• Skip to primary navigation
  • Skip to main content
  • Skip to primary sidebar

HindiFinance.com

आपका पर्सनल फाइनेंस ब्लॉग आसान हिंदी में




  • Life Insurance
  • Mutual Funds
  • Financial Planning
  • NPS
  • PPF
  • Tax Planning
  • Aadhaar
  • LIC
  • Loans

Financial Planning

Follow @hindifinance

GST से कितना असर पड़ेगा आपके इंश्योरेंस प्रीमियम (Insurance Premium) पर?

Last updated: जुलाई 15, 2017 | by दीपेश Leave a Comment

अगर आप 1 July, 2017 के बाद कोई नया इंश्योरेंस प्लान खरीदते है या फिर किसी पुरानी पालिसी के प्रीमियम का भुगतान करते हैं, तो आपको सर्विस टैक्स की जगह GST देना होगा|

सर्विस टैक्स 15% था और GST की दर इंश्योरेंस के लिए 18% है| तो आपके प्रीमियम में थोड़ी सी बढ़त होगी| इसके लिए  तैयार रहे|

प्रीमियम के किस हिस्से पर GST लगता है?

GST (या  उससे पहले सर्विस टैक्स) केवल उसी हिस्से पर लगता है, जो कि आपके जीवन बीमा की तरफ जाता है| जो हिस्सा इन्वेस्टमेंट (निवेश)  की तरफ जाता है, उस पर कोई GST (या सर्विस टैक्स) नही लगता|

टर्म इंश्योरेंस प्लान (Term Insurance plan)

टर्म इंश्योरेंस में कोई भी हिस्सा इन्वेस्टमेंट (निवेश) के लिए नहीं जाता, इस लिए पूरे प्रीमियम पर GST लगेगा|

पहले आपको 15% सर्विस टैक्स (service tax) देना पड़ता था, उसकी जगह अब आपको GST देना पड़ेगा|

तो अगर आपका बेस प्रीमियम 10,000 रुपये है, तो आपको 11,800 रुपये देना होगा| पहले आपको 11,500 रुपये देना होता था|

यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (Unit Linked Insurance Plan)

केवल उसी हिस्से पर GST देना होगा, जो की जीवन बीमा देने के लिए जाएगा| प्रीमियम के उस भाग को mortality charge कहते हैं|

तो आपको mortality charge पर GST देना होगा| ULIP में यह charge हर साल उम्र के साथ बढ़ता रहता है| इसके अलावा यह सबके लिए एक सामान नहीं होता|

पहले 15% सर्विस टैक्स  देना होता था, अब 18% GST देना होगा|

ट्रेडिशनल लाइफ इंश्योरेंस प्लान (Traditional Life Insurance Plan)

ट्रेडिशनल लाइफ इंश्योरेंस प्लान में इन्वेस्टमेंट और जीवन बीमा दोनों ही होते हैं| साथ-साथ यह पता करना भी मुश्किल होता है की प्रीमियम का कितना हिस्सा जीवन बीमा की ओर गया|

इसीलिए पहले साल आपके प्रीमियम के 25% पर GST (पहले सर्विस टैक्स) देना होता है| तो आपको प्रीमियम पर 4.5% GST (25%X18%) देना होगा| पहले आपको 3.75% (25%X 15%) देना होता था|

दूसरे साल से प्रीमियम (renewal premium) के 12.5% पर GST देना होगा| इसका मतलब प्रीमियम पर 2.25% GST देना होगा|

सिंगल प्रीमियम लाइफ इंश्योरेंस प्लान (Single Premium Life Insurance Plan)

आपको प्रीमियम के 10% हिस्से पर GST देना होगा|

इसका मतलब कुल प्रीमियम पर आपको 1.8% GST (10%X18%) देना होगा|

GST से पहले आपको कुल प्रीमियम का 1.5% सर्विस टैक्स देना होगा|

स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance)

पहले आपको base प्रीमियम पर 15% सर्विस टैक्स देना होता हा, अब आपको 18% GST देना होगा|

Impact of GST on life insurance premium

आप देख सकते हैं की GST की वजह से आपका लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरंस का प्रीमियम बढेगा|

अगर आपको यह पोस्ट अच्छी और लाभकारी लगी हो, तो अपने परिवार और मित्रों के साथ Facebook या Whatsapp पर अवश्य शेयर करें|

Filed Under: Financial Planning Tagged With: GST, GST on life insurance premium

आपको ब्याज (interest income) पर कितना टैक्स देना होता है?

by दीपेश Leave a Comment

अगर आप अपने investment से आने वाले ब्याज (interest) पर निर्भर है, तो आपके लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है की आपको उस ब्याज पर कितना टैक्स देना होगा|

अगर निर्भर नहीं भी हैं,  तब भी जानना ज़रूरी है क्योंकि टैक्स से आपके नेट रिटर्न पर असर पड़ता है|

और अगर आप अपने निवेश को बेचना चाहते हैं तो होने वाले मुनाफे पर भी टैक्स देना पड़ सकता है|

इस पोस्ट में मैं केवल आपको मिलने वाला ब्याज (interest) कैसे टैक्स होता है, उसी बात पर चर्चा करूँगा|

ब्याज पर आपको कितना टैक्स देना होता है? (How is Interest Income from Investments taxed?)

