प्राप्त राशि पर कोई टैक्स नहीं देना होता|

यह बात मृत्यु लाभ (धारक की मृत्यु के समय मिलने वाली राशि) के लिए सच है लेकिन परिपक्वता लाभ (maturity benefit) के लिए नहीं।

परिपक्वता लाभ टैक्स-फ्री तभी होता है जबकि:

वार्षिक प्रीमियम मृत्यु लाभ (death benefit या Sum Assured) के 10% से कम होना चाहिए| इसका मतलब मृत्यु लाभ (death benefit) वार्षिक प्रीमियम (annual premium) का कम से कम 10 गुना होना चाहिए।

Sum Assured >= 10 times annual premium

यह आयकर अधिनियम की धारा 10 (10 D) के अनुसार है।

अधिकांश सिंगल प्रीमियम योजनायों में यह शर्त पूरी नहीं होती|

वरिष्ठ नागरिकों के लिए रेगुलर प्रीमियम पालिसी (जहाँ पर हर वर्ष प्रीमियम देना होता है) में भी यह परेशानी आ सकती है|

मैं IRDA Linked Product Regulation, 2013 से एक अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ| यह नियम यूलिप पर लागू होते हैं।

सीनियर सिटीजन जीवन बीमा लाइफ इन्शुरन्स

जैसा कि आप देख सकते हैं, काफी अधिक संभावना है की सिंगल प्रीमियम योजना की परिपक्वता राशि पर धारक को टैक्स देना होगा| ऐसा इसलिए की अधिकतर मामलों में टैक्स बचने वाली शर्त पूरी नहीं होगी|

वरिष्ठ नागरिकों के लिए तो यह संभावना और भी कम है| रेगुलर प्रीमियम प्लान में भी वरिष्ठ नागरिकों को परेशानी हो सकती है|

अगर आयु 45 वर्ष से कम है, तो आप सुरक्षित हैं क्योंकि जीवन बीमा वार्षिक प्रीमियम का कम से कम 10 गुना होगा।

45 वर्ष से अधिक आयु पर जीवन बीमा वार्षिक प्रीमियम का कम से कम 7 गुना होना चाहिए| यहाँ समस्या हो सकती है|

एक बात और,  यह समस्या केवल यूलिप प्लान तक ही सीमित नहीं है। पारंपरिक प्लान में भी यह समस्या आ सकती है| एलआईसी बीमा बचत योजना एक उदहारण है|

अब देखें तो सीनियर सिटीजन को रिटर्न भी कम मिलते हैं और मेच्योरिटी पर राशि पर टैक्स भी दना पड़ सकता है| ऐसे में जीवन बीमा प्लान लेना समझदारी का फैसला नहीं होगा

# 5 ज़रुरत पड़ने पर पैसा निकालने में परशानी हो सकती है

रिटायरमेंट के बाद आप चाहेंगे की ज़रुरत पड़ने पर आप अपने पैसे को आसानी से निकाल पाएं।

परन्तु पारंपरिक जीवन बीमा योजनायों (traditional life insurance plans) में मेच्योरिटी से पहले पैसे निकालने पर काफी पेनल्टी देनी पड़ती है| यूलिप में भी  आपका पैसा 5 साल के लिए लॉक हो जाता है।

निष्कर्ष यह है की सीनियर सिटीजन को लाइफ इंश्योरेंस प्लान नहीं खरीदने चाहिए| वजह बहुत सारी हैं| शायद उनको जीवन बीमा की ज़रुरत न हो| प्रीमियम देने में परशानी होगी| उनकी अधिक आयु की वजह से रिटर्न कम होंगे| मेच्योरिटी पर टैक्स देना पड़ सकता है| साथ की ज़रुरत पड़ने पर पैसा निकालना में परेशानी हो सकती है|

सौजन्य: www.PersonalFinancePlan.in

Filed Under: Financial Planning, Life Insurance Tagged With: वरिष्ठ नागरिक बीमा योजना, सीनियर सिटीजन लाइफ इंश्योरेंस

SBI पेंशन लोन की पूरी जानकारी (SBI Pension Loan in Hindi)

by दीपेश 23 Comments

किसी को भी आर्थिक आपातकालीन स्तिथि (financial emergency) का सामना करना पड़ सकता है|

यदि आप जवान हैं और नौकरी कर रहे हैं, तो आपके पास पैसा इकठ्ठा करने के कई विकल्प हो सकते हैं| पर्सनल लोन के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।

परन्तु अगर आप सेवानिवृत्त (रिटायर्ड/retired) हैं और पेंशन पर रह रहे हों, तब आप क्या करेंगे? रिटायर होने के बाद लोन मिलना आसान बात नहीं है|

आप सोचते होंगे की रिटायर होने के बाद शायद पर्सनल लोन न मिले|

यह पूरी तरह से सच नहीं है।

इस पोस्ट में मैं SBI पेंशन लोन के बारे में बात करूंगा| SBI पेंशन लोन एक पर्सनल लोन उत्पाद है  जिसे विशेष रूप से पेंशनभोगियों (pensioners) के लिए बनाया गया है।

SBI पेंशन लोन राज्य और केंद्र सरकार के पेंशनरों, रक्षा पेंशनभोगियों (defence pensioners) और यहां तक ​​कि परिवार पेंशनरों/family pensioners (पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद पेंशन प्राप्त करने के लिए अधिकृत पति / पत्नी) के लिए उपलब्ध है।

एसबीआई पेंशन लोन:पात्रता (SBI Pension Loan: Eligibility)

