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Financial Planning

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कैसे बनाएं अपने लिए इमरजेंसी फण्ड?

by दीपेश Leave a Comment

फाइनेंसियल प्लानिंग करते समय अपने लिए इमरजेंसी फण्ड बनाना एक अहम् लक्ष्य होता है|

ध्यान दें इमरजेंसी फण्ड का मतलब किसी म्यूच्यूअल फण्ड से नहीं है| यह बस वह पैसा है जो की किसी आपातकालीन स्तिथि में आप इस्तेमाल कर सकते हैं| परिवार में किसी के इलाज़ के खर्चे के लिए, नौकरी जाने पर, अतिरिक्त पैसे की ज़रुरत पड़ने पर या किसी वित्तीय संकट में| आप इस पैसे की ऐसी स्तिथि में उपयोग कर सकते हैं|

आपके पास कितना इमरजेंसी फण्ड होना चाहिए?

सबके लिए यह संख्या अलग होगी|

मेरे अनुसार अगर आप नौकरी करते हैं और सैलरी पाते हैं, तब आप 6-8 महीने की सैलरी के बराबर पैसा इमरजेंसी फण्ड में रख सकते हैं| अन्यथा आप 12 महीनों के खर्चों के बराबर पैसा रख सकते हैं| जब खर्चों की बात आ रही है, तो अपने लोन की EMI को शामिल करना न भूलें|

अगर नौकरी नहीं करते और self-employed हैं, तब कम से कम 12-15 महीनों के खर्चों के बराबर पैसा इमरजेंसी फण्ड में रखें|

आईये अब देखते हैं की आप अपने इमरजेंसी फण्ड के पैसे को निवेश कैसे करें| परन्तु उससे पहले यह देखते हैं की इमरजेंसी फण्ड के पैसे को कैसे निवेश न करें|

क्योंकि इमरजेंसी फण्ड के पैसे की ज़रुरत आपको कभी भी पड़ सकती है, इसलिए इस पैसे को किसी भी ऐसी जगह निवेश न करें:

  1. जहां से आप आसानी से पैसा निकाल न सकें| आप प्रॉपर्टी में निवेश नहीं कर सकते, PPF या EPF में इमरजेंसी फण्ड का पैसा नहीं रख सकते|
  2. जहाँ आपके निवेश में उतार चढ़ाव आये| आपको इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में इमरजेंसी फण्ड का निवेश नहीं करना चाहिए| ज़रुरत पड़ने पर आपको नीचे दामों पर अपने यूनिट बेचनी पड़ सकती हैं|

#1 बचत खाता (सेविंग्स बैंक अकाउंट)

सबसे आसान तरीका है| सब लोग कुछ अतिरिक्त पैसा तो बचत खाते में रखते ही हैं|

आप इस पैसे को कभीं भी निकाल सकते हैं| बैंक शाखा में जा कर या ATM से|

बस आपको ब्याज दर कम मिलेगी| अधिकाँश बैंक आपको 4% p.a. की ब्याज दर देते हैं|

बचत खाते के ब्याज पर आपको 10,000 तक के ब्याज पर कोई टैक्स भी नहीं देना होता|

पढ़ें:Section 80TTA और Section 80TTB: ब्याज पर बचाएं टैक्स

#2 बैंक फिक्स्ड डिपाजिट (Bank Fixed Deposit)

आप पैसे का फिक्स्ड डिपाजिट बना सकते हैं| ज़रुरत पड़ने पर आप फिक्स्ड डिपाजिट तोड़ कर पैसा निकाल सकते हैं| FD तोड़ने की लिए आपको बैंक जाना होगा| कुछ बैंक आपको नेट बैंकिंग के साधन से भी FD तोड़ने का विकल्प देते हैं|

फिक्स्ड डिपाजिट की ब्याज दर बचत खाते की ब्याज दर से ज्यादा होगी, परन्तु समयपूर्व फिक्स्ड डिपाजिट तोड़ने पर आपको कुछ पेनल्टी देनी होगी|

ब्याज पर आपको अपने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा| अगर वरिष्ठ नागरिक हैं, तो आपको 50,000 रुपये तक के ब्याज पर रियायत मिलती है|

#3 फ्लेक्सी डिपाजिट (Flexi-Deposit)

आप इसे बचत खाते और फिक्स्ड डिपाजिट के बीच का विकल्प मान सकते हैं|

कुछ बैंक आपको फ्लेक्सी-डिपाजिट का विकल्प दे सकते हैं|

फ्लेक्सी-डिपाजिट में आपको कुछ नहीं करना होगा| आपके बचत खाते में जो अतिरिक्त पैसा (एक सीमा के ऊपर) होता है, उस राशि का अपने आप (automatically) फिक्स्ड डिपाजिट बन जाता है|

मान लिए आपके खाते में यह सीमा 25,000 रुपये है| अगर आपके खाते में 35,000 रुपये हैं, तो 10,000 रुपये की अपने आप फिक्स्ड डिपाजिट खुल जायेगी|

अगर बाद में आप 30,000 रुपये निकालना चाहते हैं, तब FD अपने आप टूट जायेगी| आप 30,000 रुपये निकाल पायेंगे और 5,000 रुपये आपके बचत खाते में रह जायेंगे|

#4 लिक्विड फण्ड (Liquid Fund)

अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करते हैं तो लिक्विड फण्ड भी एक विकल्प हो सकता है| ध्यान दें लिक्विड फण्ड इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड नहीं होते| लिक्विड फण्ड के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|

50,000 रुपये तक की राशि तो आपके खाते में हाथ के हाथ आ जाती है| उससे अधिक राशि के लिए आपको एक दिन (1 business day) का इंतज़ार करना होगा| परन्तु लिक्विड फण्ड में फिक्स्ड डिपाजिट के मुकाबले थोड़ा रिस्क रहता है|

पढ़ें: अपने लिए लिक्विड फण्ड का चुनाव कैसे करें?

#5 नकद (Cash)

आप अपने पास कुछ पैसा नकद भी रख सकते हैं| ज़्यादातर लोग कुछ पैसा नकद रखते हैं| बस, आपको इस नकद राशि पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा| बेहतर होगा की इस पैसे को बैंक में जमा करा दें|

यह थे 5 तरीके अपने इमरजेंसी फण्ड फण्ड जमा करने के|

आप इमरजेंसी के लिए कैसे निवेश करते हैं?

