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एलआईसी न्यू बीमा बचत (प्लान 816) की पूरी जानकारी (LIC New Bima Bachat in Hindi)

by दीपेश Leave a Comment

अगर मैं आपसे कहूं की आपके इंश्योरेंस प्लान की मेच्योरिटी के समय मिलने वाली राशि पर आपको टैक्स देना होगा, तो क्या आप ऐसे प्लान में निवेश करेंगे?

शायद नहीं|

आज मैं ऐसे ही एक जीवन बीमा प्लान के बारे में बात करूंगा|

आज चर्चा करेंगे एलआईसी न्यू बीमा बचत (LIC New Bima Bachat) प्लान के बारे में|

एलआईसी न्यू बीमा बचत (प्लान 816)  LIC New Bima Bachat in Hindi

एलआईसी न्यू बीमा बचत एक सिंगल प्रीमियम प्लान है। इसका मतलब की आपको केवल एक बार (पालिसी लेते समय) ही प्रीमियम देना होता है|

साथ ही एलआईसी न्यू बीमा बचत एक सहभागी पारंपरिक जीवन (traditional non-linked participating plan) बीमा योजना है।

एलआईसी न्यू बीमा बचत प्लान एक मनी बेक (money back) प्लान हैं जिसमें आपको समय समय पर कुछ राशि मिलती रहती है|

पॉलिसी अवधि : 9, 12  या 15 वर्ष हो सकती है|

अधिकतम बीमित राशि पर कोई सीमा नहीं है|

एलआईसी न्यू बीमा बचत प्लान के लाभ (LIC New Bima Bachat: Survival and Maturity Benefits)

अब यह आपकी पालिसी अवधि पर निर्भर करते हैं|

  • पॉलिसी अवधि 9 वर्ष: तीसरे और छठे पॉलिसी वर्ष के अंत में बीमित रकम का 15% (15% of Sum Assured at the end of 3rd and 6th policy years)
  • पॉलिसी अवधि 12 वर्ष: तीसरे, छठे और नौवें पॉलिसी वर्ष के अंत में बीमित रकम का 15% (15% of Sum Assured at the end of 3rd, 6th and 9th policy years)
  • पॉलिसी अवधि 15 वर्ष: तीसरे, छठे, नौवें और बारहवें पॉलिसी वर्ष के अंत में बीमित रकम का 15% (15% of Sum Assured at the end of 3rd, 6th, 9th and 12th policy years)

पालिसी की परिपक्वता पर क्या लाभ मिलेगा?

आपको आपका प्रीमियम (प्रीमियम की किश्त जो आपने पालिसी एते समय दी थी| साथ ही आपको loyalty addition (निष्ठां वृद्धि) भी परिपक्वता के समय दी जायेगी|

एलआईसी न्यू बीमा बचत प्लान: मृत्यु लाभ (LIC New Bima Bachat: Death Benefit)

  • 5 वर्षों के भीतर मौत की स्थिति में, नामांकित व्यक्ति को बीमित राशि (Sum Assured) दी जायेगी।
  • 5 वर्षों के बाद मृत्यु की स्थिति में, नामांकित व्यक्ति को बीमित रकम के साथ लॉयल्टी वृद्धि भी दी जायेगी| (Sum Assured + Loyalty Addition)

प्लान के बारे में अधिक जानकारी आप एलआईसी की वेबसाइट पर पा सकते हैं|

एलआईसी न्यू बीमा बचत में रिटर्न कितना मिलेगा?

देखिये एलाईसी न्यू बीमा बचत एक पारंपरिक जीवन बीमा उत्पाद है|

इसीलिए ज्यादा रिटर्न की अपेक्षा तो आप नहीं कर सकते|

टैक्स से पहले आप 5-7% p.a. रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं|

पर इस प्लान एक और भी बड़ी समस्या है| आईये देखते हैं|

क्या आप टैक्स बचाने के लिए जीवन बीमा खरीदते हैं?

बहुत सारे लोग धारा 80 सी (Section 80C) के तहत टैक्स बचाने के लिए जीवन बीमा योजना खरीदते हैं।

पर आप प्रीमियम भुगतान के लिए कितना टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं, इस बात की एक सीमा है|

एक उदहारण की सहायता से समझते हैं|

एलआईसी बीमा बचत प्लान (15 वर्ष की पालिसी अवधि) के लिए एक 30 वर्षीय व्यक्ति को तकरीबन 81,000 का प्रीमियम भरना होगा|

आप एलआईसी न्यू बीमा बचत प्रीमियम कैलकुलेटर यहाँ पर देख सकते हैं|

धारा 80 सी के तहत वार्षिक प्रीमियम के भुगतान के लिए आपका टैक्स बेनिफिट  प्रीमियम राशि या बीमा राशि का 10% (इनमें से जो भी कम है), उस पर सीमित है| Tax Benefit capped at lower of (Annual Premium, 10% of Death Benefit)

तो इस स्तिथि में आपको पूरे 81,000 के प्रीमियम पर टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा|

बीमा राशि का 10 प्रतिशत केवल 10,000 रुपये हैं| (10% * 1 लाख रुपये)

आपको टैक्स बेनिफिट केवल 10,000 रुपये का ही मिलेगा|

 शायद आपके टैक्स बचाने की सीमा पहले ही खत्म हो गयी हो| तो आप कह सकते हैं की आपको इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता |

 इसके बावजूद भी अभी आपकी परेशानी खत्म नहीं हुई|

 आपको मिलने वाली राशि का क्या होगा?

अमूमन लाइफ इंश्योरेंस से मिलने वाली राशि पर कोई टैक्स नहीं देना होता|

पर ऐसा हेशा नहीं होता|

इस बात के लिए भी आयकर के कुछ नियम हैं|

आयकर अधिनियम की धारा 10 (10 डी) के तहत, यह स्पष्ट रूप से बताया गया  है कि अगर जीवन बीमा योजना का वार्षिक प्रीमियम बीमित रकम के 10% से अधिक है, तो ऐसी जीवन बीमा योजना से आय कर से छूट नहीं मिलती है।

और हम देख चुके हैं की एलआईसी न्यू बीमा बचत में प्रीमियम बीमा राशि के 10 प्रतिशत से अधिक है|

इसका मतलब यह हुआ की आपको एलआईसी न्यू जीवन बीमा बचत से मिलने वाली राशि पर टैक्स देना पड़ेगा|

ध्यान दें, ऐसी समस्या ज़्यादातर सिंगल प्रीमियम प्लान में हो जाती है| आपको केवल एक बार भुगतान करना होता है, इसीलिए राशि बहुत बड़ी हो जाती है|

अगर आप सोच रहे है की आप आयकर विभाग को इस राशि के बारे में नहीं बताएँगे, तो जान लिए की इंश्योरेंस कंपनी आपको TDS (टीडीएस) काट कर पैसा देगी| तो आयकर विभाग को इस राशि के बारे में अपने आप पता चल जाएगा|

ध्यान दे मृत्यु के समय मिलने वाली राशि (मृत्यु लाभ) पर अभी भी कोई टैक्स नहीं देना होगा|

आपको क्या करना चाहिए?