  1. आप केंद्र सरकार या राज्य सरकार या रक्षा पेंशनभोगी (या एक परिवार पेंशनभोगी) होने चाहिए। रक्षा पेंशनभोगी (defence pensioner) में सेना, नौसेना, वायुसेना, अर्धसैनिक बलों (CRPF, BSF, CISF, ITBP इत्यादि), कोस्ट गार्ड, राष्ट्रीय राइफल्स और असम राइफल्स शामिल हैं।
  2. मेरे अनुसार अगर आप निजी फर्म से पेंशन आ रहे हैं, तो आप इस SBI पेंशन लोन के लिए योग्य नहीं होंगे।
  3. लोन लेते समय अधिकतम आयु: 76 वर्ष। यह सीमा family pensioner पर भी लागू होती है।
  4. लोन लेते समय न्यूनतम आयु: कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है
  5. आपकी पेंशन SBI खाते में आनी चाहिए|
  6. साथ ही आपको एक undertaking देनी होगी की आप पेंशन पाने के लिए अपनी बैंक शाखा नहीं बदलेंगे| आपको पेंशन देने वाले को (treasury) को आपके अनुरोध को स्वीकार करना होगा। यह सुनिश्चित करना है कि आप एसबीआई के माध्यम से अपनी पेंशन को रूट करें।

एसबीआई पेंशन लोन: ख़ास बातें (SBI Pension Loan: Salient Features)

  1. रक्षा पेंशनभोगियों (Defence pensioners) के किये कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं है।
  2. आपके पेंशन खाते (बैंक खाते) से EMI वसूल ली जाएगी।
  3. समय से पहले लोन का भुगतान करने पर भुगतान राशि पर 3% पेनल्टी (pre-payment penalty) लगेगी|
  4. अगर आपने SBI पेंशन लोन योजना से दूसरा लोन लिया है और उस लोन राशि से पहले लोन का भुगतान किया है, तो कोई प्रीपेमेंट (prepayment) पेनल्टी नहीं लगेगी|
  5. आपको लोन इंश्योरेंस खरीदने की ज़रुरत नहीं है|

एसबीआई पेंशन लोन योजना के तहत आपको कितना ऋण लोन सकता है? लोन की अवधि क्या होती है?

न्यूनतम लोन राशि 25,000 रुपये है।

अधिकतम लोन राशि और लोन की अवधि (loan tenure) पेंशनभोगी की आयु और पेंशन के प्रकार पर निर्भर करता है।

इसके अतिरिक्त आपके लोन की EMI आपकी पेंशन के 50% से अधिक नहीं हो सकती|

EMI/NMP (Net Monthly Pension) <= 50%

अगर आप family pensioner हैं, तो यह अनुपात घटकर 33% रह जाता है|

 

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मान लिए आप केंद्र सरकार के पेंशनभोगी (Central Govt. Pensioner) हैं और आपकी मासिक पेंशन 30,000 रुपये है| आपकी आयु 73 वर्ष है| आपको 12 लाख रुपये से अधिक का लोन नहीं मिल सकता|

साथ ही, आप अपनी मासिक पेंशन का अधिकतम 18 गुना राशि का लोन ले सकते हैं| इसका मतलब हुआ: 30,000 X 18 = 5.4 लाख रुपये

इसके साथ ही, आपको केवल उतना ही लोन मिल सकता है, जिसकी EMI 15,000 रुपये (30,000 रुपये का 50%) से अधिक न हो|

लोन अवधि 4 वर्ष होगी|

अगर ब्याज की दर 10 p.a. है, लोन की अवधि 4 वर्ष है और EMI अधिकतम 15,000 रुपये हो सकती है, तो आपकी अधिकतम लोन राशि 5.91 लाख रुपये हो सकती है|

इन तीनों राशियों (12 लाख, 5.4 लाख, 5.91 लाख) में से सबसे छोटी राशि आपके लिए अधिकतम लोन राशि होगी|

इस केस में अधिकतम लोन राशि हुई 5.4 लाख रुपये|

SBI पेंशन लोन पाने के लिए कोई सेकुरिटी (security) देनी होती है?

कोई भी सेकुरिटी (गिरवी रखने) देने की ज़रुरत नहीं है|

परन्तु आपको किसी तीसरे पक्ष से लोन गारंटी (third party guarantee) लानी पड़ेगी| यह भी कोई छोटी परेशानी नहीं है|

अगर आपके पति/पत्नी फॅमिली पेंशन के लिए योग्य है, तो आपके पति / पत्नी की गारंटी भी चल जायेगी|

एसबीआई पेंशन लोन योजना के लिए ब्याज दरें क्या हैं? SBI Pension Loan Interest Rate)

लेटेस्ट ब्याज दर आप स्टेट बैंक की वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं|

2 मई, 2018 को, दर है: 2 year MCLR (8.25%) + 3.35%

क्या आपको एसबीआई पेंशन लोन लेना चाहिए?

