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एलआईसी जीवन लाभ (Plan 836): पूरी जानकारी और रिव्यु (LIC Jeevan Labh in Hindi)

Last updated: अक्टूबर 10, 2018 | by दीपेश 32 Comments

एलआईसी जीवन लाभ (प्लान 836) एक सीमित प्रीमियम, नॉन-लिंक्ड (Limited Premium, Non-linked participating endowment) एंडोमेंट प्लान है| यह पालिसी LIC ने 2016 में शुरू करी थी|

आईये जानते हैं एलआईसी जीवन लाभ के बारे में विस्तार से और देखते हैं की क्या आपको LIC Jeevan Labh में निवेश करना चाहिए|

एलआईसी जीवन लाभ (Plan 836): पूरी जानकारी और समीक्षा (LIC Jeevan Labh: Review in Hindi)

  • सीमित प्रीमियम भुगतान (limited premium payment plan) योजना है| इसका मतलब आपको प्रीमियम कम समय तक देना होगा और आपको कवर अधिक समय तक मिलेगा|
  • प्रीमियम भुगतान की अवधि पालिसी अवधि से कम है|
  • पालिसी अवधि (Policy Term): 16/21/25 वर्ष, आपके पास 3 विकल्प हैं
  • प्रीमियम भुगतान अवधि (Premium Payment Term):
    • 16 वर्ष की पालिसी अवधि के लिए 10 वर्ष
    • 21 वर्ष की पालिसी अवधि के लिए 15 वर्ष
    • 25 वर्ष की पालिसी अवधि के लिए 16 वर्ष
  • न्यूनतम प्रवेश आयु (Minimum Entry Age): 8 वर्ष
  • अधिकतम प्रवेश आयु (Maximum Entry Age)
    • 16 वर्ष की पालिसी अवधि के लिए 59 वर्ष
    • 21 वर्ष की पालिसी अवधि के लिए 54 वर्ष
    • 25 वर्ष की पालिसी अवधि के लिए 50 वर्ष
  • उदहारण के लिए देखें तो प्रीमियम 10 वर्ष भरना होगा और कवर 16 वर्ष के लिए मिलेगा| पालिसी मेच्योर भी 16 वर्ष के बाद ही होगी|
  • न्यूनतम मूल बीमित राशि (Minimum Sum Assured): 2 लाख रुपये
  • अधिकतम बेसिक बीमा राशि (Maximum Sum Assured): ऊपरी सीमा नहीं
  • आप योजना के साथ दुर्घटना मृत्यु और विकलांगता लाभ (Accidental Death and Disability Rider) राइडर खरीद सकते हैं।
  • आप 3 वर्ष के बाद पालिसी से लोन भी ले सकते हैं|
  • प्रीमियम भरने पर टैक्स बेनिफिट मिलता है|
  • परिपक्वता (मेच्योरिटी) के समय मिलने वाली राशि कर-मुक्त (tax-free) है|

एलआईसी जीवन लाभ के बारे में अधिक जानकारी आप LIC वेबसाइट पर पा सकते हैं|

एलआईसी जीवन लाभ (Plan 836): मृत्यु लाभ (LIC Jeevan Labh: Death Benefit)

पालिसी अवधि के दौरान पालिसी धारक की मृत्यु होने पर नॉमिनी को निम्नलिखित राशि मिलेगी:

बीमा राशि (Base Sum Assured) + निहित साधारण प्रत्यावर्ती बोनस (Vested Simple Reversionary Bonus) + अंतिम अतिरिक्त बोनस (Final Additional Bonus)

एलआईसी साधारण प्रत्यावर्ती बोनस (Simple Reversionary Bonus) के घोषणा हर वर्ष करती है| बोनस के राशि हर वर्ष बदल भी सकती है| यह बोनस आपके बीमा राशि के ऊपर दिया जाता है| बोनस की घोषणा प्रति 1,000 रुपये के बीमा राशि पर होता है| तो मान लिए आपका Sum Assured 5 लाख रुपये है और LIC ने आपकी पालिसी के लिए 40 रुपये प्रति 1,000 रुपये के बोनस की घोषणा करी|

ऐसी स्तिथि में आपका कुल बोनस हुआ: 40/1,000*5 लाख = 20,000 रुपये

ध्यान दें, हालांकि इस बोनस की घोषणा हर वर्ष होती है, आपको यह सारी राशि पालिसी मेच्योर होने पर ही मिलती है| इस राशि पर आपको कोई रिटर्न भी नहीं मिलता| यह राशि बस आपकी पालिसी से जुड़ जाती है|

अंतिम अतिरिक्त बोनस (Final Additional Bonus) केवल परिपक्वता या मृत्यु के वर्ष में ही लागू होता है। Simple Reversionary Bonus की तरह इस फाइनल एडिशनल बोनस की आपकी पालिसी के लिए घोषणा हर वर्ष नहीं होती|

एलआईसी जीवन लाभ (Plan 836): मेच्योरिटी लाभ (LIC Jeevan Labh: Maturity Benefit)

पालिसी मेच्योर होने पर आपको निम्नलिखित राशि मिलेगी:

बीमा राशि (Base Sum Assured) + निहित साधारण प्रत्यावर्ती बोनस (Vested Simple Reversionary Bonus) + अंतिम अतिरिक्त बोनस (Final Additional Bonus)

बोनस की परिभाषा वही है, जो की मृत्यु लाभ वाले सेक्शन में बताई गयी है|

एलआईसी लाभ में रिटर्न कैसे मिलते हैं?

