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Mutual Fund SWP क्या है? (SWP in Hindi)

Last updated: अगस्त 2, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

SWP क्या है? (SWP in Mutual Fund in Hindi)

SWP की full form है Systematic Withdrawal Plan

अगर आपने म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश किया है और आप चाहते हैं की आपको नियमित तौर पर उस निवेश से कुछ मिलती रहे, तब आप SWP का इस्तेमाल कर सकते हैं|

जैसे की नाम से प्रतीत होता है, SWP शुरू करने पर आपके म्यूच्यूअल फण्ड निवेश से निर्धारित राशि की यूनिट्स हर महीने बिकती हैं और पैसा आपके बैंक अकाउंट में आ जाता है|

अगर आपने 5,000 रुपये की SWP चलाई, तो हर महीने 5,000 रुपये के यूनिट्स बिकेंगे और 5,000 रुपये आपके खाते में आ जायेंगे|

SWP शुरू करने के लिए आपको यह जानकारी चाहिए

  1. आप किस फण्ड से SWP चलाना चाहते हैं
  2. कितनी राशि की चलाना चाहते हैं
  3. कितने समय तक SWP चलाना कहते हैं
  4. महीने की निर्धारित तारीख

जैसे की, आप SBI डेब्ट फण्ड से हर महीने की 15 तारीख को 24 महीने तक 5,000 रुपये निकालना चाहते हैं| इसके लिए आप एक SWP चला सकते हैं|

ऐसा करने से 24 महीने तक हर महीने की 15 तारिख को 5,000 रुपये की यूनिट्स (SBI डेब्ट फण्ड से) बिकेंगी और पैसा आपके खाते मैं आ जाएगा|

एक बात का ध्यान रखें अगर आपके फण्ड में पैसा नहीं बचा है, तो SWP अपने आप खत्म हो जाएगा|

SWP (Systematic Withdrawal Plan) सिप (SIP) का बिलकुल उल्टा है

SIP में हर महीने आपके बैंक खाते से कुछ पैसे कट कर अपने आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश हो जाते हैं| जैसे की, हर मैंने 5,000 रुपये की SIP चलाई, तो हर महीने आपके खाते से 5,000 रुपये काटेंगे और म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश हो जायेंगे|

SWP में हर महीने कुछ म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट्स अपने आप बिक जाती है और आपके खाते में पैसे आ जाते हैं| अगर आपने 5,000 रुपये की SWP चलाई, तो हर महीने 5,000 रुपये के यूनिट्स बिकेंगे और 5,000 रुपये आपके बैंक खाते में आ जायेंगे|

Mutual Fund SWP शुरू करने से पहले इन बातों का ख्याल रखें

#1 SWP कभी भी इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड से न चलायें|

ऐसा इसलिए की अगर हरे बाज़ार गिरेगा, तो आपको निर्धारित आय पाने के लिए ज्यादा यूनिट्स बेचने पड़ेंगे|

उदहारण की सहायता से समझते हैं|

मान लिए आपने 5,000 रुपये के SWP चलाई है|

पहला महीना: फण्ड का NAV है 100 रुपये: आपके 50 यूनिट बिकेंगे

दूसरा महीना: फण्ड का NAV है 120 रुपये: आप 41.66 यूनिट बिकेंगे

पहला महीना: फण्ड का NAV है 80 रुपये: आप 62.5 यूनिट बिकेंगे

आप देख सकते हैं की आपको कम दाम (कम NAV) पर ज्यादा यूनिट बेचने पड़ रहे हैं| अगर ऐसा होगा, तो आपका पोर्टफोलियो काफी जल्दी खत्म (खाली( हो जाएगा)|

एक और परेशानी है| कई बार म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी भी अपने फण्ड बेचने के लिए निवेशकों को गलत सलाह दे सकते हैं| मैंने पहले एक पोस्ट में चर्चा करी थी की कैसे म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी भी लोगों के गुमराह कर सकती है| इस पोस्ट में आप देख्नेगे की एक म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी equity mutual fund से SWP करने की सलाह दे रही है|

#2 अगर SWP चलाना है, तो किसी debt mutual fund या liquid fund से चलायें| ऐसा इसलिए क्योंकि डेब्ट फण्ड में इतना उतार चढ़ाव नहीं आता|

#3 जब SWP के द्वारा यूनिट्स बिकेंगे, तो आपको capital gains हो सकते हैं और आपको टैक्स देना पड़ सकता है|

पढ़ें: नियमित आय के लिखे इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड (equity mutual fund) से dividend पर न करें भरोसा

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SBI SWP Calculator

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अपने Annual Bonus (वार्षिक बोनस) का सही इस्तेमाल कैसे करें?

Last updated: अप्रैल 7, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

आम तौर पर लोगों को मई और जून में Annual Bonus (वार्षिक बोनस) मिलता है|

अगर आपको भी अच्छे बोनस की उम्मीद है, तो अपने बोनस का सही इस्तेमाल करने पर भी अवश्य ध्यान दें|

बोनस का इंतज़ार सभी को रहता है|

आपको की नहीं, घर में सभी लोगों को आपके बोनस का इंतज़ार रहता है| सभी कुछ न कुछ फर्माहिशें हैं| आप अपने लिए भी कुछ लेना चाहते होंगे|

इन सबके बीच आपको कैसे करना चाहिए अपने annual bonus का सही इस्तेमाल|

आईये देखते हैं की आप किस तरह से Annual Bonus का सही उपयोग कर अपनी वित्तीय स्थिति को मज़बूत कर सकते हैं|

#1 क्रेडिट कार्ड या किसी भी महंगे लोन (loan) को ख़त्म करें

इसमें तो सोचने की ज़रुरत ही नहीं है|

अगर आप ने क्रेडिट कार्ड (credit card) का बिल किसी वजह पूरा नहीं भरा है, तो आपको 40% p.a. से भी ज्यादा ब्याज देना होगा| इसके अलावा अलग से पेनल्टी भी देनी होगी|

इसलिए सबसे पहले अपने क्रेडिट कार्ड के बिल का पूरा भुगतान करें|

Credit card के अलावा भी कोई महंगा लोन आपने ले रखा है, तो उसका भुगतान करें|

#2 अपने हेल्थ (Health) और लाइफ (लाइफ) इंश्योरेंस की समीक्षा (review) करें 

आपकी फाइनेंसियल प्लानिंग  में इंश्योरंस एक अहम् भूमिका निभाती है|

परन्तु काफी लोग केवल investment (निवेश) पर ध्यान देते हैं, इंश्योरेंस पर नहीं|

वह लोग अपने बजट से जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा के लिए राशि निकल ही नहीं पाते|

वार्षिक बोनस (Annual bonus) के बाद एक सही समय होता है की जब आप अपने इंश्योरेंस पोर्टफोलियो की समीक्षा कर सकते है|

अगर आपको लगता है की आपके पास उपयुक्त स्वास्थ्य और जीवन बिमा (Health and Life इंश्योरेंस) नहीं है, तो वह खरीद लें|

पढें: जानिये कौन से हैं बेस्ट टर्म इंश्योरेंस प्लान?

