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Tax Planning

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अपने बैंक फिक्स्ड डिपाजिट पर TDS कैसे बचाएं? (How to save TDS on Bank Fixed Deposit?)

by दीपेश Leave a Comment

अगर आप फिक्स्ड डिपाजिट में निवेश करते हैं, तो आप जानते होंगे की अगर आपका ब्याज एक सीमा से अधिक होता है, तो बैंक TDS (Tax Deduction at Source) काट लेता है|

बैंक कब फिक्स्ड डिपाजिट के ब्याज पर TDS काटते हैं?

बैंक के नियम आपकी आयु पर निर्भर करते हैं|

अगर आपकी आयु 60 वर्ष से कम है

अगर एक बैंक की सभी शाखयों में कुल मिला कर 10,000 रुपये से ज्यादा है, तो आपको ब्याज देने से पहले  ब्याज पर TDS काटा जाएगा|

अगर आपकी आयु 60 वर्ष से अधिक है

अगर एक बैंक का सभी शाखयों में कुल मिला कर 10,000 रुपये से ज्यादा है, तो आपको ब्याज देने से पहले ब्याज पर TDS काटा जाएगा| परन्तु 1 अप्रैल 2018 (FY2019) से यह सीमा 10,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गयी है| यह रियायत केवल सीनियर सिटीजन के लिए है|

अगर आपने अपना PAN जमा किया है, तो TDS 10% (ब्याज का 10%) काटा जाता है| अगर PAN जमा नहीं किया है, तो 20% TDS काटा जाता है|

यह टैक्स आपके नाम पर ही काटा जाता है और आपके Form 26AS में ही दिखाई देगा|

मान लिए आपके पास स्टेट बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में फिक्स्ड डिपाजिट हैं| SBI में ब्याज के रूप में 9,000 रुपये कमाते हैं। आईसीआईसीआई बैंक के साथ आप ब्याज के रूप में 8,000 रुपये कमाते हैं। क्योंकि दोनों ही बैंक में आपका कुल ब्याज 10,000 रुपये से कम है, कोई भी बैंक आपका TDS नहीं काटेगा।

परन्तु इसका मतलब यह नहीं की आपके 17,000 रुपये का ब्याज कर मुक्त है| आपको इन 17,000 रुपये पर अपनी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

क्या फिक्स्ड डिपाजिट पर टीडीएस से बचने का कोई तरीका है?

जी हाँ, TDS से बचने का तरीका तो है, पर कुछ ही स्तिथियों में आप इन तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं|

TDSसे बचने के लिए, आप बैंक के साथ फॉर्म 15G/15H जमा कर सकते हैं।

अगर आपकी आयु 60 वर्ष से कम है, तो आप फॉर्म 15G जमा कर सकते हैं|

अगर आपकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है, तो आप फॉर्म 15H जमा कर सकते हैं|

परन्तु हर कोई फॉर्म 15G/15H नहीं जमा कर सकता|

फॉर्म 15G/फॉर्म 15H एच कौन फाइल कर सकता है?

फॉर्म 15G जमा करने के लिए नियम/पात्रता (Eligibility)

  1. आपकी आयु 60 वर्ष से कम होनी चाहिए|
  2. आपकी ब्याज से होने वाली वाली आय 2.5 लाख रुपये (minimum tax exemption limit) से कम होनी चाहिए|
  3. आपकी कुल अनुमानित टैक्स liability शून्य होनी चाहिए (Estimated tax liability should be NIL).

फॉर्म 15H जमा करने के लिए नियम/पात्रता (Eligibility)

  1. आपकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए| आप सीनियर सिटीजन होने चाहिए|
  2. आपकी कुल अनुमानित टैक्स liability शून्य होनी चाहिए (Estimated tax liability should be NIL)| अगर आपकी आयु 60 और 80 वर्ष के बीच में हैं, तो आपको 3 लाख तक की कर योग्य आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा| अगर आपकी आयु 80 वर्ष या उससे अधिक है, तो आपको 5 लाख तक की कर योग्य आय पर टैक्स नहींदेना होगा|

आप देख सकते हैं की फॉर्म 15H जमा करने के लिए एक कंडीशन कम है| सीनियर सिटीजन के लिए ब्याज की आय की वजह से कोई अतिरिक्त प्रतिबंध नहीं है।

अगर Form 15G या 15H जमा करते हैं, तो बैंक आपका TDS नहीं काटेगा|

ध्यान दें अगर आपने बैंक में अपना PAN जमा नहीं किया है, तो आपके फॉर्म 15G/15H को वैद्य नहीं माना जाएगा|

save tds bank fixed deposit फिक्स्ड डिपाजिट पर टीडीएस बचाएँ

पढ़ें: कैसे होता है आपका इनकम टैक्स कैलकुलेट?

यदि मैं पात्र नहीं हूं, तो फॉर्म 15G या 15H जमा करने पर क्या होगा?

अगर आप फॉर्म 15G या 15H जमा करने के पात्र नहीं हैं, परन्तु फॉर्म जमा कर देते हैं, तो आपको आयकर  की धारा 277 के तहत जुर्माना या कारावास हो सकता है। इसलिए, बैंक में फॉर्म 15 जी / 15 एच फॉर्म जमाकरने से पहले फॉर्म जमा करने की पात्रता चेक कर लें|

फॉर्म 15G/15H कहाँ से मिलेगा?

आप आयकर वेबसाइट से फॉर्म 15G या फॉर्म 15H के फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। आप अपनी बैंक की शाखा से भी फॉर्म ले सकते हैं।

अगर आप भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) के फॉर्म डाउनलोड करना चाहते हैं, तो आप यहाँ से कर सकते हैं| SBI Form 15G, SBI Form 15H

फॉर्म 15G/15H कितनी बार जमा करना होता है?

