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Financial Planning

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इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर देना होगा 10% Long Term Capital Gains Tax

by दीपेश Leave a Comment

अब आपको अपने इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट को एक बर्ष (या उससे ज्यादा) बाद बेचने पर होने वाले मुनाफे पर टैक्स देना होगा|

अगर आप सीधे शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं, तब भी आपको मुनाफे पर टैक्स देना होगा|

यह प्रस्ताव बजट 2018 में लाया गया है|

Long Term Capital Gains Tax और Short Term Capital Gains Tax क्या है?

शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के लिए देखते हैं|

अगर आप एक साल के अन्दर बेचते हैं और मुनाफे होता है, ऐसे मुनाफे को Short term capital gain (शोर्ट टर्म कैपिटल गेन) कहते हैं|

ऐसे मुनाफे पर आपको 15% टैक्स देना होता है|

(Holding period <= 1 year )   ==> Short Term Capital Gain  ==> 15% टैक्स मुनाफे पर

अगर आप एक साल के बाद बेचते हैं और मुनाफे होता है, ऐसे मुनाफे को Long term capital gain (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन या LTCG) कहते हैं|

ऐसे मुनाफे पर आपको अभी तक कोई टैक्स नहीं देना होता था| पर अप्रैल 1, 2018 से आपको 10% टैक्स देना होगा| यह प्रस्ताव बजट 2018 में लाया गया है|

(Holding period > 1 year) ==> Long Term Capital Gain (LTCG)  ==> 10% टैक्स मुनाफे पर

इन बातों पर ध्यान दें

  1. ऊपर दिए गए नियम शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के लिए हैं|
  2. डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड के टैक्स नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है|
  3. यह नियम 1 April 2018 से लागू होगा| इसका मतलब अगर मार्च 31 2018 तक बेचने पर कोई Long Term Capital Gain होता है, तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा|
  4. जो मुनाफा आपको 31 जनवरी 2018 तक हो चुका है, उस पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा| इसके ऊपर जो मुनाफा होगा केवल उस पर टैक्स देना होगा| (GrandFathering) इस बारे में बाद में विस्तार से चर्चा करेंगे|
  5. आपको एक लाख रुपये तक के LTCG (एक वर्ष में) पर कोई टैक्स नहीं देना होगा| जब LTCG (शेयर या इक्विटी फण्ड बेचने) पर एक लाख से ज्यादा होगा, तब ही आपको अतिरिक्त लाभ पर 10% टैक्स देना होगा| तो समझ लिए की पहले एक लाख के लॉन्ग टर्म capital gain पर टैक्स की छूठ है|
  6. अगर आपको 1.5 लाख रुपये का LTCG हुआ है, तो आपको टैक्स केवल 50,000 रुपये पर ही देना होगा|
  7. आपको LTCG पर फ्लैट 10% टैक्स देना होगा| Indexation का लाभ नहीं मिलेगा|
  8. टैक्स पर cess (सेस) भी लगेगा| Cess अब 4% कर दिया गया है| तो आपको दरअसल 10.4% टैक्स देना होगा|

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स बजट 2018


शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कैसे कैलकुलेट किया जाएगा?

पहली बात, long term capital gain तभी होगा की जब आप अपने निवेश को एक वर्ष बाद बेचें|

उससे पहले बेचते हैं, तो short term capital gain माना जाएगा और आपको 15% टैक्स देना होगा|

अगर आपने जनवरी 31, 2018 के बाद शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट खरीदें हैं

और आप यह निवेश एक साल बाद बेचते हैं, तो जो भी मुनाफा है उस पर 10% टैक्स देना होगा|

यहाँ मुनाफा निकालना भी आसान है| आपने जितना निवेश किया और जितने में बेचा, उसका अंतर आपका मुनाफा होगा|

बस पहले 1 लाख रुपये के मुनाफे पर टैक्स नहीं देना होगा| बचे हुए LTCG पर 10% टैक्स देना होगा|

अगर आपने जनवरी 31, 2018 को या उससे पहले शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट खरीदें हैं

यहाँ पर भी अगर एक साल बाद बेचते हैं, तो 10% टैक्स देना होगा| पर  capital gain या मुनाफा कैलकुलेट करने का नियम थोड़ा सा अलग है|

समझ लिए capital gains कैलकुलेट करने के लिए आपके खरीद मूल्य (purchase price) और जनवरी 31, 2018 के मूल्य में जो राशि ज्यादा है, वह मानी जायेगी|

तो मान लिए की आप शेयर 100 रुपये में खरीदा था| जनवरी 31, 2018 को उसका price 130 रुपये था| जब आप बेचते हैं, तो उसका मूल्य 170 रुपये है|

Long term capital gain निकालने के लिए आपके purchase price को 130 रुपये माना जाएगा| इसी बात को GrandFathering कहते हैं|

जब आप 170 रुपये में बेचेंगे, तो मुनाफा 40 रुपये (170-130) का माना जाएगा और न की 70 रुपये का| हालांकि आपको मुनाफा 70 रुपये का हुआ है, टैक्स कैलकुलेट करने के लिए आपका मुनाफा 40 रुपये माना जाएगा|

इस चालीस रुपये पर आपको 10% टैक्स देना होगा|

देख्रें तो आपको 31 जनवरी 2018 तक हुए फायदे को टैक्स नहीं किया जाएगा|

अगर आप तकनिकी गहराई में जाना चाहते हैं, तो आपको खरीदने के price को निकालने के लिए यह करना होगा|

यह तीन राशि लें:

  1. आपके खरीदने का मूल्य (Purchase Price)
  2. जनवरी 31 2018 को highest price (शेयर के मामले में) या उस दिन का म्यूच्यूअल फण्ड NAV (Highest price on January 31 2018 in case of share or Mutual Fund NAV)
  3. आपके बेचने का मूल्य (sale price)

आपका खरीद मूल्य माना जाएगा: Higher of (1, Lower of (2,3))

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स 2

एक बात और, आपको पहले एक लाख के LTCG पर कोई टैक्स नहीं देना होगा|

तो मान लिए, आपने अगस्त 15, 2017 को 5 लाख रुपये निवेश किया| जनवरी 31 2018 को उसका मूल्य 7 लाख हो गया| आपने 15 दिसम्बर 2018 को अपने इक्विटी निवेश को बेच दिया 10 लाख रुपये में|

क्योंकि आपने 1 साल से अधिक समय तक अपने निवेश की होल्ड किया, मुनाफे को long term capital gain (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन) माना जाएगा|

तो आपका LTCG हुआ 10 लाख – 7 लाख रुपये = 3 लाख रुपये

इसमें पहले 1 लाख रुपये पर आपको टैक्स नहीं देना होगा|

बचे हुए 2 लाख रुपये के LTCG पर आपको 10% टैक्स देना होगा|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड से मिलने वाले dividend पर भी अब 10% टैक्स लगेगा

अभी तब कोई टैक्स नहीं लगता था|

पर ध्यान दें यह टैक्स आपको नहीं देना होगा| म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी आपके लिए टैक्स का भुगतान करेगी| पर टैक्स आएगा आपके पैसे से ही|

तो मान लिए म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी को 10 रुपये का dividend देना है, तो वह 1 रुपये का टैक्स जमा कर देगी और बचे हुए 9 रुपये आपको दे देगी| इसे Dividend Distribution Tax (DDT) भी कहते हैं|

एक बात औए, DDT पर सरचार्ज (surcharge) और सेस (Cess) भी लगेगा| अब इनकी वैल्यू बदलती रहती है| सरचार्ज 12% है और सेस (cess) 3% से बढ़ाकर 4% कर दिया गया है|

तो कुल मिलाकर आपके ऊपर असर 11.65% का आएगा|

और हाँ, यह टैक्स भी 31 मार्च 2018 के बाद ही लगेगा|


आपको क्या करना चाहिए?