देखिये एलआईसी जीवन लाभ एक participating प्लान है| इसका मतलब आपके रिटर्न इस बात पर निर्भर करता है की एलआईसी आपकी पालिसी अवधि के दौरान कितने बोनस की घोषणा करता है|

ज्यादा बोनस मिलता है, तो रिटर्न बेहतर होंगे|

बोनस की मात्र एलआईसी के इन्वेस्टमेंट के परफॉरमेंस पर निर्भर करती है| आप समझ सकते हैं की ऐसी स्तिथि में मिलने वाले बोनस का आंकलन करना आसान बात नहीं है|

परन्तु हमनें पहले और भी बहुत सारे ऐसे ही प्लान पर चर्चा करी है और देखा है की रिटर्न कुछ ख़ास अच्छे नहीं होते|

एलआईसी जीवन लाभ के रिटर्न का आंकलन करने के हमें बोनस के मात्र की कल्पना करनी होगी और उसके बाद हम रिटर्न देख सकते हैं|

एक उदार्हर्ण की सहायता से देखते हैं:

एक 35 वर्षीय पुरुष 25 साल की पालिसी अवधि की लिए 10 लाख का बीम खरीदता है|

उसका वार्षिक प्रीमियम होगा 44,952 रुपये| GST लगने के बाद प्रीमियम होगा 46,975 रुपये पहले वर्ष के लिए| दूसरे वर्ष से प्रीमियम होगा 45,975 रुपये|

यह प्रीमियम 16 वर्ष तक भरना होगा| पालिसी मेच्योर 25 वर्ष के बाद होगी|

आप किसी दूसरी आयु, बीमा राशि और पालिसी अवधि के लिए प्रीमियम जानने की लिए एलआईसी जीवन लाभ प्रीमियम कैलकुलेटर का उपयोग कर सकते हैं|

मैंने 50 रुपये प्रति 1,000 रुपये बीमा का Simple Reversionary Bonus माना है|

फाइनल एडिशनल बोनस के लिए हम कई वैल्यू के लिए आपकी मेच्योरिटी राशि निकालने की कोशिश करेंगे|

lic jeevan labh एलआईसी जीवन लाभ प्रीमियम कैलकुलेटर

क्या आपको एलआईसी जीवन लाभ में निवेश करना चाहिए?

अब फैसला आपको करना है की यह रिटर्न एक लम्बी अवधि के निवेश के लिए पर्याप्त है की नहीं|

मेरे अनुसार तो नहीं है|

आप एक साधारण टर्म इंश्योरेंस प्लान और पीपीएफ के मिश्रण के साथ बेहतर कर सकते हैं| मेरा मतलब एक टर्म इंश्योरेंस प्लान खरीदें और बची हुई राशि को पीपीएफ में निवेश करें| आपको रिटर्न भी बेहतर मिलेगा और जीवन बीमा भी|

अगर रिस्क ले सकते हैं, तो इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में भी निवेश कर सकते हैं|

अगर मेरी राय मानें, तो एलआईसी जीवन लाभ में निवेश न करें|

एलआईसी के दूसरे प्लान के बारे में जानकारी

एलआईसी जीवन शांति (LIC Jeevan Shanti): LIC का नया सिंगल प्रीमियम पेंशन प्लान

एलआईसी न्यू जीवन आनंद (LIC New Jeevan Anand)

एलआईसी जीवन उत्कर्ष (LIC Jeevan Utkarsh)

एलआईसी जीवन उमंग (LIC Jeevan Umang)

एलआईसी न्यू एंडोमेंट प्लान (LIC New Endowment Plan)

एलआईसी जीवन तरुण (LIC Jeevan Tarun)

एलआईसी ई-टर्म प्लान (LIC e-Term plan)

एलआईसी बीमा बचत प्लान (LIC Bima Bachat Plan)

एलआईसी जीवन शिरोमणि (LIC Jeevan Shiromani)

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प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY)

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Filed Under: LIC, Life Insurance Tagged With: LIC Jeevan Labh in Hindi, Lic जीवन लाभ योजना, एलआईसी की जीवन लाभ योजना, एलआईसी जीवन लाभ, एलआईसी जीवन लाभ प्रीमियम कैलकुलेटर

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर देना होगा 10% Long Term Capital Gains Tax

by दीपेश Leave a Comment

अब आपको अपने इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट को एक बर्ष (या उससे ज्यादा) बाद बेचने पर होने वाले मुनाफे पर टैक्स देना होगा|

अगर आप सीधे शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं, तब भी आपको मुनाफे पर टैक्स देना होगा|

यह प्रस्ताव बजट 2018 में लाया गया है|

Long Term Capital Gains Tax और Short Term Capital Gains Tax क्या है?

शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के लिए देखते हैं|

अगर आप एक साल के अन्दर बेचते हैं और मुनाफे होता है, ऐसे मुनाफे को Short term capital gain (शोर्ट टर्म कैपिटल गेन) कहते हैं|

ऐसे मुनाफे पर आपको 15% टैक्स देना होता है|

(Holding period <= 1 year )   ==> Short Term Capital Gain  ==> 15% टैक्स मुनाफे पर

अगर आप एक साल के बाद बेचते हैं और मुनाफे होता है, ऐसे मुनाफे को Long term capital gain (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन या LTCG) कहते हैं|

ऐसे मुनाफे पर आपको अभी तक कोई टैक्स नहीं देना होता था| पर अप्रैल 1, 2018 से आपको 10% टैक्स देना होगा| यह प्रस्ताव बजट 2018 में लाया गया है|

(Holding period > 1 year) ==> Long Term Capital Gain (LTCG)  ==> 10% टैक्स मुनाफे पर