देखिये मैं तो कभी भी पारंपरिक जीवन बीमा योजनायों का पक्षधर नहीं रहा|

कम जीवन बीमा मिलता है और रिटर्न भी कम होते हैं|

एलआईसी न्यू बिमा बचत कुछ अलग नहीं है|

साथ ही यहाँ पर आपको टैक्स बेनिफिट भी कम मिलेगा और मिलने वाली राशि पर टैक्स भी देना होगा|

हुआ ना, करेला वो भी नीम चढ़ा|

अगर आप अभी भी एलआईसी न्यू बीमा बचत प्लान खरीदना चाहते हैं, तो आपकी मर्ज़ी|

एलआईसी के दूसरे प्लान के बारे में जानकारी

एलआईसी न्यू जीवन आनंद (LIC New Jeevan Anand)

एलआईसी जीवन उत्कर्ष (LIC Jeevan Utkarsh)

एलआईसी जीवन उमंग (LIC Jeevan Umang)

एलआईसी न्यू एंडोमेंट प्लान (LIC New Endowment Plan)

एलआईसी जीवन तरुण (LIC Jeevan Tarun)

एलआईसी ई-टर्म प्लान (LIC e-Term plan)

अन्य उपयोगी पोस्ट या लिंक

LIC प्रीमियम कैलकुलेटर

अपनी LIC पालिसी से लोन कैसे लें?

कौन से हैं बेस्ट टर्म इंश्योरेंस प्लान (Best Term Insurance Plan)

किस प्रकार का जीवन बीमा लेना चाहिए?

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY)

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY)

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कब पर्सनल लोन लेना बेवकूफी है?

Last updated: जनवरी 8, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

आजकल पर्सनल लोन आसानी से मिल आपको मिल जाता है| कुछ बैंक तो कुछ ही मिनिटों में आपके खाते में पैसे जमा कर देने का दावा करते हैं|

मेरे अनुसार कई मामलों में पर्सनल लोन आपकी काफी मदद कर सकता है|

पर हाँ, पर्सनल लोन एक असंरक्षित लोन (unsecured loan) होता है| इसलिए ब्याज दर भी काफी ज्यादा होती है| अब लोन का भुगतान भी आपको ही करना है|

इसलिए हर स्तिथि में पर्सनल लोन लेना अच्छा विकल्प नहीं है|

इस पोस्ट में मैं चर्चा करूंगा की कब पर्सनल लोन अच्छा विकल्प है और कब नहीं| साथ की यह भी देखेंगे की कब पर्सनल लोन लेना बेवकूफी होगा|

 मेरे अनुसार पर्सनल लोन लेना कब एक अच्छा विकल्प हैं?

  • जब आपके पास कोई बहुत ही महंगा लोन चल रहा हो, तो उस लोन को खत्म करने की लिए पर्सनल लोन लेना एक अच्छा विकल्प है| जैसे की आपके क्रेडिट कार्ड पर काफी सारी राशि बकाया है और आपको उस राशि का भुगतान करने में परेशान आ रही है, ऐसी स्तिथि में आप पर्सनल लोन ले सकते हैं|
  • क्रेडिट कार्ड पर आपको तकरीबन 40-45% p.a. ब्याज तक देना पड़ सकता है| साथ ही पूरा भुगतान अन करना पर आपको ब्याज मुक्त क्रेडिट पीरियड भी नहीं मिलता| पर्सनल शायद आपको 12-18% p.a. की लागत पर मिल जाए| साथ ही क्योंकि पर्सनल लोन में EMI होती है, इसको देना थोडा आसान भी हो सकता है| कई बार बैंक भी आपको ऐसा करने का सुझाव देते हैं|
  • किसी आपातकाल या अस्पताल के खर्चे के लिए पर्सनल लोन लेना| ऐसी स्तिथि में आप गणित नहीं लगा सकते| यहाँ भी पर्सनल लोन लेना कोई बुरा विकल्प नहीं है|

पर हाँ हमेशा एक बात का ध्यान रखें| पर्सनल लोन भी चुकाना भी आपको ही पड़ेगा|

SBI से पर्सनल लोन की जानकारी और ब्याज दर आप SBI की वेबसाइट पर पा सकते हैं|

कब पर्सनल लोन लेना अच्छा आईडिया नहीं है?

  • कहीं छुट्टी (vacation) पर जाने के लिए पर्सनल लोन लेना
  • नया फ़ोन या गैजेट खरीदने के लिए पर्सनल लोन लेना
  • घर की साज-सजावट (furnishing) के लिए पर्सनल लोन लेना

मेरे अनुसार इस सभी बातों के लिए आपको पहले से प्लान करना चाहिए और लोन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए| साथ ही इसके अलावा और भी बहुत सी बातें है, जिनके लिए पर्सनल लोन लेना कोई अच्छा विकल्प नहीं है|

कुछ बातें आपकी ज़रुरत होती है और कुछ इच्छाएं होती हैं| ज़रुरत के लिए लोन लेना समझ में आता है, इच्छायों के लिए नहीं|

मेरे अनुसार चिकित्सा की लिए खर्चा आपकी ज़रुरत है, एक नया और महंगा फ़ोन लेना आपकी इच्छा| दोनों में अंतर करना सीखें|

ध्यान दें यह मेरी व्यक्तिगत राय है|

आप शायद इन बातों से सहमत न हो| और वैसे भी ज़िन्दगी में मौकों की अहमियत लोगों के लिए अलग हो सकती है| जैसे की आपने अपनी बेटी को उसके जम्नदिन के लिए एक अच्छा फ़ोन देने का वादा किया है, पर कुछ खर्चे अचानक आने की वजह से आप अभी इतना खर्चा नहीं कर सकते|

आपके पास दो विकल्प हैं: या तो उसे वह गिफ्ट न दें या फिर लोन लेकर दें| इसका फैसला आप ही कर सकते हैं| ज़िन्दगी में हर बात का फैसला गणित से नहीं होता|

हाँ, बस एक सुझाव हैं, वास्तविकता को पूरी तरह दरकिनार न करें|

कब पर्सनल लोन लेना बेवकूफी है?

जो बातें हमनें ऊपर करीं, उस पर दोराय हो सकती है|

यार अब जिस स्तिथि पर चर्चा करेंगे, उस स्तिथि में पर्सनल लोन लेना किसी बेवकूफी से कम नहीं है|

मैंने कई बार देखा है की लोगों के पास बैंक में फिक्स्ड डिपाजिट होता है और इस इसके बावजूद वह लोग पर्सनल लोन लेने की बात करते हैं|

मान लिए आपके पास 50,000 रुपये की एक FD है| किसी वजह से आपको उस समय 50,000 की ज़रुरत भी है| ऐसी स्तिथि में पर्सनल लोन लेने की बजाय FD को तोडना एक बेहत विकल्प होगा|

ऐसा इसलिए क्योंकि फिक्स्ड डिपाजिट पर आपको 6-8% p.a. का ब्याज मिलेगा| इस ब्याज पर भी आपको टैक्स देना होगा| इसके विपरीत पर्सनल लोन पर आपको 12-18% p.a. तक का ब्याज देना पड़ सकता है|

तो देखें तो आपको 5-7% (टैक्स बे बाद) का ब्याज मिल रहा है और आप 12-18% दे रहे है| हुआ न बेवकूफी|

और यह केवल फिक्स्ड डिपाजिट के साथ ही नहीं है| कोई भी ऐसा निवेश जो की बिना किसी पेनल्टी (या कम पेनल्टी) के साथ आसानी से बेचा जा सकता है| हाँ, उस निवेश को बेचने पर आपको टैक्स देना पड़ सकता है, तो इस बात का भी ध्यान रखें|

कई बार लोग अपना पैसा शेयर बाज़ार में रहने देते हैं और ज़रुरत के लिए पर्सनल लोन लेने की सोचते है| एक बात कभी न भूलें, शेयर बाज़ार में इस बात की कोई गारंटी नहीं है की आपको अच्छे रिटर्न मिलेंगे| पर पर्सनल लोन में एक बात की गारंटी है की आपको काफी ऊंचा ब्याज देना होगा| तो मेरे अनुसार आपको ज़रुरत पड़ने पर अपने शेयर बेच देने चाहिए|

मैंने यह भी देखा है की लोग पर्सनल लोन लेकर उस राशि को शेयर बाज़ार में निवेश करने की सोचते हैं| इससे बड़ी बेवकूफी तो हो ही नहीं सकती|

साथ ही अगर आपके पास कोई एलाईसी पालिसी है या PPF खाता है, तो वहां से भी आप लोन ले सकते हैं| ब्याज दर अनुमान पर्सनल लोन से कम होगी|

पढ़ें: एलआईसी पालिसी से लोन कैसे लें?

