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हेल्थ इंश्योरेंस

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मेडिकल लोन या हेल्थ इंश्योरेंस: इलाज के खर्चे की भरपाई कैसे करें?

by दीपेश Leave a Comment

इलाज़ का खर्चा बढ़ता जा रहा है| अगर अस्पताल में भारती होना पड़े, तो लम्बे बिल का खतरा रहता है| ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है जहाँ अस्पताल के बिल ने परिवार की आर्थिक स्तिथि खराब कर दी हो| ऐसे में आप क्या कर सकते हैं?

आज दो विकल्पों पर चर्चा करते हैं: हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) और मेडिकल लोन|

दोनों में कुछ अच्छी और बुरी बातें हैं| देखते हैं कौन सा हाँ बेहतर विकल्प|

हेल्थ इंश्योरेंस लेने में क्या समस्याएं हैं?

हेल्थ इन्श्योरेंस में आप हर वर्ष कुछ प्रीमियम देते हैं| अगर असपताल में भारती होते हैं, तो बीमा कंपनी इलाज़ का खर्चा उठाती है| अगर क्लेम नहीं किया, तो प्रीमियम वापिस नहीं किया जाता| जानते हैं क्या हैं परेशानियां|

  1. आप प्रीमियम का भुगतान करते रहते हैं| ऐसा हो सकता है की कई वर्षों तक आपको क्लेम न करना पड़े| आपको लगेगा की आपका अनेक वर्षों का प्रीमियम बेकार गया|
  2. हर साल प्रीमियम बढ़ा दिया जाता है| कई बार प्रीमियम एक वर्ष में 30-40% तक भी बढ़ सकता है| अगर किसी वजह आप प्रीमियम नहीं दे पाए, तो पूरी मेहनत बेकार| अगर आप कभी क्लेम भी नहीं किया, तो सारा पुराना प्रीमियम भी बेकार चला गया|
  3. इंश्योरेंस कंपनी पर भरोसा करना भी मुश्किल है| आपने कई वर्षों तक प्रीमियम का भुगतान किया, जब क्लेम की बारी आई, तो कोई फ़ालतू कारण बताकर क्लेम रिजेक्ट कर दिया|
  4. इंशोयरेंस कंपनी कई अन्य तरीकों से भी बदमाशी करती हैं| आपके पास सस्ता इंश्योरेंस प्लान है, तो वह उसे बंद करके आपको कोई नया महंगा प्लान खरीदने के लिए दबाव डालेंगी|
  5. बुज़ुर्ग लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने में परेशानी रहती है| साथ ही, अगर आपको कोई पहले से बीमारी (pre-existing illness) है, तो स्वास्थ्य बीमा मिलने में परेशानी रहेगी| बीमा कंपनी आपकी एप्लीकेशन रिजेक्ट कर देगी या प्रीमियम बहुत अधिक होगा|
  6. अस्पताल के कुछ तरह के खर्चों का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा नहीं किया जाता| इनका भुगतान आपको अपनी जेब से करना होगा|

पढ़ें: कौनसी है बेस्ट हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी? (हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट रेश्यो की जानकारी)

मेडिकल लोन के क्या फायदे और नुकसान हैं?

मेडिकल लोन एक तरह का पर्सनल लोन ही होता है| बस समझ लिए की लोन की राशि आपकी बैंक खाते में आने की बजाय सीधे अस्पताल को भेजी जाती है| कुछ मेडिकल लोन में राशि आपके खातें में भी आ सकती है|

मेडिकल लोन आप केवल ज़रुरत पड़ें पर ही लेंगे| आपको हर वर्ष प्रीमियम देने की आवश्यकता नहीं है| कुछ मामलों में आपको अस्पताल के बिल पर कुछ डिस्काउंट भी मिल सकता है| ब्याज की दर एक पर्सनल लोन से कम हो सकती है|

अगर इलाज़ के खर्चे की लिए पैसे की ज़रुरत है, तब आप मेडिकल लोन ले सकते हैं| मेडिकल लोन के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|

अब सवाल आता है, किस पर भरोसा करें, हेल्थ इंश्योरेंस पर या मेडिकल लोन पर?

मेडिकल लोन और हेल्थ इंश्योरेंस में क्या बेहतर है?

