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ईएलएसएस (ELSS) के बारें में कुछ दिलचस्प बातें

Last updated: मार्च 14, 2018 | by दीपेश 2 Comments

जैसा कि हम जानते है टैक्स सेविंग सीज़न बहुत करीब है और हम टैक्स सेविंग निवेश खोजने के लिए चारों ओर खोज  शुरू करते हैं। टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड या इक्विटी लिंक्ड बचत योजना (ईएलएसएस) लोकप्रिय कर-बचत विकल्पों में से एक है।

ELSS क्या है? ईएलएसएस क्या है? What is ELSS in Hindi?

इक्विटी लिंक्ड बचत योजना (ईएलएसएस) एक साधारण इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम की तरह ही है|

बस इतना अंतर है की ELSS (ईएलएसएस) में 3 साल का लॉक-इन है। इसका मतलब की आप अपने निवेश को 3 साल से पहले नहीं निकाल सकते|

साथ ही आपको ELSS (ईएलएसएस) में निवेश के लिए प्रति वित्तीय वर्ष 1.5 लाख रुपये का टैक्स बेनिफिट मिलता है (Section 80 क के तहत)|

शायद ज़्यादातर लोग ELSS (Equity Linked Savings Scheme) के बारे मैं इतना ही जानते हैं|

कुछ पहलू ऐसे भी हैं जो हम में से कई लोगो को पता नहीं हैं ।

इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS), 2005 को वित्त मंत्रालय (और SEBI)  द्वारा नोटिफाई किया गया था। इसलिए, ELSS योजनाओं को इन नियमों के द्वारा नियंत्रित किया जाता है|

आईये जानते हैं, ELSS के कुछ कम ज्ञात पहलुयों को|

#1 निवेश 500 रुपये के मल्टिपल में होगा, न्यूनतम निवेश 500 रुपये होगा।

#2 ELSS यूनिट्स का ट्रांसफर, pledge (लोन लेने के लिए) केवल तीन साल बाद ही किया जा सकता है ।

#3 यह योजना एक वित्तीय वर्ष के दौरान न्यूनतम 3 माह के लिए खुली होगी। हालांकि यह पहलू इतना महत्वपूर्ण नहीं है । ज्यादातर ELSS योजनाएं, ओपन एंडेड स्कीम (open ended scheme) हैं। इसका मतलब आप जब चाहें तब निवेश कर सकते हैं|

#4  यदि आप SIP के माध्यम से ELSS में निवेश करते हैं, तो हर SIP किश्त एक नया निवेश है। इस विषय पर मैंने काफी निवेशकों को भ्रमित पाया है। कई निवेशकों की धारणा है कि 3 साल का लॉक इन ELSS में पहले निवेश की तारीख से होता है। ऐसा नहीं है|

SIP की हर किश्त एक नया निवेश है|

उदाहरण के लिए, यदि आप 15 दिसंबर 2016 को SBI Taxgain Scheme (SBI ELSS) में SIP की किश्त के माध्यम से जो म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट खरीदते हैं, ऐसी यूनिट 15 दिसंबर, 2019 तक लॉक हो जाएंगी।

15 जनवरी, 2017 को SIP की किश्त के माध्यम से एसबीआई ईएलएसएस में खरीदे गए यूनिट 15 जनवरी, 2020 तक लॉक किए जाएंगे।

यह एक महत्वपूर्ण पहलू है। ELSS फण्ड के कई समर्थक (कर-बचत के लिए) का तर्क है कि ईएलएसएस में सभी धारा 80 सी निवेशों के बीच सबसे कम लॉक-इन अवधि है। परंतु इस बात को नजरअंदाज न करें कि ELSS में हर निवेश 3 साल लॉक-इन (3 year lock-in)  के अधीन है।

पीपीएफ के तहत, केवल आपके पहले निवेश को 15 साल के लिए लॉक किया जाता है। अगर आपका PPF दस साल पुराना है, तो उस साल किया गया निवेश केवल 5 बर्ष के लिए लॉक-इन रहेगा| एक खाते के लिए जो 15 साल की प्रारंभिक परिपक्वता पूरी कर ली है औरविस्तार किया  गया है तो अधिकतम लॉक-इन 5 साल है। वैसे, आप आंशिक निकासी कर सकते हैं और अपने पीपीएफ खाते से लोन भी  ले सकते हैं।

पढ़ें: पीपीएफ अकाउंट के बारे में पूरी जानकारी

पढ़ें: ELSS vs PPF: किसमें करें निवेश?

पढ़ें: ELSS vs. टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपाजिट (Tax-Saving Fixed Deposit)

पढ़ें: PPF से लोन कैसे लें?

#5 एक ELSS फण्ड को कम से कम 80% प्रतोशत राशि equity, cumulative convertible preference shares and fully convertible debentures और bonds में निवेश करनी होती है| एक बात का और ध्यान दें की कम से कम 65% निवेश equity में रहेगा|

#6 एक म्यूच्यूअल फण्ड हाउस में सिर्फ एक ही ELSS योजना हो सकती है। परन्तु आप देख सकते हैं की कुछ फण्ड हाउस के में एक से ज्यादा स्कीम हैं|

#7 निवेशक की मृत्यु की स्थिति में, नामांकित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी मृतक यूनिट के आवंटन की तिथि के एक साल बाद ही निवेश को बेच सकता हैं। इसलिए, अगर निवेशक यूनिट की खरीदने के 5 महीने बाद मृत्यु हो जाती हैं, तो नामित व्यक्ति को यूनिट्स को तभी मिल जायेंगी| परन्तु यूनिट्स को बेचने के लिए और 7 महीने का इंतज़ार करना पडेगा। ध्यान दे की नामित व्यक्ति उन्हें बहुत पहले ट्रांसफर कर सकता है लेकिन एक वर्ष तक बेच नहीं सकता है। तो देखें तो, निवेशक की मृत्यु की स्तिथि में लॉक-इन अवधि 3 वर्ष से घाट कर 1 वर्ष हो जाती है।

ईएलएसएस (ELSS) के यह नियम जानकार आप ELSS में निवेश करना तो नहीं छोड़ेंगे| और सच में देखें तो इन नियमों से बहुत ज्यादा फर्क भी नहीं पड़ता| परन्तु नियमो को जानना हमेशा अच्छा होता है|

Filed Under: Mutual Funds, Tax Planning Tagged With: Elss in hindi, elss क्या है, SBI ELSS, ईएलएसएस क्या है, एसबीआई ईएलएसएस

सुकन्या समृद्धि योजना की पूरी जानकारी (Sukanya Samriddhi Yojana 2019)

Last updated: जनवरी 23, 2019 | by दीपेश 137 Comments

सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Scheme) को दिसंबर 2014 में शुरू किया गया था। इस योजना के तहत आप अपनी दस वर्ष तक की आयु की बेटी के लिए सुकन्या खाता खोल सकते हैं|

सुकन्या समृद्धि अकाउंट में ब्याज भी अच्छा मिलता है| साथ ही ब्याज़ पर कोई टैक्स भी नहीं देना होता| इस वजह से यह निवेश काफी आकर्षक हो जाता है|

