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हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) प्रीमियम कम करने के 8 तरीकें

Last updated: अगस्त 17, 2017 | by दीपेश Leave a Comment

अस्पाताल की सुविधायें मेहेंगी होती जा रही हैं| अगर आपको किसी कारण अस्पताल में भरती होना पड़े, तो काफी खर्चा उठाना पड़ सकता है| इसी वजह से health insurance (स्वास्थ्य बीमा) खरीदना बहुत ज़रूरी हो गया है|

Health Insurance प्लान खरीदने पर आपकी बीमारी तो दूर नहीं होगी परन्तु उस बीमारी के लिए अस्पताल के खर्चे की चिंता को काफी हद तक दूर हो सकती है|

हो सकता है की आपके employer ने आपको health insurance दिया है| परन्तु ऐसे कवर में काफी समयाएं हैं| जैसे की यह कवर केवल तभी तक रहेगा जब तक आप उस employer के साथ काम कर रहे है| नौकरी छोड़ने या बदलने पर वह कवर चला जाएगा|

इसीलिए पर्सनल health insurance कवर खरीदने की सलाह दी जाती है| परन्तु हो सकता है ऐसे प्लान का प्रीमियम आपके बजट के बाहर हो| और यही वजह है की बहुत से लोग स्वास्थ्य बीमा (health insurance प्लान) नहीं खरीदते है|पर एक बात सोचिये| अगर आपको health insurance का प्रीमियम देने में इतनी परेशानी हो रही है, तो आप अस्पताल का लम्बा बिल कैसे भरेंगे|

इस पोस्ट में, मैं स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को कम करने के लिए कुछ तरीकों पर चर्चा करूंगा|

स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को कम करने के लिए टिप्स :

#1 कम कवर के लिए ऑप्टशन

यह बिल्कुल भी कोई कवर नहीं होने से बेहतर है। यदि आप 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा (health insurance) का प्रीमियम आप नहीं दे सकते हैं (afford नहीं कर सकते), तो 2 लाख रुपये के कवर के लिए जाएं| भविष्य में जब आपका आय में बढ़त हो  और आप में ज्यादा प्रीमियम का भुगतान करने का सामर्थ्य हो, तो तब आप आप कवर को बढ़ा सकते हैं।

#2 वार्षिक कटौती (Deductible) के लिए विकल्प

बीमाकर्ता केवल एक निश्चित सीमा तक अस्पताल के खर्चा देता है| आप एक सुपर टॉप-अप प्लान(super top-up plan) ले सकते हैं।

उदाहरण के तौर पर आइये एक प्राइवेट इंशोरेंस कंपनी के प्लान को देखते हैं।

एक परिवार 4 (40, 38, 10, 4) के लिए, 10 लाख रुपये के परिवार के फ्लोटर का प्रीमियम 27,436 रुपये है।

यदि आप 3 लाख रुपये का कटौती (deductible of Rs 3 lacs) करते हैं, तो प्रीमियम 16,463 रुपये है।

ध्यान रखें ऐसे विकल्प में आपको पहले 3 लाख रुपये अपनी जेब से देने होंगे|

मान लिए, हॉस्पिटल बिल 7 लाख रुपये का है, तो 3 लाख आप देंगे और बचे 4 लाख insurance कंपनी देगी|

5 लाख रुपये की कटौती (deductible of रस 5 lacs) के साथ, सालाना  प्रीमियम 13,71 9 रुपये है।

#3 सह भुगतान(co-payment) का विकल्प

आप बीमा खरीदी के समय लागत साझा करने का विकल्प भी चुन सकते हैं।

इसे कुछ इस तरह आप समझ सकते है मान लीजिये आपके health insurance plan में 20% सह-भुगतान (co-payment) है|

तो आपको बीमा कंपनी द्वारा स्वीकार किए गए मेडिकल बिल का 20% आपको देना होगा।

सह–भुगतान (co-payment) बीमा कंपनी को दो तरीकों से मदद करता है।

  1. आप इलाज में लगी कीमत में साझा (share) करते हैं|
  2. क्योंकि आप उपचार की लागत को साझा करते हैं, जाहिर सी बात है आप अपने इलाज़ का खर्चा कम से कम रखने की कोशिश करेंगे| इससे इंश्योरेंस कंपनी को भी आपके इलाज़ में कम खर्चा करना होगा|

इसी वजह से co-payment का चुनाव करने पर आपका प्रीमियम कमहो जाता है|

#4 मातृत्व (maternity benefit) लाभ से बचें

मातृत्व लाभ के तहत, बीमा कंपनी child delivery में होने वाले खर्चे को कुछ हद तक उठाती है।

एक तरह से मातृत्व लाभ बीमा के सिद्धांत के खिलाफ है| आमतौर पर बीमा कंपनी का खर्चा तब होता है जब की आपको नुकसान हुआ हो| जैसे की कोई बीमारी, एक्सीडेंट, मृत्यु आदि| परन्तु बच्चे का जन्म तो ख़ुशी की बात है|