कुछ तरह के निवेश को बेहतर टैक्स ट्रीटमेंट मिलता है|

इस बात पर भी गौर करें  की कई बार आपको interest मिलने से पहले ही टैक्स काट लिया जाता है| इसे Tax Deduction at Source भी कहते हैं|

How is interest income taxed ब्याज पर आपको कितना टैक्स देना पड़ता है?

सौजन्य: www.PersonalFinancePlan.in

जहाँ भी आपको ब्याज़ (interest) पर टैक्स देना है, वहां पर आपको अपने टैक्स ब्रैकेट (tax slab) के अनुसार टैक्स देना होगा|

म्यूच्यूअल फण्ड (mutual fund) और NPS में कभी interest नहीं मिलता| यह निवेश फिक्स्ड रिटर्न नहीं देते| आपको market linked (मार्केट लिंक्ड) रिटर्न मिलते हैं|

जानिए: म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर कितना देना पड़ सकता है टैक्स?

जानिए: NPS से पैसा निकालने पर कितना टैक्स देना पड़ सकता है?

TDS कैसे बचा सकते हैं?

बैंक TDS तभी काटते है की जब आपकी interest income (ब्याज की आय) एक लिमिट से ज्यादा होती है| जैसे की बैंक FD पर तभी TDS काटते हैं, जबकि आपका बैंक में कुल FD का ब्याज उस वर्ष में 10,000 रुपये से ज्यादा हो जाए|

ध्यान रखें की TDS कटने से आपकी टैक्स liability ख़तम नहीं हो जाती| जैसे की, बैंक केवल ब्याज का 10% ही TDS काटेगा (PAN जमा न करने पर 20%)| पर अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट (tax slab) में हैं, तो बचा हुआ टैक्स आपको अलग से भरना होगा|

अगर किसी कारण ज्यादा TDS कट जाता है, तो आप income tax return भर कर अतिरिक्त टैक्स का रिफंड (refund) ले सकते हैं|

TDS बचाने का सवाल तभी उठता है की जब आपकी पूरे वर्ष की आय 2.5 लाख से कम हो| 60 वर्ष के ऊपर यह लिमिट 3 लाख और 80 साल के ऊपर 5 लाख रुपये हो जाती है|

अगर आपकी आय लिमिट से कम है, तो आप फॉर्म 15G/15H बैंक में जमा करके TDS कटने से बचा सकते हैं|

इस बारें में विस्तृत जानकारी के लिए आप इस पोस्ट को देख सकते हैं|

किताबों के सुझाव

रिच डैड पूअर डैड

रिटायर रिच: प्रतिदिन 40 रुपये का निवेश करें

Disclosure:मैं टैक्स विशेषज्ञ नहीं हूँ| कुछ भी निर्णय लेने से पहले Chartered Accountant की सलाह लें|

Filed Under: Financial Planning, Tax Planning Tagged With: financial Planning, tax on interest income, ब्याज पर टैक्स

अगर आप कर रहे हैं अपने करियर की शुरुआत, तो इन Financial Tips का रखें ख्याल

Last updated: जून 26, 2017 | by दीपेश Leave a Comment

अगर आपने अभी हाल में अपने करियर की शुरुआत करी हैं, तो ध्यान रखें इन फाइनेंसियल प्लानिंग (Financial Planning) टिप्स का| अमूमन लोग अपने करियर की शुरुआत 20 से 25 साल की उम्र में करते हैं|

अगर शुरू से ही कुछ बातों का ख्याल रखा जाए हो आप अपनी आर्थिक स्तिथि को बहुत मज़बूत कर सकते हैं| ध्यान रखें जो चीज़ें आप बार बार करते हैं, आपको उनकी आदत पड़ जाती है|

#1 निवेश जल्दी शुरू करें और Power of Compounding का फायदा उठाएं

इस बात की मैं एक पिछली पोस्ट में भी चर्चा कर चुका है| कई बार हम लोग यह सोच कर निवेश नहीं करते की कम राशि निवेश करने से कुछ नहीं होगा|

यह सोच गलत है| अगर आप जल्दी निवेश करना शुरू कर देंगे तो कम पैसा निवेश करने पर भी आप बड़ी राशि जमा कर सकते हैं|

करोड़पति बनने के लिए कितना करना होगा निवेश?

अगर आप 25 साल के हैं और हर महीने 500 रुपये जमा करते हैं, तो 10% रिटर्न पर आप 60 साल के होने तक आप 17 लाख रुपये जमा कर पाएंगे|

परन्तु अगर आप यह निवेश 35 वर्ष की आयु से शुरू करेंगे, तो आप केवल 6 लाख रुपये ही इकठ्ठे कर पायेंगे|

तो जल्दी निवेश करना शुरू करें|

मैं मानता हूँ की शुरुआत में salary कम होती है, इसीलिए ज़रूरी खर्चों के बात पैसा बचाना मुश्किल हो सकता है| पर कोशिश ज़रूर करें|

और अपनी आय बढाने की भी पूरी कोशिश करें|

#2 पहले निवेश करें, फिर खर्च करें

काफी लोगों की प्रवत्ति होती है की वह सारे खर्चे करने का बात जो बचता है, उससे निवेश करते हैं|

और खर्चे कभी ख़तम नहीं होते| खासकर जब आप नया नया कमाना शुरू करते हैं, तो हमेशा कुछ न कुछ लेने का मन लगा रहता है|