सुकन्या समृद्धि योजना सरकार द्वारा शुरू की गई बेटी बचाओ, बेटी पढाओ योजना का हिस्सा है।

आईये जानते हैं सुकन्या समृद्धि योजना के बारे में विस्तार से|

सुकन्या समृद्धि योजना 2019: पूरी जानकारी (Sukanya Samriddhi Yojana  in Hindi)

इस पोस्ट में मैं इन विषयों पर चर्चा करूंगा|

  1. सुकन्या समृद्धि योजना अकाउंट कौन खोल सकता है?
  2. आपनी अपनी बेटी के लिए सुकन्या समृद्धि अकाउंट कैसे आर कहाँ खोल सकते हैं?
  3. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में सुकन्या खाता कैसे खोलें?
  4. सुकन्या योजना अकाउंट खोलने के लिए कौन से डॉक्यूमेंट चाहिए?
  5. कितने सुकन्या समृद्धि योजना खाते खोल सकते हैं?
  6. सुकन्या खाते में हर वर्ष कितना पैसा निवेश कर सकते हैं?
  7. सुकन्या खाता कब मेच्योर होता है?
  8. सुकन्या अकाउंट से कब पैसे निकाल सकते हैं?
  9. आपको अपनी बेटी के सुकन्या खाते में कितने वर्ष पैसे जमा करने होते है?
  10. क्या आप सुकन्या समृद्धि खाते को दूसरे बैंक या पोस्ट ऑफिस में ट्रान्सफर कर सकते हैं?
  11. सुकन्या समृद्धि योजना अकाउंट की ब्याज दर क्या है? सुकन्या समृद्धि योजना कैलकुलेटर
  12. सुकन्या समृद्धि योजना टैक्स बेनेफिट्स (Sukanya Samriddhi Yojana Tax Benefits)
  13. क्या आपको सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश करना चाहिए?

आगे बढ़ने से पहले कुछ जानकारी संक्षिप्त में ले लेते हैं| विस्तार में जानकारी के लिए आप नीचे पढ़ सकते हैं|

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सुकन्या समृद्धि योजना खाते की पूरी जानकारी आप इस वीडियो में भी पा सकते हैं|

 सुकन्या समृद्धि अकाउंट कौन खोल सकता है?

खाता केवल 10 वर्ष से कम उम्र की लड़की के नाम पर खोला जा सकता है। इसका मतलब आप अपनी दस वर्ष से कम आयु की बेटी के लिए यह खाता खोल सकते हैं|

ध्यान दे यह खाता केवल लड़कियों के लिए ही खोला जा सकता है|

यह योजना अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए उपलब्ध नहीं है। अगर बालिका सुकन्या समृद्धि खाता खोलने के बाद NRI बन जाती है, तो खाता बंद करना होगा| अगर बालिका के NRI बनाने की स्तिथि में आप खाता बंद नहीं करते हैं, तो खाते (NRI बनने के दिन से) पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा|

माता-पिता या कानूनी संरक्षक (parents or legal guardian) बालिका  के लिए खाता खोल सकते हैं। आप गोद ली हुई बेटी के लिए भी यह खाता खोल सकते हैं|


मैं अपनी बेटी के लिए सुकन्या समृद्धि खाता कहाँ खोल सकता हूं?

सुकन्या समृद्धि खाता पोस्ट ऑफिस या अधिकृत बैंको (जैसे की SBI, PNB, ICICI इत्यादि )में खोला जा सकता है।

आप बैंक ऑफ बड़ौदा में सुकन्या समृद्धि खाता खोलने के फॉर्म को देख सकते हैं।

अगर आप SBI में खाता खोलना चाहते हैं, तो बैंक शाखा में जा कर फॉर्म भरें और ज़रूरी डॉक्यूमेंट जमा करें| डॉक्यूमेंट की लिस्ट नीचे दी गयी है|


सुकन्या समृद्धि खाता खोलने के लिए आवश्यक दस्तावेज क्या हैं?

आपको निम्न दस्तावेजों की ज़रुरत होगी|

  1. भरा हुआ सुकन्या समृद्धि खाता फॉर्म
  2. बेटी का जन्म प्रमाण पत्र (birth certificate)
  3. आपके (माता/पिता/अभिभावक)  का पहचान प्रमाण (identity proof) (PAN कार्ड, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, आधार कार्ड इत्यादि)
  4. आपके (माता/पिता/अभिभावक) का निवास प्रमाण (address proof) (PAN कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट, आधार कार्ड, बिजली का बिल, टेलीफोन बिल इत्यादि)

बैंक अपनी आंतरिक आवश्यकताओं के आधार पर अतिरिक्त दस्तावेजों जैसे पैन कार्ड के लिए पूछ सकते हैं।

यह सभी डाक्यूमेंट्स आप बैंक या पोस्ट ऑफिस में जमा कर सकते हैं|


आप कितने सुकन्या समृद्धि अकाउंट खोल सकते हैं?

एक लड़की के नाम पर केवल एक ही खाता खोला जा सकता है|

आप अधिकतम दो लड़कियों के लिए ऐसा खाता खोल सकते हैं|

कुछ परिस्तिथियों में आप 3 सुकन्या समृद्धि अकाउंट भी खोल सकते हैं:

  1. अगर आपको पहली बेटी होने के बाद आपको दो जुड़वा बेटी होती हैं, तब आप तीनों बेटियों के लिए सुकन्या समृद्धि खाता खोल सकते हैं|
  2. अगर आपको पहली बार ही तीन बेटियाँ एक साथ होती हैं, तब भी आप तीनों बेटियों के लिए खाता खोल सकते हैं|

यदि यह पाया जाता है कि आपने एक ही लड़की के नाम पर 1 से अधिक सुकन्या समृद्धि खाते खोल दिए हैं, तो संभव है कि आप केवल पहले खाते पर ब्याज अर्जित करें। यह मानना ​​उचित होगा ली एक लड़की के लिए केवल एक ही खाते पर ब्याज दिया जाएगा। जैसा कि मैं समझता हूं, शेष खातों के लिए, किसी भी ब्याज के बिना धन वापस कर दिया जाएगा।

इसलिए, अगर आपने एक ही बेटी के लिए एक से अधिक खाते खोल दिए हैं, तो अतिरिक्त खाते बंद करें।


सुकन्या समृद्धि अकाउंट अधिकतम और न्यूनतम जमा राशि (Sukanya Account: Minimum and Maximum Investment)

खाता 1000 रुपये की प्रारंभिक जमा राशि से खोला जा सकता है। बाद में 100 रुपये के गुणकों मे जमा किया जा सकते हैं।

खाता 250 रुपये की प्रारंभिक जमा राशि से खोला जा सकता है। बाद में 50 रुपये के गुणकों मे जमा किया जा सकते हैं। (जुलाई 2018)

आप एक सुकन्या समृद्धि अकाउंट में न्यूनतम 1,000 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये प्रति वित्तीय वर्ष जमा कर सकते हैं।