पढ़ें: पीपीएफ खाते से लोन कैसे लें?

मेरी राय

पर्सनल लोन की सहायता से आप आसानी से और जल्दी पैसे पा सकते हैं| और कई मामलों में यह काफी लाभकारी भी हो सकता है|

परन्तु सोच समझकर इस सुविधा का लाभ उठाएं| लोन का भुगतान भी आपको ही करना है| अपनी वित्तीय वास्तविकता से दूर न रहे|

अगर समझदारी से काम नहीं लेंगे, तो बादे में आपको परेशानी हो सकती है|

Source: EmiCalculator

चित्र सौजन्य: Pixabay

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अपनी फ्री सिबिल रिपोर्ट (Free CIBIL Report) कैसे डाउनलोड करें?

Last updated: जनवरी 8, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

हमनें पिछली पोस्ट में देखा था की सिबिल या क्रेडिट स्कोर क्या होता है और यह भी देखा था की आपका क्रेडिट स्कोर आपके लोन के पास होने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है|

मेरे अनुसार समय-समय पर आपको अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करती रहनी चाहिए| फायदा यह होगा की आपको अपने क्रेडिट स्कोर का आईडिया रहेगा| अगर आपकी रिपोर्ट में कुछ गलतियां (त्रुटियाँ) है, तो विवाद समादहान की प्रक्रिया (dispute resolution) शुरू कर सकते हैं|

साथ ही अगर आपके ऋण व्यवहार में कुछ कमियाँ हैं, तो आप वहां से सुधार की कोशिश कर सकते हैं|

ऐसा करने से यह होगा की जब भी आप नए लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करेंगे, तो कम से कम आपको झटका नहीं लगेगा|

पढ़ें: सिबिल स्कोर क्या है? What is CIBIL score in Hindi?

वर्ष में एक बार क्रेडिट रिपोर्ट फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं

पहले आपको अपनी क्रेडिट रिपोर्ट पाने के लिए पैसे खर्च करने पड़ते थे|परन्तु अब आप कैलेंडर वर्ष (जनवरी से दिसम्बर_ में एक बार अपनी क्रेडिट रिपोर्ट फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं|

ध्यान दे ऐसा आप हर क्रेडिट ब्यूरो के साथ कर सकते हैं|

ध्यान दें यह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का निर्देश है| तो एक फ्री रिपोर्ट पाना आपका अधिकार है| आप रिज़र्व बैंक का सर्कुलर (अंग्रेजी) भी पढ़ सकते हैं|

इसका मतलब आप साल में हर क्रेडिट ब्यूरो से एक बार फ्री क्रेडिट रिपोर्ट डाउनलोड कर सकते हैं|

अगर आपको एक से ज्यादा बार करनी है, तो आप फीस का भुगतान करके डाउनलोड कर सकते हैं|

इस पोस्ट में  देखेंगे की आप कैसे सिबिल की वेबसाइट से अपनी फ्री क्रेडिट रिपोर्ट डाउनलोड कर सकते हैं|

फ्री सिबिल स्कोर और सिबिल रिपोर्ट कैसे डाउनलोड करें?

  1. सिबिल की वेबसाइट पर जाएँ| आप इस लिंक (https://www.cibil.com/freecibilscore) पर जा सकते हैं|
  2. अपने बारे में जानकारी भरें| आपको अपने PAN, जन्मतिथि, इ-मेल आईडी, मासिक आय की जानकारी देनी होगी| free cibil report free credit report 1 सिबिल स्कोर फ्री सिबिल रिपोर्ट फ्री डाउनलोड
  3. आपके बारे में कुछ जानकारी निकाल कर CIBIL भी आपको दिखाएगा|free cibil report free credit report 1 सिबिल स्कोर फ्री सिबिल रिपोर्ट फ्री डाउनलोड
  4. उसके बाद CIBIL आपको SMS भेज कर आपका क्रेडिट स्कोर बताएगा| साथ ही CIBIL की वेबसाइट में लॉग इन करने के लिए आपको जानकारी भेजेगा|
  5. आप अपनी इ-मेल आईडी और password के प्रयोग करके लॉग इन कर सकते हैं|
  6. लॉग इन करने के बाद आप अपनी क्रेडिट रिपोर्ट का विस्तार से देख सकते हैं|free cibil report free credit report 1 सिबिल स्कोर फ्री सिबिल रिपोर्ट फ्री डाउनलोडfree cibil report free credit report 1 सिबिल स्कोर फ्री सिबिल रिपोर्ट फ्री डाउनलोड

एक बात और, मैंने यह प्रक्रिया CIBIL की वेबसाइट के लिए बताई है|

आप Experian की वेबसाइट से इस लिंक (http://www.experian.in/consumer/experian-free-credit-report.html) से अपनी फ्री क्रेडिट रिपोर्ट डाउनलोड कर सकते हैं|

Equifax की वेबसाइट से फ्री क्रेडिट रिपोर्ट डाउनलोड करने की प्रक्रिया इस लिंक (https://www.equifax.co.in/process-note/en_in) बतायी गयी है|

तो अब देर किस बात की है| जल्दी करिए और फ्री में अपनी क्रेडिट रिपोर्ट डाउनलोड करिए|

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सिबिल स्कोर (CIBIL Score) या क्रेडिट स्कोर क्या है?

Last updated: अक्टूबर 3, 2018 | by दीपेश 2 Comments

जब आप लोन लेने जाते हैं, तब बैंक आपकी लोन को लौटाने की योग्यता आंकलन करता है| अगर बैंक आपको सक्षम पाता है, तो आपको लोन दे दिया जाता है| इसके साथ ही बैंक यह भी चेक करता है की आपने अपने पुराने लोन को समय पर चुकाया है या नहीं| इसके लिए वह आपकी क्रेडिट रिपोर्ट और क्रेडिट स्कोर को देखते हैं|

पिछले कुछ समय में आपके क्रेडिट स्कोर या सिबिल स्कोर की अहमियत भी काफी बढ़ गयी है| अगर आपका सिबिल स्कोर (CIBIL score) कम हो, तो आपको लोन या क्रेडिट कार्ड मिलने में परेशानी हो सकती है या आपको लोन पर ऊंची ब्याज दर देनी पड़ सकती है| 

तो आईये जानते हैं सिबिल स्कोर क्या होता है? सिबिल स्कोर किन बातों पर निर्भर करता है? सिबिल स्कोर कम होने से आपके लोन पर क्या असर पड़ता है?