आनंद लेना गलत नहीं है| पर एक सीमा में ही करें|

इसीलिए बेहतर होगा की अपनी आय (salary) का कुछ हिस्सा निवेश के लिए पहले ही निकाल दें, उसके बाद जो बचे उसे आप आराम से खर्च कर सकते हैं|

कितना हिस्सा बचाना है, वह आपके Financial Goals पर निर्भर करता है|

इससे आपके आर्थिक जीवन में अनुशासन भी आएगा|

आप mutual fund SIP या फिर recurring deposit (RD) के द्वारा यह कर सकते हैं|

#3 स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) ज़रूर लें

जब आप जवान होते हैं या फिर आपने कभी कोई लम्बी बिमारी का सामना नहीं किया होता, तो आपको लगता है की आपको कुछ नहीं हो सकता|

में मानता हूँ की कम आयु में बीमार पड़ने की संभावना कम होती है, पर ऐसा नहीं की आप बीमार नहीं पड़ सकते| Accident तो किसी का भी हो सकता है|

ऐसे मामले में आपको अस्पाताल में भरती होना पड़ सकता है|

इसका खर्चा कौन उठाएगा?

अगर आपने स्वाथ्य बीमा (Health Insurance) नहीं लिया है, तो आपको सारा बिल अपनी जेब से भरना होगा| आपकी सारी प्लानिंग चौपट हो सकती है|

इसीलिए स्वास्थ्य बीमा ज़रूर कराएं|

कम आयु में लेने पर आपका प्रीमियम भी कम होगा|

#4 जीवन बिमा (Life Insurance) भी खरीदें

हो सकता है की जब आप अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं, तो आपको जीवन बिमा की ज़रुरत न हो क्योंकि (हो सकता है) आपके ऊपर कोई भी निर्भर नहीं है| तब भी इस बारे में सोचें ज़रूर|

अगर आपके ऊपर कोई आर्थिक रूप से निर्भर करता है, तब तो जीवन बिमा लेना ही चाहिए|

ध्यान रखें अगर आप कम आयु में नहीं खरीदते और आपको कोई बीमारी हो जाती है, तो उसके बाद जीवन बीमा खरीदने में परेशानी हो सकती है|

 

#5 इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को अलग रखें

यह बहुत ज़रूरी है|

मैंने बहुत से लोगों को साल के आखिर में टैक्स बचाने के लिए इंश्योरेंस प्लान खरीदते हुए देखा है|

ऐसे प्लान्स जीवन बीमा के साथ-साथ इन्वेस्टमेंट का बेनिफिट भी देते हैं| परन्तु ऐसा करना सही सोच नहीं है| मैंने इस बारे में एक पोस्ट में चर्चा करी है| किस प्रकार का जीवन बीमा लें?

खासकर ट्रेडिशनल लाइफ इंश्योरेंस प्लान  (या endowment plan) आपको कम जीवन बीमा देते हैं और रिटर्न भी कम देते हैं| इनसे बचें|

Term लाइफ इंश्योरेंस ले और बचे हुए पैसे को निवेश करें|

#6 आपातकाल (emergency) के लिए कुछ पैसा बचाएं

आपको पता नहीं कब क्या हो जाए| आपकी नौकरी में परेशानी आ सकती है, घर-परिवार में किसी के इलाज का खर्चा या फिर किस मित्र या परिवारजन को आर्थिक मदद करनी पड़ सकती है|

इन सभी के लिए थोडा सा पैसा अलग से निकाल कर रखें जिससे की आपको ज़रुरत पड़ने पर अपने दूसरे investment न तोड़ने पड़ें|

#7 बेवजह लोन न लें| Credit Card का सही इस्तेमाल करें|

आप अगर Credit Card का सही इस्तेमाल करें तो काफी फ़ायदे हैं| आपका credit score अच्छा होता है| इससे आपको बाद में घर या कार के लिए लोन लेने में आसानी होगी|

परन्तु credit card का अगर लापरवाही से इस्तेमाल करेंगे तो बड़ी समस्या हो सकती है| क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दर (interest rate) बहुत ज्यादा होती है| अगर आप समय पर अपने बिल का भुगतान नहीं करेंगे तो काफी महंगा रहेगा|

आजकल आप सभी चीज़ें EMI पर या पर्सनल लोन लेकर खरीद सकते हैं, परन्तु आपको अपने आर्थिक सामर्थ्य को भी ध्यान में रखना चाहिए|

एक संतुलन बनाएं|

#8 कम अवधि के लिए Debt में और लम्बी अवधि के लिए Equity में निवेश करें

मैंने कई बार देखा है की लोग 6 महीने के लिए ही equity mutual funds में निवेश करने के लिए आतुर रहते है| यह तब होता है की जब शेयर बाज़ार अच्छा कर रहा होता है| पर यह सही नहीं है| ऐसे लोग risk को नज़रअंदाज़ कर रहे है|

ध्यान रखें की अगर आप कम अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं तो debt प्रोडक्ट्स में करें| जैसे की fixed deposit, recurring deposits या चुनिन्दा debt mutual funds.

