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होम लोन के भुगतान पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट (Tax Benefits: Home Loan Repayment)

Last updated: फ़रवरी 28, 2019 | by दीपेश 10 Comments

ज़मीन और मकानों के दाम इतने ज्यादा हैं की अधिकाँश लोगों को घर खरीदने के लिए होम लोन लेना पड़ता है| अच्छी बात यह है की होम लोन के भुगतान पर आपको टैक्स बेनिफिट या छूठ मिलती हैं|

इस टैक्स बेनिफिट से आपके ऊपर होम लोन का भार कुछ कम हो जाता है|

इस पोस्ट में यह जानते है की आपको होम लोन के भुगतान पर क्या टैक्स बेनिफिट मिलते हैं|


होम लोन पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट्स (Home Loan Repayment Tax Benefits in Hindi)

आपको टैक्स की बचत ब्याज की भुगतान (interest payment) और मूल के भुगतान (principal payment) दोनों परमिलती है|

आपको होम लोन के भुगतान पर तीन तरह के टैक्स बेनिफिट मिल सकते हैं|

  1. होम लोन पर ब्याज के भुगतान (interest payment) के लिए 2 लाख रुपये (सेक्शन 24 के तहत)
  2. होम लोन पर मूल के भुगतान (principal repayment) के लिए 1.5 लाख रुपये (सेक्शन 80C के तहत)
  3. अगर पहली बार घर ले रहे हैं, तो 50,000 रुपये तक अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट ब्याज के भुगतान के लिए (सेक्शन 80EE के तहत)

आईये जानते हैं इन टैक्स बेनिफिट के बारे में विस्तार से| साथ ही यह भी देखते हैं की इन टैक्स बेनिफिट के साथ क्या शर्तें जुडी हुई हैं| होम लोन के टैक्स बेनिफिट से जुड़े कुछ आम सवालों पर भी चर्चा करेंगे|


होम लोन पर ब्याज के भुगतान के लिए टैक्स बचत (Tax Benefit for Interest Payment on Home Loan under Section 24 of Income Tax Act)

होम लोन पर ब्याज के भुगतान के लिए आप वित्तीय वर्ष में 2 लाख रुपये तक की छूठ ले सकते हैं|

अगर आपने 2 लाख से कम ब्याज के भुगतान लिया है, तो टैक्स बेनिफिट उस राशि तक ही सीमित होगा|

अगर 2 लाख से ज्यादा का भुगतान किया है, तो टैक्स लाभ 2 लाख रुपये तक सीमित होगा|

अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट में आते हैं, तो इसका मतलब हुआ 60,000 रुपये की टैक्स बचत (2 लाख X 30%)|

यह टैक्स बेनिफिट आपको आयकर की धारा 24 के तहत मिलता है|

क्या आयकर की धारा 24 के तहत टैक्स बेनिफिट लेने की कुछ शर्ते हैं?

  1. अगर लोन घर की मरम्मत के लिए लिया गया है, तो टैक्स बेनिफिट 2 लाख रुपये नहीं होगा| केवल 30,000 रुपये प्रति वित्तीय वर्ष होगा|
  2. 2 लाख रुपये तक का टैक्स बेनिफिट केवल घर खरीदने या बनाने के लिए है|
  3. ब्याज के भुगतान पर आप टैक्स बेनिफिट मकान का निर्माण पूरा होने या फ्लैट के possession मिलने के बाद ही ले सकते हैं|
  4. इसका मतलब यह नुआ की जब तक आपके घर के निर्माण पूरा नहीं होता, आपको धारा 24 के तहत कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा|
  5. मकान का निर्माण पूरा होने से पहले किये गए ब्याज के भुगतान को आप जोड़ सकते हैं और अगले 5 साल (घर का निर्माण पूरा होने के बाद) तक बराबर किश्तों में टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं| पर ध्यान दें, कुल मिला कर एक वित्तीय वर्ष में टैक्स बेनिफिट 2 लाख रुपये से ज्यादा नहीं हो सकता|
  6. साथ ही, अगर आपका मकान लोन लेने के पांच साल के भीतर पूरा नहीं होता या आपके फ्लैट का possession नहीं मिलता, तो आपको मिलने वाला टैक्स बेनिफिट 2 लाख रुपये से घाट कर 30,000 रुपये प्रति वर्ष रह जाएगा|
  7. टैक्स बेनिफिट लेने के लिए यह ज़रूरी नहीं है की आपने लोन बैंक से ही लिया हो| आप अपने परिवार में किसी से या किसी मित्र से भी लोन ले सकते हैं| बस आपको ब्याज का भुगतान का सर्टिफिकेट (प्रमाण पत्र) देना होगा|home loan repayment tax benefit in hindi

मूल राशि के भुगतान पर टैक्स बेनिफिट (Tax Benefit on Principal Repayment under Section 80C of the Income Tax Act)