न्यूनतम राशि को अब 1,000 रुपये से घटाकर 250 रुपये कर दिया गया है| (जुलाई 2018)

इसलिए, अगर आपकी दो बेटियां हैं, तो आप दोनों  खातों में 1.5 लाख रुपये (कुल मिला कर 3 लाख रुपये) जमा कर सकते हैं। ध्यान दें आप पीपीएफ में ऐसा नहीं कर सकते|

अगर आप किसी सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खोले गए खाते में एक वित्तीय वर्ष में 1.5 रुपये से ज्यादा जमा कर देते हैं, तो उस अतिरिक्त राशि पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा| आप उस अतिरिक्त राशि को बिना ब्याज के कभी भी वापिस ले सकते हैं|

आप सुकन्या समृद्धि अकाउंट में कैश, चेक, डिमांड ड्राफ्ट या ऑनलाइन पैसे जमा कर सकते हैं|

कुछ बैंक आपको सुकन्या खाते में ऑनलाइन निवेश करने का विकल्प भी देते हैं|


सुकन्या समृद्धि योजना खाता कब परिपक्व होता है? When does Sukanya Samriddhi Account mature?

कब  सुकन्या समृद्धि खाता परिपक्व होगा, इस बारे में बहुत भ्रम है।

खाता खोलने की तारीख से 21 वर्ष पूरे होने के बाद परिपक्व हो जाता है। ध्यान दें खाते के मेच्योर होने का लड़की की उम्र का कोई संबंध नहीं है।

इसका मतलब, यदि आपने 15 अगस्त, 2015 को खाता खोला है, तो आप 15 अगस्त, 2036 को एक खाता परिपक्व होगा।

एक बात और, 21 वर्ष पूरे होने के बाद, सुकन्या समृद्धि  खाते में आपको कोई ब्याज नहीं मिलेगा|

अगर खाताधारक (बेटी) की शादी होने वाली है, तब आपकी बेटी खाते को समयपूर्व (21 वर्ष पूरे होने से पहले) बंद करके पैसे निकाल सकती है| ऐसा करना ज़रूरी नहीं है| यह एक विकल्प है| ध्यान दें आपकी बेटी की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और आपको यह आवेदन शादी से एक महीने पहले या शादी के तीन महीने बाद तक करना होगा|

अब संक्षिप्त में देखें तो,  समृद्धि अकाउंट दो परिस्थिति में बंद किया जा सकता है:

  1. खाते को खोले हुए 21 वर्ष हो गए हैं| अगर आप 21 वर्ष पूरा के बाद अपना पैसा नहीं निकालते हैं, तो आपको राशि पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा|
  2. बेटी के विवाह के समय| यह ज़रूरी नहीं है| यह आपके सामने विकल्प हैं| अगर आपको अपनी बेटी की शादी के लिए धन की ज़रुरत है परन्तु खाते को खोले हुए अभी 21 वर्ष नहीं हुए हैं, तब भी आप आवेदन करके खाते को समयपूर्व बंद कर सकते हैं|

सुकन्या समृद्धि खाते से पैसे कब निकाल सकते हैं?

एक बात और, आप सुकन्या समृद्धि खाते के मेच्योर होने से पहले भी कुछ पैसा निकाल सकते हैं|

परन्तु ऐसा कुछ परिस्तिथि में ही किया जा सकता है|

आप बेटी की उच्च शिक्षा के लिए पिछले साल के अंत में खाते में जमा राशि का 50% तक निकाल सकते हैं|

परन्तु इसके लिए बेटी की आयु 18 वर्ष होनी चाहिए या उसने कम से कम दसवीं कक्षा पास कर ली हो|

एक बात और आप केवल उतना ही पैसा निकाल सकते हैं, जितना की शिक्षा के लिए चाहिए| तो आप एडमिशन स्लिप, प्रवेश पात्र में लिखी फीस से ज्यादा पैसे नहीं निकाल सकते|


मैं अपनी बेटी के सुकन्या समृद्धि खाते में योगदान कब तक कर सकता हूं?

आप खाता खोलने की तारीख से 15 वर्ष पूरे होने तक खाते में योगदान कर सकते हैं। इसलिए, खाता खोलने की तारीख से 16वें वर्ष की शुरुआत से 21 वर्ष के अंत तक, कोई और योगदान नहीं कर सकते।

इसलिए, यदि आपने 15 अगस्त, 2015 को खाता खोला है, तो आप 15 अगस्त, 2030 तक खाते में जमा कर सकते हैं।

ध्यान दे आपको सोलहवें वर्ष से इक्कीसवें वर्ष (16th year till 21st year) ब्याज मिलता रहेगा|

इसका मतलब है कि आप 15 से 21 वर्ष तक पैसे जमा नहीं कर सकते लेकिन शेष राशि पर  इस अवधि के दौरान ब्याज अर्जित कर सकते है ।


क्या सुकन्या समृद्धि योजना अकाउंट को ट्रान्सफर कर सकते हैं?

जी हाँ, अगर आप घर बदल रहे हैं, तो आप अपनि बेटी का सुकन्या खाता भी ट्रान्सफर कर सकते हैं|

  1. एक बैंक से दूसरे बैंक
  2. एक पोस्ट ऑफिस (डाक घर) से दूसरे पोस्ट ऑफिस
  3. किसी पोस्ट ऑफिस से बैंक या बैंक से पोस्ट ऑफिस

आपको अपने नए पते का प्रमाण देना होगा| 

प्रक्रिया कुछ ऐसी होगी:

  1. अपने बैंक/डाक घर (जहां पर अभी खाता है) में जाएँ और वहाँ पर आवेदन करें|
  2. मौजूदा बैंक सारे डॉक्यूमेंट आपके नए बैंक में भेज देगा|
  3. नए बैंक/पोस्ट ऑफिस में KYC करके आप सुकन्या खाता चालू कर सकते हैं|

इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप आईसीआईसीआई बैंक की वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं|


सुकन्या समृद्धि योजना के लिए ब्याज दर  Sukanya Samriddhi Yojana Interest Rate

हर तिमाही वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ब्याज दर को सूचित करता है। July 18, 2018 को  सुकन्या समृद्धि योजना इंटरेस्ट रेट  8.1% p.a. है | ध्यान दे यह ब्याज दर हर तीन महीने पर बदल सकती है|

जिस ब्याज दर की घोषणा करी जाती है, उस तिमाही में आपकी जमा राशि (balance) पर आपको वही ब्याज मिलता है|

सुकन्या समृद्धि योजना की अभी की  ब्याज दर (interest rate) जानने के लिए आप इस पोस्ट पर जा सकते हैं|

ब्याज की गणना के लिए महीने की 10 तारीख और महीने के अंत तक सबसे कम बैलेंस पर मिलता है| तो बेहतर होगा की महीने की 10 तारीख से पहले आप पैसे जमा कराएं|

मान लिए आप अपनी बेटी (तीन वर्ष की आयु) के लिए सुकन्या समृद्धि योजना अकाउंट खोलते हैं और हर वर्ष (15 वर्ष तक) 15,000 रुपये हर वर्ष जमा करते हैं, तो खाते की मेच्योरिटी के समय कुल 7.28 लाख रुपये जमा हो जायेंगे| मैंने यह माना है की ब्याज दर पूरी अवधि के लिए 8.3% p.a रहेगी| ध्यान दे आप प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपये तक निवेश कर सकते हैं|

