• Skip to primary navigation
  • Skip to main content
  • Skip to primary sidebar

HindiFinance.com

आपका पर्सनल फाइनेंस ब्लॉग आसान हिंदी में




  • Life Insurance
  • Mutual Funds
  • Financial Planning
  • NPS
  • PPF
  • Tax Planning
  • Aadhaar
  • LIC
  • Loans
Follow @hindifinance

1 अप्रैल 2018 से लागू होंगे यह 7 नए टैक्स नियम: ध्यान रखें और बचाएं टैक्स

Last updated: मार्च 19, 2018 | by दीपेश 2 Comments

1 April 2018 से टैक्स नियमों में कुछ बदलाव होगा|

आईये जानते हैं कुछ प्रमुख टैक्स बदलावों के बारे में| जानकारी होने पर अतिरिक्त टैक्स बचा सकते हैं और बेहतर टैक्स प्लानिंग कर सकते हैं|

#1 आप ले सकेंगे 40,000 रुपये के Standard Deduction का लाभ

यह लाभ केवल सैलरी पाने वाले या पेंशन पाने वाले लोग ही ले सकते हैं|

अगर आप self-employed हैं, तो आप यह लाभ नहीं ले पायेंगे|

परन्तु कुछ ख़ास लाभ नहीं है क्योंकि चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति (medical bill reimbursement up to Rs 15,000) और conveyance/transport allowance (Rs. 19,600) को वापिस ले लिया गया है|

देखें तो, अधिकतम लाभ 34,200 रुपये से बढ़कर 40,000 रुपये हो जाएगा|

कुछ फायदा तो है|

इसके अलावा एक लाभ यह है की आपको यह टैक्स बेनिफिट लेने के लिए कुछ भी दस्तावेज जमा करने की ज़रुरत नहीं है|

#2 इनकम टैक्स सेस (Cess) 3% से बढ़ कर 4% हो जाएगा

आपको अपने टैक्स दायित्व (liability) के ऊपर cess का भुगतान करना होता है|

मान लिए आपका कुल टैक्स दायित्व 20,000 रुपये आया| उस राशि पर आपको Cess देना पड़ता है|

April 1, 2018 से Cess 3% से बढ़ कर 4% हो जाएगा|

तो पहले अगर 20,000 के टैक्स पर 600 रुपये Cess भरते, 1 अप्रैल से आपको 800 रुपये भरना होगा|

ज़ाहिर है की इससे आपका टैक्स भार थोड़ा सा बढेगा|

अगर जानना चाहते है की कैसे होता है आपका इनकम टैक्स कैलकुलेट, तो इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें|

#3 इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड या शेयर बेचने पर होने वाले long term capital gain पर देना होगा 10% टैक्स

अभी (मार्च 31 2018) तक आपको long term capital gain (LTCG) पर कोई टैक्स नहीं देना होता|

यह नियम 1 अप्रैल 2018 से बदल जाएगा और आपको देना होगा 10% टैक्स|

बस इतनी राहत है की आपको 31 जनवरी 2018 तक के मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं देना होगा| साथ ही हर वर्ष 1 लाख रुपये तक के LTCG पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा|

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की गणना को विस्तार से समझने के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|

#4 इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड से मिलने वाले dividend पर भी लगेगा 10% टैक्स

केवल long term capital gain ही नहीं, इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड से मिलने वाले dividend पर भी आपको टैक्स देना होगा|

ध्यान दें 31 मार्च 2018 तक मिलने वाले इक्विटी फण्ड के dividend पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता|

बहुत से निवेशक नियमित आय की लिए इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के dividend विकल्प में निवेश करते हैं|

बेहतर विकल्प होगा की आप इक्विटी फण्ड की dividend स्कीम को छोड़ कर growth स्कीम में निवेश करें|

long term capital gain लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड शेयर dividend डिविडेंड पर टैक्स बजट 2018

#5 हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर मिलने टैक्स बेनिफिट 25,000 रुपये से बढ़कर 50,000 हज़ार रुपये हो जाएगा

अभी (मार्च 31 2018) तक आप अपने परिवार (स्वयं, पति/पत्नी और बच्चों) के हेल्थ  इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर 25,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट पा सकते हैं|

1 अप्रैल 2018 से यह सीमा 25,000 रुपये से बढ़ कर 50,000 रुपये प्रति वित्तीय वर्ष हो जायेगी।

अगर आप सीनियर सिटीजन (आयु 60 वर्ष से ज्यादा है), तो आप 30,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते थे, 1 अप्रैल 2018 50,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

अगर आप अपने माता-पिता के लिए भी प्रीमियम देते हैं, तो आप 50,000 अपने लिए और 50,000 अपने माता-पिता के प्रीमियम के भुगतान के लिए टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं| यानी की कुल मिलाकर 1 लाख रुपये तक का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

हेल्थ इंश्योरेंस पालिसी के प्रीमियम पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट के बारे में आप विस्तार से इस लिंक पर पढ़ सकते हैं

#6 अगर आपने कई वर्ष का हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम एक साथ भर दिया है, तो आप उस प्रीमियम को कई वर्ष में बाँट सकते हैं

कई बार अगर आप दो-तीन बर्षों के प्रीमियम का भुगतान एक साथ करते हैं (multi-year policy), तो आपको कुछ discount मिलता है| पर परेशानी यह है की टैक्स बेनिफिट केवल उसी वर्ष मिलता है की जिस वर्ष में आपने प्रीमियम का भुगतान किया ह|

1 अप्रैल 2018 से ऐसा नहीं होगा| अब से आप प्रीमियम को बराबर हिस्सों में बाँट कर टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

तो मान लिए आपने दो वर्ष के प्रीमियम का भुगतान किया 60,000 रुपये| ऐसी स्तिथि में आप एक साल में 60,000 रुपये का टैक्स बेनिफिट ले की बजाय दो सालों में 30-30 हज़ार रुपये का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

#7 सीनियर सिटीजन (वरिष्ठ नागरिकों) को 50,000 रुपये तक के ब्याज पर नहीं देना होगा टैक्स

1 April 2018 से वरिष्ठ नागरिकों को बचत खाते (savings account), फिक्स्ड डिपाजिट (fixed deposit) या रेकरिंग डिपाजिट (recurring deposit) पर बर्ष में 50,000 तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होगा|

यह टैक्स लाभ धारा 80TTB के तहत है|

अगर ब्याज 50,000 रुपये  से ज्यादा है, तो टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

अगर आप एक सीनियर सिटीजन हैं और आपने वर्ष में फिक्स्ड डिपाजिट और बचत खाते पर 90,000 रुपये का ब्याज पाया| 50,000 रुपये तक कोई टैक्स नहीं देना होगा|

बचे हुए 40,000 रुपये पर इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

यह नियम आपने बैंकों, सहकारी बैंकों (co-operative bank) और डाकघरों (post-office) में खोलें गए खातों के लिए है।

TDS भी 50,000 रुपये से अधिक ब्याज पर ही लगेगा|

अगर धारा 80 TTB के तहत लाभ ले रहे हैं, तो धारा 80 TTA के तहत कर लाभ नहीं ले सकते हैं। धारा 80TTA के तहत सेविंग्स बैंक अकाउंट पर मिलने वाले 10,000 रुपये तक के ब्याज पर टैक्स छूठ है|