जब आप लम्बी अवधि (कम से कम 7 से 10 साल) के लिए निवेश कर रहे हैं, तो equity mutual funds में निवेश कर सकते हैं| आप SIP (Systematic Investment Plan) के द्वारा ही निवेश करें| PPF में भी निवेश शुरू कर सकते हैं|

इस बात पर गौर करें की यह एक सामान्य सुझाव है और कोई आपके लिए specific advice नहीं है|

#9 जल्दबाज़ी में निर्णय ना लें| हर चीज़ के लिए प्लान करें

जल्दी का काम शैतान का|

मेरा अनुभव है काफी लोग फरवरी-मार्च के महीने में टैक्स बचाने के लिए उलटे-पुल्टे निवेश कर देते हैं| फिर बादमें पछताते हैं |उनके पास product को समझने का समय ही नहीं होता| इसीलिए गलती हो जाती है|

इसीलिए आपके लिए ज़रूर है की आप जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें| अपने investment को प्लान करें और सोच-समझकर ही निर्णय लें|

साल की शुरुआत से ही इस बारें में सोचें|

केवल टैक्स बचाने के लिए निवेश न करें|

#10 स्टॉक टिप्स से बचें

अगर आपको पैसे डुबाने हैं तो stock टिप्स पर शेयर खरीदना सबसे आसान और तेज़ तरीका है| स्टॉक मार्केट में पैसा कमाने का कोई शोर्ट कट नहीं होता| बहुत मेहनत करनी पड़ती है| ऐसी बेवकूफियों से बचें|

किताबों के सुझाव

रिच डैड पूअर डैड

रिटायर रिच: प्रतिदिन 40 रुपये का निवेश करें

चित्र सौजन्य: Pixabay

 

Filed Under: Financial Planning Tagged With: financial Planning, Financial planning tips

Mutual Fund SIP क्या है? म्यूच्यूअल फण्ड सिप के क्या फ़ायदे है? (SIP in Hindi)

Last updated: अगस्त 2, 2018 | by दीपेश 2 Comments

पिछले कुछ समय से निवेशकों के रुझान म्यूच्यूअल फण्ड सिप (Mutual Fund SIP) की तरफ काफी बढ़ा हैं|

यहाँ तक की कुछ लोग SIP को ही एक तरह का म्यूच्यूअल फण्ड मानते हैं और सिप म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में जानना चाहते हैं|

क्या आपको सिप या एसआईपी के बारे में पूरी जानकारी है?

इस पोस्ट में आईये जानते हैं:

  1. म्यूच्यूअल फण्ड सिप क्या है? 
  2. म्यूच्यूअल फण्ड सिप कैसे काम करती है?
  3. म्यूच्यूअल फण्ड सिप के क्या फायदे हैं?
  4. म्यूच्यूअल फण्ड सिप से क्या मिथ्याएं या ग़लतफ़हमियों जुड़ी हुई हैं?

SIP के बारे में जानने से पहले अगर आप यह जानना चाहते हैं की म्यूच्यूअल फण्ड क्या होते हैं, तो आप यह पोस्ट (म्यूच्यूअल फण्ड क्या हैं? Mutual Fund in Hindi) अवश्य पढ़ें|


म्यूच्यूअल फण्ड सिप क्या है?  (Mutual Fund SIP in Hindi)

SIP म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने का एक तरीका है| आप एक मुश्त पैसा निवेश करने की बजाय  धीरे-धीरे नियमित तौर पर पैसा निवेश करते हैं|

SIP (सिप) का मतलब है सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (Systematic Investment Plan)

आसान शब्दों में इसका मतलब यह हैं की नियमित तौर पर आपका पैसा (अपने आप) म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश होता रहता है|

इसका मतलब, हर महीने कुछ पैसा अपने आप (automatically) आपके बैंक खाते से निकल कर म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश हो जाता है|


म्यूच्यूअल फण्ड SIP के क्या फ़ायदे हैं? (Benefits of SIP in Hindi)

#1 SIP के द्वारा एक निवेश का अनुशासन बना रहता है| और अनुशासन निवेश में सफलता के लिए बहुत ज़रूरी है|

#2 आपको शेयर बाज़ार को टाइम करने की कोई ज़रुरत नहीं है| शेयर बाज़ार  के उतार-चढ़ाव मे आपको Rupee cost Averaging का फायदा भी मिलता है|

जब स्टॉक मार्केट (stock market) गिरता है, तो आपको ज्यादा म्यूच्यूअल फण्ड units मिलती हैं और जब शेयर बाज़ार बढ़ता है, आपको कम यूनिट्स मिलती हैं| इस तरीके से आपके खरीदने के मूल्य  average (औसत) हो जाता है|

आइये एक उदाहरण के मदद से समझते हैं|

मान लिए की आप एक इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड  में 5,000 रुपये की सिप शुरू करी है|

ध्यान दें, अमूमन आप 500 रुपये प्रति माह से म्यूच्यूअल फण्ड सिप शुरू कर सकते हैं| आमतौर पर सिप द्वारा निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं होती|

SIP की किश्त (installment) आपके बैंक account से महीने की 15 तारिख को कटती है|

mutual fund SIP in hindi म्यूच्यूअल फण्ड सिप क्या है benefits फायदे

आप देख सकते हैं की Mutual Fund का NAV उस साल में 85 से 150 के बीच में रहा| पर आपका औसत खरीद मूल्य (average purchase price )117 रुपये के आस पास रहा| जब शेयर बाज़ार गिरा, तब आप उसी पैसे में (5,000 रुपये) में ज्यादा यूनिट्स खरीद पाए|