Filed Under: Financial Planning Tagged With: emergency fund, इमरजेंसी फण्ड, लिक्विड फण्ड

म्यूच्यूअल फण्ड में ग्रोथ (Growth) और डिविडेंड (Dividend) विकल्प क्या होते हैं? किसमें करें निवेश?

by दीपेश Leave a Comment

म्यूच्यूअल फण्ड dividend और ग्रोथ विकल्प क्या होते हैं?

हर म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम में निवेश के दो विकल्प होते हैं|

#1 Growth (ग्रोथ)

आपको कोई डिविडेंड नहीं मिलता| अगर आपको अपने निवेश से कुछ पैसा चाहिए, तो आपको अपनी कुछ यूनिट्स को बेचना होगा| यूनिट्स बेचने पर जो मुनाफा होता है, उस पर आपको capital gains टैक्स देना होता है|

ग्रोथ विकल्प में आपका पैसा निवेशित रहता है आर बेहतर तरीके से कंपाउंड (compound) हो सकता है|

SBI BlueChip Fund-Growth

#2 Dividend (डिविडेंड)

समय-समय पर आपको dividend मिलता है| Dividend कब मिलना है और कितना मिलना है, यह आपकी इच्छा के अनुसार नहीं होता| फण्ड मेनेजर पर निर्भर करता है| साथ ही dividend केवल मुनाफे में से दिया जा सकता है| इसलिए अगर स्टॉक market अच्चा नहीं कर रहे, तो फण्ड की dividend देने की क्षमता प्रभावित हो सकती है|

SBI BlueChip Fund-Dividend

ध्यान दें dividend आपके पैसे से ही आता है| आपको जितना dividend मिलता है, उतना ही आपके फण्ड का NAV कम हो जाता है| दरअसल, NAV कुछ ज्यादा गिरता है क्योंकि dividend पर Dividend डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) भी लगता है| यह टैक्स आपको नहीं देना होता| म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी यह टैक्स काटकर ही आपको पैसा देती है|

जो dividend आपके हाथ में आता है, उस पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता|

#3 Dividend Re-investment

यहाँ एक तीसरा विकल्प भी हैं| इस विकल्प में dividend आपके हाथ में नहीं आता| dividend दोबारा से म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश हो जाता है| बाकी सब, dividend विकल्प के सामान ही है|

ग्रोथ या डिविडेंड किस विकल्प में निवेश करें?

ग्रोथ विकल्प में आपके पास पैसा केवल यूनिट्स बेचें पर आता है| ऐसे में आपको कैपिटल गेन्स हो सकते हैं और उस पर आपको टैक्स देना होगा|

डिविडेंड विकल्प में आपके dividend पर DDT (डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स) लगता है|

इसलिए आपका निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा की आपको किस पर कम टैक्स देना होगा|

Capital gain पर या Dividend पर?

अगर कैपिटल gain पर कम टैक्स देना होगा, तो Growth option बेहतर है|

अगर dividend पर कम टैक्स देना होगा, तो Dividend विकल्प बेहतर है|

म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर या dividend मिलने पर कितना टैक्स देना होता है?

इस बारे में मैंने इस पोस्ट में विस्तार से चर्चा करी है|

संक्षिप्त में जानकारी के लिए नीचे देख सकते हैं|

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स बजट 2018
म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर या डिविडेंड पर कितना टैक्स लगता है?

Dividend (डिविडेंड) और Growth (ग्रोथ) में क्या चुनाव करें?

यह निर्भर करेगा इन बातों पर:

  1. आप किस तरह के फंड में निवेश कर रहे हैं (इक्विटी या डेब्ट फण्ड)
  2. आप कितनी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं
  3. आप किस टैक्स स्लैब में आते हैं (केवल डेब्ट फण्ड में चुनाव प्रभावित होगा)

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड (Equity Mutual Fund) में क्या करना चाहिए?

देखिये इक्विटी म्यूच्यूअल फंड में कम अवधि के लिए निवेश करना अच्छा विचार नहीं है|

अगर आप एक वर्ष से अधिक के लिए निवेश कर रहे हैं, तो आपको capital gain पर 10.4% टैक्स देना होगा| यहीं आपको dividend पर तकरीबन 11.5% का टैक्स देना होगा|

इसलिए ग्रोथ option बेहतर है|

अगर आप इक्विटी फण्ड में निवेश कर रहे हैं, तो ग्रोथ विकल्प (Growth option) में ही निवेश करें|

कुछ निवेशकों नियमित आय के लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के विकल्प में निवेश करते हैं| यह एक बुरा आईडिया है| पहले तो dividend की कोई गारंटी नहीं है| दूसरी बात आप Growth option के यूनिट्स बेचकर भी अपनी ज़रुरत पूरी कर सकते हैं| टैक्स भी कम लगेगा| मैंने इस विषय पर दूसरे पोस्ट में विस्तार से चर्चा करी है|

पढ़ें: नियमित आय के लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के dividend पर भरोसा न करें

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड (Debt Mutual Fund) में क्या करना चाहिए?

अगर आप डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कर रहे हैं, तो आपका निर्णय आपके टैक्स स्लैब और आपकी निवेश अवधि पर निर्भर करेगा|

अगर आप अपनी यूनिट्स को 3 वर्ष से पहले बेचते हैं, तो आपको मुनाफे पर अपनी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

अगर आप अपनी यूनिट्स को 3 वर्ष के बाद बेचते हैं, तो आपको मुनाफे 20% (indexation के बाद) टैक्स देना होगा|

Dividend पर तकरीबन 28% DDT लगता है|

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में चुनाव करना आसान है|

अगर आप 5% या 20% वाले टैक्स स्लैब में आते हैं, तो Growth विकल्प में निवेश करें| निवेश अवधि से कोई फर्क नहीं पड़ता| Dividend विकल्प में 28% टैक्स लगेगा| मुनाफे पर केवल 5% या 20% टैक्स लगेगा|

अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं और 3 वर्ष से कम अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, तो आपको Dividend (डिविडेंड) या Dividend Reinvestment विकल्प में निवेश करना चाहिए| मुनाफे पर 30% देना होगा, dividend विकल्प में 28% टैक्स ही लगेगा|

अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं और 3 वर्ष से अधिक अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, तब भी आपको Growth option चुनना चाहिए| मुनाफे पर 20% (इंडेक्सेशन के बाद) टैक्स देना होगा, डिविडेंड पर 28% प्रतिशत लगेगा|

संक्षेप में:

अधिक जानकारी और उदाहरणों के लिए इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ें|

Filed Under: Financial Planning, Mutual Funds Tagged With: dividend vs. growth, growth, म्यूच्यूअल फण्ड

Health Insurance Claim Settlement Ratios 2018 (हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट 2018)

Last updated: जनवरी 31, 2019 | by दीपेश Leave a Comment

जब भी हम कोई इंश्योरेंस प्लान लेने जाते हैं, तो पालिसी का चुनाव करने से पहले हम उस कंपनी के क्लेम सेटलमेंट रेश्यो (claim settlement ratio) के बारे में जानना चाहते हैं| क्लेम सेटलमेंट रेश्यो जितना ज्यादा है, आपको उस कंपनी में उतना आपको उतना ही विश्वास रहेगा|

क्लेम सेटलमेंट रेश्यो की गणना करने के लिए आप “जितने क्लेम का आपने भुगतान किया” का “जितने क्लेम आपके पास आये” से भाग (divide) करते हैं|

Claim Settlement Ratio = No. of claims settled/No. of claims received

क्लेम सेटलमेंट रेश्यो की यह परिभाषा जीवन बीमा कंपनी ( लाइफ इंश्योरेंस कंपनी) के लिए चलती है| हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में क्लेम सेटलमेंट दूसरे तरीके से देखा जाता है| यहाँ पर हम लोग Incurred Claims Ratio या ICR की बात करते हैं|

Incurred Claims Ratio (ICR) = कंपनी ने कितनी राशि का क्लेम में भुगतान किया/कंपनी ने कितना प्रीमियम इकठ्ठा किया = Amount paid in Claims/Health Insurance Premium collected during the year

जनवरी 2019 में हेल्थ इंशोयरेंस कंपनियों के लिए FY2018 की यह जानकारी रिलीज़ करी गयी|

Health Insurance Claim Settlement Ratios 2018 (हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट 2018)

incurred claims ration health insurance companies FY2018 हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट 2018

Incurred Claims Ratio (ICR) कितना होना चाहिए?

लाइफ इंश्योरेंस में क्लेम सेटलमेंट रेश्यो जितना ज्यादा है, उतना अच्छा है| परन्तु हेल्थ इंश्योरेंस के ICR के साथ ऐसा नहीं है|

अगर ICR बहुत ज्यादा है (100% से भी ज्यादा), इस बात के दो मतलब हो सकते हैं|

  1. कंपनी क्लेम सेटल करने में बहुत अच्छी है| यह एक अच्छी बात है|
  2. कंपनी ने अपनी पालिसी का दाम सही से नहीं रखा है| ऐसी स्तिथि में आने वाले समय में आपकी पालिसी का प्रीमियम एक दम से बढ़ाया जा सकता है| यह आपके लिए परेशानी की वजह है|

अब ICR किस वजह से ज्यादा है, यह बता पाना मुश्किल है|

अगर ICR बहुत कम हैं (60% से भी कम), इसकी भी दो वजह हो सकती है|

  1. कंपनी बहुत क्लेम रिजेक्ट करती है| यह परेशानी वाली बात है|
  2. कंपनी के क्लेम ही नहीं आ रहे| कंपनी ने शायद स्वस्थ्य लोगो को ही बीमा बेचा है| या फिर इंश्योरेंस कंपनी ने पालिसी का दाम सही रखा है| ऐसे में आपके लिए कुछ भी कह पाना मुश्किल है| आप नहीं कह सकते ही कंपनी अच्छी है या बुरी है|

अब ICR किस वजह से कम है, यह बता पाना मुश्किल है|

मेरे अनुसार ऐसी इंश्योरेंस कंपनी के साथ हेल्थ इंश्योरेंस खरीदें, जिनका ICR 60% से 90% के बीच में हो| केवल एक वर्ष के ICR पर ध्यान ने दें| कम से कम 2-3 वर्षों के ICR पर ध्यान दें|

उससे भी ज़रूरी बात, पालिसी लेते समय कुछ भी न छुपायें| इंश्योरेंस कंपनी को अपने स्वास्थ्य के बारे मिएँ पूरी जानकारी दें| इससे आपका क्लेम रिजेक्ट होने की संभावना कम हो जायेगी|

पढ़ें: हेल्थ इंश्योरेंस टैक्स बेनिफिट (2019)

अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट (अंग्रेजी) में पढ़ें|

Filed Under: Financial Planning, Life Insurance Tagged With: health insurance premium, हेल्थ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस और टैक्स बचत

गोल्ड बांड क्या होते हैं? क्या फायदे हैं? कैसे खरीदें?

by दीपेश Leave a Comment

सोने में निवेश करने की लिए आपको केवल सोने की सिक्के या सोने के आभूषण खरीदने की ज़रुरत नहीं है| कुछ और भी तरीके हैं सोने या गोल्ड में निवेश करने के|

आप गोल्ड म्यूच्यूअल फण्ड खरीद सकते हैं या Sovereign Gold Bond (गोल्ड बांड) भी खरीद सकते हैं|