पढ़ें: हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम कम करने के 8 तरीके

#3 घर या कार खरीदने के लिए अग्रिम भुगतान (Down Payment)

यदि आप घर या कर खरीदने की योजना बना रहे है, तो ध्यान रखें की आपको लोन के अलावा कुछ राशि अपने जेब से भी देनी पड़ती है Down Payment के रूप में|

Annual Bonus से मिली राशि का कुछ हिस्सा आप इस कार्य के लिए भी निवेश कर सकते हैं|

पढ़ें: होम लोन लेते समय इन 6 बातों का रखें ख्याल

#4 अपने होम लोन के pre-payment (पूर्व भुगतान) के लिए

ज़्यादातर लोगों की सबे बड़ी liability Home loan की ही होती ही| और काफी लोग अपने लोन को जल्दी से जल्दी ख़तम करना चाहते हैं|

Annual Bonus की राशि का कुछ हिस्सा आप इस काम के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं|

और इन छोटे छोटे भुगतानों के असर को कम न आंके?

मान लिए आपने 20 साल के लिए 50 लाख का लोन लिया है| ब्याज की दर 10% p.a. है|

आपकी EMI 48,251 रुपये होगी|

अगर आप अपने बोनस से प्रतिवर्ष एक अतिरिक्त EMI भर देते हैं, तो आपका लोन 20 वर्षों की बजाय 16 साल तीन महीनों में ख़तम हो जाएगा|

इस बात पर गौर करें की home लोन पर आपको टैक्स बेनेफिट्स भी मिलते हैं| इसलिए आपको इस बात पर भी विचार करना होगा की इस पूर्व भुगतान (pre-payment) का आपके टैक्स बेनेफिट्स पर क्या असर पड़ेगे|

#5 टैक्स बचाने के लिए  निवेश कर सकते हैं

बहुत से लोग  टैक्स बचाने वाले इन्वेस्टमेंट्स करने के लिए फरवरी और मार्च का इंतज़ार करते है|

जैसे की कहते हैं, जल्दी का काम शैतान का|

इसी वजह से जल्दबाजी में गलती भी हो जाती हैं|

Annual Bonus से मिली राशि से इन टैक्स बचत के निवेश की शुरुआत का सकते हैं|

इसके कई फ़ायदे हैं|

पहला की आपके पास ज्यादा समय है यह सोचने के लिए की आपको कहाँ निवेश करना है|

आपको रिटर्न्स भी ज्यादा मिल सकते हैं|

अगर आप PPF में साल की शुरुआत में ही निवेश कर देंगे, तो आपको इस निवेश पर पूरे साल ब्याज मिलेगा|

अगर आप ELSS mutual fund में निवेश करना चाहते हैं, तो आप राशि एक Liquid फण्ड में जमा कर सकते हैं, उसके बाद STP (Systematic Transfer Plan) हर महीने कुछ राशि ELSS Fund में निवेश कर सकते हैं|

#6 आपातकाल (emergency) के लिए एक कोष (corpus) बनाएं

आपकी फाइनेंसियल प्लानिंग  का एक अहम् हिस्सा है की आप अपने निवेश को किसी emergency (आपातकाल, नौकरी जाने पर, परिवार में किसी की बिमारी पर) से बचाएँ|

इसका एक तरीका यह है की आप अलग से कुछ पैसा रखें  जो आप किसी भी emergency में उपयोग कर सकते हैं| यह करने के बाद आपको अपने किसी और लक्ष्य (goal) के लिए investment को नहीं छूना पड़ेगा.

यह पैसा आप बैंक Fixed Deposit या Liquid Fund में रख सकते हैं|

अगर आपने अभी तक इमरजेंसी फण्ड नहीं बनाया है, तो Annual Bonus एक अच्छा मौका है शुरुआत का|

#7 अपने पूरे Investment Portfolio की समीक्षा करें

आपको अपने इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो को नियमित अंतराल पर समीक्षा करना चाहिए|

साल में एक बार सकीक्षा करना एक अच्छा विचार है| अगर कोई adjustment करना पड़े तो आप कर सकते हैं|

अगर आपको लगता है की किसी लक्ष्य के लिए ज्यादा निवेश करने की ज़रुरत है, तो आप उसे वार्षिक बोनस  में से कर सकते हैं|

ज़िन्दगी केवल Financial Planning नहीं है

हम ने ऊपर केवल Financial Planning के बातें करी हैं|

परन्तु आपका जीवन केवल फाइनेंसियल प्लानिंग  तक सीमित नहीं रहना चाहिए|

ज़िन्दगी का आनंद लेना भी ज़रूरी है|

इसलिए Annual Bonus से परिवार के लिए और अपने लिए उपहारों ज़रूर लें, कहीं घूमने ज़रूर जायें|

जीवन परिवार से और मीठी यादों से है, आपके बैंक अकाउंट बैलेंस से नहीं|

एक संतुलन बनाएं|

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क्रेडिट कार्ड या ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड (Credit Card Fraud) की स्तिथि में क्या करें?

by दीपेश Leave a Comment

आजकल ऑनलाइन बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट या क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड स्वाइप कर के सामान खरीदने का प्रचलन काफी बढ़ गया है|

साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड और क्रेडिट कार्ड फ्रॉड (fraud) के भी बहुत सारे मामले सामने आ रहे हैं|

अगर आपके साथ कोई fraud या धोखाधड़ी हो जाए, तो आपको कितना नुकसान (liability) हो सकता है?

अगर आपके मोबाइल फ़ोन पर SMS आता है की आप क्रेडिट कार्ड पर 40,000 रुपये का सामान खरीदा गया है (जो आपने नहीं खरीदा है), तो आप क्या करेंगे?

ऐसी स्तिथि में अपने नुकसान को कम करने के लिए आपको क्या करना चाहिए?