आप कैसे अपना सिबिल स्कोर आसानी से पता कर सकते हैं? आप अपने सिबिल स्कोर को कैसे सुधार सकते हैं? और अपनी क्रेडिट रिपोर्ट में गलती होने पर आपको क्या करना चाहिए? आईये इन विषयों के बारे में चर्चा करते हैं|

  • क्रेडिट स्कोर क्या है? सिबिल स्कोर क्या है? What is CIBIL Score? (in Hindi)
  • सिबिल स्कोर से आपके लोन पर क्या असर पड़ता है?
  • लोन लेने के लिए सिबिल स्कोर कितना होना चाहिए?
  • सिबिल स्कोर या क्रेडिट स्कोर किन बातों पर निर्भर करता है?
  • किन बातों से आपके क्रेडिट स्कोर या सिबिल स्कोर पर कोई फर्क नहीं पड़ता?
  • मेरा क्रेडिट स्कोर NA या NH है| इसका क्या मतलब है?
  • आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में क्या जानकारी होती है?
  • सिबिल स्कोर कैसे पता करें? (How to download free credit report?)
  • सिबिल रिपोर्ट में गलती होने पर क्या करें?
  • सिबिल स्कोर कैसे सुधारें? How to improve your credit or CIBIL Score? (in Hindi)

क्रेडिट स्कोर क्या है? सिबिल स्कोर क्या है? What is CIBIL Score? (in Hindi)

क्रेडिट स्कोर एक तरीके से आपके लोन को लौटाने की योग्यता को दर्शाता है| आपने पहले जब भी कोई लोन (होम लोन, पर्सनल लोन, कार लोन, क्रेडिट कार्ड लोन इत्यादि) लिया है, उस लोन को आपने सही समय पर लौटाया है या नहीं|

अब बैंक तो यह साड़ी जानकारी स्वयं नहीं जुटा सकता| इसी लिए वह क्रेडिट इनफार्मेशन कंपनी से यह जानकारी लेता है| ऐसी कंपनी को क्रेडिट ब्यूरो भी कहते हैं|

भारत में ऐसी कई कंपनी हैं| इनमें से प्रमुख हैं:

    1. CIBIL
    2. Experian Credit Information Co. Of India Pvt. Ltd
    3.  Equifax Credit Information Services

यह सभी कंपनी आपके क्रेडिट स्कोर या क्रेडिट रिपोर्ट तैयार करते रखती हैं|

CIBIL इनमें सबसे पुरानी और लोकप्रिय है| सिबिल स्कोर वह क्रेडिट स्कोर है जो की CIBIL तैयार करती है| काफी लोग क्रेडिट स्कोर को सिबिल स्कोर के नाम से ही समझते है|

ध्यान दें यह सभी कंपनी बैंकों और अन्य ऋण देने वाली संस्थानों (credit institution) से साझेदारी करती हैं और वहीँ से आपके लोन के बारे में सारी जानकारी एकत्रित करती हैं|

क्रेडिट स्कोर 300 से 900 के बीच में होता है| जितना ज्यादा है, उतना अच्छा है| 

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सिबिल स्कोर से आपके लोन पर क्या असर पड़ता है?

CIBIL की वेबसाइट के अनुसार 79% लोन उन लोगों दिए जाते हैं, जिनके सिबिल स्कोर 750 से ज्यादा है|

जितना आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है, उतनी ही आपके लोन के पास होने की संभावना बढ़ जाती है|

परन्तु ध्यान दें, लोन पास करते समय बैंक केवल आपके क्रेडिट स्कोर या सिबिल स्कोर पर ही ध्यान नहीं देते|

और भी बहुत साड़ी चीज़ें देखते हैं| जैसे की आप अपनी कमाई के अनुसार लोन की EMI लौटा सकते हैं या नहीं| आपके और कितने लोन चल रहे हैं|

परन्तु अगर मान कर चलें की और सब सही है, अच्छा क्रेडिट स्कोर होने से आपके लोन के पास होने की संभावना बढती है|

साथ की आपकी ब्याज दर भी आपके क्रेडिट स्कोर पर निर्भर कर सकती है| अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा (ज्यादा) है, तो शायद आपको कम इंटरेस्ट रेट देना हो| कुछ बैंक ऐसा करना शुरू भी कर चुके हैं| 

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लोन लेने के लिए सिबिल स्कोर कितना होना चाहिए?

देखिये बैंकों ने यह जानकारी प्रत्यक्ष रूप से तो नहीं बताई है| परन्तु बैंक आपके सिबिल स्कोर को महत्त्व ज़रूर देते हैं|

जैसा की मैंने ऊपर लिखा है की केवल सिबिल स्कोर के ऊपर ही आपके लोन के पास होने का फैसला नहीं होता| और भी बहुत सारी बातें देखी जाती हैं|

पर ऐसा हो सकता है की बैंक की लोन देने की प्रक्रिया में क्रेडिट स्कोर पर कोई कट-ऑफ (cut-off score) हो, जो की बैंक ने खुल कर ना बतायी हो|

जैसा की ऊपर चर्चा की है, CIBIL की वेबसाइट के अनुसार 79% लोन उन लोगों दिए जाते हैं, जिनके सिबिल स्कोर 750 से ज्यादा है|

जितना ज्यादा सिबिल स्कोर (CIBIL score) है, उतना बेहतर है|
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सिबिल स्कोर  या क्रेडिट स्कोर किन बातों पर निर्भर करता है?

हर क्रेडिट ब्यूरो का आपका क्रेडिट स्कोर कैलकुलेट करने का अलग तरीका होता है और इसीलिए आपका क्रेडिट स्कोर हर कंपनी के अनुसार अलग हो सकता है|

कोई भी क्रेडिट ब्यूरो स्कोर कैलकुलेट करने का तरीका जग-जाहिर नहीं करता| तो आप यह तो नहीं पता की स्कोर कैसे निकाला जाता है| पर हाँ, हम यह जानते है की क्या बातें आपके क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करती हैं|

  1. आपके लोन या क्रेडिट कार्ड भुगतान का इतिहास: मेरे अनुसार सबसे प्रमुख यही बात है| अगर आपने सारे भुगतान नियमित तौर पर किये हैं, तो इस बात के आपके क्रेडिट या सिबिल स्कोर पर अच्छा असर पड़ेगा| इसके विपरीत अगर ऐसा नहीं है, तो आपके क्रेडिट स्कोर पर बुरा असर पड़ेगा|
  2. क्रेडिट सीमा का अधिक उपयोग: अगर आपने क्रेडिट कार्ड का उपयोग किया है, तो आपको पता होगा की आपके कार्ड में एक क्रेडिट लिमिट होती है| इसका मतलब आप उस क्रेडिट कार्ड पर अधिकतम इतना खर्चा कर सकते हैं (इतनी राशि बकाया हो सकती है)| अगर आप लिमिट का अधिक उपयोग करते हैं, तो यह आपके सिबिल स्कोर पर बुरा प्रभाव डाल सकता है|
  3. क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन ज्यादा होना: क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन असंरक्षित लोन (unsecured loan) होते हैं| होम लोन और कार लोन संरक्षित लोन (secured loan) होते हैं| अगर असंरक्षित लोन की मात्रा और संरक्षित लोन की मात्रा में संतुलन नहीं है (असंरक्षित लोन के मात्रा संरक्षित लोन से काफी ज्यादा है), तो आपके स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा|
  4. हाल में ही बहुत सारे नए खाते खोलना: अगर आपने हाल में ही बहुत सारे लोन या क्रेडिट कार्ड खाते खोले है या उनके लिए आवेदन किया है, तो इसका मतलब माना जाता है, की आपको ऋण की बहुत ज़रुरत है| अब यह बात आपके स्कोर पर नकरात्मक सर डाल सकती है|

(पोस्ट की शुरुआत में जाएँ)

किन बातों से आपके क्रेडिट स्कोर या सिबिल स्कोर पर कोई फर्क नहीं पड़ता?