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अगर आप अपने निवेश के लिए मेच्योरिटी राशि जानना चाहते हैं, तो काफी सारे सुकन्या समृद्धि योजना कैलकुलेटर ऑनलाइन उपलब्ध हैं, आप वहाँ कोशिश कर सकते हैं|


सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश पर टैक्स बेनिफिट (Sukanya Samriddhi Scheme Tax Benefits)

यह योजना Exempt-Exempt-Exempt उत्पादों की श्रेणी में आती है|

इसका मतलब आपको कभी टैक्स नहीं देना होता|

निवेश करने पर टैक्स बेनिफिट मिलता है|

ब्याज कर-मुक्त है|

मेच्योरिटी के समय भी कोई टैक्स नहीं देना होता|

इस योजना में निवेश आयकर अधिनियम की धारा 80 सी (Section 80C) के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है। इसलिए, आप खाते में निवेश के लिए 1.5 लाख रुपये प्रति वित्तीय वर्ष तक टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं।

ध्यान दें अगर आपकी दो बेटियां हैं, तो आप कुल मिला कर तीन लाख रुपये (दोनों खातों में 1.5 लाख) निवेश कर सकते हैं, परन्तु टैक्स बेनिफिट आपको 1.5 लाख रुपये से ज्यादा नहीं मिलेगा|

एक बात और, यह 1.5 लाख रुपये का टैक्स बेनिफिट केवल सुकन्या योजना में निवेश के लिए नहीं है| पीपीएफ, ईपीएफ, जीवन बीमा, ELSS इत्यादि सभी इसी के अन्दर आता है|

यदि आपके पति/पत्नी भी नौकरी करते हैं, तो आप पहली बेटी के खाते में पैसे जमा कर सकते हैं और आपके पति/पत्नी दूसरी बेटी के खाते में जमा कर सकती है। इस तरह, आप दोनों टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं।


क्या आपको सुकन्या समृद्धि  योजना में निवेश करना चाहिए?

सुकन्या योजना अकाउंट आकर्षक (और गारंटीकृत) कर-मुक्त ब्याज प्रदान करता है| यह ब्याज दर पीपीएफ की ब्याज दर से अधिक है।

इस बात में कोई दोराय नहीं है की सुकन्या समृद्धि योजना आपकी बेटी की पढाई और शादी के लिए एक अच्छा निवेश विकल्प है|

परन्तु प्रतिबन्ध बहुत सारे हैं| जमा करने पर प्रतिबंध है| आप केवल 15 वर्षों के लिए जमा कर सकते हैं और खाता 21 साल में परिपक्व हो जाता है। आप चाह कर भी इससे आगे नहीं बढ़ा सकते|

पीपीएफ में ऐसा कोई प्रतिबन्ध नहीं है| जब तक चाहें, तब तक खाता चला सकते हैं|

अगर आप अपनी बेटी के लिए सुकन्या समृद्धि खाता खोलने की सोच रहे हैं, तो पीपीएफ अकाउंट खोलने के बारे में भी सोच सकते हैं। साथ ही थोड़ा इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने के बारे में भी विचार करें|


इस बात पर ध्यान दें

अगर आप अपनी बेटी के सुकन्या खाते में न्यूनतम राशि (1,000 रुपये 250 रुपये) भी जमा नहीं करते हैं, तो आप कुछ जुर्माना दे कर अपने खाते को नियमित कर सकते हैं| खाते को नियमित (regularize) करने के लिए आपको पिछले वर्षों के न्यूनतम भुगतान के साथ-साथ प्रति वर्ष 50 रुपये के हिसाब से पैसा जमा करना होगा|

मान लिए आप पिछले वर्ष आप सुकन्या खाते में भुगतान नहीं कर पाते हैं, तो इस वर्ष आपको 1,000 + 50 = 1,050 रुपये  250 + 50 = 300 रुपये का भुगतान करके अपने (बेटी के) अकाउंट को नियमित करना होगा|

1,000 रुपये 250 रुपये खाते में जायेंगे, 50 रुपये का जुर्माना रहेगा| इसके अतिरिक्त आपको इस वर्ष का भुगतान तो करना ही होगा|

ध्यान दें अगर आपने सुकन्या खाता खोलने के 15 वर्ष के भीतर अकाउंट को नियमित नहीं लिया, तो आपको केवल सेविंग्स अकाउंट (बचत खाते) की ब्याज दर मिलेगी, न की सुकन्या खाते की|


अधिक जानकारी के लिए पढ़ें

Sukanya Samriddhi Amendment Rules, 2016 (सुकन्या समृद्धि खाता नियम, २०१६)

Sukanya Samriddhi Account Rules, 2014

सुकन्या समृद्धि योजना SBI वेबसाइट पर

Filed Under: Financial Planning, PPF, Tax Planning Tagged With: Sukanya Samriddhi Scheme Hindi, sukanya samriddhi yojana hindi, पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि योजना, सुकन्या समृद्धि योजना 2018, सुकन्या समृद्धि योजना SBI, सुकन्या समृद्धि योजना की नियम

PPF vs ELSS: टैक्स बचाने के लिए आप पीपीएफ में निवेश करेंगे या ELSS में?

Last updated: नवम्बर 11, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

टैक्स सेविंग सीजन (Tax-saving season) आने वाला है| इस दौरान ईएलएसएस बनाम पीपीएफ (ELSS vs PPF) चर्चा का एक बहुत ही लोकप्रिय विषय है।

कुछ लोग पीपीएफ को बेहतर मानते हैं, तो कुछ ELSS को|

आप किस में निवेश करना पसंद करते हैं? पीपीएफ में या ELSS में या किसी में भी नहीं?

सच बताऊँ तो मुझे यह सवाल काफी अजीब  और कुछ स्तर पर गलत लगता है| अगर देखें तो पीपीएफ (PPF) और ईएलएसएस (ELSS) में कोई भी समानता नहीं है|

ईएलएसएस एक इक्विटी उत्पाद है जबकि पीपीएफ एक ऋण उत्पाद है। ELSS is an equity investment whereas PPF is a debt investment.

