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Tax Planning

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इनकम टैक्स रिटर्न ऑनलाइन भरने का लिए बेस्ट वेबसाइट (Best Income Tax Return Filing Website)

by दीपेश Leave a Comment

क्या आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न भर चुके हैं या अभी तक आखिरी तारीख का इंतज़ार पर रहे हैं?

बहुत से लोग रिटर्न स्वयं ही भर लेते हैं| कुछ लोग किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट (Chartered Accountant) या टैक्स कंसलटेंट की सहायता से रिटर्न भरते हैं| आप इनकम टैक्स की वेबसाइट पर जा कर अपना रिटर्न ऑनलाइन भर सकते हैं|

साथ ही कुछ अन्य वेबसाइट भी हैं जहां जा कर आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न ऑनलाइन भर सकते हैं| मेरे अनुसार यह वेबसाइट आय कर विभाग की वेबसाइट के मुकाबले बेहतर सहूलियत प्रदान करती हैं|

आज मैं कुछ ऐसी ही वेबसाइट का जिक्र करूंगा जहां जा कर आप बहुत आसानी से अपना इनकम टैक्स रिटर्न भर सकते हैं|

इन वेबसाइट को इस्तेमाल करने के कुछ फायदे भी हैं|

  1. इनमें से कुछ वेबसाइट यह सुविधा बिलकुल मुफ्त में प्रदान कराती है| आप अपने फॉर्म 16 (Form 16) अपलोड कर सकते हैं और यह वेबसाइट सारी जानकारी स्वयं ही भर देती हैं| उसके बाद आपको बस रिटर्न फाइल और वेरीफाई करने की ज़रुरत है|
  2. रिटर्न फॉर्म में कई बार बहुत सारी जानकारी मांगी जाती है जो की शायद आपके लिए भरना ज़रूरी न हो| परन्तु इससे कई बार आपको समझने में परेशानी हो सकती है और रिटर्न भरते समय गलती भी हो सकती है| यह वेबसाइट आपसे आसान भाषा में आपकी आय के बारे में जानकारी पूछते हैं और पूरा रिटर्न उस हिसाब से भर देते हैं|
  3. आपकी आय की जानकारी के अनुसार आपके लिए सही रिटर्न फॉर्म का चुनाव भी स्वयं हो जाता है|
  4. अगर आपकी पूरी कमाई केवल आपकी सैलरी से ही है, तब तो आपका काम 5 मिनिट में ही हो जाएगा|
  5. अगर आपका रिटर्न थोड़ा काम्प्लेक्स है और आपको रिटर्न फाइल करने के लिए किसी एक्सपर्ट की ज़रुरत है, तो आप इन वेबसाइट की प्रोफेशनल सेवायों (paid services) का इस्तेमाल करके अपना रिटर्न फाइल कर सकते हैं|
  6. हो सकता है की मुफ्त सेवाएं आय के एक स्तर तक हों| अगर आपकी आप उस स्तर से ज्यादा है, तो आपको कुछ भुगतान करना पड़ सकता हैं|

इनकम टैक्स रिटर्न ऑनलाइन भरने के लिए बेस्ट वेबसाइट (Best Income Income Tax Return Filing Website)

  1. ClearTax
  2. MyITReturn
  3. TaxSpanner
  4. TaxSmile
  5. HRBlock
  6. Tax2Win

ध्यान दें मैंने स्वयं इन वेबसाइट की सहायता से टैक्स रिटर्न नहीं भरें है| मैं आपको यह सुझाव नहीं दूंगा आपको कौनसी वेबसाइट का इस्तेमाल करना चाहिए| आप इनमें से कुछ वेबसाइट देख सकते हैं और जो आपको सबसे अच्छी लगे, उस इनकम टैक्स रिटर्न वेबसाइट की सहायता से रिटर्न फाइल कर सकते हैं| वैसे, इन सभी वेबसाइट में ClearTax सबसे लोकप्रिय है|

पढ़ें: कैसे करें अपना इनकम टैक्स कैलकुलेट (How to calculate Income Tax Liability?)

इन बातों का रखें ध्यान

  1. बशर्ते यह वेबसाइट आपको रिटर्न भरने में मदद करेंगी, परन्तु अगर आप गलत जानकारी देंगे, तो रिटर्न भी गलत ही भरें जायेंगे|
  2. रिटर्न भरने से पहले अपना Form 26AS अवश्य चेक करें| हो सकता है, आपका कुछ टीडीएस कटा हो और उसे बताना भूल जाएँ| बहुत से लोग अपने FD के ब्याज को बताना भूल जाते हैं| परन्तु अगर आपके ब्याज पर TDS कटा है, तो आय कर विभाग को यह बात आसानी से पता चल जायेगी और आपको अपना इनकम टैक्स रिटर्न revise करना पड़ सकता है|
  3. अपना फॉर्म 16 भी चेक करें और देख लें की आपके सभी टैक्स बेनिफिट की जानकारी उसमें हैं| अगर नहीं हैं, तो वह जानकारी भी डालें|
  4. आय के अन्य स्त्रोत, जो की आपने आपने एम्प्लायर को न बताएं हो, उनकी जानकारी अलग से भरें|