कुछ ग़लतफ़हमियों से भी बचें|

आपकी पढाई (education), लिंग (gender), धर्म (religion), जाति (caste) का आपके क्रेडिट स्कोर पर कोई फर्क नहीं पड़ता|

साथ ही आपने अपने सेविंग्स अकाउंट (बचत खाता), फिक्स्ड डिपाजिट, इन्वेस्टमेंट और इंश्योरेंस में कुछ भी किया हो, इस बात से भी कोई सिबिल स्कोर पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता|

ध्यान रखें क्रेडिट स्कोर केवल आपके ऋण के प्रति व्यवहार (Credit behaviour) पर निर्भर करता है| और किसी बात पर नहीं|

पोस्ट की शुरुआत में जाएँ 

मेरा क्रेडिट स्कोर NA या NH है| इसका क्या मतलब है?

अगर आपका क्रेडिट स्कोर NA या NH है, इसका मतलब है:

  1. आपने पहले कोई लोन या क्रेडिट कार्ड नहीं लिया है| इस वजह से आपके लोन या क्रेडिट कार्ड के भुगतान का कोई इतिहास नहीं है| No Credit History
  2. आपने पिछले 2-3 सालों में अपने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं किया है| साथ ही लोन न होने की स्तिथि में किसी मासिक किश्त हाँ भुगतान भी नहीं किया है|

वैसे तो क्रेडिट स्कोर NA या NH होने कोई बुरी बात नहीं है, परन्तु कई बार आपको क्रेडिट कार्ड या लोन लेने में परेशानी हो सकती है|

पोस्ट की शुरुआत में जाएँ 

आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में क्या जानकारी होती है?

आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में प्रमुखतः 5 प्रकार की जानकारी होती है|

  1. आपका क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score)
  2. आपके बारें में जानकारी: नाम, जन्म तिथि, PAN, पासपोर्ट नंबर की जानकारी, आपके पते और फोन नंबर के जानकारी
  3. आपके रोजगार की जानकारी: आपकी आय की जानकारी, यह जानकारी क्रेडिट ब्यूरो आपके द्वारा क्रेडिट कार्ड और लोन के आवेदन में भरी जानकारी से प्राप्त करता है| यह सारी जानकारी बैंक प्रदान करते हैं|
  4. आपके सारे लोन/क्रेडिट कार्ड खातों की जानकारी: आपके लोन/क्रेडिट कार्ड खातों में कितना बैलेंस हैं, बैंक के नाम, किस तरह का लोन है, खाता खुलने की तारिख, पिछले भुगतान के तारी और पिछले तीन साल के भुगतान का रिकॉर्ड आदि|
  5. पूछताछ की जानकारी (enquiry for your credit report): जब भी आप लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते हैं, तो उस समय बैंक आपकी क्रेडिट रिपोर्ट या क्रेडिट स्कोर के लिए CIBIL से या किसी अन्य क्रेडिट ब्यूरो से पूछताछ करता है| यह सब भी आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज होता है| ध्यान दे, आपको लोन मिले या न मिले, यह जानकारी आपकी रिपोर्ट में दर्ज हो जाती है|

ध्यान दें जब बैंक आपके स्कोर के लिए क्रेडिट ब्यूरो से इन्क्वारी करते है, उसे हार्ड इन्क्वारी (Hard Enquiry) कहते हैं| जब आप खुद अपन स्कोर को पता करने के इन्क्वारी करते हैं, तो उसे सॉफ्ट इन्क्वारी (Soft Enquiry) कहते हैं| बहुत सारी हार्ड इन्क्वारी(hard enquiry)  होने पर आपके क्रेडिट स्कोर पर नकरात्मक प्रभाव पड़ता है|

आपको अपने क्रेडिट रिपोर्ट को समझने में अधिक मदद चाहिए तो आप इस लिंक पर जा कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं| अंग्रेजी में पढ़ना चाहें, तो आप और भी विस्तार से जानकारी इस लिंक  पा सकते हैं|

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सिबिल स्कोर कैसे पता करें? (How to download free credit report?)

अब आप अपना क्रेडिट स्कोर या सिबिल स्कोर अब फ्री में पा सकते हैं| भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India) की पालिसी के तहत अब आप एक कैलेंडर वर्ष (जनवरी से दिसम्बर) में एक बार अपनी क्रेडिट रिपोर्ट क्रेडिट रिपोर्ट बिना पैसा दिया (फ्री क्रेडिट रिपोर्ट) डाउनलोड कर सकते हैं| इस बारे में विस्तार से जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|

ध्यान दे आप हर क्रेडिट इनफार्मेशन कंपनी से वर्ष में एक बार क्रेडिट रिपोर्ट (और क्रेडिट स्कोर) डाउनलोड कर सकते हैं|

आप इस लिंक (https://www.cibil.com/freecreditscore/) पर जाएँ| आपको अपने बारें में कुछ जानकारी देनी होगी| उसके बाद आप अपनी रिपोर्ट डाउनलोड कर सकते हैं और अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर सकते हैं|

अगर आपको एक वर्ष में एक से ज्यादा बार यह रिपोर्ट चाहिए, तब आप सिबिल की वेबसाइट पर जा कर यह स्कोर प्राप्त कर सकते हैं|आपको अपने बारे में जानकारी देनी होगी और 550 रुपये का भुगतान करना होगा| आप अपना क्रेडिट स्कोर इस लिंक पर प्राप्त कर सकते हैं|

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सिबिल रिपोर्ट में गलती होने पर क्या करें?

ध्यान दे क्रेडिट इनफार्मेशन कंपनी यह सारी जानकारी एकत्रित करती है| बैंक आपके लोन या क्रेडिट कार्ड के बारे में यह जानकारी इन कंपनी को प्रदान करता है|

बस क्रेडिट स्कोर यह कंपनी अपने आप निकालती है| हालांकि ध्यान दें की क्रेडिट स्कोर भी बैंक द्वारा प्रदान की हुई जानकारी पर ही निकाला जाता है|

अगर क्रेडिट रिपोर्ट चेक करने पर आपको कोई गलत जानकारी दिखती है| जैसे की, ऐसा कोई क्रेडिट कार्ड या लोन जो आपने कभी लिया ही न हो| या कोई क्रेडिट कार्ड या लोन जिसको आपने बंद कर दिया हो, पर उस पर बकाया राशि दिखा रहा हो|

या फिर आपने तो भुगतान समय पर किया हो, पर आपकी रिपोर्ट में देरी से भुगतान दिखा रहा हो| या फिर कोई और गलती|

यह मुमकिन है की ऐसी ही किसी गलती की वजह से आपका क्रेडिट स्कोर कम हो और आपको लोन लेने में परेशानी हो रही हो|

तो ऐसी स्तिथि में आपको क्या करना चाहिए?