होम लोन पर मूल के भुगतान के लिए आपको प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपये तक का टैक्स बेनिफिट मिलता है|

यह टैक्स बेनिफिट आपको आयकर की धारा 80C के तहत मिलता है|

इन बातों पर भी ध्यान दें

  1. आयकर की धारा 80C के तहत टैक्स बेनिफिट पाने के और भी कई तरीके हैं| सभी तरीकों में कुल मिला कर आपको केवल 1.5 लाख रुपये का टैक्स बेनिफिट ही मिलता है|
  2. तो अगर आपके EPF, पीपीएफ, ELSS इत्यादि में निवेश से ही आपकी सेक्शन 80C की लिमिट पूरी हो रही है, तो आपके मूल भुगतान (principal repayment) पर कुछ ख़ास टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा|
  3. ब्याज के भुगतान की तरह ही आप मूल के भुगतान पर टैक्स बेनिफिट घर का निर्माण पूरा होने या फ्लैट का possession मिलने के बाद ही ले सकते हैं|
  4. परन्तु, यहाँ पर आप निर्माण से पहले किये गए मूल भुगतान (principal repayment) पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं ले सकते|
  5. अगर आप घर के निर्माण पूरा होने या फ्लैट का possession मिलने के 5 वर्ष की भीतर अपने घर बेच देते हैं, तो आपके टैक्स बेनिफिट वापिस ले लिए जायेंगे| इसका मतलब जो टैक्स बेनिफिट आपने पिछले वर्षों में लिया था, वह आपकी आय में जोड़ दिया जाएगा और उसी अनुसार आपको टैक्स देना पड़ेगा|
  6. अगर टैक्स बेनिफिट चाहिए, तो लोन आपको किसी बैंक, सरकार, एलआईसी, नेशनल हाउसिंग बैंक, कॉपरेटिव सोसाइटी इत्यादि से लेना होगा| परिवार या किसी मित्र से लोन लेने पर मूल के भुगतान पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा|

स्टैम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क के लिए टैक्स बेनिफिट (Stamp Duty and Registration Charges)

आयकर की धारा 80C के तहत आप घर खरीदते समय Stamp Duty and Registration Charges के भुगतान पर भी टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

पर यह बेनिफिट आप उसी वर्ष ले सकते हैं, जिस वर्ष आपने इन शुल्कों का भुगतान किया है|

ध्यान रखें धारा 80C के तहत टैक्स बेनिफिट की सीमा 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ष है|

यहाँ भी 5 वर्ष के भीतर घर बेचने पर आपके टैक्स बेनिफिट वापिस ले लिए जायेंगे|

पढ़ें: सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचाने के 15 आसान तरीके


आयकर की धारा 80EE के तहत पहली बार घर खरीदना वालों के लिए अतिरिक्त बचत (Extra Tax Benefit for first time home buyers under Section 80EE)

अगर आप अपने पहला घर खरीद रहे है, तो आपके पास कुछ अतिरिक्त टैक्स राहत भी है|

अगर आप पहला घर खरीद रहे हैं, तो होम लोन पर ब्याज के  भुगतान के लिए आप 50,000 रुपये तक का अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

यह बेनिफिट आपको धारा 80EE के अंतर्गत मिलता है|

यह बेनिफिट Section 24 के तहत मिलने वाले टैक्स लाभ के अतिरिक्त है|

कुछ शर्तें हैं:

  1. आपका लोन 1 अप्रैल, 2016 और मार्च 31, 2017 के बीच पारित हुआ हो|
  2. लोन राशि 35 लाख से ज्यादा नहीं होनी चहिये|
  3. मकान का मूल्य 50 लाख से ज्यादा नहीं होना चाहिए|
  4. यह आपका पहला घर होना चाहिए|
  5. लोन आपने बैंक या किसी वित्तीय संस्थान से लिया हो|

ध्यान दें यह नियम हर वर्ष बदलता रहता है| मेरा मतलैब है की यह छूठ सरकार एक बार में एक वर्ष के लिए ही देती है| यह पक्का नहीं होता की अगले वर्ष भी यह राहत दी जायेगी या नहीं|


मैंने अपनी पत्नी के साथ Joint होम लोन किया है? क्या हम दोनों टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं?

जी हाँ, आप दोनों ही टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

आप और आपकी पत्नी दोनों ही ब्याज के भुगतान के लिए 2-2 लाख का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं| कुल मिला कर हुआ 4 लाख रुपये|

मूल के भुगतान (principal repayment) के लिए भी 1.5-1.5 लाख रुपये का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

बस एक बात का ध्यान रखें| घर दोनों के नाम पर होना चाहिए (co-owner) और लोन में भी दोनों का नाम होना चाहिए (co-borrower)|

और सारे नियम और शर्तें वैसे ही हैं|

पढ़ें: होम लोन लेने से पहले इन 6 बातों का रखें ख्याल


क्या मैं HRA और होम लोन दोनों का टैक्स लाभ ले सकता हूँ?