इन बातों पर ध्यान दें

  1. ऊपर दिए गए नियम शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के लिए हैं|
  2. डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड के टैक्स नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है|
  3. यह नियम 1 April 2018 से लागू होगा| इसका मतलब अगर मार्च 31 2018 तक बेचने पर कोई Long Term Capital Gain होता है, तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा|
  4. जो मुनाफा आपको 31 जनवरी 2018 तक हो चुका है, उस पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा| इसके ऊपर जो मुनाफा होगा केवल उस पर टैक्स देना होगा| (GrandFathering) इस बारे में बाद में विस्तार से चर्चा करेंगे|
  5. आपको एक लाख रुपये तक के LTCG (एक वर्ष में) पर कोई टैक्स नहीं देना होगा| जब LTCG (शेयर या इक्विटी फण्ड बेचने) पर एक लाख से ज्यादा होगा, तब ही आपको अतिरिक्त लाभ पर 10% टैक्स देना होगा| तो समझ लिए की पहले एक लाख के लॉन्ग टर्म capital gain पर टैक्स की छूठ है|
  6. अगर आपको 1.5 लाख रुपये का LTCG हुआ है, तो आपको टैक्स केवल 50,000 रुपये पर ही देना होगा|
  7. आपको LTCG पर फ्लैट 10% टैक्स देना होगा| Indexation का लाभ नहीं मिलेगा|
  8. टैक्स पर cess (सेस) भी लगेगा| Cess अब 4% कर दिया गया है| तो आपको दरअसल 10.4% टैक्स देना होगा|

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स बजट 2018


शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कैसे कैलकुलेट किया जाएगा?

पहली बात, long term capital gain तभी होगा की जब आप अपने निवेश को एक वर्ष बाद बेचें|

उससे पहले बेचते हैं, तो short term capital gain माना जाएगा और आपको 15% टैक्स देना होगा|

अगर आपने जनवरी 31, 2018 के बाद शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट खरीदें हैं

और आप यह निवेश एक साल बाद बेचते हैं, तो जो भी मुनाफा है उस पर 10% टैक्स देना होगा|

यहाँ मुनाफा निकालना भी आसान है| आपने जितना निवेश किया और जितने में बेचा, उसका अंतर आपका मुनाफा होगा|

बस पहले 1 लाख रुपये के मुनाफे पर टैक्स नहीं देना होगा| बचे हुए LTCG पर 10% टैक्स देना होगा|

अगर आपने जनवरी 31, 2018 को या उससे पहले शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट खरीदें हैं

यहाँ पर भी अगर एक साल बाद बेचते हैं, तो 10% टैक्स देना होगा| पर  capital gain या मुनाफा कैलकुलेट करने का नियम थोड़ा सा अलग है|

समझ लिए capital gains कैलकुलेट करने के लिए आपके खरीद मूल्य (purchase price) और जनवरी 31, 2018 के मूल्य में जो राशि ज्यादा है, वह मानी जायेगी|

तो मान लिए की आप शेयर 100 रुपये में खरीदा था| जनवरी 31, 2018 को उसका price 130 रुपये था| जब आप बेचते हैं, तो उसका मूल्य 170 रुपये है|

Long term capital gain निकालने के लिए आपके purchase price को 130 रुपये माना जाएगा| इसी बात को GrandFathering कहते हैं|

जब आप 170 रुपये में बेचेंगे, तो मुनाफा 40 रुपये (170-130) का माना जाएगा और न की 70 रुपये का| हालांकि आपको मुनाफा 70 रुपये का हुआ है, टैक्स कैलकुलेट करने के लिए आपका मुनाफा 40 रुपये माना जाएगा|

इस चालीस रुपये पर आपको 10% टैक्स देना होगा|

देख्रें तो आपको 31 जनवरी 2018 तक हुए फायदे को टैक्स नहीं किया जाएगा|

अगर आप तकनिकी गहराई में जाना चाहते हैं, तो आपको खरीदने के price को निकालने के लिए यह करना होगा|

यह तीन राशि लें:

  1. आपके खरीदने का मूल्य (Purchase Price)
  2. जनवरी 31 2018 को highest price (शेयर के मामले में) या उस दिन का म्यूच्यूअल फण्ड NAV (Highest price on January 31 2018 in case of share or Mutual Fund NAV)
  3. आपके बेचने का मूल्य (sale price)

आपका खरीद मूल्य माना जाएगा: Higher of (1, Lower of (2,3))

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स 2

एक बात और, आपको पहले एक लाख के LTCG पर कोई टैक्स नहीं देना होगा|

तो मान लिए, आपने अगस्त 15, 2017 को 5 लाख रुपये निवेश किया| जनवरी 31 2018 को उसका मूल्य 7 लाख हो गया| आपने 15 दिसम्बर 2018 को अपने इक्विटी निवेश को बेच दिया 10 लाख रुपये में|

क्योंकि आपने 1 साल से अधिक समय तक अपने निवेश की होल्ड किया, मुनाफे को long term capital gain (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन) माना जाएगा|

तो आपका LTCG हुआ 10 लाख – 7 लाख रुपये = 3 लाख रुपये

इसमें पहले 1 लाख रुपये पर आपको टैक्स नहीं देना होगा|

बचे हुए 2 लाख रुपये के LTCG पर आपको 10% टैक्स देना होगा|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड से मिलने वाले dividend पर भी अब 10% टैक्स लगेगा

अभी तब कोई टैक्स नहीं लगता था|

पर ध्यान दें यह टैक्स आपको नहीं देना होगा| म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी आपके लिए टैक्स का भुगतान करेगी| पर टैक्स आएगा आपके पैसे से ही|

तो मान लिए म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी को 10 रुपये का dividend देना है, तो वह 1 रुपये का टैक्स जमा कर देगी और बचे हुए 9 रुपये आपको दे देगी| इसे Dividend Distribution Tax (DDT) भी कहते हैं|

एक बात औए, DDT पर सरचार्ज (surcharge) और सेस (Cess) भी लगेगा| अब इनकी वैल्यू बदलती रहती है| सरचार्ज 12% है और सेस (cess) 3% से बढ़ाकर 4% कर दिया गया है|

तो कुल मिलाकर आपके ऊपर असर 11.65% का आएगा|

और हाँ, यह टैक्स भी 31 मार्च 2018 के बाद ही लगेगा|


आपको क्या करना चाहिए?

