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कैसे कर रहा है SBI Mutual Fund निवेशकों को गुमराह?

Last updated: अप्रैल 15, 2018 | by दीपेश 8 Comments

कुछ समय पहले मैंने SBI Mutual Fund का एक विज्ञापन देखा था जिसमें equity mutual fund से  Systematic Withdrawal Plan (SWP) करने का सुझाव दिया गया था|

उस विज्ञापन के अनुसार अगर आपको नियमित आय (regular income) चाहिए तो equity mutual fund से SWP करना एक Fixed Deposit (FD) की तुलना में बेहतर विकल्प है| SBI Mutual Fund ने एक उदाहरण की सहायता से यह समझाने की कोशिश करी|

इस पोस्ट में आईये देखते हैं की SBI Mutual Fund क्यों गलत है| ऐसे विज्ञापनों से निवेशक केवल गुमराह होंगे|

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड क्या है? What is Mutual Fund in Hindi?

SBI Mutual Fund का विज्ञापन किस बारे में था?

सीधे दिए गए उदाहरण पर आतें हैं|

मान लिए आप एक equity म्यूचुअल फंड और bank fixed deposit में 50 लाख रुपये का निवेश करते हैं|

Equity funds शेयर बाजार से जुड़े रिटर्न प्रदान करते हैं जबकि  Bank Fixed deposit में  एक निश्चित  7.2% प्रति वर्ष return मिलता है।

आप प्रति माह equity fund से 30,000 रुपये निकालते हैं। इसका मतलब की आप हर महीने 30,000 रुपये की units बेच देते हैं|ऐसा आप एक Systematic withdrawal plan (SWP) के द्वारा कर सकते हैं|

ध्यान दे यहाँ बात SBI Mutual Fund से SWP के बारे में हो रही है, न की SIP (Systematic Investment Plan) के बारे में| SIP में आप हर महीने एक निश्चित राशि निवेश करते हैं, जबकि SWP में आप एक निश्चित राशि निकालते हैं|

बैंक Fixed deposit के मामले में 30,000 रुपये आपको मासिक ब्याज मिलेगा|

इसलिए, दोनों निवेशों से pre-tax income 30,000 रुपये per month होगी।

Equity Fund में आपको मुनाफे पर 15% capital gains टैक्स देना होना (short term)| Fixed Deposit के ब्याज पर आपको अपने टैक्स bracket के हिसाब से टैक्स देना होगा|

SBI MF SWP advertising

Equity mutual fund से SWP करने पर पूरे साल में आप केवल 3,233 रुपये  का capital gains tax देते हैं|

इसका मतलब पूरे साल में आपकी net income हुई 3.57 लाख रुपये (3.6 लाख रुपये – 3,233 रुपये)|

अगर आपने 50 लाख रुपये FD में लगाये होते, तो आपकी आमदनी होती 3.6 लाख रुपये| पर अगर आप 30% अक्स bracket में हैं, तो आपको इस पर 30% टैक्स देना होता| तो टैक्स देने के बाद आप पर बचते 2.49 लाख रुपये|

अगर तुलना करें, equity fund से SWP में 3.57 लाख और FD में 2.49 lakhs|

और यही नहीं, equity fund में साल के आखिर में आपके निवेश की value 52.35 लाख हैं| FD तो ५० लाख का ही है|

तो गर देखे तो, equity फण्ड में SWP करने से आप बेहतर cash flow  प्राप्त करते हैं, कम tax  देते हैं और आपके निवेश का मूल्य भी ज्यादा है।

आपको और क्या चाहिए?

क्या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड से SWP एक fixed deposit से अच्छा विकल्प है?

नहीं, ऐसा नहीं है। आइये देखते हैं क्यों?

पढ़ें: कैसे चुनाव करें अपने लिए बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड का?

पढ़ें: 2018 में निवेश करने के लिए बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड (Best Equity Mutual Funds for 2018)

क्या कमी है और क्या चीज़ छुपायी गयी है इस विज्ञापन में?

विज्ञापन में यह माना गया है की निवेशक (investor) 30% tax  ब्रैकेट में  आता है । यह भी हो सकता है की Investor बहुत कम टैक्स ब्रैकेट में हो।

उदाहरण के लिए, यदि आप 20% टैक्स ब्रैकेट में आते है, तो आपका कुल 74,160 रुपये (फिक्स्ड डिपॉजिट के मामले में) का टैक्स देना होंगा। इसका मतलब आपको मिलेंगे 2.86 लाख रुपये|

परन्तु इससे भी महत्वपूर्ण एक और पहलु है|

महत्वपूर्ण पहलू 

SBI MF ने उस अवधि को उठाया है जब  शेयर बाज़ार ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

AMC ने 1 मई, 2016 से 1 मई, 2017 तक की अवधि को उठाया, जब Nifty 7806 से बढ़कर 9313 हो गई, जो 19.3% की बढ़त है।

अब चलिए SWP की एक ऐसी अवधी चुनते हैं जब की शेयर मार्केट ने अच्छा न किया हो| ध्यान रखें जबाप निवेश करते हैं अब आपको पता नहीं होता की शेयर बाज़ार में कैसे रिटर्न आने वाले हैं|

आप 1 मार्च 2015 को lump sum निवेश करते हैं और अगले एक साल के लिए हर महीने 30,000 रुपयेकी units बेचते हैं (SWP के द्वारा)|

मैंने 50 लाख रुपये के निवेश के लिए SBI BlueChip Fund को चुना है।

अब देखिये|

SBI MF SWP equity fund advertising 3

आपके पास साल के आखिर में केवल 41.68 लाख रुपये बचे हैं|

FD में आपके पास 50 लाख रुपये बचे होते|

आपको SWP से बेहतर cashflow (आय) तो मिला होगा पर आपका तकरीबन 20% निवेश गायब हो गया|