जो लोग family planning के तहत बच्चे प्लान कर रहे हैं, उन मामलों में तो यह खर्चा आना ही है|

इसी वजह से मातृत्व लाभ के साथ योजना (health insurance plan with maternity benefit) काफी महंगी होती है|

निजी तौर पर, मैं 50,000 रुपये से कम होने वाले लाभ के लिए 15,000 रुपये प्रति वर्ष के अतिरिक्त प्रीमियम का तीन साल तक भुगतान नहीं करुगा|

आप भी maternity बेनिफिट वाले प्लान से बचें|

#5 परिवार फ्लोटर (family floater) और व्यक्तिगत योजना (individual plan) के बीच तय करें

Family Floater प्लान में पूरा परिवार k ही प्लान में कवर हो सकता है|

अगर आप individual प्लान लेते हैं, तो हर व्यक्ति के लिए नया प्लान लेना होगा|

ध्यान रखें की Family floater का प्रीमियम सबसे ज्यादा आयु वाले सदस्य की आयु पर निर्भर करता है|

इसीलिए Family floater  प्लान एक युवा परिवार के लिया अच्छा विकल्प है| प्रीमियम भी कम होगा|

परन्तु अगर आप 45 से ऊपर हैं, तो शायद बेहतर होगा की आप अपने लिए individual प्लान लें|

इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें|

#6 दूसरी बीमा कंपनी से health insurance खरीद सकते हैं

अगर आपकी वर्तमान बीमा योजना महंगी है, तो आप दूसरी बीमा कंपनी से बीमा ले सकते हैं|

नया बीमाकर्ता कम प्रीमियम पर कवर की पेशकश कर सकता है| और इससे आपका प्रीमियम कम हो सकता है|

अपनी पालिसी को port कर सकते हैं|

#7 2 साल के लिए प्रीमियम भुगतान करना

लगभग सभी बीमाकर्ता आपको आप दो या दो से अधिक वर्षों के लिए बीमा प्रीमियम का भुगतान पर 5% से 10% की छूट देते हैं ।

मान लिये10 लाख रुपये में एक Family floater का प्रीमियम 27,436 रुपए है।

यदि आप एक साथ दो साल का भुगतान करते हैं, तो आपको 52,641 रुपये का भुगतान करना होगा, जिसके परिणामस्वरूप 2,231 रुपये की बचत होगी।

#8 Hospital Cash या OPD सुविधाओं से बचें

ऐसी सुविधायों के कुछ ख़ास फायदा नहीं होता और बिना बात प्रीमियम बढ़ जाता है|

आपको क्या करना चाहिए?

हमने स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को कम करने के विभिन्न तरीकों पर ध्यान दिया|

ध्यान रखें हर तरीके में आपने कुछ लिया है तो कुछ दिया भी है|

प्रीमियम कम हुआ है, तो कहीं न कहीं आपकी coverage भी कम हुयी है|

निर्णय आपका हिया की आप क्या करना चाहते हैं|

Source: www.PersonalFinancePlan.in

Image Credit: Flickr

Filed Under: Financial Planning, Life Insurance Tagged With: health insurance, health insurance premium

10 ऐसे खर्चे जो आपका Health Insurance plan (स्वास्थ्य बीमा) कवर नहीं करता

by दीपेश 2 Comments

आजकल जहाँ हॉस्पिटल के बिल तेजी से बढ़ रहे हैं, हेल्थ  इंश्योरेंस (health insurance या स्वास्थ्य बीमा) प्लान की अहमियत को  समझना कोई मुश्किल काम नहीं है|परन्तु अगर आप समझते हैं की आपका health insurance प्लान (स्वास्थ्य बीमा) आपकी बीमारी का सारा खर्चा उठा लेगा, तो यह भी गलत होगा|

आपको  यह भी पता होना चाहिये कि आपका हेल्थ इंश्योरेंस कुछ  जगह (case) में आपका साथ छोड़ सकता है। जिसके कारण आपको अपनी खुद के जेब से पैसे देने पड़ेगे।

इसीलिए आपके लिए यह जानना बहुत जरुरी है की आप अपने insurance प्लान की कवरेज (coverage) को  समझें, जिससे बाद में आपको परेशानी ना हो ।

आइये देखते हैं की कब आपका health insurance प्लान आपका अस्पताल का सारा खर्चा नहीं उठाएगा|

#1 क्या आपने co-payment चुना है?

अगर ऐसा है तो आपको अपने हिस्से का भुगतान खुद करना होगा , कंपनी इसमे भागीदारी नहीं लेगी।

चलिए समझते है इसका गड़ित, यदि आपने 20 % का cop-ayemt का बिकल्प चुना है तो हॉस्पिटल बिल का 20℅ आपको भरना होगा ।

मान लिये आपके कवर १० लाख रूपए का है और आपका बिल 5 लाख रुपये का बनता है| इसके साथ आपके प्लान में 20% co-payment भी है| ऐसे केस में इंश्योरेंस कंपनी केवल 4 लाख रुपये का ही भुगतान करेगी| एक लाख रुपये आपको अपनी जेब से देने होंगे|

#2 क्या आपके प्लान में आपने deductible लिया है?