ऐसे ही सवालों का जवाब देने की मैं इस पोस्ट में कोशिश करूंगा|

कुछ समय पहले तक ऐसे electronic transaction के fraud का मामले में कुछ स्पष्ट नियम नहीं थे| ऐसी स्तिथि में बैंक सारा बोझ उपभोक्ता पर डाल दिया करते थे|

पर अब ऐसा नहीं होगा|

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने जुलाई 2017 में कुछ नियम बनाये, जो की ऐसे धोखाधड़ी के मामलों में आपकी liability (आर्थिक ज़िम्मेदारी) तय करते हैं| Liability से मेरा मतलब नुकसान का कितना हिस्सा आपको उठाना होगा|

इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन (Electronic Banking Transaction) क्या हैं?

भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार आप दो तरह से electronic transaction कर सकते हैं|

#1 रिमोट / ऑनलाइन ट्रांजैक्शन:

ऐसी स्तिथि में आपकी या कार्ड की  प्रत्यक्ष उपस्तिथि (physical presence) की ज़रुरत नहीं है। उदहारण के तौर पर: नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड या debit कार्ड का इस्तेमाल करके ऑनलाइन भुगतान, वॉलेट आदि। यदि आप ऑनलाइन शौपिंग करते हैं, तो वह रिमोट transaction

#2 फेस 2 फेस ट्रांजैक्शन (Face-to-Face Transaction)

ऐसी मामलों में आपके क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या मोबाइल फ़ोन की मौजूदगी की आवश्यकता है| अगर आप कहीं अपना क्रेडिट कार्ड या debit कार्ड स्वाइप करते हैं उअर ATM से पैसा निकालते हैं, तो बह Face-to-Face transaction माना जाएगा।

क्रेडिट कार्ड या ऑनलाइन fraud (धोखाधड़ी) के मामले में आपका क्या आर्थिक दायित्व (liability) है?

आपकी liability निर्भर करती है कि धोखाधड़ी / अनधिकृत लेनदेन के लिए कौन जिम्मेदार है।

कोई भी धोखाधड़ी हो, तो इसमें तीन लोग ज़िम्मेदार हो सकते हैं|

  1. Fraud आपकी गलती या लापरवाही की वजह से हुआ है| अगर आप अपना मोबाइल पर आया OTP किसी से शेयर करते हैं या आप अपने क्रेडिट या debit कार्ड के PIN डिटेल्स किसी से शेयर करते हैं| और इस वजह से आपके बैंक अकाउंट या क्रेडिट अकाउंट का इस्तेमाल किया जाता है| अब यह आपकी गलती है|
  2. Fraud बैंक प्रणाली में कमी या बैंक की गलती से हुआ है| मान लिए बैंक की वेबसाइट हैक हो जाती है और आपके खाते के डिटेल्स चोरी हो जाते हैं|
  3. Third पार्टी fraud: गलती न आपकी है और न ही आपके बैंक की| किसी तीसरे पक्ष की गलती/लापरवाही की वजह से आपके कार्ड का गलत इस्तेमाल होता है|

कोई अनधिकृत लेनदेन आपकी लापरवाही, बैंकिंग प्रणाली में कमी / गलती या तीसरे पक्ष के उल्लंघन के कारण हो सकता है ।चलिए देखते हैं कि इन मामलों में से प्रत्येक में आपकी देयता क्या होगी।

1. जब आपकी गलती है

अगर आपकी लापरवाही के कारण धोखाधड़ी या fraud हुआ है, जब तक आप बैंक को इस फ्रॉड transaction के बारे में नहीं बताते, तब तक सारा नुकसान आपको उठाना होगा|

मान लिए आप किसी से अपने क्रेडिट कार्ड के डिटेल्स शेयर कर देते हैं, और आपका क्रेडिट कार्ड 5 बार गलत इस्तेमाल किया जाता है| इसके बाद ही आप बैंक को इस fraud के बारे में बताते हैं| तो in 5 transaction में होने वाले नुकसान की आपको उठाना होगा|

आपके रिपोर्ट करने के बाद भी कोई फ्रॉड transaction होता है, तो बैंक वह नुकसान उठाएगा|

2. जब बैंक की गलती है या उसके सिस्टम में कुछ कमी है

अगर कुछ fraud बैंक की गलती की वजह से होता है, तो सारा नुक्सान बैंक को उठाना होगा|

आपकी Zero Liability होगी|

इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप ऐसे किसी transaction को बैंक को रिपोर्ट करते हैं या नहीं| आपको कुछ भी नुकसान नहीं उठाना होगा|

3. जब fraud third party द्वारा किया जाता है

अगर fraud की वजह कोई तीसरा पक्ष है (न आपकी गलती है और न ही बैंक की), तो आपकी liability इस बात पर निर्भर करता है की आप बैंक को ऐसे fraud के बारे में कब बताते हैं|

अगर fraud होने के तीन दिन (3 days) के भीतर बैंक को बताते हैं: आपकी Zero liability होगी। आपको कुछ भी नुक्सान नहीं उठाना होगा|

अगर fraud होने के 4-7 दिन (4-7 days) के भीतर बैंक को बताते हैं: हर fraud transaction पर आपकी liability नीचे दी गयी टेबल के अनुसार होगी| ध्यान दें यह सीमा प्रति transaction है, न की कुल सीमा है|

Credit card fraud customer liability क्रेडिट कार्ड फ्रॉड ऑनलाइन बैंकिंग fraud

अगर fraud होने के 7 दिनों के बाद बैंक को बताते हैं

यहाँ परेशानी है| ऐसे मामलें में बैंक का बोर्ड तय करेगा की क्या किया जाना चाहिए|

लेकिन अगर आपको फ्रॉड रिपोर्ट करने में 7 से ज्यादा दिन लग रहे हैं, तो गलती आपकी भी है|

एक बात दिनों की गिनती fraud होने से नहीं, बल्कि आपको fraud की जानकारी मिलने से की जाती है| इसका मतलब जिस दिन आपको transaction का SMS, e-mail या बैंक स्टेटमेंट मिलता है, उस दिन से मीटर चालू हो जाएगा|

इस बात पर फैसला कौन करेगा की गलती किसकी है?

यह बात अहम् है|

हमनें ऊपर देखा की आपकी आर्थिक जिम्मेदारी (liability) उया नुकसान इस बात पर निर्भर करता है की इस fraud के लिए कौन ज़िम्मेदार है|

तो, इस बात का भी फैसला करना होगा की कौन ज़िम्मेदार है| कौन लेगा यह निर्णय?