पीपीएफ के साथ रिटर्न की गारंटी होती है, ईएलएसएस (ELSS) के साथ ऐसी कोई गारंटी नहीं है|

ईएलएसएस(ELSS) निवेश में 3 साल का लॉक-इन है जबकि पीपीएफ 15 वर्षों में परिपक्व होगा |

केवल एक समानता है की दोनों में निवेश करने पर  आयकर अधिनियम की धारा 80 सी (Section 80C) के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है|

एक तरह से, लोगों को ईएलएसएस और पीपीएफ के बीच इस दुविधा का सामना करना पड़ता है क्योंकि दोनों में निवेश करने पर समान टैक्स बेनिफिट  देते हैं।

अगर दोनों उत्पादों के पास एक जैसे टैक्स बेनिफिट नहीं होते, तो शायद ऐसी दुविधा भी कभी नहीं होती|

इस पोस्ट में, मैं ईएलएसएस और पीपीएफ के बीच एक तुलना करूँगा| साथ ही इस बात पर चर्चा करूंगा की आपको इस सवाल के बारे में कैसे सोचना चाहिए|

इक्विटी लिंक्ड बचत योजना Equity Linked Savings Scheme (ELSS)

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) को आमतौर पर टैक्स-सेविंग इक्विटी म्यूचुअल फंड के रूप में जाना जाता है|

  1. ELSS एक प्रकार का इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड है|
  2. ELSS और अन्य इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में बस इतना अंतर है की ELSS में निवेश करने पर आपको टैक्स बेनिफिट मिलता है और ELSS में 3 वर्ष का lock-in होता है|
  3. तीन साल का लॉक-इन है | ईएलएसएस फण्ड में हर निवेश तीन साल के लॉक-इन के अधीन है, इसलिए आप 3 साल से पहले अपना पैसा नहीं निकाल सकते।
  4. ईएलएसएस में निवेश करने पर इनकम टैक्स की धारा 80 सी (Section 80C) के तहत 1.5 लाख तक का टैक्स बेनिफिट मिलता है।
  5. प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ELSS में निवेश की मात्रा पर कोई सीमा नहीं है। आप कितना भी निवेश कर सकते हैं| परन्तु टैक्स बेनिफिट .5 लाख रुपये प्रति वर्ष तक ही सीमित रहेगा।
  6. इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड 1 वर्ष से पहले बेचने पर होने वाले मुनाफे को Short Term Capital Gain माना जाता है और उस मुनाफे पर आपको 15% टैक्स देना होता है|  ELSS आप तीन साल से पहले कुछ बेच ही नहीं सकते| इसीलिए short term capital gain की तो कोई संभावना ही नहीं है|
  7. इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड 1 वर्ष के बाद  बेचने पर होने वाले मुनाफे को Long Term Capital Gain माना जाता है| FY2019 से ऐसे मुनाफे पर आपको 10% टैक्स देना होगा| ELSS पर भी यही नियम लागू होगा| जब आप ELSS यूनिट्स बेचेंगे, तब आपको मुनाफे पर 10% टैक्स देना होगा| म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर लगने वाले टैक्स की अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|
  8. इक्विटी म्यूचुअल फंड से डिविडेंड (dividend) पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता| परन्तु आपको dividend देने से पहले म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी 10% टैक्स (Dividend Distribution Tax) काट लेती है|
  9. यदि आप SIP के माध्यम से ईएलएसएस में निवेश कर रहे हैं, तो SIP की हर किश्त तीन साल को लॉक हो जाएगी।  15 जनवरी 2016 को किस्त के माध्यम से खरीदी गई यूनिट्स 16 जनवरी 2019 को या उसके बाद  बेचीं जा सकती हैं। 15 फरवरी 2016 को खरीदी गई यूनिट्स 16 फरवरी, 2019 से बेची जा सकती हैं।
  10. रिटर्न शेयर बाजार से जुड़ा हुआ है और इसकी गारंटी नहीं है।
  11.  Non-resident Indians (NRI) भी ELSS में निवेश कर सकते हैं।

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर कितना अक्स देना पड़ता है?

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ)

मैंने अपने कई पोस्ट  में पीपीएफ के बारे में बात की है। इसलिए, मैं इस पोस्ट में विस्तार से पीपीएफ को कवर नहीं करूँगा। आप नीचे दी गयी पोस्ट के माध्यम से पीपीएफ के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं|

पढ़ें: PPF खाते के बारे  में पूरी जानकारी

पढ़ें: PPF खाते से कैसे लें लोन और किन बातों का रखें ध्यान

पढ़ें: PPF खाता मेच्योर होने पर क्या हैं आपके विकल्प?

पढ़ें: क्या आपको अपने बच्चों के लिए पीपीएफ अकाउंट खोलना चाहिए?

पढ़ें: अब कर सकते हैं 5 साल बाद अपना पीपीएफ खाता बंद

पढ़ें: पीपीएफ में कैसे होती है ब्याज की गणना?

पीपीएफ के बारे में कुछ ख़ास बातें

  1. पीपीएफ खाता 15 साल बाद मेच्योर होता है।
  2. परन्तु पीपीएफ निवेश के लिए लॉक-इन अवधि हर साल कम होती जाती है। मतलब की 15 साल पहले निवेश से गिने जाते हैं| हर निवेश 15 साल के लिए लॉक नहीं होता| इसके विपरीत, ईएलएसएस में हर निवेश तीन साल के ताजा लॉक-इन के अधीन होता है|
  3. इसका मतलब पीपीएफ में पहला निवेश 15 साल को लॉक रहेगा जबकि दसवें साल में किया गया निवेश केवल 5 साल ही लॉक-in में रहेगा| ELSS में हर निवेश को एक सामान 3 वर्ष के लॉक-इन का सामना करना पड़ता है|
  4. 15 साल की प्रारंभिक परिपक्वता के बाद, आप 5 वर्षों के ब्लॉक में पीपीएफ खाते का विस्तार कर सकते हैं।
  5. तीसरे वर्ष से आपके पीपीएफ खाते से आप लोन ले सकते हैं। सातवें वर्ष से आंशिक निकासी (partial withdrawal) की अनुमति है|
  6. कुछ परिस्थितियों में आप अपने खाते को 5 साल के बाद भी बंद कर सकते हैं| परन्तु ऐसा करने पर आपको एक पेनल्टी देनी होगी|
  7. आप एक वित्तीय वर्ष में अपने पीपीएफ खाते में (और पीपीएफ खातों में जहां आप अभिभावक या guardian हैं) अधिकतम 1.5 लाख रुपये  में डाल सकते हैं। अतिरिक्त राशि पर ब्याज नहीं मिलेगा|
  8. 1.5 लाख रुपये  तक के निवेश पर  सेक्शन 80 C के तहत टैक्स लाभ मिलता है|
  9. रिटर्न तय नहीं  हैं | हर तिमाही (quarter) के लिए ब्याज दर वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अधिसूचित है|
  10. NRI पीपीएफ में निवेश नहीं कर सकते|

पीपीएफ या ईएलएसएस (PPF vs ELSS): किस में करें निवेश?