हर क्रेडिट इनफार्मेशन कंपनी में ऐसी समस्यायों को सुलझाने के लिए एक प्रक्रिया होती है| जैसे की CIBIL में भी विवाद समाधान (Dispute Resolution) की प्रक्रिया है|

आप सिबिल की वेबसाइट पर जा कर अपने विवाद को रजिस्टर कर सकते हैं| आप तकरीबन 30 दिन में इस विवाद को सुलझने की उम्मीद कर सकते हैं| 

cibil dispute resolution in hindi

ध्यान दे सिबिल या कोई भी क्रेडिट इनफार्मेशन कंपनी अपने आप यह जानकारी अपडेट नहीं कर सकती| उनको यह जानकारी बैंक या ऋण संस्थान से मिलनी चाहिए|

तो आपका सिबिल से लड़ने से कोई फायदा नहीं होगा| जब तक बैंक आपकी जानकारी को सही नहीं कर देता, तब तक सिबिल कुछ भी नहीं कर सकता| इसीलिए सिबिल से बिना बात लड़ने पर अपना समय बर्बाद न करें|

साथ ही अपने बैंक से संपर्क करें, उनको पूरी बात समझायें और उनसे सिबिल को सही जानकारी प्रदान करने की विनती करें| हाँ, बैंक से लड़ने पर आपका काम शायद जल्दी हो सकता है|

इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप सिबिल के वेबसाइट पर जा कर इस लिंक पर पा सकते हैं|

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सिबिल स्कोर कैसे सुधारें? How to improve your credit or CIBIL Score? (in Hindi)

अब आपने अपनी क्रेडिट रिपोर्ट और स्कोर को चेक कर लिया है| आपने यह पाया की आपका स्कोर अच्छा नहीं है|

तो अब आप क्या करेंगे? कैसे सुधारेंगे अपना क्रेडिट स्कोर?

आईये देखते हैं की आपके पास क्या हैं विकल्प|

सबसे पहले तो यह चेक करिए की कहीं आपका यह कम स्कोर बैंक की गलती की वजह से तो नहीं है| और ऐसा हो सकता है| ऐसी स्तिथि में, जैसा की मैंने ऊपर चर्चा करी है, आपको विवाद समाधान प्रक्रिया (dispute resolution process) का पालन करना होगा|

साथ ही ऐसी गलतियों के बारे में पता करने के लिए अपनी क्रेडिट रिपोर्ट को समय-समय पर चेक करते रहे|

अगर आपकी गलतियों की वजह से स्कोर कम है, तो अपने वर्ताव में कुछ बदलाव लाने होंगे|

सबसे ज़रूरी बात, अपना लोन की EMI या क्रेडिट कार्ड बिल का बिल समय पर भरें|

लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए सोच समझ कर आवेदन करें| जैसा की हमनें देखा है की जब आप आवेदन करते हैं, तब बैंक आपके क्रेडिट स्कोर और रिपोर्ट के लिए आवेदन करता है| इसे हार्ड इन्क्वारी (hard enquiry) कहते हैं| कुछ ही समय में ज्यादा हार्ड इन्क्वारी आपके स्कोर को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करती है|

असंरक्षित (unsecured loan) और संरक्षित लोन (secured loan) में कोई संतुलन बना कर रखें|

आपका क्रेडिट लोन 2-4 दिन में ठीक नहीं होगा| इसे ठीक होने में समय लगता है| आप सही आदतों पर टिके रहें| धीरे-धीरे सिबिल स्कोर भी अच्छा हो जाएगा|

अगर आपका स्कोर NA या NH है, तो एक और समस्या है| शायद आपको इस वजह से क्रेडिट कार्ड या लोन ही ना मिले| बिना क्रेडिट कार्ड या लोन का आप अपनी क्रेडिट हिस्ट्री (credit history) कैसे बनायेंगे| ऐसी स्तिथि में आप फिक्स्ड डिपाजिट की सहायता से क्रेडिट कार्ड (credit card against fixed deposit) ले सकते हैं और धीरे-धीरे अपनी क्रेडिट हिस्ट्री बना सकते हैं|

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 Source: PersonalFinancePlan.in

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अपने लोन की EMI कैसे कैलकुलेट करें? (EMI Calculator in Hindi)

Last updated: अप्रैल 12, 2018 | by दीपेश 36 Comments

जब भी आप कोई लोन लेते हैं, तो उस लोन के भुगतान के लिए लोन की अवधि में आप EMI भरते रहते हैं|

क्या आपको पता हैं की आपके लोन की EMI कैसे कैलकुलेट होती है?

वैसे तो बहुत सारी वेबसाइट पर EMI कैलकुलेटर उपलब्ध हैं, पर क्या आप उन कैलकुलेटर के पीछे की गणित जानते हैं?

आज मैं इसी गणित पर चर्चा करूंगा| और बाद में मैं यह बताऊँगा की कैसे आप आसानी से अपने लोन की EMI कैलकुलेट कर सकते हैं|

पोस्ट के अंत में एक लोन कैलकुलेटर भी दिया गया है| इस कैलकुलेटर में आप अपने लोन के बारे में जानकारी डाल कर अपनी EMI कैलकुलेट कर सकते हैं|

EMI क्या है? और क्या है इस इसके पीछे की गणित?

EMI का मतलब है Equated Monthly Installment या आपके लोन की मासिक किश्त|

आपकी मासिक किश्त का एक हिस्सा आपके लोन के ब्याज के भुगतान (interest payment)  की ओर जाता है और बचा हुआ भाग मूल राशि के भुगतान (principal repayment) के लिए|

ध्यान दें होम लोन हो या पर्सनल लोन, EMI इसी तरीके से काम करती है|

मान लिए आपने 50 लाख का लोन लिया है| लोन की अवधि 20 वर्ष है और मान लिए ब्याज की दर है 9% p.a.

इस लोन के लिए आपकी EMI या मासिक किश्त होगी 44,986 रुपये|

आईये देखते हैं की पहले साल में लोन का भुगतान किस प्रकार होगा|


पहले महीने की EMI का बंटवारा कुछ इस तरह होगा|

EMI (मासिक किश्त): 44,986 रुपये

पहले महीने का ब्याज = महीने की शुरुआत में बकाया मूल राशि * ब्याज दर/12

= 50 लाख रुपये * 9%/12 = 37,500 रुपये

पहले महीने का मूल भुगतान (Principal Repayment in the first month) = EMI – पहले महीने के ब्याज का भुगतान

= 44,986 – 37,500 = 7,486 रुपये

पहले महीने की अंत में बकाया मूल राशि (Principal Outstanding at the end of the first month) = 50 लाख – 7,486 रूपये = 49,92,514 रुपये


अब आते हैं दूसरे महीने पर

दूसरे महीने का ब्याज = महीने की शुरुआत में बकाया मूल राशि * ब्याज दर/12

= 49,92,514 * 9%/12 = 37,444 रुपये

दूसरे महीने का मूल भुगतान (Principal Repayment in the first month) = EMI – महीने के ब्याज का भुगतान

= 44,986 – 37,444 = 7,542 रुपये

दूसरे महीने की अंत में बकाया मूल राशि = 49,92,514 – 7,542 रूपये = 49,84,971 रुपये

इसी तरह, देखते हैं की पहले साल में आपके लोन का भुगतान कैसे होगा|

होम लोन EMI कैलकुलेटर लोन emi लोन कैलकुलेटर

अब आप देख सकते हैं की:

  1. हर महीने ब्याज का भुगतान घटता जा रहा है| इसके साथ ही मूल का भुगतान (principal repayment) बढ़ता जा रहा है|
  2. ऐसा इसीलिए की हर महीने मूल राशि के भुगतान के साथ आपका बकाया लोन कम होता जा रहा है| अब क्योंकि ब्याज बकाया राशि पर निकाला जाता है, ब्याज भी हर महीने बकाया राशि के साथ कम होता जा रहा है|
  3. और क्योंकि ब्याज का भुगतान का कम हो रहा है, मूल के भुगतान (principal repayment) ओने आप बढ़ता जा रहा है|

परन्तु आप यह देखेंगे की पहले साल के भुगतान के बाद भी आपकी बकाया राशि कुछ ज्यादा कम नहीं हुई| पूरे एक साल मासिक किश्त देने का बाद भी आपकी बकाया राशि 50 लाख से केवल 49.06 लाख रुपये ही पहुंची| केवल 93,636 रुपये का भुगतान|

अब ऐसा क्यों हुआ?