आईये इस पोस्ट में गोल्ड बांड के बारे में विस्तार से जानते हैं|

सॉवरेन गोल्ड बांड (Sovereign Gold Bond) के बारे में कुछ अहम् बातें

  1. गोल्ड बांड में आपको 2.5% प्रति वर्ष का ब्याज मिलता है| सोने के किसी और निवेश के तरीके में आपको ब्याज नहीं मिलता|
  2. अगर आप निवेश करना चाहते हैं, तो आपको कम से कम एक यूनिट (1 gram) खरीदनी होगी|
  3. आप एक 1 वर्ष (अप्रैल से मार्च) में अधिकतम 4 किलो सोने के बराबर (4000 यूनिट) गोल्ड बांड खरीद सकते हैं|
  4. गोल्ड बांड भारत सरकार द्वारा जारी किये जाते हैं| इसलिए आपको अपने पैसे के बारे में चिंता करने की कोई ज़रुरत नहीं है| गोल्ड बांड में भारत सरकार की गारंटी होती है|
  5. गोल्ड बांड की एक यूनिट एक ग्राम सोने के सामान होती है|
  6. गोल्ड बांड 8 वर्ष बाद मेच्योर होते हैं| 8 वर्ष बाद आपको उस समय के सोने के मूल्य के अनुसार पैसा लौटा दिया जाएगा|
  7. हालांकि गोल्ड बांड 8 वर्ष में मेच्योर होते हैं, आपके पास पांचवें, छठे और सांतवें वर्ष में निर्धारत समय पर अपने बांड वापिस दे कर अपना पैसा ले सकते हैं|
  8. आप गोल्ड बांड को गिरवी रख कर गोल्ड लोन भी ले सकते हैं|
  9. गोल्ड बांड स्टॉक एक्सचेंज पर भी लिस्ट किये जायेंगे| वहाँ से भी आप गोल्ड बांड खरीद या बेच सकते हैं|

एक उदहारण की सहायता से समझते हैं

मान लिए आपने 100 यूनिट गोल्ड बांड खरीदे| इसका मतलब आपने 100 ग्राम सोना खरीदा| खरीदने के समय सोने के मूल्य 2,800 रुपये प्रति ग्राम (28,000 रुपये तोला) चल रहा था| आपने कुल मिला कर 2.8 लाख रुपये का निवेश किया|

आपको हर वर्ष 2.8 लाख X 2.5% = 7,000 रुपये का ब्याज मिलेगा| ध्यान दें आपको हर 6 महीने पर 3,500 रुपये का ब्याज मिलेगा|

8 वर्ष बाद, आपको उस समय के सोने के मूल्य के अनुसार पैसा लौटा दिया जाएगा| मान लिए उस समय सोने के मूल्य 30,000 रुपये तोला है| ऐसे में आपको 100 gram सोने के लिए 100X3,000 = 3 लाख रुपये मिलेंगे| अगर सोने का मूल्य 26,000 रुपये तोला होता है, तो आपको 2.6 लाख रुपये मिलेंगे|

सोने के दाम में उतार चढ़ाव का रिस्क आपको ही उठाना पड़ता है|

गोल्ड बांड बेचने पर टैक्स कितना देना होता है?

गोल्ड बांड के ब्याज पर आपको अपने टैक्स ब्रैकेट के अनुसार टैक्स देना होता है|

अगर आप गोल्ड बांड सरकार को वापिस देते हैं (8 वर्ष बाद मेच्योर होने पर या उससे पहले), तब आपको होने वाले मुनाफे पर कुछ भी टैक्स नहीं देना होगा| जैसे की आपने 2.8 लाख के निवेश किया था और आपको 8 वर्ष बाद 3 लाख रुपये  वापिस मिलते हैं, तब आपको इस राशि पर टैक्स देने की ज़रुरत नहीं है|

अगर आप गोल्ड बांड को स्टॉक एक्सचेंज पर बेचते हैं, तब आपको टैक्स देना होगा| अगर आप 3 वर्ष से पहले बेचते हैं, तो आपको मुनाफे पर अपने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा| अगर आप 3 वर्ष के बाद बेचते हैं, तो आपको 20% (indexation के बाद) टैक्स देना होगा|

सॉवरेन गोल्ड बांड (Sovereign Gold Bond) कैसे खरीदें?

भारत सरकार समय-समय पर सॉवरेन गोल्ड बांड ज़ारी करती है|

आप अपने बैंक की सहायता से या फिर अपने broker की सहायता से गोल्ड बांड खरीद सकते हैं| आप ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं|

अगर चाहें तो, स्टॉक एक्सचेंज पर भी सॉवरेन गोल्ड बांड खरीद या बेच सकते हैं|

आप भारतीय स्टेट बैंक की वेबसाइट पर गोल्ड बांड के बारें में अधिक जानकारी पा सकते हैं|

Filed Under: Financial Planning, Loans, Mutual Funds Tagged With: Sbi गोल्ड लोन, गोल्ड बांड, गोल्ड लोन

HDFC Life Click 2 Invest ULIP: Review (एचडीएफसी क्लिक 2 इन्वेस्ट यूलिप: समीक्षा)

by दीपेश Leave a Comment

पिछली पोस्ट में मैंने यूलिप (ULIP or Unit Linked Insurance Plan) और म्यूच्यूअल फण्ड के बीच के अंतर पर चर्चा करी थी|

हमनें देखा था की कुछ मामलों में यूलिप बेहतर है और कुछ मामलों में म्यूच्यूअल फण्ड| आप आपने पसंद के अनुसार चुनाव कर सकते हैं|

इस पोस्ट में मैं एक लोकप्रिय यूलिप के बारे में चर्चा करूंगा| HDFC Life Click 2 Invest

HDFC के इस यूलिप के बारें में जानेंगे और देखेंगे की क्या आपको इस यूलिप में निवेश करना चाहिए|


HDFC Life Click 2 Invest ULIP: Review in Hindi (एचडीएफसी क्लिक टू इन्वेस्ट यूलिप)

  1. प्रवेश के समय न्यूनतम आयु (Minimum Entry Age): कोई सीमा नहीं
  2. प्रवेश के समय अधिकतम आयु (Maximum Entry Age): 65 वर्ष
  3. मेच्योरिटी के समय न्यूनतम आयु (Minimum Exit age): 18 वर्ष
  4. मेच्योरिटी के समय अधिकतम आयु (Maximum Exit age): 75 वर्ष
  5. प्रीमियम भुगतान विकल्प (Premium Payment Options):
    1. एकल (सिंगल प्रीमियम): केवल एक बार प्रीमियम
    2. लिमिटेड प्रीमियम: प्रीमियम भुगतान अवधि के बराबर पालिसी अवधि (5,7 या 10 वर्ष)
    3. रेगुलर प्रीमियम: प्रीमियम भुगतान अवधि पालिसी अवधि के बराबर होती है, 5 से 20 वर्ष
  6. आपकी बीमा राशि आपके वार्षिक प्रीमियम पर निर्भर करेगी| न्युन्यम प्रीमियम नीचे टेबल में दी हुई है|
  7. HDFC क्लिक 2 इन्वेस्ट यूलिप एक Type-I यूलिप है| पालिसी अवधि के दौरान निवेशक की मृत्यु की स्तिथि में नॉमिनी को फण्ड वैल्यू या बीमा राशि में से अधिक राशि मिलेगी|
  8. अगर आप इस यूलिप में निवेश करते हैं, तो अपने पैसा पांच वर्ष पूरे होने से पहले नहीं निकाल सकते| Cannot take out money before completion of 5 years, प्लान सरेंडर करते हैं, तब भी आप पैसा 5 वर्ष से पहले नहीं निकाल सकते|