फॉर्म 15G/15H एक वर्ष के लिए वैद्य होता है|

इसीलिए आपको हर वर्ष यह फॉर्म जमा करना होगा|

आप एक बार फॉर्म 15G/15H जमा कर चुके हैं, परन्तु कोई नया फिक्स्ड डिपाजिट खोलते हैं| ऐसी स्तिथि में आपको फिर से फॉर्म जमा करना होगा|

अगर मैंने फॉर्म 15G/15H जमा नहीं किया, तो क्या होगा?

डरने वाली बात नहीं है, बस हाँ थोड़ा काम बढ़ जाएगा|

  1. अगर TDS के रूप में अतिरिक्त टैक्स कट गया है, तो आप इनकम टैक्स रिटर्न भर कर रिफंड ले सकते हैं|
  2. TDS अमूमन हर तिमाही पर काटा जाता है, तो जल्दी से जल्दी जमा करें|

पर हाँ, जमा करने से पहले यह सुनिश्चित करें की आप फॉर्म 15G/15H भरने के पात्र हैं या नहीं|

क्या फॉर्म 15G या 15H के ऑनलाइन जमा कर सकते हैं?

कुछ बैंक आपको यह सुविधा प्रदान कर सकते हैं| अपने बैंक के साथ चेक करें|

टीडीएस (TDS) कटने से आपकी टैक्स liability पूरी नहीं होती

नहीं, टीडीएस (TDS) का भुगतान आपका कर दायित्व (tax liability) को पूरा नहीं करता है।

यदि आप उच्च टैक्स ब्रैकेट (20% या 30%) में आते हैं, तो आपको आयकर रिटर्न दाखिल करने के समय अतिरिक्त कर का भुगतान करना होगा|

अगर ज्यादा टैक्स कट गया है, तो आप इनकम टैक्स रिटर्न भरकर वापिस ले सकते हैं|

क्या NRI भी फॉर्म 15 जी और 15 एच दाखिल कर टीडीएस छूट का लाभ उठा सकते हैं?

आयकर अधिनियम की धारा 197 A के अनुसार, केवल भारतीय निवासियों को 15 जी और 15 एच दाखिल करके टीडीएस छूट का लाभ लेने की अनुमति है। इसलिए NRI फॉर्म 15 जी और 15 एच दाखिल कर टीडीएस छूट नहीं ले सकते हैं।

इन बातों पर भी ध्यान दें

  1. फिक्स्ड डिपाजिट पर मिलने वाले पूरे ब्याज पर टैक्स देना होता है|
  2. फिक्स्ड डिपाजिट के ब्याज पर आपको अपने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ता है|
  3. TDS कटने पर आपकी टैक्स liability खत्म नहीं होती|
  4. अगर आप 20% या 30% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं और TDS केवल 10% ही कटा है, तो आपको अतिरिक्त टैक्स अपने आप जमा करना होगा|
  5. अगर आपके ब्याज पर TDS कट गया है और आपकी टैक्स liability कम है, तो आप इनकम टैक्स रिटर्न भर कर refund ले सकते हैं|
  6. आपको फॉर्म 15G/15H हर बैंक के साथ (जहां भी आपका खाता है और TDS कट सकता है) भरना होगा|
  7. आप एक बार फॉर्म 15G/15H जमा कर चुके हैं, परन्तु कोई नया फिक्स्ड डिपाजिट खोलते हैं| ऐसी स्तिथि में आपको फिर से फॉर्म जमा करना होगा|
  8. आप सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम के साथ भी फॉर्म 15G/15H फॉर्म जमा कर सकते हैं| साथ ही अगर आपने किस कंपनी के फिक्स्ड डिपाजिट में निवेश किया है, तो वहाँ भी आप यह फॉर्म जमा कर सकते हैं|
  9. सेविंग्स बैंक अकाउंट के ब्याज पर कोई टीडीएस नहीं कटता|
  10. अगर आपकी आयु 60 वर्ष से कम है, तो आपको धारा 80TTA के तहत सेविंग्स अकाउंट पर 10,000 रुपये तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होता|
  11. अगर आपक सीनियर सिटीजन (आयु 60 वर्ष से ज्यादा) हैं, तो आपको 50,000 तक के ब्याज पर (सेविंग्स अकाउंट और फिक्स्ड डिपाजिट मिलाकर) कोई टैक्स नहीं देना होगा| यह नियम FY2019 (1 April, 2018) से लागू होगा| धारा 80TTB के तहत यह लाभ मिलेगा| अगर कुल ब्याज 50,000 से ज्यादा है, तो आपको अतिरिक्त ब्याज पर अपनी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

पढ़ें: सीनियर सिटीजन को मिलने वाले स्पेशल टैक्स बेनिफिट

Filed Under: Financial Planning, Tax Planning Tagged With: sbi फिक्स्ड डिपाजिट टीडीएस कैसे बचाएं, tax benefits for senior citizens in hindi, टीडीएस क्या है, भारतीय स्टेट बैंक फिक्स्ड डिपाजिट, सीनियर सिटीजन टैक्स बेनिफिट

सीनियर सिटीजन को मिलने वाले 7 स्पेशल टैक्स बेनिफिट

by दीपेश Leave a Comment

भारतीय सरकार वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) कुछ अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट देती है| इस पोस्ट में मैं ऐसे ही कुछ टैक्स बेनिफिट पर चर्चा करूंगा, जो की केवल वरिष्ठ नागरिकों को ही उपलब्ध हैं|

पहले जानते हैं की वरिष्ठ नागरिक की परिभाषा क्या है|

वरिष्ठ नागरिक (सीनियर सिटीजन) – आपकी आयु 60 और 80 वर्ष के बीच में है

अति-वरिष्ठ नागरिक (वैरी सीनियर सिटीजन)– आपकी आयु 80 वर्ष या उससे अधिक है

वरिष्ठ नागरिको के लिए टैक्स के लाभ (Tax Benefits for Senior Citizens) (Hindi)