ध्यान रखें इससे ज्यादा नुक्सान भी हो सकता था|

अब सोचिये यह नुकसान आपको रिटायरमेंट के दौरान होता है, तो आपको कितनी परेशानी हो सकती है। आखिर आपको अपने निवेश से नियमित आय की ज़रुरत रिटायरमेंट के दौरान ही तो पड़ेगी|

आप देख सकते हैं की SBI Mutual फण्ड ने कितनी चालाकी से वेह समय चुना जब की शेयर बाज़ार ने अच्छा किया|

ध्यान रखें

  1. शेयर बाजार इस से भी खराब रिटर्न दे सकता हैं|
  2. बाजार अगले 1 साल या अगले कुछ वर्षों कैसा प्रदर्शन करेगा, इस बात का अनुमान लगाना मुश्किल है। निवेश करते समय, आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि एक बाजार का एक खराब चरण (bad phase) आपकी आर्थिक स्तिथि को इतना कमजोर न कर दे, की आप उससे उबर ना पायें।

क्या Systematic withdrawal plan (SWP) एक बुरा विचार है?

नहीं, Systematic withdrawl plan (SWP) कोई बुरा विचार नहीं है।

पर SWP एक equity mutual fund से करना एक बुरा विचार है| और यहीं SBI Mutual Fund ने निवेशकों को गुमराह करने की कोशिश करी है|

SWP हमेशा केवल एक Debt mutual फण्ड से ही करें| Debt mutual फण्ड का चुनाव भी सही से करें|

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड सिप (Mutual Fund SIP) क्या है? क्या हैं फायदे?

क्या सीख है आपके लिए?

Equity mutual fund निवेश करने का एक अच्छा तरीका  हैं। परन्तु Equity mutual funds (इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड) में केवल लम्बी अवधि के लिए ही निवेश करना चाहिए| कम समय में नियमित आय देने के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है|

SBI Mutual Fund द्वारा लापरवाही से बनाये गए विज्ञापन से बहुर सारे निवेशक गुमराह हो सकते हैं और बादमें उन्हें निराशा का सामना भी करना पड़ सकता है|

यहाँ शायद SBI mutual fund के लिए भी सीख है|  ऐसे गैर-ज़िम्मेदार विज्ञापनों से वह केवल निवेशकों को ही नहीं बल्कि पूरी  म्यूच्यूअल फण्ड इंडस्ट्री को नुक्सान पहुँचा रहे है|

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान क्या हैं?

पढ़ें: म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान में कैसे करें निवेश?

Filed Under: Financial Planning, Mutual Funds, Tax Planning Tagged With: equity mutual funds, regular income, sbi mutual fund, sbi mutual fund in hindi, Systematic withdrawal plan

जानिए शिक्षा लोन (Education Loan) पर मिलने वाले टैक्स बेनेफिट्स (Tax Benefits)

Last updated: जनवरी 8, 2018 | by दीपेश 6 Comments

Higher education (उच्च शिक्षा) का खर्चा बढ़ता ही जा रहा है| अच्छी बात यह है की आपको higher education के लिए लोन मिल जाता है|

साथ ही शिक्षा के लिए लोन (education loan) की अदायगी पर आपको टैक्स बेनिफिट भी मिलता है| इससे आपकर क़र्ज़ का भर कुछ हद तक कम हो जाता है|

इस पोस्ट में मै शिक्षा लोन के भुगतान पर मिलने वाले टैक्स बेनेफिट्स पर चर्चा करूँगा|

शिक्षा लोन के वापसी भुगतान के लिए क्या है कर लाभं? (Tax Benefits of Education Loan)

  1. शिक्षा लोन के ब्याज के भुगतान (interest payment) पर आयकर अधिनियम की धारा 80 E (Section 80E of the Income Tax Act) के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है। ब्याज आपकी income से घटा दिया जाता है|
  2. ध्यान रखें टैक्स लाभ केवल ब्याज भुगतान के लिए है| Principal के भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं है| Tax benefit only for interest payment and not for principal repayment
  3. इस टैक्स बेनिफिट पर कोई उपरी लिमिट भी नहीं है (No cap)| आप कितना भी ब्याज दे रहे हों, सारे भुगतान पर टैक्स बेनिफिट मिलेगा|

ऐसे मिलने वाले टैक्स लाभं से आपके शिक्षा लोन की लागत कम हो जाती है। अथार्थ आप पर ब्याज का भार कम हो जाता है|

यदि आप 20% व।ली टैक्स सूची मे आते हैं (20% tax bracket) , तो effective लागत 7.94% P.a. हो जाती है। यदि आप 10% व।ली टैक्स सूची टैक्स में हैं, तो प्रभावी लागत 8.97% p.a. हो जाती है।

पढाई के लिए मैं कितने समय तक टैक्स का लाभ ले सकता हूं?

आपको 8 साल के लिए टैक्स लाभ मिलता है|

परन्तु ध्यान रखें यह 8 साल लोन लेने के साथ शुरू नहीं होते| यह 8 साल तब से गिने जाते हैं, जब से आपने लोन का भुगतान शुरू किया हो|

इसलिए, अगर आप वित्त वर्ष 2015 (FY 2015) में education loan लिया हैं और FY 2018 में भुगतान शुरू करते हैं , तो आप FY2025 तक कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

क्या सभी प्रकार शिक्षा की लोन में टैक्स का लाभ ले सकते हैं?

अगर आपको tax बेनिफिट चाहियें, तो कुछ बातों का ध्यान रखना होगा|

  1. आपको एक financial institution या approved charitable institution से लोन लेना होगा ।
  2. किसी रिश्तेदार या दोस्त से लोन टैक्स लाभ के लिए पात्र नहीं है।
  3. आप अपनी उच्च शिक्षा के उद्देश्य के लिए या अपने पति या पत्नी और बच्चों (self, spouse and kids) के उच्च शिक्षा के लिए लोन ले सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों की शिक्षा के लिए लिया गया ऋण, जिनकें आप कानूनी रूप अभिभावक हैं (legal guardian), उसमें आप टैक्स का लाभ ले सकगे।
  4. किसी और की शिक्षा के लिए लोन (जैसे की आपके भाई-बहन) पर आपको कोई टैक्स लाभ नहीं मिलेगा|
  5. विदेश में पढाई के लिए गए लोन पर भी टैक्स बेनिफिट मिलता है|

 मैंने अपनी बेटी की शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण लिया , क्या उसे कर लाभ मिल सकता है?