आईये उदाहरण से समझते है|

मान लीजिये आपने super top-up plan ख़रीदा है 10 लाख का और उसका साल का deductible 2 लाख रुपये है, तो पहले 2 लाख का खर्चा आपको अपनी जेब से देना होगा।

अगर आपका बिल 5 लाख का है, तो 2 लाख आप देंगे और 3 लाख इंश्योरेंस कंपनी देगी| उसी साल दोबारा भरती होते हैं और 3 लाख का बिल बनता है, तो सारा खर्चा इंश्योरंस कंपनी उठाएगी क्योंकि आप 2 लाख रुपये पहले ही दे चुके हैं|

#3 किसी प्रकार का excess, sub-limit के ऊपर ?

एक बहुत आसान उदाहरण देता हूँ| मान लिजिए आपका टोटल कवर 10 लाख का है और मोतियाबिंद के इलाज के लिए 25000 की sub limit है|

अगर आप cataract (मोतियाबिंद) का ऑपरेशन कराते हैं और बिल 60,000 का बनता है, तो इंश्योरंस कंपनी केवल 25,000 ही देगी|

#4 तय कमरे के किराये से ज्यादा खर्चा(room-rent sublimit)

यह समझना कभी कभी बहुत पेचिदा हो जाता है।

अस्पताल में कई तरह के कमरे होते हैं और सबका किराया अलग अलग होता है| आपकी इंश्योरेंस पालिसी में ऐसे दैनिक किराये (daily room rent) पर लिमिट होती है| कमाल की बात यह है की दूसरे खर्चे जैसे की सर्जरी,डॉक्टर परामर्श आदि सब कमरे के किराए पर निर्भर करते हैं| जितना महंगा कमरा, उतना महंगा इलाज़|

मान लिए आपकी पालिसी में यह लिमिट 5,000 रूपये है| पर आप अस्पताल में ऐसा कमरा चुनते है जिसका किराया दिन का 10,000 रुपये है| ऐसे केस में इंश्योरेंस कंपनी केवल आधा बिल ही देगी| यह कटौती केवल कमरे के किराए पर ही नहीं, बल्कि पूरे बिल पर लगेगी|

इस केस में मान लिए 5 लाख का बिल बना है, तो इंश्योरेंस कंपनी केवल 2.5 लाख रुपये ही देगी|

इस बारें में ज्यादा जान्ने के लिए आप, यह पोस्ट पढ़ सकते हैं|

#5 इंतजार अवधि (waiting period) ख़त्म होने से पहले एक मौजूदा बीमारी (pre-existing illness) का इलाज

आपको इस तरह के waiting period की जानकारी होनी चहिये| यह जानकारी आपकी policy contract में दी होती है। सस्ते प्लान का waiting period अधिक हो सकता है ।

#6 कुछ वर्षो के लिए विशिष्ट इलाज की लागत

आपके इंश्योरेंस प्लान खरीदने के कुछ साल तक कुछ common operation कवर नहीं होते| जैसे की किडनी/गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) में पत्थर, हर्निया, cataract आदि|

ऐसा न हो तो कुछ लोग ऐसे इलाज़ का खर्चा बचाने के लिए ही इंश्योरेंस लेंगे|

ध्यान रखें की इसका आपकी pre-existing illness से कोई सम्बन्ध नहीं है|

#7 पहले 30-90 दिनों में उपचार 

हर पालिसी में पहले 30-90 दिन कोई planned ट्रीटमेंट cover नहीं होता।

ध्यान रखें की किसी दुर्घटना के वजह से hospitalization और आपातकाल स्थिति इन 30-90 दिनों में भी कवर होती है।

#8 Permanent exclusions

HIV/aids , डेंटल या cosmetic ट्रीटमेन्ट आदि आपके हेल्थ insurance में कवर नहीं होता। ऐसे और भी इलाज़ हो सकते हैं| अपने पालिसी document को सही से पढ़े और समझें|

ध्यान रखें कॉस्मेटिक सर्जरी अथवा डेंटल ट्रीटमेंट किसी दुर्घटना के कारण हुआ तो कंपनी इसे कवर कर सकती है।

#9 विदेशों में उपचार

अधिकतर policy विदेशों में उपचार नहीं कवर करती। ये सभी प्लान भारत में होने वाले उपचार को ही कवर करते हैं ।

जो प्लान विदेश में उपचार को कवर करते हैं, वह काफी मेहेंगे हो सकते हैं|

#10 उपभोग्य (consumables)

आपके अंतिम अस्पताल के बिल में ऑपरेशन का खर्च, कमरे का किराया , दवाई इत्यादि ही नहीं होते| औए भी काफी सारी चीज़ें होती हैं| जैसे की खाने का बिल, diapers, बेबी फ़ूड, TV chargesम internet charges आदि| ऐसे खर्चे आपी इइंश्योरेंस कंपनी नहीं देगी|

यह सब खर्चे आसानी से आपे बिल का 8-10% हिस्सा बना सकते हैं| यह आपको अपनी जेब से ही देने होंगे और आपको इसके लिए तैयार रहना चाहिए|

आपको क्या करना चाहिए?