#1. कम टैक्स देना पड़ता है

अगर आप इनकम टैक्स के दरें देखें, तो आप जान सकते हैं की सीनियर सिटीजन को थोड़ी राहत दी गयी है|

मैंने FY2019 के दरें दिखायीं हैं|

income tax slab FY2018 2019

तो आप देख सकते हैं की अगर आप वरिष्ठ नागरिक हैं, तो आपको 2,500 रुपये तक कम टैक्स देना पड़ सकता हैं| 3 लाख रुपये तक की आय कर मुक्त है|

अगर आप अति वरिष्ठ नागरिक हैं, तो आपको 12,500 रुपये तक कम टैक्स देना पड़ेगा| 5 लाख तक की आय कर मुक्त है|

पढ़ें: जानिये कैसे होता है आपका इनकम टैक्स कैलकुलेट

#2. 50,000 रुपये तक की इंटरेस्ट इनकम (ब्याज) पर छूठ है

यह नियम 1 April 2018 (FY2019) से लागू होगा|

वरिष्ठ नागरिकों को बचत खाते (savings account), फिक्स्ड डिपाजिट (fixed deposit) या रेकरिंग डिपाजिट (recurring deposit) पर बर्ष में 50,000 तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होगा| यह टैक्स लाभ धारा 80TTB के तहत है|

अगर ब्याज 50,000 रुपये  से ज्यादा है, तो टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

अगर आप एक सीनियर सिटीजन हैं और आपने वर्ष में फिक्स्ड डिपाजिट और बचत खाते पर 80,000 रुपये का ब्याज पाया| 50,000 रुपये तक कोई टैक्स नहीं देना होगा|

बचे हुए 30,000 रुपये पर इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

यह नियम आपने बैंकों, सहकारी बैंकों (co-operative bank) और डाकघरों (post-office) में खोलें गए खातों के लिए है।

अगर धारा 80 TTB के तहत लाभ ले रहे हैं, तो धारा 80 TTA के तहत कर लाभ नहीं ले सकते हैं। धारा 80TTA के तहत सेविंग्स बैंक अकाउंट पर मिलने वाले 10,000 रुपये तक के ब्याज पर टैक्स छूठ है|

#3. वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये से ऊपर के ब्याज पर TDS लगेगा

यह नियम भी 1 April 2018 (FY2019) से लागू होगा| FY2018 तक यह सीमा 10,000 रुपये है|

जो लोग सीनियर सिटीजन नहीं है, उनके लिए यह सीमा 10,000 रुपये है (FY2019 में भी)|

सीनियर सिटीजन के लिए TDS (Tax deduction at source) एक बड़ी परेशानी का विषय है|

बुज़ुर्ग लोग आपना काफी पैसा फिक्स्ड डिपाजिट में रखते हैं और अमूमन उनके पास आय का कोई और जरिया नहीं होता| TDS काटने पर उनको रिटर्न भरकर वापिस लेना पड़ता है| हालांकि फॉर्म 15H जमा करके आप TDS कटने से रोक सकते हैं, परन्तु यहाँ भी काफी परेशानी होती है|

#4. हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 50,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट

FY2018 तक यह टैक्स बेनिफिट 30,000 रुपये प्रति वर्ष तक सीमित है|

1 April 2018 (FY2019) से यह बेनिफिट बढ़कर 50,000 रुपये हो जाएगा|

#5. गंभीर बीमारियों के चिकित्सा उपचार के लिए टैक्स बेनिफिट 1 लाख रुपये का टैक्स बेनिफिट (Section 80DDB)

किसी गंभीर बीमारी के लिए 1 लाख रुपये तक के खर्चे के लिए टैक्स बेनिफिट मिलेगा| यह नियम FY2019 (1 April 2018) से लागू होगा|

FY2018 तक वरिष्ठ नागरिकों (senior citizen) के लिए 60,000 रुपये की सीमा थी और अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए 80,000 रुपये (> = 80 वर्ष) की सीमा थी। FY2019 से दोनों के लिए सीमा बढाकर 1 लाख प्रतिवर्ष कर दी गयी है।

ध्यान दीजिए कि 60 साल से कम उम्र के करदाताओं को सालाना 40,000 रुपये ही है|

एक बात और, सेक्शन 80DDB के तहत केवल उसी खर्चे के लिए क्लेम किया जा सकता है, जो आपने किसी इंश्योरेंस पालिसी के तहत क्लेम न किया हो|

#6. Reverse mortgage Loan Scheme के तहत मिलने वाली राशि कर मुक्त है

Reverse Mortgage Loan Scheme (RML) के तहत आप अपना घर बैंक लो गिरवी रख देते हैं और बैंक आपको आपके पूरे जीवन कुछ मासिक राशि प्रदान करती है| आप पूरे जीवन उस घर में रह सकते हैं| मृत्यु के बाद बैंक वह घर ले लेता है|

RML स्कीम केवल सीनियर सिटीजन के लिए ही उपलब्ध है|

अच्छी बात यह है की ऐसी स्कीम से मिलने वाली राशि आयकर की धारा 10(43) के तहत कर मुक्त है|

आप Reverse Mortgage Loan Scheme (RML) के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ सकते हैं|

#7. 40,000 रुपये तक का Standard Deduction

यह नियम भी FY2019 (1 April 2018)  से लागू होगा|

यह फायदा केवल सीनियर सिटीजन के लिए ही नहीं है बल्कि सभी के लिए है|

अगर आप सीनियर सिटीजन हैं और पेंशन पाते हैं, तो आप 40,000 रुपये का टैक्स बेनिफिट पा सकते हैं| ध्यान दें यह फायदा आपको तभी मिलेगा जब आप पेंशन पाते हैं|