मेरे अनुसार हेल्थ इंश्योरेंस (स्वास्थ्य बीमा) लेना एक बेहतर विकल्प है|

आईये देखते हैं क्यों|

मैं मानता हूँ की अगर आप कई वर्षों तक क्लेम ने करें, तब आपको महसूस होगा की आपका प्रीमियम व्यर्थ गया| इससे बेहतर तो आपने यह पैसा कहीं निवेश कर दिया होता और कुछ रिटर्न पाए होते| समय पड़ने पर आप इस पैसे को निकाल कर चिकित्सा पर खर्च भी कर सकते हैं| परन्तु, यहाँ एक समस्या है| ज़िन्दगी का कोई भरोसा नहीं| आपने 10 वर्ष तक 20,000 रुपये का प्रीमियम दिया और 11वें पर में सीधे 5 लाख रुपये का क्लेम करने की ज़रुरत पड़ है| ऐसा होने पर शायद आपको अपना पिछले 10 वर्ष का प्रीमियम इतना व्यर्थ नहीं लगेगा|

अगर आपने प्रीमियम देने की बजाय यह पैसा निवेश किया होता, तब आप इस पैसे का इलाज़ में इस्तेमाल कर सकते थे| परन्तु यह पैसा एक बार खर्च हो गया, तो खत्म हो जाएगा| हेल्थ इंश्योरेंस की सीमा हर वर्ष रिसेट (reset) हो जाती है| मतलब की आप आगे भी क्लेम कर सकते हैं| उदहारण की सहायता से समझते हैं|

आपके पास 5 लाख रुपये का बीमा है| आपके पालिसी 1 जून, 2018 को खरीदी| आपका पालिसी वर्ष हुआ 1 जून से 31 मई| आप एक पालिसी वर्ष में पूरे 5 लाख रुपये का क्लेम कर लेते हैं| इस पालिसी वर्ष में आप कोई और क्लेम नहीं कर पायेंगे क्योंकि आपकी बीमा की सीमा खत्म हो गयी है| आपका पालिसी वर्ष 31 मई, 2019 को समाप्त हो जाएगा| 1 जून, 2019 से आपकी लिमिट फिर से रिसेट (reset) हो जायेगी| इसका मतलब आप 1 जून, 2019 से फिर से 5 लाख तक रुपये तक का क्लेम कर सकते हैं| ऐसा हर वर्ष होता रहेगा|  अगर आप प्रीमियम देने की बजाय पैसा जमा किया होता, तब वह पैसा तो खत्म हो गया होता| आगे आपक क्या करते?

कई बार ऐसी बीमारी भी हो जाती है, जहाँ आपको बार-बार अस्पताल में भारती होना पड़ता है और खर्चा आता रहता है| ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस पालिसी बहुत लाभकारी हो सकती है|

मेडिकल लोन में केवल आपको पैसा उधार मिलता है| यह पैसा आपको ब्याज समेत चुकाना भी होगा| ब्याज की दर अधिक भी हो सकती है| साथ ही, इस बात की भी क्या गारंटी है की आपको मेडिकल/ लोन मिल ही जाएगा| अगर आपको ज़रुरत पड़ने पर मेडिकल लोन नहीं मिला, तब आप क्या करेंगे? आपका या परिवारजन का इलाज़ कैसे होगा? अगर कोई ऐसी बीमारी होती है, जहां बार-बार अस्पताल में भारती होना पड़े, तो कितनी बार लोन लेंगे और कैसे भुगतान करेंगे|

ध्यान दें हेल्थ इंश्योरेंस में आपको केवल प्रीमियम देना होता है| क्लेम का भुगतान बीमा कंपनी करती है और आपको उसे कुछ लौटाना नहीं होता| मेडिकल लोन में आपने 5 लाख का लोन लिया, तो आपको 5.5 लाख रुपये (लौटाने भी होंगे)|

हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर टैक्स बेनिफिट मिलते हैं| मेडिकल लोन के भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता|

पढ़ें: बीमा खरीदते समय इन गलतियों से बचें?

आपको क्या करना चाहिए?