नहीं, ब्याज भुगतान पर टैक्स लाभ केवल उधारकर्ता (borrower) को ही मिलता है|

अगर आपने अपनी बेटी की शिक्षा के लिए ऋण लिया है, तो केवल आपको टैक्स लाभ मिलेगा, आपकी बेटी को नहीं|

अगर आपकी बेटी ने लोन लिया होता, तो उसको लाभ मिलता, आपको नहीं|‌‌

Image Credit: Jeremy Jenum. Flickr.com

Filed Under: Financial Planning, Loans, Tax Planning Tagged With: education loan, tax benefits, taxes

Health Insurance (स्वास्थ्य बीमा) से जुड़ी कुछ मिथ्याएं और न खरीदने के बहाने

by दीपेश Leave a Comment

आजकल की भाग दौड़ भरी  ज़िन्दगी में कब क्या हो जाये कुछ पता नहीं होता|

इसके लिए एक पर्याप्त हेल्थ कवरेज (health insurance) बहुत ही जरूरी होता है ।लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती होने पर पैसे की कमी पड़ सकती है और ऐसे बड़े खर्चे आपकी आर्थिक स्तिथि को कमज़ोर कर सकते हैं|

आज मैं इस पोस्ट में हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ी  कुछ  मिथ्याओं और health इंश्योरेंस न लेने के कुछ बहानों पर चर्चा करूँगा|

 #1 मैं अभी फिट हूँ और मुझे Health Insurance की ज़रुरत नहीं है

ध्यान रखें अभी कुछ भी हो सकता है| आप कितने हीत हो, एक्सीडेंट (दुर्घटना) तो हो ह सकता है| ऐसे केस में अस्पताल का बिल कैसे भरेंगे| अगर health insurance नहीं है, ओ सारा बिल जेब से भरना होगा|

ध्या रखें की आप बीमा तभी ख़रीदे जब आपको जरुरत नहीं हो| क्योंकि जब आपको ज़रुरत हगी तब इंश्योरेंस कंपनी आपको बेचेगी नहीं|

एक बात मैंने गौर करी है, जब आप फिट होते हैं, तब इंश्योरेंस आसानी से मिल जाया है| जैसे ही कोई बीमारी हुई, इंश्योरेंस लेने में बहु परेशानी होती है|

#2 मेरे पास पहले से employer ग्रुप हेल्थ कवर है,मुझे personal हेल्थ प्लान की जरुरत नहीं है

काफी लोगो  से  मै यह सुनता हूँ । क्या आप भी ऐसा सोचते है ?

चलिए में आपसे कुछ सवाल पूछता हूँ, आपको अपने सवाल का जवाब शायद खुद ही मिल जाएगा|

1– क्या आपका employer कवर आपके परिवार को भी कवर करता है? क्या सिर्फ सिर्फ 2 या 3 लाख का कवर आपके परिवार के लिए काफी है ?

2 – यदि आपका एम्प्लॉयर अगले साल कवर कम करता है या फिर लागत में कटौती करने के लिए पूरी तरह से स्वास्थ्य कवर हटा देता है, तब आप क्या करेगे?

3 – आप अपनी जॉब (job) change करते हैं पर नयी जगह कोई health कवर नहीं है?

4– आपने अपनी job छोड़ दी है और आपको दूसरी जगह अगले हफ्ते से जाना है| आप (या आपके परिवार में कोई) उस बीच बीमार पड़ जाता है| सारा बिल आपको देना होगा|

5– Employer cover तो केवल रिटायरमेंट तक होगा| उसके बाद क्या होगा?

हमेशा ध्यान रखें, अगर आपको कोई गंभीर बीमारी हो गयी, तो शायद आप चाह कर भी health insurance न खरीद पायेंगे| और अगर खरीद भी पाएं, तो प्रीमियम बहुत जज्यादा हो सकता है|

#3 अगर मै अपने इंश्योरेंस प्लान में claim करता हूँ, तो अगले साल से मेरा प्प्रीमियम बढ़ जाएगा

ऐसा नहीं है| इंश्योरेंस कंपनी चाह कर भी ऐसा नहीं कर सकती क्योंकि IRDA (insurance regulator) ऐसा करने की अनुमति नहीं देता|

केवल claim करने की वजह से आपका प्रीमियम नहीं बढेगा|

पर ध्यान रखें, आयु के साथ आपका प्रीमियम बढ़ सकता है| साथ ही इंश्योरेंस कंपनी की underwriting पालिसी में बदलाव पर भी प्रीमियम बढ़ सकता है|  परन्तु ऐसा होने पर आपके आयु वर्ग (age group) में सबका प्रीमियम बढ़ेगा (केवल आपका नहीं)|

#4 सस्ता सबसे अच्छा

ऐसा बिल्कुल नहीं है|

स्वास्थ्य बीमा (health insurance) और जीवन बीमा (Life insurance) में बहुत अंतर होता है|

Health insurance plan की coverage काफी अलग हो सकती है| इसीलिए प्रीमियम में भी काफी अंतर हो सकता है|

अगर आपके प्लान का प्रीमियम काफी कम है, तो उसकी एक वजह यह भी हो सकती है की उसकी coverage कम है या उसमें कुछ कम features हों|