Filed Under: Financial Planning, Tax Planning Tagged With: tax benefits for senior citizens in hindi, सीनियर सिटीजन टैक्स बेनिफिट

समय से भरें इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return): अगर नहीं भरेंगे, तो देना होगा जुर्माना

by दीपेश Leave a Comment

एक ईमानदार और ज़िम्मेदार नागरिक होने के नाते आपका फ़र्ज़ बनता है की आप सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करें|

आपको समय पर अपने Income Tax Return (ITR) फाइल करन चाहिए| यदि किसी कारणवश अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं कर पाए हैं, तो ज्यादा देर इंतज़ार न करें| अगर आप सही समय पर आयकर रिटर्न फाइल नहीं करते, तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं|

इस पोस्ट में हम जानेंगे की, अगर आप आयकर रिटर्न भरने से चूक गए हैं, तो आप क्या कर सकते हैं और कब तक रिटर्न भर सकते हैं|

किन लोगों को इनकम टैक्स रिटर्न (आयकर रिटर्न) भरना ज़रूरी है?

अगर आपकी किसी वित्तीय वर्ष में कुल आय 2.5 लाख या उससे ज्यादा है, तो आपको उस वर्ष के लिए आयकर रिटर्न भरना ज़रूरी है|

आप पिछले कितने साल के आयकर रिटर्न दाखिल कर सकते हैं?

अभी के नियम के अनुसार आप पिछले दो वित्तीय वर्ष के रिटर्न फाइल कर सकते हैं|

एक उदाहरण की सहायता से समझते हैं|

आप वित्तीय वर्ष 2018 (FY2018, यानी 31 मार्च 2018 तक) में आप पिछले दो वित्तीय वर्षों 2016-17 (FY2017) और वित्तीय वर्ष 2015-16 (FY2016) के इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।

ध्यान दें FY2017 का मतलब हुआ Assessment Year 2017-2018 (AY2017-2018).

आप FY2016 और FY2017 के रिटर्न मार्च 31, 2018 तक फाइल कर सकते हैं|

परन्तु अगले वर्ष से इस नियम में परिवर्तन हो रहा है

1 अप्रैल 2018 से आप केवल पिछले एक वर्ष के इनकम टैक्स रिटर्न ही फाइल कर पायेंगे|

इसका मतलब आपको FY2018 (जो मार्च 31 2018 के खत्म होगा) का रिटर्न केवल मार्च 31, 2019 तक ही फाइल कर सकते हैं|

FY2018 का रिटर्न FY2019 में फाइल करना है|

इसका मतलब यह भी हुआ की FY2017 का रिटर्न आपको मार्च 31 2018 तक फाइल करना है|

इसका मतलब यह नहीं की आप मार्च 31 तक रिटर्न भरने का इंतज़ार करें

देखिये मार्च 31 के बाद तो आप रिटर्न भर ही नहीं सकते| इसका मतलब यह नहीं है की मार्च 31 तक का इंतज़ार करें|

अमूमन रिटर्न भरने की आखरी तारीख जुलाई 31 होती है| जैसे की FY2018 के रिटर्न भरने की समय सीमा (deadline) July 31 2018 है| हालांकि इस तारीख को कई बार आयकर विभाग थोड़ा बढ़ा सकता है|

पर कोशिश करें की जुलाई 31 तक रिटर्न फाइल करें|

अगर समयसीमा का पालन नहीं किया तो देना होगा जुर्माना

अगर जुलाई 31 2018 तक FY2018 के रिटर्न फाइल करते हैं, तो अच्छी बात है|

अगर तब तक नहीं कर पाते और दिसम्बर 31 2018 तक करते हैं, तो 5,000 रुपये तक अंक जुर्माना देना हो सकता है|

अगर दिसम्बर में भी नहीं कर पाते और मार्च 31 2019 तक कर पाते हैं, तो 10,000 रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है|

अगर मार्च 31 2019 तक भी नहीं कर पाते, तो फिर आप FY2018 का रिटर्न फाइल नहीं कर पायेंगे|

तो आप देख सकते हैं| हालांकि आप रिटर्न तो अगले वर्ष की मार्च 31 (2019) तक फाइल कर सकते हैं, पर अगर इस वर्ष की जुलाई 31 (2018) तक नहीं दाखिल किया, तो जुर्माना देना होगा|

बस थोड़ी से राहत है|

अगर आपकी आय 5 लाख रुपये से कम है, तो अधिकतम जुर्माना 1,000 रुपये हो सकता है|

परन्तु अगर आप आयकर नोटिस के जवाब में रिटर्न फाइल कर रहे हैं, तो पिछले कई वर्षों के विलम्बित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं|

एक बात और, अगले वर्ष से, अगर किसी कारणवश आपको अपने इनकम टैक्स रिटर्न revise करना पड़ता है, तो वह आप केवल अगले वर्ष की मार्च 31 तक ही कर सकते हैं| तो मान लिए की आपने अपना रिटर्न समयसीमा (July 31, 2018) के अन्दर भर दिया| परन्तु बाद में आपको पता चला की आपसे रिटर्न भरने में कुछ गलती हो गयी है| ऐसी किसी गलती को आप केवल अगले वर्ष की मार्च 31 (मार्च 31 2019) तक ही सुधार सकते हैं|

आयकर रिटर्न को देर से दाखिल करने के कुछ और भी नुकसान हैं

हमनें ऊपर देखा की समयसीमा (July 31) के अन्दर आयकर रिटर्न न भरने की वजह से आपको जुर्माना भरना पड़ सकता है| हालांकि आप अगले वर्ष की मार्च 31 तक रिटर्न भर सकते हैं, पर आपको जुर्माना देना होगा| मार्च 31 के बाद रिटर्न नहीं भर पायेंगे|