पहली बात तो आपको अपने निवेश को बेचने की कोई ज़रुरत नहीं है| ऐसा इसलिए क्योंकि 31 जनवरी तक हुए मुनाफे पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा|

पर हाँ, आपके निवेश की वैल्यू अगर 31 जनवरी और 31 मार्च 2018 के बीच में काफी बढ़ जाती है, तो आप 31 मार्च से पहले बेच सकते हैं क्योंकि आपको 31 मार्च टैक्स कोई टैक्स नहीं देना होगा|

साथ ही आप हर साल कुछ-कुछ मुनाफा बुक कर सकते हैं| ऐसा इसलिए की 1 लाख रुपये तक के LTCG मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं है| बेचने के बाद आप दोबारा से निवेश कर सकते हैं|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के dividend स्कीम में निवेश करना कभी भी अच्छा आईडिया नहीं था| अब 10% टैक्स के बाद और भी बुरा हो गया है| ध्यान दें dividend के टैक्स पर 1 लाख रुपये की छूठ नहीं है| इसलिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड की dividend स्कीम से बचें और Growth स्कीम में निवेश करें|

Credit: www.PersonalFinancePlan.in

पढ़ें: बजट 2018 की महत्वपूर्ण घोषणाएं

Filed Under: Financial Planning, Mutual Funds, Tax Planning Tagged With: budget 2018, long term capital gains tax, LTCG on equity mutual funds, बजट 2018, म्यूच्यूअल फंड्स पर टैक्स, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स

बजट 2018: मुख्य घोषणाएं, इक्विटी फण्ड पर टैक्स और सीनियर सिटीजन्स के लिए राहत

by दीपेश Leave a Comment

बजट 2018 में कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं की गयी हैं|

इनकम टैक्स सलब और दरों को नहीं छेड़ा गया है परन्तु हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर पर अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट दिया गया है| 40,000 रुपये का Standard Deduction शुरू किया गया है|

वरिष्ठ नागरिकों (सीनियर सिटीजन) के लिए काफी लाभकारी घोषणाएं की गयी हैं| 50,000 हज़ार रूपए तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होगा और न ही कोई TDS कटेगा| प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) में निवेश सीमा बाधा दी गयी है| गंभीर बीमारियों पर इलाज़ के लिए होने वाले खर्चे पर भी टैक्स बेनिफिट बढ़ाया गया है|

पर एक निवेशक के लिए बड़ा झटका है| इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड या शेयर में होने वाले Long Term Capital Gains पर अब 10% प्रतिशत टैक्स लगेगा| थोड़ी सी राहत दी गयी है पर वह शायद काफी नहीं होगी| इक्विटी फण्ड से मिलने वाले dividend पर भी 10% टैक्स लगेगा|

आईये जानते हैं इन सभी नए नियमों के बारे में:

#1 इनकम टैक्स स्लैब और दरों को नहीं बदला गया है

जो इनकम टैक्स स्लैब और दरें पिछले साल (FY2017-2018) थी,  वही दरें रहेंगी|

लेटेस्ट इनकम टैक्स स्लैब और दरों के बारे में जानने के लिए इस लिंक पर जाएँ|

#2 स्टैण्डर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) के रूप में 40,000 रुपए  का नया टैक्स बेनिफिट दिया गया है

पर साथ में कुछ वापिस भी लिया गया है|

अभी तक आप अपने एम्प्लायर से 15,000 रुपये तक की मेडिकल बिल का reimbursement (प्रतिपूर्ति) करा सकते थे और मिलने वाली राशि पर कोई टैक्स नहीं देना होता था।

साथ ही आपको conveyance/transport allowance मिलता था महीने का 1600 रुपये| एक वर्ष का हो गया 19,200 रुपये|

अब इन दोनों टैक्स बेनिफिट के जगह आपको 40,000 रुपये के स्टैण्डर्ड डिडक्शन (Standard deduction) दिया जाएगा|

देखें तो, अधिकतम लाभ 34,200 रुपये से बढ़कर 40,000 रुपये हो जाता है|

कुछ ख़ास ज्यादा फायदा तो नहीं है, बस आपको कागज़ और बिल जमा करने में मेहनत नहीं करनी होगी|

#3 हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर बेनिफिट बढ़ाया गया है

धारा 80 डी के तहत लाभ 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये प्रति वित्तीय वर्ष कर दिया गया है।

पहले आप इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर 25,000 तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते थे| अब 50 हज़ार तक ले सकते हैं|

अगर आप सीनियर सिटीजन (आयु 60 वर्ष से ज्यादा है), तो आप 30,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते थे, अब 50,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

हेल्थ इंश्योरेंस पालिसी के प्रीमियम पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट के बारे में आप विस्तार से इस लिंक पर पढ़ सकते हैं

एक बात और, कई बार अगर आप दो-तीन बर्षों के प्रीमियम का भुगतान एक साथ करते हैं, तो आपको कुछ discount मिलता है| पर परेशानी यह है की टैक्स बेनिफिट केवल उसी वर्ष मिलता है की जिस वर्ष में आपने प्रीमियम का भुगतान किया है|

अब से ऐसा नहीं होगा| अब (FY2019) से आप प्रीमियम को बराबर हिस्सों में बाँट कर टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

तो मान लिए आपने दो वर्ष के प्रीमियम का भुगतान किया 40,000 रुपये| ऐसी स्तिथि में आप एक साल में 60,000 रुपये का टैक्स बेनिफिट ले की बजाय दो सालों में 30-30 हज़ार रुपये का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

#4 सीनियर सिटीजन के लिए 50,000 रुपये तक के ब्याज पर टैक्स छूठ (Interest Income Exempt for Senior Citizens up to Rs 50,000 per financial year)

ध्यान दें यह छूठ केवल सीनियर सिटीजन (60 वर्ष से ज्यादा आयु) के ही लिए है|

अब वरिष्ठ नागरिकों को बचत खाते (savings account), फिक्स्ड डिपाजिट (fixed deposit) या रेकरिंग डिपाजिट (recurring deposit) पर बर्ष में 50,000 तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होगा| इसके लिए एक नया सेक्शन 80TTB लाया जाएगा|

अगर 50,000 से ज्यादा ब्याज है, तो टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

बस एक बात और, ऐसे खाते आपने बैंकों, सहकारी बैंकों (co-operative bank) और डाकघरों (post-office) में खोलें हों।

अगर धारा 80 TTB के तहत लाभ ले रहे हैं, तो धारा 80 TTA के तहत कर लाभ नहीं ले सकते हैं।

धारा 80TTA के तहत सेविंग्स बैंक अकाउंट पर मिलने वाले 10,000 रुपये तक के ब्याज पर टैक्स छूठ है| तो अगर आप वरिष्ठ नागरिक नहीं हैं, तो आप सेक्शन 80TTA के तहत लाभ ले सकते हैं|

#5 वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये से ऊपर के ब्याज पर TDS लगेगा