आपने बशर्ते health insurance ले लिया हो, पर आपको ऐसे खर्चो को ध्यान में रखना चाहिए जो की आपका प्लान कवर नहीं करता| और आपको ऐसे खर्चो के भुगतान के लिए हमेशा कुछ पैसा बचा के रखना चाहिए|

साथ ही साथ अपने इंश्योरेंस प्लान की coverage को समझें| अपने पालिसी document को अच्छे से पढ़े|

अगर कुछ इलाज़ या बिल का हिस्सा पालिसी के हिसाब से कवर नहीं होता, तो कंपनी उसे नहीं अदा करेगी| ऐसे केस में कंपनी से लड़ने में अपना समाया बर्बाद न करें|

अपने समय और उर्जा को बचाएँ उन मामलों के लिए जहाँ पर इंश्योरेंस कंपनी ने गलत फैसला लिया है|

साथ ही कुछ पैसा जमा कर के रखें मेडिकल आपातकालीन स्तिथियों के लिए और ऐसे खर्चों के लिए जो इंश्योरेंस कंपनी कवर नहीं करती|

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प्रधानमंत्री वय वंदना योजना की पूरी जानकारी (PMVVY in Hindi)

Last updated: अक्टूबर 10, 2018 | by दीपेश 17 Comments

भारत सरकार ने वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana या PMVVY) शुरू करी थी| PMVVY को शुरू करने की वजह थी वरिष्ठ नागरिकों को अपने निवेश पर अच्छा ब्याज मिले|

काफी लोग रिटायर होने के बाद अपने निवेश (investment) से मिलने वाले ब्याज से ही अपने सारे खर्चों का भुगतान करते हैं| परन्तु पिछले कुछ समय से ब्याज दरें नीचे जा रही हैं| इससे बुजुर्गों के बजट पर काफी असर पड़ता है|

सरकार ने इस परेशानी से कुछ राहत देने के लिए प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana or PMVVY) मई 2017 में शुरू करी| LIC ने PMVVY प्रोडक्ट लॉच किया है, जिसमें 10 वर्ष तक 8% का ब्याज मिलेगा|


प्रधानमंत्री वय वंदना योजना Pradhan Vaya Vandana Yojana (PMVVY in Hindi )

  1. न्यूनतम निवेश आयु (Minimum Entry Age) – 60 साल (complete)
  2. अधिकतम आयु (Maximum Entry Age) – कोई सीमा नहीं है
  3. पालिसी टर्म – 10 साल| इसका मतलब यह है की आपको 10 साल तक पेंशन मिलेगी।
  4. पेंशन Frequency: मासिक (monthly), तिमाही (quarterly), अर्धवार्षिक (Half-yearly) या वार्षिक (annual)| आप पेंशन भुगतान आवृत्ति (frequency) का चयन कर सकते हैं।
  5. न्यूनतम पेंशन (Minimum Pension): 1,000 रुपये प्रति माह,   3,000 रुपये  प्रति तिमाही ,   6,000 रुपये  प्रति अर्ध वर्ष ( 6 महीना) या  12,000 रुपये  प्रति वर्ष
  6. अधिकतम पेंशन (Maximum Pension): 5,000 प्रति माह, प्रति तिमाही रु 15,000, प्रति अर्धवर्ष  रु  30,000 या प्रति साल रु 60,000 
  7. अधिकतम पेंशन (Maximum Pension): 10,000 रुपये  प्रति माह,   30,000 रुपये प्रति तिमाही,  60,000 रुपये प्रति अर्धवर्ष  या  1.2 लाख रुपये प्रति वर्ष  (Updated on May 3, 2018)
  8. ब्याज दर: 8% p.a.
  9. अगर आप भुगतान की frequency वार्षिक चुनते है, तो आपको 8.3% p.a. तक का रिटर्न मिल सकता है|LIC PMVYY Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana PMVVY minimum पेंशन maximum पेंशन
  10. उदाहरण के लिए: अगर आप 1.5 लाख रुपये का निवेश करते हैं और monthly (मासिक) पेंशन चाहते हैं, तो आपको हर महीने 1,000 रुपये मिलेंगे| यानी की साल के 12,000 रुपये| परन्तु अगर आप वार्षिक पेंशन चाहते हैं, तो आपको हर वर्ष 12,450 रुपये मिलेंगे|
  11. PMVVY में अधिकतम निवेश बढ़कर अब 15 लाख रुपये हो गया है| (Updated on May 3, 2018)
  12. एक बात और, निवेश की यह सीमा प्रति वरिष्ठ नागरिक है (और न की प्रति परिवार)| इसका मतलब पति और पत्नी दोनों मिला कर 30 लाख रूपए तक निवेश कर सकते हैं|
  13. निवेश करने पर GST नहीं लगेगा| 
  14. 3 मई, 2018 31 मार्च 2020 तक योजना में निवेश कर सकते है| हो सकता है की उसके बाद भी इस स्कीम को बढ़ा दिया जाए पर interest rate अलग हो सकता है|
  15. पेंशन की राशि आपकी आयु पर निर्भर नहीं है|
  16. तीन साल के बाद आप 75 प्रतिशत राशि का लोन भी ले सकते हैं|
  17. आपको मिलने वाली पेंशन पर आपके टैक्स स्लैब से अनुसार टैक्स लगेगा|
  18. इस स्कीम में निवेश करने पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा|