अगर आप किराए के घर में रहते हैं और होम लोन भी लिया हुआ है, तो आप HRA और होम लोन भुगतान दोनों पर टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

HRA पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट पर मैंने विस्तार से इस पोस्ट में चर्चा करी है|

पढ़ें: मकान के किराए पर भी मिल सकते हैं टैक्स बेनिफिट


मैंने दूसरे घर (let out property) के लिए लोन लिया है? क्या टैक्स बेनिफिट अलग है?

मूल राशि के भुगतान (Principal repayment) के लिए तो नियम सामान ही है| आप कितने भी घर ले लें, आप एक वर्ष में सभी लोन के लिए कुल मिला कर 1.5 लाख रुपये तक (Section 80C के तहत) का टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं|

परन्तु ब्याज के भुगतान पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट में थोड़ा अंतर है|

अगर जिस घर पर आपने लोन लिया है और उसे किराए पर उठा रखा है, तब भी कुल मिला कर आप दो लाख रुपये का ही फायदा ले सकते हैं| अंतर इतना है की आप उस मकान के किराए की आय को भी एडजस्ट कर सकते हैं|

तो मान लिए आपकी किराए से कमाई (म्युनिसिपल टैक्स और स्टैण्डर्ड डिडक्शन) के बाद) 1.25 लाख रुपये की हुई, तो कुल मिला कर आप 3.25 लाख रुपये तक के ब्याज पर टैक्स बेनिफिट ले पायेंगे|

मैं समझ सकता हूँ की यह विषय थोडा पेचीदा है| इस पोस्ट के अन्दर समझाना भी काफी मुश्किल है| अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पढ़ें|

पढ़ें: होम लोन लेने से पहले इन 6 बातों का रखें ख्याल

आप इस विषय में विस्तार से इस पोस्ट (अंग्रेजी) में पढ़ सकते हैं|

Filed Under: Financial Planning, Loans, Tax Planning Tagged With: home loan tax benefit in hindi, section 24, section 24 of income tax act in hindi, section 80C, section 80ee, आयकर की धारा 24, होम लोन टैक्स बेनिफिट

कहाँ करें निवेश: Tax-Saving Fixed Deposit Vs. ELSS in Hindi

Last updated: नवम्बर 11, 2018 | by दीपेश Leave a Comment

वित्तीय वर्ष का आखिरी तिमाही यानी की टैक्स सेविंग सीज़न, यहाँ पर ज़्यादातर लोगों को टैक्स बचाने के लिए कहीं न कहीं निवेश करना होता है|

शायद आपको भी करना हो| ऐसे में आप कहाँ निवेश करेंगे?

पिछले कुछ लेखों  में मैंने पीपीएफ (PPF), ईएलएसएस (ELSS), एनपीएस (NPS) इत्यादि पर चर्चा करी है| साथ ही इस बात पर भी चर्चा करी की किस प्रकार के निवेशक को कौन सा निवेश ज्यादा भायेगा|

इसी सिलसिले में हम आज चर्चा करेंगे टैक्स-सेविंग फिक्स्ड डिपाजिट (Tax Saving Fixed Deposit) और ईएलएसएस पर| जानेंगे अंतर और देखेंगे की आपको क्या करना चाहिए|

पढ़ें: PPF vs. ELSS

पढ़ें: PPF vs. NPS

इस पोस्ट में, मैं कर-बचत फिक्स्ड डिपॉजिट और ELSS की तुलना करूँगा।

कर बचत फिक्स्ड डिपाजिट (Tax Saving Fixed Deposit in Hindi) क्या है?

Tax-saving fixed deposit (कर-बचत फिक्स्ड डिपाजिट) एक साधारण फिक्स्ड डिपाजिट की तरह ही होती है|फ़र्क सिर्फ इतना है की इस FD की अवधि 5 वर्ष होती है। साथ ही, निवेश करने के लिए आपको आयकर की धारा 80C के तहत कर लाभ मिलता है|

और हाँ, आपका पैसा 5 साल तक लॉक-इन (lock-in) रहता है| इसका मतलब की आप 5 साल तक अपने पैसे को वापिस नहीं ले सकते|

जो भी ब्याज आपको मिलता है, उस पर आपको अपनी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होता है| सभी फिक्स्ड डिपाजिट में ब्याज पर टैक्स देना ही होता है|

पढ़ें: ब्याज पर कितना टैक्स देना होता है

ईएलएसएस (इक्विटी लिंक्ड बचत योजना) क्या है (ELSS in Hindi)?