यह इस बात पर निर्भर करता है की आपके पास क्या विकल्प हैं|

यदि आपको धन की आवश्यकता है और कहीं और से व्यवस्था नहीं कर सकते है, तो यह एक अच्छा विकल्प है।

ध्यान रखें लोन का भुगतान आपके घर के बजट पर असर डालेगा|

SBI पेंशन लोन के बारे में अधिक जानकारी के लिए भारतीय स्टेट बैंक की वेबसाइट पर जाएँ|

सौजन्य: EMICalculator.net

आप अपने लोन की EMI यहाँ कैलकुलेट कर सकते हैं|

emicalculator.net

 

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मार्कशीट लोन क्या है? Marksheet Loan in Hindi

Last updated: मई 2, 2018 | by दीपेश 6 Comments

मार्कशीट लोन क्या है? Marksheet Loan in Hindi 

विभिन्न प्रकार के लोन के बारे में जानने के लिए जब मैंने गूगल किया, तो मेरे सामने मार्कशीट लोन का नाम सामने आया| मुझे मार्कशीट लोन के बारे में जान्ने में जिज्ञासा हुई|

मैंने बहुत सारे लेख पढ़े और विभिन्न बैंक की वेबसाइट पर भी गया| मेरा निष्कर्ष यह है की मार्कशीट लोन (marksheet loan) नाम का कोई भी लोन उत्पाद नहीं होता|

मार्कशीट लोन नाम को कोई लोन उत्पाद नहीं है

जो भी marksheet loan बारे में लिख रहा है, वह केवल आपको बेवकूफ बना रहा है| जितने भी पोस्ट मैंने पढ़े, सारे बकवास थे| किसी में कोई भी जानकारी नहीं थी|

अलग-अलग नाम से जैसे की 10th pass marksheet loan, sbi मार्कशीट लोन इत्यादि के नाम से लोगों ने लिखा हुआ है| लोगों को आकर्षित करने के लिए गलत सन्देश भी दिए हुए हैं, जैसे की, मार्कशीट लाओ और 5 लाख का लोन ले जाओ|

अगर आपकी मार्कशीट पर 5 लाख रुपये के लोन मिलता होता, तो सरकार को प्रधान मंत्री मुद्रा योजना शुरू करने की क्या ज़रुरत थी|

आप किसी छलावे में ना आयें|

मार्कशीट लोन का नाम सुनकर आपको ऐसा लगेगा जैसे की आप अपनी दसवीं (10th) या बारहवी (12th) क्लास की मार्कशीट जमा कर के लोन ले सकते हैं| ऐसा नहीं होता| कोई भी बैंक आपकी मार्कशीट का जमा करके लोन नहीं देता| सुनने में ही सब कुछ छलावा लगता है| भला बैंक आपकी मार्कशीट का क्या करेगा?

कई जगह ऐसा भी लिखा हुआ था की आप 10वीं की मार्कशीट जमा करके अपने व्यवसाय इत्यादि के लिए मार्कशीट लोन ले सकते हैं| ऐसा नहीं है| मैं मानता हूँ की आपको लोन देते समय बैंक आपकी पढाई की बारे में जानकारी मांगे| परन्तु यह सोचना बेवकूफी है की बैंक आपको 10th क्लास की मार्कशीट देखकर लोन दे देंगे|

मार्कशीट लोन या एजुकेशन लोन

एक जगह मैंने पढ़ा की मार्कशीट लोन एजुकेशन लोन (शिक्षा लोन) का दूसरा नाम है| वैसे किसी भी बैंक की वेबसाइट पर ऐसी कोई जानकारी नहीं थी| परन्तु अगर यह बात सही है, तो एजुकेशन लोन केवल पढाई के लिए मिलता है (और न व्ययसाय के लिए)|

मैंने SBI से मिलने वाले स्टूडेंट लोन या एजुकेशन लोन (SBI स्टूडेंट लोन) के बारे में एक पोस्ट में चर्चा करी है| एजुकेशन लोन (शिक्षा लोन) के भुगतान पर मिलने पर टैक्स बेनिफिट पर भी चर्चा करी है|

 

मार्कशीट लोन के चक्कर में न पड़ें

जैसे की ऊपर लिखा है, मार्कशीट नाम को कोई लोन नहीं होता|

लोग आपसे कुछ पैसे लेकर शायद आपको मार्कशीट लोन दिलाने का दावा करें| इस तरह के झांसे में न आयें|

अगर उच्च शिक्षा के लिए लोन चाहिए. तो बैंक में जा कर शिक्षा लोन के लिए आवेदन करें|

अगर व्यवसाय के लिए लोन चाहिए, तो सरकार की योजनायों के तहत लोन पाने की कोशिश करें|

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रिटायरमेंट में आय के लिए निवेश के 10 तरीके

Last updated: मई 1, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

रिटायर होने के बाद भी आय (इनकम) की ज़रुरत होती है| वेतन मिलना तो बंद हो जाता है, पर आपके खर्चे खत्म  नहीं होते|

इस पोस्ट में रिटायरमेंट के दौरान नियमित आय पाने के 10 तरीकों पर चर्चा करते हैं|

अवश्य पढ़ें: सीनियर सिटीजन को मिलने वाले 7 स्पेशल टैक्स बेनिफिट

#1 बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (Bank Fixed Deposit)

इसको समझना सबसे आसान है| हर व्यक्ति ने कभी न कभी फिक्स्ड डिपाजिट तो खोला ही होगा|

आप मासिक (monthly), त्रैमासिक (quarterly), अर्ध-वार्षिक (half-yearly) या वार्षिक (annual) ब्याज भुगतान का विकल्प चुन सकते हैं।

फायदे: समझने में आसान है। ज़रुरत पड़ने पर आप थोड़ी सी पेनल्टी दे कर अपना पैसा निकाल भी सकते (FD तोड़ सकते हैं) हैं|

नुकसान: मिलने वाले ब्याज पर आपको अपने टैक्स ब्रैकेट के अनुसार टैक्स देना होता है| आपको 7-10 वर्षों सेअधिक अवधि के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट नहीं मिलेगा। FD मेच्योर होने पर जब आप नयी FD खोलेंगे, तो उस समय ब्याज दर कम हो सकती है| ऐसा होने पर आपकी आय पर सीधा असर पड़ेगा|