Filed Under: Tax Planning Tagged With: इनकम टैक्स रिटर्न ऑनलाइन, फ्री इनकम टैक्स रिटर्न वेबसाइट

अगर आपके पास PAN नहीं है, तो घर बैठे करें e-PAN के लिए आवेदन

by दीपेश Leave a Comment

अगर आपके पास PAN (Permanent Account Number) कार्ड नहीं है और उसके लिए आवेदन करना चाहते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है|

अब आप PAN कार्ड के लिए आवेदन ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और इसके लिए आपको कुछ खर्चा भी नहीं करना होगा| बाद आपके पास आधार कार्ड होना चाहिए| आपको कोई भी physical डॉक्यूमेंट कहीं नहीं भेजना होगा|

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखरी तारिख नज़दीक आ रही है| ऐसे में e-PAN की सुविधा काफी लाभकारी साबित हो सकती है|

e-PAN (ई-पैन) के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? How to apply for e-PAN?

  1. इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर जाएँ| वहां पर “Instant ePAN” के लिंक पर क्लिक करें| आप सीधे इस लिंक पर क्लिक करके भी आगे जा सकते हैं|
  2. एप्लीकेशन फॉर्म भरें| आपको अपना नाम, जन्मतिथि और आधार कार्ड नंबर डालना होगा|e-pan कार्ड ई-पैन hindi download
  3. एप्लीकेशन को सबमिट करने का बाद आपके पास OTP (one time password) आएगा| यह OTP आपके आधार पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आएगा|
  4. उसके बाद आपके 15 digit Acknowledgement Number आपके मोबाइल फ़ोन और इ-मेल पर भेजा जाएगा|
  5. आपको एक पेज पर हस्ताक्षर करके उस पेज को स्कैन (scan) करके उस फाइल को अपलोड करना होगा| यह इसलिए ज़रूरी है क्योंकि आपके PAN पर आपका हस्ताक्षर भी होता है|
  6. PAN के allotment के बाद आपके पास SMS/इ-मेल आ जायेगी|
  7. आप चाहें तो अपना ePAN का स्टेटस ऑनलाइन चेक भी कर सकते हैं| आप Acknowledgement number और आधार OTP की सहायता से आप अपना e-PAN डाउनलोड भी कर सकते हैं|

इन बातों का भी रखें ख्याल

  1. आपका नाम (जिस नाम से आप आधार कार्ड एप्लाई करना चाहते हैं), वह आपके आधार कार्ड से मेच करना चाहिए| अगर आपके आधार कार्ड में नाम में गलती है, तो पहले आधार कार्ड में नाम सही कराये| उसके बाद ही PAN के लिए एप्लाई करें|
  2. ध्यान दें ePAN की वैद्यता किसी साधारण PAN के सामान ही है|
  3. आपको e-PAN के आवेदन के लिए कोई फीस देनी की ज़रुरत नहीं है|

इनकम टैक्स के बारे में दूसरी पोस्ट

इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए किस इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म का करें इस्तेमाल?

इनकम टैक्स कैसे कैलकुलेट करें?

सीनियर सिटीजन को मिलने वाले 7 स्पेशल टैक्स बेनिफिट

इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखरी तारिख क्या है?

इनकम टैक्स स्लैब (FY2018-2019)

हेल्थ इंश्योरेंस पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट

 

Filed Under: Tax Planning Tagged With: e-pan, ई-पैन

इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) भरने का लिए कौनसे फॉर्म का इस्तेमाल करें?

by दीपेश

इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख नज़दीक आती जा रही है| अगर आपने अभी तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरा है, तो जल्दी भरिये| पर इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म कई प्रकार के होते हैं, क्या आप जानते हैं की आपको किस फॉर्म का इस्तेमाल करना है|

आज चर्चा करेंगे की अपने इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की लिए आपको कौनसे इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म (ITR) का इस्तेमाल करना चाहिए|

इनकम टैक्स कैसे कैलकुलेट करें?

इनकम टैक्स कैलकुलेट करने के लिए बहुत से कैलकुलेटर ऑनलाइन उपलब्ध हैं| बहुत सी वेबसाइट यह सुविधा फ्री में उपलब्ध कराती हैं| आप किसी भी वेबसाइट पर जा कर अपना टैक्स भी कैलकुलेट कर सकते हैं|

अगर आप विस्तार से जानना चाहते हैं की इनकम टैक्स कैसे कैलकुलेट होता है, तो इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें|


इनकम टैक्स रिटर्न क्या है?

इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return or ITR) के माध्यम से आप भारत सरकार को अपनी पिछले वित्तीय वर्ष की आय के बारे में बताते है|

अगर आपको किसी बकाया टैक्स या पेनल्टी का भुगतान करना है, तो वह भी रिटर्न भरते समय कर सकते हैं|

साथ ही, अगर आपका अतिरिक्त टैक्स कट गया है, तो उस अतिरिक्त टैक्स राशि का refund पाने के लिए रिटर्न भी भरना ज़रूरी है|


इनकम टैक्स भरना किसके लिए अनिवार्य है?

