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Health Insurance Claim Settlement Ratios 2018 (हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट 2018)

Last updated: जनवरी 31, 2019 | by दीपेश Leave a Comment

जब भी हम कोई इंश्योरेंस प्लान लेने जाते हैं, तो पालिसी का चुनाव करने से पहले हम उस कंपनी के क्लेम सेटलमेंट रेश्यो (claim settlement ratio) के बारे में जानना चाहते हैं| क्लेम सेटलमेंट रेश्यो जितना ज्यादा है, आपको उस कंपनी में उतना आपको उतना ही विश्वास रहेगा|

क्लेम सेटलमेंट रेश्यो की गणना करने के लिए आप “जितने क्लेम का आपने भुगतान किया” का “जितने क्लेम आपके पास आये” से भाग (divide) करते हैं|

Claim Settlement Ratio = No. of claims settled/No. of claims received

क्लेम सेटलमेंट रेश्यो की यह परिभाषा जीवन बीमा कंपनी ( लाइफ इंश्योरेंस कंपनी) के लिए चलती है| हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में क्लेम सेटलमेंट दूसरे तरीके से देखा जाता है| यहाँ पर हम लोग Incurred Claims Ratio या ICR की बात करते हैं|

Incurred Claims Ratio (ICR) = कंपनी ने कितनी राशि का क्लेम में भुगतान किया/कंपनी ने कितना प्रीमियम इकठ्ठा किया = Amount paid in Claims/Health Insurance Premium collected during the year

जनवरी 2019 में हेल्थ इंशोयरेंस कंपनियों के लिए FY2018 की यह जानकारी रिलीज़ करी गयी|

Health Insurance Claim Settlement Ratios 2018 (हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट 2018)

incurred claims ration health insurance companies FY2018 हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट 2018

Incurred Claims Ratio (ICR) कितना होना चाहिए?

लाइफ इंश्योरेंस में क्लेम सेटलमेंट रेश्यो जितना ज्यादा है, उतना अच्छा है| परन्तु हेल्थ इंश्योरेंस के ICR के साथ ऐसा नहीं है|

अगर ICR बहुत ज्यादा है (100% से भी ज्यादा), इस बात के दो मतलब हो सकते हैं|

  1. कंपनी क्लेम सेटल करने में बहुत अच्छी है| यह एक अच्छी बात है|
  2. कंपनी ने अपनी पालिसी का दाम सही से नहीं रखा है| ऐसी स्तिथि में आने वाले समय में आपकी पालिसी का प्रीमियम एक दम से बढ़ाया जा सकता है| यह आपके लिए परेशानी की वजह है|

अब ICR किस वजह से ज्यादा है, यह बता पाना मुश्किल है|

अगर ICR बहुत कम हैं (60% से भी कम), इसकी भी दो वजह हो सकती है|

  1. कंपनी बहुत क्लेम रिजेक्ट करती है| यह परेशानी वाली बात है|
  2. कंपनी के क्लेम ही नहीं आ रहे| कंपनी ने शायद स्वस्थ्य लोगो को ही बीमा बेचा है| या फिर इंश्योरेंस कंपनी ने पालिसी का दाम सही रखा है| ऐसे में आपके लिए कुछ भी कह पाना मुश्किल है| आप नहीं कह सकते ही कंपनी अच्छी है या बुरी है|

अब ICR किस वजह से कम है, यह बता पाना मुश्किल है|

मेरे अनुसार ऐसी इंश्योरेंस कंपनी के साथ हेल्थ इंश्योरेंस खरीदें, जिनका ICR 60% से 90% के बीच में हो| केवल एक वर्ष के ICR पर ध्यान ने दें| कम से कम 2-3 वर्षों के ICR पर ध्यान दें|

उससे भी ज़रूरी बात, पालिसी लेते समय कुछ भी न छुपायें| इंश्योरेंस कंपनी को अपने स्वास्थ्य के बारे मिएँ पूरी जानकारी दें| इससे आपका क्लेम रिजेक्ट होने की संभावना कम हो जायेगी|

पढ़ें: हेल्थ इंश्योरेंस टैक्स बेनिफिट (2019)

अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट (अंग्रेजी) में पढ़ें|

Filed Under: Financial Planning, Life Insurance Tagged With: health insurance premium, हेल्थ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस और टैक्स बचत

हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) प्रीमियम कम करने के 8 तरीकें

Last updated: अगस्त 17, 2017 | by दीपेश Leave a Comment

अस्पाताल की सुविधायें मेहेंगी होती जा रही हैं| अगर आपको किसी कारण अस्पताल में भरती होना पड़े, तो काफी खर्चा उठाना पड़ सकता है| इसी वजह से health insurance (स्वास्थ्य बीमा) खरीदना बहुत ज़रूरी हो गया है|

Health Insurance प्लान खरीदने पर आपकी बीमारी तो दूर नहीं होगी परन्तु उस बीमारी के लिए अस्पताल के खर्चे की चिंता को काफी हद तक दूर हो सकती है|

हो सकता है की आपके employer ने आपको health insurance दिया है| परन्तु ऐसे कवर में काफी समयाएं हैं| जैसे की यह कवर केवल तभी तक रहेगा जब तक आप उस employer के साथ काम कर रहे है| नौकरी छोड़ने या बदलने पर वह कवर चला जाएगा|

इसीलिए पर्सनल health insurance कवर खरीदने की सलाह दी जाती है| परन्तु हो सकता है ऐसे प्लान का प्रीमियम आपके बजट के बाहर हो| और यही वजह है की बहुत से लोग स्वास्थ्य बीमा (health insurance प्लान) नहीं खरीदते है|पर एक बात सोचिये| अगर आपको health insurance का प्रीमियम देने में इतनी परेशानी हो रही है, तो आप अस्पताल का लम्बा बिल कैसे भरेंगे|

इस पोस्ट में, मैं स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को कम करने के लिए कुछ तरीकों पर चर्चा करूंगा|

स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को कम करने के लिए टिप्स :

#1 कम कवर के लिए ऑप्टशन

यह बिल्कुल भी कोई कवर नहीं होने से बेहतर है। यदि आप 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा (health insurance) का प्रीमियम आप नहीं दे सकते हैं (afford नहीं कर सकते), तो 2 लाख रुपये के कवर के लिए जाएं| भविष्य में जब आपका आय में बढ़त हो  और आप में ज्यादा प्रीमियम का भुगतान करने का सामर्थ्य हो, तो तब आप आप कवर को बढ़ा सकते हैं।

#2 वार्षिक कटौती (Deductible) के लिए विकल्प

बीमाकर्ता केवल एक निश्चित सीमा तक अस्पताल के खर्चा देता है| आप एक सुपर टॉप-अप प्लान(super top-up plan) ले सकते हैं।

उदाहरण के तौर पर आइये एक प्राइवेट इंशोरेंस कंपनी के प्लान को देखते हैं।

एक परिवार 4 (40, 38, 10, 4) के लिए, 10 लाख रुपये के परिवार के फ्लोटर का प्रीमियम 27,436 रुपये है।

यदि आप 3 लाख रुपये का कटौती (deductible of Rs 3 lacs) करते हैं, तो प्रीमियम 16,463 रुपये है।

ध्यान रखें ऐसे विकल्प में आपको पहले 3 लाख रुपये अपनी जेब से देने होंगे|

मान लिए, हॉस्पिटल बिल 7 लाख रुपये का है, तो 3 लाख आप देंगे और बचे 4 लाख insurance कंपनी देगी|

5 लाख रुपये की कटौती (deductible of रस 5 lacs) के साथ, सालाना  प्रीमियम 13,71 9 रुपये है।

#3 सह भुगतान(co-payment) का विकल्प

आप बीमा खरीदी के समय लागत साझा करने का विकल्प भी चुन सकते हैं।

इसे कुछ इस तरह आप समझ सकते है मान लीजिये आपके health insurance plan में 20% सह-भुगतान (co-payment) है|