मेरे अनुसार आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस हों चाहिए| अगर आपका एम्प्लायर आपको बीमा प्रदान करता है, तब आप कुछ राहत ले सकते हैं| परन्तु ध्यान रखें एम्प्लायर द्वारा प्रदान किया गया बीमा केवल तभी तक होता है, जब तक आप नौकरी कर रहे हैं|

साथ ही थोड़ा सा पैसा जमा करते रहे और एक मेडिकल फण्ड (medical fund) बनाएं| यह पैसा आप फिक्स्ड डिपाजिट या लिक्विड फण्ड में रख सकते हैं| ज़रुरत पड़ने पर आप मेडिकल इंश्योरेंस के साथ-साथ इसका इस्तेमाल भी कर सकते हैं| मेडिकल लोन पर भरोसा करना अच्चा विकल्प नहीं है|

सौजन्य: EmiCalculator.net

Filed Under: Financial Planning, Life Insurance Tagged With: medical loan in hindi, बेस्ट हेल्थ इंश्योरेंस प्लान, मेडिकल लोन, लोन के प्रकार, हेल्थ इंश्योरेंस

Health Insurance Claim Settlement Ratios 2018 (हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट 2018)

Last updated: जनवरी 31, 2019 | by दीपेश Leave a Comment

जब भी हम कोई इंश्योरेंस प्लान लेने जाते हैं, तो पालिसी का चुनाव करने से पहले हम उस कंपनी के क्लेम सेटलमेंट रेश्यो (claim settlement ratio) के बारे में जानना चाहते हैं| क्लेम सेटलमेंट रेश्यो जितना ज्यादा है, आपको उस कंपनी में उतना आपको उतना ही विश्वास रहेगा|

क्लेम सेटलमेंट रेश्यो की गणना करने के लिए आप “जितने क्लेम का आपने भुगतान किया” का “जितने क्लेम आपके पास आये” से भाग (divide) करते हैं|

Claim Settlement Ratio = No. of claims settled/No. of claims received

क्लेम सेटलमेंट रेश्यो की यह परिभाषा जीवन बीमा कंपनी ( लाइफ इंश्योरेंस कंपनी) के लिए चलती है| हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी में क्लेम सेटलमेंट दूसरे तरीके से देखा जाता है| यहाँ पर हम लोग Incurred Claims Ratio या ICR की बात करते हैं|

Incurred Claims Ratio (ICR) = कंपनी ने कितनी राशि का क्लेम में भुगतान किया/कंपनी ने कितना प्रीमियम इकठ्ठा किया = Amount paid in Claims/Health Insurance Premium collected during the year

जनवरी 2019 में हेल्थ इंशोयरेंस कंपनियों के लिए FY2018 की यह जानकारी रिलीज़ करी गयी|

Health Insurance Claim Settlement Ratios 2018 (हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट 2018)

incurred claims ration health insurance companies FY2018 हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट 2018

Incurred Claims Ratio (ICR) कितना होना चाहिए?

लाइफ इंश्योरेंस में क्लेम सेटलमेंट रेश्यो जितना ज्यादा है, उतना अच्छा है| परन्तु हेल्थ इंश्योरेंस के ICR के साथ ऐसा नहीं है|

अगर ICR बहुत ज्यादा है (100% से भी ज्यादा), इस बात के दो मतलब हो सकते हैं|

  1. कंपनी क्लेम सेटल करने में बहुत अच्छी है| यह एक अच्छी बात है|
  2. कंपनी ने अपनी पालिसी का दाम सही से नहीं रखा है| ऐसी स्तिथि में आने वाले समय में आपकी पालिसी का प्रीमियम एक दम से बढ़ाया जा सकता है| यह आपके लिए परेशानी की वजह है|

अब ICR किस वजह से ज्यादा है, यह बता पाना मुश्किल है|

अगर ICR बहुत कम हैं (60% से भी कम), इसकी भी दो वजह हो सकती है|

  1. कंपनी बहुत क्लेम रिजेक्ट करती है| यह परेशानी वाली बात है|
  2. कंपनी के क्लेम ही नहीं आ रहे| कंपनी ने शायद स्वस्थ्य लोगो को ही बीमा बेचा है| या फिर इंश्योरेंस कंपनी ने पालिसी का दाम सही रखा है| ऐसे में आपके लिए कुछ भी कह पाना मुश्किल है| आप नहीं कह सकते ही कंपनी अच्छी है या बुरी है|

अब ICR किस वजह से कम है, यह बता पाना मुश्किल है|

मेरे अनुसार ऐसी इंश्योरेंस कंपनी के साथ हेल्थ इंश्योरेंस खरीदें, जिनका ICR 60% से 90% के बीच में हो| केवल एक वर्ष के ICR पर ध्यान ने दें| कम से कम 2-3 वर्षों के ICR पर ध्यान दें|