अगर आपकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये (पिछले वित्तीय वर्ष में) से ज्यादा है, तो आपके लिए इनकम टैक्स भरना अनिवार्य है|

अगर 60 या 60 से अधिक आयु है, तो यह सीमा 3 लाख रुपये है|

अगर 80 या 80 से अधिक आयु है, तो यह सीमा 5 लाख रुपये हो जाती है|


इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारिख क्या है?

इनकम टैक्स रिटर्न भरने या जमा करने की आखरी तारिख 31 जुलाई है| इसका मलतब इस बर्ष आपको 31 जुलाई 2018 तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करन होगा|


समय पर इनकम टैक्स रिटर्न फाइल न करने से क्या होगा?

अगर आपने 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल नहीं किया, तब आपको जुर्माना देना होगा|

अगर  31 जुलाई तक नहीं करते और 31 दिसम्बर, 2018 तक कर देते हैं, तो 5,000 रुपये जुर्माना होगा|

अगर 31 दिसम्बर, 2018 तक भी नहीं करते और अगले वर्ष के 31 मार्च, 2019 तक कर देते हैं, तो 10,000 रुपये का जुर्माना लगेगा|

बस थोड़ी सी रियायत है| अगर आपकी वार्षिक आय 5 लाख रुपये से कम है, तो अधिकतम जुर्माना 1,000 रुपये होगा|

आप 31 मार्च के बाद अपने रिटर्न फाइल नहीं कर पायेंगे| यहाँ तो और भी बड़ी समस्या हो जायेगी|

इस विषय के बारे में आप विस्तार से इस पोस्ट में पढ़ सकते हैं|


इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए कौनसे इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म का इस्तेमाल करें?

बहुत सारे फॉर्म है| इसलिए सही फॉर्म का चुनाव करने में थोड़ी परेशानी तो हो ही सकती है|

गलत फॉर्म का इस्तेमाल करने पर आपको परेशानी हो सकती है और हो सकता है की आप अपनी इनकम को सही तरीके से रिपोर्ट भी न कर पाएं|


ITR 1 या सहज फॉर्म

यह एक पेज का फॉर्म है| इसको भरना भी सबसे आसान है|

ITR1 आप तब भर सकते हैं जब आपकी आय का स्त्रोत निम्न में से हो:

  1. सैलरी या पेंशन
  2. Income from other sources
  3. केवल 1 प्रॉपर्टी (मकान) से किराया आता हो (अगर पिछले वर्ष से कोई loss carry forward कर रहे हैं, तो ITR1 नहीं भर सकते|

कौन ITR1 नहीं भर सकता?

  1. आपकी कुल आय 50 लाख रुपये से ज्यादा है
  2. आपकी कोई भी बिज़नस से आय (business income) या capital gain है|
  3. अगर खेती से आमदनी (Agricultural Income) 5,000 रुपये से अधिक है
  4. अगर आपके पास विदेश में संपत्ति है (foreign assets)
  5. अगर आपके पास एक से अधिक मकानों से आमदनी है|
  6. आपने लाटरी या horse racing में कोई राशि जीती हो|

ITR 2

कौन ITR2 भर सकता है?

ITR2 आप तब भर सकते हैं जब आपकी आय का स्त्रोत निम्न में से हो:

  1. सैलरी या पेंशन
  2. Income from other sources, लौटरी, horse racing में कोई राशि जीती हो|
  3. एक से ज्यादा प्रॉपर्टी से किराया
  4. Capital gains
  5. खेती से आमदनी (agricultural income) 5,000 रुपये से ज्यादा हो
  6. विदेश में कोई आय (foreign income) या विदेश में कोई संपत्ति (foreign assets)

कौन ITR2 नहीं भर सकता है?

अगर आप बिज़नस से कोई आय है, तो आप ITR 2 का इस्तेमाल नहीं कर सकते|


ITR 3

ITR3 आप तब भर सकते हैं जब आपकी आय का स्त्रोत निम्न में से हो:

  1. आपकी बिज़नस (business या profession) से आय हो|
  2. सैलरी या पेंशन
  3. प्रॉपर्टी से किराया
  4. Income from other sources, लाटरी, horse racing से आय

ITR 4 या 

यह फॉर्म उन लोगों के लिए है जिनकी बिज़नस या profession से आय है और जो presumptive income स्कीम (धारा 44AD, 44ADA और 44AE) के तहत अपने रिटर्न दाखिल करना चाहते हैं|


अब आपको यह देखना होगा की आपकी आय के स्त्रोत क्या हैं और उसी के अनुसार आप अपने लिए सही इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म का चुनांव कर सकते हैं|

आप सभी तरह के इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म और नियमों के बारे अधिक जानकारी इस लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं|


इनकम टैक्स रिटर्न कैसे भरें?