ब्याज पर TDS भी कट सकता है| टीडीएस से बचने के लिए आप फॉर्म 15G/15H जमा कर सकते हैं|

#2 वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (Senior Citizens Savings Scheme या SCSS)

केवल वरिष्ठ नागरिक (> 60 वर्ष) ही SCSS में निवेश कर सकते हैं।

ब्याज का भुगतान हर तिमाही (quarterly) किया जाता है।

यह डिपाजिट 5 वर्ष में मेच्योर होता है| 5 वर्ष की समाप्ति पर आप तीन वर्ष तक के लिए एक्सटेंड (extend) कर सकते हैं| आप बैंकों और डाकघरों में SCSS डिपाजिट खोल सकते हैं।

वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) हर तिमाही ब्याज दर की घोषणा करता है|

अभी की दर 8.3% (अप्रैल 27, 2018) चल रही है| SCSS की लेटेस्ट ब्याज दर जानने के लिए इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं

फायदे:  ब्याज दर अच्छी होती है। निवेश करने पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है। ज़रुरत पड़ने पर पेनल्टी दे कर पैसा निकाल सकते हैं|

नुकसान/कमियाँ: मिलने वाले इंटरेस्ट पर आपको टैक्स देना होता है| आप एक समय में SCSS में 15 लाखरुपये से ज्यादा निवेश नहीं कर सकते| यदि आपके पति/पत्नी भी निवेश करते हैं, तो कुल मिला कर 30 लाख रुपये निवेश कर सकते हैं| TDS भी कटता है| आप फार्म 15G/15H जमा करके TDS बचा सकते हैं|

सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम के बारे में सम्पूर्ण जानकारी की लिए आप इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं|

#3 पोस्ट-ऑफिस मासिक आय योजना (Post Office Monthly Income Scheme or POMIS)

यह फिक्स्ड डिपॉजिट्स के समान ही हैं| बस डिपाजिट आपको पोस्ट ऑफिस में खोलना होता है|

योजना 5 वर्ष में मेच्योर होती है। हर महीने ब्याज का भुगतान किया जाता है|

वित्त मंत्रालय हर तिमाही (quarter) ब्याज दर की घोषणा करता है|

अभी (27 अप्रैल 2018) की ब्याज दर 7.3% p.a. है| लेटेस्ट ब्याज दर जानने के लिए इस लिंक पर जाएँ|

फायदे: ब्याज पर कोई टीडीएस नहीं कटता निवेश पर कोई कर लाभ नहीं है । आप एक छोटे दंड पर निवेश से बाहर निकल सकते हैं। तीन वर्ष से पहले डिपाजिट तोड़ने पर 2% पेनल्टी लगती है और उसके बाद और पांचवें वर्ष के बीच तोड़ने पर 1% पेनल्टी लगती है|

नुकसान/कमियाँ:  ब्याज पर टैक्स देना होता है| निवेश करने पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं है| आप 4.5 लाख रुपये से ज्यादा जमा नहीं कर सकते| अगर आपने joint अकाउंट खोला है, तो आप अधिकतम 9 लाख रुपये जमा कर सकते हैं|

पोस्ट-ऑफिस मंथली इनकम स्कीम के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ें|

#4 टैक्स-फ्री बांड (Tax-free Bonds)

समय-समय पर सरकारी कंपनी (PSUs) ऐसे बांड जारी करती हैं| परिपक्त्वता आमतौर पर 15 से 20 वर्ष होती है| आप सेकेंडरी (secondary) मार्केट से भी यह बांड खरीद सकते हैं|

फायदे : मिलने वाले ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होता| अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं, तो आपको काफी लाभ हो सकता है|

नुकसान/कमियाँ: वैसे तो आप चाहें तो यह बांड कभी भी बेच सकते हैं, परन्तु सच्चाई में स्टॉक एक्सचेंज पर बेचना इतना आसान नहीं है| ऐसा हो सकता की ज़रुरत पड़ने पर आप इन बांड को बेच न पाएं|

#5 वार्षिकी योजनाएं (Annuity plans या एन्युटी प्लान)

एन्युटी प्लान में आप बीमा कंपनी को एक मुश्त राशि देते हैं और बीमा कंपनी आपको पूरे जीवन कुछ राशि देती है|

मान लिए आपने बीमा कंपनी से 10 लाख रुपये का एन्युटी प्लान खरीदा और उस समय एन्युटी रेट 6% चल रहा है, तो बीमा कंपनी आपको हर वर्ष 60,000 रुपये देगी| इसका मतलब हर महीने 5,000 रुपये की आय|

यह आपके पूरे जीवन चलेगा|

फायदे: आपको पूरे जीवन राशि मिलती रहेगी| ब्याज बढ़े या घटे| आप 80 वर्ष तक जीवित रहे या 100 वर्ष तक| आप राशि मिलती रहेगी| साथ एन्युटी के कई विकल्प भी होते है| एक विकल्प में आपके बाद आपके पति/पत्नी को नियमित आय मिलती रहेगी|

नुकसान/कमियाँ:  एन्युटी प्लान के रेट काफी कम होते हैं। शायद आपको FD पर इससे बेहतर रिटर्न मिल जाएँ| ज़रुरत पड़ने पर भी आप पैसा आसानी से निकाल नहीं सकते| एन्युटी इनकम पर टैक्स ही देना होता है|

#6 मकान से किराया (Rental Income)