#3 SIP के द्वारा निवेश करने पर आप बहुत ऊंचे दाम पर सारा निवेश करने से बच जाते हैं|

ध्यान रखें मैंने अपनी बात समझाने की लिए यह उदाहरण चुना है| जरूरी नहीं है की शेयर बाज़ार  इसी तरह ऊपर नीचे हो|

#4 धीरे-धीरे पैसा इकठ्ठा होता रहता है और बड़ी राशि बन जाती है

ज़्यादातर लोग एक मुश्त पैसा नहीं निवेश कर सकते| परन्तु म्यूच्यूअल फण्ड सिप की सहायता से आप धीरे-धीरे बहुत सारा पैसा जमा कर सकते हैं|

एक उदहारण लेते हैं|

अगर आप हर महीने 1,000 रुपये जमा करते हैं और आपको निवेश पर 10% रिटर्न मिलता है, तो 20 साल में आपके पास 7.23 लाख रुपये जमा हो जायेंगे| 30 साल में 20.7 लाख रुपये जमा हो जायेंगे|

यहीं आपको अगर 12% रिटर्न मिलता, तो 20 साल में 9.19 लाख और 30 साल में 30.8 लाख रुपये जमा हो जायेंगे| 

आप देख सकते हैं की केवल 1,000 रुपये प्रति माह निवेश करने से कितना पैसा इकठ्ठा हो सकता है|

यह तो हो गए SIP के फ़ायदे|

मेरे अनुसार एक आम निवेशक के लिए म्यूच्यूअल फण्ड SIP इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने का सबसे अच्छा (बेस्ट) तरीका है| 

परन्तु मेरे हिसाब से लोगों को SIP के बारे में कुछ ग़लतफ़हमियाँ (मिथ्याएं) भी है|

आइये जानते हैं उनके बारे में|

म्यूच्यूअल फण्ड सिप से जुड़ी ग़लतफ़हमियाँ  या मिथ्याएं (Myths about Mutual Fund SIP)

#1 Mutual Fund SIP अपने आप में एक निवेश है|

बहुत से लोग पूछते हैं की कौन से SIP में निवेश चाहिए? या फिर कौनसा बेस्ट सिप प्लान है? यह सब सवाल बेमानी हैं|

म्यूच्यूअल फण्ड SIP केवल निवेश का तरीका है| निवेश आप किसी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम में ही करते हैं|

आप बिना SIP के भी म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश कर सकते हैं|

आप एकमुश्त पैसा लगा सकते हैं|

आप चाहें तो हर महीने की तय तारिख को खुद से किसी स्कीम में निवेश कर सकते हैं|

तो, पहले आपको म्यूच्यूअल फण्ड का चुनाव करना होता है, उसके बाद आप उस फण्ड में सिप चालू कर सकते हैं|

#2 Mutual Fund सिप द्वारा निवेश करने पर नुक्सान नहीं हो सकता

बहुत सारे निवेशकों लो लगता हैं की SIP द्वारा निवेश करने पर उनको नुकसान नहीं हो सकता|

ऐसी सोच एक बड़ी समस्या है| म्यूच्यूअल फण्ड सिप कोई जादू की छड़ी नहीं है|

किसी भी निवेश या बिज़नेस में मुनाफे या नुकसान की एक ही परिभाषा है|

अगर आपका बेचने का दाम खरीदने के दाम से ज्यादा है, तो आपको मुनाफा होता है|

अन्यथा अगर आपका बेचने का दाम खरीदने के दाम से कम है, तो आपको नुकसान होता है|

तो अगर आपको आपके SIP द्वारा किये गए निवेश से फायदा होना हैं, तो बेचते समय जो वैल्यू है, वह आपके खरीद के औसत मूल्य (price) से ज्यादा होना चाहिए|

SIP की सफलता इस आधार पर निर्भर है की शेयर बाज़ार  लम्बी अवधि   (long term) में अच्छा प्रदर्शन करते हैं| तभी आपका खरीदने का औसत cost आपके बेचने के price से कम होगी|

परन्तु इस बात की कोई गारंटी नहीं है|

हो सकता जब बेचने की बारी आये, तो शेयर बाज़ार  काफी गिर गए हो| ऐसे स्तिथि में  आपको नुकसान भी उठाना पड़ सकता है|

तो सिप द्वारा निवेश करने से पहले यह बात अवश्य सोच ले| SIP द्वारा निवेश करने में भी रिस्क होता है|

#3 सिप द्वारा निवेश करने से आपका रिस्क (Risk) कम हो जाता है|

सिप से आपको केवल Rupee Cost Averaging का बेनेफिट मिलता है| और कुछ नहीं|

ऊपर का उदाहरण देखें तो आपका Average cost (औसत मूल्य) 117 रुपये थी|

अब मान लीजिये  कोई व्यक्ति 60,000 रुपये उस दिन म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करता है जिस दिन उस स्कीम का  NAV 117 रुपये हो|

आप दोनों ने 60,000 रुपये निवेश किये हैं और दोनों का औसत खरीद मूल्य (average purchase price) 117 रुपये है|

तो क्या आपका Risk एक समान नहीं होगा?