ऐसा करने के कई विकल्प हैं|

  1. आप किसी CA या टैक्स एडवाइजर की सहायता से रिटर्न भर सकते हैं|
  2. आप स्वयं इनकम टैक्स की वेबसाइट पर लॉग इन करके रिटर्न भर सकते हैं|
  3. बहुत सारी वेबसाइट ऐसी हैं जहाँ आप अपना रिटर्न फाइल कर सकते हैं| इन वेबसाइट पर कुछ सेवाएं मुफ्त है, कुछ सेवायों के लिए आपको शुल्क देना पड़ सकता है| कुछ वेबसाइट आपको सही रिटर्न फॉर्म के चुनाव में भी मदद करती हैं|

ध्यान दें मैं इनकम टैक्स एक्सपर्ट नहीं हूँ| कुछ भी फैसला करने से पहले आप किसी Chartered Accountant (CA) या किसी टैक्स कंसलटेंट से बात करें|

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इनकम टैक्स कैसे कैलकुलेट करें? (How to calculate Income Tax?) (Hindi)

Last updated: जुलाई 2, 2018 | by दीपेश 2 Comments

क्या आप जानते कई की इनकम टैक्स की गणना कैसे होती है? क्या आप स्वयं अपनी टैक्स लायबिलिटी (income tax liability) निकाल सकते हैं?

वैसे तो बहुत सारे ऑनलाइन कैलकुलेटर उपलब्ध हैं, आपको पता होना चाहिए की आपका इनकम टैक्स कैसे कैलकुलेट होता है| यह केवल आपकी जानकारी के लिए नहीं है| अगर आप टैक्स की गणना को बेहतर समझेंगे, तो आपको टैक्स बचत या टैक्स प्लानिंग करने में भी आसानी होगी|

आपकी कुल आय केवल आपकी सैलरी नहीं है

आपकी आय या आमदनी को पांच हिस्सों में बात जा सकता है|

  1. Income from Salary (वेतन से आय)
  2. Income from House property (हाउस प्रॉपर्टी से आय) (जैसे घर को किराए पर चढ़ाया)
  3. Profit or gain from Business or Profession (किसी बिज़नस से होने वाली आय)
  4. Capital gains (पूँजी लाभ) (सोना, प्रॉपर्टी, शेयर, म्यूच्यूअल फण्ड इत्यादि बेचने पर होने वाला लाभ)
  5. Income from other sources (अन्य स्रोतों से होने वाली आय) जैसे की आपके बचत खाते, फिक्स्ड डिपाजिट इत्यादि पर होने वाला खर्च

इन पाँचों तरह की आय को मिला कर आपकी कुल आय निकाली जाती है|

आप देख सकते हैं की आप कुल आय केवल वेतन नहीं है| वेतन (सैलरी) के अलावा भी आपकी आय हो सकती है और उस पर आपको टैक्स देना पड़ सकता है| और अलग-अलग तरह की आय पर आपको अलग तरीके (या रेट) से टैक्स देना पड़ सकता है|

इनकम टैक्स कैलकुलेट करने के लिए इन बातों का भी रखें ख्याल

  1. आपको पूरी आय पर टैक्स नहीं देना होता|
  2. हो सकता है की आपकी आय या सैलरी के कुछ हिस्से पर कोई टैक्स न देना हो| जैसे की HRA और लता का कुछ हिस्सा| या फिर टैक्स-फ्री बबांड या PPF या EPF का ब्याज|
  3. इसके बाद आप निवेश या खर्चे करके अपना टैक्स भार कम कर सकते हैं|
  4. इसके बाद जो आय बचती है, उस पर आपको अपने टैक्स ब्रैकेट के अनुसार टैक्स देना होता है|
  5. इसके अलावा कुछ तरह की आय (जैसे की capital gains) पर आपको अलग रेट पर टैक्स देना होता है|

Taxable Income = Gross Income – Exempt Income – Tax Deductions

कर योग्य आय = कुल आय – कर मुक्त आय  – कर लाभ (टैक्स डिडक्शन)

कर मुक्त आय (Exempt Income) क्या है?

मैं कुछ उदहारण की सहायता से समझाता हूँ|

  1. आपके HRA (House Rent Allowance या मकान किराया भत्ता) का कुछ हिस्सा कर मुक्त होता है| कितनी हिस्सा कर मुक्त होता है, उसकी जानकारी आप इस पोस्ट में पा सकते हैं|
  2. इसके अलावा Leave Travel Allowance (LTA) का कुछ हिस्सा भी कर मुक्त हो सकता है|
  3. FY2018 तक आपको Conveyance Allowance (19,200 रुपये टैक्स) और मेडिकल Reimbursement (15,000 रुपये तक) भी कर मुक्त है| FY2019 से इन दोनों को हटा दिया गया है और इनकी जगह Standard Deduction (40,000 रुपये) को लाया गया है|
  4. ध्यान इन सभी Allowance का फायदा आपको तभी मिल सकता है की जब यह आपके वेतन के हिस्सा हैं|
  5. पीपीएफ/ईपीएफ खाते पर मिलने वाला ब्याज
  6. टैक्स-फ्री बांड से मिलने वाला ब्याज इत्यादि
  7. 10,000 रुपये तक बचत खाते का ब्याज
  8. वरिष्ठ नागरिकों के लिए बचत खाते, recurring डिपाजिट या फिक्स्ड डिपाजिट पर मिलने वाला ब्याज (50,000 रुपये टैक्स)| यह नियम FY2019 से लागो होगा|