उससे भी ज़रूरी बात, पालिसी लेते समय कुछ भी न छुपायें| इंश्योरेंस कंपनी को अपने स्वास्थ्य के बारे मिएँ पूरी जानकारी दें| इससे आपका क्लेम रिजेक्ट होने की संभावना कम हो जायेगी|

पढ़ें: हेल्थ इंश्योरेंस टैक्स बेनिफिट (2019)

अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट (अंग्रेजी) में पढ़ें|

Filed Under: Financial Planning, Life Insurance Tagged With: health insurance premium, हेल्थ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस और टैक्स बचत

अगर इंश्योरेंस (बीमा) खरीदने की सोच रहे हैं, तो इस गलतियों से बचें

by दीपेश Leave a Comment

पर्याप्त बीमा खरीदना फाइनेंसियल प्लानिंग का पहला कदम है|

आप यहाँ पर गलती नहीं कर सकते|

आपको समझने की ज़रुरत है की अगर निवेश करने में गलती हो गयी, तो आप आगे ज़िन्दगी में इस सुधार सकते हैं| परन्तु अगर जीवन बीमा लेने में गलती हो गयी, तो शायद आपको दूसरा मौका न मिले| सोचिये आपकी इस गलती की वजह से आपके परिवार को कितनी परेशानी हो सकती है| आपके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है|

अगर पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा नहीं लिया, तो शायद आप अपने परिवार का इलाज़ किसी अच्छे अस्पताल में न करा पाएं|

इसके बावजूद भी हम में से बहुत से हमारे बीमा पोर्टफोलियो पर ध्यान नहीं देते हैं। जीवन बीमा तो फिर भी ले लेते हैं| पर हेल्थ इंश्योरेंस को पैसे की बर्बादी समझते हैं|

आईये ऐसी ही कुछ गलतियों पर इस पोस्ट में जिक्र करते हैं| वैसे तो हम लोगों को कई प्रकार के बीमा की ज़रुरत होती है, परन्तु इस पोस्ट में मैं केवल जीवन और स्वास्थ्य बीमा पर चर्चा को सीमित रखूँगा।

#1 मेरे Employer मुझे जीवन और स्वास्थ्य कवर प्रदान करता है । मुझे अलग से बीमा खरीदने की ज़रुरत नहीं है|

संगठित क्षेत्र में कई Employer अपने कर्मचारियों और उनके तत्काल परिवारों को हेल्थ इंश्योरेंस प्रदान करते हैं। कुछ Employer अपने कर्मचारियों को जीवन कवर भी प्रदान करते हैं। आम तौर पर पूरे परिवार के लिए स्वास्थ्य कवर 2-4 लाख रुपये होता है। अगर जीवन बीमा दिया जाता है, तो वह आपकी वार्षिक आय का 2-5 गुना होता है|

अब आपको अपने आप से यह सवाल पूछने की जरूरत है| क्या यह बीमा राशि पर्याप्त है?

क्या किसी बड़े शहर में 4 लोगो के परिवार के लिए 3 लाख की स्वास्थ्य कवर (हेल्थ इंश्योरेंस) पर्याप्त है?

बात करें जीवन बीमा की| मान लिए, आपके एम्प्लायर ने आपको 20 लाख का जीवन बीमा दे दिया है|

आपकी अनुपस्तिथि में क्या आपका परिवार 20 लाख रूपए के साथ अपनी जीवन शैली बनाए रख पाएगा (यदि आपकी वार्षिक आय 8 लाख रुपए थी)। क्या आपके होम लोन का भुगतान हो पायेगा?

आपकी बीमा की ज़रुरत के बारे में आपको ज्याद पता है या आपके एम्प्लायर को?

क्या आप चाहते हैं कि आपका Employer निर्णय करे की आपको इलाज़ के लिए कौन से अस्पताल जाना है?

एम्प्लायर द्वारा दिया गया बीमा केवल तभी तक है, जब आप उसी नौकरी में हैं| आपके नौकरी छोड़ने पर यह बीमा नहीं रहेगा| क्या आपके नौकरी छोड़ने पर आपकी बीमा की ज़रुरत खत्म हो जायेगी?