परन्तु देर से रिटर्न फाइल करने पर और भी परेशानियां हैं|

  • अगर आप समयसीमा (July 31) तक रिटर्न फाइल नहीं करते हैं, तो आप capital loss (loss from house property के अलावा) को carry forward नहीं कर पायेंगे|
  • अगर टैक्स का भुगतान बकाया है, तो आपको 1% प्रति माह के हिसाब से जुर्माना भी जमा करना होगा|

Disclaimer: मैं टैक्स एक्सपर्ट नहीं हूँ| इसीलिए कुछ भी फैसला करने से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स कंसलटेंट से बात करें| समय पर अपना इनकम टैक्स रिटर्न भरें|

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Credit

Relakhs.com

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इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर देना होगा 10% Long Term Capital Gains Tax

by दीपेश Leave a Comment

अब आपको अपने इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट को एक बर्ष (या उससे ज्यादा) बाद बेचने पर होने वाले मुनाफे पर टैक्स देना होगा|

अगर आप सीधे शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं, तब भी आपको मुनाफे पर टैक्स देना होगा|

यह प्रस्ताव बजट 2018 में लाया गया है|

Long Term Capital Gains Tax और Short Term Capital Gains Tax क्या है?

शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के लिए देखते हैं|

अगर आप एक साल के अन्दर बेचते हैं और मुनाफे होता है, ऐसे मुनाफे को Short term capital gain (शोर्ट टर्म कैपिटल गेन) कहते हैं|

ऐसे मुनाफे पर आपको 15% टैक्स देना होता है|

(Holding period <= 1 year )   ==> Short Term Capital Gain  ==> 15% टैक्स मुनाफे पर

अगर आप एक साल के बाद बेचते हैं और मुनाफे होता है, ऐसे मुनाफे को Long term capital gain (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन या LTCG) कहते हैं|

ऐसे मुनाफे पर आपको अभी तक कोई टैक्स नहीं देना होता था| पर अप्रैल 1, 2018 से आपको 10% टैक्स देना होगा| यह प्रस्ताव बजट 2018 में लाया गया है|

(Holding period > 1 year) ==> Long Term Capital Gain (LTCG)  ==> 10% टैक्स मुनाफे पर

इन बातों पर ध्यान दें

  1. ऊपर दिए गए नियम शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के लिए हैं|
  2. डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड के टैक्स नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है|
  3. यह नियम 1 April 2018 से लागू होगा| इसका मतलब अगर मार्च 31 2018 तक बेचने पर कोई Long Term Capital Gain होता है, तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा|
  4. जो मुनाफा आपको 31 जनवरी 2018 तक हो चुका है, उस पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा| इसके ऊपर जो मुनाफा होगा केवल उस पर टैक्स देना होगा| (GrandFathering) इस बारे में बाद में विस्तार से चर्चा करेंगे|
  5. आपको एक लाख रुपये तक के LTCG (एक वर्ष में) पर कोई टैक्स नहीं देना होगा| जब LTCG (शेयर या इक्विटी फण्ड बेचने) पर एक लाख से ज्यादा होगा, तब ही आपको अतिरिक्त लाभ पर 10% टैक्स देना होगा| तो समझ लिए की पहले एक लाख के लॉन्ग टर्म capital gain पर टैक्स की छूठ है|
  6. अगर आपको 1.5 लाख रुपये का LTCG हुआ है, तो आपको टैक्स केवल 50,000 रुपये पर ही देना होगा|
  7. आपको LTCG पर फ्लैट 10% टैक्स देना होगा| Indexation का लाभ नहीं मिलेगा|
  8. टैक्स पर cess (सेस) भी लगेगा| Cess अब 4% कर दिया गया है| तो आपको दरअसल 10.4% टैक्स देना होगा|

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स बजट 2018


शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कैसे कैलकुलेट किया जाएगा?

पहली बात, long term capital gain तभी होगा की जब आप अपने निवेश को एक वर्ष बाद बेचें|

उससे पहले बेचते हैं, तो short term capital gain माना जाएगा और आपको 15% टैक्स देना होगा|

अगर आपने जनवरी 31, 2018 के बाद शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट खरीदें हैं

और आप यह निवेश एक साल बाद बेचते हैं, तो जो भी मुनाफा है उस पर 10% टैक्स देना होगा|

यहाँ मुनाफा निकालना भी आसान है| आपने जितना निवेश किया और जितने में बेचा, उसका अंतर आपका मुनाफा होगा|

बस पहले 1 लाख रुपये के मुनाफे पर टैक्स नहीं देना होगा| बचे हुए LTCG पर 10% टैक्स देना होगा|

अगर आपने जनवरी 31, 2018 को या उससे पहले शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट खरीदें हैं

यहाँ पर भी अगर एक साल बाद बेचते हैं, तो 10% टैक्स देना होगा| पर  capital gain या मुनाफा कैलकुलेट करने का नियम थोड़ा सा अलग है|

समझ लिए capital gains कैलकुलेट करने के लिए आपके खरीद मूल्य (purchase price) और जनवरी 31, 2018 के मूल्य में जो राशि ज्यादा है, वह मानी जायेगी|

तो मान लिए की आप शेयर 100 रुपये में खरीदा था| जनवरी 31, 2018 को उसका price 130 रुपये था| जब आप बेचते हैं, तो उसका मूल्य 170 रुपये है|

Long term capital gain निकालने के लिए आपके purchase price को 130 रुपये माना जाएगा| इसी बात को GrandFathering कहते हैं|

जब आप 170 रुपये में बेचेंगे, तो मुनाफा 40 रुपये (170-130) का माना जाएगा और न की 70 रुपये का| हालांकि आपको मुनाफा 70 रुपये का हुआ है, टैक्स कैलकुलेट करने के लिए आपका मुनाफा 40 रुपये माना जाएगा|