आप LIC की website पर इस स्कीम के बारें में ज्यादा पढ़ सकते हैं|

*बजट 2018 में PMVVY में अधिकतम निवेश 7.5लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया गया| ऐसा होने पर आपकी अधिकतम मासिक आय 5,000 रुपये से बढ़कर 10,000 रुपये हो  गयी है| भी एलआईसी के वेबसाइट पर ऐसी कोई जानकारी नहीं है परन्तु कुछ समय में आ जानी चाहिए|


प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY): कितनी पेंशन मिलेगी?

यह समझना बहुत आसान है|

आपके हर 1,000 रुपये के निवेश पर:

  1. अगर वार्षिक पेंशन (annual pension) का विकल्प चुनते हैं, तो हर वर्ष 83 रुपये मिलेंगे|
  2. अगर अर्ध-वार्षिक पेंशन (half-yearly pension) का विकल्प चुनते हैं, तो हर 6 महीने पर 40.65 रुपये मिलेंगे| यानी वर्ष के 81.30 रुपये|
  3. अगर तिमाही पेंशन (quarterly pension) का विकल्प चुनते हैं, तो हर तिमाही 20.125 रुपये मिलेंगे| यानी की हर वर्ष 80.5 रुपये|
  4. अगर मासिक पेंशन (monthly pension) का विकल्प चुनते हैं, तो हर महीने 6.67 रुपये मिलेंगे| यानी की हर वर्ष 80 रुपये|

मान लिए आपने 2 लाख रुपये के PMVVY में निवेश किया और मासिक पेंशन का विकल्प चुना, ऐसे में आपको 2 लाख * 6.67/1,000 = 1,333 रुपये की मासिक पेंशन (monthly pension) मिलेगी|

अगर वार्षिक पेंशन का चुनाव किया होता, तो आपको 2 लाख * 83/1,000 = 16,600 रुपये की वार्षिक पेंशन मिलती|


प्रधानमंत्री वंदना योजना: मृत्यु (Death)लाभ और परिपक्वता(Maturity) लाभ

अगर पालिसी अवधि (10 साल) के दौरान पॉलिसी धारक की मृत्यु होने की स्थिति में, आपके nominee को निवेश राशि (बकाया ब्याज के साथ) वापिस कर दी जायेगी|

अगर पालिसी अवधि के दौरान निवेशक की मृत्यु नहीं होती, तो सारा पैसा निवेशक को ही लौटा दिया जाएगा|


प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) में असमय (premature) exit

यह इतना आसान नहीं है| आप अपनी मर्ज़ी से कभी भी पैसा नहीं निकाल सकते|

केवल यदि आपको अपने या अपने पति या पत्नी की किसी टर्मिनल/गंभीर बीमारी के इलाज के लिए पैसे की जरूरत है, तभी आप समय के पहले पैसे निकाल सकते है ।

इस केस में भी आप को 2% की पेनल्टी देनी होगी| और आपको 98% राशि वापिस कर दी जायेगी|


प्रधानमंत्री वय वंदना योजना: टैक्स बेनिफिट (PMVVY Tax Benefit)

PMVVY में निवेश करने पर सेक्शन 80C के तहत कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता|

साथ ही मिलने वाली पेंशन पर आपको अपने टैक्स ब्रैकेट के अनुसार टैक्स देना होगा|

मेच्योरिटी के समय आपको आपका निवेश लौटा दिया जाएगा, इस राशि पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा|


SCSS  VS  PMVVY 

अब अगर 60 साल के ऊपर की आयु के लोगों के लिए किसी निवेश की बात करें,  तो सबसे पहले वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (Senior Citizens Savings Scheme or SCSS) ध्यान में आती है|

इसलिए अगर PMVVY के बारे में बात कर रहे हैं, तो हम को PMVVY की तुलना SCSS से करनी ही चाहिए|