साथ ही सीनियर सिटीजन को कुछ और भी स्पेशल टैक्स बेनिफिट मिलते हैं और 1 अप्रैल 2018 से कुछ अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट भी मिलेंगे| अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें|

पढ़ें: सीनियर सिटीजन को मिलने वाले 7 स्पेशल टैक्स बेनिफिट

पढ़ें: इनकम टैक्स स्लैब FY2018-2019

Filed Under: Tax Planning Tagged With: इनकम टैक्स के नियम FY2019, इनकम टैक्स बचत, इनकम टैक्स स्लैब 2018-2019

क्रेडिट कार्ड या ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड (Credit Card Fraud) की स्तिथि में क्या करें?

by दीपेश Leave a Comment

आजकल ऑनलाइन बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट या क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड स्वाइप कर के सामान खरीदने का प्रचलन काफी बढ़ गया है|

साथ ही ऑनलाइन फ्रॉड और क्रेडिट कार्ड फ्रॉड (fraud) के भी बहुत सारे मामले सामने आ रहे हैं|

अगर आपके साथ कोई fraud या धोखाधड़ी हो जाए, तो आपको कितना नुकसान (liability) हो सकता है?

अगर आपके मोबाइल फ़ोन पर SMS आता है की आप क्रेडिट कार्ड पर 40,000 रुपये का सामान खरीदा गया है (जो आपने नहीं खरीदा है), तो आप क्या करेंगे?

ऐसी स्तिथि में अपने नुकसान को कम करने के लिए आपको क्या करना चाहिए?

ऐसे ही सवालों का जवाब देने की मैं इस पोस्ट में कोशिश करूंगा|

कुछ समय पहले तक ऐसे electronic transaction के fraud का मामले में कुछ स्पष्ट नियम नहीं थे| ऐसी स्तिथि में बैंक सारा बोझ उपभोक्ता पर डाल दिया करते थे|

पर अब ऐसा नहीं होगा|

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने जुलाई 2017 में कुछ नियम बनाये, जो की ऐसे धोखाधड़ी के मामलों में आपकी liability (आर्थिक ज़िम्मेदारी) तय करते हैं| Liability से मेरा मतलब नुकसान का कितना हिस्सा आपको उठाना होगा|

इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन (Electronic Banking Transaction) क्या हैं?

भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार आप दो तरह से electronic transaction कर सकते हैं|

#1 रिमोट / ऑनलाइन ट्रांजैक्शन:

ऐसी स्तिथि में आपकी या कार्ड की  प्रत्यक्ष उपस्तिथि (physical presence) की ज़रुरत नहीं है। उदहारण के तौर पर: नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड या debit कार्ड का इस्तेमाल करके ऑनलाइन भुगतान, वॉलेट आदि। यदि आप ऑनलाइन शौपिंग करते हैं, तो वह रिमोट transaction

#2 फेस 2 फेस ट्रांजैक्शन (Face-to-Face Transaction)

ऐसी मामलों में आपके क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या मोबाइल फ़ोन की मौजूदगी की आवश्यकता है| अगर आप कहीं अपना क्रेडिट कार्ड या debit कार्ड स्वाइप करते हैं उअर ATM से पैसा निकालते हैं, तो बह Face-to-Face transaction माना जाएगा।

क्रेडिट कार्ड या ऑनलाइन fraud (धोखाधड़ी) के मामले में आपका क्या आर्थिक दायित्व (liability) है?

आपकी liability निर्भर करती है कि धोखाधड़ी / अनधिकृत लेनदेन के लिए कौन जिम्मेदार है।

कोई भी धोखाधड़ी हो, तो इसमें तीन लोग ज़िम्मेदार हो सकते हैं|

  1. Fraud आपकी गलती या लापरवाही की वजह से हुआ है| अगर आप अपना मोबाइल पर आया OTP किसी से शेयर करते हैं या आप अपने क्रेडिट या debit कार्ड के PIN डिटेल्स किसी से शेयर करते हैं| और इस वजह से आपके बैंक अकाउंट या क्रेडिट अकाउंट का इस्तेमाल किया जाता है| अब यह आपकी गलती है|
  2. Fraud बैंक प्रणाली में कमी या बैंक की गलती से हुआ है| मान लिए बैंक की वेबसाइट हैक हो जाती है और आपके खाते के डिटेल्स चोरी हो जाते हैं|
  3. Third पार्टी fraud: गलती न आपकी है और न ही आपके बैंक की| किसी तीसरे पक्ष की गलती/लापरवाही की वजह से आपके कार्ड का गलत इस्तेमाल होता है|

कोई अनधिकृत लेनदेन आपकी लापरवाही, बैंकिंग प्रणाली में कमी / गलती या तीसरे पक्ष के उल्लंघन के कारण हो सकता है ।चलिए देखते हैं कि इन मामलों में से प्रत्येक में आपकी देयता क्या होगी।

1. जब आपकी गलती है

अगर आपकी लापरवाही के कारण धोखाधड़ी या fraud हुआ है, जब तक आप बैंक को इस फ्रॉड transaction के बारे में नहीं बताते, तब तक सारा नुकसान आपको उठाना होगा|

मान लिए आप किसी से अपने क्रेडिट कार्ड के डिटेल्स शेयर कर देते हैं, और आपका क्रेडिट कार्ड 5 बार गलत इस्तेमाल किया जाता है| इसके बाद ही आप बैंक को इस fraud के बारे में बताते हैं| तो in 5 transaction में होने वाले नुकसान की आपको उठाना होगा|

आपके रिपोर्ट करने के बाद भी कोई फ्रॉड transaction होता है, तो बैंक वह नुकसान उठाएगा|

2. जब बैंक की गलती है या उसके सिस्टम में कुछ कमी है

अगर कुछ fraud बैंक की गलती की वजह से होता है, तो सारा नुक्सान बैंक को उठाना होगा|

आपकी Zero Liability होगी|

इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप ऐसे किसी transaction को बैंक को रिपोर्ट करते हैं या नहीं| आपको कुछ भी नुकसान नहीं उठाना होगा|

3. जब fraud third party द्वारा किया जाता है

अगर fraud की वजह कोई तीसरा पक्ष है (न आपकी गलती है और न ही बैंक की), तो आपकी liability इस बात पर निर्भर करता है की आप बैंक को ऐसे fraud के बारे में कब बताते हैं|

अगर fraud होने के तीन दिन (3 days) के भीतर बैंक को बताते हैं: आपकी Zero liability होगी। आपको कुछ भी नुक्सान नहीं उठाना होगा|

अगर fraud होने के 4-7 दिन (4-7 days) के भीतर बैंक को बताते हैं: हर fraud transaction पर आपकी liability नीचे दी गयी टेबल के अनुसार होगी| ध्यान दें यह सीमा प्रति transaction है, न की कुल सीमा है|

Credit card fraud customer liability क्रेडिट कार्ड फ्रॉड ऑनलाइन बैंकिंग fraud

अगर fraud होने के 7 दिनों के बाद बैंक को बताते हैं

यहाँ परेशानी है| ऐसे मामलें में बैंक का बोर्ड तय करेगा की क्या किया जाना चाहिए|

लेकिन अगर आपको फ्रॉड रिपोर्ट करने में 7 से ज्यादा दिन लग रहे हैं, तो गलती आपकी भी है|

एक बात दिनों की गिनती fraud होने से नहीं, बल्कि आपको fraud की जानकारी मिलने से की जाती है| इसका मतलब जिस दिन आपको transaction का SMS, e-mail या बैंक स्टेटमेंट मिलता है, उस दिन से मीटर चालू हो जाएगा|

इस बात पर फैसला कौन करेगा की गलती किसकी है?