इनके अलावा भी कई तरह की आय हो सकती है, जिन पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता|

ऐसी आय पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता और आपकी कर योग्य आय कम हो जाती है|

आप कुछ निवेश या खर्चे करके अपना टैक्स भार कम कर सकते हैं (Tax Deduction)

कुछ उदहारण देता हूँ|

  1. सेक्शन 80C के तहत निवेश (PPF, EPF, ELSS, NSC, जीवन बीमा प्रीमियम भुगतान, होम लोन principal रीपेमेंट इत्यादि) करने पर 1.5 लाख रुपये तक| अधिक जानकारी के लिए यह पोस्ट पढ़ें|
  2. सेक्शन 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर 25,000 रुपये तक टैक्स बेनिफिट (FY2019 से 50,000 रुपये तक| अधिक जानकारी के लिए यह पोस्ट पढ़ें|
  3. सेक्शन 80E का तहत शिक्षा लोन के ब्याज के भुगतान पर| अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|
  4. सेक्शन 24 के तहत होम लोन के ब्याज के भुगतान पर टैक्स बेनिफिट| अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|
  5. एनपीएस में निवेश के लिए Section 80CCD(1B) के तहत 50,000 रुपये का अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट| अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|
  6. कुछ विशिष्ट दान करने के लिए धारा 80G के तहत टैक्स बेनिफिट
  7. कुछ अन्य तरीकों को जानने लिए यह पोस्ट पढ़ें|

यह सब करने का बाद आपको अपनी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स कैलकुलेट करना होगा

आप लेटेस्ट टैक्स सलब जानने के लिए यह पोस्ट पढ़ सकते हैं|

income tax slab FY2018 2019

साथ की अगर आपकी कर योग्य आय 3.5 लाख रुपये से कम है, तो आपको 2,500 रुपये की टैक्स रिबेट (tax rebate) भी मिलेगी|

ध्यान हर तरह की आय पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स नहीं देना होता| जैसे की capital gains (पूँजी लाभ) पर अलग दर से टैक्स लगता है| जैसे इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर होने वाले लाभ पर FY2019 से आपको ऐसे टैक्स देना होगा|

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स बजट 2018

Illustration (उदहारण)

मान लिए आपकी आय 20 लाख रुपये है|

आपको 1.5 लाख रुपये का HRA मिलता है, जिसमें से 1 लाख रुपये कर मुक्त है| आपको कोई और allowance नहीं मिलता है|

आपने पीपीएफ खाते में 1 लाख रुपये का निवेश किया| ELSS में 50,000 रुपये का निवेश किया| साथ ही 50,000 रुपये आपने एनपीएस में निवेश किया|

20,000 रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम का भुगतान किया|

आपकी कितना टैक्स देना होगा?

इनकम टैक्स कैसे निकालें इनकम टैक्स रिटर्न 1

इनकम टैक्स कैसे निकालें इनकम टैक्स रिटर्न कैसे भरें 2

तो आपको कुल मिला कर 2,63,640 रुपये का टैक्स देना होगा|

अब मान लिए आपने कुछ शेयर बेचे और आपको 50,000 रुपये का मुनाफा (Short Term Capital Gain) हुआ| इस पर आपको 15% टैक्स देना होगा और टैक्स के ऊपर 4% Cess (FY2019) से| इससे आपकी टैक्स liability 7,800 रुपये से बढ़ जायेगी|

ध्यान दें आपका कुछ TDS भी आपका एम्प्लायर काटता होगा| अगर अतिरक्त टैक्स टीडीएस (TDS) के रूप में काट लिया गया है, तो आप इनकम टैक्स रिटर्न भर कर अतिरिक्त टैक्स को वापिस ले सकते हैं| अगर TDS कम कटा है, तो आपको अतिरिक्त टैक्स जमा करना होगा|

उपयोगी लिंक

इनकम टैक्स स्लैब 2017-2018

इनकम टैक्स स्लैब 2018-2019

 

ऑनलाइन इनकम टैक्स कैलकुलेटर

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नियमित आय के लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के dividend पर भरोसा न करें?

Last updated: जून 26, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

पिछले कुछ समय में काफी निवेशकों में नियमित आय (regular) के लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के डिविडेंड विकल्प (Dividend option of Equity Mutual Fund Scheme) में निवेश करना शुरू किया है|

हर म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम में निवेश के दो विकल्प होते हैं: Growth और Dividend

Dividend विकल्प के तहत आपको समय-समय पर dividend मिलता है| Growth विकल्प में कोई dividend नहीं मिलता| इन विकल्पों के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप इस पोस्ट को पढ़ सकते हैं|

मेरे अनुसार नियमित आय के लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के dividend option में निवेश करना एक बुरा विकल्प है| आपको इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के dividend विकल्प में निवेश नहीं करना चाहिए|

इस पोस्ट में मैं कारणों पर चर्चा करूंगा|

#1 Dividend मिलने की कोई गारंटी नहीं होती

नियमों के अनुसार dividend केवल मुनाफे में ही दिया जा सकता है| तो अगर शेयर बाज़ार गिर रहा है, तो हो सकता है की फण्ड मेनेजर के पास dividend देने के लिए मुनाफा ही ना हों| इसलिए आप dividend पर भरोसा नहीं कर सकते|