इस चालीस रुपये पर आपको 10% टैक्स देना होगा|

देख्रें तो आपको 31 जनवरी 2018 तक हुए फायदे को टैक्स नहीं किया जाएगा|

अगर आप तकनिकी गहराई में जाना चाहते हैं, तो आपको खरीदने के price को निकालने के लिए यह करना होगा|

यह तीन राशि लें:

  1. आपके खरीदने का मूल्य (Purchase Price)
  2. जनवरी 31 2018 को highest price (शेयर के मामले में) या उस दिन का म्यूच्यूअल फण्ड NAV (Highest price on January 31 2018 in case of share or Mutual Fund NAV)
  3. आपके बेचने का मूल्य (sale price)

आपका खरीद मूल्य माना जाएगा: Higher of (1, Lower of (2,3))

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स 2

एक बात और, आपको पहले एक लाख के LTCG पर कोई टैक्स नहीं देना होगा|

तो मान लिए, आपने अगस्त 15, 2017 को 5 लाख रुपये निवेश किया| जनवरी 31 2018 को उसका मूल्य 7 लाख हो गया| आपने 15 दिसम्बर 2018 को अपने इक्विटी निवेश को बेच दिया 10 लाख रुपये में|

क्योंकि आपने 1 साल से अधिक समय तक अपने निवेश की होल्ड किया, मुनाफे को long term capital gain (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन) माना जाएगा|

तो आपका LTCG हुआ 10 लाख – 7 लाख रुपये = 3 लाख रुपये

इसमें पहले 1 लाख रुपये पर आपको टैक्स नहीं देना होगा|

बचे हुए 2 लाख रुपये के LTCG पर आपको 10% टैक्स देना होगा|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड से मिलने वाले dividend पर भी अब 10% टैक्स लगेगा

अभी तब कोई टैक्स नहीं लगता था|

पर ध्यान दें यह टैक्स आपको नहीं देना होगा| म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी आपके लिए टैक्स का भुगतान करेगी| पर टैक्स आएगा आपके पैसे से ही|

तो मान लिए म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी को 10 रुपये का dividend देना है, तो वह 1 रुपये का टैक्स जमा कर देगी और बचे हुए 9 रुपये आपको दे देगी| इसे Dividend Distribution Tax (DDT) भी कहते हैं|

एक बात औए, DDT पर सरचार्ज (surcharge) और सेस (Cess) भी लगेगा| अब इनकी वैल्यू बदलती रहती है| सरचार्ज 12% है और सेस (cess) 3% से बढ़ाकर 4% कर दिया गया है|

तो कुल मिलाकर आपके ऊपर असर 11.65% का आएगा|

और हाँ, यह टैक्स भी 31 मार्च 2018 के बाद ही लगेगा|


आपको क्या करना चाहिए?

पहली बात तो आपको अपने निवेश को बेचने की कोई ज़रुरत नहीं है| ऐसा इसलिए क्योंकि 31 जनवरी तक हुए मुनाफे पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा|

पर हाँ, आपके निवेश की वैल्यू अगर 31 जनवरी और 31 मार्च 2018 के बीच में काफी बढ़ जाती है, तो आप 31 मार्च से पहले बेच सकते हैं क्योंकि आपको 31 मार्च टैक्स कोई टैक्स नहीं देना होगा|

साथ ही आप हर साल कुछ-कुछ मुनाफा बुक कर सकते हैं| ऐसा इसलिए की 1 लाख रुपये तक के LTCG मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं है| बेचने के बाद आप दोबारा से निवेश कर सकते हैं|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के dividend स्कीम में निवेश करना कभी भी अच्छा आईडिया नहीं था| अब 10% टैक्स के बाद और भी बुरा हो गया है| ध्यान दें dividend के टैक्स पर 1 लाख रुपये की छूठ नहीं है| इसलिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड की dividend स्कीम से बचें और Growth स्कीम में निवेश करें|

Credit: www.PersonalFinancePlan.in

पढ़ें: बजट 2018 की महत्वपूर्ण घोषणाएं

Filed Under: Financial Planning, Mutual Funds, Tax Planning Tagged With: budget 2018, long term capital gains tax, LTCG on equity mutual funds, बजट 2018, म्यूच्यूअल फंड्स पर टैक्स, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स

बजट 2018: मुख्य घोषणाएं, इक्विटी फण्ड पर टैक्स और सीनियर सिटीजन्स के लिए राहत

by दीपेश Leave a Comment

बजट 2018 में कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं की गयी हैं|

इनकम टैक्स सलब और दरों को नहीं छेड़ा गया है परन्तु हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर पर अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट दिया गया है| 40,000 रुपये का Standard Deduction शुरू किया गया है|

वरिष्ठ नागरिकों (सीनियर सिटीजन) के लिए काफी लाभकारी घोषणाएं की गयी हैं| 50,000 हज़ार रूपए तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होगा और न ही कोई TDS कटेगा| प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) में निवेश सीमा बाधा दी गयी है| गंभीर बीमारियों पर इलाज़ के लिए होने वाले खर्चे पर भी टैक्स बेनिफिट बढ़ाया गया है|

पर एक निवेशक के लिए बड़ा झटका है| इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड या शेयर में होने वाले Long Term Capital Gains पर अब 10% प्रतिशत टैक्स लगेगा| थोड़ी सी राहत दी गयी है पर वह शायद काफी नहीं होगी| इक्विटी फण्ड से मिलने वाले dividend पर भी 10% टैक्स लगेगा|

आईये जानते हैं इन सभी नए नियमों के बारे में:

#1 इनकम टैक्स स्लैब और दरों को नहीं बदला गया है

जो इनकम टैक्स स्लैब और दरें पिछले साल (FY2017-2018) थी,  वही दरें रहेंगी|

लेटेस्ट इनकम टैक्स स्लैब और दरों के बारे में जानने के लिए इस लिंक पर जाएँ|

#2 स्टैण्डर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) के रूप में 40,000 रुपए  का नया टैक्स बेनिफिट दिया गया है

पर साथ में कुछ वापिस भी लिया गया है|

अभी तक आप अपने एम्प्लायर से 15,000 रुपये तक की मेडिकल बिल का reimbursement (प्रतिपूर्ति) करा सकते थे और मिलने वाली राशि पर कोई टैक्स नहीं देना होता था।

साथ ही आपको conveyance/transport allowance मिलता था महीने का 1600 रुपये| एक वर्ष का हो गया 19,200 रुपये|

अब इन दोनों टैक्स बेनिफिट के जगह आपको 40,000 रुपये के स्टैण्डर्ड डिडक्शन (Standard deduction) दिया जाएगा|

देखें तो, अधिकतम लाभ 34,200 रुपये से बढ़कर 40,000 रुपये हो जाता है|

कुछ ख़ास ज्यादा फायदा तो नहीं है, बस आपको कागज़ और बिल जमा करने में मेहनत नहीं करनी होगी|

#3 हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर बेनिफिट बढ़ाया गया है

धारा 80 डी के तहत लाभ 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये प्रति वित्तीय वर्ष कर दिया गया है।

पहले आप इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर 25,000 तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते थे| अब 50 हज़ार तक ले सकते हैं|

अगर आप सीनियर सिटीजन (आयु 60 वर्ष से ज्यादा है), तो आप 30,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते थे, अब 50,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

हेल्थ इंश्योरेंस पालिसी के प्रीमियम पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट के बारे में आप विस्तार से इस लिंक पर पढ़ सकते हैं

एक बात और, कई बार अगर आप दो-तीन बर्षों के प्रीमियम का भुगतान एक साथ करते हैं, तो आपको कुछ discount मिलता है| पर परेशानी यह है की टैक्स बेनिफिट केवल उसी वर्ष मिलता है की जिस वर्ष में आपने प्रीमियम का भुगतान किया है|

अब से ऐसा नहीं होगा| अब (FY2019) से आप प्रीमियम को बराबर हिस्सों में बाँट कर टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

तो मान लिए आपने दो वर्ष के प्रीमियम का भुगतान किया 40,000 रुपये| ऐसी स्तिथि में आप एक साल में 60,000 रुपये का टैक्स बेनिफिट ले की बजाय दो सालों में 30-30 हज़ार रुपये का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

#4 सीनियर सिटीजन के लिए 50,000 रुपये तक के ब्याज पर टैक्स छूठ (Interest Income Exempt for Senior Citizens up to Rs 50,000 per financial year)

ध्यान दें यह छूठ केवल सीनियर सिटीजन (60 वर्ष से ज्यादा आयु) के ही लिए है|

अब वरिष्ठ नागरिकों को बचत खाते (savings account), फिक्स्ड डिपाजिट (fixed deposit) या रेकरिंग डिपाजिट (recurring deposit) पर बर्ष में 50,000 तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होगा| इसके लिए एक नया सेक्शन 80TTB लाया जाएगा|

अगर 50,000 से ज्यादा ब्याज है, तो टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

बस एक बात और, ऐसे खाते आपने बैंकों, सहकारी बैंकों (co-operative bank) और डाकघरों (post-office) में खोलें हों।

अगर धारा 80 TTB के तहत लाभ ले रहे हैं, तो धारा 80 TTA के तहत कर लाभ नहीं ले सकते हैं।

धारा 80TTA के तहत सेविंग्स बैंक अकाउंट पर मिलने वाले 10,000 रुपये तक के ब्याज पर टैक्स छूठ है| तो अगर आप वरिष्ठ नागरिक नहीं हैं, तो आप सेक्शन 80TTA के तहत लाभ ले सकते हैं|

#5 वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये से ऊपर के ब्याज पर TDS लगेगा

यह बात भी काफी अच्छी है|

पहले 10,000 रुपये से ज्यादा ब्याज होने पर बैंक TDS काट लिया करते थे|

अब 50,000 रुपये तक के ब्याज पर कोई भी TDS नहीं काटा जाएगा|

#6 गंभीर बीमारियों के चिकित्सा उपचार के लिए टैक्स बेनिफिट 1 लाख रुपये किया गया (Section 80DDB): केवल वरिष्ठ नागरिकों के लिए

यह लाभ भी केवल वरिष्ठ नागरिकों के लिए है|

किसी गंभीर बीमारी के लिए 1 लाख रुपये तक के खर्चे के लिए टैक्स बेनिफिट मिलेगा|

इससे पहले, वरिष्ठ नागरिकों के लिए 60,000 रुपये की सीमा थी और अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए 80,000 रुपये (> = 80 वर्ष)। अब, दोनों के लिए सीमा 1 लाख प्रतिवर्ष बढ़ा दी गई है।

ध्यान दीजिए कि 60 साल से कम उम्र के करदाताओं को सालाना 40,000 रुपये ही है|

एक बात और, सेक्शन 80DDB के तहत केवल उसी खर्चे के लिए क्लेम किया जा सकता है, जो आपने किसी इंश्योरेंस पालिसी के तहत न लिया हो|

#7 प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana) के लिए निवेश सीमा में वृद्धि

प्रधानमंत्री वय वंदना योजना को 31 मार्च, 2020 तक बढ़ा दिया गया है। इसका मतलब है कि आप 2020 मार्च तक इस योजना में निवेश कर सकते हैं।

साथ ही अधिकतम योगदान को 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख कर दिया गया है।