यह बात अहम् है|

हमनें ऊपर देखा की आपकी आर्थिक जिम्मेदारी (liability) उया नुकसान इस बात पर निर्भर करता है की इस fraud के लिए कौन ज़िम्मेदार है|

तो, इस बात का भी फैसला करना होगा की कौन ज़िम्मेदार है| कौन लेगा यह निर्णय?

अगर बैंक को लेना है, तो आप उम्मीद कर सकते हैं की वह कभी भी अपनी गलती नहीं मानेगा और सारा नुक्सान आपके ऊपर थोक देगा|

बैंक को निर्य्नायक रूप से यह साबित करना होगा की गलती आपकी है| ध्यान दें बैंक के सोचने से कुछ नहीं होता| इनको साबित करना होगा की फ्रॉड आपकी गलती से हुआ है| अगर वह ऐसा नहीं कर पाता, तो आपको कुछ भी नहीं देना होगा|

अगर यह साबित होता है कि फ्रॉड तीसरे पक्ष (third party) की गलती, लापरवाही या बदमाशी की वजह से हुआ है, तो आपकी liability (आर्थिक दायित्व) ऊपर दी गयी टेबल के हिसाब से तय होगी|

आप बैंक को कैसे fraud की खबर कर सकते हैं? (How to report Fraudulent Transaction?)

आप SMS डाल कर, ई-मेल डाल कर, फ़ोन करके या ब्रंक्च में जा कर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं|

अपनी कंप्लेंट का Acknowledgement नंबर ज़रूर लें|

यह मामला कितने दिनों में सुलझेगा?

Fraud की खबर के बाद 10 दिनों के भीतर बैंक को आपके खाते में पैसा वापिस करना होगा|

अगर बाद में आपकी गलती साबित होती है, तो बैंक वह पैसा वापिस ले सकता है|

बैंक को पूरा मामला 90 दिनों के अन्दर सुलझाना होगा|

बैंक यह सुनिश्चित करेगा की इस फ्रॉड/धोखाधड़ी की वजह से आपको कोई ब्याज का नुकसान या पेनल्टी न उठानी पड़ें|

आपको क्या करना चाहिए?

यहाँ दो पहलू हैं| पहली तो fraud होने से बचाएं, और दूसरी अगर fraud हो, तो जल्दी से जल्दी रिपोर्ट करें|

जैसा की हमनें ऊपर देखा, जितनी जल्दी रिपोर्ट करेंगे, आपको उतना कम नुकसान होगा|

पहले तो आपको सावधानी बरतनी होगी|

अपने क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के PIN, पासवर्ड या अन्य जानकारी को संभाल कर रखें और किसी से शेयर न करें| केवल सुरक्षित जगहों पर या कंप्यूटर पर ही इस्तेमाल करें|

दूसरी बात है जल्दी से जल्दी बैंक को खबर करने की|

  1. सबसे पहले अपने बैंक अकाउंट में अपना मोबाइल नंबर और इ-मेल रजिस्टर करिए|
  2. अपने SMS और ई-मेल नियमित रूप से चेक करिए|
  3. अगर आपको पता चलता है की कोई गलत transaction हुआ है, तो तुरंत बैंक को रिपोर्ट करें| बैंक से acknowledgement भी लें| ई-मेल ज़रूर डालें| क्योंकि ई-मेल खबर देने का पुख्ता सबूत है| बैंक ई-मेल को नकार नहीं सकता|

रिज़र्व बैंक के सर्कुलर को आप इस लिंक पढ़ सकते हैं|

Filed Under: Financial Planning, Loans Tagged With: debit कार्ड फ्रॉड, ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, क्रेडिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड fraud, नेट बैंकिंग धोखधड़ी

बेकार क्रेडिट स्कोर के बावजूद भी ले सकते हैं आप यह 6 लोन (Loans with Poor Credit Score)

by दीपेश 2 Comments

आप लोन के लिए आवेदन करना चाहते हैं, पर आपको पता चलता है की आपका क्रेडिट स्कोर काफी कम है और इस वजह से आपकी लोन की एप्लीकेशन रिजेक्ट हो जाती है|

आपकी कोशिश होनी चाहिए की आप अपने क्रेडिट स्कोर को सुधारें| इसके लिए यह भी ज़रूरी है की आप समय-समय पर अपने क्रेडिट स्कोर चेक करते रहे| अब आप अपना क्रेडिट स्कोर फ्री में ऑनलाइन चेक कर सकते हैं|

अब क्रेडिट स्कोर तो धीरे-धीरे ही सुधरेगा| परन्तु आपको लोन की ज़रुरत अभी है|

ऐसी स्तिथि में आप क्या करेंगे?

आईये कुछ ऐसे लोन के बारे में जानते हैं, जो की आपको बुरे सिबिल या क्रेडिट स्कोर के बावजूद ले सकते हैं| परन्तु ध्यान दें यहाँ आपको ऐसे लोन मिलेंगे जहाँ आपको कुछ सेक्योरिटी देनी होगी| मैं सुरक्षित लोन के बारे में बात कर रहा हूँ|

एक बात और, अगर आप ऐसे लोन लेते हैं और समय पर लोन का भुगतान करते हैं, तो धीरे-धीरे आपके क्रेडिट स्कोर में भी सुधार आ सकता हैं|

#1 गोल्ड लोन

अगर आपके घर कुछ सोना या सोने के आभूषण पड़ें हैं, तो आप उन आभूषणों को गिरवी रख कर लोन ले सकते हैं| गोल्ड लोन में आप आभूषण के 75% प्रतिशत मूल्य तक का लोन ले सकते हैं|

आपके लोन के भुगतान न करने पर बैंक आपके आभूषण को आसानी से बच कर अपना पैसा वसूल कर सकते हैं| इसी कारण आपके सिबिल स्कोर का कुछ ख़ास महत्त्व नहीं है|

आप गोल्ड लोन के बारे में अधिक विस्तार से इस पोस्ट में पढ़ सकते हैं|

गोल्ड लोन कम अवधि के लोन होते हैं| इसीलिए अगर आपको लगता है की आपको लोन चुकाने में परेशानी होगी, तो गोल्ड लोन लेने की बजाय गोल्ड को बेच देना एक बेहतर विकल्प होगा|

#2 आपकी इंश्योरेंस पालिसी से लोन

अगर आप काफी समय से अपनी इंश्योरेंस पालिसी के प्रीमियम का भुगतान कर रहे हैं, तो यहाँ भी आपके पास लोन लेने का विकल्प हो सकता है|

ध्यान दें लोन लेने के सुविधा केवल पारंपरिक जीवन बीमा प्लान (Traditional Life Insurance Plan में होती है| यूलिप (Unit Linked Insurance Plan) या टर्म इंश्योरेंस प्लान में लोन की सुविधा नहीं होती|