बेस्ट यूलिप प्लान ह्द्फ्क यूलिप हिंदी HDFC यूलिप click 2 invest age policy term premium

यूलिप आपको जीवन बीमा और निवेश दोनों का लाभ प्रदान करते हैं| आपके प्रीमियम/निवेश का कुछ जीवन बीमा प्रदान करने की ओर जाता है और कुछ पैसा निवेश की ओर|

अगर आप जानना चाहते हैं की यूलिप कैसे काम करते हैं, तो इस पोस्ट को पढ़ें|

इस यूलिप में charges कितने हैं?

हमनें पिछली पोस्ट में देखा था की यूलिप के charges आप रिटर्न को काफी प्रभवित कर सकते हैं|

जितने कम चार्ज हैं, उतना आपके लिए बेहतर है|

अगर आप जानना चाहते हैं की यूलिप के चार्ज आपके रिटर्न को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं, तो इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ें|

बेस्ट यूलिप प्लान HDFC यूलिप click 2 invest age चार्ज

यहाँ देख कर लगता है की HDFC Click 2 Invest प्लान की चार्ज बहुत ज्यादा नहीं है, जो की एक अच्छी बात है|


एचडीएफसी क्लिक टू इन्वेस्ट यूलिप में क्या फण्ड के विकल्प हैं? (Fund options in HDFC Click 2 Invest ULIP)

यह यूलिप आपको 8 फण्ड के विकल्प देता है|

  1. Equity Plus Fund
  2. Diversified Equity Fund
  3. Blue Chip Fund
  4. Opportunities Fund
  5. Balanced Fund
  6. Income Fund
  7. Bond Fund
  8. Conservative Fund

Best ulip हिंदी HDFC click 2 invest यूलिप

आप देख सकते हैं की हर फण्ड अलग प्रकार का है| कुछ फण्ड कम risky है, तो कुछ फण्ड ज्यादा| आप अपनी ज़रुरत के अनुसार फण्ड का चुनाव कर सकते हैं|

आप इन फण्ड का परफॉरमेंस HDFC Click 2 Invest की वेबसाइट पर चेक कर चेक कर सकते हैं|


HDFC Life Click 2 Invest ULIP: Death Benefit (एचडीएफसी क्लिक टू इन्वेस्ट यूलिप: मृत्यु लाभ)

HDFC क्लिक 2 इन्वेस्ट यूलिप एक Type-I यूलिप है|

पालिसी अवधि के दौरान निवेशक की मृत्यु की स्तिथि में नॉमिनी को फण्ड वैल्यू या बीमा राशि में से अधिक राशि मिलेगी|

Death Benefit = Maximum (Fund Value, Sum Assured)

जैसा की हम जानते हैं की यूलिप में आपके पैसे को निवेश किया जाता है| उस निवेश राशि से यूलिप के चार्ज भी वसूले जाते हैं| फण्ड वैल्यू (Fund Value) आपके निवेश का मूल्य है|


HDFC Life Click 2 Invest ULIP: Maturity Benefit (एचडीएफसी क्लिक टू इन्वेस्ट यूलिप: परिपक्वता लाभ)

अगर निवेशक की पालिसी अवधि के दौरान मृत्यु नहीं होती, तो उसको पालिसी अवधि के अंत में मेच्योरिटी बेनिफिट मिलेगा|

पालिसी अवधि के अंत में निवेशक को Fund Value दे दी जायेगी|


HDFC Click 2 Invest ULIP: Tax Benefit (एचडीएफसी क्लिक टू इन्वेस्ट यूलिप: टैक्स बेनिफिट)

इस HDFC यूलिप में निवेश पर आप Section 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

ध्यान दें टैक्स बेनिफिट आपकी बीमा राशि के 10% तक सीमित होगा|


इस HDFC यूलिप में मेच्योरिटी राशि पर टैक्स देना होगा? (HDFC Life Click 2 Invest: Tax Treatment)

HDFC life Click 2 Invest प्लान से मिलने वाली राशि कर-मुक्त है|

परन्तु ध्यान दें मेच्योरिटी राशि कर मुक्त होने के लिए आपकी बीमा राशि आपके वार्षिक प्रीमियम का कम से कम 10 गुना होनी चाहिए|

Life Cover (Sum Assured या जीवन बीमा) >= 10 X वार्षिक प्रीमियम (10 X Annual Premium)

यह बात दिलचस्प है|

सिंगल प्रीमियम प्लान में ऐसा नहीं होगा| जैसे की हमनें ऊपर देखा की सिंगल प्रीमियम प्लान में जीवन बीमा आपके प्रीमियम का 125% है|  Life Cover = 1.25 X वार्षिक प्रीमियम

आप देख सकते हैं बीमा राशि वार्षिक प्रीमियम के 10 गुने से कम है|

इसका मतलब अगर आप सिंगल प्रीमियम प्लान लिया है, तो मेच्योरिटी के समय मिलने वाली राशि टैक्स फ्री नहीं होगी| Maturity Amount taxable in case of Single Premium Plans

साथ ही आप देख सकते हैं की अगर प्रवेश आयु 55 वर्ष से अधिक है, तो रेगुलर ओर लिमिटेड प्रीमियम प्लान में आप बीमा राशि आपके वार्षिक प्रीमियम का केवल 7 गुना है| इसलिए ऐसी स्तिथि में भी मेच्योरिटी राशि पर टैक्स देना होगा| Maturity amount taxable if entry age is 55 years or above

देखें तो, इस एचडीएफसी यूलिप में राशि तभी कर-मुक्त है:

  1. जब आप लिमिटेड या रेगुलर प्रीमियम प्लान लें; और
  2. जब पालिसी खरीदते समय आपकी आयु 55 वर्ष से कम है

क्या आपको HDFC Click 2 Invest यूलिप में निवेश करना चाहिए?