अगर नौकरी बदल रहे हैं, तो शायद नया एम्प्लायर आपको यह बीमा कवर न दें या बीमा का हो| तब आप क्या करेंगे? नयी नौकरी शुरू करने और पुरानी नौकरी छोड़ने में कुछ समय हो सकता है, उस बीच में आपके पास कोई कवर नहीं होगा| अगर इस दौरान कुछ हो गया तो आप क्या करेंगे?

अपने बीमा की पोर्टफोलियो पर नियंत्रण पाएं| पर्याप्त जीवन और स्वास्थ्य बीमा स्वयं खरीदें|

#2 मैं समझता हूँ की बीमा खरीदने की ज़रुरत है पर मेरे पास पैसे नहीं हैं

अब इसका फैसला आपको करना है|

अगर आपके पास लाइफ इंश्योरेंस (जीवन बीमा) और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम के लिए पैसे नहीं है, तब आप अस्पताल के महेंगे इलाज़ के लिए पैसे कहाँ से लायेंगे|

अगर आपको कुछ हो गया, तो आपके घर को चलाने के लिए पैसे कहाँ से आयेंगे? आपके होम लोन का भुगतान कैसे होगा? आपके बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी?

अगर आपके पास इन सवालों के जवाब नहीं है, तो आपको कैसे भी करके जीवन और स्वास्थ्य बीमा लेना चाहिए|

आपके प्रीमियम को कम करने का तरीके हैं| इस पोस्ट में पढ़ सकते हैं|

पढ़ें: कैसे कम करें अपना हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम?

#3 आप टैक्स को बचाने के लिए बीमा खरीदते हैं

जीवन बीमा के प्रीमियम भुगतान पर धारा 80C के तहत प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपये तक की छूठ मिलती है|

स्वास्थ्य बीमा (हेल्थ इंश्योरेंस) प्रीमियम भुगतान पर  आयकर धारा 80D के तहत प्रति वर्ष 25,000 हज़ार रुपये तक की छूठ मिलती है| FY2019 से यह छूठ बढ़ा कर 50,000 रुपये प्रति वर्ष कर दी गयी है|

अगर आपका ध्यान बीमा खरीदते समय केवल टैक्स बेनिफिट पर रहेगा, तो आप गलती कर सकते हैं|

पहले अपने लिए पर्याप्त बीमा खरीदें| टैक्स बेनिफिट तो केवल सोने पर सुहागा है|

आपको जीवन में दुर्भाग्यपूर्ण और अप्रत्याशित घटनाओं से बचाने के लिए बीमा खरीदने चाहिए और न केवल टैक्स को बचाने के लिए।

family insurance plan

#4 अगर प्रीमियम दे रहा हूँ, तो कुछ तो वापिस मिलना चाहिए

अगर कुछ वापिस नहीं मिला और मैंने क्लेम नहीं किया, तो सारा पैसा बेकार गया|

यह बहुत ही गलत सोच है|

इसी कारण बहुत से लोग टर्म लाइफ इंश्योरेंस नहीं खरीदते| कुछ लोग हेल्थ इंश्योरेंस भी इस वजह से नहीं खरीदते|

मेरे अनुसार टर्म लाइफ इंश्योरेंस जीवन बीमा खरीदने का सबसे अच्छा और सस्ता तरीका है| एक पोस्ट में मैंने सबसे अच्छे टर्म इंश्योरेंस प्लान के बारे में भी चर्चा करी है|

परन्तु क्योंकि टर्म इंश्योरेंस प्लान में कुछ पैसा वापिस नहीं मिलता (अगर आपको पालिसी अवधि के अंत तक जीवित रहते हैं), बहुत से लोग ऐसे प्लान से बचते हैं|

ऐसे लोग टर्म इंश्योरेंस की जगह कम रिटर्न वाले ट्रेडिशनल इंश्योरेंस प्लान (जैसे की एलआईसी जीवन आनंद) में निवेश करते हैं| ऐसे प्लान में न तो रिटर्न अच्छे मिलते हैं और न ही पर्याप्त जीवन बीमा मिलता है|

या फिर कुछ लोग यूलिप (Unit Linked Insurance Plan या ULIP) में निवेश करते हैं| यहाँ भी काफी परेशानियां हैं|

इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को न मिलाएं| Do not mix Insurance and Investment.