हर कंपनी और प्लान में लोन के नियम अलग हो सकते हैं|

एलआईसी की पालिसी में आप सरेंडर वैल्यू के 90% प्रतिशत राशि तक का लोन ले सकते हैं|

एलआईसी पालिसी से लोन के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|

#3 प्रॉपर्टी लोन

अगर आपके पास कोई प्रॉपर्टी है, तो बैंक आपको प्रॉपर्टी लोन भी दे सकते हैं| परन्तु यहाँ से लोन ले में थोडा समय लग सकता है क्योंकि सारे दस्तावेज साइन होने में समय लगेगा|

प्रॉपर्टी लोन के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|

#4 PPF खाते से लोन

अगर आपके पास पीपीएफ खाता है, तो आप इस खाते से भी लोन ले सकते हैं|

पर आप हमेशा लोन नहीं ले सकते |

PPF खाते से आप तीसरे वर्ष से छठे वर्ष तक लोन ले सकते हैं| सांतवे वर्ष से लोन नहीं ले सकते|

ऐसा इसलिए क्योंकि सांतवें वर्ष से आप PPF खाते से कुछ पैसा निकाल (partial withdrawal) सकते हैं|

परन्तु यहाँ पर आप बहुत ज्यादा लोन की उम्मीद नहीं कर सकते|

पिछले वर्ष के अंत में जो आपके पीपीएफ खाते में बैलेंस है, उस राशि के केवल 25% प्रतिशत राशि का लोन ही ले सकते हैं|

पीपीएफ खाते से लोन के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|

#5 Peer-to-Peer Lending (P2P lending)

अमूमन जब आप लोन लेते हैं, तब आप लोन किसी बैंक या वित्तीय संस्थान से लेते हैं|

Peer-to-Peer Lending में आप लोन अपने और मेरे ही जैसे किसी व्यक्ति से लेते हैं|

ऐसी ऑनलाइन वेबसाइट हैं, जहाँ पसे आप अपने बारे में जानकारी डाल सकते हैं| आपको लोन देने के इच्छुक लोग आपको उचित ब्याज दर पर लोन देने का प्रस्ताव रख सकते हैं| यह लोग हो सकता है की आपके क्रेडिट स्कोर की परवाह न करें|

परन्तु P2P lending में ब्याज दर काफी ज्यादा हो सकती है| 20% से 30% ब्याज दर आम है|

इस विकल्प का इस्तेमाल सोच समझ कर करें|

आप अधिकतम 10 लाख रुपये तक का लोन ले सकते हैं| पर हाँm यह लोन असुरक्षित (unsecured) होता है|

Peer-to-Peer Lending के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ सकते हैं|

#6 Loan against Securities

पहले ही कह दूं की यह बहुत अच्छा विकल्प नहीं है|

अगर आपके पास कुछ शेयर/बांड्स/म्यूच्यूअल फण्ड यूनिट्स इत्यादि हैं, तो आप इनको प्लेज (pledge) करके भी लोन ले सकते हैं|

मेरे अनुसार ऐसे शेयर/बांड्स/निवेश के खिलाफ लोन लेने की बजाय इन्हें बेच दें और मिलने वाली राशि के इस्तेमाल अपने काम के लिए करें|

इस तरह के लोन के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ें|

Filed Under: Loans Tagged With: सिबिल स्कोर कैसे सुधारें, सिबिल स्कोर क्या है, सिबिल स्कोर बिना लोन

पर्सनल लोन के बारे में पूरी जानकारी: कहाँ मिलता है, कितना मिलता है और क्या ब्याज दर होती है?

Last updated: अक्टूबर 3, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

अगर आपको जल्दी से लोन की आवश्यकता है, तो आपके लिए पर्सनल लोन एक विकल्प हो सकता है|

पर्सनल लोन (या व्यक्तिगत ऋण) असुरक्षित लोन (unsecured loan) होता है और आपको जल्दी मिल जाता है|

पर हाँ, एक पर्सनल लोन की ब्याज दर एक सुरक्षित लोन से ज्यादा होने की उम्मीद कर सकते हैं|

आईये जानते है पर्सनल लोन के बारे में विस्तार से|


पर्सनल लोन के क्या फायदे हैं? (व्यक्तिगत ऋण के फायदे)

सबसे पहली बात, पर्सनल लोन काफी जल्दी मिल जाता है|

कुछ बैंक तो यह दावा भी करते हैं की आपको कुछ मिनिटों में ही लोन दे देंगे| केवल दावों पर ना जाएँ| लेकिनहाँ, लोन जल्दी मिलने की उम्मीद कर सकते हैं|

दूसरी बात, पर्सनल लोन असुरक्षित लोन होता है| इसीलिए आपको कुछ गिरवी (security) रखने की ज़रुरत नहींहोती| लोन जल्दी मिलने की एक वजह यह भी है| क्योंकि कम दस्तावेज चाहिए होते हैं, इसीलिए लोन जल्दी मिल जाता है|

ध्यान दें ऐसा नहीं है की पर्सनल लोन सबको मिल जाता है| बैंक आपके लोन चुकाने की क्षमता को परखने के बाद ही आपको लोन देते हैं|

अगर आपका सैलरी अकाउंट किसी बैंक के साथ है, तो उसे पहले से ही पता होता है की आप कितना कमाते हैं और कितने लोन का भुगतान कर सकते हैं| इस वजह से लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है|

तीसरी बात, पर्सनल लोन का इस्तेमाल किसी भी कार्य के लिए किया जा सकता है| आप परिवार के साथ छुट्टी, बच्चों की पढाई या शादी, घर के डेकोरेशन, मेडिकल खर्चे, लेटेस्ट मोबाइल फ़ोन खरीदने के लिए या किसी भी काम के लिए पर्सनल लोन ले सकते हैं|

बैंक आपसे यह नहीं पूछता की आपने लोन के पैसे का कैसे इस्तेमाल किया|


पर्सनल लोन के क्या नुकसान हैं?

क्योंकि लोन असुरक्षित (unsecured) है, पर्सनल लोन की ब्याज दर ज्यादा होने की उम्मीद कर सकते हैं|

इस वजह से आपकी EMI भी ज्यादा होगी|

इसीलिए अगर आपको किसी कारण लोन की आवश्यकता है और उस काम के लिए आपको सुरक्षित लोन मिल सकता है, तो पर्सनल लोन अच्छा विकल्प नहीं होगा|

पढ़ें: कब पर्सनल लोन लेना बेवकूफी है?


पर्सनल लोन के भुगतान पर क्या टैक्स बेनिफिट मिलते हैं?

पर्सनल लोन के भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता|


मुझे पर्सनल लोन चाहिए? कहाँ से मिलेगा? पर्सनल लोन कहाँ मिलता है?