सोच समझ कर पालिसी लें|

#5 सभी तरह के दवाई के खर्चे insurance कवर करेगा

आपका health इंश्योरेंस प्लान अस्पताल का सारा खर्च नहीं उठता|

Health insurance होने के बावजूद आपको कुछ खर्चा खुद उठाना होगा|

मैंने इस बारे में विस्तार से इस पोस्ट में लिखा है| ज़रूर पढ़ें|

#6 2-4 साल बाद सब कुछ कवर किया जाता है

पहले से मौजूद बीमारियों को waiting period के खत्म होने के बाद कवर किया जाता है।

परन्तु अगर बीमा कंपनी को पता चलता है कि आपने पॉलिसी खरीदते समय पूरी तरह से अपनी स्वास्थ्य स्थिति का खुलासा नहीं किया है, तो वह कभी भी आपके दावे को अस्वीकार कर सकता है (प्रतीक्षा अवधि के बाद भी)| और बीमा कंपनी सही भी है|

Source: www.PersonalFinancePlan.in

Image Credit: Flickr

Filed Under: Financial Planning, Life Insurance Tagged With: health insurance, health insurance myths

हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) प्रीमियम कम करने के 8 तरीकें

Last updated: अगस्त 17, 2017 | by दीपेश Leave a Comment

अस्पाताल की सुविधायें मेहेंगी होती जा रही हैं| अगर आपको किसी कारण अस्पताल में भरती होना पड़े, तो काफी खर्चा उठाना पड़ सकता है| इसी वजह से health insurance (स्वास्थ्य बीमा) खरीदना बहुत ज़रूरी हो गया है|

Health Insurance प्लान खरीदने पर आपकी बीमारी तो दूर नहीं होगी परन्तु उस बीमारी के लिए अस्पताल के खर्चे की चिंता को काफी हद तक दूर हो सकती है|

हो सकता है की आपके employer ने आपको health insurance दिया है| परन्तु ऐसे कवर में काफी समयाएं हैं| जैसे की यह कवर केवल तभी तक रहेगा जब तक आप उस employer के साथ काम कर रहे है| नौकरी छोड़ने या बदलने पर वह कवर चला जाएगा|

इसीलिए पर्सनल health insurance कवर खरीदने की सलाह दी जाती है| परन्तु हो सकता है ऐसे प्लान का प्रीमियम आपके बजट के बाहर हो| और यही वजह है की बहुत से लोग स्वास्थ्य बीमा (health insurance प्लान) नहीं खरीदते है|पर एक बात सोचिये| अगर आपको health insurance का प्रीमियम देने में इतनी परेशानी हो रही है, तो आप अस्पताल का लम्बा बिल कैसे भरेंगे|

इस पोस्ट में, मैं स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को कम करने के लिए कुछ तरीकों पर चर्चा करूंगा|

स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को कम करने के लिए टिप्स :

#1 कम कवर के लिए ऑप्टशन

यह बिल्कुल भी कोई कवर नहीं होने से बेहतर है। यदि आप 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा (health insurance) का प्रीमियम आप नहीं दे सकते हैं (afford नहीं कर सकते), तो 2 लाख रुपये के कवर के लिए जाएं| भविष्य में जब आपका आय में बढ़त हो  और आप में ज्यादा प्रीमियम का भुगतान करने का सामर्थ्य हो, तो तब आप आप कवर को बढ़ा सकते हैं।

#2 वार्षिक कटौती (Deductible) के लिए विकल्प

बीमाकर्ता केवल एक निश्चित सीमा तक अस्पताल के खर्चा देता है| आप एक सुपर टॉप-अप प्लान(super top-up plan) ले सकते हैं।

उदाहरण के तौर पर आइये एक प्राइवेट इंशोरेंस कंपनी के प्लान को देखते हैं।

एक परिवार 4 (40, 38, 10, 4) के लिए, 10 लाख रुपये के परिवार के फ्लोटर का प्रीमियम 27,436 रुपये है।

यदि आप 3 लाख रुपये का कटौती (deductible of Rs 3 lacs) करते हैं, तो प्रीमियम 16,463 रुपये है।

ध्यान रखें ऐसे विकल्प में आपको पहले 3 लाख रुपये अपनी जेब से देने होंगे|

मान लिए, हॉस्पिटल बिल 7 लाख रुपये का है, तो 3 लाख आप देंगे और बचे 4 लाख insurance कंपनी देगी|

5 लाख रुपये की कटौती (deductible of रस 5 lacs) के साथ, सालाना  प्रीमियम 13,71 9 रुपये है।

#3 सह भुगतान(co-payment) का विकल्प

आप बीमा खरीदी के समय लागत साझा करने का विकल्प भी चुन सकते हैं।

इसे कुछ इस तरह आप समझ सकते है मान लीजिये आपके health insurance plan में 20% सह-भुगतान (co-payment) है|

तो आपको बीमा कंपनी द्वारा स्वीकार किए गए मेडिकल बिल का 20% आपको देना होगा।

सह–भुगतान (co-payment) बीमा कंपनी को दो तरीकों से मदद करता है।

  1. आप इलाज में लगी कीमत में साझा (share) करते हैं|
  2. क्योंकि आप उपचार की लागत को साझा करते हैं, जाहिर सी बात है आप अपने इलाज़ का खर्चा कम से कम रखने की कोशिश करेंगे| इससे इंश्योरेंस कंपनी को भी आपके इलाज़ में कम खर्चा करना होगा|

इसी वजह से co-payment का चुनाव करने पर आपका प्रीमियम कमहो जाता है|

#4 मातृत्व (maternity benefit) लाभ से बचें

मातृत्व लाभ के तहत, बीमा कंपनी child delivery में होने वाले खर्चे को कुछ हद तक उठाती है।

एक तरह से मातृत्व लाभ बीमा के सिद्धांत के खिलाफ है| आमतौर पर बीमा कंपनी का खर्चा तब होता है जब की आपको नुकसान हुआ हो| जैसे की कोई बीमारी, एक्सीडेंट, मृत्यु आदि| परन्तु बच्चे का जन्म तो ख़ुशी की बात है|

जो लोग family planning के तहत बच्चे प्लान कर रहे हैं, उन मामलों में तो यह खर्चा आना ही है|

इसी वजह से मातृत्व लाभ के साथ योजना (health insurance plan with maternity benefit) काफी महंगी होती है|