देखिये अगर आपको जीवन बीमा की ज़रुरत नहीं है, तब इस HDFC यूलिप में निवेश न करें| आप बिना बात जीवन बीमा के लिए पैसे खर्च करेंगे (जबकि आपको जीवन बीमा चाहिए ही नहीं)| हालांकि Type-I यूलिप होने की वजह से मोर्टेलिटी चार्ज का असर कम होगा, परन्तु जब जीवन बीमा चाहिए ही नहीं, तो कुछ भी खर्चा करने की क्या आवश्यकता|

अगर आयु 55 वर्ष से अधिक है, तब भी इस यूलिप में निवेश करने की गलती न करें|

सिंगल प्रीमियम प्लान में निवेश न करें|

इस यूलिप में charges कम हैं| इसलिए अगर आपकी आयु ज्यादा नहीं है (40 वर्ष से ज्यादा नहीं है) और आपको जीवन बीमा की भी ज़रुरत है, तब आप इस प्लान में निवेश कर सकते हैं|

परन्तु हाँ, इस यूलिप की बजाय आप म्यूच्यूअल फण्ड में भी निवेश कर सकते हैं| जीवन बीमा के लिए टर्म इंश्योरेंस प्लान ले सकते हैं| यूलिप और म्यूच्यूअल फंड के बीच अंतर को जानने के लिए इस पोस्ट को पढ़ें

Source

HDFC Life Website

HDFC Click 2 Invest Product Brochure

HDFC Click 2 Invest Policy Wordings

Filed Under: Financial Planning, Life Insurance Tagged With: HDFC click 2 invest, hdfc ulip in hindi, hdfc यूलिप, बेस्ट यूलिप पालिसी, बेस्ट यूलिप प्लान

यूलिप (ULIP) और म्यूच्यूअल फण्ड (Mutual Fund) में क्या अंतर है?

by दीपेश Leave a Comment

शेयर बाज़ार में निवेश करने के लिए म्यूच्यूअल फण्ड (mutual fund) और यूलिप (ULIP) बहुत ही लोकप्रिय माध्यम हैं|

क्या आप जानते हैं की म्यूच्यूअल फण्ड और ULIP के होते हैं?

क्या आप म्यूच्यूअल फण्ड और यूलिप के अंतर जानते हैं?

आपको म्यूच्यूअल फण्ड या यूलिप में किस में निवेश करना चाहिए?

इस पोस्ट में इन सवालों के जवाब समझने की कोशिश करेंगे|

पहले संक्षिप्त में यह जानते हैं की म्यूच्यूअल फण्ड और यूलिप (ULIP or Unit Linked Insurance Plan)| उसके बाद म्यूच्यूअल फंड और यूलिप के बीच के अंतर पर चर्चा करेंगे|


म्यूच्यूअल फण्ड क्या होता है? What is a mutual fund?

जब आप म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करते हैं, तो आप अपने पैसे को एक अनुभवी निवेशक (फण्ड मेनेजर) को सौंपते है| वह फण्ड मेनेजर आपके पैसे को निवेश करता है| उस निवेश पर जो रिटर्न मिला, वह आपका|

म्यूच्यूअल फण्ड अनेक प्रकार के होते हैं, जैसे की इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड, डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड, hybrid म्यूच्यूअल फण्ड, गोल्ड म्यूच्यूअल फण्ड इत्यादि|

आप अपनी ज़रुरत के अनुसार म्यूच्यूअल फण्ड का चुनाव कर सकते हैं| म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में विस्तार से जानने के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|


यूलिप प्लान क्या होता हैं? What is a ULIP in Hindi?

यूलिप आपको investment और insurance दोनों का लाभ देता है|

आपके निवेश का कुछ हिस्सा आपको insurance प्रदान करने की ओर जाता है| बचा हुआ हिस्सा निवेश हो जाता है| हर यूलिप में आपके पास निवेश करने के लिए कई फण्ड के विकल्प होते हैं| आप अपनी ज़रुरत के अनुसार चुनाव कर सकते हैं|

यूलिप प्रमुख तौर पर दो प्रकार के होते हैं:

  1. Type-I यूलिप: धारक की मृत्यु की स्तिथि में बीमा राशि और निवेश के मूल्य (फण्ड वैल्यू) में हो राशि अधिक है, वह राशि मिलती है|
  2. Type-II यूलिप: धारक की मृत्यु की स्तिथि में बीमा राशि और फण्ड वैल्यू दोनों मिलती है|

अगर आप यह जानना चाहते हैं की यूलिप कैसे काम करते हैं, तो इस पोस्ट को पढ़ें|

आईये अब देखते हैं की म्यूच्यूअल फण्ड और यूलिप में क्या अंतर है|


#1 म्यूच्यूअल फण्ड vs. यूलिप: टैक्स बेनिफिट (Mutual Funds vs. ULIP: Tax Benefit)

यूलिप में निवेश करने पर आप Section 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

सभी म्यूच्यूअल फण्ड में आपको यह टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता| केवल इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS म्यूच्यूअल फण्ड) में निवेश करने पर ही Section 80C के तहत आपको टैक्स बेनिफिट मिलता है| किसी अन्य म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कर पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा|

विजेता: मेरे अनुसार यहाँ पर कोई स्पष्ट विजेता नहीं है|


#2 यूलिप vs. म्यूच्यूअल फण्ड: टैक्स ट्रीटमेंट (Mutual Funds vs. ULIP: Tax Treatment)

यूलिप से पैसे निकालने पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता| No Tax on maturity or surrender proceeds from ULIPs

म्यूच्यूअल फण्ड में टैक्स दो बातों पर निर्भर करता है

  1. आपने किस प्रकार का म्यूच्यूअल फण्ड खरीदा है (Type of mutual fund)
  2. आपका निवेश कितना पुराना है (holding period)

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड को एक वर्ष से पहले बेचने पर आपको मुनाफे पर 15% टैक्स देना होता है| एक वर्ष के बाद बेचने पर आपको मुनाफे पर 10% प्रतिशत टैक्स देना होगा|