पर्सनल लोन आप बैंक या नया वित्तीय संस्थानों से ले सकते हैं|

आप बैंक की शाखा में जा कर लोन के लिए एप्लाई कर सकते हैं| कुछ बैंक आपको ऑनलाइन आवेदन करने का विकल्प भी देते हैं|

हालांकि सभी बैंक पर्सनल लोन देते हैं, मैं कुछ बैंक और वित्तीय संस्थानों के लिंक यहाँ देता हूँ|

SBI पर्सनल लोन/भारतीय स्टेट बैंक पर्सनल लोन

आईसीआईसीआई बैंक पर्सनल लोन

HDFC बैंक पर्सनल लोन

महिंद्रा फाइनेंस पर्सनल लोन

बजाज फाइनेंस पर्सनल लोन

आप अन्य बैंक की वेबसाइट पर जा कर पर्सनल लोन की जानकारी, योग्यता और डाक्यूमेंट्स के बारे में जान सकते हैं|


पर्सनल लोन की पात्रता क्या होती है? मुझे कितना पर्सनल लोन मिल सकता है? (Personal Loan Eligibility/ व्यक्तिगत ऋण पात्रता)

पात्रता के नियम हर बैंक में अलग हो सकते हैं| आप बैंक की वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं|

बैंक लोन देने से पहले आपकी लोन चुकाने की क्षमता को चेक करते हैं|

इसके लिए आपकी आय, आयु, आपकी नौकरी/व्यवसाय आदि को चेक करते हैं| यदि आपके कोई लोन अभी चल रहा है, उसके बारे में भी जानकारी लेते हैं|

आपके क्रेडिट स्कोर को भी देखा जाता है|

कुछ बैंक आपको आपकी लोन eligibility ऑनलाइन चेक करने की सुविधा प्रदान करते हैं|

वहां पर जा कर आप अपने बारे में जानकारी डाल सकते हैं और जान सकते हैं की आपको कितना पर्सनल लोन मिलेगा|

अगर आप नौकरी करते हैं, तो आपको पर्सनल लोन आसानी से मिल सकता है| अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं, तो आपको व्यक्तिगत ऋण और भी आसानी से मिल जाना चाहिए| कुछ लोन केवल वेतनभोगियों को ही दिए जाते हैं| SBI Express Credit Loan ऐसा ही एक लोन है| केवल सरकार के कर्मचारियों और अन्य वेतन पाने वालों को ही दिया जाता है|

अगर आप self-employed हैं, तो लोन लेने में थोड़ी परेशानी होगी|


पर्सनल लोन पर कितना ब्याज देना होता है? (पर्सनल लोन इंटरेस्ट रेट)

पर्सनल लोन की ब्याज दर बदलती रहती है|

और हाँ, ऐसा नहीं है की सभी ग्राहकों के एक सामान ब्याज दर देनी हो|

आपकी ब्याज दर कई बातों पर निर्भर करती है|

  1. आपका क्रेडिट स्कोर (जितना ज्यादा है, उतना कम ब्याज देना होगा)
  2. आप कहाँ काम करते हैं| अगर आप सरकारी नौकरी में हैं या किसी बड़ी कंपनी में काम करते हैं, तो ब्याज दर कम हो सकती है|
  3. वेतन पाने वाले ग्राहकों (salaried) को स्व नियोजित (self-employed) से कम ब्याज देना होगा|

इनके अलावा भी कई बातें हो सकती हैं, जो की आपकी ब्याज दर को प्रभावित कर सकती हैं|

आप लोन लेने से पहले बैंक की वेबसाइट पर जा कर चेक कर सकते हैं|

आप SBI पर्सनल लोन के इंटरेस्ट रेट यहाँ पर देख सकते हैं| आज कल  (मार्च 2018) में ब्याज दर 11-15% p.a. के बीच चल रही है|


पर्सनल लोन की अवधि कितनी होती है?

एक पर्सनल लोन की अवधि अमूमन 12 महीने से 60 महीने होती है|


अधिकतम कितना पर्सनल लोन मिल सकता है?

हर बैंक की अलग सीमा हो सकती है| पर 10 लाख या 15 लाख से अधिक का पर्सनल लोन मिलना मुश्किल है| बैंक लोन राशि पर न्यूनतम सीमा भी रख सकते हैं| अमूमन 30,000 से 50,000 रुपये न्यूनतम सीमा होती है|


मेरे लोन की EMI कितनी होगी? (पर्सनल लोन ईएमआई कैलकुलेटर)

यह निर्भर करता है आपकी लोन राशि, ब्याज दर और लोन की अवधि पर|

अगर आप जानना चाहते हैं की आपके लोन की EMI कैसे कैलकुलेट होती है, तो इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें|

emicalculator.net

 

अगर आप इतनी मेहनत नहीं करना चाहते, तो आप बैंक की वेबसाइट पर आपकी EMI का अनुमान ले सकते हैं|

आप SBI EMI कैलकुलेटर  (व्यक्तिगत ऋण ईएमआई कैलकुलेटर) पर जा कर EMI निकाल सकते हैं| आप एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक या अन्य किसी बैंक की वेबसाइट पर जा कर भी व्यक्तिगत ऋण ईएमई कैलकुलेटर के इस्तेमाल कर सकते हैं|

इसके अलावा आप इस लिंक पर जा कर भी अपने लोन की EMI कैलकुलेट कर सकते हैं|


पर्सनल लोन लेने के लिए किन डॉक्यूमेंट/दस्तावेजों की ज़रुरत है?

हालांकि हर बैंक में दस्तावेजों की लिस्ट अलग हो सकती है, मैं कुछ प्रमुख दस्तावेजों का ज़िक्र यहाँ पर करता हूँ|

  1. पहचान प्रमाण (Identity Proof)
  2. पते का प्रमाण (Address Proof)
  3. सैलरी स्लिप (Salary Slip), पिछले कुछ वर्षों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (self-employed)

इनके अलावा भी दस्तावेज़ चाहिए हो सकते हैं| पूरी लिस्ट आप बैंक से ले सकते हैं|


पर्सनल लोन लेते समय इन बातों पर भी ध्यान रखें

  1. आपको लोन पर केवल ब्याज ही नहीं देना होता|
  2. लोन की प्रोसेसिंग फीस (processing fee) पर भी ध्यान दें| अगर प्रोसेसिंग फीस ज्यादा होगी, तो आपके लोन की कॉस्ट ही बढ़ेगी| यह फीस लोन राशि के 2-3% तक हो सकती है|
  3. कुछ बैंक आपको कम ब्याज दर पर लोन देने को तैयार हो सकते हैं| पर ऐसा हो सकता है, की उन बैंक के लोन की प्रोसेसिंग फीस ज्यादा हो| ऐसी स्तिथि में उन्होंने आपको लोन की ब्याज दर पर छूठ दी, पर processing फीस बढ़ा कर सब कुछ वसूल लिया|
  4. इसीलिए केवल कम ब्याज पर ही ध्यान न दें, अन्य शुल्कों (जैसे की प्रोसेसिंग फीस) पर भी ध्यान दें| उसके बाद ही फैसला करें|
  5. साथ ही कुछ लोन में समय से पहले लोन का भुगतान करने पर आपको पेनल्टी (जुर्माना) देना पड़ सकता है| ऐसे जुर्माने को pre-payment penalty (प्री-पेमेंट पेनल्टी) कहा जाता है| यह बकाया राशि के 5% तक हो सकती है|
  6. क्योंकि पर्सनल लोन की राशि कम होती है, ऐसा हो सकता है की आप ब्याज से बचने के लिए उसे जल्दी चुकाना चाहें| अगर ऐसा है, तो प्री-पेमेंट पेनल्टी पर भी ध्यान दें| कम प्री-पेमेंट पेनल्टी वाले विकल्प चुनें|

सरकारी कर्मचारियों के लिए पर्सनल लोन (व्यक्तिगत ऋण)

सरकारी कर्मचारियों को प्राथमिकता मिलती है|

कुछ बैंक में ऐसे पर्सनल लोन हो सकते हैं, जो की केवल सरकारी कर्मचारियों को दिए जाते हैं|

इसके अलावा भी ,अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं, तो आपको लोन मिलने में आसानी होगी| आपको अन्य लोगो से ब्याज दर भी बेहतर मिल सकती है| आप SBI एक्सप्रेस क्रेडिट पर्सनल लोन के बारे में यह बात देख सकते हैं|

यही नहीं, अगर आप रिटायर हो चुके हैं और सरकार से पेंशन पाते हैं, तब भी आपको लोन मिल सकता है| SBI पेंशन लोन के बारे में यहाँ पढ़ें|

मेरे लिए बेस्ट पर्सनल लोन कौन सा है?