आईये देखते हैं की पूरे लोन की अवधि के दौरान आपकी बकाया राशि कैसे कम होगी|sbi होम लोन EMI कैलकुलेटर लोन emi लोन कैलकुलेटर

आप देख सकते हैं की पहले कुछ सालों में आपकी बकाया राशि कुछ ख़ास कम नहीं हुई है| पहले पांच सालों में आपने केवल 5.64 लाख रुपये का ही लोन चुकाया है| जबकि इन पांच वर्षों में आपने 21.34 लाख रुपये का ब्याज चुकाया है|

अगर मूल राशि के भुगतान के बारे में देखें तो आपकी मूल राशि का भुगतान कुछ इस तरह होगा|

पहले पांच वर्ष: 11.29%

दूसरे पांच वर्ष (6 से 10 साल): 17.68%

तीसरे पांच वर्ष (11 से 15 साल): 27.68%

आखिरी पांच वर्ष (16 से 20 साल): 43.34%

यह हुआ कुल मिला कर 100% मूल राशि का भुगतान|

साथ में इस जानकारी पर भी ध्यान दें|

sbi होम लोन EMI कैलकुलेटर लोन emi लोन कैलकुलेटर loan repayment

यहाँ मैंने यह दिखाने की कोशिश करी है की हर साल आपकी किश्त का कितना पैसा ब्याज के भुगतान के लिया जा रहा है और कितना पैसा मूल राशि के भुगतान के लिए|

आप देख सकते हैं की शुरुआत में लोन की किश्त का ज़्यादातर पैसा ब्याज के भुगतान के लिए ही चला जाता है| और ऐसा इसलिए हो रहा क्योंकि उस समय मूल राशि ज्यादा होती है| जैसे-जैसे समय के साथ आपकी मूल राशि कम होती जाती है, ब्याज भी कम होता जाता है और आपकी मासिक किश्त का ज्यादा हिस्सा मूल राशि के भुगतान (principal repayment) के लिए जाने लगता है|

यही वजह है की लोन के शुरूआती वर्षों में आपका लोन बहुत धीरे-धीरे कम होता है|

अगर आप इस बात को लेकर असमंजस में हैं की इतने साल लोन की किश्त का भुगतान करने के बाद भी आपका लोन कम क्यों नहीं हुआ, तो शायद आपको इस बात का जवाब मिल गया होगा|

पढ़ें: आपको कितना लोन मिल सकता है?

लोन की EMI कैसे कैलकुलेट करते हैं? How to calculate loan EMI? (in Hindi)

अब यह भी कुछ कम पेचीदा सवाल नहीं है|

अच्छी बात यह की आपको इसके लिए कुछ ख़ास मेहनत करने की ज़रुरत नहीं है|

अगर आप माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल (Microsoft Excel) का उपयोग करना जानते हैं, तो आप  आसानी से कर सकते हैं|

आपको बस PMT फार्मूला का प्रयोग करना होगा|

जैसे की हमें अपने उदारहण में देखा:

लोन राशि: 50 लाख रुपये, लोन अवधि: 20 वर्ष, ब्याज दर: 9% p.a.

 मासिक किश्त (EMI) = PMT(ब्याज दर / 12, लोन अवधि * 12, लोन राशि, 0)

दरअसल आपको मासिक ब्याज दर, महीनों में लोन अवधि और लोन राशि को इनपुट करना होगा|

तो आपको एक्सेल शीट में लिखना होगा,

=PMT (9%/12, 20*12, 5000000,0)

इस फोर्मुले से आपको किसी भी लोन की मासिक किश्त मिल जाएगी|

अगर आपको यह करना मुश्किल लग रहा है, तब भी कोई परेशानी वाली बात नहीं है|

बहुत सारी वेबसाइट आपको यह जानकारी आसानी से प्रदान करती हैं|

emicalculator.net

आप यहाँ जा कर लोन EMI कैलकुलेटर का उपयोग कर सकते हैं|

इसके अलावा भी बैंक के वेबसाइट पर आपको यह कैलकुलेटर आसानी से मिल जायेंगे|

आप भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) की वेबसाइट पर SBI लोन कैलकुलेटर का प्रयोग कर सकते हैं|

इन बातों पर भी ध्यान दें|

  1. ब्याज दर (interest rate) बढ़ने पर EMI बढ़ेगी| ब्याज दर घटने पर EMI घटेगी|
  2. अगर लोन राशि ज्यादा है तो EMI (मासिक किश्त) भी ज्यादा होगी|
  3. अगर लोन अवधि कम होगी, तो आपकी EMI बढ़ेगी|

अगर आप लोन के कुछ हिस्से का पूर्व भुगतान (prepayment) करतें हैं, तो क्या फर्क पड़ेगा?

आब पूर्व भुगतान करने से, आपकी बकाया राशि कम हो जायेगी| जैसे की ऊपर चर्चा करी है की बकाया राशि कम होते ही आपकी मासिक किश्त का कम हिस्सा ब्याज का भुगतान के लिए जाएगा|

इसका मतलब ज्यादा हिस्सा मूल भुगतान की ओर जाएगा|

इसका परिणाम यह होगा की आपका लोन जल्दी खत्म हो जाएगा|

आईये उदहारण की सहायता से समझते हैं|

मान लिए आपके 5 साल बाद लोन में 5 लाख रुपये का पूर्व भुगतान कर दिया|

ऐसा करने पर आपका लोन 217 महीनों (18 साल 1 महीना) में खत्म हो जाएगा| इसका मतलब आपने 23 मासिक किश्तें बचा लीं|

ब्याज दर बढ़ने या घटने पर क्या फरक पड़ता है?

आपकी लोना अवधि का दौरान आपकी ब्याज दर ऊपर-नीचे होती रहती है|

ऐसा होने से आपके लोन पर क्या असर पड़ेगा|

देखिये अमूमन बैंक ब्याज दर बदलने पर आपकी EMI नहीं बदलते| बस आपके लोन की अवधि बदल दी जाती है|

जब ब्याज दर बढती है, तो लोन की अवधि भी बढ़ जाती है|

जब ब्याज दर घटती है, तो लोन की अवधि भी घट जाती है|

ऐसा क्यों होता है?