निजी तौर पर, मैं 50,000 रुपये से कम होने वाले लाभ के लिए 15,000 रुपये प्रति वर्ष के अतिरिक्त प्रीमियम का तीन साल तक भुगतान नहीं करुगा|

आप भी maternity बेनिफिट वाले प्लान से बचें|

#5 परिवार फ्लोटर (family floater) और व्यक्तिगत योजना (individual plan) के बीच तय करें

Family Floater प्लान में पूरा परिवार k ही प्लान में कवर हो सकता है|

अगर आप individual प्लान लेते हैं, तो हर व्यक्ति के लिए नया प्लान लेना होगा|

ध्यान रखें की Family floater का प्रीमियम सबसे ज्यादा आयु वाले सदस्य की आयु पर निर्भर करता है|

इसीलिए Family floater  प्लान एक युवा परिवार के लिया अच्छा विकल्प है| प्रीमियम भी कम होगा|

परन्तु अगर आप 45 से ऊपर हैं, तो शायद बेहतर होगा की आप अपने लिए individual प्लान लें|

इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें|

#6 दूसरी बीमा कंपनी से health insurance खरीद सकते हैं

अगर आपकी वर्तमान बीमा योजना महंगी है, तो आप दूसरी बीमा कंपनी से बीमा ले सकते हैं|

नया बीमाकर्ता कम प्रीमियम पर कवर की पेशकश कर सकता है| और इससे आपका प्रीमियम कम हो सकता है|

अपनी पालिसी को port कर सकते हैं|

#7 2 साल के लिए प्रीमियम भुगतान करना

लगभग सभी बीमाकर्ता आपको आप दो या दो से अधिक वर्षों के लिए बीमा प्रीमियम का भुगतान पर 5% से 10% की छूट देते हैं ।

मान लिये10 लाख रुपये में एक Family floater का प्रीमियम 27,436 रुपए है।

यदि आप एक साथ दो साल का भुगतान करते हैं, तो आपको 52,641 रुपये का भुगतान करना होगा, जिसके परिणामस्वरूप 2,231 रुपये की बचत होगी।

#8 Hospital Cash या OPD सुविधाओं से बचें

ऐसी सुविधायों के कुछ ख़ास फायदा नहीं होता और बिना बात प्रीमियम बढ़ जाता है|

आपको क्या करना चाहिए?

हमने स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को कम करने के विभिन्न तरीकों पर ध्यान दिया|

ध्यान रखें हर तरीके में आपने कुछ लिया है तो कुछ दिया भी है|

प्रीमियम कम हुआ है, तो कहीं न कहीं आपकी coverage भी कम हुयी है|

निर्णय आपका हिया की आप क्या करना चाहते हैं|

Source: www.PersonalFinancePlan.in

Image Credit: Flickr

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10 ऐसे खर्चे जो आपका Health Insurance plan (स्वास्थ्य बीमा) कवर नहीं करता

by दीपेश 2 Comments

आजकल जहाँ हॉस्पिटल के बिल तेजी से बढ़ रहे हैं, हेल्थ  इंश्योरेंस (health insurance या स्वास्थ्य बीमा) प्लान की अहमियत को  समझना कोई मुश्किल काम नहीं है|परन्तु अगर आप समझते हैं की आपका health insurance प्लान (स्वास्थ्य बीमा) आपकी बीमारी का सारा खर्चा उठा लेगा, तो यह भी गलत होगा|

आपको  यह भी पता होना चाहिये कि आपका हेल्थ इंश्योरेंस कुछ  जगह (case) में आपका साथ छोड़ सकता है। जिसके कारण आपको अपनी खुद के जेब से पैसे देने पड़ेगे।

इसीलिए आपके लिए यह जानना बहुत जरुरी है की आप अपने insurance प्लान की कवरेज (coverage) को  समझें, जिससे बाद में आपको परेशानी ना हो ।

आइये देखते हैं की कब आपका health insurance प्लान आपका अस्पताल का सारा खर्चा नहीं उठाएगा|

#1 क्या आपने co-payment चुना है?

अगर ऐसा है तो आपको अपने हिस्से का भुगतान खुद करना होगा , कंपनी इसमे भागीदारी नहीं लेगी।

चलिए समझते है इसका गड़ित, यदि आपने 20 % का cop-ayemt का बिकल्प चुना है तो हॉस्पिटल बिल का 20℅ आपको भरना होगा ।

मान लिये आपके कवर १० लाख रूपए का है और आपका बिल 5 लाख रुपये का बनता है| इसके साथ आपके प्लान में 20% co-payment भी है| ऐसे केस में इंश्योरेंस कंपनी केवल 4 लाख रुपये का ही भुगतान करेगी| एक लाख रुपये आपको अपनी जेब से देने होंगे|

#2 क्या आपके प्लान में आपने deductible लिया है?

आईये उदाहरण से समझते है|

मान लीजिये आपने super top-up plan ख़रीदा है 10 लाख का और उसका साल का deductible 2 लाख रुपये है, तो पहले 2 लाख का खर्चा आपको अपनी जेब से देना होगा।

अगर आपका बिल 5 लाख का है, तो 2 लाख आप देंगे और 3 लाख इंश्योरेंस कंपनी देगी| उसी साल दोबारा भरती होते हैं और 3 लाख का बिल बनता है, तो सारा खर्चा इंश्योरंस कंपनी उठाएगी क्योंकि आप 2 लाख रुपये पहले ही दे चुके हैं|

#3 किसी प्रकार का excess, sub-limit के ऊपर ?