इस सवाल का जवाब देना थोडा मुश्किल है|

मेरे अनुसार आपके लिए वह पर्सनल लोन बेस्ट है जिसमें आपको कम ब्याज दर देनी पड़े और अतिरिक्त चार्ज भी कम हों|

अन्य तरह के लोन का बारे में जानकारी

  1. गोल्ड लोन के बारे में पूरी जानकारी (Gold Loan)
  2. प्रॉपर्टी लोन के बारे में पूरी जानकारी (Property Loan)
  3. अपने पीपीएफ खाते से भी ले सकते हैं लोन और किन बातों का रखें ख्याल (PPF Loan)
  4. अपनी एलआईसी पालिसी से भी ले सकते हैं लोन (LIC Loan)
  5. Education loan (शिक्षा लोन) पर भी मिल सकते हैं टैक्स बेनेफिट्स
  6. कार लोन के बारे में पूरी जानकारी: कैसे कम सकते हैं कार लोन की EMI (Car Loan)
  7. SBI एक्सप्रेस क्रेडिट पर्सनल लोन के बारे में पूरी जानकारी (SBI Express Credit Loan)
  8. SBI पेंशन  लोन के बारे में पूरी जानकारी (SBI Pension Loan)
  9. CIBIL Score (सिबिल स्कोर) क्या होता है और आपके लोन लेने की क्षमता को कैसे प्रभावित करता है?
  10. खराब क्रेडिट स्कोर के बावजूद ले सकते हैं आप यह 6 लोन
  11. बजाज फिनसर्व ईएमआई कार्ड (Bajaj Finserv EMI Card) की पूरी जानकारी

Filed Under: Loans Tagged With: HDFC बैंक पर्सनल लोन, आईसीआईसीआई बैंक पर्सनल लोन, पर्सनल लोन sbi, पर्सनल लोन का EMI कैलकुलेटर, पर्सनल लोन कैसे मिलता है, पर्सनल लोन क्या है, बजाज फाइनेंस पर्सनल लोन, भारतीय स्टेट बैंक पर्सनल लोन

अपने बैंक फिक्स्ड डिपाजिट पर TDS कैसे बचाएं? (How to save TDS on Bank Fixed Deposit?)

by दीपेश Leave a Comment

अगर आप फिक्स्ड डिपाजिट में निवेश करते हैं, तो आप जानते होंगे की अगर आपका ब्याज एक सीमा से अधिक होता है, तो बैंक TDS (Tax Deduction at Source) काट लेता है|

बैंक कब फिक्स्ड डिपाजिट के ब्याज पर TDS काटते हैं?

बैंक के नियम आपकी आयु पर निर्भर करते हैं|

अगर आपकी आयु 60 वर्ष से कम है

अगर एक बैंक की सभी शाखयों में कुल मिला कर 10,000 रुपये से ज्यादा है, तो आपको ब्याज देने से पहले  ब्याज पर TDS काटा जाएगा|

अगर आपकी आयु 60 वर्ष से अधिक है

अगर एक बैंक का सभी शाखयों में कुल मिला कर 10,000 रुपये से ज्यादा है, तो आपको ब्याज देने से पहले ब्याज पर TDS काटा जाएगा| परन्तु 1 अप्रैल 2018 (FY2019) से यह सीमा 10,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गयी है| यह रियायत केवल सीनियर सिटीजन के लिए है|

अगर आपने अपना PAN जमा किया है, तो TDS 10% (ब्याज का 10%) काटा जाता है| अगर PAN जमा नहीं किया है, तो 20% TDS काटा जाता है|

यह टैक्स आपके नाम पर ही काटा जाता है और आपके Form 26AS में ही दिखाई देगा|

मान लिए आपके पास स्टेट बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में फिक्स्ड डिपाजिट हैं| SBI में ब्याज के रूप में 9,000 रुपये कमाते हैं। आईसीआईसीआई बैंक के साथ आप ब्याज के रूप में 8,000 रुपये कमाते हैं। क्योंकि दोनों ही बैंक में आपका कुल ब्याज 10,000 रुपये से कम है, कोई भी बैंक आपका TDS नहीं काटेगा।

परन्तु इसका मतलब यह नहीं की आपके 17,000 रुपये का ब्याज कर मुक्त है| आपको इन 17,000 रुपये पर अपनी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

क्या फिक्स्ड डिपाजिट पर टीडीएस से बचने का कोई तरीका है?

जी हाँ, TDS से बचने का तरीका तो है, पर कुछ ही स्तिथियों में आप इन तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं|

TDSसे बचने के लिए, आप बैंक के साथ फॉर्म 15G/15H जमा कर सकते हैं।

अगर आपकी आयु 60 वर्ष से कम है, तो आप फॉर्म 15G जमा कर सकते हैं|

अगर आपकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है, तो आप फॉर्म 15H जमा कर सकते हैं|

परन्तु हर कोई फॉर्म 15G/15H नहीं जमा कर सकता|

फॉर्म 15G/फॉर्म 15H एच कौन फाइल कर सकता है?

फॉर्म 15G जमा करने के लिए नियम/पात्रता (Eligibility)

  1. आपकी आयु 60 वर्ष से कम होनी चाहिए|
  2. आपकी ब्याज से होने वाली वाली आय 2.5 लाख रुपये (minimum tax exemption limit) से कम होनी चाहिए|
  3. आपकी कुल अनुमानित टैक्स liability शून्य होनी चाहिए (Estimated tax liability should be NIL).

फॉर्म 15H जमा करने के लिए नियम/पात्रता (Eligibility)

  1. आपकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए| आप सीनियर सिटीजन होने चाहिए|
  2. आपकी कुल अनुमानित टैक्स liability शून्य होनी चाहिए (Estimated tax liability should be NIL)| अगर आपकी आयु 60 और 80 वर्ष के बीच में हैं, तो आपको 3 लाख तक की कर योग्य आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा| अगर आपकी आयु 80 वर्ष या उससे अधिक है, तो आपको 5 लाख तक की कर योग्य आय पर टैक्स नहींदेना होगा|

आप देख सकते हैं की फॉर्म 15H जमा करने के लिए एक कंडीशन कम है| सीनियर सिटीजन के लिए ब्याज की आय की वजह से कोई अतिरिक्त प्रतिबंध नहीं है।

अगर Form 15G या 15H जमा करते हैं, तो बैंक आपका TDS नहीं काटेगा|

ध्यान दें अगर आपने बैंक में अपना PAN जमा नहीं किया है, तो आपके फॉर्म 15G/15H को वैद्य नहीं माना जाएगा|

save tds bank fixed deposit फिक्स्ड डिपाजिट पर टीडीएस बचाएँ

पढ़ें: कैसे होता है आपका इनकम टैक्स कैलकुलेट?