तो आपको बीमा कंपनी द्वारा स्वीकार किए गए मेडिकल बिल का 20% आपको देना होगा।

सह–भुगतान (co-payment) बीमा कंपनी को दो तरीकों से मदद करता है।

  1. आप इलाज में लगी कीमत में साझा (share) करते हैं|
  2. क्योंकि आप उपचार की लागत को साझा करते हैं, जाहिर सी बात है आप अपने इलाज़ का खर्चा कम से कम रखने की कोशिश करेंगे| इससे इंश्योरेंस कंपनी को भी आपके इलाज़ में कम खर्चा करना होगा|

इसी वजह से co-payment का चुनाव करने पर आपका प्रीमियम कमहो जाता है|

#4 मातृत्व (maternity benefit) लाभ से बचें

मातृत्व लाभ के तहत, बीमा कंपनी child delivery में होने वाले खर्चे को कुछ हद तक उठाती है।

एक तरह से मातृत्व लाभ बीमा के सिद्धांत के खिलाफ है| आमतौर पर बीमा कंपनी का खर्चा तब होता है जब की आपको नुकसान हुआ हो| जैसे की कोई बीमारी, एक्सीडेंट, मृत्यु आदि| परन्तु बच्चे का जन्म तो ख़ुशी की बात है|

जो लोग family planning के तहत बच्चे प्लान कर रहे हैं, उन मामलों में तो यह खर्चा आना ही है|

इसी वजह से मातृत्व लाभ के साथ योजना (health insurance plan with maternity benefit) काफी महंगी होती है|

निजी तौर पर, मैं 50,000 रुपये से कम होने वाले लाभ के लिए 15,000 रुपये प्रति वर्ष के अतिरिक्त प्रीमियम का तीन साल तक भुगतान नहीं करुगा|

आप भी maternity बेनिफिट वाले प्लान से बचें|

#5 परिवार फ्लोटर (family floater) और व्यक्तिगत योजना (individual plan) के बीच तय करें

Family Floater प्लान में पूरा परिवार k ही प्लान में कवर हो सकता है|

अगर आप individual प्लान लेते हैं, तो हर व्यक्ति के लिए नया प्लान लेना होगा|

ध्यान रखें की Family floater का प्रीमियम सबसे ज्यादा आयु वाले सदस्य की आयु पर निर्भर करता है|

इसीलिए Family floater  प्लान एक युवा परिवार के लिया अच्छा विकल्प है| प्रीमियम भी कम होगा|

परन्तु अगर आप 45 से ऊपर हैं, तो शायद बेहतर होगा की आप अपने लिए individual प्लान लें|

इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें|

#6 दूसरी बीमा कंपनी से health insurance खरीद सकते हैं

अगर आपकी वर्तमान बीमा योजना महंगी है, तो आप दूसरी बीमा कंपनी से बीमा ले सकते हैं|

नया बीमाकर्ता कम प्रीमियम पर कवर की पेशकश कर सकता है| और इससे आपका प्रीमियम कम हो सकता है|

अपनी पालिसी को port कर सकते हैं|

#7 2 साल के लिए प्रीमियम भुगतान करना

लगभग सभी बीमाकर्ता आपको आप दो या दो से अधिक वर्षों के लिए बीमा प्रीमियम का भुगतान पर 5% से 10% की छूट देते हैं ।

मान लिये10 लाख रुपये में एक Family floater का प्रीमियम 27,436 रुपए है।

यदि आप एक साथ दो साल का भुगतान करते हैं, तो आपको 52,641 रुपये का भुगतान करना होगा, जिसके परिणामस्वरूप 2,231 रुपये की बचत होगी।

#8 Hospital Cash या OPD सुविधाओं से बचें

ऐसी सुविधायों के कुछ ख़ास फायदा नहीं होता और बिना बात प्रीमियम बढ़ जाता है|

आपको क्या करना चाहिए?

हमने स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को कम करने के विभिन्न तरीकों पर ध्यान दिया|

ध्यान रखें हर तरीके में आपने कुछ लिया है तो कुछ दिया भी है|

प्रीमियम कम हुआ है, तो कहीं न कहीं आपकी coverage भी कम हुयी है|

निर्णय आपका हिया की आप क्या करना चाहते हैं|

Source: www.PersonalFinancePlan.in

Image Credit: Flickr

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