#2 Dividend देना फण्ड मेनेजर की मर्ज़ी है, आपका अधिकार नहीं

वैसे तो फण्ड मेनेजर dividend देने की कोशिश करेंगे, पर अगर आपको dividend नहीं मिलता, तो आप कुछ कर नहीं सकते|

मेरा मतलब है की अगर किसी वजह से फण्ड dividend की घोषणा नहीं करता, तो आप कुछ नहीं कर सकते| यह भी हो सकता है की आपकी उम्मीद से कम dividend की घोषणा हो|

हाँ, चाहें तो, आप अपने निवेश को बेच सकते हैं|

#3 Dividend आपके पैसे से ही आता है

कुछ लोगों में धारणा है की dividend मुफ्त की कमाई है| ऐसा बिलकुल नहीं है|

जितना डिविडेंड मिलता है, उतनी ही मात्र से आपके निवेश का मूल्य कम हो जाता है||

सच में देखें तो, टैक्स की वजह से मूल्य ज्यादा कम हो जाता है|

मान लिए आपके फण्ड का NAV 50 रुपये चल रहा है और फण्ड 2 रुपये के dividend की घोषणा करता है, तो डिविडेंड मिलते ही आपके फण्ड का NAV 50 रुपये से घट कर 48 रुपये हो जाएगा|

#4 Dividend पर टैक्स भी देना पड़ता है

म्यूच्यूअल फण्ड के dividend पर टैक्स के बारे में जानने से पहले एक बात का ध्यान रखें|

Dividend पर आप टैक्स नहीं देते, परन्तु म्यूच्यूअल फण्ड आपकी तरफ से टैक्स भरता है| परन्तु  टैक्स आता आपके पैसे से ही है|

समझ लिए, म्यूच्यूअल फण्ड टैक्स काट कर आपको पैसे देता है| ऐसे टैक्स को Dividend Distribution Tax (DDT) कहते हैं| उसके बाद मिले हुए dividend पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता|

आईये देखते हैं की यह कैसे काम करता है|

म्यूच्यूअल फण्ड दो प्रकार के होते हैं| इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड (equity mutual fund) और डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड (debt mutual fund)

इस पोस्ट में मैं प्रमुख तौर पर इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में ही बात कर रहा हूँ|

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड (Equity Mutual Fund)

वित्तीय वर्ष 2018 (मार्च 31 2018) तक मिलने वाले dividend पर कोई टैक्स नहीं लगेगा| परन्तु FY 2019 (1 अप्रैल 2018) से मिलने वाले dividend पर आपको 10% टैक्स देना होगा| इसके ऊपर सरचार्ज (12%) or Cess (4%) भी लेगा| तो कुल मिला कर आपका टैक्स हुआ 11.65%.

सच में देखें तो आपका टैक्स और भी ज्यादा हुआ|

फण्ड के आपके दिए गए dividend पर 10% टैक्स देना है|

आपको 100 रुपये का dividend देने के लिए फण्ड को 100/(1-10%) = 111.11 रुपये बांटने होंगे|

साथ ही जो 11.11 रुपये  का Dividend Distribution Tax देना है, उस पर 12% का सरचार्ज और 4% सेस लगेगा| कुल मिला कर आपका टैक्स हुआ, 12.94 रुपये|

तो समझ लिए की अगर आपके हाथ में 100 रुपये का dividend आया, तो आपके फण्ड का NAV 112.94 रुपये से कम हो जाएगा| 12.94 रुपये गए टैक्स में|

अगर आपने Dividend option की जगह Growth option में निवेश किया होता तो:

वित्तीय वर्ष 2019 से इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर होने वाले long term capital gain पर भी 10% टैक्स देना है|

परन्तु यहाँ पर आपको सरचार्ज नहीं देना होता|

तो कुल मिलकर आपको टैक्स देना होता है 10.4%| Dividend पर आपको 11.65% टैक्स देना पड़ रहा है|

Growth option में दो और फायदे हैं:

  1. आपको हर वित्तीय वर्ष 1 लाख रुपये तक के long term capital gain पर कोई टैक्स नहीं देना होता|
  2. साथ ही अगर आपकी कुल इनकम (LTCG हटाने के बाद) 2.5 लाख (या 3 लाख रुपये) से कम है, तो ऐसी कमी को भी आप LTCG की मात्रा में से कम कर सकते हैं|
  3. मान लिए आप 40 वर्ष के हैं और आपकी कुल आय 1 लाख रुपये है| आपको इक्विटी फण्ड बेचने पर कुल मिला कर 5 लाख रुपये का LTCG हुआ| अब क्यूंकि आप आय 2.5 लाख से 1.5 लाख रुपये कम है, तो आपको कुल मिला कर 5 लाख – 1.5 लाख – 1 लाख = 2.5 रुपये के मुनाफे पर ही 10% टैक्स देना होगा|
  4. Dividend पर तो म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी ही टैक्स काट लेती है| इसलिए वहां पर कोई रियायत नहीं है|

मेरे अनुसार dividend के लिए इंतज़ार करने से बेहतर विल्कल्प है की आप म्यूच्यूअल फण्ड के Growth option में निवेश करें| जब आपको पैसे की ज़रुरत है, तब आप अपने निवेश को बेच कर पैसे निकाल सकते हैं|

उससे भी ज़रूरी बात, अगर आपको नियमित आय चाहिए, तो इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के बजाय डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करें| इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में केवल वही पैसा निवेश होना चाहिए, जो की आप लम्बी अवधि तक नहीं निकालेंगे|

मैंने Dividend वाले म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश किया है? अब मैं क्या करूं?