PPF vs ELSS vs PPF hindi पीपीएफ ईएलएसएस में अंतर

पहले आप को अपने वित्तीय लक्ष्यों (financial goals) के बारे में सोचना चाहिए और उसके बाद फैसला लेना चाहिए| केवल टैक्स सेविंग के बारें में न सोचें|

पीपीएफ और ईएलएसएस के बारे में सोचने से पहले, जांच करें कि आपके पास पर्याप्त जीवन बीमा है या नहीं। यदि आपके पास पर्याप्त जीवन बीमा नहीं है, तो एक टर्म प्लान खरीदें| उसके बाद निवेश के बारे में सोचे| जीवन बीमा खरीदने पर भी टैक्स बेनिफिट मिलता है|

पीपीएफ और ELSS दोनों ही लम्बे समय के निवेश (long term investment) के लिए है| तो अगर आप कम समय के लिए निवेश कर रहे है, तो आप किसी में भी निवेश न करें|

जब आप पहली बार अपना खाता खोलते हैं तो पीपीएफ एक दीर्घकालिक निवेश है | हालांकि, जब आप परिपक्वता के करीब जाते हैं, तो इसका इस्तेमाल अल्पावधि निवेश (short term investment) के रूप में भी किया जा सकता है। परन्तु आपको देखना होगा की आपको ऐसा करने की ज़रुरत है या नहीं|

अपने asset allocation पर ध्यान दें| अगर आप इक्विटी में ज्यादा निवेश कर रहे हैं, तो आप PPF (जो की एक डेब्ट निवेश है) में निवेश कर सकते हैं| अगर आप डेब्ट में ज्यादा कर रहे हैं, तो आप ELSS पर विचार कर सकते हैं| आपको एक संतुलन बना कर चलना चाहिए|

ईएलएसएस(ELSS) भी एक दीर्घकालिक निवेश (long term investment) होता है। लॉक-इन अवधि से अपने आपको आप को ग़लत तरीके से गुमराह न होने दें। भले ही ईएलएसएस निवेश को 3 साल की लॉक-इन अवधि के बाद बेचा जा सकता है, परन्तु आपको ईएलएसएस में तभी निवेश करना चाहिए, जब की आपका निवेश क्षितिज (investment horizon) कम से कम 10 साल है।

यदि सेक्शन 80C की 1.5 लाख की लिमिट ईपीएफ (EPF) आवंटन, जीवन बीमा और होम लोन के भुगतान से पूरी हो चुकी है, तो ईएलएसएस (ELSS) में निवेश करने की कोई जरूरत नहीं है। आप किसी भी इक्विटी फण्ड में निवेश कर सकते हैं|

ध्यान दे ELSS और एक किसी सामान्य इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में केवल यही अंतर है की ELSS में निवेश करने पर आपको टैक्स बेनिफिट मिलता है| इसीलिए अगर आपके टैक्स बेनिफिट की लिमिट पूरी हो गयी है, तो ईएलएसएस में निवेश करने की कोई ज़रूरत नहीं है।

ध्यान दें पीपीएफ अभी भी एक विचार के योग्य है (भले ही 80 C निवेश की लिमिट पहले से पूरी हो गयी हो)| पीपीएफ एक ऋण उत्पाद के लिए अच्छे रिटर्न प्रदान करता है और 15 साल की प्रारंभिक परिपक्वता अवधि समाप्त हो जाने के बाद बहुत अधिक लचीलापन (flexibility) देता है। साथ ही आप एक साल में 1.5 लाख से ज्यादा जमा नहीं कर सकते| तो अगर आप अपने PPF के बैलेंस को बढ़ाना चाहते हैं, तो आप 1.5 लाख के टैक्स बेनिफिट की लिमिट पूरी होने के बाद भी PPF निवेश कर सकते हैं|

मेरे अनुसार आपको आपको अपने पूरे पोर्टफोलियो को देखना चाहिए| साथ की यह भी देखना चाहिए की आप किस लिए निवेश कर रहे है और आपकी सेक्शन 80C की लिमिट पूरा करने के लिए कितने रुपये की ज़रुरत है|

अपने asset allocation पर भी ध्यान दे| उसके बाद ही कोई निर्णय लें| आप चाहें तो दोनों में भी निवेश कर सकते हैं|  

पर हाँ, यदि आप ईएलएसएस में निवेश कर रहे हैं, तो अपने ईएलएसएस फंड में निवेश करने के लिए वित्तीय वर्ष के अंत तक इंतजार न करें। पहले से शुरू करें| एसआईपी (SIP) के माध्यम से पूरे साल नियमित रूप से निवेश करें| पीपीएफ में भी साल की शुरुआत में निवेश करने पर ज्यादा ब्याज मिलेगा|

व्यक्तिगत तौर पर में PPF में निवेश करता हूँ| ELSS में नहीं करता| इक्विटी में निवेश के लिए में सामान्य इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करता हूँ|

आप कहां निवेश करने की योजना बना रहे हैं? पीपीएफ या ईएलएसएस या दोनों में या किसी में नहीं?

पढ़ें: FY2018-2019 में इनकम टैक्स बचाने के 35 तरीके

Source: PersonalFinancePlan.in

Filed Under: Financial Planning, Mutual Funds, PPF, Tax Planning Tagged With: ELSS PPF hindi, ELSS vs PPF hindi, PPF vs ELSS hindi, पीपीएफ ELSS हिंदी

कैसे कर रहा है SBI Mutual Fund निवेशकों को गुमराह?

Last updated: अप्रैल 15, 2018 | by दीपेश 8 Comments

कुछ समय पहले मैंने SBI Mutual Fund का एक विज्ञापन देखा था जिसमें equity mutual fund से  Systematic Withdrawal Plan (SWP) करने का सुझाव दिया गया था|

उस विज्ञापन के अनुसार अगर आपको नियमित आय (regular income) चाहिए तो equity mutual fund से SWP करना एक Fixed Deposit (FD) की तुलना में बेहतर विकल्प है| SBI Mutual Fund ने एक उदाहरण की सहायता से यह समझाने की कोशिश करी|

इस पोस्ट में आईये देखते हैं की SBI Mutual Fund क्यों गलत है| ऐसे विज्ञापनों से निवेशक केवल गुमराह होंगे|

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड क्या है? What is Mutual Fund in Hindi?

SBI Mutual Fund का विज्ञापन किस बारे में था?

सीधे दिए गए उदाहरण पर आतें हैं|

मान लिए आप एक equity म्यूचुअल फंड और bank fixed deposit में 50 लाख रुपये का निवेश करते हैं|

Equity funds शेयर बाजार से जुड़े रिटर्न प्रदान करते हैं जबकि  Bank Fixed deposit में  एक निश्चित  7.2% प्रति वर्ष return मिलता है।

आप प्रति माह equity fund से 30,000 रुपये निकालते हैं। इसका मतलब की आप हर महीने 30,000 रुपये की units बेच देते हैं|ऐसा आप एक Systematic withdrawal plan (SWP) के द्वारा कर सकते हैं|

ध्यान दे यहाँ बात SBI Mutual Fund से SWP के बारे में हो रही है, न की SIP (Systematic Investment Plan) के बारे में| SIP में आप हर महीने एक निश्चित राशि निवेश करते हैं, जबकि SWP में आप एक निश्चित राशि निकालते हैं|

बैंक Fixed deposit के मामले में 30,000 रुपये आपको मासिक ब्याज मिलेगा|

इसलिए, दोनों निवेशों से pre-tax income 30,000 रुपये per month होगी।

Equity Fund में आपको मुनाफे पर 15% capital gains टैक्स देना होना (short term)| Fixed Deposit के ब्याज पर आपको अपने टैक्स bracket के हिसाब से टैक्स देना होगा|

SBI MF SWP advertising

Equity mutual fund से SWP करने पर पूरे साल में आप केवल 3,233 रुपये  का capital gains tax देते हैं|

इसका मतलब पूरे साल में आपकी net income हुई 3.57 लाख रुपये (3.6 लाख रुपये – 3,233 रुपये)|

अगर आपने 50 लाख रुपये FD में लगाये होते, तो आपकी आमदनी होती 3.6 लाख रुपये| पर अगर आप 30% अक्स bracket में हैं, तो आपको इस पर 30% टैक्स देना होता| तो टैक्स देने के बाद आप पर बचते 2.49 लाख रुपये|

अगर तुलना करें, equity fund से SWP में 3.57 लाख और FD में 2.49 lakhs|

और यही नहीं, equity fund में साल के आखिर में आपके निवेश की value 52.35 लाख हैं| FD तो ५० लाख का ही है|

तो गर देखे तो, equity फण्ड में SWP करने से आप बेहतर cash flow  प्राप्त करते हैं, कम tax  देते हैं और आपके निवेश का मूल्य भी ज्यादा है।

आपको और क्या चाहिए?