अगर बैंक को लेना है, तो आप उम्मीद कर सकते हैं की वह कभी भी अपनी गलती नहीं मानेगा और सारा नुक्सान आपके ऊपर थोक देगा|

बैंक को निर्य्नायक रूप से यह साबित करना होगा की गलती आपकी है| ध्यान दें बैंक के सोचने से कुछ नहीं होता| इनको साबित करना होगा की फ्रॉड आपकी गलती से हुआ है| अगर वह ऐसा नहीं कर पाता, तो आपको कुछ भी नहीं देना होगा|

अगर यह साबित होता है कि फ्रॉड तीसरे पक्ष (third party) की गलती, लापरवाही या बदमाशी की वजह से हुआ है, तो आपकी liability (आर्थिक दायित्व) ऊपर दी गयी टेबल के हिसाब से तय होगी|

आप बैंक को कैसे fraud की खबर कर सकते हैं? (How to report Fraudulent Transaction?)

आप SMS डाल कर, ई-मेल डाल कर, फ़ोन करके या ब्रंक्च में जा कर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं|

अपनी कंप्लेंट का Acknowledgement नंबर ज़रूर लें|

यह मामला कितने दिनों में सुलझेगा?

Fraud की खबर के बाद 10 दिनों के भीतर बैंक को आपके खाते में पैसा वापिस करना होगा|

अगर बाद में आपकी गलती साबित होती है, तो बैंक वह पैसा वापिस ले सकता है|

बैंक को पूरा मामला 90 दिनों के अन्दर सुलझाना होगा|

बैंक यह सुनिश्चित करेगा की इस फ्रॉड/धोखाधड़ी की वजह से आपको कोई ब्याज का नुकसान या पेनल्टी न उठानी पड़ें|

आपको क्या करना चाहिए?

यहाँ दो पहलू हैं| पहली तो fraud होने से बचाएं, और दूसरी अगर fraud हो, तो जल्दी से जल्दी रिपोर्ट करें|

जैसा की हमनें ऊपर देखा, जितनी जल्दी रिपोर्ट करेंगे, आपको उतना कम नुकसान होगा|

पहले तो आपको सावधानी बरतनी होगी|

अपने क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के PIN, पासवर्ड या अन्य जानकारी को संभाल कर रखें और किसी से शेयर न करें| केवल सुरक्षित जगहों पर या कंप्यूटर पर ही इस्तेमाल करें|

दूसरी बात है जल्दी से जल्दी बैंक को खबर करने की|

  1. सबसे पहले अपने बैंक अकाउंट में अपना मोबाइल नंबर और इ-मेल रजिस्टर करिए|
  2. अपने SMS और ई-मेल नियमित रूप से चेक करिए|
  3. अगर आपको पता चलता है की कोई गलत transaction हुआ है, तो तुरंत बैंक को रिपोर्ट करें| बैंक से acknowledgement भी लें| ई-मेल ज़रूर डालें| क्योंकि ई-मेल खबर देने का पुख्ता सबूत है| बैंक ई-मेल को नकार नहीं सकता|

रिज़र्व बैंक के सर्कुलर को आप इस लिंक पढ़ सकते हैं|

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अपने बैंक फिक्स्ड डिपाजिट पर TDS कैसे बचाएं? (How to save TDS on Bank Fixed Deposit?)

by दीपेश Leave a Comment

अगर आप फिक्स्ड डिपाजिट में निवेश करते हैं, तो आप जानते होंगे की अगर आपका ब्याज एक सीमा से अधिक होता है, तो बैंक TDS (Tax Deduction at Source) काट लेता है|

बैंक कब फिक्स्ड डिपाजिट के ब्याज पर TDS काटते हैं?

बैंक के नियम आपकी आयु पर निर्भर करते हैं|

अगर आपकी आयु 60 वर्ष से कम है

अगर एक बैंक की सभी शाखयों में कुल मिला कर 10,000 रुपये से ज्यादा है, तो आपको ब्याज देने से पहले  ब्याज पर TDS काटा जाएगा|

अगर आपकी आयु 60 वर्ष से अधिक है

अगर एक बैंक का सभी शाखयों में कुल मिला कर 10,000 रुपये से ज्यादा है, तो आपको ब्याज देने से पहले ब्याज पर TDS काटा जाएगा| परन्तु 1 अप्रैल 2018 (FY2019) से यह सीमा 10,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गयी है| यह रियायत केवल सीनियर सिटीजन के लिए है|

अगर आपने अपना PAN जमा किया है, तो TDS 10% (ब्याज का 10%) काटा जाता है| अगर PAN जमा नहीं किया है, तो 20% TDS काटा जाता है|

यह टैक्स आपके नाम पर ही काटा जाता है और आपके Form 26AS में ही दिखाई देगा|

मान लिए आपके पास स्टेट बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में फिक्स्ड डिपाजिट हैं| SBI में ब्याज के रूप में 9,000 रुपये कमाते हैं। आईसीआईसीआई बैंक के साथ आप ब्याज के रूप में 8,000 रुपये कमाते हैं। क्योंकि दोनों ही बैंक में आपका कुल ब्याज 10,000 रुपये से कम है, कोई भी बैंक आपका TDS नहीं काटेगा।

परन्तु इसका मतलब यह नहीं की आपके 17,000 रुपये का ब्याज कर मुक्त है| आपको इन 17,000 रुपये पर अपनी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

क्या फिक्स्ड डिपाजिट पर टीडीएस से बचने का कोई तरीका है?

जी हाँ, TDS से बचने का तरीका तो है, पर कुछ ही स्तिथियों में आप इन तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं|

TDSसे बचने के लिए, आप बैंक के साथ फॉर्म 15G/15H जमा कर सकते हैं।

अगर आपकी आयु 60 वर्ष से कम है, तो आप फॉर्म 15G जमा कर सकते हैं|

अगर आपकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है, तो आप फॉर्म 15H जमा कर सकते हैं|

परन्तु हर कोई फॉर्म 15G/15H नहीं जमा कर सकता|

फॉर्म 15G/फॉर्म 15H एच कौन फाइल कर सकता है?

फॉर्म 15G जमा करने के लिए नियम/पात्रता (Eligibility)

  1. आपकी आयु 60 वर्ष से कम होनी चाहिए|
  2. आपकी ब्याज से होने वाली वाली आय 2.5 लाख रुपये (minimum tax exemption limit) से कम होनी चाहिए|
  3. आपकी कुल अनुमानित टैक्स liability शून्य होनी चाहिए (Estimated tax liability should be NIL).