बहुत से लोग ऐसा करते हैं| रिटायर होने से पहले दूसरा या तीसरा मकान बना लेते हैं| और रिटायर होने के बाद उन मकानों से किराया आता रहता है|

फायदे: किराया आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है।

नुकसान/कमियाँ : घर खरीदना आसान काम नहीं है| यदि आपने रिटायरमेंट के पहले से ही तयार्री कर है, तो ठीक है| साथ ही किराए की आय पर टैक्स भी देना होता है|

#7 डेब्ट म्युचुअल फंड से dividend/डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड से SWP

आप dividend विकल्प चुन सकते हैं| आपको समय-समय पर dividend मिलता रहेगा|

आप अपने निवेश को कभी भी बेच सकते हैं|

पर ध्यान दें dividend मिलने से पहले उस पर टैक्स लगता है| तकरीबन 29% टैक्स आपके हाथ में dividend आने से पहले ही लग जाता है|

तो अगर आप 10% या 20% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं, तो dividend विकल्प आपके लिए अच्छा नहीं है। आप Growth विकल्प में निवेश कर सकते हैं और वहाँ से SWP (Systematic Withdrawal Plan) चला सकते हैं|

नुकसान/कमियाँ: रिटर्न की गारंटी नहीं है। डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में थोडा रिस्क रहता है|  डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड कई प्रकार के होते हैं| पूरी जानकारी न होने पर आप गलत फण्ड चुन सकते हैं|

#8 कॉर्पोरेट बांड (Corporate Bonds)

यह फिक्स्ड डिपाजिट के तरह ही हैं| बस आप बैंक की जगह किसी कंपनी में पैसा जमा करते हैं और कंपनी आपको ब्याज देती है|

आप बैंक की ब्याज दर से बेहतर ब्याज दर की उम्मीद कर सकते हैं|

बस परेशानी यह है की आप बेहतर रिटर्न के चक्कर में किसी गलत कंपनी में न फंस जाएँ| बहुत से लोगों का पैसा इसी चक्कर में डूब चूका है| केवल अच्छी कंपनी के bonds में ही निवेश करें| निवेश करने से पहले कंपनी की क्रेडिट रेटिंग ज़रूर देखें|

ब्याज पर टैक्स भी देना होता है| TDS भी कटता है|

#9 प्रधानमंत्री मंत्री वय वंदना योजना (PMVVY)

इस योजना के निवेश करने पर आपको 10 वर्ष तक 8% p.a. ब्याज मिलता है|

निवेश करने पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं है| मिलने वाले ब्याज पर टैक्स भी देना होता है|

प्रधानमंत्री मंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|

#10 Reverse Mortgage Plan

अगर कोई विकल्प न बचा हो, तो आप Reverse Mortgage Plan का चुनाव कर सकते हैं|

उस योजना के तहत आप बैंक के पास जा कर Reverse mortgage ले सकते हैं|

इसके तहत बैंक आपको हर महीने कुछ राशि देगा| यह पूरी ज़िन्दगी चलता रहेगा| आपको बैंक को कुछ भी नहीं देना है| आप उसी घर में रह भी सकते हैं|

बस आपके बाद बैंक आपका घर ले लेगा और उसे बेच कर पैसे वसूल लेगा|

आपको कितनी आय मिलती है यह आपके मकान के मूल्य पर निर्भर करता है|

मिलने वाली आय पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता|

Reverse Mortgage Plan के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ें|

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म्यूच्यूअल फण्ड क्या है? (Mutual Fund in Hindi)

Last updated: सितम्बर 4, 2018 | by दीपेश 2 Comments

अब आम जनता का रुझान धीरे-धीरे म्यूच्यूअल फण्ड की ओर बढ़ रहा है| काफी लोगों ने पिछले कुछ समय में म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना शुरू किया है|

क्या आप भी उन्ही लोगों में हैं? या फिर आप अभी भी म्यूच्यूअल फण्ड से दूर ही रहते हैं|

अब म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना तो आपकी मर्ज़ी है|

परन्तु म्यूच्यूअल फण्ड क्या होते हैं, कितने तरह के होते हैं और कैसे काम करते हैं, यह तो आपको पता होना ही चाहिए|

आईये इस पोस्ट में म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में विस्तार से जानते हैं|

  1. म्यूच्यूअल फण्ड क्या है?
  2. म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने ले क्या फायदे हैं?
  3. म्यूच्यूअल फण्ड कितने प्रकार के होते हैं?
  4. म्यूच्यूअल फण्ड NAV क्या होता है?
  5. आपको कैसे अपने लिए सही म्यूच्यूअल फण्ड का चुनाव करना चाहिए?
  6. म्यूच्यूअल फण्ड में Growth और Dividend विकल्प क्या होते हैं?
  7. म्यूच्यूअल फण्ड Direct और Regular plan क्या होते हैं?
  8. आपको म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर कितना टैक्स देना होता है?
  9. म्यूच्यूअल फण्ड कैसे खरीदें?
  10. म्यूच्यूअल फण्ड SIP, STP और SWP क्या हैं?

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है? What is a Mutual Fund in Hindi?