PMVVY 10 साल के लिए 8% की गारंटी वापसी प्रदान करता है| SCSS फिलहाल (8.3% p.a.) रिटर्न देता है परन्तु यह गारंटी केवल 5 साल के लिए है|

SCSS में आप 15 लाख रुपये तक निवेश कर सकते हैं| साथ ही आप अपने पति या पत्नी के नाम पर और 15 लाख रुपये निवेश कर सकते हैं| तो कुल मिला कर आप 30 लाख तक निवेश कर सकते हैं|

दूसरी ओर, PMVVY के साथ, आप पूरे परिवार के लिए अधिकतम रु 7.5 लाख ही निवेश कर सकते हैं।

PMVVY में जो निवेश की सीमा है, वह सीमा प्रति सीनियर सिटीजन है| पहले यह निवेश सीमा पूरे परिवार के लिए थी|

तो देखें तो, पति और पत्नी (अगर दोनों वरिष्ठ नागरिक हैं), तो कुल मिलाकर 30 लाख रुपये PMVVY में निवेश कर सकते हैं और 20,000 रुपये प्रति महीने की पेंशन पा सकते हैं|

PMVVY in hindi Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana vs Senior Citizen savings scheme SCSS प्रधानमंत्री वय वंदना योजना

PMVVY में समय से पहले पालिसी रोकने (सरेंडर) करने पर आपको केवल आपके निवेश का 98% ही वापिस मिलेगा| जैसे की ऊपर लिखा है की आप किसी गंभीर बीमारी की स्तिथि में ही PMVVY को बंद कर सकते हैं| परन्तु ऐसे में भी आपको केवल 98% राशि की वापिस मिलेगी| 

आप देख सकते हैं SCSS में निवेश करने पर टैक्स बेनिफिट भी मिलता है और पैसा निकालना भी आसान है| मेरे अनुसार SCSS PMVVY (Pradhan Vaya Vandana Yojana) से बेहतर स्कीम है|

पढ़ें: एलआईसी जीवन शांति (LIC Jeevan Shanti): LIC का नया पेंशन प्लान

पढें: वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (Senior Citizens Savings Scheme or SCSS) के बारें में पूरी जानकारी


क्या आपको PMVVY में निवेश करना चाहिए?

PMVVY की अच्छी बातें:

  1. PMVVY को समझना बहुत आसान है|
  2. आप 10 साल के लिए ब्याज दर में लॉक कर सकते हैं|
  3. प्रीमियम (खरीद मूल्य) पर निर्भर नहीं करता है। जो लोग 60 साल के आस पास की आयु के हैं उनके लिए अच्छा है| ऐसे लोगों को किसी और पेंशन प्लान में इतना ब्याज मिलना मुश्किल है|
  4. यदि आप एक बैंक सावधि जमा के साथ तुलना करें, तो आज की तारिख में एक फिक्स्ड डिपॉज़िट (fixed deposit) से बहुत बेहतर ब्याज पा सकते है|

PMVVY की कमियाँ:

  1. PMVVY एक वार्षिकी उत्पाद नहीं है। तो आप केवल दस साल के लिए ही interest rate लॉक कर सकते हैं| जब आपके 10 साल पूरे होंगे, तब आपको शायद इतना interest (ब्याज) न मिले|
  2. आप गंभीर बीमारियों के मामले को छोड़कर पैसे का उपयोग नहीं कर सकते हैं|
  3. अधिकतम 7.5 लाख रुपये तक ही निवेश कर सकते हैं| अभिकतम पेंशन 5,000 रुपये प्रतिमाह ही हो सकती है|
  4. अधिकतम 15 लाख रुपये तक ही निवेश कर सकते हैं| अधिकतम  पेंशन 10,000 रुपये प्रतिमाह ही हो सकती है| अगर पति/पत्नी को मिला लें, तो निवेश राशि और पेंशन दोगुनी हो जायेगी|
  5. आपको पेंशन पर टैक्स देना होगा|

अगर आप काफी वृद्ध (75 या ऊपर) आप एक तत्काल वार्षिकी योजना (immediate annuity) के साथ एक बेहतर आय (शायद 8% से ज्यादा रिटर्न) प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही पूरे जीवन के लिए interest rate लॉक कर सकते हैं|

PMVVY उन निवेशकों के लिए अच्छा है,  जो कम इनकम टैक्स ब्रैकेट में आते हैं और एक सरल उत्पाद के लिए देख रहे हैं|

याद रखें कि PMVVY एक आय उत्पाद (income product) है, जब तक आपको नियमित आय की जरूरत न हो तब तक इस उत्पाद में निवेश न करे।


प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) में निवेश कैसे करें?

आप निकटतम एलआईसी शाखा में जा कर निवेश कर सकते हैं|

अगर आप चाहें तो PMVVY में ऑनलाइन निवेश भी कर सकते हैं|

प्रधानमंत्री वय वंदना योजना में निवेश करने के लिए आप इस लिंक पर जाएँ|

सौजन्य: https://www.PersonalFinancePlan.in

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GST से कितना असर पड़ेगा आपके इंश्योरेंस प्रीमियम (Insurance Premium) पर?