क्या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड से SWP एक fixed deposit से अच्छा विकल्प है?

नहीं, ऐसा नहीं है। आइये देखते हैं क्यों?

पढ़ें: कैसे चुनाव करें अपने लिए बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड का?

पढ़ें: 2018 में निवेश करने के लिए बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड (Best Equity Mutual Funds for 2018)

क्या कमी है और क्या चीज़ छुपायी गयी है इस विज्ञापन में?

विज्ञापन में यह माना गया है की निवेशक (investor) 30% tax  ब्रैकेट में  आता है । यह भी हो सकता है की Investor बहुत कम टैक्स ब्रैकेट में हो।

उदाहरण के लिए, यदि आप 20% टैक्स ब्रैकेट में आते है, तो आपका कुल 74,160 रुपये (फिक्स्ड डिपॉजिट के मामले में) का टैक्स देना होंगा। इसका मतलब आपको मिलेंगे 2.86 लाख रुपये|

परन्तु इससे भी महत्वपूर्ण एक और पहलु है|

महत्वपूर्ण पहलू 

SBI MF ने उस अवधि को उठाया है जब  शेयर बाज़ार ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

AMC ने 1 मई, 2016 से 1 मई, 2017 तक की अवधि को उठाया, जब Nifty 7806 से बढ़कर 9313 हो गई, जो 19.3% की बढ़त है।

अब चलिए SWP की एक ऐसी अवधी चुनते हैं जब की शेयर मार्केट ने अच्छा न किया हो| ध्यान रखें जबाप निवेश करते हैं अब आपको पता नहीं होता की शेयर बाज़ार में कैसे रिटर्न आने वाले हैं|

आप 1 मार्च 2015 को lump sum निवेश करते हैं और अगले एक साल के लिए हर महीने 30,000 रुपयेकी units बेचते हैं (SWP के द्वारा)|

मैंने 50 लाख रुपये के निवेश के लिए SBI BlueChip Fund को चुना है।

अब देखिये|

SBI MF SWP equity fund advertising 3

आपके पास साल के आखिर में केवल 41.68 लाख रुपये बचे हैं|

FD में आपके पास 50 लाख रुपये बचे होते|

आपको SWP से बेहतर cashflow (आय) तो मिला होगा पर आपका तकरीबन 20% निवेश गायब हो गया|

ध्यान रखें इससे ज्यादा नुक्सान भी हो सकता था|

अब सोचिये यह नुकसान आपको रिटायरमेंट के दौरान होता है, तो आपको कितनी परेशानी हो सकती है। आखिर आपको अपने निवेश से नियमित आय की ज़रुरत रिटायरमेंट के दौरान ही तो पड़ेगी|

आप देख सकते हैं की SBI Mutual फण्ड ने कितनी चालाकी से वेह समय चुना जब की शेयर बाज़ार ने अच्छा किया|

ध्यान रखें

  1. शेयर बाजार इस से भी खराब रिटर्न दे सकता हैं|
  2. बाजार अगले 1 साल या अगले कुछ वर्षों कैसा प्रदर्शन करेगा, इस बात का अनुमान लगाना मुश्किल है। निवेश करते समय, आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि एक बाजार का एक खराब चरण (bad phase) आपकी आर्थिक स्तिथि को इतना कमजोर न कर दे, की आप उससे उबर ना पायें।

क्या Systematic withdrawal plan (SWP) एक बुरा विचार है?

नहीं, Systematic withdrawl plan (SWP) कोई बुरा विचार नहीं है।

पर SWP एक equity mutual fund से करना एक बुरा विचार है| और यहीं SBI Mutual Fund ने निवेशकों को गुमराह करने की कोशिश करी है|

SWP हमेशा केवल एक Debt mutual फण्ड से ही करें| Debt mutual फण्ड का चुनाव भी सही से करें|

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड सिप (Mutual Fund SIP) क्या है? क्या हैं फायदे?

क्या सीख है आपके लिए?

Equity mutual fund निवेश करने का एक अच्छा तरीका  हैं। परन्तु Equity mutual funds (इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड) में केवल लम्बी अवधि के लिए ही निवेश करना चाहिए| कम समय में नियमित आय देने के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है|

SBI Mutual Fund द्वारा लापरवाही से बनाये गए विज्ञापन से बहुर सारे निवेशक गुमराह हो सकते हैं और बादमें उन्हें निराशा का सामना भी करना पड़ सकता है|

यहाँ शायद SBI mutual fund के लिए भी सीख है|  ऐसे गैर-ज़िम्मेदार विज्ञापनों से वह केवल निवेशकों को ही नहीं बल्कि पूरी  म्यूच्यूअल फण्ड इंडस्ट्री को नुक्सान पहुँचा रहे है|

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान क्या हैं?

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान में कैसे करें निवेश?

Filed Under: Financial Planning, Mutual Funds, Tax Planning Tagged With: equity mutual funds, regular income, sbi mutual fund, sbi mutual fund in hindi, Systematic withdrawal plan

जानिए शिक्षा लोन (Education Loan) पर मिलने वाले टैक्स बेनेफिट्स (Tax Benefits)

Last updated: जनवरी 8, 2018 | by दीपेश 6 Comments

Higher education (उच्च शिक्षा) का खर्चा बढ़ता ही जा रहा है| अच्छी बात यह है की आपको higher education के लिए लोन मिल जाता है|

साथ ही शिक्षा के लिए लोन (education loan) की अदायगी पर आपको टैक्स बेनिफिट भी मिलता है| इससे आपकर क़र्ज़ का भर कुछ हद तक कम हो जाता है|

इस पोस्ट में मै शिक्षा लोन के भुगतान पर मिलने वाले टैक्स बेनेफिट्स पर चर्चा करूँगा|

शिक्षा लोन के वापसी भुगतान के लिए क्या है कर लाभं? (Tax Benefits of Education Loan)

  1. शिक्षा लोन के ब्याज के भुगतान (interest payment) पर आयकर अधिनियम की धारा 80 E (Section 80E of the Income Tax Act) के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है। ब्याज आपकी income से घटा दिया जाता है|
  2. ध्यान रखें टैक्स लाभ केवल ब्याज भुगतान के लिए है| Principal के भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं है| Tax benefit only for interest payment and not for principal repayment
  3. इस टैक्स बेनिफिट पर कोई उपरी लिमिट भी नहीं है (No cap)| आप कितना भी ब्याज दे रहे हों, सारे भुगतान पर टैक्स बेनिफिट मिलेगा|

ऐसे मिलने वाले टैक्स लाभं से आपके शिक्षा लोन की लागत कम हो जाती है। अथार्थ आप पर ब्याज का भार कम हो जाता है|

यदि आप 20% व।ली टैक्स सूची मे आते हैं (20% tax bracket) , तो effective लागत 7.94% P.a. हो जाती है। यदि आप 10% व।ली टैक्स सूची टैक्स में हैं, तो प्रभावी लागत 8.97% p.a. हो जाती है।

पढाई के लिए मैं कितने समय तक टैक्स का लाभ ले सकता हूं?