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड को तीन वर्ष से पहले बेचने पर आपको अपनी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ता है| तीन बर्ष के बाद बेचने पर आपको मुनाफे पर इंडेक्सेशन के बाद 20 प्रतिशत टैक्स (20% after indexation) देना होगा|

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स बजट 2018 यूलिप

म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर लगने वाले टैक्स के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं|

विजेता: यूलिप (ULIP)


#3 यूलिप vs. म्यूच्यूअल फण्ड: पोर्टफोलियो rebalancing (Mutual Funds vs. ULIP: Portfolio Rebalancing)

कोई भी फाइनेंसियल advisor आपको समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो को rebalance करने का सुझाव देगा| Rebalancing का मतलब है किसी एक प्रकार के फण्ड को बेचकर दूसरे प्रकार के फण्ड में निवेश करना|

ऐसा आप अपने पोर्टफोलियो में Asset Allocation बनाए रखने के लिए कर सकते हैं|

यूलिप में ऐसा करने के लिए आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा| यूलिप के एक फण्ड से दूसरे फण्ड में पैसा शिफ्ट करने पर कोई टैक्स नहीं देना होता|

परन्तु म्यूच्यूअल फण्ड में ऐसा नहीं है| एक म्यूच्यूअल फण्ड से दुसरे म्यूच्यूअल फण्ड में स्विच करना का मतलब है, पहले फण्ड को बेचा और दूसरा म्यूच्यूअल फण्ड खरीदा| ऐसा करने पर आपको टैक्स देना पड़ेगा|

विजेता: यूलिप (ULIP)


#4 म्यूच्यूअल फण्ड vs. यूलिप: पैसा निकालने में आसानी  (Mutual Funds vs. ULIP: Liquidity)

यूलिप में आप पांच वर्ष पूरे होने से पहले अपने पैसे नहीं निकाल सकते| यहाँ तक की, अगर आप प्लान को सरेंडर भी कर देते हैं, तब भी आप अपने पैसे पांच वर्ष पूरे होने से पहले नहीं निकाल सकते|

म्यूच्यूअल फण्ड में ऐसा कोई प्रतिबन्ध नहीं है| बस टैक्स सेविंग म्यूच्यूअल फण्ड (ELSS या ईएलएसएस) में आप 3 वर्ष पूरा होने से पहले पैसे नहीं निकाल सकते|

किसी भी अन्य म्यूच्यूअल फण्ड में आप जब चाहें अपने पैसे निकाल सकते हैं| कुछ इक्विटी म्यूच्यूअल फंड में एक वर्ष से पहले पैसे निकालने पर आपको थोड़ी से पेनल्टी (exit load) देनी पड़ सकती है| परन्तु पैसा निकालने पर कोई पाबंधी नहीं है|

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में तो कुछ पेनल्टी भी नहीं देनी होती|

विजेता: म्यूच्यूअल फण्ड


#5 म्यूच्यूअल फण्ड vs. यूलिप: शुल्क (Mutual Funds vs. ULIP: Charges)

म्यूच्यूअल फण्ड में शुल्कों को एक ही संख्या में बताया जाता है, जिसे expense ratio कहते हैं| इसमें फण्ड मैनेजमेंट चार्ज, कमीशन इत्यादि| सभी कुछ इसी के अन्दर होता है|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में एक्सपेंस रेश्यो 1% से 2.5% प्रतिशत के बीच में होता है| डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में यह ratio कम होता है|

म्यूच्यूअल फण्ड डायरेक्ट प्लान में expense ratio कम होता है|

ध्यान दें, अगर सभी कुछ एक समान है, तो कम शुल्क का मतलब है बेहतर रिटर्न|

यूलिप में विभिन्न प्रकार के चार्ज होते हैं|

  1. Policy Administration Charge (पालिसी एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज)
  2. Premium Allocation Charge (प्रीमियम एलोकेशन चार्ज)
  3. Mortality Charge (मोर्टेलिटी चार्ज) (यह आपको जीवन बीमा प्रदान करने के लिए लिया जाता है
  4. Fund Management Charge (फण्ड मैनेजमेंट चार्ज) (यह आपके पैसे को निवेश करने की ज़िम्मेदारी के लिए लिया जाता है)

पर एक परेशानी यह है की सभी यूलिप में सभी प्रकार के चार्ज नहीं होते| शुल्कों का स्तर भी हर यूलिप में अलग हो सकता है| जैसे की बजाज एलियांज Goal Assure यूलिप में पालिसी एडमिनिस्ट्रेशन या प्रीमियम एलोकेशन चार्ज नहीं है|

विजेता: कोई स्पष्ट विजेता नहीं है| मेरे अनुसार म्यूच्यूअल फण्ड बेहतर है|


#6 म्यूच्यूअल फण्ड vs. यूलिप: रिटर्न  (Mutual Funds vs. ULIP: Returns)

किसमें रिटर्न बेहतर मिलेंगे, इस बात की कोई गारंटी नहीं है|

म्यूच्यूअल फण्ड में आपको टैक्स ज्यादा देना पड़ सकता है|

परन्तु यूलिप में आपको अधिक शुल्क देने पड़ सकते हैं| क्योंकि यूलिप में जीवन बीमा भी मिलता है, इसलिए लिए भी मोर्टेलिटी charges कटते हैं| इन शुल्कों का आपके रिटर्न पर काफी प्रभाव पड़ सकता है|

एक अहम् बात: म्यूच्यूअल फण्ड में जो NAV आपको दखता है, वही आपका रिटर्न है| ऐसी इसलिए क्योंकि NAV निकालते समय सारे चार्ज एडजस्ट कर लिए जाते हैं|

परन्तु यूलिप में कुछ चार्ज आपके NAV में एडजस्ट नहीं होते| कुछ चार्ज जैसे की मोर्टेलिटी चार्ज आपकी फण्ड की यूनिट्स को cancel करके recover किया जाता है| इसका मतलब यूलिप फण्ड का NAV आपके रिटर्न का सही अंदेशा नहीं देते|

विजेता: कोई स्पष्ट विजेता नहीं है| कोई प्रमाण नहीं है की म्यूच्यूअल फण्ड के फण्ड मेनेजर ULIP फण्ड में मेनेजर से बेहतर रिटर्न दे सकते हैं| परन्तु अगर आपके यूलिप में अत्यधिक चार्ज हैं, तो आपके रिटर्न पर काफी असर पड़ सकता है| मेरे अनुसार म्यूच्यूअल फण्ड थोड़ा बेहतर है|