आपको शेयर बाज़ार में निवेश करना है| पर यह पता नहीं की कहाँ निवेश करें|

एक बात का खतरा और भी है|

मान लिए आपने कोई शेयर खरीदा और किसी वजह से उसका दाम काफी गिर गया, तो आपको काफी नुकसान हो सकता है|

म्यूच्यूअल फण्ड आपकी इन समस्यायों को दूर करते हैं|

पहला, जब आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करते हैं, तो आप अपने पैसे को एक अनुभवी निवेशक (फण्ड मेनेजर) को सौंपते है| वह फण्ड मेनेजर आपके पैसे को निवेश करता है|

दूसरा, साथ ही वह फण्ड मेनेजर आपका सारा पैसा एक शेयर में या एक जगह पर निवेश नहीं करता| कई शेयर पर निवेश करता है| तो अगर किसी शेयर ने अच्छा नहीं भी किया, तो आपको बहुत ज्यादा नुकसान नहीं होगा|

तीसरा, फण्ड मेनेजर करने की ज़रुरत नहीं है की कौनसा शेयर खरीदें या बेचें| यह सारा काम फण्ड मेनेजर करता है|


म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने का क्या फायदे हैं? (Benefits of investing in Mutual Funds)

#1 आपका पैसा एक अनुभवी फण्ड मेनेजर निवेश करता है|

हालांकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है की आपको अच्छे रिटर्न्स ही मिलेंगे, परन्तु फण्ड मेनेजर के अनुभव, जानकारी और कौशल (skill)का फायदा तो होना ही चाहिए|

अगर आप एक आम निवेशक हैं और आपके पास शेयर बाज़ार में निवेश करने के लिए ज़रूरी जानकारी और समय नहीं है, तो आपके लिए म्यूच्यूअल फण्ड शेयर बाज़ार में पैसा लगाने का एक अच्छा माध्यम हैं|

#2 जैसा की ऊपर लिखा है की आपका पैसा कई जगह निवेश होता है| तो इससे अगर एक-दो शेयर बुरा भी करते हैं, तो शायद आपको इतना नुकसान न हो| इस बात को diversification भी कहते हैं|

#3 म्यूच्यूअल फण्ड कई प्रकार के होते हैं| आप अपनी ज़रुरत अनुसार फण्ड का चयन कर सकते हैं| बहुत से लोग सोचते हैं की म्यूच्यूअल फण्ड केवल शेयर बाज़ार में ही निवेश करते हैं| ऐसा नहीं है|

ऐसे म्यूच्यूअल फण्ड भी होते हैं जिनकी कीमत शेयर बाज़ार के उतार चढ़ाव से कम ज्यादा नहीं होती| मैं विभिन्न प्रकार के म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में नीचे चर्चा करूंगा| 

पढ़ें: अपने लिए बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड का चुनाव कैसे करें?


म्यूच्यूअल फण्ड में कितना निवेश करना होता है? म्यूच्यूअल फण्ड का मूल्य (NAV) क्या होता है?

म्यूच्यूअल फण्ड में अमूमन आप 500 रुपये से निवेश करना शुरू कर सकते हैं| निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं है|

म्यूच्यूअल फण्ड में ख़रीदने की मात्र को यूनिट्स (units) और उसके मूल्य को NAV (Net Asset Value) कहते हैं|

समझ लिए की जैसे आप शेयर खरीदते हैं और उसका मूल्य देते हैं, म्यूच्यूअल फण्ड में आप यूनिट खरीदते हैं और उसका मूल्य (NAV) देते हैं|

तो मान लिए आपने 1,000 रुपये का निवेश किया और उस समय फण्ड का NAV था 50 रुपये, तो आपको 1,000/50 = 20 यूनिट्स मिलेंगे| अब मान लिए कुछ वर्षों बाद आपको फण्ड का NAV बढ़ कर 90 रुपये हो गया, तो आपके निवेश का मूल्य हो जाएगा 20 X 90 = 1,800 रुपये| आपने 1,000 रुपये निवेश किया था, जिसका मूल्य हो गया है 1,800 रुपये|

अब हर फण्ड का NAV अलग होता है|

एक बात और, यह धारणा गलत है की जिस म्यूच्यूअल फण्ड का NAV कम है, वह सस्ता है| ऐसे भ्रम में न रहे|


म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार (Types of Mutual Fund)

प्रमुख तौर पर म्यूच्यूअल फण्ड 3-4 प्रकार के हो सकते हैं|

  1. इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड (Equity Mutual Fund)
  2. डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड (Debt Mutual Fund)
  3. हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड (Hybrid Mutual Fund)
  4. गोल्ड म्यूच्यूअल फण्ड (Gold Mutual Fund)

अब इन फण्ड में भी कई प्रकार हो सकते हैं|


#1 इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार (Types of Equity Mutual Funds in Hindi)

Equity म्यूच्यूअल फण्ड के भी कई प्रकार हैं| यह निर्भर करता है की फण्ड किस प्रकार के शेयर में निवेश करता है|

  • Large Cap Fund (लार्ज कैप फण्ड): बहुत बड़ी कंपनी के शेयर में निवेश करते हैं| उदहारण: SBI BlueChip Fund, ICICI Prudential Focussed Bluechip Fund, Birla Sun Life Frontline Equity Fund
  • Multi-cap Fund (मल्टी कैप फण्ड): हर तरह की कंपनी के शेयर में निवेश करते हैं| उदहारण : ICICI Prudential Value Discovery Fund, Franklin India Equity Fund
  • Midcap Fund (मिड कैप फण्ड): बीच के आकार की कंपनी में निवेश करते हैं| उदहारण: Mirae Asset Emerging Bluechip Fund, Franklin India Prima Fund
  • Small Cap Fund (स्माल कैप फण्ड): बहुत छोटी कंपनी के शेयर में निवेश करते हैं| उदहारण: SBI Small & Midcap Fund, DSP BlackRock Smallcap Fund
  • Equity linked Savings Scheme (ईएलएसएस): ऐसे फण्ड में निवेश करने पर टैक्स बेनिफिट मिलता है| उदहारण: Axis Long Term Equity Fund, Birla Sun Life Tax Relief 96 Fund