यह बात भी काफी अच्छी है|

पहले 10,000 रुपये से ज्यादा ब्याज होने पर बैंक TDS काट लिया करते थे|

अब 50,000 रुपये तक के ब्याज पर कोई भी TDS नहीं काटा जाएगा|

#6 गंभीर बीमारियों के चिकित्सा उपचार के लिए टैक्स बेनिफिट 1 लाख रुपये किया गया (Section 80DDB): केवल वरिष्ठ नागरिकों के लिए

यह लाभ भी केवल वरिष्ठ नागरिकों के लिए है|

किसी गंभीर बीमारी के लिए 1 लाख रुपये तक के खर्चे के लिए टैक्स बेनिफिट मिलेगा|

इससे पहले, वरिष्ठ नागरिकों के लिए 60,000 रुपये की सीमा थी और अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए 80,000 रुपये (> = 80 वर्ष)। अब, दोनों के लिए सीमा 1 लाख प्रतिवर्ष बढ़ा दी गई है।

ध्यान दीजिए कि 60 साल से कम उम्र के करदाताओं को सालाना 40,000 रुपये ही है|

एक बात और, सेक्शन 80DDB के तहत केवल उसी खर्चे के लिए क्लेम किया जा सकता है, जो आपने किसी इंश्योरेंस पालिसी के तहत न लिया हो|

#7 प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana) के लिए निवेश सीमा में वृद्धि

प्रधानमंत्री वय वंदना योजना को 31 मार्च, 2020 तक बढ़ा दिया गया है। इसका मतलब है कि आप 2020 मार्च तक इस योजना में निवेश कर सकते हैं।

साथ ही अधिकतम योगदान को 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख कर दिया गया है।

PMVVY में निवेश करने पर वरिष्ठ नागरिकों  को 10 वर्षों के लिए 8% ब्याज मिलता है।

#8 इक्विटी शेयर / इक्विटी म्यूचुअल फंड में Long Term Capital Gains Tax लाया गया (Long Term Capital Gains Tax on Equity Mutual Funds/Shares Introduced)

अभी तक अगर आप अपने शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट 1 साल बाद बेचते थे, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होता था|

ऐसा इसलिए क्योंकि शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट  को बेचने पर होने वाले Long Term Capital Gain (LTCG) पर कोई टैक्स नहीं था|

अब आपको ऐसे मुनाफे पर 10% टैक्स देना होगा| यह खबर निवेशकों को शायद इतनी अच्छी न लगे|

दो राहतें दो गयीं हैं|

  1. अगर बर्ष में Long Term Capital Gain (LTCG) अगर 1 लाख रुपये से कम का है, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा| 1 लाख से ऊपर के मुनाफे पर ही टैक्स देना होगा|
  2. 31 जनवरी, 2018 तक के मुनाफे पर कोई भी टैक्स नहीं देना होगा|

इस बारे में गहराई से (उदहारण के साथ) जानने के लिए आप इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ सकते हैं|

#9 इक्विटी फंड (Equity Mutual Fund) के dividend पर 10% टैक्स लगेगा

अभी तक इक्विटी फण्ड के dividend पर कोई टैक्स नहीं लगता था|

पर अब से म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी आपको 10% टैक्स काट कर पैसा देगी| इसका मतलब टैक्स TDS के रूप में ही काट लिया जाएगा|

आपको अलग से टैक्स भरने की ज़रुरत नहीं है|

इस बारे में गहराई से जानने के लिए आप इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ सकते हैं|

pay tax on long term capital gains equity mutual funds बजट 2018

#10 कुछ अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं

  1. Cess (सेस) के 3% सेस बढाकर 4% कर दिया गया है।
  2. धारा 54 EC (NHAI और REC बांड्स में निवेश करके Long Term Capital Gains Tax बचाने के लिए) के तहत लाभ अब केवल land और building बेचने पर होने वाले capital gains तक सीमित होगा। इससे पहले, किसी भी प्रकार के LTCG पर टैक्स बचने के लिए किया जा सकता था। साथ ही ऐसे बांड के अवधि 3 वर्ष से बढाकर 5 वर्ष कर दी गयी है|
  3. National Health Protection स्कीम शुरू की जायेगी| इस स्कीम के तहत गरीब परिवारों को वर्ष में 5 लाख रुपये तक का स्वस्थ्य बीमा दिया जायेगा|

Filed Under: Financial Planning, Tax Planning Tagged With: budget 2018, long term capital gains tax, इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड पर 10% टैक्स, प्रधानमंत्री वय वंदना योजना, बजट 2018

होम लोन के भुगतान पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट (Tax Benefits: Home Loan Repayment)

Last updated: फ़रवरी 28, 2019 | by दीपेश 10 Comments

ज़मीन और मकानों के दाम इतने ज्यादा हैं की अधिकाँश लोगों को घर खरीदने के लिए होम लोन लेना पड़ता है| अच्छी बात यह है की होम लोन के भुगतान पर आपको टैक्स बेनिफिट या छूठ मिलती हैं|

इस टैक्स बेनिफिट से आपके ऊपर होम लोन का भार कुछ कम हो जाता है|

इस पोस्ट में यह जानते है की आपको होम लोन के भुगतान पर क्या टैक्स बेनिफिट मिलते हैं|


होम लोन पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट्स (Home Loan Repayment Tax Benefits in Hindi)

आपको टैक्स की बचत ब्याज की भुगतान (interest payment) और मूल के भुगतान (principal payment) दोनों परमिलती है|

आपको होम लोन के भुगतान पर तीन तरह के टैक्स बेनिफिट मिल सकते हैं|

  1. होम लोन पर ब्याज के भुगतान (interest payment) के लिए 2 लाख रुपये (सेक्शन 24 के तहत)
  2. होम लोन पर मूल के भुगतान (principal repayment) के लिए 1.5 लाख रुपये (सेक्शन 80C के तहत)
  3. अगर पहली बार घर ले रहे हैं, तो 50,000 रुपये तक अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट ब्याज के भुगतान के लिए (सेक्शन 80EE के तहत)

आईये जानते हैं इन टैक्स बेनिफिट के बारे में विस्तार से| साथ ही यह भी देखते हैं की इन टैक्स बेनिफिट के साथ क्या शर्तें जुडी हुई हैं| होम लोन के टैक्स बेनिफिट से जुड़े कुछ आम सवालों पर भी चर्चा करेंगे|


होम लोन पर ब्याज के भुगतान के लिए टैक्स बचत (Tax Benefit for Interest Payment on Home Loan under Section 24 of Income Tax Act)

होम लोन पर ब्याज के भुगतान के लिए आप वित्तीय वर्ष में 2 लाख रुपये तक की छूठ ले सकते हैं|

अगर आपने 2 लाख से कम ब्याज के भुगतान लिया है, तो टैक्स बेनिफिट उस राशि तक ही सीमित होगा|

अगर 2 लाख से ज्यादा का भुगतान किया है, तो टैक्स लाभ 2 लाख रुपये तक सीमित होगा|

अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं, तो इसका मतलब हुआ 60,000 रुपये की टैक्स बचत (2 लाख X 30%)|

यह टैक्स बेनिफिट आपको आयकर की धारा 24 के तहत मिलता है|

क्या आयकर की धारा 24 के तहत टैक्स बेनिफिट लेने की कुछ शर्ते हैं?