#4 किसी भी म्यूच्यूअल फण्ड में सिप चला सकते हैं|

ज़रूर चला सकते हैं|

परन्तु SIP चलाने के लिए यह बहुत ज़रूरी है, की आप सही म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम का चयन करें| केवल सिप द्वारा निवेश करने से सब कुछ नहीं हो जाएगा|

एक स्कीम मान लिए 6% रिटर्न दती है और दूसरी 10%| अगर आप 5,000 रुपये की सिप करते हैं, तो 10 साल बाद जमा राशि में 3 लाख रुपये का अंतर होगा| तो सही म्यूच्यूअल फण्ड का चुनाव करना भी बहुत ज़रूरी है|

यह एक अलग बात है की यह पता करना बहुत मुश्किल है की कौनसी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम अगले दस साल में  सबसे  अच्छा करेगी|

लेकिन आप नियमित तौर पर अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा (review) करें| और अगर आपका फण्ड अच्छा परफॉरमेंस नहीं दे रहा, तो उस फण्ड में SIP रोक कर किसी दूसरे फण्ड में शुरू करें|

साथ ही अगर आप डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड (Debt Mutual Fund) में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो आप एक मुश्त भी निवेश कर सकते हैं| SIP द्वारा निवेश करने से कुछ ख़ास फायदा नहीं होगा|

#5 आपके निवेश की तारीख सिप शुरू होने की तारीख है|

काफी लोग यही सोचते हैं, जो की गलत है|

जैसा की हमें पहले देखा की सिप केवल निवेश करने का तरीका है|

इसीलिए SIP की हर किश्त एक नया निवेश है| अगर आपको lock-in period, exit load या capital gains tax का सही आंकलन करना है, तो इस बात का ज़रूर ध्यान रखें|

खासकर ELSS mutual funds में| ईएलएसएस फण्ड (ELSS)  टैक्स सेविंग फण्ड होते हैं और तीन साल का लॉक-इन होता है|

अगर आप सिप द्वारा ELSS में निवेश कर रहे हैं तो ध्यान रखें की सिप की हर किश्त एक नया निवेश है|

जो units आपने 15 जनवरी 2017 की किश्त से खरीदीं हैं, वो units आप 15 जनवरी 2020 से पहले नहीं बेच सकते|

जो units आपने 15 अप्रैल 2017 की किश्त से खरीदीं हैं, वो units आप 15 अप्रैल 2020 से पहले नहीं बेच सकते|

पढ़ें: जानिये ईएलएसएस  (ELSS) के बारें में कुछ दिलचस्प बातें

इस पोस्ट में हमने देखे SIP द्वारा निवेश करने के कुछ फ़ायदे और मिथ्याएं|

मेरे अनुसार  SIP निवेशकों  (retail investors) के लिए equity mutual funds में निवेश करने का सबसे अच्छा तरीका है| पर ध्यान रखें SIP कोई जादू की छड़ी नहीं है|

म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में अन्य पोस्ट

अगर पहली बार कर रहे हैं निवेश, तो म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश कैसे शुरू करें?

म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करते समय इन गलतियों से बचें

म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान (Direct Plan) क्या हैं, क्या हैं फायदे और कैसे करें निवेश?

म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर कितना टैक्स देना पड़ता है?

Filed Under: Financial Planning, Mutual Funds Tagged With: mutual fund SIP, mutual fund SIP in hindi, Systematic investment plan, म्यूच्यूअल फण्ड एसआईपी, म्यूच्यूअल फण्ड सिप, म्यूच्यूअल फण्ड सिप क्या है, सिप म्यूच्यूअल फण्ड

NPS से पैसा निकालते समय कितना टैक्स देना होता है? (NPS Tax Treatment on Maturity)

Last updated: जून 29, 2019 | by दीपेश 14 Comments

हमनें  एक पोस्ट में देखा था की NPS में invest करने के क्या tax benefits हैं|

जानिये NPS Tax Benefits के बारे में|

अब पैसा निवेश किया है तो कभी न कभी उसे निकालना भी होगा|

इस पोस्ट में यह जानते हैं की NPS से exit (पैसा निकलने) पर आपको कितना टैक्स देना होगा|

NPS की maturity (exit) के क्या नियम हैं?

यदि आप सरकारी कर्मचारी (Government Employee) हैं और आपने Government-NPS में निवेश किया हुआ है, तो आपको 60 साल की उम्र या सुपर-एनुयेशन (super-annuation) पर NPS से निकलना (exit करना) होगा|

अगर आपने All-Citizen Model NPS में निवेश किया है, तो आप 60 साल की आयु पर NPS से निकल सकते हैं| परन्तु अगर आप चाहें तो 70 साल की उम्र तक NPS में निवेश कर सकते है|

NPS से exit के समय कितना पैसा निकाल सकते हैं?

  1. कम से कम जमा राशि के 40 प्रतिशत (40% हिस्से) से Annuity (एन्युटी या वार्षिकी) खरीदनी पड़ेगी| ध्यान रखें उससे ज्यादा की भी खरीद सकते हैं| आप 40%-100% तक के अपने balance (जमा राशि) से Annuity खरीद सकते हैं| आप चाहें तो तीन साल तक NPS से एन्युटी (annuity) खरीदना ताल सकते हैं|
  2. आप 60% (साठ प्रतिशत) तक राशि एक मुश्त (lumpsum) भी निकल सकते हैं| आपको सारी राशि एक बार में निकालने की ज़रुरत नहीं है| आप चाहें तो यह राशि 70 साल की उम्र तक 10 सालाना किश्तों (annual installments) में भी निकाल सकते हैं|

मान लीजिये आपके रिटायर होने तक आपने 50 लाख रुपये अपने NPS Tier I account में जमा कर लिए हैं| ऐसे में आपको कम से कम 20 लाख रुपये से Annuity प्लान खरीदना होगा| आप चाहें तो सारी जमा राशि Annuity प्लान खरीदने की लिए इस्तेमाल कर सकते हैं|

बची राशि को आप lumpsum निकाल सकते हैं|

NPS Tax Treatment on Maturity

Lumpsum (एक मुश्त) पैसा निकालने पर कितना टैक्स देना होगा?