ध्यान दें मैंने फण्ड के नाम केवल उदहारण देने के लिए दिए हैं| यह निवेश करने का सुझाव नहीं है|

ध्यान दें इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड और भी कई प्रकार के हो सकते हैं| जैसे की कुछ म्यूच्यूअल फण्ड केवल एक क्षेत्र की कंपनी में की निवेश करते हैं| जैसे की बैंकिंग फण्ड, फार्म फण्ड, टेक्नोलॉजी फण्ड इत्यादि| ऐसे फण्ड को Sector Funds कहते हैं|

मैंने बस आपको आईडिया देने के लिए उदहारण दिया है| और हाँ, जब मैं बड़ी या छोटी कंपनी की बात कर रहा हूँ, मेरा मतलब कंपनी की market capitalization से है| ईएलएसएस में निवेश करने पर आपको Section 80C के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है|

पढ़ें: जानिये ईएलएसएस  (ELSS) के बारें में कुछ दिलचस्प बातें


#2 डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार (Types of Debt Mutual Funds in Hindi)

काफी लोग जब म्यूच्यूअल फंड्स के बारे में सोचते हैं, तो उनको लगता है की म्यूच्यूअल फंड्स केवल शेयर बाज़ार में ही निवेश करते हैं| ऐसा नहीं है| ऐसे म्यूच्यूअल फण्ड भी हैं, जो शेयर बाज़ार से बहुत दूर रहते हैं| डेब्ट फण्ड में कुछ ऐसा ही होता है|

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड सरकारी या कंपनी के ऋण (bonds) में निवेश करते हैं| ज़ाहिर है की ऐसे फण्ड में निवेश करने पर आपको शेयर बाज़ार के उतार चढ़ाव का सामना नहीं करना पड़ता|

  • Liquid fund (उदहारण:आईसीआईसीआई लिक्विड फण्ड, एचडीएफसी लिक्विड फण्ड)
  • Ultra Short term debt fund (उदहारण: आईसीआईसीआई फ्लेक्सिबल इनकम प्लान, एक्सिस ट्रेज़री एडवांटेज फण्ड)
  • Short term debt fund (उदहारण: SBI Short Term Debt Fund, रिलायंस शोर्ट टर्म डेब्ट फण्ड)
  • Long term debt fund (उदहारण: आईसीआईसीआई इनकम प्लान, रिलायंस इनकम प्लान)
  • Gilt fund (उदहारण : SBI gilt fund-long term plan, ICICI Prudential Long Term Gilt Fund)

इनके अलावा भी कई प्रकार के डेब्ट म्यूच्यूअल फंड्स होते हैं|


#3 हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार (Types of Hybrid Mutual Funds in Hindi)

कुछ ऐसे म्यूच्यूअल फण्ड भी होते हैं, जो की कुछ हिस्सा शेयर बाज़ार में और कुछ हिस्सा bonds में निवेश करते हैं| ऐसे फंड्स को हाइब्रिड फण्ड कहते हैं|

  • बैलेंस्ड फण्ड (Balanced Funds): ऐसे फंड्स कम से कम 65% पैसा शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं| उदहारण: HDFC Balanced Fund, ICICI Prudential Balanced Fund, Franklin India Balanced Fund
  • डायनामिक एसेट एलोकेशन फण्ड (Dynamic Asset allocation funds): परिस्थिति के अनुसार पैसला लेते हैं की कहाँ कितना निवेश करना है| उदहारण: ICICI Prudential Balanced Advantage Fund

इसके अलावा ऐसे फण्ड भी होते हैं, जो की ज़्यादातर पैसा डेब्ट (bonds) में निवेश करते हैं और थोडा सा पैसा ही शेयर बाज़ार में लगाते हैं, जैसे की मंथली इनकम प्लान (monthly income plans या MIP)|


म्यूच्यूअल फण्ड ग्रोथ या डिविडेंड (Mutual Fund Growth or dividend in Hindi)

साथ ही हर म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम में आप पास दो विकल्प होते हैं: आप Growth option चुन सकते हैं या Dividend option.

Growth आप्शन में आपको कुछ पैसा चाहिए तो आपके अपने यूनिट्स बेचने पड़ेंगे|

परन्तु Dividend option में समय-समय पर आपको फण्ड से dividend मिलता रहता है| ध्यान दे कुछ भी मुफ्त में नहीं मिलता| जितना आपको डिविडेंड मिलता है, आपके फण्ड का NAV उतना ही कम हो जाता है| एक बात और, dividend मिलने की कोई गारंटी नहीं होती|

आप ग्रोथ आप्शन लें या डिविडेंड आप्शन, यह बहुत बातों पर निर्भर करता हैं| पर हाँ, अगर आप लम्बे समय के लिए निवेश कर रहे हैं, तो Growth विकल्प बेहतर होगा|

अगर आप कम अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं और आपको कुछ-कुछ समय पर थोड़ी आय चाहिए, तो डिविडेंड विकल बेहतर हो सकता है| पर ऐसा ज़रूरी नहीं है| Dividend option में निवेश करने से पहले इस पोस्ट को ज़रूर पढ़ें|