  1. अगर लोन घर की मरम्मत के लिए लिया गया है, तो टैक्स बेनिफिट 2 लाख रुपये नहीं होगा| केवल 30,000 रुपये प्रति वित्तीय वर्ष होगा|
  2. 2 लाख रुपये तक का टैक्स बेनिफिट केवल घर खरीदने या बनाने के लिए है|
  3. ब्याज के भुगतान पर आप टैक्स बेनिफिट मकान का निर्माण पूरा होने या फ्लैट के possession मिलने के बाद ही ले सकते हैं|
  4. इसका मतलब यह नुआ की जब तक आपके घर के निर्माण पूरा नहीं होता, आपको धारा 24 के तहत कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा|
  5. मकान का निर्माण पूरा होने से पहले किये गए ब्याज के भुगतान को आप जोड़ सकते हैं और अगले 5 साल (घर का निर्माण पूरा होने के बाद) तक बराबर किश्तों में टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं| पर ध्यान दें, कुल मिला कर एक वित्तीय वर्ष में टैक्स बेनिफिट 2 लाख रुपये से ज्यादा नहीं हो सकता|
  6. साथ ही, अगर आपका मकान लोन लेने के पांच साल के भीतर पूरा नहीं होता या आपके फ्लैट का possession नहीं मिलता, तो आपको मिलने वाला टैक्स बेनिफिट 2 लाख रुपये से घाट कर 30,000 रुपये प्रति वर्ष रह जाएगा|
  7. टैक्स बेनिफिट लेने के लिए यह ज़रूरी नहीं है की आपने लोन बैंक से ही लिया हो| आप अपने परिवार में किसी से या किसी मित्र से भी लोन ले सकते हैं| बस आपको ब्याज का भुगतान का सर्टिफिकेट (प्रमाण पत्र) देना होगा|home loan repayment tax benefit in hindi

मूल राशि के भुगतान पर टैक्स बेनिफिट (Tax Benefit on Principal Repayment under Section 80C of the Income Tax Act)

होम लोन पर मूल के भुगतान के लिए आपको प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपये तक का टैक्स बेनिफिट मिलता है|

यह टैक्स बेनिफिट आपको आयकर की धारा 80C के तहत मिलता है|

इन बातों पर भी ध्यान दें

  1. आयकर की धारा 80C के तहत टैक्स बेनिफिट पाने के और भी कई तरीके हैं| सभी तरीकों में कुल मिला कर आपको केवल 1.5 लाख रुपये का टैक्स बेनिफिट ही मिलता है|
  2. तो अगर आपके EPF, पीपीएफ, ELSS इत्यादि में निवेश से ही आपकी सेक्शन 80C की लिमिट पूरी हो रही है, तो आपके मूल भुगतान (principal repayment) पर कुछ ख़ास टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा|
  3. ब्याज के भुगतान की तरह ही आप मूल के भुगतान पर टैक्स बेनिफिट घर का निर्माण पूरा होने या फ्लैट का possession मिलने के बाद ही ले सकते हैं|
  4. परन्तु, यहाँ पर आप निर्माण से पहले किये गए मूल भुगतान (principal repayment) पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं ले सकते|
  5. अगर आप घर के निर्माण पूरा होने या फ्लैट का possession मिलने के 5 वर्ष की भीतर अपने घर बेच देते हैं, तो आपके टैक्स बेनिफिट वापिस ले लिए जायेंगे| इसका मतलब जो टैक्स बेनिफिट आपने पिछले वर्षों में लिया था, वह आपकी आय में जोड़ दिया जाएगा और उसी अनुसार आपको टैक्स देना पड़ेगा|
  6. अगर टैक्स बेनिफिट चाहिए, तो लोन आपको किसी बैंक, सरकार, एलआईसी, नेशनल हाउसिंग बैंक, कॉपरेटिव सोसाइटी इत्यादि से लेना होगा| परिवार या किसी मित्र से लोन लेने पर मूल के भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा|

स्टैम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क के लिए टैक्स बेनिफिट (Stamp Duty and Registration Charges)

आयकर की धारा 80C के तहत आप घर खरीदते समय Stamp Duty and Registration Charges के भुगतान पर भी टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

पर यह बेनिफिट आप उसी वर्ष ले सकते हैं, जिस वर्ष आपने इन शुल्कों का भुगतान किया है|

ध्यान रखें धारा 80C के तहत टैक्स बेनिफिट की सीमा 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ष है|

यहाँ भी 5 वर्ष के भीतर घर बेचने पर आपके टैक्स बेनिफिट वापिस ले लिए जायेंगे|

पढ़ें: सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचाने के 15 आसान तरीके


आयकर की धारा 80EE के तहत पहली बार घर खरीदना वालों के लिए अतिरिक्त बचत (Extra Tax Benefit for first time home buyers under Section 80EE)

अगर आप अपने पहला घर खरीद रहे है, तो आपके पास कुछ अतिरिक्त टैक्स राहत भी है|

अगर आप पहला घर खरीद रहे हैं, तो होम लोन पर ब्याज के  भुगतान के लिए आप 50,000 रुपये तक का अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

यह बेनिफिट आपको धारा 80EE के अंतर्गत मिलता है|

यह बेनिफिट Section 24 के तहत मिलने वाले टैक्स लाभ के अतिरिक्त है|

कुछ शर्तें हैं:

  1. आपका लोन 1 अप्रैल, 2016 और मार्च 31, 2017 के बीच पारित हुआ हो|
  2. लोन राशि 35 लाख से ज्यादा नहीं होनी चहिये|
  3. मकान का मूल्य 50 लाख से ज्यादा नहीं होना चाहिए|
  4. यह आपका पहला घर होना चाहिए|
  5. लोन आपने बैंक या किसी वित्तीय संस्थान से लिया हो|

ध्यान दें यह नियम हर वर्ष बदलता रहता है| मेरा मतलैब है की यह छूठ सरकार एक बार में एक वर्ष के लिए ही देती है| यह पक्का नहीं होता की अगले वर्ष भी यह राहत दी जायेगी या नहीं|


मैंने अपनी पत्नी के साथ Joint होम लोन किया है? क्या हम दोनों टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं?

जी हाँ, आप दोनों ही टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

आप और आपकी पत्नी दोनों ही ब्याज के भुगतान के लिए 2-2 लाख का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं| कुल मिला कर हुआ 4 लाख रुपये|

मूल के भुगतान (principal repayment) के लिए भी 1.5-1.5 लाख रुपये का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

बस एक बात का ध्यान रखें| घर दोनों के नाम पर होना चाहिए (co-owner) और लोन में भी दोनों का नाम होना चाहिए (co-borrower)|

और सारे नियम और शर्तें वैसे ही हैं|

पढ़ें: होम लोन लेने से पहले इन 6 बातों का रखें ख्याल


क्या मैं HRA और होम लोन दोनों का टैक्स लाभ ले सकता हूँ?

अगर आप किराए के घर में रहते हैं और होम लोन भी लिया हुआ है, तो आप HRA और होम लोन भुगतान दोनों पर टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

HRA पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट पर मैंने विस्तार से इस पोस्ट में चर्चा करी है|

पढ़ें: मकान के किराए पर भी मिल सकते हैं टैक्स बेनिफिट


मैंने दूसरे घर (let out property) के लिए लोन लिया है? क्या टैक्स बेनिफिट अलग है?