Last updated: जुलाई 15, 2017 | by दीपेश Leave a Comment

अगर आप 1 July, 2017 के बाद कोई नया इंश्योरेंस प्लान खरीदते है या फिर किसी पुरानी पालिसी के प्रीमियम का भुगतान करते हैं, तो आपको सर्विस टैक्स की जगह GST देना होगा|

सर्विस टैक्स 15% था और GST की दर इंश्योरेंस के लिए 18% है| तो आपके प्रीमियम में थोड़ी सी बढ़त होगी| इसके लिए  तैयार रहे|

प्रीमियम के किस हिस्से पर GST लगता है?

GST (या  उससे पहले सर्विस टैक्स) केवल उसी हिस्से पर लगता है, जो कि आपके जीवन बीमा की तरफ जाता है| जो हिस्सा इन्वेस्टमेंट (निवेश)  की तरफ जाता है, उस पर कोई GST (या सर्विस टैक्स) नही लगता|

टर्म इंश्योरेंस प्लान (Term Insurance plan)

टर्म इंश्योरेंस में कोई भी हिस्सा इन्वेस्टमेंट (निवेश) के लिए नहीं जाता, इस लिए पूरे प्रीमियम पर GST लगेगा|

पहले आपको 15% सर्विस टैक्स (service tax) देना पड़ता था, उसकी जगह अब आपको GST देना पड़ेगा|

तो अगर आपका बेस प्रीमियम 10,000 रुपये है, तो आपको 11,800 रुपये देना होगा| पहले आपको 11,500 रुपये देना होता था|

यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (Unit Linked Insurance Plan)

केवल उसी हिस्से पर GST देना होगा, जो की जीवन बीमा देने के लिए जाएगा| प्रीमियम के उस भाग को mortality charge कहते हैं|

तो आपको mortality charge पर GST देना होगा| ULIP में यह charge हर साल उम्र के साथ बढ़ता रहता है| इसके अलावा यह सबके लिए एक सामान नहीं होता|

पहले 15% सर्विस टैक्स  देना होता था, अब 18% GST देना होगा|

ट्रेडिशनल लाइफ इंश्योरेंस प्लान (Traditional Life Insurance Plan)

ट्रेडिशनल लाइफ इंश्योरेंस प्लान में इन्वेस्टमेंट और जीवन बीमा दोनों ही होते हैं| साथ-साथ यह पता करना भी मुश्किल होता है की प्रीमियम का कितना हिस्सा जीवन बीमा की ओर गया|

इसीलिए पहले साल आपके प्रीमियम के 25% पर GST (पहले सर्विस टैक्स) देना होता है| तो आपको प्रीमियम पर 4.5% GST (25%X18%) देना होगा| पहले आपको 3.75% (25%X 15%) देना होता था|

दूसरे साल से प्रीमियम (renewal premium) के 12.5% पर GST देना होगा| इसका मतलब प्रीमियम पर 2.25% GST देना होगा|

सिंगल प्रीमियम लाइफ इंश्योरेंस प्लान (Single Premium Life Insurance Plan)

आपको प्रीमियम के 10% हिस्से पर GST देना होगा|

इसका मतलब कुल प्रीमियम पर आपको 1.8% GST (10%X18%) देना होगा|

GST से पहले आपको कुल प्रीमियम का 1.5% सर्विस टैक्स देना होगा|

स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance)

पहले आपको base प्रीमियम पर 15% सर्विस टैक्स देना होता हा, अब आपको 18% GST देना होगा|

Impact of GST on life insurance premium

आप देख सकते हैं की GST की वजह से आपका लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरंस का प्रीमियम बढेगा|

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कैसे होता है PPF खाते में interest calculate? जानकारी से थोड़ा सा रिटर्न बढ़ा सकते हैं

Last updated: जनवरी 21, 2019 | by दीपेश 86 Comments

PPF में आपको एक फिक्स्ड (fixed) रिटर्न मिलता है|

पर क्या आप जानते है की PPF में ब्याज कैसे calculate होता है?

अगर आप जानते हैं की PPF का ब्याज (interest) किस तरीके से  निकाला जाता है, तो अपने रिटर्न को थोड़ा सा बढ़ा सकते हैं|

इस पोस्ट के अंत में एक PPF कैलकुलेटर भी दिया गया है, जिसका इस्तेमाल करके आप आप मेच्योरिटी के समय PPF राशि का अंदाजा लगा सकते हैं|

कैसे होता है PPF का ब्याज (interest) calculate? (PPF Account Calculator)

आपको हर महीने की पांचवी तारीख़ और महीने की आखरी तारिख पर जो सबसे कम balance होता है, उस पर ब्याज मिलता है|

अगर आप अपने PPF account से पैसा नहीं निकाल रहे हैं, तो समझ लिए की जो आपका PPF में जमा राशि महीने की पांच (5th) तारीख को है, उसी पर ब्याज मिलेगा|

ध्यान रखें ब्याज जुड़ता साल के आखिर में ही है| हर महीने ब्याज निकाला जाता है, पर आपके PPF account में साल के आखिर में ही जुड़ता है| तो कोई monthly compounding नहीं होती|

कितना असर पड़ सकता है?