फॉर्म 15H जमा करने के लिए नियम/पात्रता (Eligibility)

  1. आपकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए| आप सीनियर सिटीजन होने चाहिए|
  2. आपकी कुल अनुमानित टैक्स liability शून्य होनी चाहिए (Estimated tax liability should be NIL)| अगर आपकी आयु 60 और 80 वर्ष के बीच में हैं, तो आपको 3 लाख तक की कर योग्य आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा| अगर आपकी आयु 80 वर्ष या उससे अधिक है, तो आपको 5 लाख तक की कर योग्य आय पर टैक्स नहींदेना होगा|

आप देख सकते हैं की फॉर्म 15H जमा करने के लिए एक कंडीशन कम है| सीनियर सिटीजन के लिए ब्याज की आय की वजह से कोई अतिरिक्त प्रतिबंध नहीं है।

अगर Form 15G या 15H जमा करते हैं, तो बैंक आपका TDS नहीं काटेगा|

ध्यान दें अगर आपने बैंक में अपना PAN जमा नहीं किया है, तो आपके फॉर्म 15G/15H को वैद्य नहीं माना जाएगा|

save tds bank fixed deposit फिक्स्ड डिपाजिट पर टीडीएस बचाएँ

पढ़ें: कैसे होता है आपका इनकम टैक्स कैलकुलेट?

यदि मैं पात्र नहीं हूं, तो फॉर्म 15G या 15H जमा करने पर क्या होगा?

अगर आप फॉर्म 15G या 15H जमा करने के पात्र नहीं हैं, परन्तु फॉर्म जमा कर देते हैं, तो आपको आयकर  की धारा 277 के तहत जुर्माना या कारावास हो सकता है। इसलिए, बैंक में फॉर्म 15 जी / 15 एच फॉर्म जमाकरने से पहले फॉर्म जमा करने की पात्रता चेक कर लें|

फॉर्म 15G/15H कहाँ से मिलेगा?

आप आयकर वेबसाइट से फॉर्म 15G या फॉर्म 15H के फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। आप अपनी बैंक की शाखा से भी फॉर्म ले सकते हैं।

अगर आप भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) के फॉर्म डाउनलोड करना चाहते हैं, तो आप यहाँ से कर सकते हैं| SBI Form 15G, SBI Form 15H

फॉर्म 15G/15H कितनी बार जमा करना होता है?

फॉर्म 15G/15H एक वर्ष के लिए वैद्य होता है|

इसीलिए आपको हर वर्ष यह फॉर्म जमा करना होगा|

आप एक बार फॉर्म 15G/15H जमा कर चुके हैं, परन्तु कोई नया फिक्स्ड डिपाजिट खोलते हैं| ऐसी स्तिथि में आपको फिर से फॉर्म जमा करना होगा|

अगर मैंने फॉर्म 15G/15H जमा नहीं किया, तो क्या होगा?

डरने वाली बात नहीं है, बस हाँ थोड़ा काम बढ़ जाएगा|

  1. अगर TDS के रूप में अतिरिक्त टैक्स कट गया है, तो आप इनकम टैक्स रिटर्न भर कर रिफंड ले सकते हैं|
  2. TDS अमूमन हर तिमाही पर काटा जाता है, तो जल्दी से जल्दी जमा करें|

पर हाँ, जमा करने से पहले यह सुनिश्चित करें की आप फॉर्म 15G/15H भरने के पात्र हैं या नहीं|

क्या फॉर्म 15G या 15H के ऑनलाइन जमा कर सकते हैं?

कुछ बैंक आपको यह सुविधा प्रदान कर सकते हैं| अपने बैंक के साथ चेक करें|

टीडीएस (TDS) कटने से आपकी टैक्स liability पूरी नहीं होती

नहीं, टीडीएस (TDS) का भुगतान आपका कर दायित्व (tax liability) को पूरा नहीं करता है।

यदि आप उच्च टैक्स ब्रैकेट (20% या 30%) में आते हैं, तो आपको आयकर रिटर्न दाखिल करने के समय अतिरिक्त कर का भुगतान करना होगा|

अगर ज्यादा टैक्स कट गया है, तो आप इनकम टैक्स रिटर्न भरकर वापिस ले सकते हैं|

क्या NRI भी फॉर्म 15 जी और 15 एच दाखिल कर टीडीएस छूट का लाभ उठा सकते हैं?

आयकर अधिनियम की धारा 197 A के अनुसार, केवल भारतीय निवासियों को 15 जी और 15 एच दाखिल करके टीडीएस छूट का लाभ लेने की अनुमति है। इसलिए NRI फॉर्म 15 जी और 15 एच दाखिल कर टीडीएस छूट नहीं ले सकते हैं।

इन बातों पर भी ध्यान दें

  1. फिक्स्ड डिपाजिट पर मिलने वाले पूरे ब्याज पर टैक्स देना होता है|
  2. फिक्स्ड डिपाजिट के ब्याज पर आपको अपने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ता है|
  3. TDS कटने पर आपकी टैक्स liability खत्म नहीं होती|
  4. अगर आप 20% या 30% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं और TDS केवल 10% ही कटा है, तो आपको अतिरिक्त टैक्स अपने आप जमा करना होगा|
  5. अगर आपके ब्याज पर TDS कट गया है और आपकी टैक्स liability कम है, तो आप इनकम टैक्स रिटर्न भर कर refund ले सकते हैं|
  6. आपको फॉर्म 15G/15H हर बैंक के साथ (जहां भी आपका खाता है और TDS कट सकता है) भरना होगा|
  7. आप एक बार फॉर्म 15G/15H जमा कर चुके हैं, परन्तु कोई नया फिक्स्ड डिपाजिट खोलते हैं| ऐसी स्तिथि में आपको फिर से फॉर्म जमा करना होगा|
  8. आप सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम के साथ भी फॉर्म 15G/15H फॉर्म जमा कर सकते हैं| साथ ही अगर आपने किस कंपनी के फिक्स्ड डिपाजिट में निवेश किया है, तो वहाँ भी आप यह फॉर्म जमा कर सकते हैं|
  9. सेविंग्स बैंक अकाउंट के ब्याज पर कोई टीडीएस नहीं कटता|
  10. अगर आपकी आयु 60 वर्ष से कम है, तो आपको धारा 80TTA के तहत सेविंग्स अकाउंट पर 10,000 रुपये तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होता|
  11. अगर आपक सीनियर सिटीजन (आयु 60 वर्ष से ज्यादा) हैं, तो आपको 50,000 तक के ब्याज पर (सेविंग्स अकाउंट और फिक्स्ड डिपाजिट मिलाकर) कोई टैक्स नहीं देना होगा| यह नियम FY2019 (1 April, 2018) से लागू होगा| धारा 80TTB के तहत यह लाभ मिलेगा| अगर कुल ब्याज 50,000 से ज्यादा है, तो आपको अतिरिक्त ब्याज पर अपनी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