PMVVY में निवेश करने पर वरिष्ठ नागरिकों  को 10 वर्षों के लिए 8% ब्याज मिलता है।

#8 इक्विटी शेयर / इक्विटी म्यूचुअल फंड में Long Term Capital Gains Tax लाया गया (Long Term Capital Gains Tax on Equity Mutual Funds/Shares Introduced)

अभी तक अगर आप अपने शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट 1 साल बाद बेचते थे, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होता था|

ऐसा इसलिए क्योंकि शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट  को बेचने पर होने वाले Long Term Capital Gain (LTCG) पर कोई टैक्स नहीं था|

अब आपको ऐसे मुनाफे पर 10% टैक्स देना होगा| यह खबर निवेशकों को शायद इतनी अच्छी न लगे|

दो राहतें दो गयीं हैं|

  1. अगर बर्ष में Long Term Capital Gain (LTCG) अगर 1 लाख रुपये से कम का है, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा| 1 लाख से ऊपर के मुनाफे पर ही टैक्स देना होगा|
  2. 31 जनवरी, 2018 तक के मुनाफे पर कोई भी टैक्स नहीं देना होगा|

इस बारे में गहराई से (उदहारण के साथ) जानने के लिए आप इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ सकते हैं|

#9 इक्विटी फंड (Equity Mutual Fund) के dividend पर 10% टैक्स लगेगा

अभी तक इक्विटी फण्ड के dividend पर कोई टैक्स नहीं लगता था|

पर अब से म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी आपको 10% टैक्स काट कर पैसा देगी| इसका मतलब टैक्स TDS के रूप में ही काट लिया जाएगा|

आपको अलग से टैक्स भरने की ज़रुरत नहीं है|

इस बारे में गहराई से जानने के लिए आप इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ सकते हैं|

pay tax on long term capital gains equity mutual funds बजट 2018

#10 कुछ अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं

  1. Cess (सेस) के 3% सेस बढाकर 4% कर दिया गया है।
  2. धारा 54 EC (NHAI और REC बांड्स में निवेश करके Long Term Capital Gains Tax बचाने के लिए) के तहत लाभ अब केवल land और building बेचने पर होने वाले capital gains तक सीमित होगा। इससे पहले, किसी भी प्रकार के LTCG पर टैक्स बचने के लिए किया जा सकता था। साथ ही ऐसे बांड के अवधि 3 वर्ष से बढाकर 5 वर्ष कर दी गयी है|
  3. National Health Protection स्कीम शुरू की जायेगी| इस स्कीम के तहत गरीब परिवारों को वर्ष में 5 लाख रुपये तक का स्वस्थ्य बीमा दिया जायेगा|

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इनकम टैक्स स्लैब (Income Tax Rates for FY2018-2019)

Last updated: फ़रवरी 21, 2018 | by दीपेश 2 Comments

Income Tax Slab Rates for FY 2018-2019 (AY 2019-2020)

Income Tax Slab Rates for FY 2017-2018 (AY 2018-2019)

वित्तीय वर्ष 2018-2019 (FY 2018-2019) के लिए इनकम टैक्स स्लैब के दरों के बदला नहीं गया है| जो टैक्स स्लैब पिछले वर्ष थी, वही अगले वर्ष भी रहेंगी| बस Cess को 3% से बढ़ा कर 4% कर दिया गया है|

व्यक्तिगत कर दाताओं और HUF  के लिए आयकर स्लैब (60 साल से कम उम्र, पुरुष और महिला दोनों के लिए) (Individuals and HUF less than 60 years of age)

income tax slab 2017-2018 in hindi इनकम टैक्स स्लैब आयकर की दरें

 

वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर स्लैब (60 वर्ष या अधिक लेकिन 80 वर्ष से कम, पुरुषों और महिलायों दोनों के लिए) (Senior Citizens, Individuals between 60 years and 80 years of age)

income tax slab 2017-2018 in hindi इनकम टैक्स स्लैब आयकर की दरें 

अति-वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर स्लैब (80 वर्ष या अधिक, पुरुष और महिला दोनों के लिए) (Very Senior Citizens, 80 years and above)

income tax slab 2017-2018 in hindi इनकम टैक्स स्लैब आयकर की दरें

ध्यान दे आपकी कुल कर योग्य आय निकालने के लिए आपको अपनी कुल आय में से सारे टैक्स बेनिफिट घटाने होंगे, जैसे की Section 80C, 80D, HRA इत्यादि|

साथ ही जो आय कर मुक्त है, जैसे की पीपीएफ पर ब्याज, इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन| इस आय को भी कम करना होगा|

इसके बाद ऊपर दी गयी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स कैलकुलेट किया जाएगा|

Taxable Income = Gross Income – Exempt Income – Tax Deductions

कर योग्य आय = कुल आय – कर मुक्त आय  – कर लाभ (टैक्स डिडक्शन)

साथ की अगर आपकी कर योग्य आय 3.5 लाख रुपये से कम है, तो आपको 2,500 रुपये की टैक्सरिबेट (tax rebate) भी मिलेगी|

एक बात और, कुछ प्रकार की आमदनी जैसे की capital gains (कैपिटल गेन्स) पर अलग कर दर लागू होती है|

पढ़ें: आपको ब्याज पर कितना टैक्स देना होता है? (Tax on Interest Income)

पढ़ें: कितना टैक्स देना होता है म्यूच्यूअल फंड्स बेचने पर?

अपना इनकम टैक्स कैसे कैलकुलेट करें? (How to calculate Income Tax Liability?)

अपना इनकम टैक्स कैलकुलेट करने के लिए आप इस इनकम टैक्स कैलकुलेटर (Income Tax Calculator) का उपयोग कर सकते हैं|

Source: ClearTax

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