एक बहुत आसान उदाहरण देता हूँ| मान लिजिए आपका टोटल कवर 10 लाख का है और मोतियाबिंद के इलाज के लिए 25000 की sub limit है|

अगर आप cataract (मोतियाबिंद) का ऑपरेशन कराते हैं और बिल 60,000 का बनता है, तो इंश्योरंस कंपनी केवल 25,000 ही देगी|

#4 तय कमरे के किराये से ज्यादा खर्चा(room-rent sublimit)

यह समझना कभी कभी बहुत पेचिदा हो जाता है।

अस्पताल में कई तरह के कमरे होते हैं और सबका किराया अलग अलग होता है| आपकी इंश्योरेंस पालिसी में ऐसे दैनिक किराये (daily room rent) पर लिमिट होती है| कमाल की बात यह है की दूसरे खर्चे जैसे की सर्जरी,डॉक्टर परामर्श आदि सब कमरे के किराए पर निर्भर करते हैं| जितना महंगा कमरा, उतना महंगा इलाज़|

मान लिए आपकी पालिसी में यह लिमिट 5,000 रूपये है| पर आप अस्पताल में ऐसा कमरा चुनते है जिसका किराया दिन का 10,000 रुपये है| ऐसे केस में इंश्योरेंस कंपनी केवल आधा बिल ही देगी| यह कटौती केवल कमरे के किराए पर ही नहीं, बल्कि पूरे बिल पर लगेगी|

इस केस में मान लिए 5 लाख का बिल बना है, तो इंश्योरेंस कंपनी केवल 2.5 लाख रुपये ही देगी|

इस बारें में ज्यादा जान्ने के लिए आप, यह पोस्ट पढ़ सकते हैं|

#5 इंतजार अवधि (waiting period) ख़त्म होने से पहले एक मौजूदा बीमारी (pre-existing illness) का इलाज

आपको इस तरह के waiting period की जानकारी होनी चहिये| यह जानकारी आपकी policy contract में दी होती है। सस्ते प्लान का waiting period अधिक हो सकता है ।

#6 कुछ वर्षो के लिए विशिष्ट इलाज की लागत

आपके इंश्योरेंस प्लान खरीदने के कुछ साल तक कुछ common operation कवर नहीं होते| जैसे की किडनी/गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) में पत्थर, हर्निया, cataract आदि|

ऐसा न हो तो कुछ लोग ऐसे इलाज़ का खर्चा बचाने के लिए ही इंश्योरेंस लेंगे|

ध्यान रखें की इसका आपकी pre-existing illness से कोई सम्बन्ध नहीं है|

#7 पहले 30-90 दिनों में उपचार 

हर पालिसी में पहले 30-90 दिन कोई planned ट्रीटमेंट cover नहीं होता।

ध्यान रखें की किसी दुर्घटना के वजह से hospitalization और आपातकाल स्थिति इन 30-90 दिनों में भी कवर होती है।

#8 Permanent exclusions

HIV/aids , डेंटल या cosmetic ट्रीटमेन्ट आदि आपके हेल्थ insurance में कवर नहीं होता। ऐसे और भी इलाज़ हो सकते हैं| अपने पालिसी document को सही से पढ़े और समझें|

ध्यान रखें कॉस्मेटिक सर्जरी अथवा डेंटल ट्रीटमेंट किसी दुर्घटना के कारण हुआ तो कंपनी इसे कवर कर सकती है।

#9 विदेशों में उपचार

अधिकतर policy विदेशों में उपचार नहीं कवर करती। ये सभी प्लान भारत में होने वाले उपचार को ही कवर करते हैं ।

जो प्लान विदेश में उपचार को कवर करते हैं, वह काफी मेहेंगे हो सकते हैं|

#10 उपभोग्य (consumables)

आपके अंतिम अस्पताल के बिल में ऑपरेशन का खर्च, कमरे का किराया , दवाई इत्यादि ही नहीं होते| औए भी काफी सारी चीज़ें होती हैं| जैसे की खाने का बिल, diapers, बेबी फ़ूड, TV chargesम internet charges आदि| ऐसे खर्चे आपी इइंश्योरेंस कंपनी नहीं देगी|

यह सब खर्चे आसानी से आपे बिल का 8-10% हिस्सा बना सकते हैं| यह आपको अपनी जेब से ही देने होंगे और आपको इसके लिए तैयार रहना चाहिए|

आपको क्या करना चाहिए?

आपने बशर्ते health insurance ले लिया हो, पर आपको ऐसे खर्चो को ध्यान में रखना चाहिए जो की आपका प्लान कवर नहीं करता| और आपको ऐसे खर्चो के भुगतान के लिए हमेशा कुछ पैसा बचा के रखना चाहिए|

साथ ही साथ अपने इंश्योरेंस प्लान की coverage को समझें| अपने पालिसी document को अच्छे से पढ़े|

अगर कुछ इलाज़ या बिल का हिस्सा पालिसी के हिसाब से कवर नहीं होता, तो कंपनी उसे नहीं अदा करेगी| ऐसे केस में कंपनी से लड़ने में अपना समाया बर्बाद न करें|

अपने समय और उर्जा को बचाएँ उन मामलों के लिए जहाँ पर इंश्योरेंस कंपनी ने गलत फैसला लिया है|

साथ ही कुछ पैसा जमा कर के रखें मेडिकल आपातकालीन स्तिथियों के लिए और ऐसे खर्चों के लिए जो इंश्योरेंस कंपनी कवर नहीं करती|

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प्रधानमंत्री वय वंदना योजना की पूरी जानकारी (PMVVY in Hindi)

Last updated: अक्टूबर 10, 2018 | by दीपेश 17 Comments

भारत सरकार ने वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana या PMVVY) शुरू करी थी| PMVVY को शुरू करने की वजह थी वरिष्ठ नागरिकों को अपने निवेश पर अच्छा ब्याज मिले|

काफी लोग रिटायर होने के बाद अपने निवेश (investment) से मिलने वाले ब्याज से ही अपने सारे खर्चों का भुगतान करते हैं| परन्तु पिछले कुछ समय से ब्याज दरें नीचे जा रही हैं| इससे बुजुर्गों के बजट पर काफी असर पड़ता है|

सरकार ने इस परेशानी से कुछ राहत देने के लिए प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana or PMVVY) मई 2017 में शुरू करी| LIC ने PMVVY प्रोडक्ट लॉच किया है, जिसमें 10 वर्ष तक 8% का ब्याज मिलेगा|


प्रधानमंत्री वय वंदना योजना Pradhan Vaya Vandana Yojana (PMVVY in Hindi )