पढ़ें: सीनियर सिटीजन को मिलने वाले स्पेशल टैक्स बेनिफिट

Filed Under: Financial Planning, Tax Planning Tagged With: sbi फिक्स्ड डिपाजिट टीडीएस कैसे बचाएं, tax benefits for senior citizens in hindi, टीडीएस क्या है, भारतीय स्टेट बैंक फिक्स्ड डिपाजिट, सीनियर सिटीजन टैक्स बेनिफिट

सीनियर सिटीजन को मिलने वाले 7 स्पेशल टैक्स बेनिफिट

by दीपेश Leave a Comment

भारतीय सरकार वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) कुछ अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट देती है| इस पोस्ट में मैं ऐसे ही कुछ टैक्स बेनिफिट पर चर्चा करूंगा, जो की केवल वरिष्ठ नागरिकों को ही उपलब्ध हैं|

पहले जानते हैं की वरिष्ठ नागरिक की परिभाषा क्या है|

वरिष्ठ नागरिक (सीनियर सिटीजन) – आपकी आयु 60 और 80 वर्ष के बीच में है

अति-वरिष्ठ नागरिक (वैरी सीनियर सिटीजन)– आपकी आयु 80 वर्ष या उससे अधिक है

वरिष्ठ नागरिको के लिए टैक्स के लाभ (Tax Benefits for Senior Citizens) (Hindi)

#1. कम टैक्स देना पड़ता है

अगर आप इनकम टैक्स के दरें देखें, तो आप जान सकते हैं की सीनियर सिटीजन को थोड़ी राहत दी गयी है|

मैंने FY2019 के दरें दिखायीं हैं|

income tax slab FY2018 2019

तो आप देख सकते हैं की अगर आप वरिष्ठ नागरिक हैं, तो आपको 2,500 रुपये तक कम टैक्स देना पड़ सकता हैं| 3 लाख रुपये तक की आय कर मुक्त है|

अगर आप अति वरिष्ठ नागरिक हैं, तो आपको 12,500 रुपये तक कम टैक्स देना पड़ेगा| 5 लाख तक की आय कर मुक्त है|

पढ़ें: जानिये कैसे होता है आपका इनकम टैक्स कैलकुलेट

#2. 50,000 रुपये तक की इंटरेस्ट इनकम (ब्याज) पर छूठ है

यह नियम 1 April 2018 (FY2019) से लागू होगा|

वरिष्ठ नागरिकों को बचत खाते (savings account), फिक्स्ड डिपाजिट (fixed deposit) या रेकरिंग डिपाजिट (recurring deposit) पर बर्ष में 50,000 तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होगा| यह टैक्स लाभ धारा 80TTB के तहत है|

अगर ब्याज 50,000 रुपये  से ज्यादा है, तो टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

अगर आप एक सीनियर सिटीजन हैं और आपने वर्ष में फिक्स्ड डिपाजिट और बचत खाते पर 80,000 रुपये का ब्याज पाया| 50,000 रुपये तक कोई टैक्स नहीं देना होगा|

बचे हुए 30,000 रुपये पर इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

यह नियम आपने बैंकों, सहकारी बैंकों (co-operative bank) और डाकघरों (post-office) में खोलें गए खातों के लिए है।

अगर धारा 80 TTB के तहत लाभ ले रहे हैं, तो धारा 80 TTA के तहत कर लाभ नहीं ले सकते हैं। धारा 80TTA के तहत सेविंग्स बैंक अकाउंट पर मिलने वाले 10,000 रुपये तक के ब्याज पर टैक्स छूठ है|

#3. वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये से ऊपर के ब्याज पर TDS लगेगा

यह नियम भी 1 April 2018 (FY2019) से लागू होगा| FY2018 तक यह सीमा 10,000 रुपये है|

जो लोग सीनियर सिटीजन नहीं है, उनके लिए यह सीमा 10,000 रुपये है (FY2019 में भी)|

सीनियर सिटीजन के लिए TDS (Tax deduction at source) एक बड़ी परेशानी का विषय है|

बुज़ुर्ग लोग आपना काफी पैसा फिक्स्ड डिपाजिट में रखते हैं और अमूमन उनके पास आय का कोई और जरिया नहीं होता| TDS काटने पर उनको रिटर्न भरकर वापिस लेना पड़ता है| हालांकि फॉर्म 15H जमा करके आप TDS कटने से रोक सकते हैं, परन्तु यहाँ भी काफी परेशानी होती है|

#4. हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 50,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट

FY2018 तक यह टैक्स बेनिफिट 30,000 रुपये प्रति वर्ष तक सीमित है|

1 April 2018 (FY2019) से यह बेनिफिट बढ़कर 50,000 रुपये हो जाएगा|

#5. गंभीर बीमारियों के चिकित्सा उपचार के लिए टैक्स बेनिफिट 1 लाख रुपये का टैक्स बेनिफिट (Section 80DDB)

किसी गंभीर बीमारी के लिए 1 लाख रुपये तक के खर्चे के लिए टैक्स बेनिफिट मिलेगा| यह नियम FY2019 (1 April 2018) से लागू होगा|

FY2018 तक वरिष्ठ नागरिकों (senior citizen) के लिए 60,000 रुपये की सीमा थी और अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए 80,000 रुपये (> = 80 वर्ष) की सीमा थी। FY2019 से दोनों के लिए सीमा बढाकर 1 लाख प्रतिवर्ष कर दी गयी है।

ध्यान दीजिए कि 60 साल से कम उम्र के करदाताओं को सालाना 40,000 रुपये ही है|

एक बात और, सेक्शन 80DDB के तहत केवल उसी खर्चे के लिए क्लेम किया जा सकता है, जो आपने किसी इंश्योरेंस पालिसी के तहत क्लेम न किया हो|

#6. Reverse mortgage Loan Scheme के तहत मिलने वाली राशि कर मुक्त है

Reverse Mortgage Loan Scheme (RML) के तहत आप अपना घर बैंक लो गिरवी रख देते हैं और बैंक आपको आपके पूरे जीवन कुछ मासिक राशि प्रदान करती है| आप पूरे जीवन उस घर में रह सकते हैं| मृत्यु के बाद बैंक वह घर ले लेता है|

RML स्कीम केवल सीनियर सिटीजन के लिए ही उपलब्ध है|

अच्छी बात यह है की ऐसी स्कीम से मिलने वाली राशि आयकर की धारा 10(43) के तहत कर मुक्त है|

आप Reverse Mortgage Loan Scheme (RML) के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ सकते हैं|

#7. 40,000 रुपये तक का Standard Deduction

यह नियम भी FY2019 (1 April 2018)  से लागू होगा|

यह फायदा केवल सीनियर सिटीजन के लिए ही नहीं है बल्कि सभी के लिए है|

अगर आप सीनियर सिटीजन हैं और पेंशन पाते हैं, तो आप 40,000 रुपये का टैक्स बेनिफिट पा सकते हैं| ध्यान दें यह फायदा आपको तभी मिलेगा जब आप पेंशन पाते हैं|

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कार लोन के बारे में पूरी जानकारी: कैसे कम कर सकते हैं अपनी कार लोन की EMI

Last updated: फ़रवरी 13, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

आप कार लेने की सोच रहे है, पर कार की कीमत अभी पहुँच से बाहर है| परेशान होने की ज़रुरत नहीं है, आपके पास कार लोन लेने का विकल्प है|

आप कितना कार लोन ले सकते हैं? कार लोन की ब्याज कितनी होती है? कार लोन की अवधि कितनी होती है? क्या पुरानी कार के लिए भी लोन ले सकते है? कहाँ से मिलेगा लोन?