पहली बात तो आपको अपने निवेश को बेचने की कोई ज़रुरत नहीं है| ऐसा इसलिए क्योंकि 31 जनवरी तक हुए मुनाफे पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा|

पर हाँ, आपके निवेश की वैल्यू अगर 31 जनवरी और 31 मार्च 2018 के बीच में काफी बढ़ जाती है, तो आप 31 मार्च से पहले बेच सकते हैं क्योंकि आपको 31 मार्च टैक्स कोई टैक्स नहीं देना होगा|

साथ ही आप हर साल कुछ-कुछ मुनाफा बुक कर सकते हैं| ऐसा इसलिए की 1 लाख रुपये तक के LTCG मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं है| बेचने के बाद आप दोबारा से निवेश कर सकते हैं|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के dividend स्कीम में निवेश करना कभी भी अच्छा आईडिया नहीं था| अब 10% टैक्स के बाद और भी बुरा हो गया है| ध्यान दें dividend के टैक्स पर 1 लाख रुपये की छूठ नहीं है| इसलिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड की dividend स्कीम से बचें और Growth स्कीम में निवेश करें|

Credit: www.PersonalFinancePlan.in

पढ़ें: बजट 2018 की महत्वपूर्ण घोषणाएं

Filed Under: Financial Planning, Mutual Funds, Tax Planning Tagged With: budget 2018, long term capital gains tax, LTCG on equity mutual funds, बजट 2018, म्यूच्यूअल फंड्स पर टैक्स, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स

बजट 2018: मुख्य घोषणाएं, इक्विटी फण्ड पर टैक्स और सीनियर सिटीजन्स के लिए राहत

by दीपेश Leave a Comment

बजट 2018 में कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं की गयी हैं|

इनकम टैक्स सलब और दरों को नहीं छेड़ा गया है परन्तु हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर पर अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट दिया गया है| 40,000 रुपये का Standard Deduction शुरू किया गया है|

वरिष्ठ नागरिकों (सीनियर सिटीजन) के लिए काफी लाभकारी घोषणाएं की गयी हैं| 50,000 हज़ार रूपए तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होगा और न ही कोई TDS कटेगा| प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) में निवेश सीमा बाधा दी गयी है| गंभीर बीमारियों पर इलाज़ के लिए होने वाले खर्चे पर भी टैक्स बेनिफिट बढ़ाया गया है|

पर एक निवेशक के लिए बड़ा झटका है| इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड या शेयर में होने वाले Long Term Capital Gains पर अब 10% प्रतिशत टैक्स लगेगा| थोड़ी सी राहत दी गयी है पर वह शायद काफी नहीं होगी| इक्विटी फण्ड से मिलने वाले dividend पर भी 10% टैक्स लगेगा|

आईये जानते हैं इन सभी नए नियमों के बारे में:

#1 इनकम टैक्स स्लैब और दरों को नहीं बदला गया है

जो इनकम टैक्स स्लैब और दरें पिछले साल (FY2017-2018) थी,  वही दरें रहेंगी|

लेटेस्ट इनकम टैक्स स्लैब और दरों के बारे में जानने के लिए इस लिंक पर जाएँ|

#2 स्टैण्डर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) के रूप में 40,000 रुपए  का नया टैक्स बेनिफिट दिया गया है

पर साथ में कुछ वापिस भी लिया गया है|

अभी तक आप अपने एम्प्लायर से 15,000 रुपये तक की मेडिकल बिल का reimbursement (प्रतिपूर्ति) करा सकते थे और मिलने वाली राशि पर कोई टैक्स नहीं देना होता था।

साथ ही आपको conveyance/transport allowance मिलता था महीने का 1600 रुपये| एक वर्ष का हो गया 19,200 रुपये|

अब इन दोनों टैक्स बेनिफिट के जगह आपको 40,000 रुपये के स्टैण्डर्ड डिडक्शन (Standard deduction) दिया जाएगा|

देखें तो, अधिकतम लाभ 34,200 रुपये से बढ़कर 40,000 रुपये हो जाता है|

कुछ ख़ास ज्यादा फायदा तो नहीं है, बस आपको कागज़ और बिल जमा करने में मेहनत नहीं करनी होगी|

#3 हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर बेनिफिट बढ़ाया गया है

धारा 80 डी के तहत लाभ 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये प्रति वित्तीय वर्ष कर दिया गया है।

पहले आप इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर 25,000 तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते थे| अब 50 हज़ार तक ले सकते हैं|

अगर आप सीनियर सिटीजन (आयु 60 वर्ष से ज्यादा है), तो आप 30,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते थे, अब 50,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

हेल्थ इंश्योरेंस पालिसी के प्रीमियम पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट के बारे में आप विस्तार से इस लिंक पर पढ़ सकते हैं

एक बात और, कई बार अगर आप दो-तीन बर्षों के प्रीमियम का भुगतान एक साथ करते हैं, तो आपको कुछ discount मिलता है| पर परेशानी यह है की टैक्स बेनिफिट केवल उसी वर्ष मिलता है की जिस वर्ष में आपने प्रीमियम का भुगतान किया है|

अब से ऐसा नहीं होगा| अब (FY2019) से आप प्रीमियम को बराबर हिस्सों में बाँट कर टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

तो मान लिए आपने दो वर्ष के प्रीमियम का भुगतान किया 40,000 रुपये| ऐसी स्तिथि में आप एक साल में 60,000 रुपये का टैक्स बेनिफिट ले की बजाय दो सालों में 30-30 हज़ार रुपये का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

#4 सीनियर सिटीजन के लिए 50,000 रुपये तक के ब्याज पर टैक्स छूठ (Interest Income Exempt for Senior Citizens up to Rs 50,000 per financial year)