आपको 8 साल के लिए टैक्स लाभ मिलता है|

परन्तु ध्यान रखें यह 8 साल लोन लेने के साथ शुरू नहीं होते| यह 8 साल तब से गिने जाते हैं, जब से आपने लोन का भुगतान शुरू किया हो|

इसलिए, अगर आप वित्त वर्ष 2015 (FY 2015) में education loan लिया हैं और FY 2018 में भुगतान शुरू करते हैं , तो आप FY2025 तक कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

क्या सभी प्रकार शिक्षा की लोन में टैक्स का लाभ ले सकते हैं?

अगर आपको tax बेनिफिट चाहियें, तो कुछ बातों का ध्यान रखना होगा|

  1. आपको एक financial institution या approved charitable institution से लोन लेना होगा ।
  2. किसी रिश्तेदार या दोस्त से लोन टैक्स लाभ के लिए पात्र नहीं है।
  3. आप अपनी उच्च शिक्षा के उद्देश्य के लिए या अपने पति या पत्नी और बच्चों (self, spouse and kids) के उच्च शिक्षा के लिए लोन ले सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों की शिक्षा के लिए लिया गया ऋण, जिनकें आप कानूनी रूप अभिभावक हैं (legal guardian), उसमें आप टैक्स का लाभ ले सकगे।
  4. किसी और की शिक्षा के लिए लोन (जैसे की आपके भाई-बहन) पर आपको कोई टैक्स लाभ नहीं मिलेगा|
  5. विदेश में पढाई के लिए गए लोन पर भी टैक्स बेनिफिट मिलता है|

 मैंने अपनी बेटी की शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण लिया , क्या उसे कर लाभ मिल सकता है?

नहीं, ब्याज भुगतान पर टैक्स लाभ केवल उधारकर्ता (borrower) को ही मिलता है|

अगर आपने अपनी बेटी की शिक्षा के लिए ऋण लिया है, तो केवल आपको टैक्स लाभ मिलेगा, आपकी बेटी को नहीं|

अगर आपकी बेटी ने लोन लिया होता, तो उसको लाभ मिलता, आपको नहीं|‌‌

Image Credit: Jeremy Jenum. Flickr.com

Filed Under: Financial Planning, Loans, Tax Planning Tagged With: education loan, tax benefits, taxes

आपको ब्याज (interest income) पर कितना टैक्स देना होता है?

by दीपेश Leave a Comment

अगर आप अपने investment से आने वाले ब्याज (interest) पर निर्भर है, तो आपके लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है की आपको उस ब्याज पर कितना टैक्स देना होगा|

अगर निर्भर नहीं भी हैं,  तब भी जानना ज़रूरी है क्योंकि टैक्स से आपके नेट रिटर्न पर असर पड़ता है|

और अगर आप अपने निवेश को बेचना चाहते हैं तो होने वाले मुनाफे पर भी टैक्स देना पड़ सकता है|

इस पोस्ट में मैं केवल आपको मिलने वाला ब्याज (interest) कैसे टैक्स होता है, उसी बात पर चर्चा करूँगा|

ब्याज पर आपको कितना टैक्स देना होता है? (How is Interest Income from Investments taxed?)

कुछ तरह के निवेश को बेहतर टैक्स ट्रीटमेंट मिलता है|

इस बात पर भी गौर करें  की कई बार आपको interest मिलने से पहले ही टैक्स काट लिया जाता है| इसे Tax Deduction at Source भी कहते हैं|

How is interest income taxed ब्याज पर आपको कितना टैक्स देना पड़ता है?

सौजन्य: www.PersonalFinancePlan.in

जहाँ भी आपको ब्याज़ (interest) पर टैक्स देना है, वहां पर आपको अपने टैक्स ब्रैकेट (tax slab) के अनुसार टैक्स देना होगा|

म्यूच्यूअल फण्ड (mutual fund) और NPS में कभी interest नहीं मिलता| यह निवेश फिक्स्ड रिटर्न नहीं देते| आपको market linked (मार्केट लिंक्ड) रिटर्न मिलते हैं|

जानिए: म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर कितना देना पड़ सकता है टैक्स?

जानिए: NPS से पैसा निकालने पर कितना टैक्स देना पड़ सकता है?

TDS कैसे बचा सकते हैं?

बैंक TDS तभी काटते है की जब आपकी interest income (ब्याज की आय) एक लिमिट से ज्यादा होती है| जैसे की बैंक FD पर तभी TDS काटते हैं, जबकि आपका बैंक में कुल FD का ब्याज उस वर्ष में 10,000 रुपये से ज्यादा हो जाए|

ध्यान रखें की TDS कटने से आपकी टैक्स liability ख़तम नहीं हो जाती| जैसे की, बैंक केवल ब्याज का 10% ही TDS काटेगा (PAN जमा न करने पर 20%)| पर अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट (tax slab) में हैं, तो बचा हुआ टैक्स आपको अलग से भरना होगा|

अगर किसी कारण ज्यादा TDS कट जाता है, तो आप income tax return भर कर अतिरिक्त टैक्स का रिफंड (refund) ले सकते हैं|

TDS बचाने का सवाल तभी उठता है की जब आपकी पूरे वर्ष की आय 2.5 लाख से कम हो| 60 वर्ष के ऊपर यह लिमिट 3 लाख और 80 साल के ऊपर 5 लाख रुपये हो जाती है|

अगर आपकी आय लिमिट से कम है, तो आप फॉर्म 15G/15H बैंक में जमा करके TDS कटने से बचा सकते हैं|

इस बारें में विस्तृत जानकारी के लिए आप इस पोस्ट को देख सकते हैं|

किताबों के सुझाव

रिच डैड पूअर डैड

रिटायर रिच: प्रतिदिन 40 रुपये का निवेश करें

Disclosure:मैं टैक्स विशेषज्ञ नहीं हूँ| कुछ भी निर्णय लेने से पहले Chartered Accountant की सलाह लें|

Filed Under: Financial Planning, Tax Planning Tagged With: financial Planning, tax on interest income, ब्याज पर टैक्स

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