आईये जानते हैं कार लोन के बारे में विस्तार से|


कार लोन क्या होता हैं?

कार लोन एक ऐसा लोन होता है जो की आप एक कार लेने के लिए लेते हैं| आपको नयी कार या पुरानी कार (second-hand car) लेने के लिए लोन मिल सकता है|

पर हाँ, एक नयी कार के लिए लोन लेना आसान है| पुरानी कार के लिए लोन मिलने में थोड़ी परेशानी हो सकती है| और पुरानी कार के लोन के लिए आपको ब्याज दर भी ज्यादा देनी होगी|


कितना कार लोन मिल सकता है?

आपको कार की 80-90% मूल्य तक का लोन मिल सकता है| ध्यान दे मैं यहाँ ex-showroom price की बात कर रहा हूँ|

आपको कार को शोरूम से बाहर निकालने के लिए रजिस्ट्रेशन ड्यूटी और कुछ कर (tax) देने होते हैं, ex-showroom price में यह सब जोड़ कर on-road price निकाला जाता है|

कार के रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस शुल्क और करों (taxes) के लिए आपको लोन नहीं मिलता|  एक बात और, रजिस्ट्रेशन ड्यूटी और कर हर प्रदेश (state) में अलग हो सकते हैं|

अमूमन, आपको कार के ex-showroom price के अनुसार लोन मिलता है, on-road price के अनुसार नहीं| पर कुछ बैंक आपको on-road price के अनुसार भी लोन मिलता है|

साथ ही लोन राशि आपकी लोन चुकाने की क्षमता पर भी निर्भर करेगी| आपकी मासिक आय और अन्य ऋण को भी बैंक ध्यान में रखेगा|


कार लोन कहाँ मिलता है?

सभी बैंक कार लोन देते हैं|

आप भारतीय स्टेट बैंक (SBI), ICICI बैंक, HDFC बैंक या किसी और बैंक से भी कहीं से भी लोन ले सकते हैं|

साथ ही कई NBFC (Non-Banking Finance Company) भी कार लोन देती हैं|

आप महिंद्रा फाइनेंस (Mahindra Finance) जैसे कंपनी से भी लोन ले सकते हैं|

कार डीलर के भी बैंक या फाइनेंस कंपनी से tie-up होता है| आप कार डीलर के यहाँ से भी लोन के लिए एप्लाई कर सकते हैं| पर शायद वहाँ पर आपको अच्छी ब्याज दर न मिले| इसलिए कुछ भी फैसला करने से पहले बाहर भी ब्याज दरों के बारें में पता करें|

ध्यान दें कार लोन के नियम, ब्याज दर और पात्रता (eligibility) हर बैंक या कंपनी में अलग हो सकती है|


कार लोन पर इंटरेस्ट रेट (ब्याज दर) कितना होता है? सबसे सस्ता कार लोन कहाँ मिलता है?

कार लोन में आपको फिक्स्ड (Fixed) और फ्लोटिंग (Floating), दोनों तरह की ब्याज दर मिल सकती है|

कार लोन की ब्याज दर बढती घटती रहती है|

ब्याज दर आपकी कार के मॉडल/segment, CIBIL स्कोर और लोन अवधि पर निर्भर कर सकती है|

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कार लोन की ब्याज दर आप यहाँ चेक कर सकते हैं|

आईसीआईसीआई बैंक के कार लोन की ब्याज दर आप ICICI की वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं|

अभी (फरवरी 2018) SBI कार लोन की ब्याज दर 8.70% से 9.20% के बाच चल रही है|

अब यह कहना मुश्किल है, की आपको सबसे सस्ता लोन कहाँ मिलेगा| आप 2-3 बैंक में जा कर पता कर सकते हैं|

परन्तु केवल ब्याज दर पर ही ध्यान न दें| लोन के कुछ अन्य शुल्क भी होते हैं जैसे की प्रोसेसिंग फीस इत्यादि|

साथ की अगर आप समय से पहले लोन (loan pre-payment) का भुगतान करते हैं, तो आपको pre-payment penalty भी देनी पड़ सकती है| ज़ाहिर है, जहाँ pre-payment पेनल्टी कम है, वह विकल्प आपके लिए बेहतर है|

इन शुल्कों पर भी ध्यान दें|

नयी कार के लोन की ब्याज दर पुरानी कार खरीदने के लिए लोन से कम होगी|


कार लोन की अवधि कितनी होती है?

कार लोन की अवधि 3 से 5 वर्ष तक की होती है| कुछ बैंक आपको 7 वर्ष की अवधि के लोन भी दे सकते हैं|

अब क्योंकि लोन की अवधि कम होती है, EMI की राशि ज्यादा होगी|

अगर आप जानना चाहते हैं की आपके लोन की EMI कैसे कैलकुलेट होती है, तो इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं|

आप कार लोन कैलकुलेटर पर भी अपनी EMI चेक कर सकते हैं|


क्या मैं कार लोन चुकाने से पहले कार बेच सकता हूँ?

जी नहीं, अगर आप कार बेचना चाहते हैं, तो पहले आपको कार लोन चुकाना होगा|

कार लोन लेते समय कार बैंक के नाम पर hypothecate करी जाती है|


क्या पुरानी कार खरीदने ले लिए भी लोन मिलता है?

जी हाँ, जैसे की ऊपर चर्चा करी है, आप एक पुरानी कार खरीदने के लिए भी लोन ले सकते हैं|

SBI Used Car Loan में आपको 5 साल पुरानी गाड़ी तक के लिए लोन मिलता है| अधिक जानकारी के लिए आप इस लिंक पर जा सकते हैं|

पर ब्याज दर एक नयी कार के लोन से ज्यादा होगी|


कार लोन के भुगतान पर क्या टैक्स बेनिफिट मिलते हैं?