ध्यान दें यह छूठ केवल सीनियर सिटीजन (60 वर्ष से ज्यादा आयु) के ही लिए है|

अब वरिष्ठ नागरिकों को बचत खाते (savings account), फिक्स्ड डिपाजिट (fixed deposit) या रेकरिंग डिपाजिट (recurring deposit) पर बर्ष में 50,000 तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होगा| इसके लिए एक नया सेक्शन 80TTB लाया जाएगा|

अगर 50,000 से ज्यादा ब्याज है, तो टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

बस एक बात और, ऐसे खाते आपने बैंकों, सहकारी बैंकों (co-operative bank) और डाकघरों (post-office) में खोलें हों।

अगर धारा 80 TTB के तहत लाभ ले रहे हैं, तो धारा 80 TTA के तहत कर लाभ नहीं ले सकते हैं।

धारा 80TTA के तहत सेविंग्स बैंक अकाउंट पर मिलने वाले 10,000 रुपये तक के ब्याज पर टैक्स छूठ है| तो अगर आप वरिष्ठ नागरिक नहीं हैं, तो आप सेक्शन 80TTA के तहत लाभ ले सकते हैं|

#5 वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये से ऊपर के ब्याज पर TDS लगेगा

यह बात भी काफी अच्छी है|

पहले 10,000 रुपये से ज्यादा ब्याज होने पर बैंक TDS काट लिया करते थे|

अब 50,000 रुपये तक के ब्याज पर कोई भी TDS नहीं काटा जाएगा|

#6 गंभीर बीमारियों के चिकित्सा उपचार के लिए टैक्स बेनिफिट 1 लाख रुपये किया गया (Section 80DDB): केवल वरिष्ठ नागरिकों के लिए

यह लाभ भी केवल वरिष्ठ नागरिकों के लिए है|

किसी गंभीर बीमारी के लिए 1 लाख रुपये तक के खर्चे के लिए टैक्स बेनिफिट मिलेगा|

इससे पहले, वरिष्ठ नागरिकों के लिए 60,000 रुपये की सीमा थी और अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए 80,000 रुपये (> = 80 वर्ष)। अब, दोनों के लिए सीमा 1 लाख प्रतिवर्ष बढ़ा दी गई है।

ध्यान दीजिए कि 60 साल से कम उम्र के करदाताओं को सालाना 40,000 रुपये ही है|

एक बात और, सेक्शन 80DDB के तहत केवल उसी खर्चे के लिए क्लेम किया जा सकता है, जो आपने किसी इंश्योरेंस पालिसी के तहत न लिया हो|

#7 प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana) के लिए निवेश सीमा में वृद्धि

प्रधानमंत्री वय वंदना योजना को 31 मार्च, 2020 तक बढ़ा दिया गया है। इसका मतलब है कि आप 2020 मार्च तक इस योजना में निवेश कर सकते हैं।

साथ ही अधिकतम योगदान को 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख कर दिया गया है।

PMVVY में निवेश करने पर वरिष्ठ नागरिकों  को 10 वर्षों के लिए 8% ब्याज मिलता है।

#8 इक्विटी शेयर / इक्विटी म्यूचुअल फंड में Long Term Capital Gains Tax लाया गया (Long Term Capital Gains Tax on Equity Mutual Funds/Shares Introduced)

अभी तक अगर आप अपने शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट 1 साल बाद बेचते थे, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होता था|

ऐसा इसलिए क्योंकि शेयर या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के यूनिट  को बेचने पर होने वाले Long Term Capital Gain (LTCG) पर कोई टैक्स नहीं था|

अब आपको ऐसे मुनाफे पर 10% टैक्स देना होगा| यह खबर निवेशकों को शायद इतनी अच्छी न लगे|

दो राहतें दो गयीं हैं|

  1. अगर बर्ष में Long Term Capital Gain (LTCG) अगर 1 लाख रुपये से कम का है, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा| 1 लाख से ऊपर के मुनाफे पर ही टैक्स देना होगा|
  2. 31 जनवरी, 2018 तक के मुनाफे पर कोई भी टैक्स नहीं देना होगा|

इस बारे में गहराई से (उदहारण के साथ) जानने के लिए आप इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ सकते हैं|

#9 इक्विटी फंड (Equity Mutual Fund) के dividend पर 10% टैक्स लगेगा

अभी तक इक्विटी फण्ड के dividend पर कोई टैक्स नहीं लगता था|

पर अब से म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी आपको 10% टैक्स काट कर पैसा देगी| इसका मतलब टैक्स TDS के रूप में ही काट लिया जाएगा|

आपको अलग से टैक्स भरने की ज़रुरत नहीं है|

इस बारे में गहराई से जानने के लिए आप इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ सकते हैं|

pay tax on long term capital gains equity mutual funds बजट 2018

#10 कुछ अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं

  1. Cess (सेस) के 3% सेस बढाकर 4% कर दिया गया है।
  2. धारा 54 EC (NHAI और REC बांड्स में निवेश करके Long Term Capital Gains Tax बचाने के लिए) के तहत लाभ अब केवल land और building बेचने पर होने वाले capital gains तक सीमित होगा। इससे पहले, किसी भी प्रकार के LTCG पर टैक्स बचने के लिए किया जा सकता था। साथ ही ऐसे बांड के अवधि 3 वर्ष से बढाकर 5 वर्ष कर दी गयी है|
  3. National Health Protection स्कीम शुरू की जायेगी| इस स्कीम के तहत गरीब परिवारों को वर्ष में 5 लाख रुपये तक का स्वस्थ्य बीमा दिया जायेगा|

Filed Under: Financial Planning, Tax Planning Tagged With: budget 2018, long term capital gains tax, इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड पर 10% टैक्स, प्रधानमंत्री वय वंदना योजना, बजट 2018