मूल राशि के भुगतान (Principal repayment) के लिए तो नियम सामान ही है| आप कितने भी घर ले लें, आप एक वर्ष में सभी लोन के लिए कुल मिला कर 1.5 लाख रुपये तक (Section 80C के तहत) का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

परन्तु ब्याज के भुगतान पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट में थोड़ा अंतर है|

अगर जिस घर पर आपने लोन लिया है और उसे किराए पर उठा रखा है, तब भी कुल मिला कर आप दो लाख रुपये का ही फायदा ले सकते हैं| अंतर इतना है की आप उस मकान के किराए की आय को भी एडजस्ट कर सकते हैं|

तो मान लिए आपकी किराए से कमाई (म्युनिसिपल टैक्स और स्टैण्डर्ड डिडक्शन) के बाद) 1.25 लाख रुपये की हुई, तो कुल मिला कर आप 3.25 लाख रुपये तक के ब्याज पर टैक्स बेनिफिट ले पायेंगे|

मैं समझ सकता हूँ की यह विषय थोडा पेचीदा है| इस पोस्ट के अन्दर समझाना भी काफी मुश्किल है| अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|

पढ़ें: होम लोन लेने से पहले इन 6 बातों का रखें ख्याल

आप इस विषय में विस्तार से इस पोस्ट (अंग्रेजी) में पढ़ सकते हैं|

Filed Under: Financial Planning, Loans, Tax Planning Tagged With: home loan tax benefit in hindi, section 24, section 24 of income tax act in hindi, section 80C, section 80ee, आयकर की धारा 24, होम लोन टैक्स बेनिफिट

Claim Settlement Ratio for FY2017 (Life Insurance): कौनसी है बेस्ट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी?

by दीपेश 2 Comments

IRDA ने वित्तीय वर्ष 2017 (FY2016-2017) के लिए अपनी वार्षिक रिपोर्ट (Annual Report) जारी कर दी है।

उस रिपोर्ट में FY2017 के लिए लाइफ इंश्योरेंस कंपनी (जीवन बीमा कंपनी) के क्लेम सेटलमेंट रेश्यो (claim settlement ratio) के बारे में भी जानकारी है|

क्लेम सेटलमेंट रेश्यो (Claim Settlement Ratio of Life Insurance Company) क्या होता है?

इससे यह पता चलता है की इंश्योरेंस कंपनी से पिछले साले आये हुए दावों (claim) में से कितने क्लेम का भुगतान किया और कितनों को रिजेक्ट कर दिया|

तो मान लिए एक कंपनी का क्लेम सेटलमेंट रेश्यो 80% है, तो इसका मतलब यह हुआ की कंपनी ने 80% दावों (क्लेम) का भुगतान किया और 20% क्लेम को रिजेक्ट कर दिया|

जाहिर है, जितना अधिक क्लेम सेटलमेंट रेश्यो (claim settlement ratio) होगा, उतना ही बेहतर है|

क्लेम सेटलमेंट रेश्यो (claim settlement ratio) दो तरीकों से देखा जा सकता है

  1. संख्या के अनुसार (Claim Settlement Ratio by Number of Claims)
  2. क्लेम राशि के अनुसार (Claim Settlement Ratio by Benefit Amount)

आईये उदहारण से समझते हैं|

एक बीमा कंपनी के पास 100 क्लेम आये|

90 क्लेम 5 लाख रुपये के थे और बचे हुए 10 क्लेम 50 लाख रुपये के थे|

अब मान लिए जीवन बीमा कंपनी ने 5 लाख के सारे क्लेम का भुगतान कर दिया|

परन्तु 50 लाख के 10 क्लेम में से केवल 5 क्लेम का ही भुगतान किया|

अब संख्या के अनुसार देखें, तो बीमा कंपनी ने 100 में से 95 क्लेम का भुगतान कर दिया, तो क्लेम संख्या के अनुसार claim settlement ratio) हुआ 95%|

क्लेम राशि के अनुसार बीमा कंपनी पर कुल मिला कर 9.5 करोड़ रुपये के क्लेम आये (90 X 5 लाख + 10 X 50 लाख रुपये), परन्तु बीमा कंपनी ने केवल 7 करोड़ रुपये (90 X 5 लाख + 5 X 50 लाख रुपये) का ही भुगतान किया|

अब अगर क्लेम राशि के अनुसार क्लेम सेटलमेंट रेश्यो देखें, तो हुआ 73.6%

Claim Settlement Ratio by Number of Claims = 95%

Claim Settlement Ratio by Benefit Amount = 73.6%

अब IRDA की रिपोर्ट में यह दोनों ही नंबर होते हैं, तो आप किस नंबर पर ज्यादा ध्यान देंगे|

अगर आप एक नई जीवन बीमा पॉलिसी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो क्या आप दूसरे नंबर पर विचार नहीं करेंगे?

इस बात में कोई दोराय नहीं की आप चाहेंगे की यह दोनों की नंबर अच्छे हों|

Claim Settlement Ratio of Life Insurance Companies for FY2017 (FY2017 के लिए जीवन बीमा कंपनियों का क्लेम सेटलमेंट रेश्यो)

आइए साल 2017 के आंकड़ों को देखते हैं। (Source: www.PersonalFinancePlan.in)

2017 2018 जीवन बीमा कंपनी क्लेम सेटलमेंट claim settlement ratio 2018

 

2017 2018 जीवन बीमा कंपनी क्लेम सेटलमेंट claim settlement ratio 2018 बेस्ट लाइफ इंश्योरेंस कंपनी

2017 2018 जीवन बीमा कंपनी क्लेम सेटलमेंट claim settlement ratio 2018 बेस्ट टर्म इंश्योरेंस प्लान

 

वित्त वर्ष 2016-2017 के जीवन बीमा कंपनियों के Claim Settlement Ratio से क्या बात स्पष्ट है?

आप देख सकते हैं की क्लेम राशि के सन्दर्भ में क्लेम सेटलमेंट रेश्यो कम है| Claim Settlement Ratio by Number of Claims is better than Claims Settlement Ratio by Benefit Amount.

अब यह जान कर आपको आश्चर्य नहीं होगा की जो क्लेम सेटलमेंट रेश्यो आप विज्ञापनों में पढ़ते हैं, वह क्लेम सेटलमेंट क्लेम की संख्या के अनुसार होता है| Claim Settlement Ratio by Number of Claims is typically advertised. ऐसा इसलिए क्योंकि यह नंबर बेहतर होता है|

ऐसा प्रतीत होता है कि ज्यादा बीमा राशि वाले काफी क्लेम रिजेक्ट किये गए हैं| हो सकता है की टर्म इंशोयरेंस प्लान के तहत आये क्लेम भी काफी रिजेक्ट हो रहे हों|

स्वीकृत क्लेम (जिन क्लेम का भुगतान लिया गया) की औसत राशि (average size of accepted claim) अस्वीकृत क्लेम (जिन क्लेम को रिजेक्ट कर दिया गया) के मुकाबले कम है।

पर एक बात का ध्यान दे| आप एक बीमा कंपनी से एक बड़े क्लेम में ज्यादा जांच पड़ताल की उम्मीद कर सकते हैं|

साथ ही, अगर कोई पालिसी खरीदते समय कुछ धोखाधड़ी (fraud या कोई ज़रूरी जानकारी छिपाना) का इरादा रखता है, तो ऐसा व्यक्ति बड़ी राशि की पालिसी ही खरीदेगा|

पर जीवन बीमा कंपनी को भी क्लीन चिट न दें| हो सकता है की बीमा कंपनी का रुझान भी बड़े क्लेम के रिजेक्ट करने की तरफ ज्यादा हो|

ध्यान दे यह जानकारी केवल जीवन बीमा कंपनियों की है| इसमें हेल्थ इंश्योरेंस के क्लेम के बारे में कोई जानकारी नहीं है|

बेहतर होता की हमें विभिन्न प्रकार की पालिसी (टर्म इंश्योरेंस प्लान, पारंपरिक जीवन बीमा प्लान और यूलिप)के लिए अलग-अलग क्लेम सेटलमेंट की जानकारी दी गयी होती| पर ऐसा नहीं है|

पढ़ें: कौन से हैं 5 सर्वश्रेष्ठ टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्लान? 5 Best Term Insurance Plan

इस जानकारी का आप किस तरीके से प्रयोग कर सकते हैं?