  1. न्यूनतम निवेश आयु (Minimum Entry Age) – 60 साल (complete)
  2. अधिकतम आयु (Maximum Entry Age) – कोई सीमा नहीं है
  3. पालिसी टर्म – 10 साल| इसका मतलब यह है की आपको 10 साल तक पेंशन मिलेगी।
  4. पेंशन Frequency: मासिक (monthly), तिमाही (quarterly), अर्धवार्षिक (Half-yearly) या वार्षिक (annual)| आप पेंशन भुगतान आवृत्ति (frequency) का चयन कर सकते हैं।
  5. न्यूनतम पेंशन (Minimum Pension): 1,000 रुपये प्रति माह,   3,000 रुपये  प्रति तिमाही ,   6,000 रुपये  प्रति अर्ध वर्ष ( 6 महीना) या  12,000 रुपये  प्रति वर्ष
  6. अधिकतम पेंशन (Maximum Pension): 5,000 प्रति माह, प्रति तिमाही रु 15,000, प्रति अर्धवर्ष  रु  30,000 या प्रति साल रु 60,000 
  7. अधिकतम पेंशन (Maximum Pension): 10,000 रुपये  प्रति माह,   30,000 रुपये प्रति तिमाही,  60,000 रुपये प्रति अर्धवर्ष  या  1.2 लाख रुपये प्रति वर्ष  (Updated on May 3, 2018)
  8. ब्याज दर: 8% p.a.
  9. अगर आप भुगतान की frequency वार्षिक चुनते है, तो आपको 8.3% p.a. तक का रिटर्न मिल सकता है|LIC PMVYY Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana PMVVY minimum पेंशन maximum पेंशन
  10. उदाहरण के लिए: अगर आप 1.5 लाख रुपये का निवेश करते हैं और monthly (मासिक) पेंशन चाहते हैं, तो आपको हर महीने 1,000 रुपये मिलेंगे| यानी की साल के 12,000 रुपये| परन्तु अगर आप वार्षिक पेंशन चाहते हैं, तो आपको हर वर्ष 12,450 रुपये मिलेंगे|
  11. PMVVY में अधिकतम निवेश बढ़कर अब 15 लाख रुपये हो गया है| (Updated on May 3, 2018)
  12. एक बात और, निवेश की यह सीमा प्रति वरिष्ठ नागरिक है (और न की प्रति परिवार)| इसका मतलब पति और पत्नी दोनों मिला कर 30 लाख रूपए तक निवेश कर सकते हैं|
  13. निवेश करने पर GST नहीं लगेगा| 
  14. 3 मई, 2018 31 मार्च 2020 तक योजना में निवेश कर सकते है| हो सकता है की उसके बाद भी इस स्कीम को बढ़ा दिया जाए पर interest rate अलग हो सकता है|
  15. पेंशन की राशि आपकी आयु पर निर्भर नहीं है|
  16. तीन साल के बाद आप 75 प्रतिशत राशि का लोन भी ले सकते हैं|
  17. आपको मिलने वाली पेंशन पर आपके टैक्स स्लैब से अनुसार टैक्स लगेगा|
  18. इस स्कीम में निवेश करने पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा|

आप LIC की website पर इस स्कीम के बारें में ज्यादा पढ़ सकते हैं|

*बजट 2018 में PMVVY में अधिकतम निवेश 7.5लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया गया| ऐसा होने पर आपकी अधिकतम मासिक आय 5,000 रुपये से बढ़कर 10,000 रुपये हो  गयी है| भी एलआईसी के वेबसाइट पर ऐसी कोई जानकारी नहीं है परन्तु कुछ समय में आ जानी चाहिए|


प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY): कितनी पेंशन मिलेगी?

यह समझना बहुत आसान है|

आपके हर 1,000 रुपये के निवेश पर:

  1. अगर वार्षिक पेंशन (annual pension) का विकल्प चुनते हैं, तो हर वर्ष 83 रुपये मिलेंगे|
  2. अगर अर्ध-वार्षिक पेंशन (half-yearly pension) का विकल्प चुनते हैं, तो हर 6 महीने पर 40.65 रुपये मिलेंगे| यानी वर्ष के 81.30 रुपये|
  3. अगर तिमाही पेंशन (quarterly pension) का विकल्प चुनते हैं, तो हर तिमाही 20.125 रुपये मिलेंगे| यानी की हर वर्ष 80.5 रुपये|
  4. अगर मासिक पेंशन (monthly pension) का विकल्प चुनते हैं, तो हर महीने 6.67 रुपये मिलेंगे| यानी की हर वर्ष 80 रुपये|

मान लिए आपने 2 लाख रुपये के PMVVY में निवेश किया और मासिक पेंशन का विकल्प चुना, ऐसे में आपको 2 लाख * 6.67/1,000 = 1,333 रुपये की मासिक पेंशन (monthly pension) मिलेगी|

अगर वार्षिक पेंशन का चुनाव किया होता, तो आपको 2 लाख * 83/1,000 = 16,600 रुपये की वार्षिक पेंशन मिलती|


प्रधानमंत्री वंदना योजना: मृत्यु (Death)लाभ और परिपक्वता(Maturity) लाभ

अगर पालिसी अवधि (10 साल) के दौरान पॉलिसी धारक की मृत्यु होने की स्थिति में, आपके nominee को निवेश राशि (बकाया ब्याज के साथ) वापिस कर दी जायेगी|

अगर पालिसी अवधि के दौरान निवेशक की मृत्यु नहीं होती, तो सारा पैसा निवेशक को ही लौटा दिया जाएगा|


प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) में असमय (premature) exit

यह इतना आसान नहीं है| आप अपनी मर्ज़ी से कभी भी पैसा नहीं निकाल सकते|

केवल यदि आपको अपने या अपने पति या पत्नी की किसी टर्मिनल/गंभीर बीमारी के इलाज के लिए पैसे की जरूरत है, तभी आप समय के पहले पैसे निकाल सकते है ।