इनकम टैक्स स्लैब (Income Tax Rates for FY2018-2019)

Last updated: फ़रवरी 21, 2018 | by दीपेश 2 Comments

Income Tax Slab Rates for FY 2018-2019 (AY 2019-2020)

Income Tax Slab Rates for FY 2017-2018 (AY 2018-2019)

वित्तीय वर्ष 2018-2019 (FY 2018-2019) के लिए इनकम टैक्स स्लैब के दरों के बदला नहीं गया है| जो टैक्स स्लैब पिछले वर्ष थी, वही अगले वर्ष भी रहेंगी| बस Cess को 3% से बढ़ा कर 4% कर दिया गया है|

व्यक्तिगत कर दाताओं और HUF  के लिए आयकर स्लैब (60 साल से कम उम्र, पुरुष और महिला दोनों के लिए) (Individuals and HUF less than 60 years of age)

income tax slab 2017-2018 in hindi इनकम टैक्स स्लैब आयकर की दरें

 

वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर स्लैब (60 वर्ष या अधिक लेकिन 80 वर्ष से कम, पुरुषों और महिलायों दोनों के लिए) (Senior Citizens, Individuals between 60 years and 80 years of age)

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अति-वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर स्लैब (80 वर्ष या अधिक, पुरुष और महिला दोनों के लिए) (Very Senior Citizens, 80 years and above)

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ध्यान दे आपकी कुल कर योग्य आय निकालने के लिए आपको अपनी कुल आय में से सारे टैक्स बेनिफिट घटाने होंगे, जैसे की Section 80C, 80D, HRA इत्यादि|

साथ ही जो आय कर मुक्त है, जैसे की पीपीएफ पर ब्याज, इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन| इस आय को भी कम करना होगा|

इसके बाद ऊपर दी गयी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स कैलकुलेट किया जाएगा|

Taxable Income = Gross Income – Exempt Income – Tax Deductions

कर योग्य आय = कुल आय – कर मुक्त आय  – कर लाभ (टैक्स डिडक्शन)

साथ की अगर आपकी कर योग्य आय 3.5 लाख रुपये से कम है, तो आपको 2,500 रुपये की टैक्सरिबेट (tax rebate) भी मिलेगी|

एक बात और, कुछ प्रकार की आमदनी जैसे की capital gains (कैपिटल गेन्स) पर अलग कर दर लागू होती है|

पढ़ें: आपको ब्याज पर कितना टैक्स देना होता है? (Tax on Interest Income)

पढ़ें: कितना टैक्स देना होता है म्यूच्यूअल फंड्स बेचने पर?

अपना इनकम टैक्स कैसे कैलकुलेट करें? (How to calculate Income Tax Liability?)

अपना इनकम टैक्स कैलकुलेट करने के लिए आप इस इनकम टैक्स कैलकुलेटर (Income Tax Calculator) का उपयोग कर सकते हैं|

Source: ClearTax

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क्रेडिट स्कोर सुधारने के 7 आसान तरीके (7 ways to improve Credit Score)

Last updated: अक्टूबर 3, 2018 | by दीपेश 2 Comments

आपने हाल में ही एक लोन के लिए एप्लाई किया, पर क्रेडिट स्कोर खराब होने की वजह से आपकी लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट कर दी गयी|

अब आप क्या करेंगे? अगर क्रेडिट स्कोर खराब हैं, तो आगे भी आपकी लोन application को रिजेक्ट किया जा सकता है|

कैसे सुधारें अपना क्रेडिट स्कोर?

आईये जानते हैं|


#1 समय पर आपके लोन की ईएमआई और क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान करें

यह सबसे ज़रूरी है|

अगर आप अपने लोन की EMI या क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान सही सके पर नहीं करते, तो आपका क्रेडिट स्कोर कभी भी अच्छा नहीं हो सकता| आप चाहें कुछ भी करते रहे, अगर समय पर भुगतान नहीं करते, तो अच्छे क्रेडिट स्कोर की आशा भी मत रखिये|

अमूमन दो कारणों से भुगतान में देरी हो सकती है|

पहला, आप ढीले हैं| यदि आप आलसी हैं और समय पर भुगतान करने के लिए पर्याप्त रूप से अनुशासित नहीं हैं, तो अपने बैंक खाते से ऑटो-डेबिट (auto-debit) की सुविधा चुनें| ऐसा करने से आप भूलने से भुगतान नहीं रुकेगा|

दूसरा, आपके पास भुगतान करने के लिए नियमित रूप से पैसे की कमी रहती है| यह ज्यादा बड़ी समस्या है। यदि आप अपना हाथ खर्चा करने से नहीं रोक पाते हैं, तो आपको इसे आदत बदलने की ज़रुरत है|

लेकिन अगर आपके पास किसी वजह पैसे की कमी रहती है, तो आपको कुछ बड़े बदलाव लाने होंगे| जैसे की अपनी आमदनी बढाएं, खर्चे कम करें या लोन को री-फाइनेंस (refinance) करें|

इस बारें में आप विस्तार से इस पोस्ट (अंग्रेजी) में पढ़ सकते हैं|


# 2 अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करें

आपको नियमित रूप से अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करनी चाहिए और किसी भी तरह की त्रुटियों (discrepancies ) को सही कराना चाहिए। हो सकता है की किसी बैंक ने कुछ गलत जानकारी दे दी हो और आपका क्रेडिट स्कोर (सिबिल स्कोर) बिना बात प्रभावित हो रहा हो|

आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में गलतियों को सही कराने के तरीके पर मैंने इस पोस्ट में चर्चा करी है|

अब तो सुविधा भी है की आप हर वर्ष एक क्रेडिट रिपोर्ट फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं| तो इस सुविधा का पूरा फायदा उठाएं और समय समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट (या सिबिल रिपोर्ट) चेक करें|