यह निर्णय बहुत सी बातों पर निर्भर करता है|

आपका फाइनेंसियल एडवाइजर आपके पोर्टफोलियो के देख कर आपको सही राय दे सकता है|

पर हाँ, अब इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के dividend विकल्प में निवेश करना कोई अच्छा आईडिया नहीं है| आगे से तो निवेश न ही करें|

जो आप निवेश कर चुके हैं, उस निवेश को आप एक वर्ष पूरा होने के बाद (जब आपका exit load वाला पीरियड पूरा हो जाए), आप उस निवेश को Dividend से Growth में शिफ्ट कर सकते हैं|

ध्यान दें मैं यह नहीं कह रहा हूँ की नियमित आय की लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के Growth आप्शन में निवेश करें| वह भी गलत होगा| मैं बस यह कह रहा हूँ की Growth आप्शन Dividend विकल्प से बेहतर हैं|

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड (Debt Mutual Fund) की dividend स्कीम के बारे में मेरी राय

Dividend पर 25% टैक्स (DDT) लगता है| इसके ऊपर सरचार्ज (12%) or Cess (4%) भी लेगा| तो कुल मिला कर आपका टैक्स हुआ 29.12%|

अगर इक्विटी फण्ड के तरह ही गणना करें,  आपके हाथ में 100 रुपये का dividend आया, तो आपके फण्ड का NAV कम हो जाएगा 138.82 रुपये से|

3 वर्ष से पहले डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड बेचने पर आपको मुनाफे पर अपने टैक्स ब्रैकेट के अनुसार टैक्स देना होता है|

3 वर्ष के बाद बेचें पर मुनाफे पर 20% टैक्स होता है| पर यहाँ आपको indexation का बेनिफिट मिलता है|

आपको नियमित आय की ज़रुरत है और आप 10% या 20% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं, तो आपको dividend विकल्प में निवेश करने की ज़रुरत नहीं है|

अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं और आपको नियमित आय की ज़रुरत है, तो आप dividend विकल्प के बारे में सोच सकते हैं|

यहाँ भी आपका फाइनेंसियल एडवाइजर आपके पोर्टफोलियो के देख कर आपको सही राय दे पायेगा|

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स बजट 2018

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1 अप्रैल 2018 से लागू होंगे यह 7 नए टैक्स नियम: ध्यान रखें और बचाएं टैक्स

Last updated: मार्च 19, 2018 | by दीपेश 2 Comments

1 April 2018 से टैक्स नियमों में कुछ बदलाव होगा|

आईये जानते हैं कुछ प्रमुख टैक्स बदलावों के बारे में| जानकारी होने पर अतिरिक्त टैक्स बचा सकते हैं और बेहतर टैक्स प्लानिंग कर सकते हैं|

#1 आप ले सकेंगे 40,000 रुपये के Standard Deduction का लाभ

यह लाभ केवल सैलरी पाने वाले या पेंशन पाने वाले लोग ही ले सकते हैं|

अगर आप self-employed हैं, तो आप यह लाभ नहीं ले पायेंगे|

परन्तु कुछ ख़ास लाभ नहीं है क्योंकि चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति (medical bill reimbursement up to Rs 15,000) और conveyance/transport allowance (Rs. 19,600) को वापिस ले लिया गया है|

देखें तो, अधिकतम लाभ 34,200 रुपये से बढ़कर 40,000 रुपये हो जाएगा|

कुछ फायदा तो है|

इसके अलावा एक लाभ यह है की आपको यह टैक्स बेनिफिट लेने के लिए कुछ भी दस्तावेज जमा करने की ज़रुरत नहीं है|

#2 इनकम टैक्स सेस (Cess) 3% से बढ़ कर 4% हो जाएगा

आपको अपने टैक्स दायित्व (liability) के ऊपर cess का भुगतान करना होता है|

मान लिए आपका कुल टैक्स दायित्व 20,000 रुपये आया| उस राशि पर आपको Cess देना पड़ता है|

April 1, 2018 से Cess 3% से बढ़ कर 4% हो जाएगा|

तो पहले अगर 20,000 के टैक्स पर 600 रुपये Cess भरते, 1 अप्रैल से आपको 800 रुपये भरना होगा|

ज़ाहिर है की इससे आपका टैक्स भार थोड़ा सा बढेगा|

अगर जानना चाहते है की कैसे होता है आपका इनकम टैक्स कैलकुलेट, तो इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें|