जैसे की ऊपर बताया गया है, आप 60% तक राशि एक मुश्त निकाल सकते हैं|

इस राशि पर आपको कोई भी टैक्स नहीं देना होगा| Lumpsum Withdrawal from NPS at retirement exempt from income tax.

यह नियम December 2018 में भारत सरकार द्वारा लाया गया है| मेरे अनुसार यह नियम 1 अप्रैल 2019 से लागू होगा|

ऊपर वाले उदाहरण को जारी रखें तो 50 लाख जमा राशि में से 20 लाख से एन्युटी प्लान खरीदा| बचे 30 लाख रुपये को आप एक मुश्त निकाल सकते हैं और उस राशि पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा|

तो कुल जमा राशि का चालीस प्रतिशत (40%) हिस्सा ही टैक्स-फ्री होगा| अगर 40% से ज्यादा पैसा lumpsum (एक मुश्त) निकाला, तो बची हुई राशि (40% के ऊपर) पर आपको टैक्स देना होगा|

ध्यान दें की हालांकि आप 60 प्रतिशत तक lumpsum (एकमुश्त) निकाल सकते हैं, केवल 40% तक की राशि पर टैक्स नहीं लगेगा|

अगर 40% से अधिक निकालेंगे, तो आपको अपने टैक्स ब्रैकेट के हिसाब से टैक्स भरना होगा|

जैसा की ऊपर चर्चा करी की आप यह पैसा 10 सालाना किश्तों (annual installments) में निकाल सकते हैं| तो अपनी टैक्स का भार (tax liability) कम करने के किये आप NPS से अपने withdrawal को कई सालों में फ़ेला सकते हैं|

ऊपर वाले उदाहरण को जारी रखें तो 50 लाख जमा राशि में से 20 लाख से एन्युटी प्लान खरीदा| बचे 30 लाख में से 20 लाख को lumpsum withdraw (निकाल) लिया| क्योंकि 40% तक lumpsum withdrawal टैक्स फ्री है, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा|

अब बचे 10 लाख रुपये|

इसी बची रकम (10 लाख रुपये) को अगले 10 सालों में आप धीरे-धीरे करके निकाल सकते हैं| क्योंकि कम राशि बची है तो टैक्स भी कम देना होगा|

तो आप NPS से समझदारी से पैसे निकालते हैं, तो आप अपने tax liability (टैक्स भार) को काफी कम सकते हैं|

ध्यान दें, आप चाहें तो इस बचे पैसे (10 लाख रुपये) को एक बार में भी निकाल सकते हैं| परन्तु आप टैक्स ज्यादा देना पड़ सकता है|

NPS में निवेश पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट और NPS से पैसा निकालते समय कितना टैक्स देना होगा, इस बारे में विस्तृत जानकारी के लिए इस Youtube video को भी देखें|

Annuity से हुई कमाई पर आपको टैक्स देना होता है

पहले जानते हैं एन्युटी (Annuity) क्या होती है?

Annuity खरीदने के लिए आप एक इंश्योरंस कंपनी के पास जाते हैं और उसे एकमुश्त रकम (lumpsum amount) देते हैं| इसके बदले में इंश्योरंस कंपनी आपको आपकी पूरी ज़िन्दगी हर महीने आपको कुछ राशि देती है|

LIC जीवन अक्षय  या LIC Jeevan Shanti एन्युटी प्लान का एक उदहारण है

आपकी मृत्यु के बाद यह राशि आपके पति या पत्नी को भी मिल सकती है|

हर महीने कितना amount मिलेगा, यह निर्भर करता है की आपने कैसा annuity प्लान लिया है और उस समय interest rate क्या चल रहे हैं|

मान लिए की आप १० लाख रुपये का Annuity प्लान खरीदते हैं और उस समय annuity rate 6% चल रहा है|

इसका मतलब की आपको हर साल 60,000 रुपये (10 लाख X 6%) मिलेंगे, यानी की हर महीने 5 हज़ार रुपये मिलेंगे|

Annuity plan से मिली किसी भी राशि (आय) पर आपको अपने टैक्स bracket के अनुसार टैक्स देना होगा|

पढ़ें: NPS Tax Benefits and Tax Treatment at Maturity

अगर 60 साल से पहले NPS से निकले तो

अगर आप NPS से premature exit (रिटायरमेंट या 60 साल का होने से पहले) करते हैं, तो आपको कम से कम 80% जमा राशि (80% of accumulated corpus) से Annuity प्लान खरीदना होगा|

केवल 20% राशि ही lumpsum निकाल सकते हैं|

Annuity से हुई कमाई तो आपके टैक्स bracket ही हिसाब से टैक्स होगी|

जो भी पैसा आप एक मुश्त निकालेंगे, वह टैक्स फ्री होगा (क्योंकि आप केवल 20% तक निकाल सकते हैं और टैक्स छूट 40% तक राशि पर है)|

पढ़ें: NPS vs PPF: NPS और PPF में कौन है बेहतर?