अगर आप एक नयी पालिसी लेने जा रहे हैं, तो आप चाहेंगे की उसका क्लेम सेटलमेंट रेश्यो संख्या और क्लेम राशि दोनों के अनुसार अच्छा हो|

अगर दोनों ratio (अनुपातों) में काफी अंतर है, तो आपको थोडा सोचना पड़ेगा|

देखिये किसी एक साल ऐसा होता है, तो चलता है| क्योंकि हो सकता है की कोई बड़े क्लेम वाले fraud केस आ गया हो|

पर अगर हर साल ऐसा होता हैं, तो परेशानी का विषय है|

ऐसी स्तिथि में कुछ तो गलत है| या फिर तो इंश्योरेंस कंपनी बेचते समय कुछ गड़बड़ी करती है, या क्लेम के भुगतान के समय| आपको सतर्क होने की ज़रुरत है|

एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ (HDFC Standard Life) के उदहारण पर एक नजर डाले।

एचडीएफसी स्टैण्डर्ड लाइफ इंश्योरेंस

हर साल काफी अंतर है|  ध्यान दें HDFC Standard Life  इकलौती कंपनी नहीं है की जहाँ अंतर काफी ज्यादा है| और भी कंपनी है|

Insurance Amendment Act, 2015 में आपको कुछ राहत मिल सकती है

यदि आपकी पॉलिसी 3 वर्ष से अधिक पुरानी है तो जीवन बीमा कंपनियां आपके दावे को अस्वीकार (रिजेक्ट) नहीं कर सकती हैं।

इसका मतलब है, एक बार आपकी जीवन बीमा पॉलिसी 3 साल पुरानी हुई, तो बीमा कंपनी किसी भी कारण से आपके क्लेम को रिजेक्ट नहीं कर सकती|

ऐसी स्तिथि में क्लैम सेटलमेंट रेश्यो की अहमियत थोड़ी कम हो जाती है|

हालांकि, अगर आप एक नई टर्म इंश्योरेंस प्लान लेने की योजना बना रहे हैं, तो बेहतर होगा की ऐसी कंपनी के साथ जाएँ जिसके दोनों claim settlement ratio अच्छे हैं| ध्यान दें मृत्यु पालिसी लेने के तीन वर्ष के भीतर भी हो सकती है|

इस विषय में आप विस्तार से इस पोस्ट में पढ़ सकते हैं|

पढ़ें: अगर आपकी जीवन बीमा पालिसी 3 साल पुरानी है, तो क्लेम रिजेक्ट नहीं होगा

Source: PersonalFinancePlan.in

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भारत सरकार 7.75% सेविंग्स (taxable) बांड्स, 2018: क्या आपको निवेश करना चाहिए?

by दीपेश Leave a Comment

भारत सरकार ने हाल ही में Government of India 7.75% Savings (Taxable) Bonds, 2018 की घोषणा की।

जानते हैं इन बांड्स के बारे में और देखते हैं की क्या आपको इन बांड्स में निवेश करना चाहिए|

इन बांडों के बारे में  जानने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक इन्फोग्राफिक को नीचे देखे।

भारत सरकार 7.75% बचत (कर योग्य) बांड्स,2018 Government of India 7.75% Savings (Taxable) Bonds, 2018: कुछ ख़ास बातें

  1. परिपक्वता (Maturity): यह बांड 7 वर्ष में मेच्योर होंगे|
  2. संचयी (cumulative)और गैर-संचयी (non-cumulative) दोनों विकल्प में उपलब्ध हैं। Non-cumulative विकल्प में आपको हर 6 महीने पर ब्याज मिलेगा| Cumulative विकल्प में आपको 7 वर्ष बाद ही पैसा मिलेगा| Compounding Frequency: 6 months
  3. ब्याज दर (Interest Rate): 7.75% p.a.
  4. Individual (आप कर सकते हैं) और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) in बांड में निवेश कर सकते हैं।
  5. अनिवासी भारतीय (Non-Resident Indian या NRI) इन बांड में निवेश नहीं कर सकते हैं।
  6. अधिकतम निवेश (Maximum Investment): कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
  7. आपको मिलने वाले ब्याज पर टैक्स देना होगा| टैक्स आपकी इनकम टैक्स सलब के अनुसार लगेगा| Interest income is taxable.
  8. निवेश पर कर लाभ (Tax Benefit on Investment): कोई टैक्स बेनिफिट नहीं है|
  9. आप मेच्योरिटी (7 साल) से पहले अपना पैसा नहीं निकाल सकते| यह बांड स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट नहीं होंगे| इसलिए आप इन बांड को बाज़ार में नहीं बेच सकते। तो अगर इन बांड में निवेश किया, तो समझ लिए की आपका पैसा 7 साल के लिए लॉक हो गया|
  10. आप इन बांड को गिरवी (collateral) रख कर बैंक से कोई लोन नहीं ले सकते|
  11. कोई क्रेडिट रिस्क नहीं है| मेरा मतलब आप पैसा सरकार को दे रहे हैं| तो पैसा आपका वापिस तो आएगा ही|
  12. कैसे निवेश करें: आप चुनिंदा बैंक शाखाओं के माध्यम से या प्रमुख ब्रोकर की वेबसाइटों के माध्यम से निवेश कर सकते हैं। यह बांड हमेशा उपलब्ध हैं| आप जब चाहें, तब निवेश कर सकते हैं|

भारत सरकार 7.75% बचत (कर योग्य) बांड, 2018 मिएँ निवेश करने पर आपको कितना पैसा मिलेगा?

मान लिए आप 1 लाख रुपये निवेश करते हैं इन बांड में|

जैसे की ऊपर चर्चा करी, आपके पास दो विकल्प हैं|

गैर-संचयी (non-cumulative) विकल्प के तहत, आपको 7 साल तक हर छह महीने में 3,875 रुपये ब्याज के तौर पर मिलेंगे। परिपक्वता के समय (7 वर्ष बाद) आपको आपका निवेश (1 लाख रुपये) लौटा दिए जायेंगे।

अगर आप संचयी मोड (cumulative) विकल्प में निवेश करते हैं,  तो परिपक्वता तक आपको कुछ नहीं मिलेगा। परिपक्वता के समय (7 वर्ष), आपको 1.7 लाख रुपये वापस मिलेंगे। तो आपका रिटर्न हुआ 7.9% p.a.

ध्यान दे यह रिटर्न टैक्स लगने से पहले के हैं (pre-tax return)|

क्या आपको भारत सरकार के 7.75% बचत (कर योग्य) बांड, 2018 में निवेश करना चाहिए?