ऐसी गलती करने की बजाय, अगर आप टर्म इंश्योरेंस प्लान खरीदें और पैसा अलग से निवेश करें, तो आपको जीवन बीमा भी ज्यादा मिलेगा और शायद रिटर्न भी|

#5 मैं युवा और स्वस्थ हूँ, मुझे बीमा की ज़रूरत नहीं है

अच्छी बात है|

पर क्या आप दावे से कह सकते हैं की कभी बीमार नहीं पड़ेंगे? या आप कभी अस्पताल में कभी भर्ती नहीं होंगे? ज़िन्दगी में कभी भी कुछ भी हो सकता है| आपको तैयार रहने की ज़रुरत है|

एक्सीडेंट तो किसी का भी हो सकता है? ऐसी स्तिथि में अस्पताल में भारती भी होना पड़ सकता है और मृत्यु भी हो सकती है|

बशर्ते आप युवा और स्वस्थ हों, आपको जीवन और स्वास्थ्य बीमा लेने की ज़रुरत है|

अगर आप कम आयु में बीमा लेते हैं, तो आपका प्रीमियम भी कम होगा| अगर बीमारी होने का इंतज़ार करेंगे, तो बीमारी होने के बाद शायद आपको बीमा मिले ही नहीं|

#6 अपने  बच्चों के नाम पर जीवन बीमा खरीदना

इससे बड़ी बेवकूफी तो हो ही नहीं सकती|

आप जीवन बीमा इसलिए खरीदते हैं ताकि आपकी अनुपस्थिति में आपके परिवार की जरूरतों को पूरा किया जा सके। यदि आप आपके बच्चे के जीवन पर जीवन बीमा खरीदते हैं  और कुछ आप के साथ होता है, तो बीमा कंपनी कुछ भी भुगतान नहीं करेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि बीमा आपके बच्चे का जीवन पर है, आपके जीवन पर नहीं|

बच्चे के नाम पर निवेश करने पर रिटर्न तो बेहतर मिलते हैं, परन्तु जीवन बीमा का कोई अर्थ नहीं बचता|

और जब आप बीमा और निवेश की जरूरतों को मिलाते हैं, तो ऐसी गलतियाँ हो सकती हैं|

#7 मैंने यह प्लान इसलिए खरीदा क्योंकि बेचने वाला मेरा मित्र या परिवार से था

आपको न कहना आना चाहिए|

अगर आपका मित्र या परिवार जन आपको कोई ऐसी बीमा पालिसी बेच रहा है जो आपके लिए लाभकारी है, तो अवश्य खरीदें|

परन्तु इस वजह से न खरीदें क्यूंकि आप उनसे मना नहीं कर सकते|

अगर आपके मित्र को आपको गलत प्लान बेचते हुए बुरा नहीं लग रहा, तो आपको न करने में बुरा नहीं लगना चाहिए|

विनम्रता से न कहना सीखें|

#8 अपने दिमाग से फैसला लें, न की अपने दिल से

जब कोई इंश्योरेंस एजेंट आपसे संपर्क करता है, तो बेचने के लिए आपकी भावनाओं को अपील करता है|

आपसे कहा जाएगा की इस प्लान को लेने पर आप अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं|

इस बात को सुनने के बाद मना करना बहुत मुश्किल है| मना करने पर अपराध बोध होगा|

एक स्मार्ट विक्रेता इस बात को जानता है| इसीलिए वह आपके दिल से अपील करता है|

आप समझदारी से काम लें|

आपने दिल को दिमाग पर भारी न होने दें| किसी भी इंश्योरेंस प्लान को सही से जांचे परखें और उसके बाद ही निर्णय लें|

संक्षिप्त में

  1. पर्याप्त स्वास्थ्य और जीवन कवर खरीदें। केवल टैक्स बचाने पर ध्यान न दें|
  2. केवल अपने एम्प्लायर द्वारा स्वास्थ्य (या जीवन) बीमा कवर पर भरोसा न करें|
  3. बीमा और निवेश की जरूरतों को न मिलाएं|
  4. अपने बच्चों के नाम पर जीवन बीमा न लें|
  5. अपने आपको को सुपरमैन न समझें, बीमा को ज़रुरत सभी को है|
  6. अपने मित्रों और परिवार जनों को मना करना सीखें|
  7. समझदारी से काम लें| दिल की बजाय, दिमाग से फैसला करें|

Image Credit: Chris and Karen Highland, 2015. The original image and information about usage rights can be downloaded from Flickr

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