इस केस में भी आप को 2% की पेनल्टी देनी होगी| और आपको 98% राशि वापिस कर दी जायेगी|


प्रधानमंत्री वय वंदना योजना: टैक्स बेनिफिट (PMVVY Tax Benefit)

PMVVY में निवेश करने पर सेक्शन 80C के तहत कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता|

साथ ही मिलने वाली पेंशन पर आपको अपने टैक्स ब्रैकेट के अनुसार टैक्स देना होगा|

मेच्योरिटी के समय आपको आपका निवेश लौटा दिया जाएगा, इस राशि पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा|


SCSS  VS  PMVVY 

अब अगर 60 साल के ऊपर की आयु के लोगों के लिए किसी निवेश की बात करें,  तो सबसे पहले वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (Senior Citizens Savings Scheme or SCSS) ध्यान में आती है|

इसलिए अगर PMVVY के बारे में बात कर रहे हैं, तो हम को PMVVY की तुलना SCSS से करनी ही चाहिए|

PMVVY 10 साल के लिए 8% की गारंटी वापसी प्रदान करता है| SCSS फिलहाल (8.3% p.a.) रिटर्न देता है परन्तु यह गारंटी केवल 5 साल के लिए है|

SCSS में आप 15 लाख रुपये तक निवेश कर सकते हैं| साथ ही आप अपने पति या पत्नी के नाम पर और 15 लाख रुपये निवेश कर सकते हैं| तो कुल मिला कर आप 30 लाख तक निवेश कर सकते हैं|

दूसरी ओर, PMVVY के साथ, आप पूरे परिवार के लिए अधिकतम रु 7.5 लाख ही निवेश कर सकते हैं।

PMVVY में जो निवेश की सीमा है, वह सीमा प्रति सीनियर सिटीजन है| पहले यह निवेश सीमा पूरे परिवार के लिए थी|

तो देखें तो, पति और पत्नी (अगर दोनों वरिष्ठ नागरिक हैं), तो कुल मिलाकर 30 लाख रुपये PMVVY में निवेश कर सकते हैं और 20,000 रुपये प्रति महीने की पेंशन पा सकते हैं|

PMVVY in hindi Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana vs Senior Citizen savings scheme SCSS प्रधानमंत्री वय वंदना योजना

PMVVY में समय से पहले पालिसी रोकने (सरेंडर) करने पर आपको केवल आपके निवेश का 98% ही वापिस मिलेगा| जैसे की ऊपर लिखा है की आप किसी गंभीर बीमारी की स्तिथि में ही PMVVY को बंद कर सकते हैं| परन्तु ऐसे में भी आपको केवल 98% राशि की वापिस मिलेगी| 

आप देख सकते हैं SCSS में निवेश करने पर टैक्स बेनिफिट भी मिलता है और पैसा निकालना भी आसान है| मेरे अनुसार SCSS PMVVY (Pradhan Vaya Vandana Yojana) से बेहतर स्कीम है|

पढ़ें: एलआईसी जीवन शांति (LIC Jeevan Shanti): LIC का नया पेंशन प्लान

पढें: वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (Senior Citizens Savings Scheme or SCSS) के बारें में पूरी जानकारी


क्या आपको PMVVY में निवेश करना चाहिए?

PMVVY की अच्छी बातें:

  1. PMVVY को समझना बहुत आसान है|
  2. आप 10 साल के लिए ब्याज दर में लॉक कर सकते हैं|
  3. प्रीमियम (खरीद मूल्य) पर निर्भर नहीं करता है। जो लोग 60 साल के आस पास की आयु के हैं उनके लिए अच्छा है| ऐसे लोगों को किसी और पेंशन प्लान में इतना ब्याज मिलना मुश्किल है|
  4. यदि आप एक बैंक सावधि जमा के साथ तुलना करें, तो आज की तारिख में एक फिक्स्ड डिपॉज़िट (fixed deposit) से बहुत बेहतर ब्याज पा सकते है|

PMVVY की कमियाँ:

  1. PMVVY एक वार्षिकी उत्पाद नहीं है। तो आप केवल दस साल के लिए ही interest rate लॉक कर सकते हैं| जब आपके 10 साल पूरे होंगे, तब आपको शायद इतना interest (ब्याज) न मिले|
  2. आप गंभीर बीमारियों के मामले को छोड़कर पैसे का उपयोग नहीं कर सकते हैं|
  3. अधिकतम 7.5 लाख रुपये तक ही निवेश कर सकते हैं| अभिकतम पेंशन 5,000 रुपये प्रतिमाह ही हो सकती है|
  4. अधिकतम 15 लाख रुपये तक ही निवेश कर सकते हैं| अधिकतम  पेंशन 10,000 रुपये प्रतिमाह ही हो सकती है| अगर पति/पत्नी को मिला लें, तो निवेश राशि और पेंशन दोगुनी हो जायेगी|
  5. आपको पेंशन पर टैक्स देना होगा|

अगर आप काफी वृद्ध (75 या ऊपर) आप एक तत्काल वार्षिकी योजना (immediate annuity) के साथ एक बेहतर आय (शायद 8% से ज्यादा रिटर्न) प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही पूरे जीवन के लिए interest rate लॉक कर सकते हैं|

PMVVY उन निवेशकों के लिए अच्छा है,  जो कम इनकम टैक्स ब्रैकेट में आते हैं और एक सरल उत्पाद के लिए देख रहे हैं|

याद रखें कि PMVVY एक आय उत्पाद (income product) है, जब तक आपको नियमित आय की जरूरत न हो तब तक इस उत्पाद में निवेश न करे।


प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) में निवेश कैसे करें?

आप निकटतम एलआईसी शाखा में जा कर निवेश कर सकते हैं|

अगर आप चाहें तो PMVVY में ऑनलाइन निवेश भी कर सकते हैं|

प्रधानमंत्री वय वंदना योजना में निवेश करने के लिए आप इस लिंक पर जाएँ|

सौजन्य: https://www.PersonalFinancePlan.in

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