#3 इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड या शेयर बेचने पर होने वाले long term capital gain पर देना होगा 10% टैक्स

अभी (मार्च 31 2018) तक आपको long term capital gain (LTCG) पर कोई टैक्स नहीं देना होता|

यह नियम 1 अप्रैल 2018 से बदल जाएगा और आपको देना होगा 10% टैक्स|

बस इतनी राहत है की आपको 31 जनवरी 2018 तक के मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं देना होगा| साथ ही हर वर्ष 1 लाख रुपये तक के LTCG पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा|

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की गणना को विस्तार से समझने के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|

#4 इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड से मिलने वाले dividend पर भी लगेगा 10% टैक्स

केवल long term capital gain ही नहीं, इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड से मिलने वाले dividend पर भी आपको टैक्स देना होगा|

ध्यान दें 31 मार्च 2018 तक मिलने वाले इक्विटी फण्ड के dividend पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता|

बहुत से निवेशक नियमित आय की लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के dividend विकल्प में निवेश करते हैं|

बेहतर विकल्प होगा की आप इक्विटी फण्ड की dividend स्कीम को छोड़ कर growth स्कीम में निवेश करें|

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स बजट 2018

#5 हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर मिलने टैक्स बेनिफिट 25,000 रुपये से बढ़कर 50,000 हज़ार रुपये हो जाएगा

अभी (मार्च 31 2018) तक आप अपने परिवार (स्वयं, पति/पत्नी और बच्चों) के हेल्थ  इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर 25,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट पा सकते हैं|

1 अप्रैल 2018 से यह सीमा 25,000 रुपये से बढ़ कर 50,000 रुपये प्रति वित्तीय वर्ष हो जायेगी।

अगर आप सीनियर सिटीजन (आयु 60 वर्ष से ज्यादा है), तो आप 30,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते थे, 1 अप्रैल 2018 50,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

अगर आप अपने माता-पिता के लिए भी प्रीमियम देते हैं, तो आप 50,000 अपने लिए और 50,000 अपने माता-पिता के प्रीमियम के भुगतान के लिए टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं| यानी की कुल मिलाकर 1 लाख रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

हेल्थ इंश्योरेंस पालिसी के प्रीमियम पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट के बारे में आप विस्तार से इस लिंक पर पढ़ सकते हैं

#6 अगर आपने कई वर्ष का हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम एक साथ भर दिया है, तो आप उस प्रीमियम को कई वर्ष में बाँट सकते हैं

कई बार अगर आप दो-तीन बर्षों के प्रीमियम का भुगतान एक साथ करते हैं (multi-year policy), तो आपको कुछ discount मिलता है| पर परेशानी यह है की टैक्स बेनिफिट केवल उसी वर्ष मिलता है की जिस वर्ष में आपने प्रीमियम का भुगतान किया ह|

1 अप्रैल 2018 से ऐसा नहीं होगा| अब से आप प्रीमियम को बराबर हिस्सों में बाँट कर टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

तो मान लिए आपने दो वर्ष के प्रीमियम का भुगतान किया 60,000 रुपये| ऐसी स्तिथि में आप एक साल में 60,000 रुपये का टैक्स बेनिफिट ले की बजाय दो सालों में 30-30 हज़ार रुपये का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

#7 सीनियर सिटीजन (वरिष्ठ नागरिकों) को 50,000 रुपये तक के ब्याज पर नहीं देना होगा टैक्स

1 April 2018 से वरिष्ठ नागरिकों को बचत खाते (savings account), फिक्स्ड डिपाजिट (fixed deposit) या रेकरिंग डिपाजिट (recurring deposit) पर बर्ष में 50,000 तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होगा|

यह टैक्स लाभ धारा 80TTB के तहत है|

अगर ब्याज 50,000 रुपये  से ज्यादा है, तो टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

अगर आप एक सीनियर सिटीजन हैं और आपने वर्ष में फिक्स्ड डिपाजिट और बचत खाते पर 90,000 रुपये का ब्याज पाया| 50,000 रुपये तक कोई टैक्स नहीं देना होगा|

बचे हुए 40,000 रुपये पर इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

यह नियम आपने बैंकों, सहकारी बैंकों (co-operative bank) और डाकघरों (post-office) में खोलें गए खातों के लिए है।

TDS भी 50,000 रुपये से अधिक ब्याज पर ही लगेगा|

अगर धारा 80 TTB के तहत लाभ ले रहे हैं, तो धारा 80 TTA के तहत कर लाभ नहीं ले सकते हैं। धारा 80TTA के तहत सेविंग्स बैंक अकाउंट पर मिलने वाले 10,000 रुपये तक के ब्याज पर टैक्स छूठ है|

साथ ही सीनियर सिटीजन को कुछ और भी स्पेशल टैक्स बेनिफिट मिलते हैं और 1 अप्रैल 2018 से कुछ अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट भी मिलेंगे| अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें|

पढ़ें: सीनियर सिटीजन को मिलने वाले 7 स्पेशल टैक्स बेनिफिट

पढ़ें: इनकम टैक्स स्लैब FY2018-2019

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