#7 म्यूच्यूअल फण्ड vs. यूलिप: निवेश करने में आसानी (Mutual Funds vs. ULIP: Flexibility)

अगर आपका यूलिप फण्ड बुरे रिटर्न दे रहा है, तो आप कुछ नहीं कर सकते| बहुत से बहुत, उसी यूलिप के दूसरे फण्ड में स्विच (switch) कर सकते हैं| आप अपना पैसा कहीं और नहीं ले कर जा सकते| अगर आपको किसी और यूलिप में पैसा ले कर जाना है, तब आपको अपना प्लान सरेंडर करना होगा|

म्यूच्यूअल फण्ड में ऐसा कोई प्रतिबन्ध नहीं है| अगर आपका म्यूच्यूअल फण्ड अच्छे रिटर्न नहीं दे रहा है, तब आसानी से आप अपने म्यूच्यूअल फण्ड को बेच कर दूसरे म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कर सकते हैं|

साथ ही, अगर आप ULIP में अपने प्रीमियम से  अधिक निवेश करना चाहते हैं (top–up premium), तब आपको अपनी बीमा राशि भी बढानी होगी| अधिक बीमा राशि का मतलब अधिक mortality charges| यह आपके यूलिप के रिटर्न को प्रभावित कर सकता है| म्यूच्यूअल फण्ड में ऐसी कोई पाबंधी नहीं है|

अगर आपको एइअस लगता है की आपको अब जीवन बीमा की ज़रुरत नहीं है, तो आप अपने यूलिप से बीमा को नहीं हठा सकते| अगर आपने टर्म इंश्योरेंस प्लान लिया होता, तो आप प्रीमियम देना बंद करने पर प्लान अपने आप खत्म हो जाता|

विजेता: म्यूच्यूअल फण्डयूलिप म्यूच्यूअल फण्ड के बीच अंतर

 


यूलिप में बारे में कुछ अन्य बातें (परेशानियां)

  1. यूलिप में आपको प्रीमियम और बीमा राशि लिंक होते हैं| अमूमन आपका वार्षिक प्रीमियम आपकी बीमा राशि (Sum Assured) का 10% होता है| यहाँ पर आपकी प्रीमियम चुकाने के क्षमता से आपकी जीवा बीमा राशि प्रभावित हो सकती है| मान लिए अगर आप एक वर्ष में 50,000 रुपये निवेश कर सकते हैं, तब आप यूलिप में 5 लाख रुपये से अधिक का जीवन बीमा नहीं ले पायेंगे| टर्म इंश्योरेंस प्लान में ऐसी कोई पाबंधी नहीं है|
  2. यूलिप से मिलने वाली राशि तभी कर-मुक्त है जब की आपकी बीमा राशि (Sum Assured) आपके वार्षिक प्रीमियम का कम से कम 10 गुना हो| अगर आपकी आयु ज्यादा है या फिर आप सिंगल प्रीमियम ULIP खरीद रहे हैं, तब शायद ऐसा न हो| अगर आप यूलिप लेने की सोच रहे हैं, तब इस बात का अवश्य ख़याल रखें|
  3. यूलिप आपको जीवन बीमा भी देता है| परन्तु आपके निवेश का जो हिस्सा आपको जीवन बीमा दिलाने (mortality charges) की ओर जाता है, वह एक टर्म इंश्योरेंस प्लान के प्रीमियम के मुकाबले काफी ज्यादा होता है| इसका मतलब की टर्म इंश्योरेंस प्लान में उतना ही बीमा आपको कम कीमत में मिलता है| इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ सकते हैं|

म्यूच्यूअल फण्ड या यूलिप: किसमें निवेश करें?

स्पष्ट जवाब देना बहुत मुश्किल है| हमनें देखा की कुछ मामलों में म्यूच्यूअल फण्ड बेहतर हैं और कुछ मामलों में यूलिप (ULIP) बेहतर हैं|

बहुत कुछ आप पर निर्भर करता है|

यूलिप में निवेश और जीवन बीमा दोनों के लाभ मिलता हैं| म्यूच्यूअल फण्ड में केवल निवेश का लाभ है| यहाँ पर आपको टर्म इंश्योरेंस प्लान अलग से खरीदना पड़ेगा|

कुछ निवेशकों के लिए यूलिप को समझना आसान है| प्रीमियम देने पर आपके निवेश और जीवन बीमा दोनों की चिंता खत्म| ऐसे निवेशक यूलिप में निवेश कर सकते हैं| अगर आप यूलिप में निवेश करना चाहते हैं, तो ऐसे यूलिप का चुनाव करें जिसमें शुल्क कम हों| अधिक शुल्क आपके रिटर्न को प्रभावित कर सकते हैं| आपको सोच समझ कर अपने लिए बेस्ट यूलिप प्लान का चुनाव करना होगा|

अगर आपको जीवन बीमा नहीं चाहिए, तब तो आपको यूलिप में निवेश करना ही नहीं चाहिए| क्योंकि जब आपको जीवन बीमा चाहिए ही नहीं, तब तक जीवन बीमा की लिए खर्चा क्यों उठाना चाहेंगे| इसलिए बुजुर्गों के लिए यूलिप एक बहुत ही बेकार विकल्प है|

मुझे म्यूच्यूअल फण्ड बेहतर लगते हैं| यह मेरी निजी राय है| मैं जानता हूँ की टैक्स ज्यादा है, परन्तु flexibility (लचीलापन) और liquidity (पैसा निकालने में आसानी) म्यूच्यूअल फण्ड में ज्यादा है|

अगर जीवन बीमा की ज़रुरत है, तो मैं टर्म इंशोयरेंस प्लान लेना पसंद करूंगा|

आप कहाँ निवेश करेंगे: म्यूच्यूअल फण्ड में या यूलिप में?

Filed Under: Financial Planning, Life Insurance, Mutual Funds Tagged With: best ulip plan in hindi, ulip plan in hindi, ULIP vs. mutual funds, बेस्ट यूलिप प्लान, यूलिप और म्यूच्यूअल फण्ड के बीच अंतर

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