ELSS एक प्रकार का इक्विटी म्यूचुअल फंड है । आपका निवेश 3 साल के लिए लॉक हो जाता है ।

पढ़ें: ईएलएसएस के बारे में कुछ दिलचस्प बातें

Tax Saving Fixed Deposit vs. ELSS in Hindi

ELSS और टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट्स दोनों अलग उत्पाद हैं।

ईएलएसएस एक इक्विटी  (equity) निवेश है| FD एक डेब्ट (debt) निवेश है|

ईएलएसएस में 3 साल का लॉक-इन है| टैक्स-सेविंग फिक्स डिपाजिट में 5 साल का लॉक-इन है|

ईएलएसएस में आपको निवेश को बेचते समय कोई टैक्स नहीं देना होगा| ELSS में आपको निवेश बेचने पर होने वाले मुनाफे पर 10% टैक्स देना होगा| Long Term Capital Gains Tax at 10% on sale of ELSS units.

फिक्स्ड डिपाजिट के ब्याज कर हर साल टैक्स भरना होगा|

Tax Saver FD और ELSS में रिटर्न किसमें बेहतर हैं?

टैक्स सेविंग  एफडी निश्चित रिटर्न प्रदान करता है। जब आप निवेश करते हैं, तभी आपको पता होता है, की आपको रिटर्न कितना मिलेगा|

ईएलएसएस के साथ, अस्थिरता के लिए तैयार रहें । रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है| आपको घाटा भी हो सकता है| परन्तु टैक्स-सेविंग FD से बहुत अधिक रिटर्न भी मिल सकते हैं’|

कम लॉक-इन के चक्कर में गलती न करें (Do not fall for lower lock-in)

ELSS के कई समर्थकों का यह तर्क है कि ELSS में सबसे कम लॉक-इन अवधि (3 साल की) है। किसी भी और टैक्स बचाने वाले निवेश में इतना कम लॉक-इन नहीं है|

मेरे अनुसार यह सोचने का सही तरीका नहीं है| साथ ही यह बात कुछ हद तक ही ठीक है|

उदाहरण के लिए, भले ही ELSS की लॉक-इन अवधि 3 साल है, इसका मतलब यह नहीं है कि ईएलएसएस 3 साल के लक्ष्य के लिए उपयुक्त हैं। ईएलएसएस एक इक्विटी उत्पाद है| बशर्ते लॉक-इन केवल तीन साल हो,इसका मतलब यह नहीं है की आप तीन साल के लिए ही निवेश करें| मेरे अनुसार अगर आपको किसी भी इक्विटी उत्पाद में निवेश करना है, तो 7-10 साल का लक्ष्य होना चाहिए|

ELSS में प्रत्येक निवेश 3 साल के लॉक-इन के अधीन है। पीपीएफ (15 वर्ष) और यूएलआईपी (5 वर्ष) जैसे अन्य उत्पादों में लॉक-इन को पहली निवेश की तारीख से गिना जाता है। इसलिए, यदि आपके पास 10 साल का पीपीएफ खाता है, तो आपका नया निवेश केवल 5 वर्षों के लिए लॉक होगा।

वैसे, 3 से अधिक वर्षों के लिए ELSS में निवेश करने में कुछ भी गलत नहीं है।

आपको क्या करना चाहिए?

पहले तो अपने पोर्टफोलियो का आंकलन करें| अगर आपके पोर्टफोलियो में आपको इक्विटी की ज़रुरत है, तो ईएलएसएस में निवेश करें|

अगर किसी डेब्ट उत्पाद में निवेश करने की ज़रुरत है, तो टैक्स-सेवर फिक्स्ड डिपाजिट में निवेश कर की सोचसकते हैं|

पर हाँ, अगर किसी डेब्ट उत्पाद में ही निवेश करना है, तो एक बार पीपीएफ के बारे में भी सोचे|

पीपीएफ में ब्याज पर टैक्स नहीं देना होता| फिक्स्ड डिपाजिट में ब्याज पर टैक्स देना होता है|

बस एक परेशानी है की आपका पैसा 15 साल तक के लिए अटक जाता है| पर यह एक नए खाते के लिए है| अगर आपके पास पीपीएफ खाता है जो पहले से 10 साल का है, तो आप पीपीएफ खाते में जो निवेश करते हैं, वह केवल 5 साल के लिए लॉक होगा।  ऐसी स्थिथि में, 5 साल की टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉज़िट निवेश कीज़रुरत नहीं है|

20181111_PPF vs ELSS vs  Tax Saving Fixed deposit PPF टैक्स बचत फिक्स्ड डिपाजिट hindi

पढ़ें: इनकम टैक्स बचाने के 35 तरीके

Filed Under: Mutual Funds, Tax Planning Tagged With: Elss in hindi, section 80C, tax-saving fixed deposit, Tax-Saving Fixed Deposits  VS  ELSS, ईएलएसएस क्या है

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