कुछ लोग साल की शुरुआत में ही PPF में पूरे साल की लिमिट ख़तम कर देते हैं आप एक साल में PPF में 1.5 लाख रुपये से ज्यादा निवेश नहीं कर सकते|

आइये देखते हैं की अगर आप 5 अप्रैल तक निवेश करते हैं या उसके बाद, तो कितना फर्क पड़ता है|

PPF account 15 साल बाद मेच्योर (mature) होता है| मान लिए की आपने 31 मार्च को अपना account खोला (और account बिना कुछ निवेश किये खुल गया)|

हालाँकि PPF का interest rate सरकार हर तीन महीने पर बदल सकती है, मैंने पूरी अवधि के लिए ब्याज दर को 8% माना है|

PPF interest calculation 1

                                                  How is PPF interest calculated                                                   

दूसरे केस में यह माना है कि 5 अप्रैल और 5 मई के बीच में निवेश किया है

आप देख सकते हैं की 15 साल बाद अंतर तकरीबन 27 हज़ार रुपये का है| कुल राशि के मुकाबले अन्तर बहुत ज्यादा तो नहीं है पर अंतर तो है|

हर महीने देरी से जमा करें तो क्या होगा

अब हर कोई तो financial year (आर्थिक वर्ष) के पहले पाँच दिन में निवेश नहीं कर सकता| ज्यादातर लो हर महीने कुछ-कुछ राशि जमा करते हैं|

ऐसे केस में कितना अंतर आएगा| आइये देखते हैं|

अमित और मुकेश दो दोस्त हैं| दोनों नें नया PPF account खोला है और हर महीने 5 हज़ार रुपये PPF account में जमा करते हैं|

अमित को PPF के ब्याज का हिसाब मालूम है| इसीलिए वह महीने की पाँच तारीख़ से पहले निवेश करता है|

मुकेश को यह बात नहीं मालूम| वह महीने की दस तारीख को निवेश करता है|

How is PPF interest calculated MONTHLY INVESTMENT 3

पहले साल में ही 5 के पहले और पाँच के बाद निवेश करने पर 400 रुपये का अन्तर आ गया| 15 साल में यह अंतर बढ़ कर 10,860 रुपये हो जाएगा|

अब देखें तो यह अंतर बहुत ज्यादा नहीं है|

लेकिन अगर आप महीने की पाँच तारीख से पहले PPF में निवेश कर सकते हों तो बेहतर होगा|

पढ़ें: PPF अकाउंट के बारे में पूरी जानकारी (Complete Information about PPF)

ऑनलाइन पीपीएफ कैलकुलेटर (Online PPF Calculator)

अगर आप जानना चाहते हैं, की PPF में हर वर्ष कुछ राशि निवेश करने पर आपको 15 वर्ष बाद कितना पैसा मिलेगा, तब आप इस PPF कैलकुलेटर का उपयोग कर  सकते हैं| यह कैलकुलेटर पूरी तरह ऑनलाइन है|

आप चाहें तो कैलकुलेटर को डाउनलोड भी कर सकते हैं| Download PPF Calculator

पढ़ें: कैसे होती है लोन की EMI कैलकुलेट? (Loan EMI Calculator)

Filed Under: PPF Tagged With: PPF, PPF interest rate

PPF की ब्याज दर घटी

Last updated: जून 30, 2017 | by दीपेश Leave a Comment

पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड (PPF), किसान विकास पत्र और राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC) पर अब आपको कम ब्याज मिलेगा|

सरकार ने आज (30 जून, 2017) इन बचत योजनायों की ब्याज दरों को कम कर दिया है|

सभी छोटी बचत योजनायों में 0.1% की कटौती की गयी है|

क्या है PPF पर मिलने वाला नया interest rate (ब्याज दर)?

आइये जानते हैं|

PPF interest rate PPF की ब्याज दर

आपको ध्यान रखना चाहिए की:

  1. इन ब्याज दरें (interest rates) की घोषणा हर तीन महीने पर सरकार द्वारा की जाती है|
  2. इसका मतलब यह है की अब इन ब्याज दरों की समीक्षा 30 सितम्बर को करी जायेगी|
  3. हो सकता है आगे भी इन ब्याज की दरों में कटौती की जाए|
  4. ब्याज दर में गिरावट की वजह इकॉनमी में चल रहे कम interest rates भी हैं|

आप सरकार का नोटिफिकेशन यहाँ पढ़ सकते हैं|

Filed Under: PPF Tagged With: PPF, PPF interest rate, Small savings scheme

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