साथ ही आपको यह भी देखना पड़ेगा की आपको टैक्स कितना देना पड़ेगा|


म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान या रेगुलर प्लान (Mutual Fund Direct Plan or Regular Plan in Hindi)

इसके अलावा एक तरीका और है जिस पर आप म्यूच्यूअल फंड्स को विभाजित कर सकते हैं|

डायरेक्ट प्लान और रेगुलर प्लान

जब आप किसी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम के रेगुलर प्लान में निवेश करते हैं, तो बीच में एक डिस्ट्रीब्यूटर (एजेंट या intermediary) होता है| अब कोई एजेंट है, तो उसको कमीशन तो मिलेगा ही|यह कमीशन आपको पैसे से ही आता है| इससे आपका रिटर्न भी प्रभावित होता है|

म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान में कोई भी एजेंट नहीं होता| आप सीधे म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी के साथ निवेश करते हैं| अब क्योंकि कोई कमीशन नहीं होता, तो इसलिए आपको रिटर्न थोड़े बेहतर मिलते हैं|

म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान (mutual fund direct plan in hindi) के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप नीचे दी गयी पोस्ट पढ़ सकते हैं|

क्या आपको म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान में निवेश करना चाहिए?

म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान में कैसे निवेश करें?

कैसे बदलें म्यूच्यूअल फण्ड रेगुलर प्लान को डायरेक्ट प्लान में?

आपको ज्यादा कंफ्यूज होने की ज़रुरत नहीं है| उदहारण की सहायता से समझते हैं| बार करते हैं SBI Mutual Fund के एक large cap fund के बारे में: SBI BlueChip Fund

अब यह फण्ड 4 विकल्पों में उपलब्ध है|

SBI BlueChip Fund- Growth– Direct Plan

SBI BlueChip Fund-Growth–Regular Plan

SBI BlueChip Fund-Dividend–Direct Plan

SBI BlueChip Fund-Dividend– Regular Plan

शायद अब आपकी उलझन दूर हो गयी होगी| और हाँ इस सभी प्लान का NAV अलग होगा|

sbi mutual fund in hindi sbi mutual sip in hindi म्यूच्यूअल फण्ड क्या है

 

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है म्यूच्यूअल फण्ड की जानकारी sbi mutual fund in hindi


म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर कितना टैक्स देना पड़ता है? (Tax on mutual funds)

ध्यान दें आपको केवल मुनाफे (या रिटर्न) पर टैक्स देना होता है, अपने मूल निवेश कर नहीं| और मुनाफे पर टैक्स भी बात तभी आती है, जब आप अपने निवेश को बेचते हैं| Tax only on realized gains

टैक्स कितना लगेगा, यह दो बातों पर निर्भर करता है

  1. आपने किस प्रकार के  म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश किया है| इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड और डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड  के मुनाफे पर अलग-अलग  तरीके से टैक्स देना होता है| (Type of mutual fund)
  2. आपकी निवेश अवधि (holding period)

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स बजट 2018

इस विषय में मैंने एक दूसरी पोस्ट में विस्तार से चर्चा करी है| आप उस पोस्ट को इस लिंक पर पढ़ सकते हैं|

 


म्यूच्यूअल फण्ड कैसे खरीदें? म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कैसे करें?

आप म्यूच्यूअल फण्ड में ऑफलाइन (पेपर फॉर्म भरकर) या ऑनलाइन दोनों तरीकों से निवेश कर सकते हैं|

आप म्यूच्यूअल फण्ड किसी डिस्ट्रीब्यूटर या एजेंट की सहायता से खरीद सकते हैं| इसके अलावा बहुत सारे ऑनलाइन वेबसाइट हैं जहां पर रजिस्टर करने के बाद आप म्यूच्यूअल फंड्स ऑनलाइन खरीद सकते हैं|

इस बारे में विस्तार से जानने के लिए इस पोस्ट (अगर पहली बार कर रहे हैं निवेश, तो म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश कैसे शुरू करें?) को पढ़ें|


म्यूच्यूअल फण्ड SIP, STP और SWP क्या हैं?

SIP (Sytematic Investment Plan) म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने का तरीका है| अगर आप SIP के ज़रिये निवेश करते हैं, तो हर महीने एक तय राशि आपके बैंक अकाउंट से automatically कट कर आपके चुनिन्दा म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश हो जायेगी|

SIP द्वारा निवेश करने पर निवेश में संयम बना रहता है| SIP के नया फायदों और ग़लतफ़हमियों को समझने के लिए इस पोस्ट (म्यूच्यूअल फण्ड SIP क्या है?, SIP से निवेश करने के फायदे और नुकसान) को पढ़ें|

STP (Systematic Transfer Plan) भी SIP की तरह निवेश कर का तरीका ही है| बस अंतर इतना है की हर महीने पैसा आपके बैंक खाते की बजाय एक म्यूच्यूअल फण्ड से दूसरे म्यूच्यूअल फण्ड में जाता है| STP के ज़रिये आप धीरे-धीरे अपने धन म्यूच्यूअल फण्ड में लगा सकते हैं| STP के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|

SWP (Systematic Withdrawal Plan) म्यूच्यूअल फण्ड में पैसा निकालने का तरीका है| अगर आप SWP शुरू करते हैं, तो हर महीने आपके म्यूच्यूअल फण्ड की कुछ यूनिट्स automatically बिकेंगी और एक तय राशि आपके बैंक खाते में आ जायेगी| SWP रिटायर्ड लोगों के लिए काफी उपयोगी हो सकती है| SWP के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट के पढ़ें|

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करते समय इन गलतियों से बचें

 

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