यदि मैं पात्र नहीं हूं, तो फॉर्म 15G या 15H जमा करने पर क्या होगा?

अगर आप फॉर्म 15G या 15H जमा करने के पात्र नहीं हैं, परन्तु फॉर्म जमा कर देते हैं, तो आपको आयकर  की धारा 277 के तहत जुर्माना या कारावास हो सकता है। इसलिए, बैंक में फॉर्म 15 जी / 15 एच फॉर्म जमाकरने से पहले फॉर्म जमा करने की पात्रता चेक कर लें|

फॉर्म 15G/15H कहाँ से मिलेगा?

आप आयकर वेबसाइट से फॉर्म 15G या फॉर्म 15H के फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। आप अपनी बैंक की शाखा से भी फॉर्म ले सकते हैं।

अगर आप भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) के फॉर्म डाउनलोड करना चाहते हैं, तो आप यहाँ से कर सकते हैं| SBI Form 15G, SBI Form 15H

फॉर्म 15G/15H कितनी बार जमा करना होता है?

फॉर्म 15G/15H एक वर्ष के लिए वैद्य होता है|

इसीलिए आपको हर वर्ष यह फॉर्म जमा करना होगा|

आप एक बार फॉर्म 15G/15H जमा कर चुके हैं, परन्तु कोई नया फिक्स्ड डिपाजिट खोलते हैं| ऐसी स्तिथि में आपको फिर से फॉर्म जमा करना होगा|

अगर मैंने फॉर्म 15G/15H जमा नहीं किया, तो क्या होगा?

डरने वाली बात नहीं है, बस हाँ थोड़ा काम बढ़ जाएगा|

  1. अगर TDS के रूप में अतिरिक्त टैक्स कट गया है, तो आप इनकम टैक्स रिटर्न भर कर रिफंड ले सकते हैं|
  2. TDS अमूमन हर तिमाही पर काटा जाता है, तो जल्दी से जल्दी जमा करें|

पर हाँ, जमा करने से पहले यह सुनिश्चित करें की आप फॉर्म 15G/15H भरने के पात्र हैं या नहीं|

क्या फॉर्म 15G या 15H के ऑनलाइन जमा कर सकते हैं?

कुछ बैंक आपको यह सुविधा प्रदान कर सकते हैं| अपने बैंक के साथ चेक करें|

टीडीएस (TDS) कटने से आपकी टैक्स liability पूरी नहीं होती

नहीं, टीडीएस (TDS) का भुगतान आपका कर दायित्व (tax liability) को पूरा नहीं करता है।

यदि आप उच्च टैक्स ब्रैकेट (20% या 30%) में आते हैं, तो आपको आयकर रिटर्न दाखिल करने के समय अतिरिक्त कर का भुगतान करना होगा|

अगर ज्यादा टैक्स कट गया है, तो आप इनकम टैक्स रिटर्न भरकर वापिस ले सकते हैं|

क्या NRI भी फॉर्म 15 जी और 15 एच दाखिल कर टीडीएस छूट का लाभ उठा सकते हैं?

आयकर अधिनियम की धारा 197 A के अनुसार, केवल भारतीय निवासियों को 15 जी और 15 एच दाखिल करके टीडीएस छूट का लाभ लेने की अनुमति है। इसलिए NRI फॉर्म 15 जी और 15 एच दाखिल कर टीडीएस छूट नहीं ले सकते हैं।

इन बातों पर भी ध्यान दें

  1. फिक्स्ड डिपाजिट पर मिलने वाले पूरे ब्याज पर टैक्स देना होता है|
  2. फिक्स्ड डिपाजिट के ब्याज पर आपको अपने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ता है|
  3. TDS कटने पर आपकी टैक्स liability खत्म नहीं होती|
  4. अगर आप 20% या 30% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं और TDS केवल 10% ही कटा है, तो आपको अतिरिक्त टैक्स अपने आप जमा करना होगा|
  5. अगर आपके ब्याज पर TDS कट गया है और आपकी टैक्स liability कम है, तो आप इनकम टैक्स रिटर्न भर कर refund ले सकते हैं|
  6. आपको फॉर्म 15G/15H हर बैंक के साथ (जहां भी आपका खाता है और TDS कट सकता है) भरना होगा|
  7. आप एक बार फॉर्म 15G/15H जमा कर चुके हैं, परन्तु कोई नया फिक्स्ड डिपाजिट खोलते हैं| ऐसी स्तिथि में आपको फिर से फॉर्म जमा करना होगा|
  8. आप सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम के साथ भी फॉर्म 15G/15H फॉर्म जमा कर सकते हैं| साथ ही अगर आपने किस कंपनी के फिक्स्ड डिपाजिट में निवेश किया है, तो वहाँ भी आप यह फॉर्म जमा कर सकते हैं|
  9. सेविंग्स बैंक अकाउंट के ब्याज पर कोई टीडीएस नहीं कटता|
  10. अगर आपकी आयु 60 वर्ष से कम है, तो आपको धारा 80TTA के तहत सेविंग्स अकाउंट पर 10,000 रुपये तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होता|
  11. अगर आपक सीनियर सिटीजन (आयु 60 वर्ष से ज्यादा) हैं, तो आपको 50,000 तक के ब्याज पर (सेविंग्स अकाउंट और फिक्स्ड डिपाजिट मिलाकर) कोई टैक्स नहीं देना होगा| यह नियम FY2019 (1 April, 2018) से लागू होगा| धारा 80TTB के तहत यह लाभ मिलेगा| अगर कुल ब्याज 50,000 से ज्यादा है, तो आपको अतिरिक्त ब्याज पर अपनी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

पढ़ें: सीनियर सिटीजन को मिलने वाले स्पेशल टैक्स बेनिफिट

Filed Under: Financial Planning, Tax Planning Tagged With: sbi फिक्स्ड डिपाजिट टीडीएस कैसे बचाएं, tax benefits for senior citizens in hindi, टीडीएस क्या है, भारतीय स्टेट बैंक फिक्स्ड डिपाजिट, सीनियर सिटीजन टैक्स बेनिफिट

सीनियर सिटीजन को मिलने वाले 7 स्पेशल टैक्स बेनिफिट

by दीपेश Leave a Comment

भारतीय सरकार वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) कुछ अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट देती है| इस पोस्ट में मैं ऐसे ही कुछ टैक्स बेनिफिट पर चर्चा करूंगा, जो की केवल वरिष्ठ नागरिकों को ही उपलब्ध हैं|

पहले जानते हैं की वरिष्ठ नागरिक की परिभाषा क्या है|

वरिष्ठ नागरिक (सीनियर सिटीजन) – आपकी आयु 60 और 80 वर्ष के बीच में है

अति-वरिष्ठ नागरिक (वैरी सीनियर सिटीजन)– आपकी आयु 80 वर्ष या उससे अधिक है

वरिष्ठ नागरिको के लिए टैक्स के लाभ (Tax Benefits for Senior Citizens) (Hindi)