जैसे की हमें ऊपर चर्चा करी है, जब लोन की ब्याज दर बढ़ेगी, तो EMI का ज्यादा हिस्सा लोन के ब्याज के भुगतान के लिए जाएगा| इसका मतलब कम हिस्सा मूल राशि के भुगतान के लिए जाएगा| इससे लोन के भुगतान में ज्यादा समय लगेगा|

जब ब्याज दर (interest rate) कम होंगे, तब इसका बिलकुल उल्टा होगा और लोन का भुगतान जल्दी हो जाएगा|

ध्यान दें यह आंकड़े जो मैंने इस पोस्ट में उपयोग करे हैं, उन आंकड़ों को बदलने पर परिणाम भी कुछ बदल सकते हैं| अगर आपको गणित समझ में आ गयी है, तो अब कोई परेशानी नहीं होगी|

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पैसे बचाने के 10 आसान तरीके (Money Saving Tips)

by दीपेश Leave a Comment

अगर पैसा निवेश करना चाहते हैं, तो पहले निवेश करने की लिए पैसा बचना चाहिए|

हम में से बहुत से लोग निवेश इसलिए नहीं कर पाते क्योंकि वह लोग पैसे ही नहीं बचा पाते| अब बिना पैसे का तो निवेश नहीं कर सकते| अब पैसे बचाने के तो दो तरीके हैं|

आप अपनी इनकम बढ़ा सकते हैं या खर्चे कम कर सकते हैं|

आमदनी बढ़ाना शायाद आपके हाथ में न हो| पर खर्चे तो कम कर ही सकते हैं|

आईये देखते हैं की आप किस तरह इन आसान टिप्स से पैसे बचा सकते हैं| और शायद निवेश भी कर सकते हैं|

पैसा बचाने के 10 आसान तरीके (Simple Money Saving Tips)

#1 पहले निवेश करें, फिर खर्चा करें

ज्यादातर लोग उल्टा करते हैं| सारे खर्चों के बाद जो पैसा बचता है, वह पैसा निवेश करते हैं| अगर आप पैसा बचाने में परशानी हो रही है, तो आप सैलरी आते ही पैसा निवेश कर दिए, जो बचेगा उसे आप खर्च करिए| कई बार जब बैंक में पैसे कम होते हैं, खर्चे अपने आप कम हो जाते हैं|

#2 अपने निवश को स्वचालित कर दिए (automate investments)

मैंने की शुरुआत में ही आप रेकरिंग डिपाजिट (recurring deposit) या म्यूच्यूअल फण्ड सिप के माध्यम से पैसा निवेश कर दे| आपको सोचने का मौका ही नहीं मिलेगा| पैसा अपने आप निवेश हो जाएगा| बचे हुए पैसे को आराम से निवेश कर खर्च कर सकते हैं|

#3 निवेश और आम खर्चे के लिए अलग बैंक खाते रखिये

जैसे ही आपकी सैलरी आये, उस में से कुछ पैसे आप एक दूसरे बैंक खाते में ट्रान्सफर कर दिए, जो की आप केवल निवेश के लिए ही इस्तेमाल करते हैं| खर्चे केवल अपने आम खर्चे वाले बैंक अकाउंट से करिए|

#4 अपने निवेश को प्रत्यक्ष लक्ष्यों से जोडें

अगर आप कोई निवेश अपने बच्चे की पढाई की लिए कर रहे हैं, तो आप उसे रोकने की या बेचने की सोचने से पहले कई बार सोचेंगे| इसीलिए अपने हर निवेश को किसी लक्ष्य के साथ जोडें|

#5 क्रेडिट कार्ड से बचें

वैसे से क्रेडिट कार्ड का उपयोग करने के कुछ फायदे भी हैं, परन्तु अगर आप अपने खर्चों को कंट्रोल नहीं कर पाते, तो बेहतर होगा की आप क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल न करें| अगर क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं, तो काफी संयम होना चाहिए| अन्यथा आप काफी ज्यादा खर्चा कर सकते हैं|

money saving tips पैसे बचत के उपाय

#6 एक बजट बना कर चलें

हर महीने पहले से ही अपना बजट बना लें और फिर उस पर अमल करें| अपने खर्चों को नोट भी करें और बाद में उनकी तुलना अपने बजट से करें| बजट से आपको यह भी पता चलेगा की किन खर्चों को कम किया जा सकता है और किन को नहीं|

आपको अंदाजा हो जाएगा की आप कहाँ ज्यादा खर्चा कर रहे हैं| धीरे-धीरे आप उन अतिरिक्त खर्चो को कम कर सकते हैं| जैसे की, अगर आप हर हफ्ते बाहर खाना खाते हैं, तो कोशिश करें की दो हफ़्तों के एक बार खाएं|

#7 जिन चीज़ों का इस्तेमाल न हो, उन पर पैसे खर्च न करें

Gym की मेम्बरशिप ले रखी है, पर जाते नहीं है| या तो gym जाना शुरू करें या फिर मेम्बरशिप कर दें| अगर किसी मैगज़ीन या पत्रिका को सब्सक्राइब कर रखे है पर पड़ते नहीं है, तो ऐसे सब्सक्रिप्शन को बंद करें| ऐसे और भी बहुत सारे खर्चे हो सकते है, जो आप रोक सकते सकते हैं|

#8 अपने खर्चों को प्लान करें

खासकर अगर आप कहीं घूमे जा रहे है, तो पहले से बुकिंग करने पर हवाईजहाज, ट्रेन या होटल की बुकिंग सस्ते में हो सकती है|

समय-समय पर मॉल में या ऑनलाइन शौपिंग वेबसाइट पर सेल चलती रहती है| अगर आप समझदारी से काम लें, तो काफी पैसे बचा सकते हैं| बड़े त्योहारों या नए साल पर तो सेल लगती ही है|

 #9 बूँद-बूँद सागर बनता है

कई बार हम लोग कुछ कदम इसलिए नहीं उठाते क्योंकि हमको लगता है की इससे क्या फर्क पड़ेगा|जैसे की अगर समझदारी से इस्तेमाल करें तो बिजली का बिल कम हो सकता है|

अगर आपके पास मोबाइल का पोस्ट-पेड़ (post-paid) कनेक्शन है और आपका बिल काफी ज्यादा आता है, तो आप प्रीपेड (pre-paid) कनेक्शन पर शिफ्ट कर सकते हैं|

पोस्ट-पेड़ कनेक्शन में कई बार अपनी यूसेज का आईडिया नहीं पड़ता| इसीलिए बिल ज्यादा आ जाता है| और फिर आज कल प्रीपेड कनेक्शन में सुविधा भी काफी अच्छी और सस्ती मिल रही है|

अगर आप महीने के 1,000 रुपये भी बचा लेते हैं, तो साल के 12,000 हज़ार रुपये बचा सकते हैं|

पढ़ें: करोड़पति बनाने के लिए हर महीने कितना निवेश करना होगा?

#10 दिखावे के चक्कर में या किसी होड़ में न पड़े

यह न तो आपकी आर्थिक सेहत के लिए अच्छा है और न ही आपकी मानसिक सेहत के लिए| किसी होड़ में न पड़ें| उतना ही खर्चा करें, जितना आप में सामर्थ्य हो| क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन लेकर केवल दिखावे के लिए खर्चा करना बेवकूफी है|

यह सारी बातें शायद सभी पर लागू नहीं होंगी| आपको देखना होगा की आपके लिए सबसे बेहतर रास्ता क्या है| इसके अलावा भी बहुत सारे तरीके हैं पैसे बचाने के|

आप क्या तरीका इस्तेमाल करते हैं? कमेंट्स सेक्शन में ज़रूर बताएं|

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