मेरे अनुसार, अगर आपको नियमित आय नहीं चाहिए, तो इन Government of India 7.75% p.a. Savings (Taxable) Bonds ममें निवेश नहीं करना चाहिए|

ऐसा इसलिए क्योंकि:

  1. ब्याज कर योग्य है| अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट में आते है, तो आपका टैक्स बे बाद रिटर्न हुआ 5.5% p.a.
  2. साथ ही आपका पैसा 7 साल के लिए अटक जाता है| आप किसी इमरजेंसी में भी यह पैसा नहीं निकाल सकते|

तो अगर आप अभी रिटायर नहीं हुए है, तो ऐसे bonds में निवेश करने की कोई ज़रुरत नहीं है|

अब, हमें यह देखना होगा कि क्या यह बांड सेवानिवृत्त लोगों या वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक अच्छा निवेश हैं की नहीं| इसके लिए, हमें सेवानिवृत्ति के समय अन्य आय विकल्पों से तुलना करनी होगी।

प्रधान मंत्री व्यय वंदन योजना (PMVVY) में आपको 10 वर्षों के लिए 8% (कर योग्य) प्रदान करता है।

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (Senior Citizens Savings Scheme या SCSS) में अभी आपको 5 वर्षों के लिए 8.3% p.a. मिलता है| (16 जनवरी 2018) SCSS की लेटेस्ट ब्याज दर जानने के लिए इस पोस्ट पर जाएँ|

आप देख सकते हैं की यह बांड PMVVY या SCSS के मुकाबले कम रिटर्न देते हैं|

पर हाँ,  PMVVY और SCSS में अधिकतम निवेश की सीमा है|

आप पीएमवीवीवाई में 7.5 लाख रुपये और एससीएसएस में 15 लाख रुपये से ज्यादा निवेश नहीं कर सकते। इन सरकारी बांड्स में ऐसी कोई सीमा नहीं है| जितना चाहे उतना निवेश कर सकते हैं|

लेकिन अगर देखें तो, आप बैंक के फिक्स्ड डिपाजिट (Fixed Deposit) में भी जितना चाहें उतना निवेश कर सकते हैं| अगर आप एक वरिष्ठ नागरिक है, तो शायद आपको FD पर ब्याज दर भी ज्यादा मिले| साथ ही ज़रुरत पड़ने पर आप अपना फिक्स्ड डिपाजिट तोड़ भी सकते हैं|

अब फैसला आपको करना है|

क्या आप भारत सरकार के इन सेविंग्स bonds में निवेश करेंगे?

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प्रॉपर्टी लोन (Loan against Property) के बारे में पूरी जानकारी

Last updated: जनवरी 29, 2018 | by दीपेश 89 Comments

मान लिए आपको 20 लाख रुपये की ज़रुरत है| आपका परिवार या मित्र आप सहायता करने की स्तिथि में नहीं हैं| किसी कारण से आपको पर्सनल लोन लेने में भी परेशानी हो रही है|

अब आपके पास क्या विकल्प हैं?

आपके पास एक प्रॉपर्टी पड़ी है, जिसे आप बेच कर ज़रूरी राशि पा सकते हैं|

पर आप वह प्रॉपर्टी भी नहीं बेचना चाहते|

अब आप क्या करेंगे?

ऐसी स्तिथि में  आप एक प्रॉपर्टी लोन (Loan against Property) ले सकते हैं| लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी में आप अपनी प्रॉपर्टी को गिरवी (mortgage) रख कर लोना ले सकते हैं|

  1. लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी (Loan against property or LAP) क्या होता है?
  2. Loan against property और एक पर्सनल लोन में क्या अंतर है?
  3. प्रॉपर्टी लोन और होम लोन में क्या अंतर है?
  4. अपनी प्रॉपर्टी पर कितना लोन ले सकते हैं?
  5. प्रॉपर्टी लोन पर कितना ब्याज (इंटरेस्ट रेट) देना पड़ सकता है?
  6. प्रॉपर्टी पर लोन कैसे लें? किन दस्तावेजों की ज़रुरत पड़ेगी?
  7. क्या प्रॉपर्टी लोन के भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट मिलता है?
  8. प्रॉपर्टी लोन लेते समय किन बातों का ख्याल रखें?
  9. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से प्रॉपर्टी लोन लेने के बारे में जानकारी

ऐसे सभी सवालों के जवाब जानने के लिए आगे पढ़ें|

प्रॉपर्टी लोन (Loan against property or LAP) क्या होता है?

आप अपनी घर या कोई कमर्शियल प्रॉपर्टी (residential or commercial property) को गिरवी रख कर लोन ले सकते हैं|

प्लाट या खाली ज़मीन पर लोन लेने में परेशानी होगी|

क्योंकि आप अब बैंक को कुछ गिरवी दे रहे हैं, हो सकता है की बैंक आपको पर्सनल लोन देने से मना कर दे, पर प्रॉपर्टी लोन देने को तैयार हो जाए| ध्यान दे पर्सनल लोन एक असुरक्षित लोन (unsecured loan) होता है|

क्योंकि प्रॉपर्टी लोन एक secured लोन है, आपकी ब्याज दर एक पर्सनल लोन से कम हो सकती है|

आपको संपत्ति (प्रॉपर्टी) बेचने की ज़रूरत नहीं है| पर ध्यान दें लोन का भुगतान आपको करना होगा| अन्यथा बैंक आपकी प्रॉपर्टी बेच कर अपना लोन वसूल लेगा|

Loan against property और एक पर्सनल लोन में क्या अंतर है?

जैसा की ऊपर लिखा है, LAP एक सुरक्षित लोन (secured loan) है| पर्सनल लोन एक असुरक्षित लोन (unsecured loan) है|

इसीलिए प्रॉपर्टी लोन मिलना की संभावना ज्यादा हो सकती है| ब्याज दर भी पर्सनल लोन से कम होगी|

पर्सनल लोन आपको 5-10 लाख से ज्यादा का नहीं मिलेगा| पर प्रॉपर्टी पर आपको 5-10 करोड़ रुपये तक का लोन मिल सकता हैं|

पर्सनल लोन की अवधि 3-5 वर्ष से ज्यादा की नहीं होगी| इसके विपरीत एक प्रॉपर्टी लोन की अवधि 15 वर्ष तक हो सकती है|

प्रॉपर्टी लोन में आपको अपनी प्रॉपर्टी गिरवी रखनी होगी| ऐसा करने के कुछ पेपर वर्क (paper work) करना होगा| इसीलिए प्रॉपर्टी पर लोन लेने में समय ला सकता है| इसीलिए थोडा समय लग सकता है|

इसके विपरीत पर्सनल लोन आपको फटाफट मिल जाता है|

प्रॉपर्टी लोन और होम लोन में क्या अंतर है?

आप एक घर खरीदने या बनाने के लिए होम लोन लेते हैं।

प्रॉपर्टी पर लोन के मामले में, आप पहले से ही संपत्ति के मालिक हैं।

प्रॉपर्टी लोन में आप संपत्ति को गिरवी रखते हैं और लोन राशि का किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग करते हैं।

  • शिक्षा
  • चिकित्सा उपचार
  • शादी
  • व्यापार की आवश्यकताओं
  • किसी दूसरे लोन का भुगतान
  • या कोई भी अन्य उद्देश्य

बैंक आपके उपयोग करने पर प्रतिबंध नहीं लगाते हैं| बस आप इस पैसे को speculative काम की लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते और इस बात के आपको बैंक को एक घोषणापत्र (undertaking) देना होगा|

अपनी प्रॉपर्टी पर कितना लोन ले सकते हैं?