नहीं, कार लोन के भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता|


कार लोन लेने के लिए क्या दस्तावेज़ चाहिए होते हैं?

दस्तावेजों की लिस्ट हर बैंक में अलग हो सकती है|

आपको कुछ फोटो, पहचान का प्रमाण (Identity Proof), पते के प्रमाण (address proof) और आय का प्रमाण (income proof) इत्यादि देने होंगे|


कार लोन लेते समय किन बातों का रखें ख्याल?

#1 पहले  कार के मूल्य पर बातचीत (negotiate) करें, उसके बाद लोन पर

लोन पर खरीद-फरोख्त करके आप अपनी EMI कुछ कम कर सकते हैं|

परन्तु कार के मूल्य पर negotiate करना न भूलें|

कार डीलर के पास काफी मार्जिन होता है| आप थोडा दबाव डाल कर बेहतर डील पा सकते हैं|

ध्यान दें यहाँ पर बचत आपकी EMI के बचत से काफी ज्यादा हो सकती है|

कम से कम 4-5 डीलरों के पास जाएं और आपके लिए सबसे अच्छा सौदा करने का प्रयास करें।

जल्दबाजी न करें| डीलर से जा कर मिलें और discount मांगे| शायद वह आपको हाथ के हाथ डिस्काउंट न दे|

इंतज़ार करें| हो सकता है, की कुछ दिन बाद वही डीलर आपको बेहतर ऑफर दे| आखिर उसको भी कार बेचनी है|

यदि आपको छूठ नहीं मिल रही है, तो अधिक से अधिक सामान (car accessories) या सेवाओं को मुफ्त में लाने की कोशिश करें ।

उदाहरण के लिए, आप मुफ्त सीट कवर या म्यूजिक सिस्टम की मांग कर सकते हैं| टेफ़लोन कोटिंग, एंटी-रस्ट पेंटिंग (Anti-rust painting) और engine lamination मुफ्त में करने को कह सकते हैं।

कार डीलर से मोटर बीमा (Car insurance) नहीं खरीदें। वहां पर इंश्योरेंस काफी महंगा मिलता है| ऑनलाइन खरीदें| काफी पैसा बचेगा| शुरू में डीलर इस बात का विरोध करेंगे, पर अगर आप अड़े रहे तो मान जायेंगे|

#2 कार निर्माताओं द्वारा लोन की पेशकश (Loan Schemes from Car Manufacturers)

कई बार कार निर्माता (Maruti, Hyundai, Ford, Volkswagen) अपनी कार फाइनेंस कंपनी शुरू करके आपको लोन के ऑफर देते हैं|

कई बार ऐसे ऑफर काफी अच्छे भी होते हैं|

अब सोचने वाली बात है की अगर कोई कार निर्माता आपको सस्ता लोन दिलवा रहा है, तो कहीं न कहीं वह अपनी सेल बढ़ाना चाहता है इस ऑफर के ज़रिये|

आपके लिए तो अच्छा है|

पर एक बात है| आप लोन ऑफर के चक्कर में पढ़ कर कार के मूल्य पर negotiate करना न भूलें|

ध्यान दें अगर कार का मूल्य कम होगा, तो आपके लोन की EMI अपने आप कम हो जायेगी|

पहले कार के मूल्य पर बातचीत करें, उसके बाद लोन के शर्तों पर|

अगर आपको लोन की अच्छी डील नहीं मिलती, तो दूसरे बैंक या कार फाइनेंस कंपनी से बात करें|

#3 अन्य शुल्कों पर भी बातचीत करें

कार लोन छोटी अवधि (Shorter loan tenure) के लोन होते हैं|

ऐसे लोन में ऊंचे ब्याज दर का असर कम हो सकता है| जैसे की आप 5 लाख का कार लोन 5 वर्ष के लिए लेते हैं|

10% की ब्याज दर पर EMI होगी 10,623 रुपये|

11% की ब्याज दर पर EMI होगी 10,871 रुपये|

अंतर हुआ 247 रुपये प्रति माह| 10% के लोन पर आपकी बचत हुई 247 X 60 = 14,861 रुपये की

पर मान लिए 10% वाले लोन में 2.5% की प्रोसेसिंग फीस है| 11% वाले लोन में कोई भी प्रोसेसिंग फीस नहीं है|

तो आपको 10% वाले लोन में 5 लाख  X 2.5% = 12,500 रुपये की प्रोसेसिंग फीस देनी होगी| इस फीस पर 18% GST भी देना होगा| तो कुल मिला कर आपका खर्चा हुआ 14,750 रुपये|

तो आपकी ब्याज दर तो कम है, पर बैंक ने दूसरे तरीके से सब वसूल लिया|

इसीलिए केवल ब्याज दर पर ही ध्यान न दें| अन्य शुल्कों पर भी ध्यान दें|

आप प्रोसेसिंग फीस जैसे शुल्कों पर negotiate पर कर सकते हैं|

#4 कम अवधि का लोन चुनें

जितनी कम अवधि होगी, आपको उतना कम की ब्याज का भुगतान करना होगा|

पर कम अवधि की कारण आपकी EMI भी ज्यादा होगी|

अगर आप ज्यादा EMI का भुगतान कर सकते हैं, तो छोटी अवधि चुनें|

अगर ज्यादा EMI का भुगतान नहीं कर सकते, तो लम्बी अवधि चुन सकते हैं|

#5 Pre-Payment penalty कम हो

अब क्योंकि कार लोन की राशि बहुत अधिक नहीं है, ऐसा हो सकता है कि आप ऋण का पूर्व  (pre-payment) करना चाहें और ब्याज लागत को बचा सकते हैं।

पर आपको ऐसा करने से रोकने के लिए बैंक pre-payment पेनल्टी का प्रावधान रखते हैं| ऐसे में आपको पूर्व भुगतान करने पर कुछ जुर्माना देना होता है| जैसे बैंक आपसे पूर्व भुगतान राशि का 5% जुर्माने के तौर पर ले सकता है|

तो अगर आप पूर्व भुगतान करने की सोच रहे है, तो ऐसे लोन विकल्प को चुनें जहां pre-payment पेनल्टी न हो या फिर कम हो|


कार लेते समय इस लिस्ट का ध्यान रखें

  1. कार की कीमत कम करने की कोशिश करें (Negotiate on price of car)
  2. मुफ्त में सामान या सेवाएं लेने की कोशिश करें (Try to get freebies)
  3. ब्याज दर कम करने की कोशिश करें (Negotiate/find Lower Interest Rate)
  4. प्रोसेसिंग फीस, pre-payment charges इत्यादि कम करने की कोशिश करें (Find loans with low processing fee/pre-payment charges)

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