#1. कम टैक्स देना पड़ता है

अगर आप इनकम टैक्स के दरें देखें, तो आप जान सकते हैं की सीनियर सिटीजन को थोड़ी राहत दी गयी है|

मैंने FY2019 के दरें दिखायीं हैं|

income tax slab FY2018 2019

तो आप देख सकते हैं की अगर आप वरिष्ठ नागरिक हैं, तो आपको 2,500 रुपये तक कम टैक्स देना पड़ सकता हैं| 3 लाख रुपये तक की आय कर मुक्त है|

अगर आप अति वरिष्ठ नागरिक हैं, तो आपको 12,500 रुपये तक कम टैक्स देना पड़ेगा| 5 लाख तक की आय कर मुक्त है|

पढ़ें: जानिये कैसे होता है आपका इनकम टैक्स कैलकुलेट

#2. 50,000 रुपये तक की इंटरेस्ट इनकम (ब्याज) पर छूठ है

यह नियम 1 April 2018 (FY2019) से लागू होगा|

वरिष्ठ नागरिकों को बचत खाते (savings account), फिक्स्ड डिपाजिट (fixed deposit) या रेकरिंग डिपाजिट (recurring deposit) पर बर्ष में 50,000 तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं देना होगा| यह टैक्स लाभ धारा 80TTB के तहत है|

अगर ब्याज 50,000 रुपये  से ज्यादा है, तो टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

अगर आप एक सीनियर सिटीजन हैं और आपने वर्ष में फिक्स्ड डिपाजिट और बचत खाते पर 80,000 रुपये का ब्याज पाया| 50,000 रुपये तक कोई टैक्स नहीं देना होगा|

बचे हुए 30,000 रुपये पर इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा|

यह नियम आपने बैंकों, सहकारी बैंकों (co-operative bank) और डाकघरों (post-office) में खोलें गए खातों के लिए है।

अगर धारा 80 TTB के तहत लाभ ले रहे हैं, तो धारा 80 TTA के तहत कर लाभ नहीं ले सकते हैं। धारा 80TTA के तहत सेविंग्स बैंक अकाउंट पर मिलने वाले 10,000 रुपये तक के ब्याज पर टैक्स छूठ है|

#3. वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये से ऊपर के ब्याज पर TDS लगेगा

यह नियम भी 1 April 2018 (FY2019) से लागू होगा| FY2018 तक यह सीमा 10,000 रुपये है|

जो लोग सीनियर सिटीजन नहीं है, उनके लिए यह सीमा 10,000 रुपये है (FY2019 में भी)|

सीनियर सिटीजन के लिए TDS (Tax deduction at source) एक बड़ी परेशानी का विषय है|

बुज़ुर्ग लोग आपना काफी पैसा फिक्स्ड डिपाजिट में रखते हैं और अमूमन उनके पास आय का कोई और जरिया नहीं होता| TDS काटने पर उनको रिटर्न भरकर वापिस लेना पड़ता है| हालांकि फॉर्म 15H जमा करके आप TDS कटने से रोक सकते हैं, परन्तु यहाँ भी काफी परेशानी होती है|

#4. हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 50,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट

FY2018 तक यह टैक्स बेनिफिट 30,000 रुपये प्रति वर्ष तक सीमित है|

1 April 2018 (FY2019) से यह बेनिफिट बढ़कर 50,000 रुपये हो जाएगा|

#5. गंभीर बीमारियों के चिकित्सा उपचार के लिए टैक्स बेनिफिट 1 लाख रुपये का टैक्स बेनिफिट (Section 80DDB)

किसी गंभीर बीमारी के लिए 1 लाख रुपये तक के खर्चे के लिए टैक्स बेनिफिट मिलेगा| यह नियम FY2019 (1 April 2018) से लागू होगा|

FY2018 तक वरिष्ठ नागरिकों (senior citizen) के लिए 60,000 रुपये की सीमा थी और अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए 80,000 रुपये (> = 80 वर्ष) की सीमा थी। FY2019 से दोनों के लिए सीमा बढाकर 1 लाख प्रतिवर्ष कर दी गयी है।

ध्यान दीजिए कि 60 साल से कम उम्र के करदाताओं को सालाना 40,000 रुपये ही है|

एक बात और, सेक्शन 80DDB के तहत केवल उसी खर्चे के लिए क्लेम किया जा सकता है, जो आपने किसी इंश्योरेंस पालिसी के तहत क्लेम न किया हो|

#6. Reverse mortgage Loan Scheme के तहत मिलने वाली राशि कर मुक्त है

Reverse Mortgage Loan Scheme (RML) के तहत आप अपना घर बैंक लो गिरवी रख देते हैं और बैंक आपको आपके पूरे जीवन कुछ मासिक राशि प्रदान करती है| आप पूरे जीवन उस घर में रह सकते हैं| मृत्यु के बाद बैंक वह घर ले लेता है|

RML स्कीम केवल सीनियर सिटीजन के लिए ही उपलब्ध है|

अच्छी बात यह है की ऐसी स्कीम से मिलने वाली राशि आयकर की धारा 10(43) के तहत कर मुक्त है|

आप Reverse Mortgage Loan Scheme (RML) के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट (अंग्रेजी) को पढ़ सकते हैं|

#7. 40,000 रुपये तक का Standard Deduction

यह नियम भी FY2019 (1 April 2018)  से लागू होगा|

यह फायदा केवल सीनियर सिटीजन के लिए ही नहीं है बल्कि सभी के लिए है|

अगर आप सीनियर सिटीजन हैं और पेंशन पाते हैं, तो आप 40,000 रुपये का टैक्स बेनिफिट पा सकते हैं| ध्यान दें यह फायदा आपको तभी मिलेगा जब आप पेंशन पाते हैं|

Filed Under: Financial Planning, Tax Planning Tagged With: tax benefits for senior citizens in hindi, सीनियर सिटीजन टैक्स बेनिफिट

  • « Go to Previous Page
  • Page 1
  • Interim pages omitted …
  • Page 16
  • Page 17
  • Page 18
  • Page 19
  • Page 20
  • Interim pages omitted …
  • Page 36
  • Go to Next Page »

Primary Sidebar

HindiFinance

Subscribe on Youtube




Join our Newsletter
Enter your email address and click on the Get Instant Access button.
Thank you for subscribing.
Something went wrong.
I agree to have my personal information transfered to MailChimp ( more information )
We respect your privacy

For any guest posts or advertising queries, please write to us at hindifinance@gmail.com

Popular Posts

  • अटल पेंशन योजना की पूरी जानकारी (Atal Pension Yojana in Hindi) (2022)
  • सुकन्या समृद्धि योजना की पूरी जानकारी (Sukanya Samriddhi Yojana 2019)
  • नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) के बारें में पूरी जानकारी (Complete Information about NPS in Hindi)
  • PPF खाते के बारे में पूरी जानकारी (Complete Information about PPF Account in Hindi)
  • कौन से हैं 5 सबसे अच्छे टर्म इंश्योरेंस प्लान (Best Term Life Insurance Plan)?

(c) Copyright 2026 www.HindiFinance.com | Privacy Policy