#3 ख़राब क्रेडिट स्कोर के कारण को समझें

अब यह भी हो सकता है की आपका क्रेडिट स्कोर आपकी आदतों की वजह से खराब है|

कुछ कारण आसानी से समझ में आ जाते है| जैसे की आप समय पर लोन या क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान नहीं करते| पर कुछ कारण इतने प्रत्यक्ष (obvious) नहीं होते|

क्रेडिट ब्यूरो क्रेडिट स्कोर कैलकुलेट करने के तरीके को जग-जाहिर नहीं करते| पर समझा जाता है की कुछ कारण हैं जिनकी वजह से स्कोर प्रभित हो सकता है:

  1. आप क्रेडिट कार्ड का काफी ज्यादा इस्तेमाल करते हैं| मेरा मतलब आप हमेशा अपनी लिमिट का काफी हद तक इस्तेमाल कर लेते हैं (High Credit Limit Utilization)| यह दर्शाता है की शायद आपकी वित्तीय स्तिथि इतनी अच्छी नहीं है| इसिलए आपके क्रेडिट स्कोर को प्रभावित कर सकता है| अगर समय पर भुगतान करने के बाद भी आपका स्कोर अच्छा नहीं है, तो इस बात पर अवश्य गौर करें| आप अपनी क्रेडिट लिमिट (credit limit) बढाने का निवेदन क्र सकते हैं|
  2. साथ ही, जब भी आप किसी लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक (या क्रेडिट संस्थान) आपके क्रेडिट स्कोर की पूछताछ (क्रेडिट ब्यूरो जैसे की CIBIL से) करते हैं। क्रेडिट स्कोर की इस तरह की पूछताछ को Hard Enquiry कहते हैं| अगर आपके स्कोर के लिए बहुत साड़ी हार्ड इन्क्वारी हैं, तो क्रेडिट ब्यूरो को ऐसा लग सकता है की आप लोन या क्रेडिट लेने को बहुत उत्सुक हैं| यह बात भी आपका क्रेडिट स्कोर प्रभावित कर सकती है|

अगर आपको लोन या क्रेडिट कार्ड चाहिए, अंधाधुंध रूप से एप्लाई करना शुरू नहीं करें। पहले कुछ रिसर्च करें, बैंक का चुनाव करें और उसके बाद एप्लाई करें|


#4 फिक्स्ड डिपॉज़िट के ऊपर क्रेडिट कार्ड लें (Credit card against Fixed Deposit)

यदि आपके पास पहले से ही क्रेडिट कार्ड है या लोन चल रहे हैं, तो आप अपने भुगतानों को नियमित रूप से करके आपके क्रेडिट स्कोर को धीरे-धीरे सुधार सकते है ।

पर मान लिए आपके पास कोई लोन या क्रेडिट कार्ड नहीं है| ज़ाहिर हैं, ऐसी स्तिथि में आपके पास कोई क्रेडिट हिस्ट्री (credit history) भी नहीं होगी| इसका मतलब आपके पास क्रेडिट स्कोर ही नहीं है| अच्छे या बुरे का तो सवाल ही नहीं उठता|

कई बार क्रेडिट हिस्ट्री न होने की स्तिथि में भी लोन मिला मुश्किल हो जाता है|

और जब तक लोन या क्रेडिट कार्ड नहीं मिलता, तब तक क्रेडिट स्कोर नहीं बनेगा|

हो गयी न, मुर्गी और अंडे वाली कहानी (मुर्गी पहले आई या अंडा)|

ऐसी स्तिथि में आप क्या करेंगे?

एक तरीका है|

आप एक फिक्स्ड डिपाजिट खोल कर उसके ऊपर क्रेडिट कार्ड ले सकते हैं (Credit against Fixed Deposit)|

ऐसी स्तिथि में, कार्ड की क्रेडिट सीमा (credit limit) FD राशि की 80-85% तक होगी| अगर आपकी एफडी 50,000 रुपये की है, तो आपके कार्ड की सीमा 35,000 से 40,000 तक होगी|

अमूमन बैंक को इस तरह क्रेडिट कार्ड देने में कोई समस्या नहीं होती क्योंकि अगर आपने भुगतान नहीं किया, तो वह आपकी FD तोड़ कर अपना  पैसा वसूल लेगा|

पर हाँ, आपको क्रेडिट स्कोर अच्छा करने के लिए, समय पर भुगतान करना होगा|


#5 पुराने क्रेडिट कार्ड खाते बंद नहीं करें

इस बारें में में लोगों की अलग अलग राय है|

कुछ लोग कहते हैं कि आपके क्रेडिट कार्ड की अवधि  (age of credit card)आपके क्रेडिट स्कोर को भी प्रभावित करती है।

अगर आपके क्रेडिट कार्ड अकाउंट पुराने हैं, तो आपके स्कोर पर अच्छा असर पड़ सकता है।

तो अपने पुराने अकाउंट बंद न करें|

कार्ड बंद करने पर आपकी क्रेडिट सीमा का उपयोग (credit limit utilization) भी बढ़ जाएगा| इस बात से भी आपका स्कोर प्रभावित हो सकता है|


#6 पेशेवर सहायता लें (Professional help)

क्रेडिट स्कोर के निर्माण (सुधार) के लिए आप क्रेडिट रिपेयर एजेंसियों (credit repair agencies) से भी संपर्क कर सकते हैं।

हालांकि, आपको इसके लिए कुछ खर्चा करना होगा, पर आपके लिए उपयोगी साबित हो सकता है|

अब क्योंकि आपने उनकी सेवा के लिए पैसे खर्च किए हैं, तो संभव है कि आप उनके सुझावों का पालन भी अच्छे से करें।

पर सही एजेंसी का चुनाव करना भी समस्या है| सही से जांच पड़ताल करने के बाद ही संपर्क करें|