Filed Under: Financial Planning, NPS, Tax Planning Tagged With: NPS Tax benefits, NPS Tax on maturity

PPF account मेच्योर होने पर क्या हैं आपके विकल्प?

by दीपेश 6 Comments

हम सभी जानते हैं की PPF account 15 साल बाद मेच्योर (Mature) होता है|

दरअसल, आपका PPF account आपने जिस वित्तीय वर्ष (Financial year) में खोला है, उस वित्तीय वर्ष के ख़तम ने के 15 साल बाद मेच्योर होता है|

मान लीजिये आपने अपना PPF account 10 जुलाई, 2012 को खोला| कह Financial year मार्च 31, 2013 को ख़तम होगा. और आपका PPF account March 31, 2028 को मेच्योर होगा|

आप चाहें तो अपना सारे पैसा निकाल कर PPF account बंद कर सकते हैं|

लेकिन इसका मतलब यह नहीं की आपको 15 साल बाद अपना PPF account बंद करना होगा|

आप चाहें तो अपने PPF account को 5 साल के blocks में extend कर सकते हैं| जैसे की 20 साल, 25 साल, 30 साल etc.

और यह आप कितनी बार भी कर सकते हैं|

15 साल पूरे होने पर 5 साल के लिए कर सकते हैं| फिर जब 20 साल हो जायेंगे तो और 5 साल के लिए कर सकते हैं| इसी तरह आप जब तक चाहें, अपने PPF account की अवधी बढ़ाते रह सकते हैं|

PPF account की अवधी कैसे बाधाएं? (How to extend PPF account on maturity?)

PPF account की अवधि बढ़ने के दो तरीकें हैं|

  1. With Contribution (आप निवेश करते रह सकते हैं)
  2. Without Contribution (आप और निवेश नहीं कर सकते)

जब आप PPF account extend करते हैं (अवधि बढ़ाते हैं), तो आप साल में एक बार अपने PPF account में से पैसे निकाल सकते हैं|

Extension of PPF Account (with Contribution)

ऐसा करने पर आप अगले पांच सालों में account extend करते समय अपने PPF account में जमा राशि का 60% प्रतिशत तक हिस्सा निकाल सकते हैं|

निकालना ज़रूरी नहीं है|

ध्यान रखें आप एक साल में केवल एक बार ही निकाल सकते हैं| तो अगले पांच सालों में आप अधिकतम पांच बार ही पैसे निकल सकते हैं|

परन्तु कुल मिलाकर आप 60% (PPF account करते समय जमा राशि) तक ही निकाल सकते हैं|

एक बात का ध्यान रखें|

ऐसा (with Contribution mode में extend करने के लिए) करने की लिए आपको PPF account मेच्योर होने के एक साल के भीतर एक फॉर्म भर कर with Contribution mode में extend करना होगा|

ऐसा न करने पर, आपका PPF account खुद ब खुद (automatically) Without Contribution mode में extend कर दिया जाएगा|

और एक बार आपका account Without Contribution mode में extend हो गया, तो फिर आप कभी भी उसे With Contribution में extend नहीं कर सकते|

Extension of PPF Account (without Contribution)

यह default option है|

अगर आप PPF account मेच्योर होने के एक साल के भीतर न तो account को बंद करते हैं और न ही उसे With Contribution mode में extend करते हैं, तो आपका PPF account automatically Without Contribution mode में extend हो जायगा|

यहाँ आप कुछ निवेश नहीं कर पायेंगे|

परन्तु इस केस में आपके ऊपर पैसा निकलने में कोई बाधा नहीं है|

आप चाहें तो एक बार में सारा पैसा निकाल सकते हैं|

बस एक रोक है, की आप एक साल में केवल एक बार निकाल सकते हैं|

आपको अपने PPF account में balance पर ब्याज (interest) मिलता रहेगा|

तो PPF account मेच्योर होने पर, अपनी ज़रुरत के हिसाब से फैसला करें की आपको क्या करना चाहिए|

Filed Under: Financial Planning, PPF Tagged With: extension of PPF account, PPF account

  • « Go to Previous Page
  • Page 1
  • Interim pages omitted …
  • Page 11
  • Page 12
  • Page 13
  • Page 14
  • Go to Next Page »

Primary Sidebar

HindiFinance

Subscribe on Youtube




Join our Newsletter
Enter your email address and click on the Get Instant Access button.
Thank you for subscribing.
Something went wrong.
I agree to have my personal information transfered to MailChimp ( more information )
We respect your privacy

For any guest posts or advertising queries, please write to us at hindifinance@gmail.com

Popular Posts

  • अटल पेंशन योजना की पूरी जानकारी (Atal Pension Yojana in Hindi) (2022)
  • सुकन्या समृद्धि योजना की पूरी जानकारी (Sukanya Samriddhi Yojana 2019)
  • नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) के बारें में पूरी जानकारी (Complete Information about NPS in Hindi)
  • PPF खाते के बारे में पूरी जानकारी (Complete Information about PPF Account in Hindi)
  • कौन से हैं 5 सबसे अच्छे टर्म इंश्योरेंस प्लान (Best Term Life Insurance Plan)?

(c) Copyright 2026 www.HindiFinance.com | Privacy Policy