बैंक आपको 5-10 कोर्ड रुपये तक का लोन दे सकते हैं| हर बैंक की अलग पालिसी हो सकती है|

पर, लोन की राशि प्रॉपर्टी के मूल्य (market value) पर निर्भर करेगी।

लोन देने से पहले बैंक आपकी प्रॉपर्टी के मूल्य का आंकलन करता है|

आपको अपनी प्रॉपर्टी के मूल्य के 50-70% तक की राशि का लोन मिल सकता है|

साथ ही बैंक इस बात पर भी ध्यान देते हैं की आप कितने लोन का भुगतान कर सकते हैं (repayment ability)| बशर्ते आपकी प्रॉपर्टी का मूल्य 1 करोड़ रुपये हो, पर अगर आप अपनी आय पर केवल 10 लाख के लोन का भुगतान कर सकते हैं, तो बैंक आपको 10 लाख से ज्यादा का लोन नहीं देगा|

संक्षेप में, बैंक इन निम्नलिखित बातों पर विचार करेगा|

  • प्रॉपर्टी का बाजार मूल्य (market value of property)
  • आपकी प्रॉपर्टी के कागज़ सही और पूरे होने चाहिए|
  • आपकी आयु (न्यूनतम और अधिकतम आयु पर सीमा हो सकती है)
  • आप सैलरी पाते हैं और स्वरोजगार हैं (salaried or self-employed)
  • आपका वेतन या वार्षिक आय
  • आपका सिबिल (क्रेडिट) स्कोर, जितना ज्यादा है, उतना बेहतर है
  • आपके दूसरे लोन

पढ़ें: सिबिल स्कोर (CIBIL score) क्या है और कैसे आपके लोन को प्रभावित करता है?

पढ़ें: अपनी सिबिल रिपोर्ट कैसे पाएं फ्री में? (How to download free CIBIL report?

प्रॉपर्टी लोन पर कितना ब्याज (इंटरेस्ट रेट) देना पड़ सकता है?

प्रॉपर्टी लोन पर ब्याज दर स्थिर नहीं रहती| लोन लेते समय ही आपको ब्याज दर चेक करनी होगी| साथ ही यह लोन एक फ्लोटिंग रेट लोन (floating rate loan) है| आपकी लोन अवधि के दौरान भू लोन की ब्याज दर बदल सकती है|

आप विभिन्न बैंक से बात करके सबसे कम ब्याज दर वाला लोन ले सकते हैं|

SBI प्रॉपर्टी लोन (SBI loan against property) की ब्याज दर जानने के लिए आप इस लिंक पर जा सकते हैं|

प्रॉपर्टी पर मिलने वाले लोन की अवधि 15 वर्ष तक भी हो सकती है|

प्रॉपर्टी पर लोन कैसे लें? किन दस्तावेजों की ज़रुरत पड़ेगी?

आपको बैंक या NBFC जाना होगा और वहाँ जा कर आवेदन करना होगा|

हालांकि बैंकों और एनबीएफसी में दस्तावेजों की सूची अलग हो सकती है, मैं कुछ प्रमुख दस्तावेजों का यहाँ जिक्र करूंगा|

  • उधारकर्ता की पहचान और पता प्रमाण (Identity and address proof of the borrower)
  • वेतन स्लिप, फॉर्म -16 (अगर आप सैलरी पाते हैं)
  • बैंक विवरण, आयकर रिटर्न, सर्टिफाइड फाइनेंसियल स्टेटमेंट (अगर आप self-employed हैं)
  • आपकी प्रॉपर्टी के कागज़ात (property papers)

इन डाक्यूमेंट्स को तैयार रखें|

क्या प्रॉपर्टी लोन के भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट मिलता है?

नहीं, प्रॉपर्टी लोन के भुगतान पर आपको कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता| न तो आपको ब्याज के भुगतान (interest payment) पर कोई टैक्स बेनिफिट मिलता है और न ही मूल के भुगतान (principal repayment) पर कोई टैक्स बेनिफिट मिलता है|

प्रॉपर्टी लोन लेते समय किन बातों का ख्याल रखें?

अच्छी बात यह है की पआपके पास प्रॉपर्टी लोन लेने का विकल्प है परन्तु लोन लेने से पहले कुछ बातों का ख्याल रखें|

  • आपने लोन लिया है, तो चुकाना भी होगा| तो लोन लेने से पहले यह बात ज़रूर सुनिश्चित कर लें| अगर लोन नहीं चुकाया, तो बैंक प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा कर उसे बेच देगा और अपना लोना वसूल लेगा|
  • इसीलिए अगर आपकी आर्थिक स्तिथि अच्छी नहीं है, तो बेहतर होगा की आप प्रॉपर्टी पर लोन लेने की बजाय उसे बेच दें| कम से कम ब्याज तो बचेगा|
  •  लोन का ब्याज आपकी एक मात्र लागत नहीं है। प्रोसेसिंग फीस, रजिस्ट्रेशन फीस, प्रॉपर्टी वैल्यूएशन फीस (मूल्यांकन शुल्क), कानूनी शुल्क आदि जैसे कई और खर्चे भी आपको उठाना होंगे।
  • हालांकि प्रॉपर्टी लोन का ब्याज दर पर्सनल लोन से कम होने की उम्मीद है, आप पर्सनल लोन के लिए भी कोशिश करें} क्या पता आपको पर्सनल लोन ही सस्ता मिल जाए|
  • अगर बच्चों की पढाई के लिए लोन ले रहे हैं, तो शिक्षा लोन के लिए कोशिश करें| एजुकेशन लोन सस्ता भी होगा और भुगतान पर टैक्स बेनिफिट भी मिलेंगे|
  • बैंक या NBFC का फैसला करने से पहले 2-3 जगह ब्याज दर और अन्य शुल्कों का पता कर लें|

तो प्रॉपर्टी लोन लेने से पहले इन बातों का ख्याल ज़रूर रखें|

 

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से प्रॉपर्टी लोन लेने के बारे में जानकारी

आईये देखते हैं SBI से मिलने वाले प्रॉपर्टी लोन के बारे में|

मासिक आय: कम से कम 25,000 रुपये

न्यूमतम लोन राशि: 10 लाख रुपये

अधिकतम लोन राशि: 7.5 करोड़ रुपये (प्रॉपर्टी के मूल्य की 65% प्रतिशत राशि का लोन ले सकते हैं)

ब्याज दर: नवीनतम ब्याज दर जाने के लिए यहाँ क्लिक करें|

लोन की अवधि के बारें में साईट पर नहीं बताया गया है| पर यह बताया है लोन समाप्ति के समय आपकी आयु 70 वर्ष से ज्यादा नहीं हो सकती| तो अगर आपकी आयु 60 वर्ष है, तो लोन की अवधि 10 वर्ष से अधिक नहीं हो सकती|

अधिक जानकारी के लिए आप अपनी निकटतम शाखा या SBI वेबसाइट पर SBI प्रॉपर्टी लोन के पेज पर भी जा सकते हैं|आप यह जानकारी इस लिंक पर भी पा सकते हैं

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