बहुत से फर्जी लोग भी हैं इस बिज़नेस में, जो आप से पैसे लेकर आपको बेवक़ूफ़ बना सकते हैं|

जो लोग फटाफट स्कोर सुधारने की बात कहें, ऐसे लोगों से बचें|


#7 धैर्य रखें

यह भी बहुत ज़रूरी है| सब कुछ करने के बाद भी आपका क्रेडिट स्कोर एक दिन में ठीक नहीं होगा| सुधार आने में समय लगता है|

तो हो सकता है की आप सब कुछ सही कर रहे हों, पर आपका क्रेडिट स्कोर आपके अनुसार सुधर न रहा हो| ऐसे में निराश हो कर अच्छी आदतों का न छोड़े| संयम रखें और लगे रहे| धीरे-धीरे आपके क्रेडिट स्कोर में सुधार होगा|

पढ़ें: क्रेडिट स्कोर (सिबिल स्कोर) क्या है? कैसे जाने अपना क्रेडिट स्कोर? What is Credit Score? (in Hindi)

पढ़ें: कैसे डाउनलोड करें अपनी फ्री क्रेडिट रिपोर्ट? (How to download free credit report?)

इमेज क्रेडिट: Pixabay

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बजाज फिनसर्व की नई वेबसाइट देगी शानदार अनुभव

by दीपेश 2 Comments

किसी भी ब्रांड के लिए उपयोगकर्ता के अनुकूल वेबसाइट होना आवश्यक है। साइट तक पहुँच आसान हो तो यह भविष्य में ब्रांड को संभावित ग्राहकों का डेटाबेस बनाने में मदद मिलती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए, बजाज फिनसर्व  ने हाल ही में अपनी नई वेबसाइट लॉन्च की है। बजाज फिनसर्व ने कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं जिससे ग्राहक साइट तक आसानी से पहुंच सकता है।

एक ग्राहक के रूप में पहली चीज जो की एक वेबसाइट पर ज़रूरी है, वह है सर्च बार। बजाज फिनसर्व ने एक कदम आगे बढ़ते हुए बेहतर तरीके से खोजने के लिए स्मार्ट सर्च शरू किया है|

इससे जो आप ढूंढ़ना चाहेंगे उसे  खोजना आसान होगा।  साथ ही, उन्होंने कॉकपिट (cockpit) नामक एक और फीचर जोड़ा है, जिसमें सभी उत्पादों को एक ही स्थान पर रखा गया है, ताकि ग्राहक को वह उत्पाद ढूंढने में कोई परेशानी न हो| यह सुविधाएं आपको शायद काफी अच्छी लगेंगी|

साइट का स्वरुप अतिरिक्त टैब हटाने के बाद साफ़ और अधिक सरल हो गया है। उनके पास अब उच्च गुणवत्ता वाला यूआई (User Interface) है, जो उचित गति से काम करता है। इससे साइट का संचालन और अधिक सरल हो गया है। जैसे ही आप वेबसाइट खोलते हैं, आप काम को बेहतर तरीके से समझने के लिए व्यक्तिगत यात्रा कर सकते हैं।

2018 में, एक वेबसाइट पर सबसे अहम चीज़ है उस साइट पर स्क्रॉलिंग की न्यूनतम मात्रा। अगर एक ग्राहक के रूप में मुझे बहुत अधिक स्क्रॉल करना पड़ेगा, तो मैं परेशान हो सकता हूँ। लेकिन बजाज फिनसर्व ने बहुत अधिक स्क्रॉलिंग को सीमित कर दिया है। यह सुविधा मोबाइल फोन पर भी फायदेमंद है।

बजाज फिनसर्व

इस नई वेबसाइट की सबसे अच्छी बात है कंटेंट का वैयक्तिकरण। एक ग्राहक के रूप में या विज़िटर के रूप में, कोई  भी इसे अधिक आकर्षक और प्रासंगिक बनाने के लिए सुझाव दे सकता है। उन्होंने प्रकाशन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया है और कंटेंट को  ग्राहकों के लिए आसान पहुंच में रखा है।

उन्होंने मुख्य रूप से अपने कंटेंट पर काम किया है। यहाँ फाइनेंस, लोन आदि के बारे में कई लेख भी उपलब्ध हैं। ये सभी लेख बहुत ही व्यावहारिक और सूचनात्मक हैं। एक और विशेषता जिसने मेरा ध्यान खींचा वो है, स्मार्टली डिज़ाइन किया गया EMI कैलकुलेटर और अन्य टूल्स|

फॉर्म भरने की प्रक्रिया को भी सरल किया गया है। नई वेबसाइट के लॉन्च के साथ, लोन  के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया भी काफी आरामदायक हो गई है।

आप उन ब्लॉगों की एक सरणी भी देख सकते हैं जो निवेशकों के सामने आने वाले कुछ अहम मुद्दों पर प्रकाश डालते हैं। ये उपभोक्ता को अधिक जानकारी पाने में मदद करते हैं और इसलिए सही निर्णय लेने में सहायक होते हैं।

एक अच्छी वेबसाइट फैंसी ग्राफिक्स और एनिमेशन से नहीं बनती। यह ग्राहकों को सुखद यात्रा और उपयोगकर्ता को अच्छा अनुभव करवा कर बनती है, जिससे वह बार-बार साइट पर आना चाहेंगे। वेबसाइट में किये गए  ये सुधार इसका सबूत है कि बजाज फिनसर्व अपने उपयोगकर्ता के साथ की इस यात्रा को लेकर अग्रसर है।

इस वेबसाइट के बारे में आप यह वीडियो भी देख सकते हैं|

https://www.youtube.com/watch?v=RiG5WFYfr2E&feature=youtu.be

Filed Under: बिना श्रेणी Tagged With: bajaj finserv, Sponsored

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